विजयादशमी - श्री राम का महिमा गान | SB 9.10.3 | 24 Oct 2003 | Rajkot | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami delivers a devotional discourse on Vijayadashami centered on SB 9.10.3, a verse praising Lord Rama. He contrasts Rama's righteous rule with modern materialism and hypocrisy, arguing that spiritual knowledge comes through bhakti, not academic study alone.
Chapters
ओम नमो भगवते बासु रिवाय, ओम नमो भगवते बासु रिवाय ममभारतेवासदवाय आज जैसे आप सब जानते हो, वे शुभ अवसर है। तो आज हम 1 श्लोक को पढ़कर सुनाएंगे और श्लोक पेपर आप। बोलेंगे ये श्लोक है, ये तन के मेस से है। 10 रिहाई के श्लोक नंबर थी हमारे बाद दुराई भूली हुई हो। n n de कृष्णा के कन्या देव, श्री राधा, कृष्णा प्रधान ललिता, श्री विशाखा, हे कृष्णा करना, जा रे, अरे राम, राम जैसे आप सब जानते हो। आज विजय दस्ती का शुभ अवसर है। कई सेस कल मानते हैं, कई ने कहा की सरकारी छुट्टी कल कल है, हम आज विजय दस्वी को बना रहे हैं। तो हमने सोचा। विजय दसवी के दिन हमे भगवान रामचन्द्र जी की विल का स्मारण करना चाहिए। भागवत के इस लोक में बड़े स्पष्ट रूप से बताया गया है की भगवान राम की जो लीलाएँ हैं, ये दिव्यम हैं। और इस लोक में प्रभु पा विषय पर बल देते हैं कि हमें इस ज्ञान को उनके द्वारा साफ नहीं करना चाहिए। जिनके पास केवल भौतिक ज्ञान हो, शिक्षा हो। पर हमें उन भक्तों के द्वारा भगवान को समझने का प्रयास करना चाहिए जिन्होंने खुद अपने जीवन को अर्पण किया है। भगवान की सेवा के लिए आप सब जो यहाँ उपस्थित हो, आप सब तो भक्त हो, पर हमारा अभ्यास है। हम कई पीएटी स्कॉलर्स को मिले हैं, रूस में, अमेरिका में, भारत में भी, जिनके पास पीएचडी डिग्री वगैरह है ने राम और कृष्ण के अनेक ग्रंथों को लिखा है की हे तो कोई पुरुष थे पर भगवान नहीं मानते। इसलिए प्रॉपर्टी ने पुरे साल में इस विषय पर बहुत दिया है। भगवान गीता देवी क्या कहते हैं जनम करना चाहे ये समाचार की मेरा आना जाना दोनों ही देवी है। साधारण पुर के समान ही हमारा आना वो भी अपनी जन्म मृत के बंधन से छुटकारा राम करता है। तो भगवान राम ने इस दिन रावण को हराया। रावण का क्या अर्थ है? समझाया जाता है की रावन का अर्थ है जो की दूसरों को रुलाए, तो आज कल अगर देखा जाए। रावण की कमी नहीं है, आज कल रात की कमी है जो हमेशा यही प्रयास करते हैं दूसरों को कष्ट दिया जाए। अगर आज सारे विश्व में भगवान का प्रचार करने का प्रयास करो तो ये देखोगे की अनेक व्यक्ति आस मे आपके प्रचार में अर्चन डालने का प्रयास करते हैं, का डालने का प्रयास करते हैं। जब क्षेत्र महाबहु उन्होंने के आंदोलन को बंगाल में शुरू किया था। जब भी हमारे जो ब्राह्मण थे, हिंदु ब्राह्मण वह घबरा गए। के आंदोलन को देख कर लोग घबरा गए तो उन्होंने पूरे बंगाल में मुसलमान राजा से कह दी उनके पास गए क्या ये है? फिर उन्होंने प्रयास किया आंदोलन को रोकने के लिए, ये हमने इसलिए उधारण लिया क्यूँ क्यूँ की ध्यान में देखे तो ये देखते है की हमारे ब्राह्मण लोग भी कई बार धर्म के प्रचार में रुकावट डालने का प्रयास करते है। 1 समय 1 भगवान चेतन श्रीवास ठाकुर तो उनके घर में 1 साल के महाबली रोज शाम को केतन किया 1 साल लगा पर उन भत्तों को बाहर रख रहे थे जिन्होने जिनके हृदय में जलन की। भगवान के प्रति तो 1 ब्राह्मण था उसके हृदय में ज्यादा जलन पैदा हो गई थी। श्री वाज ठाकुर के प्रति क्यूँ इनके घर में इतना खेलपन होता है और जो ग्राम श्रद्धा वाले जो श्रद्धावन भगत नहीं थे उनको अंदर आने नहीं दे रहे थे तो उन्होंने क्या किया? सीमा के घर के सामने रात को दुर्गा देवी की परत के लिए जो बस्तों की आवश्यकता जैसे शराब की बॉटल हुई वगैरह रख लिया यह दिखाने के लिए समाज के लोग दुर्गा देवी जी का भगत तो सुबह। जब शिवा ठाकुर उठे घर के बाहर उन्होंने देखा ये दुर्गा जी की उपासना का सारा प्रबंध था। दोनो ने पड़ोसियों को सब बना कर कहा देखो मैं दुर्गा जी का उपासक हूँ पर किसी ने विश्वास नहीं किया। मैं कल रात को दुर्गा जी की पूजा कर रहा था किसी ने विश्वास नहीं किया तो 1 ब्राह्मण था उनकी निंदा करने के लिए उसने ये सब योजना बनाई थी फिर उसके बहुत गहरी बीमारी हो गयी और फिर प्रभु से उसे भी मांगी की बीमारी दूर हो जाए। बीमारी के कारण ने कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा तुमने की निंदा करने का प्रयास किया था हे वो शीवाज ठाकुर के बन गए उन्होंने न तो के व्यक्ति है जो भगवान की निंदा करते हैं उनके भक्तों की निंदा करते हैं भगवान के प्रचार में रुकावट देने का प्रयास करते है। तो हमें इन सब लोगो से तो श्रीमद भागवत में संक्षेप में शुक्रदेव को स्वामी जी ने रामचन्द्र जी की लीलाओं का वर्णन किया है संक्षेप रूप में। इसलिए क्यूँकी जैसे शुकदेव को स्वामी जी कह चुके हैं कि आपने उनकी लीलाओं का ज्ञान दूसरों से भी प्राप्त किया है कहते हैं 5000 था फूल भी अनेक और ग्रंथ है जिनमे की रामचंद्र जी की लीलाओं का वर्णन प्राप्त होता है तो राम चंद्र जी विश्व है रामचन्द्र जी उनके भाई बचपन भारत सारे के सारे जो है विष्णु तत्व है भगवान जब अवतरित होते हैं अपने साथियों के साथ अपने आप को प्रकट करते हैं और अपनी देवी लीला को करते है। तो रामचन्द्र जी राज्य अभिषेक उनका हो रहा था बिल्कुल तैयारी हो गयी थी उसी समय उनकी 3 पत्तियाँ थी महाराज की क्यूंकी 1 पत्नी ने अपने पति का सहयोग दिया था के समय को उनसे उन्हें यह प्राप्त हुआ था कि जो भी था इनकी इच्छा होगी उससे वो प्रकट कर सकते हैं। महाराज ने तो उसी समय पूछा था मांगो पर कहीं न कही भी नहीं भविष्य में तो महाराज राम का राजा विषय की तैयारी हो गयी थी और कुछ समय कई ने अपने पति को याद दिलवाया क्या याद दिलवाया याद है न आपको आपका सहयोग दिया था आपने बच्चन दिया था मेरे वर्ग का पालन करोगे आज मैं उनसे रकत करना चाहती हूँ। तो राजा ने कहा ठीक है बताओ उनको ये क्या उम्मीद थी कि यह सुनने पर आएगा 2 बार भागे महाराज राम को वनवास में भेज 2 14 साल के लिए और आज अभिषेक उनके बेटे का होना चाहिए। भारत और क्यूँकी 10 ये थे तो उन्होंने फिर पालन किया। कई कई जो थी, उनकी बुद्धि तेज थी, राजनीतिक बुद्धि थी। उन्होंने सोचा की अगर केवल यह कहा कि राज्य भिषेक बेटा क्या होना चाहिए और वही रहेंगे उसी शहर में तो फिर गड़बड़ भी हो सकती है। दूर भेज 2 और 23 साल के लिए नहीं, 14 साल के इन के बेटे के कार्य में कुछ रुकावट नहीं आई। पर भगवान के छे गुण है मात्रा में। देव के पिता जी मुनि जी ने कहा है की भगवान सब उन्ही के लिए उपयोग कर सकते हैं। जिनमे के 6 कोनो 1 समान सबसे धनी होना चाहिए, सबसे शक्तिशाली ज्ञानी त्यागी, सबसे खबसूरत, सबसे विश्व के किसी होने में चले जा। अगर नासिक व्यक्ति से भी पूछा ये भगवान सब का क्या अर्थ है? आपको बता देगा पीछे में 1 फोन क्या है? सी त्यागी भौतिक संसार में आपको कोई खुबसूरत व्यक्ति भी मिल सकता है, पर ये नहीं है कि खबसूरत व्यक्ति धनी भी हो। वो 23 महीने पहले हमने विश्व के सबसे धनी व्यक्ति की तस्वीर देखी थी। 1 जवान वो राजा है, क्या? ब्रूनी कार मिली कंट्री है उसकी तस्वीर? हमने देखी बहुत पतला है। 1 छोटा पहलवानी से और न ही वो देखने में सबसे खबसूरत था, देखने सबसे खबसूरत था। उसको इतना तो अखबार से पूछा जाए कौन है दुनिया का सबसे बड़ा धनी? यह उससे भी ज्यादा गैर बने हैं। कहने का अर्थ ये है की भगवान की तो जैसे उन से कहा बेटा तुम जंगल चले बंद में चले जाओ। 14 बनवा लो, तुरंत ही ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने ये नहीं कहा लोग क्या कहेंगे समाज का सोचेगा सब तैयारी हो गयी है। थोड़े समय का समय है, न नहीं कहा। जैसे कि भागवत में कहा गया है जैसे कोई मुख्य व्यक्ति अपने शरीर को त्यागता है, वह बिल्कुल चिंता नहीं करता। वादी व्यक्ति को मृत्यु से बहुत ही डरते हैं, बहुत ही प्रयास करते हैं। किसी न किसी प्रकार से मृत्यु को रोक दिया जाए। आजकल आप लोग बड़े बड़े भक्तों में बड़े बहुत मशीन है, प्रयास करते हैं की प्रकार अपने मृत को रोक दिया जाए और वो व्यक्ति को चिंता नहीं करता। तो भगवान ने तुरंत ही अपने पिता का के आदेश का पालन। जैसे पिता ने कहा तुरंत तैयार हो गए जंगल में जाने के लिए। भगवान अपने आप को कट करते हैं। भौतिक जगत में तो देवी लीला को परास्त करते हैं, साधारण लीला को नहीं। जैसे की भगवान रामचन्द्र जी ने दि लीला को पर दर्ज किया। जब शादी का समय था, उन्होंने बहुत बड़ा धनुष, जिसको उठाने के लिए 300 आदमियों की आवश्यकता थी, ने बड़ी सरलता के सार से तोड़ दिया। तो जैसे भगवान कृष्ण ने गरदन पर्वत को उठाया, व यहाँ के छोरी तो भगवान अपने आप को पर करते हैं। जब आप कार करते हैं तो अनेक सिरिल को प्रस्तुत करते हैं। आज अगर आप किसी के स्थान में जाओ तो क्या देखते हो? आज गुरु भगवान बुला रहा है। तो भगवानों से पूछो आज हमारे देश की स्थिति क्या है? हमारे गुरु जी कहते थे, कोई जादू के रुला पैदा कर देता है। भगवान बन गए। पर जो असली भगवान है उनमें अनेक आध्यात्मिक गुण है और वो दीदी को प्रस्तुत करते हैं। जिसकी तुलना कोई श्रद्धा व्यक्ति नहीं कर सकता। जैसे की भगवान गीता में स्वयं कहते हैं या अलग अलग समय में। दुष्कम, स्वामी, योग्य, योग, धर्म के नियमों की स्थापना करने के लिए सभी में भी कहते हैं। जूते बनाती अनंत रूपा के भगवान अपने आप को अनंत रूप में प्रकट करते हैं। चेतन गुजी इस विषय पर सनातन गोस्वामी जी को उपदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अब सागर के किनारे में खड़े होते हुए लहरों को नहीं गिन सकते, उसी प्रकार आप भगवान के अवदानों की गिनती भी नही कर सकते। तो कोई व्यक्ति यह कह सकता है। यह सुनने पर बहुत अच्छी बात है। आप जब गिनती नहीं कर सकते तो क्या करते? हम भी नहीं कर सकते। हमें क्यूँ नहीं मानते तो भगवान के तारों का वर्णन हमेशा भगवान करेंगे। इन सब के विषय में शास्त्र में ज्ञान है। जैसे कि भागवत में जी के विषय में पूरा ज्ञान दिया गया था। इस समय में भगवान इस रूप में करेंगे बुद्ध जी के विषय में भी पूरा ज्ञान दिया गया है। भागवत भागवत की भविष्य वाणी है तो इस विषय में सत्र में पूरा उद्देश्य है। हमे केवल शास्त्रों का लाभ उठाना चाहिए। भगवान के प्रतिनिधियों के द्वारा। ये नहीं कि केवल अगर हमारे पास बहुत ही अच्छी डिग्री है। संस्कृत भाषा में हो तो हम अपने आप को मान। प्रतिनिधि भगवान के माने, हमारे पास सेवा की भावना होनी चाहिए। और तो भगवान को समझ सकते हैं। तो भगवान राम जब गए, बाद में उनके साथ सीता भी गए, लक्ष्मण भी गए। भगवान ने सीता से कहा था, तुम तो साथ में राजा की बेटी हो। तुम कहाँ जंगल मे तपस्या उठा हो गए, उनहोंने नहीं थी। और जंगल में तपस्या उन्हें उठानी पड़ी। पर भगवान तो तपस्या से नहीं डरते। और कैसे? फिर भगवान ने रावण को हराया। रावण की इच्छा क्या थी सीता देवी जी को चुराने की। तो अंत में जब युद्ध हुआ, क्या देखते है कि भगवान ने उनको हराया। भगवान के सीना में कौन थे? केवल बंदर समझते 2 प्रकार की शक्ति होती है, 1 की अध्यात्मिक शक्ति दूसरी है भौतिक की। तो रावण की सेना में हर प्रकार के हथियार थे। आजकल हमारे डिफेंस के सैंट सोचते है की वो बहुत आगे बढ़ गई है डिफेंस टेक्नोलॉजी में, पर प्राचीन समय में जो टेक्नोलॉजी थी, उसकी तुलना आज के विज्ञान भी नहीं कर स। तो रामचन्द्र जी रावण की सेना में सिपाही थे हथियार के पास, और रामचन्द्र जी की सेना में कौन थे, लमनी सारे बंदर थे, और कौन थे, बंग की सेना थी। और भगवान ने इंडियन के पार कैसे गए? उन्होंने पत्थर फेंके, पर्वत के पर्वत के शिखरों को फेंका। और ये पर्वत के शिखर धूमने की वजाय में जाकर पत्थर फेंके। तो एकदम डूब जाएंगे भगवान राम ने, उनके, उनके भक्तों ने जब ये पत्रों को फेंका और पथ के शिखरों को फेंका तो डूबे नहीं वही तैरने ये कुछ कठिन कार्य नहीं है भगवान के लिए क्यूँकि ये जो अनेक लोग हैं जो हवा में तैर रहे हैं, जो भगवान की सृष्टि है, अनेक लोग हैं ये भी हवा में तैर रही है। तो भगवान राम बड़ी सरलता के साथ रावण और सब सेनाओं को, उनकी रावण सेना ने सब को हरा दिया। भगवान राम की सेना में केवल वो लक्ष्मण जी चलाना भी जानते थे बाकी जो की थी से पत्थर फेंक सकते थे। तो आज भी हम इस देश में राम राज्य की चर्चा करे क्यूंकी लोग बहुत ही दुखी हैं बहुत दृष्टि से देखा जाए तो कष्ट केवल बढ़ते ही जा रहा है और हर समय हम देखते है इलेक्शन के समय हर नेता यही कहता है हम तो वो तो हम सब को राम राज्य देंगे क्यूँ क्यूँकि रामचन्द्र जी के राज्य के समय समाज में किसी प्रकार का कष्ट किसी ने अनुभव नहीं किया। 5 प्रकार के कर हर व्यक्ति को भुगतने पड़ते हैं। 1 है जरा मन बिहार बीमार होना पड़ता है हमारे विज्ञान हमें बीमार नहीं होना पड़ेगा थोड़ा सा और दीजिये हमें और आप हम देख रहे हैं के प्रभारी से कोई अपने आप को बचा नहीं सकता न ही अपने आप को आप नेतृत् बचा सकते हैं, बचा सकते हैं, नहीं बचा सकते न ही हमें अपने आप को बुरी आयु से बचा सकते है। इसके लिए मतेकवादीव्यक्ति हमेशा यही करते हैं की बढाती पन को छिपाया जाए किसी बुरे व्यक्ति को तुम कितने जवान दिखते हो खुश हो जाता है भारत मे नही किया विदेश बालों को रंग करते हैं गिरने के पास गंजापन दूर हो जाए मेकर की 1 प्रयास किया जाता की लोगो को पता नही लगे है 3 प्रकार के कष्ट है आदि आदि का ध्यान में जैसे या फिर अनेक और कष्ट है मन बताते रहता है दूसरे व्यक्ति बताते हैं प्रकृति देती है जो सार प्रकार कष्ट है। और जब रामचन्द्र जी राज्य चल रहा था किसी प्रकार कष्ट किसी को महसूस नहीं हो पूरी प्रजा को नवाज साहब अपनी लार के समान मानते थे, पूरी प्रजा को अपनी उला के समान मानते थे उनके हृदय में यही चिंता रहती थी किसी को किसी प्रकार का कष्ट नहीं पहुंचे इसलिए खुद वो जाते थे पता लगाने के लिए किसी को किसी प्रकार का कष्ट तो नहीं और पूरी प्रजा की इतनी श्रद्धा थी भगवान ने दर्शन देने के लिए भगवान राम और दर्शन देने के बाद घर जाकर भोजन या प्रसाद ग्रहण करते थे। 1 ब्राह्मण था जो भगवान रामचंद्र जी के दर्शन के बिना खाना नहीं खाता था सो रामचन्द्र जी अयोध्या छोड़कर 1 महिने के लिए दूसरे थाने में गए थे तो 1 महीने के लिए उस ब्राह्मण ने खाना नहीं खाया। तो जब भगवान राम लौटे तो उनके भाई लक्ष्मण ने कहा ये ब्राह्मण 1 महीने से भूखा है क्यूंकी? तो आप इसे आपके दर्शन को प्राप्त नहीं किया। तो भगवान राम ने अपनी मूर्ति रखी हुई थी अलमारी में और कहा तुम इस मूर्ति की उपासना करो। तो राम राज्य के समय पूरी पद सुखी इसलिए थी क्यूंकि पूरी प्रजा भगवान राम के उपासक और क्यूंकि पूरी वजह भगवान के नाम भगवान की भर्ती में ली थी। इसके लिए किसी को किसी प्रकार का कष्ट ही पहुँचा। 1 समय भगवान राम ने रावण को बुलाकर पूछा बताओ कितनी पृथ्वी कितना कितना धन चाहिए, कितनी जमीन चाहिए मांगो सब ने क्या कहा? हमें अगर आज समाज से पूछा जाए तो सब यही कहेंगे जितना अधिक से अधिक मिले उसमे उनका लाभ है। तो ने अनेक शास्ति में ये कहा है की आज कलयुग में भी लोग राम राज्य की चर्चा करते हैं, गरीब के भयंकर वास्तव में भी लोगों की इच्छा रहती है की राम के पास होता तो राम राज्य प्राप्त हो सकेगा। इस करियर के वातारण में अगर हम भगवान राम, कृष्ण के नामों का गुना, अगर हम ये हरे कृष्ण का उच्चारन क, अगर हम दूसरों की भी मात्रा उच्चारण करवाएं। हे भगवान अविराम राज्य वो अध्यात्मिक वातन आज इस कलियुग के कलयुग में भी स्थापित हो सकता है। और अगर हम रामचन्द्र जी की शिक्षा का स्मरण नहीं करें, उनकी मीना का स्मरण नहीं करें, औ का गुणगान नहीं करेंगे। फिर राम राज्य कहाँ से प्राप्त होगा? जैसे की आजकल दिल्ली में इलेक्शन की तैयारी हो रही है, हर 5 मिनट बाद कोई न कोई स्कूटर गुजरता है, कुछ नामसे के साथ कल ही गुजर रहे थे। तो हमने देखा हर जगह पोस्टर लगा हुआ है और बड़े बड़े भ बस जीतने भी कैंडिडेट है हर पार्टी के दी। कोई कैंडिडेट ये कह रहा है की ये समाज की, समाज को हल करने के लिए आप सबको हर नाम का उचारण करना कोई बीजेपी पार्टी कह रही है ये जरूर कहेंगे राम जी का मंदिर बनना है पर मंदिर के साथ उनके नामों का भी गुणगान होना चाहिए। क्यूंकि कलयुग में यही 1 साधन है ह्रदय को शुद्ध बनाने का। अशुद्ध हिंदियों ऐसी शुद्ध हृदय से भगवान को नहीं समझ सकते। और कलियुग में यही 1 साधन है अपने शुद्ध ह्रदय को शुद्ध बनाने का, क्योंकि भगवान तो बिल्कुल पवित्र है। जब हम भगवान के विषय में वर्णन करते हैं तो हमें यह नहीं बोलना चाहिए। जैसे अर्जुन ने कहा क्या पवित्र भव की आप सबसे पवित्र हो तो हमारी पवित्र स्थिति में हम पवित्र पुरुष को नहीं करना चाहेगे। जर्म करे चालक करे केतन करें। फिर यह संभव हो सकता है। तो आज राम राज्य की बहुत आवश्यकता है। आज बहुत आवश्यक है कि भगवाजकेप्चारसंदेश का प्रचार किया जाए। क्यूँकि जब तक हम भगवान की शिक्षा के आधार पर चलने का प्रयास नहीं करेंगे, समाज सुखी नहीं बन सकेगा। जैसे की श्रीमत भगवत में महाराज वेना और महाराज पीठी महाराज वेना जो थे वो दुष्ट बूटी के राजा है, उन्हें खाना। वो ये नहीं मानते थे की भगवान नाम की कोई चीज वो कहते थे। पर मेरी तो उन्होंने ग्रामीणों को भी रोक दिया था, ये करने से कर दिया था। तो उसका क्या परिणाम हुआ? उसका यह परिणाम हुआ की को पूरा समाज दुखी बंद गया है। क्यूँ प्रकृति ने साथ नहीं दिया। आप बड़े बड़े कर खाना है, थोड़ी पता कर सकते हो, कर सकते हो। आज के फ्री दवा में इतनी इंडस्ट्रीज है, उनको बोलो चावल पैदा। जब से गाँव को प्रकृति का सहयोग नहीं मिले, न आपको, न मिलेगा, न दूध मिलेगा, न पल मि लेगा, न आपके, पेट्रोल में लगा, इधर उधर घूमने के लिए सब चीज। अगर ध्यान से देखा जाए, प्रकृति के द्वारा प्राप्त हो रही है। ये जो माइक्रोफोन है 1 रूपिय क्लास थे या स्टील बनाये, पर गहराई से देखा जाए। ये सब चीजे वस्तु भी बनी है। क्यूँ प्रकृति से हुआ है? तो माया प्रकृति जवाब यह प्रकृति मेरे शहर से चली है, क्यूँकी वहाज मेना ने पूरे समाज को लोक किया था। ये परिणाम हुआ की पूरा समाज दुखी हो। और उस समय के जो ब्राह्मण थे, उनकी बुद्धि बहुत तेज थी। आजकल के ब्राहमण जो पैसे के लिए किसी प्रकार का वरदान देने को तैयार हो जाते है, सब प्रकार के ब्राहमण नहीं थी की राज समाप्त हो जाएगा समाज में भगवान की। तो ग्राम ने ये राजा उनकी, उनके आदेश का पद नहीं कर रहा। राजा उनके कहने को नहीं माना तो उन्होंने श्राप दिया और अंत में उनका हो गया, राजा बने और जैसे ही वो राजा बने, उन्होंने सबसे पहले क्या कहा? पर से भगवान नाम का उच्चारण करो। वे तुम्हारी सब समस्या। तो आज हम देख रहे हैं भारत में सारे विश्व में अनेक प्रकार की तंगी है। रूस में, जहाँ अमेरिका में, जहाँ भारत में, जहाँ हर देश के लोग दुखी हैं, जैसे हम सुबह बता रहे थे की इतना धन है, वहाँ आज विश्व में आबादी की तुलना में सबसे ज्यादा आत्मा हत्या हो रही है। संसार में तो लोग क्यूँ आत्म हत्या कर रहे हैं, इतनी शराब नशे की चीजें क्यूँ लोग ले रहे है अपने कष्टों को भूलने के लिए बस। 1 अध्यात्मिक उपाय है। तो प्रपात बहुत इच्छा थी की इस देश के वासी जो की असली संस्कृति है, ज्ञान है, उसको नहीं भूले। इसलिए चेतन या महा प्रवृति ने भी यह कहा कि जो व्यक्ति इस भूमि में जन्म ले, उसे अपना उधार भी करना है और दूसरों का उधार भी करना है। तो ये बहुत अवश्य है की भक्तों की संख्या बढ़े, भक्तों की संख्या बढ़ेगी तो भी प्रचार होगा। तो दोष बुधियो की बुद्धि शुद्ध हे और इसी लिए ने कहा कि मेरे आदेश से जैसे उसे क्या करो प्रचार करो। कृष्ण उपदेश इसी आदेश का पालन करते हुए आज से लगभग 500 साल पहले नीतिन ठाकुर घर घर जाकर प्रचार करते थे। बदलाव में घर घर जाकर सब यही प्रार्थना करते थे। भगवान का नाम लो, हरी का नाम लो, ये था भगवान का आदेश जो नित्य प्रचार करते थे। और 1 समय उन्हें 2 भाई मिले, जिनका जन्म तो हुआ था ग्रामीण कूल में, पर बुरी संगत से गिरने के कारण चरित्र बड़ा हो गया था, शराबी बन गए थे, पर कर ली हो गए थे, जब भी उन्हें मिलते थे, उसे यही आदेश प्रार्थना करते थे। क्या ये सब छोड़ो कई बार हमारा के जब हमारे हिंदू भाई बहनों से ये निवेदन करते हैं वो कहते हैं अरे क्या इसके क्या आवश्यकता विदेश मे हमारे भक्त हर नाम सर किर्तन करते हैं। कई बार लंदन के बीच में हर शनिवार शाम को डेढ़ सौ 200 डिबोडीजातेहैंकतन करने को कोल स्टीम में कभी सनीचर वार शाम को जाओ तो आपको डेढ़ सौ सौ डिवोटी देखेंगे। हर 22 सारे विश्व के मंगलों में मास्को में हरे कवर को जाते हैं। तो कई बार हमारे मिल क्यूंकी कई विदेशी लोगो को ये अच्छा नहीं लगता क्या भारत का नाम खराब करने लोग जब लोगो को सच सच्चाई सुनाई जाए तो लोगो को अच्छी नहीं लगती। तो जी ने जन्म दिया, दुन चीजों में फंस गए और छोड़ो ये सब उनको अच्छा नहीं लगा तुम पत्थर फेंका भगवान के माथे नितिनजी माथे पर लगा पत्थर और खून ने लगा तो छे दिन है वहाँ पर पता लगा वो भी वहाँ पहुँचे। नित्यनंद जी ने चेतना महा प्रभु को अपने सुदर्शन चक्र का उपयोग करने से रोक लिया और दूर की जगह मजा 2 भाई में गिर गए थे। और जब उन्होंने देखा की निंदा जी कि शील है उनके माथे से खूब निकलता है। जब से यह खून हरी के नाम को अपना, हरी के नाम का अपना तो जगाई जो दोनो भाइयों ने बड़ा था उनके हृदय में पछतावा आने लगा की हमने क्या कर दिया है। खान में जन्म लेते हुए हम भी बुरी संगत में गिर गए हैं, हमें ये सब छोड़ देना चाहिए। उनके से निकलना शुरू हो गया, हृदय में बहुत पछतावा हुआ की हम क्या कर रहे हैं हमें ये सब नहीं करना। मा के हृदय में भी 1 पछतावा पैदा हुआ और दोनो भाई वो भगवान के प तो बहार जो टोन है वो जगह को सुधारने के लिए तो आज अगर देखा जाए। समाज की स्थिति बहुत ही है, हमारे देश में उन लोगों का निवेदन करते है, रूचि लोग क्या कहते हैं समय नहीं है परी भाई बहनों से पूछो 1 हफ्ते के बाद ये आपसे अपने केबल टेलिविजन सिनमा कितने घंटे देखे, कितनी अखबारें पड़ी, कितने घंटे, टेलीफोन में काटा और विश्राम करने में कितना समय काटा तो ये देखो कि ज्यादा समय तक इन चीजों में कर दिया जो काम है, पढाई है वो तो बहुत बड़ा समय है। तो हम यहाँ ही देखते हैं जिसे धरण की भूमि मानी जाती है। यहाँ तो धर्म की स्थापना हो, यहाँ तो सबसे ज्यादा रूची हो। चाहे धन के विषय में कई दृष्टि से हम देखते हैं, सबसे कम है क्यूँ क्यूँकि आज हमारी संस्कृति को भूल तो आज अगर राज्य की स्थापना करना चाहते हैं। हरी नाम को अपनाना है, हरी नाम का करना है, हर नगर में, दिल्ली में, इतने नगर में, हर नगर में 1 स्थान होना चाहिए जहाँ की हर व्यक्ति आकर हरी राम के विषय में ज्ञान प्राप्त कर सके। जैसे की हर कोने में है, शिघ्र दुकान, बीड़ी की दुकान है, हर कोने में संस्थान होना चाहिए जहाँ की भगवान के प्रतिनिधि सौ पड़ोसियों से निवेदन करने मे निकालो हरी का नाम, हरी का नाम को चालन भाईगढ़पड़ोैनकड़ो पर भगवान के विषय में काम करो, फिर भी हम राम की स्थापना कर सकेंगे, फिर हम साथ लगाके कष्टों से बचा सकेंगे, फिर समाज व्यक्ति सुखी बन सकेंगे, नहीं तो फूल और है। विजय लक्ष्मी के शुभ अवसर पर आपका भगवान राम के आशीर्वाद को स्वीकार कीजिये और ये भी निश्चित रूप से यह भी यह भी निर्णय कर लेना चाहिए शुभ देव क्या ने जीवन का उपयोग करना है। शास्त्र के आधार पर भगवान की प्रशंसा के लिए छात्र में उदहारण दिया जाता है। जैसे की पेट में डालने से सारे सभी की आंखों में ताकत आ जाती है। पेड़ की जड़ में पानी के ऐसे सारे परतों में जान आ जाती है। उसी प्रकार कृष्णा भारती में के द्वारा हम हमारे पानी को पूरा कर सकते हैं इस 1 कृष्ण भारती के द्वारा तो आप सब हर 1 कृष्ण की हर कृष्ण कृष्ण जी का भी नाम है राम जी का नाम कृष्ण कथा में रूची लीजे, राम कथा में रूची लिखे। आज हम क्या करते हैं जब भी समय में 1 दूसरे की चुगली करना में कहा गया है इस प्रकार के जनता से अध्यात्मिकता नष्ट हो जाती है। हमें कृष्ण का था में रूचि लेनी चाहिए, हमें रूचि लेनी चाहिए, हमें सदा यह समझने का प्रयास करना चाहिए सास के आरोप मे कीमत बनाना और फिर जब जी कह रहे थे सनातन स्वामी जी से जिन जिन कार्यों के द्वारा भारत शांति में रुकावट आएगी, उससे हमें दूर रहना चाहिए और उसी कार्य को स्वीकार करना चाहिए। उन कार्यों को स्वीकार करना चाहिए जिनके सहयोग से हम भगवत प्राप्ति के भारत में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। जैसे अगर आपको, खाने के लिए बहुत अच्छा चोड़िएवगैरहदे, इन सब में काम थोड़ी सी है 1 किसी को छोड़ तो उसी प्रकार जिस कार्य के द्वारा भगवत प्राप्ति में रुकावट आती है, उससे हमें दूर रहना चाहिए। रात सब के शुभ दिवस पर भगवान राम शिक्षा को स्वीकार कीजिये और आप सब भक्तों से हमेशा यही प्रार्थना रहती है कि आप सहयोग दीजिये जिसके द्वारा प्राप्त होगा, जिसके द्वारा हम अपने आप को कष्टों से बचा सकेंगे और सुखी जीवन को न का अनुभव कर सके। हाई कृश्ण?
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

