श्री राम कथा | राम नवमी विशेष | SB 9.10.2 | 10 Apr 2022 | Juhu | Srila Gopal Krishna Goswami Maharaj

Srila Gopal Krishna Goswami Maharaj recounts Rama's life from exile to his reign in Ayodhya, emphasizing dharma and self-sacrifice. Ram Rajya is presented as a society free of suffering, governed with righteousness and love. The speaker stresses that chanting divine names and practicing bhakti transform the heart and cultivate inner peace.
Chapters
ओम नमो भगवते वह सुदेव म भगवते वह भगवत भक्तों का हार्दिक स्वागत। अब जानते हैं की आज बड़ा i am xcro xcro jan to a nine centocarटेn 10 यापी भगवान शा साक्षात ब्रह्म मायो हरि हम शाम सेना चतुर दगा opottbrtitasurे राम नाम भय था। भगवान श श ब्रह्मा मयूरी अमचंपसेना चतुर धागा a susuraramalaxnभart iti saya गवान जमशेर चतुर धागा wtवnथाsraमाल्मन भार म्या
देवकां द्वारा प्रार्थना करने पर परम सत्य भगवान अपने अंश तथा मंचोदेवी के साथ साक्षात भरत हुए। उनके पावन नाम थे राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रु। ये सुबिखाकवथाअठारह दशक के रूप में 400 रोगों में बरकत हुए। भगवान रामचंद्र तथा उनके भाई, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रु ने ये सभी जीव तत्व न होकर विश्णु तथ है। पूर्ण उत्सुक भगवान अलेका लोगों में अपना विस्तार करते हैं। अद्वैत बच्चों को बना। यद्यपि वे सभी 1 ही हैं, किंतु विश्व, रूप एवं मवदारहोहै, जैसा कि प्रमुख सविता में पुष्टि की गई है, रामालोगदिशुकलमनिय अतिष्ठान भगवान अनेक रूपों में विद्यमान है, यथा राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रु में और ये रूप उनकी सृष्टि के किसी भी कोने में स्थित हो सकते हैं। ये सभी रूप स्थाई रूप से, साक्षिक रूप से, ईश्वर की दृष्टि रूपों में विद्यमान रहते हैं और ये समान शक्तिशाली अनेक दीपकों की खुले होते है। भगवान रामचंद्र, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रु में ये सभी विश्वकप होने के कारण समान शक्तिशाली है। देवताओं के प्रार्थना करने पर ये महाराष्ट के पत्र बने। धनवाद दोरा देवताओं द्वारा प्रार्थना करने पर परम सत्य अपने अंश तथा अंशों के भी अंश के साथ साक्षात प्रकट हुए। उनके पावन नाम के नाम के, राम, लक्ष्मण तथा शत्रु। इसको विख्यान का बता महाराज के पुत्रों के रूप में 400 रू
myganaa jashikisnac hi kisaan तो हम के 10 वे सदन में 2 दिखाए हैं, जिनमें राम जी की लीलाओं के विषय में अफगान सुनाई दे रहा है, पीछे नहीं दे रहे, नहीं बाइ। तो श्रीवर भगतन के नौबिसगन में अब 2 अध्याय प्राप्त करते हो। इसमें वन राम के विला का वर्णन। इस नौबसनमें शुकरेगुस्वामी ने कहा कि पहले अनेक 4 या 2 ने बवाना लीला का वर्णन कर दिया है। मैं सारा गहराई से लीरा का वर्णन नहीं करना चाहता। और शिव के दूसरे स्तन में वन राम के विषय में गार प्राप्त होता है। यहाँ भगवान राम कौन है? पुरम भगवान और फिर पांचवे स्कर में हवाले राम के विषय में चर्चा है, वहाँ ये साबित किया गया है। राम कौन है, ै भगवान राम कौन है? स्वयं भगवान और भगवान प्रकट होते हैं। जब देवता इत्यादि प्रार्थना करते हैं कि आपके प्रगट होने की बहुत आवश्यकता है। भगवान राम प्रकट हुये थे युग में और भगवान राम के विषय में। 2 बिनने आप राई से या बात कर रहे हैं, तो भगवान राम पर थे। भाइयों के साथ। ऐसा ऐसा 4 का है। ये हैं भगवान जी। इस राम चंद्र की विधा के विषय में कहते हैं। अब 1 व्यक्ति ये सोचते हैं। भगवान राम का कोई रूप नही है तो वो भगवान राम के लियम को समझ नहीं पाते। अगर हम व राम के विषय में यान चाहते हैं। विज्ञान से क्या करना चाहिए? हमें प्रभाविक प्रतिनिधि के द्वारा विज्ञान काम करना चाहे। ऐसे तो 2 प्रसिद्ध है जिनमें आप वन राम के विषय में पढ़ते हैं। 1 की रचना दूसरी धासेकीहै दूसरा बाद में पापा जी ने कहा है कि भगवान बाल्मिक की जो रचना है वो ज्यादा ठीक है, ज्यादा सच्ची है रोमान में और मेकिंग रमायन में मायवरिस्भावनहीं भागे और ये जो वर्णन है तो वालमिकी वालमिकी वालमिकी ने 60 हजार साल तक वन के चिंतन बवलनाचेंतनकिया था वाल्मिकी वाल्मिक वो वो पूरा काम कर रहे है। और इस प्रकार ै तो 1 दिन नारद मुनि वहां से गुजरने जा रहे थे और जो वाल्मिकी था वो हर प्रकार के पाप कार्य में जुड़ा हुआ था वाले पेड़ के नीचे पीछे छुपा था तो उसे देखा नारद मुनि को आते वीना के साथ रुको मुझे जो पैसा है तुम्हारे पास सब मुझे 2 नहीं दोगे तो सो तुम मेरे से क्यों मांगे मुझे क्यों मार? मैंने क्या किया मेरा कर्तव्य है हरेक को लूटना हो हर धर्म को देना तो तुम्हें मेरे से पैसा क्यों लेना है मुझे क्यों हाय मैं ठगा हूँ क्योंकि इसी ठगने के द्वारा मैं अपने खानदान को चलाता हूँ। तो इसलिए मैं तुम्हें भी ठगना चाहता
हूँ
ये तुम ठागरे जानते है इसका पाप का परिणाम भी होगा और तुम मेरा कारण ठगे हो लोगो को मारते हो जो मैं हूँ बन रहा हूँ यू कर रहा हूँ पत्नी बच्चों को संतुष्ट कर रखने के लिए, तो वो भी पाप का हिस्सा मुझे स्वीकार करना पड़ेगा ने हा तुम ले पूछ जाकर रिश्तेदार पत्नी और बच्चे तैयार है पाप के हिस्से को स्वीकार करने के लिए डाकू तो उनकी खुशी के पूछ के आओ। तो उसके बाद में विचार था ऐसा कोई चापलूसी कार्या कर वो कहेंगे जाओ पता करो बोले तुम मान लो इस पेड़ के साथ और जाके पूछो अपनी पत्नी से बच्चों से पाप का हिस्सा स्वीकार करने को तैयार है। तो बालक ने राजमुनी को पेड़ के साथ बांध दिया और गए पत्नी और बच्चों से बात करे। मुझे आज ही पता लगा है कि जो पाप में कर रहा हूँ उनका परिणाम मुझे भुगतना पड़ेगा। तो मैं तुम्हें बीवी बच्चों को खुश करने के लिए कार्य कर रहा हूँ। तुम करोगे पापा हमने तुम्हे थोड़ी खाता चुरा हो, हमने तो नहीं खाता तुम्हे तुम्हारा फर्ज बनता है। तुम वे पत्नी और बच्चों की देखभाल तो बाद की समझ गए कि वो पत्नी और बच्चे पाप का हिस्सा तैयार और छुड़ा दिया। तुम सच बोल रहे थे मैं दूसरों के लिए पाप कर रहा हूँ वो पाप का हिस्सा स्वीकार करने तैयार नहीं है। तो मुन्नी ने कहा मनसर का उच्चालनकरोामुनी ने उन्हें इतने बुरे काम में जुड़ गए थे। वो भगवान राम का लाभ नहीं ले सके। जब उन्होंने बने के द्वारा शिक्षा प्राप्त की हो क्या शुरू किया इतना पाप किया था कि मारा मारा मारा मारा क्या बन गया। फिर उन्होंने 60 हजार साल तक भर का चिंतन किया था। फिर उन्हें शक्ति प्राप्त हुई जिसके द्वारा उन्होंने राम की सुंदर लीलाओं का वर्णन किया। तो बाल में कोई ज्यादा वचन देखे और प्रॉपर्ली देखा है? पढ़ना है। तो 92 पर। तो अगर रात की दीदाओ का वर्णन वानिकी करते हैं रामायण में। तो इस नौवे में, से में कह रहे हैं रे आत्मगरीव्यक्तियों ने राम की िधाओं का वर्णन कर दिया है। मैं केवल सुषेपमेंहीकरूंगा आप देखे चेतन। और चेतन भगवत ने अगर किसी लीला का वर्णन कृष्ण का ने किया। गहराई के साथ बरामदा ठाकुर का वर्णन उसी प्रकार यानी देखे हो क्योंकि भगवान राम के जिलाओं का वर्णन वो हो गया है। तो इसलिए वह 92 गेंद ले। इसलिए भगवत के रूप में जिलाओं का वर्णन हो गा। तो भगवान राम कौन है स्वयं भगवान है। भगवान जब प्रकट होते हैं तो क्या धीरे धीरे पट है जिसकी तुलना कोई करने जन्मा मा में जन्म होना। 2 उन्होंने क्या है दिव्य भगवान जो लीला है भी दिव्य है भगवान प्रकट होते कैसे और साधु धर्म और संस्था पदार्थ किसी धर्म के भगवान राम की लीला है, उस है। तो यह या युवान राम उनके भाई क्या है? सब विश्व सत वर्ष है। तो जैसे कि 1 मोमब जलती है, उसी प्रकार भगवान अपना विस्तार कर दे। और है तो इस लोक में, इस खाके में ताके में जी की के द्वारा व सुविधा के लोग का वर्णन है। 7 वेतन चूत बना दी। भगवान जो हैं उनके छूता क्या कभी गलती नहीं करता। कभी कोई गलती नहीं हुई। रूप वो अपने आप को अनेक रूपों में से वो जैसे की सिकंदर के रूप में। पर क्या आले पुरुष ले पशु। तो भगवान जो हैं अपने आप को सर सकते हैं। कभी वह निराकार है उनको रूप रही है। तो ब्रह्माजी ब्रह्म स्मिता में भगवान के अनेक गुणों का वर्णन है। वो अध्यम पुराना पुरुष आज जो हो क्या हो सबसे पुराने पुरुष कैसे भगवान हैं? सबसे प्राचीन और देखे कैसे जवान अगर आप भगवान को समझने का प्रयास करोगे विधि शास्त्रों के अध्ययन के द्वारा। तो समझ पाओगे भाग भाग जाओगे। फिर आप भगवान को समझ शब्दों में अगर भगवान को समझना चाहते हो तो क्या है उपाय भाग होगी गीता में भगवान उन्हें इशू की चर्चा करते हैं। अंदर क्या कहते है भक्तियां? और भगवान जो हैं उन्हें आप समझ सकते है किस माध्यम से, भक्ति के माध्यम से। तो अगर आप सोचो की शास्त्र को पढ़ लेंगे, उसके द्वारा भगवान को समझेंगे। यह सम्भव है। भगवान को समझना है। तो क्या है माध्यम से रूम के साथ ही नाद से रोग के भी आप द्वारा वर्गो नहीं संभल सकते। कैसे सेवा के माध्यम से। तो परम भगवान पर होते हैं अपने साथियों के साथ। भगवान के अनेक साल है। आप उनकी कोई गुदगिदी नहीं कर सकते। कि बाप कहा जैसे कि अगर आप सागर के पास खड़े हो तो आप सागर की लहरों को गिन सकते है। इसलिए भगवान के अनेक अवतार हैं जो पुराने अवतार है का वर्णन श्रीमद भगवत में से दूसरे स्तन में पांचवें में नाम के लिए राम का वर्णन है। और में और परम भगवान प्रकट हुए थे। और किसके पुत्र थे वो बाज दश्ते लगभग से 300 पते थे को सारे 300 पते हुए हैं 4 उस बीमारी और कई साल में 3 और इनकी बड़ी बड़ी संतान थी कोई था तो रामचंद्र जी राज सिंह से बैठाने की तैयारी हो रही थी और योध्या में पूरा या सजा था बंद का पुरा था सजा वादा पूरा और भगवान राम को राजगति में बिठाने वाले थे बेटा राम राजद निलाम जो थे उनको पूरा हाल, समाज पूरी प्रजा, उनके उनके पूरी प्रजा को पूरा प्रेम था भगवन पूरा विश्वास था रामचंद्र आज भी हम राम राज्य की चर्चा करते हैं को राम जी के राज्य के समय समाज में किसी प्रकार का कष्ट नहीं था तो में पूरी तैयारी हो गई थी भगवान राम को राजद पर थोड़े समय े कई 11 पत्नी 1 समय केकई ने का सहयोग दिया था मना उंगलियों में तकलीफ की बीमारी हो गई थी। तो अपने पति की बहुत उत्सास है सेवा के पति ने पूछा मैं कुछ कर सकता हूँ तुम्हारे लिए। और पती ने। हा ये समय नहीं ठीक समय आने पर मैं समान से तुम्हें 1 इच्छा दूंगी जिसको पूरा कर लेना तो है क्या कहना। जब पुरे अयोध्या में पुरे अयोध्या सजा था और सब उम्मीद करते थे कि अगले दिन राज के कौन बैठेगा। तुम्हें याद है, तुम ने मुझे वादा किया था। मैं जो भी मांगूंगी आप पूरा गोल, मैं चाहती हूँ कि मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे भारत को राज गली ो उराम को भेज। 2 वार्मे और होशियार थे पापा जी ने 1 लक्ष्य में कहा 1 बड़ी होशियार थी उसे पता तो पता था कि अगर भारत में राज्य करना है किसी इंड्यूस के बिना उनको राम को लंबे सफर के लिए वहां से लेना पड़ रहा है। क्या गया 14 साल के लिए, मैं चाहती हूँ तुम ना को बर्बाद नेता पर, क्योंकि उसकी इच्छा थी कि उनके बेटे का राज्य पूरा स्टैब्लिश हो जा है। वो सोच थी अगर 23 साल के ले जाएगा तो नही सीन कटटा करके वापस आ जाएगा। मेरे बेटे को हटा देगा 14 सालों के लिए आप को बदमाश में भेजो और मेरे बेटे भारत को क्या सुनाई है। उनका लगभग हार गया। उन्हें कभी उम्मीद नहीं की थी कि उनके गेट पर भी इस प्रकार का व्यवहार करेंगे। और पर प्राचीन समय में वचन था। उसे तुम भगवान राम ने वचन दिया था किसे तुम जो भी मांगोगे वो मैं पूरा करूँगा। तो दशा। जब सुना चाहती है राम को बलवास में भेजा जाय। 14 सालों के लिए तो बहुत दुखी थे, आश्चर्य हो गए थे। इस प्रकार की इच्छा प्रकट हो गए। उन्होंने राम को बुलाया, राम 14 सालों के लिए वनवास में जाओ। जंगल में हम ने क्या किया? राम ने यह नही कहा पिताजी, ये मैं कैसे करूँ? पूरा अयोध्या सजवा है और उम्मीद रखता है। मुझे राजवेदी कल प्राप्त होगी हो? ये बड़ा कठिन है? और राम ने पिता के आदेश को क्या क्या? ठीक है, मैं घर से घर छोड़कर चले जाऊँगा। चावल साहब बरबाद तो भुने फार्स बुरी कहते हैं उस व्यक्ति को भगवान बुला सकते हो में 6 प्रकार के गुण हो, सीमा का, ये छे प्रकार के गुण, ऐश्वर्या हमारे सबसे धनी व्यक्ति हैं भगवान जो है सबसे धनी है। जान के पास सबसे ज्यादा ध्यान दे गया 2 प्रकार के 11 होते है बहुत ज्याद और बहुतिज्ारकीकभी नहीं है पर धान है ऐश्वर्य से, समग्र से सबसे धनी, सबसे पर, सबसे ज्यादा ज्ञानी और सबसे ज्यादा था हमारे बार ज्ञान है ज्ञान का उपयोग नहीं करते तो बयान और सबसे बलवान जिस व्यक्ति में छे पकागे गुल असीम मात्रा में हो मुझे भगवान बुरा तो क्या पूरा पूरा द्या सजा था आज के दिन उसको बिठाने लगे थे। और जब पिता ने कहा चले जो 14 साल के बनवास में तुरंत है और ये असली बाग तो सी माता के गुलने भगवान में ही प्राप्त करते हो। आज जहा आप देखते हो व्यक्ति के दावा करते हम भगवान है उनका आजकल जो है समर धारित नहीं होता और जो 6 गुन है सीमा मे प्राप्त है। तो भगवान राम जैसी पिता ने कहा जाओ भगवान तुरंत ही मान गए भारत जो उनका भाई था उनका राम से बड़ा स्नेह था। और जब ग्राम जीरे तैयारी की जाने के लिये तो ज मै था भगवान की तरफ हो गया दिन रात रहते थे राम जब सीता की से विवाह हुआ सीता के पिता ने ये कॉम्पिटीशन रखा था कि जो व्यक्ति इस धनुष को तोड़ सके उसी को उनकी बेटी दी जाएगी। जो धनुष था बहुत भारी था उसे उठाने के लिए 300 व्यक्तियों की आवश्यकता भी और राम जी गए धनुष तोड़ने के, उन्होंने इतनी सारी से तोड़ दिया जैसे की धरने को तो स्वयं भगवान है रे साली से क्या मैंने धन को तोड़ दिया। धन इतना भारी था उसे उठाने के लिए कितने भक्तों की जरूरत थी। ना भाई था राम से गधे को तोड़ता है उसे तोड़ा तो जब लक्ष्मन को पता लगा कि उनके भाई राज गदी में नहीं बैठेंगे और भारत बनेगा को लक्ष्मण में जाऊंगा। सीता को जब पता लगा कि उनके पति को बनवास में जाना है 14 साल के तो सीता ने ग मैं जाऊंगी और बराम ने कहा तुम्हारे बड़े नाजुक पाव है तुम कहाँ चलोगे नंगे पैर से नहीं मैं जरूर जाऊंगा। शीला ने अनुभव किया की उनके लिए कोई खास काम नहीं था, घर में लक्षमन इतना से था, लक्षमन खुदी सम जाते थे। अब राम क्या बोलेंगे अबराको क्या चाहिए। तो 1 दिन सीता ने नागर राम से कहा मेरी तो कोई जरूरत नहीं है इस घर में जो काया में करने जाती हूँ लक्ष्मण करने और लक्ष्मन आपके हर इशारे को संभलता है तुम्हें मेरे दूध का। फिर राम जी संकट में थे अगर वो लक्ष्मण की तरफ से बोलते हैं कोई पत्नी खुश नहीं होगी उन्होने कहा गुरूजी के बात। गुरु जी ने कहा कि घरेलू काम है वो सीधा सीता को करने दे और जो कहा है युद्ध के संबंध याली वो उसके देर कौन करेगा करेंगे। तो इस प्रकार शांति से आगे बढ़े तो वो आगे बढ़े और उन्होंने 14 साल तक। याद रखिए ये जो अगर आप किसी साधारण व्यक्ति से पूछो रावण का क्या परिचय है? क्या? क्या सुनने में मिलेगा असुर जो कुमारस थे ब्रह्मा जी के पुत्र, उन्होंने खास शक्ति प्राप्त की थी, वो बड़े वजे से हो गए है कुमार से कहाँ पहुँच गए वो पहुंच गए बोली कुंदर धाम में 6 द्वारों से गुजर के चले गये और किसी ने उन्हें रोक। जब वो सातवें दरवाजे पर पहुँचे तो वहाँ 2 द्वार बाते का द्वार बांध दे उन्हें रोक दिया है। बच्चे का जाने तुम्हें तुम्हें अन्दर जाने का कोई अधिकार नही है। तो वो बोले रोक क्या तुम कौन होते हो हमें रोकने के लिए, हमें इतना आनंद आ रहा है भगवान के धाम में प्रवेश करके तुम कह रहे हो हम अंदर नहीं आ सके तो हम तुम्हें श्राप देते हैं। तो ये जो वर्तल हो रहा था कुमार हज का, जय विजय भगवान सुन रहे थे भगवान ने जय विजय ने अंदर आने से रोक दिया भगवान के धाम में हो जो। तो कुमार से देखा भगवान का बड़ा गहरा सम्बन्ध था इन वालों के साथ, क्योंकि चर्चा होनी थी जय विजय की राज। तो कुमार जो उठे ने देखा कि दिस नेह के साथ जरूरी है। तो कुमार ने सोचा हमने गलती कर दी है। क्या गलती ने श्राप नहीं देना था ये भगवान के भगवान के बहुत प्रिय। तो उन्होंने कहा कि हमने गलती कर दी है, हमें श्राप नहीं करना चाहता। तो भगवान ने यह मेरी इच्छा है, ये मेरी इच्छा थी क्या कि तुम ये श्राप 2 क्योंकि परम भगवान प्रकट होने लगे थे एस जगह में भगवान जो प्रगट होते हैं वो गीराऊ का वन्दन करते हैं, किसके साथ गीला करते हैं में भगत। तो देखा जाय रावण जो था ऊंचे कोटी, तो कुमार से, वो 2 श्राप वापस लेने को तैयार थे, भगवान नहीं मेरी इच्छा थी श्राप 2, तो भगवान ने कहा क्योंकि ये जो द्वारपाल थे कर पंखा जरा थे, उनका बड़ा गहरा सम्बन्ध था हो भगवान ने का तुम मैं चाहता हूँ कि तुम ली बाद वापस बोल रहा है। तो 7 जनम ले सकते हो, भग 3 जन्म ले सकते हो। तो जाए क्या देश है जल्द से जल्द बोले सा में जाकर। वही लीला को सरल बनाना लौटा। तो उन्होंने कहा मैं सूर बनने। 2 तो रावन बन गए क्योंकि और इस लीला में गाँव गया। विजय ने यही कहा था। अगर आप हमें श्राप देना चाहते हो तो शराब दीजिये पर 1 बार चाहिए हमें क्या ये हर लीला में हम 24 घंटे आपका, स् यह होती है भारतीय 24 घंटे हो न बनकीरमृतसिंधु में अनेक नियम है क्या पॉइंट सदा स्मरण करो और कभी किशन को भूल नही। तो उन्होंने स्वीकार किया कि हम क्या बनेंगे सूर बना है क्योंकि इसमें भगवान का चिंतन कर सके देखा जाए। राहुल जेताओकयादाभगवान के, तो भगवान वाले जाता की और सीता सा है और भगवान के ने। जब राम ने सेतु के पास जाना था तो उन्होंने सेतु कैसे बनाया? उन्होंने पहाड़ की चोटियों को लेकर सागर में फेंका और अक्सर सागर में फेंकोगे तो वो डूब जाती है। भार राम थे, उन्होंने जब पेड़ की चोटियों को फेंका तो ये पत्थर जो है डूबे थे। भगवान की दिव्य शक्ति है वो प्रभा जी कहते हैं 2 प्रकार की शक्ति होती है दिव्य बहुत शक्ति द्वारा, आप कोई काम कर सकते है आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा, वे संभव करे वो भी कर सकते है। तो भगवान जाने थे उन्हें सूचना मिल गई थी ये जो सीता है उसे राव ने क्या किया अपहरण कर दिया तो असल में असली सीता को कोई नहीं कर सकता। के दक्षिण भारत की यात्रा में थे और उन्हें 1 ब्राह्मण ने दिया बारबू उनके घर पहुंच गए 1 बजे प्रसाद खाने के लिए, उन्होंने देखा कि ये ब्राह्मण होने मंजन दिया है प्रसाद खाने के लिए, तो कुछ प्रसाद तैयार है। ये ब्राहमण बड़ा उदास नजर आ रहा है। और तो उन्होंने पूछा और तुम ने मुझे प्रचार के लिए बुलाया था। पर अभी तो कोई तैयारी नहीं है। ब्राहमण ने बाजार से मुझे बुलाएगा तो बात से पूछा तुम उदास क्यों नजर आते हो? क्योंकि सीता को उसने सीता को, रावण ने छुआ था राम जो सीता राम ने, रावन ने कि क्या की बकरी सीधा है उसे कोई छोड़ नहीं पाया बात को, ऐसी सीता को किसी ने नहीं छुआ। तो भगवान गए थे बदवास और राहुल ने रावन का र् किया जो की लोगों को रुलाता है क्योंकि दूसरों को कर देता है ये रावल का, मूल का, सब को। जब राम ने सुना की सीता की खफसूरजीकेविषयमें, उसकी इच्छा हुई कि इच्छा हुई कि उनको पद रूप सका, तो भगवान राम ने अनेक अदभुत विलाएं प्रकट की और उनके फेंकने पर जो बहार की चोरियां हैं वो भी दुबले और जो जो विज्ञानी है वो कैसे नहीं कर सकते या की पार की चोरियों का खेल हो और दुबे पर भगवान की देवी शक्ति द्वारा यह संभव है। तो मुझे पता लगा कि सीधा श्रीलंका में है। तुमने क्या किया श्रीलंका और व भगवान नाम का युद्ध हुआ, युद्ध हुआ राम सेना के द्वारा, तो भगवान राम की जो सेना थी उसमें जरूर चलाने की योग्यता वन 2 व्यक्तियों में थे फिर में राम में और बाकी जो बंदर की उनके बाद कोई शक्ति नहीं है जो जो बाकी, जो भक्त वो क्या थे उठा सकते थे बाहर की चूडियो। भगवान राम जब प्रकट हुए हैं वो प्रगट हुए हैं दिव्य रूप में और उन्होंने दिविलीलापगीतोअगर हमें किसी को भगवान के रूप में स्वीकार करना है, हमें क्या देखना चाहिए हमें यह देखना चाहिए कि उनके विषय में शासन व ज्ञान चर्चा है और वो कोई अदभुत ही प्रकट कर सकते हैं। तो भगवान राम हुआ, भगवान राम को युद्ध हुआ में राम के और भगवान राम के बाद क्या था? तो भगवान गीता को भी आप देखते हो कि अर्जुन भगवान की विजय होगी और ये है देवी शक्ति दिव्य शक्ति होता है और बहुत दिव्य शक्ति है तो आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं। तो भगवान राम की सेना में 2 व्यक्ति थे जो जरूरी चला और अंत में उनकी उनकी भगवान राम फिर सीता के साथ वापस लौटे है योध्या में लौटे उन्होंने क्या, उनके जो भाई थे भारत, उन्होंने राज्य किया था 14 सालों के लिए और जो उन्हें रखा था कहा ना मेरा सर में और भारत में इतना स्नेह था कि भारत में उस 14 साल के लिए, उस गदी में वो बैठे और बाली बाली जो खाते थे, अपने शरीर को ढकते थे, किसी को ढकते थे। पेड़ के पेड़ के छाल के द्वारा भवन ग्राम लौटे। अयोध्या उन्होंने पूरा पूरा राज्य था और भगवान राम ने उन्हें देखा क्योंकि भाई ने राज्य किया पर राज्य किया उनके, उनके व्याप गया था उनका प्रेम उनके भाई के साथ। तो भगवान राम जब वापस लौटे तो अयोध्या में उन्होंने राज्य और उनके राज्य के समय लोग इतने सुखी थे पढते भगवान राम के राज्य के समय कोई बड़ावा पर नहीं, कोई बड़ावा पर नहीं और कोई रोग पीड़ा नहीं और निति समय भी आप खुद से भी आप खुद चुन सकते थे। अगर आज के भाषण में मिलते समय आप खुद सुन, सकोगे क्या परिणाम होगा, सारे संचार बंद हो जायेंगे। तो भगवान राम के राज्य के समय किसी भी प्रकार की कमी नहीं होती और आप प्रकार की आवश्यकता पूरी भाषा में प्राप्त हो रही थी। तो वो लोग सुखी थे वो खुद ही खुद चुन सकते थे। तो भगवान राम राज्य में 1 ब्राह्मण था जो कि कभी खाता नहीं था प्रसाद भगवान राम के रा भगवान राम यात्र रह गए थे 2 हफ्तों के लिए, तुम जब वो वापस लौटे, लक्ष्मण ने कहा ये ब्राह्मण इतना प्रेम करता के साथ क्या आप गये थे, कोई खाया भी नहीं भूखे रहे। भगवान राम ने क्या किया, उन्होंने अपना रूप, अपनी मूर्ति ली और गाल और कहा इस मूर्ति की उपासना करना इस मूर्ति में कोई। तो भगवान ने ये साबित किया कि अच्छे विवाह के रूप में भी प्रकट होते हैं तो राम राज्य के समझे पूरा राज्य क्यूंकि हर प्रकार की आवश्यकता प्राप्त हुई है समाज में 6 प्रकार के वहन राज्य तो जो ब्राह्मण थे मगर राम ने इन ब्राहमण को बुलाकर पूछा मांगो में से कितनी जमीन चाहिए तुम को और हमें परती जमीन चाहिए क्योंकि हमें जीने चाहिए उनसे ज्यादा है जो आज के ब्राहमण को आप बोलो कि मांगो कितनी जमीन है उतना मांगो। ये जो ब्राहमण थे उनका अच्छा जो ब्राह्मण थे उन्होंने क्या कहा उतना ही 2 जिंदा की आवश्यक तो 1 समय वन ग्राम और सीता ने अपने सारे गेले ब्रामणों को मार लिया। सारे गेन ब्रामणो ने स्वीकार किया। ब्राहमणों ने कहा आप आप इतने प्रेम से राज्य कर रहे हो, की राज्य कर रहे हो, वह किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। तुम आपके शासन से संतोष है। तुम ब्रामडूनेवियागै वगैरा सब वापस कर दिया, राम जी को वापस कर दिया और सीता को वापस कर गा। उन्होंने कहा कि हम संतुष्ट हैं आपके राज्य तो जो ब्राहमण थे हमें ऐसा कि हमे कम से कम ब्रामण को वैसे स्वीकार करना चाहिए। तुम इस समय देखते हो कि पापा जी ने अनेक मदर का उद्घाटन किया जैसे कि नाव मंदा का उद्घाटन हुआ था सेवंटीफाइकौनी कई पर खुले है पापा तो राम राज्य के समय लोग अध्यन कुल की त्रेतायुग था, वात क्या था सदी इस लीला के तातपर्य कहते हैं कि ये जो सदी का अनुभव था वो आज भी आप प्राप्त कर सकते हो। अगर आप क्या करो कल ही 2 से राजन क्या है? दोष दोष है वो क्या है? तो पापा जी कहते हैं की इस कलियुग में आप वे सभी महत्व पैदा कर सकते और कैसे भगवान के दावों का तो क्या है उपाय ा। तो भाई राम नाम के रोल के नाम भाई का राम करे गले दम है रूपा भगवान के दामों के तो करियेगा में क्या करना जाए, नाम को अपनाया जा और लावा चेंतामनीकृष्ण और भगवान के क्या पढ़ते हो। भगवान का नाम तो पैदा कर सकते हो। इस कलयुग में कैसे हर नाम के बारे में और ये हम सबकी महत्वपूर्ण है। हमें के शुभ अवसर पर क्या निर्णय करा जाए वह गहराई से ना और निरे ध्यान से हराम करेंगे। इतनी तेजी के साथ क्या होगा छिहतर? लेकिन बयान तो भगवान राम के राज्य के समय सुख पूरा था वातवरन कैसे था जैसे कि सर्दी में हो। तो वो वातवरन आज पहला के हैं कैसे भगवान राम जो थे उन्हें वो बेस बनाकर जाते थे ये देखे कि प्रजा की सुखी है और किसी पर का कष्ट है उसे दूर कर देते थे। भगवान राम लाकर देखते थे कैसे शासन हो रहा है? प्रजा को किसी प्रकार का दुख तो नहीं है। प्रजा को किसी प्रकार की कष्ट यह था उनका भाव, उनका भाव था। जैसे 1 पिता अपने उल्ला देखभाल करता है वैसे ही वो देखभाल कर लेते हैं। किस की तो अगर हमें नाम राज्य चाहिए। आज आप कई बार सुनते हो। वो कहते हैं राम राज्य के इलेक्शन के समय भारत में आप पढते हो सम राज्य भाव करते हैं। ये कैसे हमने है राम का विचार करे, भगवान प्रकट होते करमेक्याहइरामकिदाा। हाय राम का उच्छारण सबसे महत्वपूर्ण है। और भगवान राम शासन के समय वो खोल जाते थे देखने के लिए समाज में किसी प्रकार का कष्ट तो नहीं है और सारे सड़कों को धोया जाता था। इसके साथ गुलाब के पानी के साथ, नाम के पानी के साथ आए सड़कों को धोया जाता था और भगवान राम खुल जाते थे। सब ठीक है और जो हो की सड़के रोज साफ किया जाता था, इसे कैसे रोज साफ किया जाता था। इन हाथियों के द्वारा हाथी के वो दैचललरसूनसे पानी निकल रहा है और भगवान
राम
खुद जाते थे। देखने के लिए अयोध्या की सफाई ठीक हो रही है। तो बाजी कहते हैं आज के वादन में कोई भी नेता तो पुरा नाजिर था। धनी। आज है राम नामेदरशुभअक्सर। वो जी क्या हम भगवान राम की पढते हैं और भगवान विला की चर्चा करते हैं। भगवान राम कौन भगवान है भगवान पर से। राम राज्य का क्या है। अगर आपको राम राज्य चाहिए तो क्या है उपाय हमें हर नाम को स्वीकार कर दे। हरि नाम के गुणों का प्रचार और लोग हर राम स्वीकार करेंगे तो क्या उसके द्वारा असली राम राज्य? तो भगवान राम की अनेक लीलाएं हैं। और भगवान राम प्रकट हुए थे। इसलिए राम राज की स्थापना और भगवान राम, उनकी जो दिलाये है, वो है बैगुल देव और भगवान जो प्रगट होते है, अद्भुत विधा प्रगडकरतेहै। जैसे भगवान प्रगट होते, उनकी भी अद्भुत ही जाती है। भगवान राम ने भी अनेक अदभुत विराम को, उन के जो भक्त हैं, अनुमान व क्या था, भगवान की सेवा, उनके मन में 1 ही भाव सा विराम की सेवा के लि। इसी प्रकार हमें वन राम की सेवा करनी चाहिए। इस कॉल के बंध में गोलिताई की स्थापना है। गोलरितायकी उपासना किया था कलयुग में, यही भगवान की जो साधन साथी है, जैसे लक्ष्मण पर बडे भाई के रूप में, पर छोटे भाई के रूप में, जैसे भगवान राम जो प्रगट हुए थे, लक्ष्मण पर छोटे भाई के रूप में, जो भगवान प्रगट हुए थे, भगवान के रूप में, तो उनके भाई कैसे प्रगट हुए थे बाद के रूप में, और यही जब प्रगट हुए मार के रूप में, उनके भाई प्रगट हुए, कैसे भगवान घोलिलाईका ओल्डर है, लाधाराजभाई का ऑर्डर है। और तो हमें जिला में उलटी देनी है, हमें स्वीकार करना चाहिए दानीराम की महिमा का प्रचार कर करना। तो आज बड़ा शुभ दिन है और आज के न आप भगवान राम की दिलाए सुनने जाओगे और 11 बजे अभिषेक भी शुरू होगा और हमें ये इंदिरा में याद बढ़ाना जाए। भगवतम लिखा है जो व्यक्ति ध्यान से सुनिएगा भगवान राम की लीला को, भगवान राम के उपदेश को, उस व्यक्ति के हृदय में इसदेश का भाव नष्ट हो जाएगा। अगर आप इरशद्वेशके भाग से बचना चाहते हो। क्या है उपाय नहेदा? भगवान राम दयालु है। और आज के श्लोक में आपने पढ़ा भगवान राम प्रगट हुए भाइयों के साथ, सब के सब क्या हैं विश् सबके सब सोयम भगवाल है। और प्रगट हुए किसे वर्गीअदगूलीला हमें नीला में रूची ने और और ये जो भाई थे, जिसके बेटे थे, और उनकी लीलाओं में रूची लेने चाहे, उसके द्वारा हृदय जो है द्वीस इर्शा इत्यादि से बचेगा तो हमें बढ़ाना चाहिए, बलाओगेक्याज्ञान भी बोलेगा हरे कृष्णा। if beigabe you speaking to you speaking to you speaking no
a।
कृष्ण महाराज ने, मेरा प्रश्न यह है कि भगवत वीके भगवान कहते है की सुख के अन्दर रहने वाला कर्मी होगी,
उसे स्थित पर कहते है।
और ऐसे ही भगवान मान चरित्र में दर्शाया कि जब उन्हें सिंहासन मिल रहा था उसी समय उनको 1 ही दिन के अंदर को बंद नबनजोहैउसकेलिए भेज दिया गया, लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में उनके व्यवहार में कोई यतकतनहीआयऔरनहीटैकई माता के प्रति योग का व्यवहार था, उनका जो रिश्ता उसमें कोई भी चेन लेकिन महाराज जैसे हमारे जीवन में सुख दुख ाददोसेहमेऔरपकी होती है, अगर सुख 1 तो उससे अहंकार बढ़ जाता है और दुख खाता है तो उससे क्रोध पर हो जाता है तो हम ऐसा कैसे कर पाए हैं? करोंगे भारती सुख और दुख में साम
से हम जो हैं बडी सरलता से प्रभावित हो जाते है। अगर ना। पड़ा तो हम दुखी हो जाते है। अगर भौतिक सुविधा प्राप्त हो तो खुश हो जाते हैं। हमें यह समझना चाहिए कि बौधिक समाज में सुख और दुख दोनों अनुभव करना पड़ेगा और वे तैयार चाहिए। दोनों को समानता से व्यवहार हो ना जाए। अगर हम यह सोचे कि वह किसी प्रकार का कशनी, कभी कभी लोग क्या कहते हैं, हम कृष्ण भक्ति में जुड़े हैं, वा ली है काश हमें क्यों आ रहा है? नहीं तो हम भूल जाते हैं कि हम सब का, पापों का परिणाम भी है। हमें भूलना पड़ेगा तो जैसे भक्ति में आगे बढ़ो, जैसे हरिनाम को प्रवित भाव से करो, वैसे हापकालुच्चरित्र है। ज्यादा सेंनशील बनेगा और जैसे सेनशील बनेगा। तो है सुख दुख। अंदर कुरु स्ितियों को सरसैसर
हरे केशकुमार
परनामारहरजइिस कुछ सालों के साधा के बाद भी अगर हम मनसे बिहार को बुद्धि की बहाना नहीं जाती है तो उसके लिए आप क्या मन से देह को बुद्धि की बात भावना भी नहीं जाती।
क्या करना चाही?
अगर आप बुखार है, बहुत काफी समय से बुखार नीचे नहीं जाता तो आप क्या करते हो? घबरा जाते हो। इतने समय हो गया, बुखार नहीं जा रहा। उसी प्रकार अगर आप देखे की हम मना कर रहे हैं और नियमों का पालन कर रहे है और गुनती नहीं कर रहे, हमें भी घबरा जाना चाहिए। इसका मतलब की हमें भी गंभीरता से प्रयास करना चाहिए। ये जो शत्रु है, आध्यात्मिक जीवन के वे और प्रयास करोगे हर कार संभव है। समस्या यह है कि आध्यात्मिक क्षेत्र में हम घबराते नहीं है, उनकी तेज नहीं है, बौद्धिक क्षेत्र में प्रोग्रेस नहीं कर रहे, घबरा जाते हैं। क्योंकि हम धान की आवश्यक ने, यह हमारी काम, हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम भक्ति की विडियो का उम्मीद है। stop stop or take a more question 2 माता जी के जी किशन जी को स सर के द्वारा भगवान को respecting the lord s लॉड पर पापा ने कहा था हम दस्तर की बजे हमें मां मैंने प्रपा से 1 प्रश्न पूछा था पो ओके से परे मतलब क्या है? भगवान को समझना है तो प्रेम से दुगो, दुल्ल, आत्म भक्तों, वन के भक्तियोग नियमों का पालन करो, उसका पालन करोगे। तो फिर राम का पूरा लाभ उठा। सा हो गए तो कुशल लेक्चर कितना देर है, चंद है। ओके 1 और प्रेशन okay nouns shou dalida।
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