भीष्मदेव ने दी ये शिक्षाएँ युधिष्ठिर महाराज को | SB Canto 1 | 04 Feb 2024 | Gopal Krishna Goswami

यह वीडियो एक धार्मिक सभा का रिकॉर्डिंग है जिसमें कई वक्ता (A‑D) और दर्शक भाग लेते हैं। सभा की शुरुआत हरे कृष्णा मंत्र और मोबाइल बंद रखने के निर्देशों से होती है। मुख्य भाग में श्रीमद् भागवत के प्रथम स्कंध से भीष्मदेव द्वारा युधिष्ठिर को दी गई शिक्षाओं पर चर्चा की जाती है, जिसमें सत्य, झूठ न बोलना, क्रोध से बचना, और सामाजिक दायित्व के रूप में धन का समान वितरण जैसे नैतिक बिंदु शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इस भाग में कई अतिरिक्त विषयों पर भी चर्चा होती है: आध्यात्मिक संगठन का नामकरण और उद्देश्य, रात में शास्त्र पढ़ने की अनुशासन, हरिनाम जप का महत्व, मन‑बुद्धि‑इंद्रियों का नियंत्रण, मंदिर में नियमित उपस्थिति, सच्चे विवाह की अवधारणा, भगवान के रूप‑रहस्य (माया) पर विचार, समुदाय सेवा एवं भोजन‑वितरण, जीवन‑लक्ष्य और ऊर्जा का उपयोग, तथा वित्तीय सहायता और ऋण‑प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक सलाह। अंत में श्रोताओं को ध्यान, नाम जप और जीवन के नियमों (जैसे 9 नियम) का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया।
Chapters
लकी हे हे
हे
हे हे होली किसी होराहा होजे रामा रे रामा हर है ये कि हर
ह
ही रहा हे दुझे होगा जिला हो हरे रामा हरे रहा रहा रही बा हो हरे हम
तो
गे हे हमारा हर हाल होली जिसका होगे भी रहा हो भी रहा हो हरेरा र ा इसका हरे हरे हरे राम हरे राम हरे हरे हे किस्त ा राम राम राम राम हरे हरी हर कृष्ण जे किसना किशना कृश्ना हर हरिलाल चाहिए नगर में सब कुछ सह कर भी नाम के अन्दर जो भी चाहे वो मिल सकता है। मिलेगा मिलेगा बहुत लेकर जाएगा तो पता करेक्ट है किसना हला किसना गलेखेहारेे होले किसका होले होले हल हो होलेड़ेकिा हरेक हरेहगाहोलेकुसका हलेले होले होले ड़ेदेाहेगे होले होले होले लगा गले हले कृश्णा किशना हरे हरे हरे कि रे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे का किशन हमे हे हरे बिका े हरे हा हा े हर हारे हारे हा राग र रामा रामा हर हर रे हरे हरे हरे किशना हर म म हर हल
ना
जा हर हर हर हर राह
हर हर
हर दिशा हर हर हर बनना है हर बेटा का हर हर हर राह हर रा रा रा र हरे हरे ा खदसलाइकहरहर ला हरे हरे हो राम रा री रे रा रा तो हर रा हर राग हर राह राह राम रा रा रा रा रा तुम भी तारा रा रा जीता रा
रा
रा जीकार अभी कतार का रा जरा कभी कबार ही जिला तेरा दे देगा रा देदेगा रा रा रा तेरा जरा सी भी तारा या जरा सी भी तारा हितारा का है हाल
होगा
हे हो हो होला होली हो होली होली ा जो यो प्रभु पद प्रभु पद प्रभु पदशिला प्रभु पभूपदशीभू जा क प स द सी भूल पर नंदी
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण। तो यह हमारा परम सौभाग्य है कि हमारे बीच अभी परमबुजोपालकृषो स्वामी महाराज है तो महाराज का स्वागत करेंगे। उच्च स्वर में हरे कृष्णा महामंत्र हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे रे आप सभी यहाँ बहुत बड़ी संख्या में आये है किसलिए आये हैं लेक्चर सुनने के लिए है ना। तो महाराज जी बोलेंगे आप सुनेंगे बीच में मोबाइल को बंद रखे नहीं तो बोर्ड डिस्टर्ब में होता है तो सभी भक्तों से अनुरोध है अपना अपना मोबाइल बंद कर दे, साइलेंट पर कर दे, दोनो डिस्टर्ब मोड में कर दें और ध्यान से सुने क्योंकि श्रवण करेंगे तभी हमारे को पता पड़ेगा कि हम क
आ गया क्या करना है हर gusnahikisna गई हार्दिक अभी सुनाई दे रहा है मैं क्या करूँगा करेंगे याद
तो मैं क्या करूँगा हमारे 1 बग जो है जो मैं बोलूंगा उसको रिपीट करेगा ताकि आपको याद हो जाए।
ठीक है सबने संवेदन मेरेथन किया था
तो आप सब ने संकृतन मैराथोन किया था। आज हम श्रीमद भागवत क प्रथम स्कंध से पढेंगे भीष्मदेव जी के बारे में
त्याग।
व भीष्मदेव जी जब शरीर त्याग रहे थे तो परम भगवान स्वयं वहाँ पहुंचे थे।
प्राप्त हुआ के मृत्यु का समय।
उन्हें 1 बार प्राप्त हुआ था कि वो चुन सकते हैं अपने मृत्यु का समय।
आज राम की जय
जैसा की। आज के वातावरण में आप जय श्री राम का कारण सुनते हो।
रामराज्य की चर्चा करे काम आने की चर्चा कर रहे हैं।
राम राम राज्य की चर्चा कर रहे हैं।
क्यूँ? क्यूँ ये
हमारे राम राज्य में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं थ। और मृत्यु का समय भी हम खुद चुन सकते थे,
प्रा सकते है।
तो भीषण देव को ये वर्ड प्राप्त था कि वो चुन सकते थे कि किस समय शरीर पे आना है।
और
जमिलदेस्ट्री महाराज राजग दीप स्थापित हुए तो विष्णदेव ने सोचा कि अब मुझे शरीर त्यागना चाहिए।
तो लेके
विश्मदेवलेटे हुए थे। बाणशैया के ऊपर
होता है पूछो से या
उसी समय भगवान ने विदेशी महाराज से कहा कि विश्व दिनो पूछो कि क्या होना चाहिए जीवन का उद्देश्य?
आज लोग इतने अज्ञानता में है, कोई प्रश्न पूछता ही नहीं।
आज लोग इतनी अज्ञानता में है कि कोई यह प्रश्न पूछता ही नहीं पूछो। साधारण व्यक्ति से पूछिए कि जीवन का उद्देश्य क्या है? तो वो बोलेंगे खाओ पियो मजा
आप
से पूछ रहे है।
अगर आप बच्चों से पूछा जाए जीवन का उद्देश्य क्या है? तो आप क भगवत प्राप्ति।
भगवान
भगवान ने देशी महाराज से कहा कि आप पूछिये भीषण देश है
की
महिमा बनाना चाहते हैं, वे भगवान की महिमा बनाना चाहते हैं।
ओ भक्त की महिमा हो।
और जो भगवान है वे भक्त की महिमा बढ़ाना चाहता हूँ।
जैसे आप कहोगे को पूछो, वहाँ उपस्थित
है, जैसे आप कहोगे की बीशमदेवऐसीक्यू पूछा, जो भगवान वहाँ उपस्थित है, जिसे भारत
की यात्रा में दे।
राम चतुर महा को दक्षिण भारत की यात्रा में थे। जब मिले भक्त रामानंद राय से की
यात्रा घने से पहले ले
तो भगवान जगन महाप्रभु के दक्षिण भारत यात्रा स्टार्ट करने से पहले फॉर्म। बाटा। चारे ने महाप्रभु से कहा था कि आप दक्षिण भारत जाएंगे तो से मिलेगा। जिनका नाम है राम।
वो महिला
मद्रास के वो राज्यपाल थे। मा प्रभु ने उनसे रामानंद राय से अनेक प्रश्न पूछे। तो भगवान अपने भक्तों की महिमा को बढ़ाने के लिए ऐसा करते हैं। प्रश्न पूछते हैं उनसे
अंतिम महीनों में
जी। अपने अंतिम समय में जब उनके शरीर में कष्ट था, फिर भी वे भागवतों का अनुवाद करते हैं, उसी प्रकार आप पढ़ते हो। भारत में कैसे भेज देने हैं। अंतिम समय में दिस्टि महाराज को शिक्षा दी।
मैंने कहा कि
विश्मदेवनेतिसुमानक से कहा कि इन नियमों का पालन नदी आवश्यक हैदर। आपको शांति चाहिए जीव।
तो े pelaesram झूठ ही बोल रहा।
सबसे पहले आप देश जो विश्व दे देते हैं, वो है झूठ नहीं बोलना
है, बोल रहा है।
तो हमको हमेशा सच ही बोलना चाहिए। विश्व देव कहते हैं झूठ नहीं बोला।
आज क्या है?
आज क्या देखते हो? आप बोलते है, लोग झूठ ही बोलते हैं।
देखे।
इसलिए आप इतने सारे कोर्ट केसेज देखते हो।
मां में आप बोल सकते हो। किसी में कोई ना नहीं है।
भौतिक समाज में आप कह सकते हो कि हमारा कोई पा नहीं सकता है।
ध्यान में
बड़े अध्यात्मिक क्षेत्र में हमें झूठ नहीं बोलना चाहिए।
अगर हम गलती कर है,
अगर हम गलती कर रहे हैं तो हमें स्वीकार करना चाहिए।
झूठ बोल रही है, क्या होता है
बढ़ता झूठ बोलने से क्या होता है कि जो मतभेद है वो बढ़ता है। हम झूठ में फँस जाते हैं, झूठ से फस जाते है।
झूठ बोलोगे, झूठ बोली बोलने पड़े
1 झूठ बोलोगे तो उसमें बचने के लिए आपको 10 साल झूठ बोलने पर सत्य का पालन था,
रोज से बचो, क्रोध
से बचो दूसरा उद्देश्य दिया, क्रोध से
बचो
भरने के बारे में कदम पर
बधाई है मलिक समाज में हर कदम पर क्रोध आ जाता है।
1 भी जो आपको उसी हो जाते।
भौतिक समाज में हमें क्यों क्रोध आता है? जब हमें कोई सुविधा जो हम चाहते है और वो प्राप्त न हो जा,
ते है ं
और अध्यापन क्षेत्र में हम देखते हैं भक्तों को क्रोध कब आता है? जब कोई भगवान की निंदा करता है
या भक्तों की निंदा कर क्रोध नहीं आना चाहिए
तो में क्रोध नहीं आना चाहिए? अगर हमको हमारे मनानुसार सुविधा नहीं प्राप्त हो रही है, आदत नहीं प्राप्त हो रहा है तो करो नहीं आना चाहिए।
मैं उद्देश्य दिया था
मै आप लोगो ने हमें उद्देश दिया था। सुना रोड़ ने सदा
जाते हैं नाम।
अगर हम आध्यात्मिक क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं तो हमें मारे नाम मे रूची करानी चाहिए। नाम मे रुची कैसे बढ़ेगी अपराध अपराध के बिना जज कर है
ा लेकिन को माथे पर विला बनाए थे वो
जब भगवान जनमात्र ने देखा की जगह मादारी पत्थर फेंक कर मारा है निदान गो को तो जगन मात्र वहां सुदर्शन के सा पहुंचे जगह मनाई को बंद करने के लिए। 1 दिन चेतन। महाप्रभु ने हरिदास ठाकुर और भगवान नेता नंद को बुलाया और कहा घर घर
बंगाल में, भाई के घर में
धोना जकनमहापुवने दोनों से कहा कि जाओ घर घर में। और ये उपदेश दोनो क्या था, देश क्या था उपदेश
कोलोकेशन भाई ा क्या
उद्देश दिया बोलो कृष्ण भज, कृष्ण करो, कृष्ण शिक्षा, कृष्ण का नाम लो, कृष्ण उपासना करो और कृष्ण के उपदेश को स्वीकार करो।
न ही राज का पद था। बिना शंका के
मित्र और हरिदास ठाकुर को पता था कि चकनमहापभरभगवा और उनकी महिमा बढ़ाना चाहते। वे उनकी महिमा बढ़ाना चाहते हैं।
पूछा इस में कौन है?
तुम दोनों जब प्रचार करने गए तो उन्होंने समाज में प पूछा कि समाज में सबसे प्रतीक व्यक्ति कौन है?
2 भाई हैं राम पाप में, तो
लोगों ने कहा कि 2 भाई हैं जिनका जन्म तो ब्राह्मण कुल में हुआ था, लेकिन आज वे हर प्रकार के पाप में लत है।
उन्होंने कहा 1 महिमा
तो इन दोनों ने सोचा की अगर ये दोनों को हम भक्त बना दे। 2 हार 10 ठाकर ने सोचा अगर ज्यादा मधाई को भक्त बना देंगे तो महा महिमा और भी बड़ी हो जाएगी। तो जब वे दोनों प्रचार कर रहे थे तो बधाई ने विकतामंद्री के माध्यम से पत्थर फेंका
का नाम बताना।
और मलाई ने कहा, विजयानंद को हमने कल। तुमसे कहा था कि यहाँ तुम लोग आए। तो जब विद्यानंद के माध्यम से पता लगा और खून निकला चटनमातरोको, पता पड़ा तो चटनमात्रोबहुतक्रोधित हुए। और वहां पर आये है
अपने आज
भक्त जो हैं अपने आदर सम्मान शुभयोग के कारण। वह क्रोधित नहीं होता।
र।
अगर कोई भक्त देखता है कि भगवान के प्रचार में कोई रुकावट दे रहा है, तो फिर क्रोध होता है गीता में? भगवान गीता में कहते हैं काम, क्रोध और लोग जो है ये 3 हाइवे हैं नर्क की ओर जाने के ो क्रोध से।
हमें
तो क्रोध से हमें बचना है।
पूछता, कभी क्रोध बहुत आता है।
लगभग हर भक्त हम से, कभी कभी पूछता है कि हमें क्रोध बहुत आता
है, सच है, सच बात है। तो क्रोध आता है? mea o में दिखा दे। 1 लौते व्यक्ति है।
कइयों के चेहरे में। आप देख सकते हो कि बड़ा क्रोधी व्यक्ति है।
हर भाषा पूरे भाषा में बोलते हैं।
हर भाषा क्रोधी भाषा में।
हमारे गीता में कहते हैं कि भी है।
4 करो भगवान गीता में कहते हैं कि जीवा की 1 तपस्या है कि आप हमेशा सत्य का उच्चारण करे।
हमें आय है, दिनारा वाले
हमें आदत है। जीवा के द्वारा। हम बहुत चर्चा करते हैं। लेकिन हमें क्या करना चाहिए? जीत से सत्य का उ उचारण करना
चाहिए
और विकास के साथ। तो विश्व देव ने कहा क्रोध से बचो और झूठ मत भूल।
तुम बराबर।
फिर कहते हैं जो धन है, उसको पूरे समाज में बराबर से बाटना चाहिए।
आज के आज के समाज मे क्या हो?
आज के समाज में आप क्या देखते हो?
धन
धन क्या समानता से बंटा हुआ है।
धनी है और धनी हो गया है।
जो धनी हैं, वह देवघर दे। बहुत धनी होता गया है।
यह धनी है। उसने धन को रखना चाहते हैं। अपने स्वार्थ के लिए।
ये नहीं की धनी लोग गरीब के लिए कुछ करें बल्कि। वो धन ज्यादा कमान है और अपने स्वार्थ के लिए रखना चाहते हैं।
अब कॉम्बे थे? 1 देश में फिर
1 समय पर प्रिती। बहुत सारे कम्युनिस्ट देश थे।
सिद्धांत क्या है?
सिद्धांत क्या है?
उनका सरकार की है।
सब चीज सरकार की है।
उसने जितना आवश्यक हो, उतना लोग इतना आवश्यक हो। इतना शो पारिश हा गया है।
यह तो रशोपरिशरमेंभी हा गया है।
इसमें कमी थी कार करने की, जो
हमारे कम्यूनिस देशों में कमी। यह थी विश्व परिषद में जैसा कहा गया कि सब सरकार भगवान का है। ये कहते हैं सब हमारा,
हम क्या कहते हैं?
हम क्या कहते हैं? परम भगवान हर चीज के स्वामी है।
र कम देश में गए थे, जो पैसे के साथ रहा।
जब पहली बार कम्युनिस्ट देश रशिया में गए थे, तो उनका परिचय हुआ था। 1 बहुत बड़े प्रोफेसर टोस्टी के साथ विमान खोलाफफलथे। वो कह रहा था कि कम्युनिज्म में सभी समस्याओं का हल है। पर ने कहा, नहीं, जब तक हम ये स्वीकार नहीं करेंगे कि भगवान हर चीज के स पानी है, शांति नहीं मिलेगी, अच्छे से फेल हो तो कमुनिजमआजसेअस्ते फेल हो गया।
कह रहे है उसे बराबर बाटना
विष्णदेव कह रहे हैं। जो धन है, उसे बराबर समाज में
बाटना चाहिए कि 20 परसेंट, 20 पर्सेंट पानी, ये पानी, 90 परसेंट।
यह नहीं होना चाहिए कि 20 परसेंट जो धन है वो 90 परसेंट आबादी के पास है।
20 लोगों के बाद
20 पर्सेंट के पास पूरा धन है,
कुछ भी नहीं है।
कइयों के पास कुछ भी नहीं है।
नहीं तो राजा के बनता है मार को पूरा करना।
वैसे तो राजा की राजा का कर्तव्य बनता है। कि समाज की आवश्यकताओं को पूरा खतम
की कमी नहीं थी।
जैसे राम राज्य के समय किसी चीज की कमी नहीं थी। समाज में सभी को सभी चीज प्राप्त थी। आप हागतोमेंपढ़ते हो गे। 1 समय महाराज था, महाराज गया। कुबुद्धि था बड़े दुष्ट बुद्धि का था समाज में हाथ बगालके को सने उसने रुकवा दिया था।
ब्राहमण ने देखा हो।
ब्राह्मणों ने कहा कि यह तो स अधर्म हो रहा है। तो ग्रामीणों ने मारा जैन को श्राप दिया।
सूख
पानी सारा सूख गया था, पृथ्वी से का उत्पादन नहीं हो रहा था, व्रिक्शोसेफल नहीं मिल रहे थे। तो ब्राह्मण ने कहा कि तो बहुत
भयंकर स्थिति है सुधारने के लिए,
समाज के सुधार के लिए। ब्राह्मण ने महाराज गण को श्राप दिया। उसके पास उनके पुत्र एवं महाराज के पुत्र महाराज का शासन आनंद हुआ। विदुर महाराज ने स्पष्ट कहा सभी थे कि अगर आपको सुख चाहिए समाज में तो भगवान की सेवा करे। और सभी लोग समाज में भगवान के नामों का उच्चारण कर रहे थे। तो समाज की सारी आवश्यकताएं पूरी हो गई। बात धन जो है, उसको बराबर बांटना चाहिए।
भगवान ने आपको धन लिया
में भगवान ने अगर आपको धन दिया है तो उसका उपयोग करो। भगवान की सेवा में
शमा की भावना है।
आगे विश्व देकहते है कि शमा की भावना रखनी चाहिए
की भावना ही है।
विष्णों में शमा की भावना होती है।
यह नहीं,
यह नहीं कि मेले पर देगा, तू फॉर टू। तुमने मार से लैसरकियाहमरतोहमारे। साथ बरजा नहीं है।
भारत को उधार में देखते हो, आप
बांड को धारण भी देखते हो।
प्याज के धारमेटमाननेके लिए।
महाराज को जब राज्य प्राप्त हुआ तो उन्होंने ऐसा नहीं कहा कि तुमने उन्हें मारने का प्रयास किया था। इसलिए उनके में भी अभी मार
ऐसी है कि सुविधा दी, राज राजा पूरी हो गयी है।
तो हालांकि, जिसे महाराज राजा बन गए, लेकिन उन्होंने बदला नहीं लिया। बल्कि उल्टा राष्ट्र को इतनी सुविधा दी, इतनी अच्छी सुविधा
भाई क्या कह रहे हो? उलटी
तो द्रितराष्ट्रकोआसर के होते देख बिगर आयोग के भाई और कहा द्रेतराष्ट्र से कि तुम क्या कर रहे हो? तुम उसी की जो शासन पर जी रहे हो, जिसको तुमने मारने का प्रयास किया।
तुम
भक्त समाज की भावना होनी चाहिए,
ये गाज नहीं मार। हमारी
यह नहीं की आप बार बार जल्दी करो और आपको जमा किया जाएगा।
कहते
कहते थे 1 बार आपको माफ किया जाएगा, फिर ना 1 बार फिर जल्दी करो, माफ नहीं
बदला लेने की
भावना नहीं बोली हमारे पर बदला लेने की भावना नहीं।
तुमने ऐसा किया तो मैं ऐसे कहूँगा,
तुम ने ऐसा किया। मैं इसे
अगर शमा करे तो उसका ऐसे भाव
सामने क्षमा का भाव होना सही हमारे
है। संतान पैदा करना है।
संतान अगर आपको जन्म देना है, पैदा करना है तो अपने पत्नी के घर से होना चाहिए
में यम का पालन नहीं हो रहा।
आप भारत में, विदेशों में इस चीज
का बाद नहीं हो तो आइए लेते हैं मन बुजी।
आगे कहते हैं म, मोदी और इंद्रिय को वर्ष मे
कई स्थानो में पढते मान को क्या करे, बुद्धि का क्या करे, क्या करे, न करे।
आपके कई स्थानों में शास्त्र पढ़ते हैं कि मन और इंद्रियों को वश करना चाहिए। मन को वश न करो। इंद्रियों और बुद्धि को भगवान की सेवा मिल। विष्णुदेव ने कहा हर व्यक्ति अगर सुख चाहता है तो मन, बुद्धि और इंद्रियों को वश करना चाहिए।
हम आपको गीता में पढ़ते हो, हम मन, बंद,
बंद के विषय में आप गीता में पढते हो। मन को हमें बद्दू बनाना चाहिए।
शतरुरैमनमंदू कब माना जाता है, मन बंदू
कब बना जाता है, कौन पढेगा बताइए, मन कब बंद होता है। जब आप अध्यातिक विजय का समर्थन करते
है,
हम जीवन के कर सकते है।
जब पूछते हो कैसे हो, जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है।
भगु गीता पढ़ते हो। जब आप बहुत गीता पढ़ते हो, हमें ये बनाना चाहे।
भगुईगीतापेहमे नेम बना बनाना चाहिए की रोज
बहुत गीता में 1 श्लोक का कम
से कम 1 श्लोक का पर कस
लो
और सारा दिन लोग प्यार का स्मरण करते रहे।
कैसे करोगे जल्दी पूरी की हो जा,
ऐसा करोगे तो बहुत जल्दी आप पूरी नीता को समझ जाए।
भवन की भी मिला है, उनका स्मरण
करोगे, भगवान कितने लेना है उनका स्मरण
करो,
भगवान के उद्देश्य से उनका स्मरण कर।
मन को मन बनाया गया।
मन को बंदू बनाना चाहिए।
यह प्राप्त होगा।
भगवान कहते हैं गीता में जहाँ तुम्हारा मन होगा, मृत्यु के समय उसी प्रकार का देव प्राप्त हो।
मन को मन के द्वारा भगवान का जप कर। सकोगे के भात का बयान इस विशय में शी
हा, मृत्यु के समय तभी भगवान के नामों का जप कर सकोगे। जब आप उ उसका अभ्यास करते हो
जी आप किताबें पढ़ रही और
अगर आप किताबें पड़ोगे नहीं और इंडिया में बैठ जाओ, एग्जाम में बैठ जाओ तो क्या पास होगे। हो सकता है चीटिंग के द्वारा
लोग कहते कि ये बिग में जो टीचर हैं वो डरते हैं। कई राजा को ले कर
लोग कहते हैं कि जो यूपी में टीचर्स बताते
हैं, की
की रोटी परे चीटिंग करना,
उसे पकड़े उनसे करते हैं।
अभी कई गंभीर परी का है। ध्यान से जाना और ये
कभी कभी ऐसे एजेंसी हो गई है उनका नाम है हर जगह जाना और देखना की एग्जाम में चीटिंग न करे।
अगर आप 20 पढोगे भगवान का
तो अगर आप भगरकीताऔगिश्को रोज पढ़ेंगे स्मरना करेंगे तो आपको जो है वो भगवान के नाम खत के विला में लगे थे।
आइए सादा जीवन बिता।
आगे विश्व ने कहा कि सादा जीवन देता।
सिम्पल सिम्पल कहते थे, सिम्पल प्रॉपर्टी केते थे।
सिंपल दिनार, ज्यादा जीवन और उच्च रचा में सादा जीवन बिताना से साधा जीवन का मतलब है कि अपने जो आवश्यकता है, उससे ज्यादा नहीं, जमा है।
हम क्या देखें, हम बनाना चाहते हैं, हमें सुविधा।
आज आप कह सकते हो कि हम अपनी सुविधाओं को बढ़ाना चाहते हैं।
नहीं मोटर हमें महंगी वाली मोटर खरीदी है।
लोगों को द ने के लिए
ऊचायजीवसाधाविचा,
तो फिर क्या हो जाएगा हमारा ऊंचा जीवन, सादा विचार क्या है?
ऊंचा जीवन, सादा भोतिक।
नियम यह है की ऊँचा जीवन और
सादा विचार
कार है। ये नहीं कि
हमको अच्छा अच्छी गाड़ी चाहिए, अच्छे कपड़े चाहिए, अच्छा घर चाहिए। ये जो है, ये सब सादा बचा है। यह नहीं कि हमको जीवन के लक्ष्य के बारे में पूछना चाहते।
नियम क्या है?
जीवन हमारा नियम क्या है? सारा जीवन, उचा विचार भी यही है
की को सिंपल साधारण रूप से जीना चाहिए।
विश्व तो यही कहते हैं कि व्यक्ति को साधारण तरीके से जीना चाहिए।
सारा जीवन बिता हो गए है और जान जीवन का।
अगर आप सादा जीवन बिताएंगे तो सरलता से अधिक जीवन का पालन कर सकते हैं।
ट्रेन में बिताना
और अगर उचा जीवन बिताना है तो कर्जा और बहुत कर्जा देना। आज बड़ा आसान गया।
फ्रेंड था, देने की नहीं कहा है। रास्ते।
आप कार्ड से अमी पेमेन्ट करते, अभी रास्ते रास्ते बनते है। 34 के कैयो के पास 34 प्रेरि
उधार, दूसरे,
1 प्रेम कार्ड के खर्च करते, दूसरे के पहले का कर्जा उतार
दे,
फिर दूसरे कार्ड पर कर्जा उतार।
देने के कार्ड को पूरा जीवन निराशा में मिल जाएगा।
पूरा जीवन आपका निराशा में भी जाएगा किया जाएगा।
जिनका भी है, हमने सादा जीवन बिताना
है, हमे सादा जीवन बिताना है।
रहने के लिए ऊर्जा का
जितना हमें आवश्यकता है, उतना ही चाहिए।
सारा जीवन। हम
सादा जीवन डॉक्तोपरसिधांत है।
जो राजा है ना, उनको अपने बॉडी के लिए
आगे विश्वने में कहा जो राजा हैं, यह नेता हैं, उनको अपने जो उनके अंडर में जो हैं, उनकी भरजा जो है, उनका भी ध्यान रखना चाहिए।
जो राजा थे, पूरी प्रजा की चिंता करते थे।
प्राचीन समय में जो राजा थे, पूरी प्रजा की चिंता करते है।
राम जाते थे, ये देख कर क्या समस्या है।
भगवान श्रीराम, वेश बदल दे जाते थे। ये देखने ले कि किसको क्या समस्या है।
प्रजा की चर्चा की जाती थी, गाय माता है, वो भी कर जाती थी,
प्रजा की चर्चा की जाती थी।
जो
गाय माता, गाय, जो गाय है होती, उसकी भी गिनती प्रजा में होती।
और बताए कि म गाय की सुरक्षा न देखते। हार में, सड़कों में घूम ही है।
आज तो आप देखते हो। स्थिति क्या है कि गायों की सुरक्षा नहीं हो रही है। सड़कों में आप गाय
की, चर्चा की, बता की। वायस लाइन में। तो ये 9 नियम का पालन होना।
विश्वदेव में यह 9 नियम 9 विषय पर चर्चा थी। इसलिए कि अगर हमको समाज में सुख चाहिए तो हमें 9 नियमों का पालन करना
है
कि पूरे समा आम को पूरा।
तो ये जो राजा है, जो माजा होते हैं, उनका संत बेटा है। ये देखना की पूरे समाज की आवश्यकता पूरी है।
भाई जी
समाज में हर व्यक्ति के पास रोटी कपड़ा मकान है
समाज में
रहे, समाज में शांति रहे। ये जो नाम लिया है यह बहुत महत्वपूर्ण है और आप उसका प्रचार करे जहाज है। शास्त्र में कहा गया ज्ञान ज्ञान में साला
मैं
हे गुरुदेव, मेरा जन्म हुआ है वो अधिकार में हुआ है।
भारत के फेसबुक
पर भक्त के सहयोग से अभी मुझे दिखाई दे रहा अधेरा
अंधेरा दूर हो, कई जनम में
कई लोग तो जन्म लेध्ाज्ांतामें जीते जारतामरकि जनता
ही यहाँ उपस्थित हो जुड़े हो
आप सब जो यहाँ उपस्थित हो जो भक्तेश्कोंड से जुड़े है आप बहुत भाग साली
हो क्यूँ क्यूँ संदेश दिया हा आपको
अस्ली संदेश दिया जा रहा है के
विचारकों की कमी नहीं है, धर्म के
प्रचारों की भी कमी नहीं
आज अपने मनमाने विचारों को,
लेकिन आप जब उनके प्रचार को देखोगे तो आप देखोगे की हर कोई अपने मनमाने विचारों को प्रचार का मैं खादर।
मेधापुर से नाम सवेरे था स्वामी जी
का पोस्टर था वह स्वामी जी का
पोस्टर था उनका नाम क्या था का
नाम क्या था लैपटॉम पापा लैपटॉप बाबा
मैं लैपटॉप नाम पापा के नाम तो वो कहने लगे सारे लैपटॉप में रहते
लैपटॉप बाबा के सालों के लैपटॉप में
रहते का नाम नया लैपटॉप बाबा लेट्रॉबाबातोयसब लैपटॉप असली संदेश को प्रचार की यात्रा करते है हमारे हमारे से प्रचारक है
हमारे प्रचारक है जो पूरे बिथरी
में
प्रचार या ऐसा समाज में 1 प्रचारक
है जो बड़े बड़े प्रसिद है पूरे
पृथ्वी की मोटर साइकल मोटरसाइकल में भी
तो क्या पर क्या है लाभ तो
क्या लाभ हुआ किसी ने
कोई लाभ
असली संदेश दोगे तभी नाम मिलेगा हमारे
मेरिका पहुंचे ने कहा मी जी
बाजी जब अमेरिका पहुंचे तो हमने देखा तो हमको भी कुछ लोगों ने कहा कि आगे कर धोती छोडो और मॉडल हमारे काम रहबाजील कॉम्प्रोमाइज नहीं किया चर्चा ही
थी ये संस्था नाम क्या होना चाहिए।
जब यह चर्चा हो रही थी कि प्रोपज संस्था का नाम क्या होना चाहिए तो अमेरिकन युगत ने कहा इंटरनेट सोसाइटी फॉर lodconseसnesबाबाजी ने कहा नहीं, हमें बहुत ही विशेष रूप से ध्यान देना है। रबर ने कहा कृष्ण भावना में
कैसे भाग।
तो यह संस्था का उद्देश्य है कि भगवान का उद्देश्य मात्र का उद्देश्य जो है वो भर रह पाता है क्या
है क्या मात्र ने क्या कहा या लगताएक
ना मिले तो जिसको देदेखोभुतजीताका उद्देश्य पचा।
कई भर है तो सर भी जाते हैं तो छुरी किताबें साथ ले जाते
हैं हमारे कई भक्त हैं जो सफ्तरभीजातेहैतो सोती किताबें साथ ले जाते हैं पूरी
किताबें खाते और सी और रास्ते में
बनननताहतोउनको वो छोटी दि समझते हैं हमारी जोनपुर में, वो अपनी कार में गीता
रखते है कोई मोटर रुकती है जब कोई
जब कोई रेड लाइन में कोई गाड़ी रुकती है तो उनको गीता देते हैं
पंद्रह की।
इस प्रकार वो पंद्रह लीटर रस
हम
भक्त को प्रयास करना आगे बढ़ा।
हम लोगों को सदेव यह सोचना चाहिए कि भगवान लोग देश को पैसा
महिना हो जाए। 11
यह कि अभी मन तन का महीना समाप्त हो जाता है।
11 महीना आरहा भाव भार
हमें यह भावना होनी चाहिए और साल भार भगवान की सेवा करने
आगे बढ़।
भगवान कृष्ण के संदेश को आगे बढ़ना
है तो मारे कार्यक्रम
आप कई भक्त हो जो अलग अलग कार्यक्रम करते नाम भर्ती रिक्शा
किताबों को करे जिसमे आप
भक्तों को निमंत आपकी किताबों को पढ़े
जो किताबें हैं सधारण ग्रंथ नहीं है
ये तो किताबे ने साधारण ग्रंथ नहीं
लिखे। मानी
प्रौपर्जी ने कहा ये जो ग्रंथ प्रॉपर्टी ने लिखे हैं भगवान ने ना
देने के हाने द्वारा,
भगवान ने स्वयं प्रो पर अपनी वाणी के द्वारा, ये किताबें दिखाई पड़े हमें नियम बनाना चाहिए कि हम रातों को पढ़े और और सबसे महत्वपूर्ण सेवा क्या है? हरिनाम का उच्चारण नाम जो है से मिला है। हरि नाम जो है वो बहुत मीठा
है प्रभाव में है हम विद्या के प्रभाव में है।
सभ्यता कैसे गुरु होगी
प्रभाव कैसे करेगा काम क्रोध।
2 मन का प्रभाव कैसे बनेगा, कैसे कैसे कटेगा बताए और क्या करना अरेनामकेअलावाऔर क्या करना है
सबसे पहले क्या सा
साथ सब में आना सब दूर दूर
रहते हो के पडोस में रहते दूर ही से है कम से कम आपसे 1 बार मे भी दूर जाना चाहिए
आप सब दूर दूर रहते हो अगर आप पास रहते होते तो रोज मंदिर आ सकते हैं लेकिन आप दूर रहते हो तो कम से कम हफ्ते में 1 बार मंदिर आना चाहिए।
पर शादी की जा के क्या साली
जादू की जर्जर की जाए तो कौन है असली शादी
करे
उसे उसका अर्थ है असली साधु की सं भोगी नहीं ढोंगी नहीं तो साधू का संदेश क्या होगा। कि वोगरीमेहरेसमान का धन
भारत पर आंशरमिहाकापास।
भगवान के आरसी विग्रा पास ने देखा
कुछ हमारे काम की विग्राकीथाजसेआपने देखा को
भगवान श्रीराम की विग्रह की स्थापना हुई।
भगवान प्रकट होते अपने आगे बजाते भगवान
प्रकट होते अपने आंसर के रूप में
ग्रामीण था
राम का
प्रसाद खेल समय
भगवान श्री राम या प्रकट जिला दर ब्राह्मण का वो भगवान श्री राम का दर्शन देता था। उसके बाद ही वो प्रसाद बना करता
राम यात्रा में थे।
भगवान राम यात्रा में थे। 1 महीने की ब्राह्मण को दर्शन नहीं
मिला
जब वो
1 भैयाए
तो लक्ष्मण जी ने राम से कहा कि 1 महीने से ब्राह्मण ने कुछ नहीं खाया मुझे आपका दर्शन नहीं करा।
हे ग्राम अलमारी में उनकी मूर्ति से
भगवान की अलमारी में उनकी मूर्ती से
जी को काला होता मूर्ती की पूजा करो। इस े कोई तो भगवान श्री राम
ने अलमारी से अपनी मूर्ति निकाली और ब्राहमण से कहा और देते हुए कहा कि इसमें मूर्ति मुझमे कोई भी भेद नहीं है जिसके पास न
हो तो
आप सब वेशन हो और भगवा मन के साकार रूप में विश्वास करते है
वाली मायावादी क्या कहते है
कई मेराफ्तारवादी मायावादी क्या कहते है भगवान का कोई रूप नहीं है वो हर्चे वितरण में अंदर
इस मंदिर में आते इस बात को आप को ताका।
जब आप यहाँ पर मंदिर आते तो आपको तो आपको भगवान का दर्शन मिलता।
तागा गौरता,
राजा राज,
सीता, राम, कु भगवान है। इसपर भगवान त्रेता युग में भगवान प्रकट हुए थे, श्री राम के रूप में प्रकट थे, द्वापर युग में प्रकट हुए थे, कृष्ण के रूप में, कलयुग में सेकरार 3
में प्राप्त कर सकते है।
ये तीनों का दर्शन आप मंदिर में प्राप्त कर सकते है। और आप मंदिर भगवान को प्रणाम करो।
यह प्राथना भी और भगवान से ये
प्रार्थना करो की आप हंसी में आगे बढ़ सके।
आपको अच्छा लगता है, आपको बहुत अच्छा लगता है। यह है बड़े बोर है, पैक है में नहीं मिले।
यहाँ सब बड़े बड़े होते हैं। बड़े बड़े खेत बडा बडा हसलीजीहैयहसब। आपको धाम में नहीं मिलेगा जाना चाहते है, तो भी आप जाना चाहते हो।
क्यों?
क्यों
हमारे वहाँ भगवान के संग मिलेगा।
भगवान का दर्शन मिलेगा प्रदूषण नहीं रहना पड़ेगा। प्रदूषण मैनेजर है।
दुख का नाम निशाना नहीं, वैकूलमेसूकीसोाकोई दुख का कोई नाम निशाना नहीं, दुःख का कोई नाम निशान नहीं, तुम को जाना चाहते हो पैसे।
्री टिकेट से आपको भी पैसे देकर जाना चाहिए।
in
a सो भगवान गीता में कहते हैं कि जब आप सब कुछ छोड़कर मेरी शरण में आ गए, तभी मैं आपको मुख्य प्रदान कर
का पालन करो।
तो आप सब बस्ती के विधियों का पालन करो। और सादी सं मेरा बोलोगे नहीं कि जीवन का लक से क्या होना चाहिए।
आईडी
पापा जी ने सारे प्रोसेस को बड़ा सिंपल बना दिया। पाजी ने सार रूप में सारे शास्त्रों जो मारे, उसको प्रस्तुत किया।
cendinehappicा लंबा हो गया।
12 प्रश्न नहीं है,
1 घंटा पंद्रह
मिनट क्लास
जितेन ने सीधा क्लास चालू कर दी। 1 ंडापरकलास
अपने विचारों को, कुछ के
विचार का अर्थ है ये पूछो कैसे मदद जा करता? ऐसे ा
तो प्रेस में यह था कि कैसे हम प्रॉपर करते हैं? 7 जो सुरसा अपना उच्च विचार कैसे बनाए? हमारा जी पर दे रहे हैं कि सा जीवन के लक्ष्य को याद रखो। अपना साथियों से जीवन का लक्ष्य क्या है? अपने को कैसे और मांगे बना सकते हैं। यह
है कृष्ण, ऊर्जा,
ऊर्जा विचार का म। मतलब। यह नहीं कि आप बड़ी मोटर भरे तो बड़ा मकान बना है।
या हम कैसे
आप सदा ये पूछो कि हम कैसे जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं? और प्रश्न
here
how to a to
doplisiousavir every time, i time to prime valves, but do not go to go i बोलो कुछ करो, कुछ,
बोलो कुछ
करो, कुछ मुंह
मुंह में सुनी। हमें सबसे पहले सत्य का उच्चारण करना चाहिए। माता जी प्रभु जी के पीछे है। थोड़ा आवाज कम रखी है,
बचो झूल से, बचो
झूल से, बचो
से की आप लोगो को भूख लग रही है। हमने
हमारे घर के रसोई बंद रहते,
हम भाई,
हम रे घर से मले जाते हैं।
लोन आते है,
कई लोग आते हैं सान पुराने, कई लोग शास्तर पढने, सुनने आते हैं, बद्दी में आगे करना चाहते हैं और साथ में किस प्रसाद। ग्राम करना चाहते है। तो अपना पैसा दूसरे को देते हैं। कहीं है जो दूसरों का पैसा देते हैं।
पूरी
कहीं है। तो दूसरों का प्रसाद सोनी कर गलत होता है। वो अपना प्रस्ता दूसरों को देता है। दूसरों का प्रस्ता चोरी नहीं करता।
ठीक है,
दोनों ठीक है, ब्रा कम से कम प्रसाद को खा रहे हैं।
थैंक यू,
बाद,
रे, अरे, कृष्णा सब
लोग, थोडा प्रसाद का व्यवस्था, थोडा जेल जाए उसके हम कुछ इन्सेशन देगे। पहले मारा के बाहर जाएंगे।
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