अनेक ईश्वर , परन्तु परम ईश्वर कौन? | So many God, who is supreme God | 03.12.2017| ISKCON Faridabaad

The video records a multi‑speaker discussion held at ISKCON Faridabad, where participants address practical and philosophical questions related to Krishna consciousness. The dialogue begins with a query about how to sustain enthusiasm when initiating spiritual work, leading to suggestions on personal discipline, regular scriptural reading, and community support. The speakers elaborate on book‑distribution methods, describing a credit‑based system that rewards volunteers for sharing scriptures. They outline two primary means of attaining God: association with devotees and association with sacred texts, emphasizing the importance of both. Practical advice is given on daily Bhagavata reading, training volunteers, and using technology such as mobile devices for outreach. The conversation also touches on broader societal issues—terrorism, inter‑faith tensions, materialism, and the influence of wealth—linking them to the need for sincere service (seva) and bhakti. Financial aspects of sponsorship, the role of personal motivation, and the psychological benefits of collective devotion are discussed. Throughout, the tone remains conversational yet instructional, aiming to guide participants in effective spiritual practice while acknowledging contemporary challenges.
Chapters
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श्री चेतन मन बेसतमआवदमीनमूतले hi srikrishna catania सारे
से, सारे, अरे, राम, रे, राम, राम, राम हैं। इधर से हम सब परिचित हैं। हमें इसके संदेह से भी अच्छी तरह परिचित से इतर द्वारा यह स्थापित किया जाता है।
भगवान कौन है?
हम पलते हैं इस वातारण में इसे भगवान। 1
जब आप इस कौन में आते
हो तो आप सुनते हो।
ईश्वर, परम, कृष्ण, राधे, राधे, गोविंद, ईश्वर, श्री। भगवान उचा।
परम भगवान बोल रहेे हैं,
भगवान क्या
बोल रहे हैं, क्या बोल रहे हैं,
संदेश दे रहे हैं? किसके लिए?
म समाज के लिए खास कर के
परीलाबादकेबाद
भगवान संदेश दे रहे है। भगवान सन्देश क्यों दे रहे है?
भगवान की क्या है? इच्छा, इदाइदहधकानीभती
अलग अलग समय में मैं प्रकट होता हूँ। क्यूँ?
भगवान क्यों प्रकट होते हैं?
क्यों?
कौन बताएगा, ना साधुराम धरमसरसपदार्थ आया धर्म
के वो स थापना के लिए।
आज आप समाज में देखते हो। धर्म फैला हुआ है, सच है और
धार्मिक है भी नाम के लिए और समाज में लेख प्रकार का क्लेश है।
पलूशन की।
हम चिंता करते हैं।
कुछ सबसे पहले दिल में स्कूल भी
बंद हो गए थे।
3 दिन के ले
कई बच्चों ने
कहा पलूशन बन जाना चाहिए।
ज्यादा छुट्टी मिलेगी पोलूशन की तो बड़ी चिंता करते है।
क्यूँ क्यूंकि प्रदूषण के कारण स्वास बिगड़
जाता है
और बिगड़े हुए साल स्वास
से
की सुविधा भी कम हो जाती है। सारे विश्व में इस की बड़ी चर्चा है। पर हमारी बुद्धि, मन, इंडिया, ये सब हो है। कोई चिंता नहीं करता। तो जो प्रचार की सेवाएं हैं, लोगों के हृदय को सा सेवाएं तो परम भगवान चाहते हैं।
क्या?
हम सब जीव जो भौतिक संसार में
भटक रहे हैं, भटक रहे हैं।
सी है मानो, सुख,
टाटा, बिल्ला,
सुख कब तक रहेगा?
हमेशा के लिए
हम देख सकते हैं।
जैसे कि गीता में भगवान कहते हैं।
इस भौतिक जीवन के 2 प्रस लक्षण
हैं 1 दुखालायम, दूसरा, दुखी, दुख और हजीअस्थाई।
भगवान हमें क्या कह रहे हैं?
देखो ये भौतिक धाम से
भौतिक जगत
का नाम है कुंता जगत और भगवान
के दीवर धाम का अर्थ क्या है? क्या? क्या नाम हैं? अंतर क्या है?
दोनों में, कुंता जगत में, क्लेश का स्टिकर्स और धा में कोई क्लेश नहीं, कोई कंस नहीं, कोई चिंता नहीं, कोई निराश नहीं भगवान हमें
गीता के माध्यम
से, वेदिक सासों के माध्यम से, संदक माध्यम से निमंत्रण दे रहे हैं, क्या
निमंत्रण दे रहे हैं।
अगर वे देश को अपनाए तुम शांति का जीवन बिता सकते है।
और हमें यह नहीं सोचना चाहिए।
गीता का सदेश थ्योरी है, प्रैक्टिकल संदेश है।
तो गीता में सबसे पहले तो यह
साबित किया जा रहा है कि पल भगवान कौन है?
अगला विषय क्या है? अगला विषय यह है की आप कौन हो? हमारे अपने पेचान क्या है?
बहुत लोगो के कम लोगों के बाद
अपनी बेचान और इस विषय में भगवान क्या कहते हैं?
आत्मा क्या है?
वे क्या है? आत्मा के विषय में
अनेक शास विज्ञान प्राप्त होता है।
बाइबल में कहा गया है तुम सारे
विश्व के धन को प्राप्त कर लोगे और आत्मा को खो लिया तो क्या प्राप्त किया?
वह आत्मा के विष्य में किताबें बड़े
गहराई से ज्ञान मिलता है?
और आत्मा के विषय में क्या
आत्मा
के कारण चेतना रहती है?
जब तक आत्मा है, चेतना है।
वैदिक सांसद में आत्मा का डाइमेंशन क्या है? वो भी बता गया है।
क्या है आत्मा का डाइमेंशन
के 10
हजार, बाल की लम्बाई की
बाई 10
हजार, ता तो और तक आत्मा बड़ी होती है। ये वहाँ के नौके के 10 हजार
के
तो मेरी शास्त्र द्वारा खान प्राप्त होता है। वो बहुत विज्ञान इसकी तुलना नहीं कर सकते। फिर गीता के द्वारा आपको यह संदेश मिलता है।
समय के बारे में।
समय भी भगवान का प्रतिनिधि माना जाता है। और भगवान गीता में क्या कहते हैं?
समय के विश्व में कौन बताएगा
डिस्ट्रॉयर?
थिंग समय जो है हर चीज को नश्ट कर देना। आज आप खूबसूरत हो, हमे क्या कहेगा डोntwoniज्यादा देर, खूबसूरत नहीं रहोगे, मुलाफा जाएगा।
तुमारी भी।
आ जाइए है की नहीं। समय हर चीज को अभी नई चीज को नष्ट कर देता है। यही चीज को पुराना बना लेना है। तो समय का
बड़े सावधानी से उपयोग करना चाहिए।
1 बड़े प्रसिद्ध भक्त जन के
प्रधानमंत्री थे।
वह साधारण कुटिया में रहते थे।
आजाद ने कहा मैं जमाने महल बना देता हूँ।
तुम इतने विद्वान हो
नहीं।
अपनी कुटिया में ही सुनी के महल
में रहूँगा और हमें हाँ मिलाना।
पड़े। जनेपे हमें बड़ा महत्वपूर्ण उपदेश दिया है, जिसको कई बार विनी सांसद के उद्देश्य के समान माना जाता है। के पल्ले ने कहा 1 पल का भी दुरुपयोग करोगे। सारे विषों के धन से वापस ला सकते हो। इसलिए संत गाय बड़े ध्यान से कार्य करो। 1 समय देवताओं का युद्ध हो रहा था। लोग के साथ।
1 राजा देवमनाजखटवंगा। उन्होंने देवताओं का सहयोग दिया था।
के विजय ने पूछा, हम आपके लिए
क्या कर सकते हैं?
आपके सहयोग से जीते हैं।
रजा ने पूछा ये बताओ और कितना समय है?
वे जिंदगी में बरजा उनका। 1 पल राजा ने कहा, मुझे भौतिक जगत में आने 2 के अंतिम समय का का चिंतन करते हुए दे तो
समय के विषय में
भागवत कहा गया है। कि कदम कदम पर खतरा है।
इसलिए समय का उपयोग करना चाहिए। न की सेवा मे जो प्रकृति है,
प्रकृति भी।
भगवान के
आदेश के अनुसार महाध्यक्ष प्रकृति प्रकृति किसके निर्देश में है।
भगवान गीता में ये नहीं कहते कि कोई कार्य मत करो
से क्या कहा? महर बूधी को मुझे अर्पण करते हुए क्या करो। आज जैसे हम कह रहे थे, समाज
में आप क्या देखते हैं?
बेचैनी बढ़ती जा रही है, घटती जा रही है। निराशा चिंता
क्लेश अब बढ़ते जा। क्यूंकी? ध्यान मे ज्ञान साफ नहीं होना। ध्यान ज्ञान के बिना समाज अधूरा माना जाता है। हमारे प्रधान मंत्री ने योजना चलाई थी। स्वच्छ बहार अभी चल रही है। हमारा है स्वच्छ हिले,
स्वच्छ हिरदे रखोगे, तू चरित्र बनेगा, च्रित्र बनेगा।
सब देश, समाज की सेवा में कर पाओगे और हृदय में मेल रहेगी कर पाओगे। हम कहते हैं समाज में। ये यह दोश है।
सब चोर बैठे है।
वगैरह कारन क्या है सेंगरी लालच, लालच और चाहिए और चाहिए और चाहिए राम। क्या कभी भी इंडिया को संतुलन कर सकते हो।
प्रधान ने इसे कहा है
में हमें छोटी आयु से लदे ज्ञान शुरू बने।
ये जो गीता का ज्ञान है, हमें छोटी आयु से अध्ययन आरंभ कर देना है।
पापाजी की हाजिक इच्छा थी कि भारत
के 5 सालों में छोटी आयु से आप जानते हो
गीता जी के
करते
हैं 1 और योजना करते हैं गीता कॉन्टेस्ट की स्कूल में। आपको पता है पूरे भारत में लाखों भक्त हर साल गीता कॉंट्रेस में भागे थे। और वह सेंट्रलाइज नहीं है। ये दिल्ली मंत्रा लग करता है, बॉम्बे अलग करता है, पूरा अलग करता है।
इसी प्रकार दक्षिण भारत में 2 साल
पहले 1 मुस्लिम बच्चा जीता गीता कौन है पूरी की गीता।
ये गीता कोने
में बैठने के लिए पूरी गीता पढ़नी पड़ती है गीता का सार।
फिर उनको आर्थिक इनाम दिया जाता है।
इसी ने और गीता पढ़ती है। तो इनाम देते समय
हमारे भक्तों ने कहा कुछ बोलिए। मुसलमान लड़के ने बोला जब मैं देखता
हूँ कि सारे बच्चे चर्च जा रहे
हैं, अपने हाथ में बाईबल लेकर जाते हैं।
जब मैं देखता हूँ,
हमारे मुसलमान बच्चे वे जा रहे हैं। हार कुरार होती है? मैं देखता हूँ। हिंदू बच्चे जब मंदिर जाते हैं, खाली हाथ जाते हैं।
कुछ भी हो ये बात सच है। हम गीता के अध्ययन की आवश्यकता नहीं पडती।
गीता द्वारा।
भगवान क्या करे? यद करोशी। हम सब ने कुछ न कुछ तो करना ही है।
हमें पार कर रहे हो, नौकरी कर
रहे हो, घर पर बच्चों को पाल रहे हो। तो भगवान क्या कहते है? आप पूछोगे भगवान कलम कैसे करे?
बुदियारबनकरोभगवान से में नतीजा हर बनकर।
यह रचना छी खाते है। आप खाते हो कि नहीं खाते?
भगवान दे, दे, पूछिए पहले अर्बन करो। भगवान गीता के किसी अध्याय में कहते हैं जो व्यक्ति
मुझे अर्पण किए बिना
खाए वो क्या खा रहा है?
हमारा नियम क्या है? आओ।
तो कृष्ण प्रसाद। और इसी अध्याय में भगवान ने कहा
है पत्र पुष्प फल। तो यो में भक्त या
तुम प्रेम
और भक्ति के साथ
जल बिहार पर करोगे।
1 तुलसी का पता भगवान कह रहे है।
जो भी तुम खाओ पहले मुझे अर्पण करो। प्रसाद खाओगे प्रशा के माध्यम से राबाजीनेजबइथव
संस्था आप में से कितने बार खाते हो?
वाइस प्रोग्राम में
जैसे जानते हो।
शीपुरऑलेटोरियम में कुल 3 हफ्ते पहले भारत बारिश थे। आपने फिल्म देखी थी तो
अमेरिका में
पहले केंद्र की स्थापना की तो प्रभाजी खुद लोगों को प्रसाद बनाकर के कई
लोग प्रसाद के बहाने मन दिला दे दे खाओ।
2 कृष्ण प्रसाद का जो भी दान।
2 जो भी कार्य करो
तो ये
ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? चौथे दर हर क्षेत्र में
हमें मार्गदर्शन की आवश्यकता रहती है।
करेक्ट आपने भाषा सीखनी है, देखना पढ़ना सीखना है, ड्राइविंग सीखनी है। आप को। उसी प्रकार ध्यान, ज्ञान भी। अगर आप अनुकूल करना चाहो तो ज्ञान क्या?
गीता के विषय में यह नहीं भूलना चाहिए।
ये सबसे प्राचीन ज्ञान है।
इस पृथ्वी पर चौथे अध्याय में भगवान
गीता के इतिहास देते है।
क्या कहते हैं यह ज्ञान मैंने दिया था। सबसे पहले किसे है?
उनका नाम क्या है?
ज्ञान कहाँ पहुँचा? फिर पहुंचा मनाजिकश्वाकू जिनकी। बाद में भगवान राम,
गीता का ज्ञान क्या है?
ओलेस नॉन प्लानेट, सबसे प्राचीन गया।
5 साल पूर भगवान ने ज्ञान फिर से दिया। क्यो
समय के साथ।
2 भगवान को क्यों चुना?
तो गीता के द्वारा हमें भक्ति का
संदेश मिल रहा है।
भागवत के द्वारा
भक्ति का संदेश मिल रहा है।
भगवान गीता में है
में भोक्ता नाम
यगतबसमसमोा
ये स्वीकार करो। पर भगवान हर कार्य के भोगता है। हाँ, पर हम भोगता नहीं है।
भोगता
यह स्वीकार करो कि वो हर चीज के स्वामी है। हम स्वामी नहीं है, मालिक नहीं हैं,
यह मत स्वीकार करो।
वो हमारे क्या है।
छुप वेल्श और भगवान की जो इच्छा
है, जो आदेश है, वह हमारी भलाई के लिए है।
कह रहे हैं भगतिया जा। भक्ति 1 माध्यम है जिसके द्वारा आप मुझे प्राप्त कर सकते है। तो गीता के अध्ययन के द्वारा क्या लाभ होगा? 1 आप जानोगे की पर भगवान कौन है?
कोई शंख नहीं रहेगी, कोई कन्फ्यूजन नहीं,
कोई नहीं, भगवान का परिचय भी है। और अर्जुन ने क्या कहा?
सीधे दे वाला व्यास नाता, सब का निर्णय। यह है
गीता।
गीता के द्वारा आप जिस काम भाव से कार्य कर सकोगे।
आज हम
बड़े छाकामभाव से करते हैं, जिसका भाव का प्यार, ये ज्ञान रखना। हर चीज भगवान के
रेशन
कारमन, भगवान के कर्म करो पर नतीजा कैसे, आर पर कर राह।
जब तक हम ये सोचेंगे
नतीजे के
भोक्ता, हमें जब तक हम बंधन में फंसे रहोगे। जब आप यह स्वीकार करोगे, ये हर
करे का भाव होना चाहिए।
भगवान की प्रशंसा मैं आपका मन शांत, गीता क्या कह रहे हैं? ऐसा कार्य करो जिस के द्वारा आप जर्मलृकेबंधनसी। ये है जीवन का असली, ये शासन का परेड, अर्थात ब्रह्म जिज्ञासा।
अब ये दुर्लभ मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है। इसके द्वारा जिज्ञास करो।
आप चेतन क्षेत्र पढ़ते हो।
2 भाई थे, रुकोरप्रशासन,
बड़े प्रसिद्ध पंडित थे।
और उन दिन में मुसलमानो का राज्य था भारत में। और ये लोग धवाबुजेंशाजोचापरूसी करके राजा बन गए थे। उनके शासन में नौकरी सेवा करते थे, उजरकी रूची नहीं थी।
उन्होंने कहा समाज में हमें बड़ा आदर दिया जाता है। ख अमीन जा तो आज लोग अज्ञानता में है, अज्ञानता में हम जन्म लेते
है, ज्ञान में हम पलते हैं। और ज्ञान में ही क्या हो जाता है।
कोई भाग्यशाली व्यक्ति है जिसे ज्ञान मिलता है। जैसे आप सब जो यहाँ उपस्थित हो,
अत्यंत भाग्यशाली हो, वो भाग्यशाली है। नहीं, आपका क्या विचार है,
लगता है नहीं हो। अगर आप भक्ति में नहीं जोड़ते तो आज कहाँ होते है।
बुरी संगत में बुरी हालत हो।
भक्ति का।
1 और बड़ा अच्छा लाभ है, सुनना चाहते है।
आपका गया में वो आपका खर्चा भी हो जाता है। जब से हम इस कॉल में जुड़े हैं, हमारा खर्चा आधा हो गया है।
पहले हम यहाँ खरीदे थे,
दफ्तर से,
घर, घर से, मन में और चौथा स्टॉप नहीं है।
तो
अनेक जन्मों के पश्चात भागे व्यक्ति है जिसे भक्ति के भक्ति का ज्ञान प्राप्त होता है और ज्ञान प्राप्त होने
से काम नहीं चलेगा। आप के पास बहुत अच्छा बीज है। बीज देते हो, बीज को खाने के लिए क्या आवश्यकता है?
आज क्या हो जाता है जल की और बोले उपदेश देते
इसकी तुलना की जाती है।
शव, राम और कैसे केवल ज्ञान प्राप्त करना से काम नहीं चल रहे। और वो शुरुआत है। और हम चाहते हैं भक्ति के भाव
बढ़े हैं कि नहीं। भक्ति के भाव को बढ़ने के लिए
हमें हृदय की मेल दूर करनी पड़ेगी। हृदय में काम क्लोज?
2 मो मद मछलिया का प्रभाव है।
इस कारण हम भगवान के श्रम नहीं हो के दौरान वपगसमिजीने हमें अनेक ग्रंथ दिए हैं, जिनमें 2 ग्रंथों का नुवाद
प्रॉपर्टी ने किया है। देश मे और तो शिवेश
कितने कितने
भक्त ने शिवेश पड़ी है।
शिवम
कहते हैं भगवान के जो नाम
है,
चीनी जैसे मीठे हैं,
भगवान के जो लीला है, चीनी जैसे मीठे हैं,
भगवान का जो चरित्र है, चीनी जैसे मीठे हैं। पर हमारे जीव में
अज्ञानता के छाले हैं।
विदिया, विदिया और अविदियाअविदिया का क्या अञंदाअविधिया के कारण हमें मीठापन महसूस नहीं होता। अगर हमें हरे राम का मीठापन महसूस हो तो दिन रात जाप करे।
हाई, राज ठाकुर, जो हरिदास ठाकुर से परिचित हो आई। दाज ठाकुर। दिन में कितनी बार नाम करते थे। 1 समय काजी।
रेव ने कहा, वह जरा मुसलमान खानदान
में हुआ है, तुम क्यों ये हरिनाम
करते हो
ने कहा, जो भगवान का नाम है, वह कोई लाभ पमझेापराबजीजब ईरान में गए थे, कोई नाइंटीन सेवंटी फाइव में। वहाँ प्राबाजीमिलेथके, मूल, ग, बहुल, बाबाजी, चैनल का, लाभ का नाम लो और नियम पालन।
तो हरिदास से कहा हरिदास ने इनकार कर दिया।
नाम को बंद करने के लिए
क्या परिणाम हुआ? राजा ने अपने सिपाहियों को कहा। पीटो इसे 22 बाजारों में घसीट कर
अंदाज को ले गए।
और राजा काजी के प्रतिनिधि सिपाई पीटते गए, पीटते गए। अक्सर उनका अभ्यास था कि दूसरे तीसरे बार तक पहुँचे।
आने का ध्यान
है।
कृष्ण का जाप करते गये। सब हैरान हो गये।
वे हरिदास जितने दयालु थे।
उन्होंने सोचा
अगर मैं जिंदा रहूंगा
तो
काजी, जो मुझे पीटने वाले नौकर थे
और वो जिंदा नहीं छोड़ेगा। राज के मन में भाव सा उनका भी उधर हो जाए, जो उनके पीठ रहे हैं। कोई स्थिति हम क्या कहते है? 1 मानेंगे हम 2 मानेंगे या हीरा ठाकुर।
उन्हें पीटा जा रहा था। 22 बाजारों में पीट लिया था।
कोई चोट नहीं आई। उन्हें। वहा नाम करते गए। तो फिर उन्होंने सोचा
यार मैं जिंदा रहा। काजी ने इन 2 को मार देना
भरीलासनेअपनीशदकी द्वारा सांस लेना बंद कर दिया। तो पीटने वाले बड़े खुश हुए। अंत में हरि दास की मृत्यु हो गयी। उसने जाकर काजी को कहा। राजा को भाई राज की मृत्य हो गई।
22 में।
तो
राजा ने कहा,
तुम मुसलमान विडियो के अनुसार बढ़िया ले लो।
नहीं, यह तो अपराधी आदमी था। हमारे धर्म का विरोध किया।
इसने जो गंगा में फेंक, 2 गंगा में फेंक दिया। राज तैर कर किनाने में आये और कुटिया में पेड़ के नीचे बैठ जाए। फिर उन्होंने भजन शुरू कर दिया। जब राजा को सूचना मिली
की वो हरिदास, जिसको उन्होंने 22 बाजार में पिटवाया था।
और इसे उन्होंने सोचा कि मर गए, जिंदा है और समझ गए। ये कोई वो ऊँचे कोली का
पहिला ठाकुर तो हर सिटी में।
रूप कहते हैं, विद्या के कारण
हमें
हर नाम की रुचि महसूस नहीं होती। पर अगर हम ध्यान को हरी नाम देंगे
तो फिर से मिलाप होगा। जैसे आप बीमार होते हो, दवाई लेते हो, इलाज कराते हो।
बेटी को ज।
तो ये भक्ति का बीज। अगर हम चाहते हैं ये भावना बढ़े
तो किस चीज की आवश्यकता है?
किस चीज की शबनम आप सबका अपना अभ्यास होगा।
वह पहले स्कॉलर में जुड़े थे, भक्ति
में बहुत कम रूची थी,
आकर्षण तेज था। और जैसे आपने जॉब किया, जब बढ़
आया, भक्तों के संग में रहना शुरू किया।
क्या परिणाम
ध्यान दे कर बढ़ते आपका अभ्यास होगा।
जिस दिन आप जाप, चीटर करते हो,
अच्छी न रखते हो।
आपका ध्यान दे, गुस्सा ऊँचा रहता है। सच बात है मान लो
ध्यान।
पर लोग जॉब नहीं करते, ने विधि
का पालन नहीं करते।
तो क्या होता है?
क्या परिणाम होता है?
माया, खबसूरत बन जाती है, बाकी बदसूरत जॉब करते हो ध्यान से।
भारतीय खबसूरत बन जाती है। माया।
यह चाबी आपके हाथ में शरम के दिन भक्तों के लिए सबसे आवश्यक कारी
और सच्चे दिन
भक्तपुर भी रोकेगा।
अगर आप।
शर्म के तुरंत आगे उन्होंने कहा,
यह हमें साधु संग में रहना चाहिए,
ये
भी बहुत महत्वपूर्ण है।
मेरे में पड़ते हो बार बार।
1 बड़ा प्रसि श्लोक है।
चेतन इस विषय पर कौनसे श्लोक है। वो
कौन सा सा
सा से
भक्तों संग मे। आज सुबह में अंग्रेजी क्लास मेरा।
उन्होंने कहा कि
पापाजी से जब रूस में गए थे, पापाजी ने कृष्ण भक्ति की स्थापना की। यूरोप में, अमेरिका में पापाजी ने सोचा,
यह उन दिन में कॉम्नेसलादिया था नासिक
सरकार जी पर केवल 5 दिन के लिए गए, 5 दिन में। 1 भक्त को बस भक्त बन गया।
बाबाजी होटल में खेले थे, बज गए
थे घूमने के वीजा के बह ने, और कोई साधन नहीं था।
पापा के 2 सेक्रेटरी थे,
जो बजार में दूध और फल खोज रहे थे।
होटल में तो मांस ही मिलता था। तो दूध और फल खोज रहे थे।
और उन में रूसी लोग और
कई
ने कहा दूध का मिलेगा फल कम। मिलेगा।
लोगों को बात नही मज।
रास्ते में उन्हें 2 लड़के मिले,
1
तार रशियन, 1 था इंडियन डिप्लोमेट का बेटा और जो रशियन लड़का था टूटी फूटी। अंग्रेजी भी ध्यान था था योगज।
तो उन्होंने उनसे पूछा, कोई दूध की दुकान है?
हम दूध लेना चाहते हैं और फल खरीदना चाहते हैं।
उन्होंने अंग्रेजी में जवाब दिया,
बड़े खुश नहीं था।
फिर वो ले गए उन्हें दुकान दिखाने के लिए।
रास्ते में।
लड़के ने कहा में तो योग में विश्वास करता था। योगा।
उससे कहा मेरे गुरुजी यह है। वो तो बहुत बड़े योगा टीचर है। मिल सकत तो प्रॉपर गए थे 5 दिन के वीजा पर।
5 दिन, 5 दिन में क्या कर सकते, 2 दिन तो 3 या प्राबाजीकेप्रापाजी
वो लड़का लड़का
होगा।
सीखे पाजी भक्तियों का शिक्षा दे दिया। और लड़के ने बड़े उछा से सितार का। बाबाजी ने कहा सैंपल 1 चावल का तेज कर सकते हो।
बाकी का केस बना जाता है। पापाजी लिखा गए।
इन लोगों में बस्ती की बड़ी इच्छा है।
तो 3 दिन के अंदर प्रवाज लड़के
को पूरा ट्रेनिंग दे दिया और दीक्षा
भी दे दी, शादी दिया।
और फिर प्राबाजीआगे चल पड़े 5 दिन भी डाला।
प्रभा ने उनसे कहा तुम घर घर
जाओ लोगों को बोलो कृष्ण भगवान पर भगवान है।
और भगवान की प्राप्ति के साथ
ही उस लड़के ने शुरू किया 1 किताब न थी।
उसके हाथ में कुछ नहीं था। उस ने बोला कृष्ण भगवान पर जिसमे
कृश्णन नाम भी नही सुना, वो देखो।
आज 4 गया।
आज वह लाखों भक्त है।
तो साधु रहोगे तो शुद्ध विचार रहेंगे और भक्तों के संग में रहोगे मुझे विचार भी आ सकते है।
चेतन
साधु संग में रहो और किस से बचो राज। उन्होने उधार दिया किस प्रकार भक्ति का बगीचा नष्ट जाता है।
पागल हाथी,
भक्ति की जो विधियां हैं, उनके विषय में हमें बड़ा स्पष्ट क्याल प्राप्त होता है।
आसन द्वारा तो गीता का निर्णय क्या है। ध्यान में गीता का सार हमें अठारहवे
दिहाई में प्राप्त होता है। अठारहवें दिहाई में भगवान कहते है।
3 प्रकार के सुख प्राप्त कर सकते हो। 7 वे शोक, राजसिक शोक और 7
वे सुख के में भगवान क्या कहते है?
शुरू में कड़वा, बाद में मीठा जेस
के द्वारा अजमान सक्षता का ज्ञान बोले राज्य में क्या कहते हैं। शुरू में मीठा, बाद में करवा जो कि के दौरा प्राप्त हो और दामाजिकसुखसेअंतर का ज्ञान।
तो आज समाज में लोग राज्य, सिख और तामसिक सुख के पीछे है।
और यह बुद्धिमान है हार्दिक सकता।
शुरू में करवा। जैसे जब कृष्ण भक्ति में जुडते हो। आपको कहा जाता है 1 महा 2
महा करो, हसते हसते बढ़ाते हो।
सोना
से शुरू में हमारी आदत रहती है, बहुत ही विषयों को जागना पड़ता है। और बाद में यह मीठा बन जाता है। और राजसिक शुरू में मीठा इंडिया क्षेत्र के जो कार्य है, शुरू में मीठे देखते हैं, बाद में कर।
ले।
अगर में उदाहरण दिया गया है।
जैसे अगर आपके हाथ में खुजली हो,
शुरू में आप खुल के थोड़ा आनंद आएगा, फिर बीमारी तैयारी तो साँसों के ध्यान से ज्ञान दादोरोहोतीहै। जैसे दूसरे अध्याय में अर्जुन ने भगवान
से कहा आप मुझे मार्गदर्शन दीजिये,
ज्ञान में नही समझा करूँगा।
भगवान ने फिर गीता का ज्ञान देना आरम्भ किया।
अठारहवे अध्याय में भगवान ने अर्जुन से क्या पूछा हे अर्जुन। क्या तुमने ध्यान से ये संदेश सुना है?
क्या तुम्हे ज्ञानदा दूर हो गई है? अर्जुन ने क्या कहा? और में
क्या कहा है? मैंने ध्यान से सुना वो दूर हो गया है।
अब मैं आपके आदेश के अनुसार
तो ये होना चाहिए। हम सब का भाव।
यह भगवान के आदेश के अनुसार। और इसी अठारहवें अध्याय में भगवान ने क्या कहा?
सब भक्त, वे सबसे प्रिय कौन है?
मेरा प्रचार करता है। ज्यादा लगा हुआ।
तो ये जो गीत है, जयंदगेउपलक्ष, जो हर साल हम प्रयास करते हैं, गीता मारेंगे। इसका मूल उद्देश्य क्या है? क्या है समाज का?
रामजी ने कहा इन ग्रंथों में इतनी शक्ति है। यक 1 स्लो को ध्यान से पढ़ लो।
आप जीवन के लक्ष्य को समझ सकते हैं। आपके ग्रंथ में है क्या?
भगवान का उपदेश। तो आध्यात्मिक दृष्टि से समाज में इस िविज्ञान की कमी है।
और हर समस्या का कारण है।
यह अज्ञान दादा हमें दूर करना है। कृष्ण सूर्य, सभा, मय, अधिकारा। यहाँ कृष्ण थे भी, जहाँ कृष्ण है,
वहाँ क्या नही रहेगा?
शोक कष्ट क्लेश से बचने का 1 उपाय है गीता का अध्ययन, गीता का अध्ययन। क सारे लोग गीता क्यों पड़ रहे हैं? यह असली ज्ञान नही कहते है।
बहुत ज्ञान
नहीं कहते की आप बच्चों
को स्कूल में मत।
2 पर ज्ञान के साथ ध्यान के ज्ञान शुरू होना।
इसलिए 9 वे ध्यान में भगवान ने क्या कहा?
राज भी दिया।
यह सबसे महत्वपूर्ण या
कुछ महीने पहले अगस्त के महीने में मैंने 1 लेक्चर दिया था।
स्टामफोयूनिवर्सिटी में इस टाइम पर यूनिवर्सी नाम सुना अमेरिका की बड़ी यूनिवर्स। वह मुझे भरत ने कहा 3200 डिपार्टमेंट है, यूनिवर्स 1 डिपार्टमेंट नहीं है।
याकि अध्यात्म।
तो आप भक्त जन जो कि
इस सेवा में जुड़े हो।
आप समाज के सुधार की सेवा कर रहे हो। ये हमारा आंदोलन है।
स्वच्छ खेल दे और स्वच्छ देव।
कैसे है राम के द्वारा, प्रशासन के अध्ययन के द्वारा। आज लोग देखिये, हजारों व्यक्ति लाखों व्यक्ति हैं जिनका सुधार हुआ है। इन गंदे माध्यम से। तो भगवान ने स्वयं कहा है सब
भक्त में सबसे प्रिय कौन है? मेरा क्या करता है, उससे ज्यादा पीएल
न कोई हुआ है न
हम में
से कौन कौन के पीएम बनना चाहते हो। सब
कई बार हम सोचते हैं।
हमें कॉम्पलीमेंट टिकट जैसे कोई राष्ट्रपति आये
डेली यूनिवस्टी को ऑलरेडी डिग्री देती है।
अगर हर व्यक्ति डेली, मेल, सोचे मुझे ऑनरेरी, डिग्री मिल जाए तो सम्भव है राज्य सा यूनिवर्सिटी है जिससे 4 साल पहले डिग्री ऑन और मेहनत करोगे तो ये डिग्री मिली है। तो इसी प्रकार अगर हम भगवान के
प्रिय भक्त बनना चाहते हैं
तो क्या प्रयास करना या इंग्लिश में कहते है।
कल 22
भगवान ही सहयोग करते हैं। इसे प्रयास कर दे।
इस विषय में भगवान गीता में कहते
हैं की प्रयास करते हैं।
मुझे समझने के लिए कुछ कभी भी
हो, मैं क्या करता हूँ, दूर कर देता हूँ।
तो
ये जो प्रजा की सेवा है, समाज के सुधार की सेवा है। आज आप जानते हो, आपके दे दी। एनसीआर में लगभग 13 मंगल है। जानते हो मेरा बाद सादनगर गाजियाबाद गुडगांव आदुगढरोइनीजाविभाग साईबाबाद पनीर
नोरा। इस समय तेरा मंदिर है
और 60 बेस है। बेस समझा होता है। यहाँ के भक्त 1 डेपार्टमेंट से नौकरी करते हैं, पढ़ाई करते हैं और सुबह
मंगल आरती वगैरह भी करते हैं।
दूसरे शब्दों में आज हजारों भागते है।
ये सब कैसे जुड़े हैं। आपका का प्रचार प्रचार का माध्यम क्या है? आज कल के लगभग साढ़े 600 केंद्र
है सारे में, और कैसे जुड़े लोग?
भक्ति सिधांत हमारे परम।
गुरु ने इस सेवा को क्या नाम दिया था?
बेहद
तो आप जब मृदंग बजाते हो, वो है छोटा छोटा मिरदंगा आपका दंगा बच्चे के बाद मिरदंगा
है ये मिरदंगा
जो बजाते हो 4 बच्चे को या
एडका, उसके बाद थोड़ी दूर तक जाती
है, रीदाबाद के दूर से गोले तक भी रह जाएगी।
तो अब ग्राम जब बाटोगे रीदाबाद में,
उसका अध्ययन इंग्लैंड में भी हो सकता है। ये किसी और
ये है।
और 1 समय हमारे भाग गए थे अफ्रीका में 4 करने, और उन्होंने सोचा की यहाँ लोगों को
याद है ही नहीं।
जो जब वो वहाँ अमेरिका के 1
छोटे देश में पहुँचे, उन्हें वहाँ के 45 विद्यार्थी मिले।
विद्या ने कहा we now what is क्रिश्नर?
कॉरशसनेsआपकैसे? जान भी आये है,
इंग्लैंड में पढाई कर रहे थे, हमने कई किताबें खरीदी, व प्रभावित हुए।
हमने यहाँ का प्रचार शुरू। क?
तो ऐसे लाखों उदाहरण है।
आपके।
दिल्ली में ही 1 व्यक्ति ने गीता ली थी, 10 साल पहले 10 साल गीता खोली, मेरा ही 10 साल के पश्चात 1 घर में दुर्घटना हुई।
जब दुर्घटना होती है, हम शोक में आते हैं, कई बार भगवान के जाते है।
और फिर उसने गीता पढ़ना शुरू किया। उसे लगा कि ये जो उपदेश है, यह मेरे लिए है।
जब आप गीता पढो आप अर्जुन के प्रश्न देखोगे तो आपको लगेगा। अरे, ये तो मेरा प्रश्न था। अर्जुन ने आपकी तरफ़ से भगवान से सारे प्रशन भूल के तो
प्रभावित हुआ।
ऐसे ही बयान में हमारा भाग घर
घर जा रहा था।
गीता वान में 1 और दिन पहले घंटी दरवाजा नहीं खोला, फिर घन्नी मारी, फिर घनी मारी, फिर जब खोला तो
कहने लगी, फिर हातबाहत्याकी तैयारी कर रहे थे।
तुम क्यों। आए ने कहा गीता का क्या संदेश है?
आत्महत्या का क्या परिणाम है?
तो आज लोग झेल पी रहे हैं। मनुष्य जन्म पाया या भाजिया, धान
झेल पी रहे है।
क्या कहते हो अमित पियो,
जब आप
कहते हो अमृत पियो, आपको क्या जवाब मिल रहा है?
हाँ, हमने दे।
2
नहीं, कई कहते हैं भागो यहाँ
से, क्या हर साल जाते, आपको पता
है कितने भागवत में पढते हो। 1 दिन के दिन महाप्रभु ने भगवान
नीति
लाकर कहा सुनो सुनो, हरिदास नीति
नंदा, मेरे आदेश तो तुम, तुम सब घर घर जाओ।
और सबसे हाथ जोड़कर कहो बोलो, कृश्णा
आगे
करो, किशन का नाम लो
की
उपासना करो, किशन की शिक्षा अपना, किशना
की शिक्षा कहाँ है तुम और वापस
आकर मुझे बोलो क्या उपदेश का परिणाम हो।
तो
उन्होंने प्रचार शुरू किया। भगवान के नंदा और हरिदास ठाकुर महान शक्ति का। तो घर घर जाकर विचार कर रहे थे।
कई घरों में तो उनका बड़ा अच्छा स्वागत किया।
उन्होंने कहा संत आ गए, हमारे घर में घर को परिसर बनाने के लिए।
बोली हम क्या कर सकते हैं? जो उन्होंने का कि हम लोग
जरूर
ले गये, कई घर में गये, लोगों ने दरवाजा खोला देख लिया।
कौन है?
वे जान गए, कहा कि जब हमने प्रयास किया श्रीवास करने के लिए, तुमने
हमें आने नही दिया।
गेट।
आउट कर भी
लगता है या छोड़?
2 जासूस लोग संदमित वस्तव में आये हैं।
आयेंगे चुराने ये परिणाम किसको मुकरना पड़ा में भक्तों को कहता हूँ। आप जब प्रचार में जाते हो, वहाँ भी
कई घर में जाते हो, कई
मित्रों से मिलते हो। वो बड़े उस आपका स्वागत करते हैं। साल 2 बेटी दी थी, ऐसा 4 बेटी थे। कई घर में जाते हो तो लोग
आपका अपमान भी करते हैं।
काम नंदा लोग।
कई बार लोग कहते हैं आप मुफ्त
में क्यों नहीं बाटते?
हमारा उतर क्या है हम लोग खुशी से बाते मु का। तो अंत में विधता और उच्छा दोनों की आवश्यक है। वित्त का अर्थ है विधता प्राप्त होती
है जब करने से, अच्छी साधना लगे
से और उत्साहित पूर्ण प्रयास करेंगे तो वैश्य ही प्रात होगी।
शुरू हुआ था, वहाँ कोटा होता था 10 हजार की। तो ये प्रचार की सेवा है। ये अत्यंत सेवाएं बैश के विषय में। जैसे आप सुन बैठे हो, बड़ा दुख, दुखी, वैसा की इच्छा रहती है। सब सुखी ने आपके फ्रीदाबाद का इतिहास में जानता हूँ। शुरू शुरू में आपका वाद के मंदर पहले तो आप कहाँस सेक्टर में किराये का मकान था। किराये के मकान में आपका संग संग बढते गया है की नहीं। भक्तों की संख्या बढ़ गई। फिर भगवान ने आपको यह सुन्दर स्थान दिया। यह भक्तों भी इतनी रुची थी गोपेशरप्रभु। अब भक्तों को इनाम दिया जाए।
क्या इनाम दिया सुंदर।
यहाँ भक्त
और सुन्दर बनाना है।
प्रयास करे हो अपग्रेड और सुन्दर बनाने।
भगवान जब देखते हैं कि भक्तों की इच्छा है, सेवा करें। भवन को मौका मिले है। ये समाज की सेवा है, देश की सेवा है। भारतीय संस्कृति। नष्ट हो गए। वैसे प्रोगाम श्री वोऑलिटोवाइसपरलर ने कहा इस कोले संस बेजिक। धर्म को सारे विश्व ले गए। इसे प्रॉपर जी ने शुद्ध संदेश दिया
सारे विश्व में और आयाम दुनिया के
किसी कोने में जाओ।
आप हर पाक, मिलेंगे और मगर गीतर, मिलेगी
और कृष्ण भक्ति।
पूरे। मानव समाज तो सबका बहुत बहुत धन्यवाद की। हर साल आप से योग देते है। मेरा थाने और थोड़ी 4 पर्दे के और भी कितने भगते। वे हजार भक्त हैं।
तो प्रचार करोगे।
भक्तों की संख्या बढ़ेगी और हमें साथ में गीता का अध्ययन भी करना है। तो आज का संदेश यह है।
कम से कम यह निर्णय कीजिए। 1 श्लोक गीता का।
7 ब्रे के साथ रोज पढ़ोगे। आप तैयार हो। यह जिम्मेदारी उठाने के लिए 1 लोग
रोज पक्का
और उषा के साथ सब जुड़ेंगे। इस प्रचार की सेवा में। प्रचार की सेवा सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। जुडगेपैरथनमेऔर मेरे ख्याल से आप प्रचार बढ़ाते जाओगे। तो आपको ये बंदर का कमरा दंगा बनाना पड़ेगा।
अभी तो फुल है, है कि नहीं।
हाँ हाँ, 1 देश प्रेशन है किसी और को 1 करन, कोई प्रेशर नहीं है। पूछिए प्रश्न पूछिए। अगर आपके कमेंट से तो कमेंट भी दे सकते हो।
किशन महाराज
महाराज मेरा प्रश्न यह। है कि हमने रोज कहते हैं से गुरुजी से उत्तर देते। इसका असली अर्थ क्या है?
व कैसे प्राप्त होती है?
गुरु यह है अपने मन का सन्देश नहीं देता। जैसा की बाबाजी। हम कहते हैं प्रापाजी की वाणी रजामप्राबाजीकी
वाणी पर देखोगे तो सौ प्रतिशत उनके
गुरु की वाणी है। गुरु की वाणी। उनके गुरु जी इस प्रकार का कृष्णा तक पहुंचा। अब कहते हैं गुरु की प्रशंसा। गुरु तो केवल 1 पोस्टमैन है। गुरु की प्रशंसा का क्या क्या आप करोगे। कृष्ण भगवान कहते हैं जब गुरु प्रसन्न
होता है तो
जो भगवान का सन्देश गुरु पर बड़ा दौर प्राप्त होता है
वो है सबसे उत्तम संदेश और जीवन में रक्षा प्राप्त कर सकते हो और
संदेश का पालन कर।
मारे
1 शो को रोकने और
दे
देता, नहीं आ पाती तो देता कैसे करे की शास्रों बाद और
बार बार
आपको याद दिलाए महानगर आप।
गीता भागवत हम पढ़ो
अनेक महत्वपूर्ण विषय चर्चा बार बार की जाती है और गीता मे भगवान भागवत में भगवान के हस्ते प्रशा भगवत हम सुनोगे हिदेकी बैन
चेदरपरमाजरोजहरिनाम करोगे की बहन जो हमें
रोज
सुनना है, ने 1 बार सुन ली।
हाँ पर
रोज सुनने से कम आवाज सुनना चाहिए।
हरी कृष्ण बन
माला माला करने का प्रयास करता हूँ और कुछ करने का प्रयास करता हूँ। उसके बावजूद बहुत कम नहीं होता। बहुत आदर्श लगता है की सब छूटेगा
यह इस जीवन के साथ कैसे छूटेगा।
अगर आप धीर धोकर प्रयास करोगे छूटेगा। हर चीज के लिए टर्मिनेशन आवश्यक है। उत्साह आज निश्चय धर्य। जब तक करमा प्रवर्तन संगत आगे सदर हुए थे। सभी बीपसुदतीरुपगसमी कहते हैं अगर आपको अध्यानमिक जीवन में सफलता चाहिए तो उच्छाहतहोदेर्धहोकर सेवा करो। सो। यू नीड ट्रबनेशन डिटर्मिनेशन कैसे आता है जॉब करने से
तो
अगर आप सीरियस हो तो थोरा डिटर्मिनेशन करना पड़ेगा के
यस यस
पूछिए हाँ पूछिए। वह पूछते हैं हाँ पूछिए पूछे पूछे
जल्दी जैसे है,
मन भटकता है मन बैठे जी मन भटकेगा, उसकी चिंता मत करो। 1 नोर
वो नींद आती है, यह
भी सच बात है। क्लास में नींद आती है, पर शालम सामने तो नींद नहीं आती, लेकिन नींद की आती है। वह रुचि नहीं है। तो रुचि को पैदा करने के लिए जब करने की आवश्यकता है। समझे रूपा कुसमी ने कहा न भगवान के नाम मीठे हैं और विद्या की बीमारी है तो हमें इस बीमारी को दूर करना है। इसका साधन है regular chanting heran reading
okay yes yes
थैंक यू सो मच फन फॉर asociaशiनमyकवेsन मेरा प्रश्न है जिसे आपने क्लास में बताया था कि हमें अपराध से बचना चाहिए। मुक्ति करते लूंकि देखता हूँ कि बहुत सारे हैं, बहुत सारी डिजायन तो उसकी वजह से वैश्नो के प्रति अप है। तो हम क्या करें?
कैसे किस करेगी ही को अवॉइड कर सकते है।
simple anser
try try try we try
harder the slogan प्रयास करो जॉब करो पढ़ो साधन संग में रहो के भक्ति के लिए अनुकूल है, उसे स्वीकार करो प्रतिकूल है उसे याद सो ट्राई hard
आप 1 कदम उठाओगे भगवान के प्रति
भगवान 10 कदम उठायेंगे आपके
आप केवल थोड़ा प्रयास करो,
बाकी सहयोग भगवान देंगे। और पहला कदम आपने उठाया है the hans, ओके, yes i o se ha, no green on the mataji,
who you
have a quit lady first okay।
इंसान को चाहिए। लेकिन कहते है की दुःख सुख कम भी होते है। तो ईश्वर के नाम का बदला,
हम ईश्वर का नाम इस भाग से नहीं लेते की कोई कैश नहीं आए। हमारे कर्मों के अनुसार सुख और दुख तो हमें भुगतना पड़ेगा यह उम्मीद नहीं करो। अभी हम विकसित हो गए।
नाम लेते हैं, कोई दुख नहीं आएगा।
ये जरुर है जो भगवान के नाम लेते वो इत्यादि आपका दुःख का कोटा कम हो जाता है और जीरो नहीं होता। तो इस उम्मीद के साथ हमें भक्ति नहीं करनी चाहिए कि कोई कैश नहीं आये, कोई कैश नहीं आये, कोई बीमार नहीं हो। घर में सबको लौटरी टिकरा दे जाए। हम भगवान से सौदा नहीं करते,
सौदा
करोगे तो वह काम करन चलाता है। भक्ति में अगर कश भी भुगतना पड़े और सुख माना जाता है। क्योंकि आपको कश् भुगत रहे हो और बीमारी है हम सब का कर्जा है। जब आप कज भुगते हो, आप अपने
कर्जे को घटा रहे हो, आप बैंक
से कर्जा लेते हो, जब वो कर्जा चुकाते हो, जेब में कम पैसे रहते हैं और कर्जा चुका लेते हो। जब आपको कश भोगना पड़ा या आपका परिणाम है। आपको भुगतना पड़ेगा ही बकी में आने से वो सौ पॉइंट हैं। तो 1 पॉइंट भरना पड़ता है। आप समझ ले मेरे का कम हो जाता है। फिर आप भगवान से बिजनेस करना चाहते। सौदा करना चाहते हैं तो हलके
पर
आप की सोच दे। हम सब जब जन्म लेते हैं सूकर 2 का कोटा लेकर आते हैं जो की निर्णय किया जाता है। पूर्व जन्म के संस्कारों के द्वारा आप ने पाप भी किये हैं।
सजा ये कैसे चलेगा
सुख दुख हम सब का फिक्स है। ओके
यस महाराज।
यह प्रश्न है महाराज की, हम बंगला में गाते हैं। सारा की सारा वो हम आपको कैसे पसंद कर पाएंगे।
आप जब भक्ति के वीडियो का पालन करते हो तो भगवान की कृपा से हम गुरु परब कर रहे हो। समझे सब ऑटोमेटिक चलता है, नरका खोलते तो पानी आ जाता है। जब आप भर्ती के नियम कब पालन करते हो तो आटोमेटिकली भगवान हाजी
कuikलीशyeसवो
बोले
साथ वाले के साथ क्या साथवाले
हाँ।
इसके साथ अपना सर कैसे
सब के दास बनो।
सबसे बेहतर के तेरी महाप्रभु ने क्या कहा?
ना सुने चेना
लेना, सबके दास बनो। हम जाते हैं। चलो हमारे दास बने, हमारी खुशिया मत करे, हमारी जम, सबके दास बनो, सबके सब के प्रति सेवा बहाव। फिर सब आपके मिल रहेंगे।
ओके हरी कृष्ण।
यह स्नो को अन्य नास्ता सुने ज्ञान करवा देना हूँ। जिसमे अन्य राजा का ना कोई न रहेगी। चाहे मोदी हो या दादी कैसे
उसमे
जो अन्य अभिलाशा उसका क्या करते है।
ध्यान दे कभी लाशा रखना। ठीक है। जैसे हम आपको कहते हैं भक्ति पर जुड़ोगे। तो असली आनंद मिलेगा। हरि नाम के उच्चारण का 1 लाभ भी है के परम जनम आगे अनंत बुरी। वर्धन तो हरिनाम लोगे तो आनंद बढ़ता जाएगा। भगवान ऋष्मदेवभगवत कहते हैं तपस्या का पालन करो भगवान की खुशी के लिए। और इस तपस्या के बदले में तुम्हे
ऐसी खुशी मिलेगी जो बढती जाएगी।
आप कहोगे तो हम की इच्छा रखे, वो इच्छा ठीक है के खाना मत खाओ, खाओ, पर कृष्णा प्रसाद खाओ, दिन में 10 बार हम नही कह दे की आप पढाई भी कर। भगवान तो वालिफाइड हुए है। हर चीज का प्रमाण तरीका है। असली, असली तरीका है। जैसे आपको भगवान ने आंखें दिए। आंखों द्वारा हम गद्दी तस्वीरें दे सकते हैं। कइयों के पास स्मार्टफोन है, सबके पास है स्मार्टफोन अच्छा कार्य के स्मार्टफोन में प्रॉपर के ग्रंथ हैं। कयके मार्टफोन में गंदी तस्वीरें तो असली उपयोग है। और कार्य का बवाल से। ओके
yes
येस माइका हा
हा
अे पूजे पूझे,
लड़का भेजने वाला बताना चाहता हूँ
से ऐसे क्यूँ
की भक्ति भी मतलब है की पूर्ण रूप से भर्ती करना भी जाना होगा। इससे होगा तो मैं ऐसा कर सकता हूँ।
भक्ति बीच का मतलब है ये दिव्यज्ञान, जिसमें आप भक्ति की महिमा सुनते हो। आपने जैसे लेक्चर सुना सुन लिया। भक्ति योगी माध्यम है, विचार को ज्यादा मजबूत बनाना है। इसके लिए कितनी आवश्यक है। अगर आपके पास यह ज्ञान है कि भक्ति योगी असली चीज है। कप्शनमकितुमनहीं करोगे से 1 ज्ञान को भूल जाओगे। कोलेज में बोला ओके 12 क्वेश्चन और देर हो रही है।
more inspire to do the nem nspired home as how we you come to
son
weeds comliatedelante your question thats better bomi, so your question is your state, mins we come to the temple speserhiwedygo homi one solution is stan the temple, but that me not be practical, so you chander rounds properly read,
if you
chand sixteen round and on chand malaka job lonc pro। फिर सम्भव है सारा दिन उच्छा a medically give you medisin take this medisin long long direction to the sending works, untmeytobecome like laloteslethat is in water नो टच बाय द बोर्डर गीता का उदाहरण है। आपको इस प्रकार से रहे बौद्धिक समाज में हो, बौद्धिक समाज के दोषों से बच कर 2 के सेकंड wah man prowbaldescondembl to fifty years ago, it sixty, seven long story, okay or question
हरि
के समान मेरा क्वेश्चन बो मेरेपन से रिलेटेड है। रोहित जब स्टार्ट करते है तो बहुत उत्साह होता है, ये धीरे जाता है। इसको मेंटेन करने के लिए क्या करना चाहिए?
इसी प्रकार का 1 क्वेश्शन फिर से 34 दिन पहले किसी ने पूछा था, उसने कहा कि जब हम बुक मेराथन में जाते हैं तो किताबें बिकती हैं,
तो सा ऊँचा रहता है और जब
नतीजा अच्छा नहीं आता, हम ढीले हो जाते हैं। राइट तो व गुड न्यूज फोर यू
अगर आप बाहर प्रचार के लिए जा
रहे हो, चाहे आपने ज्यादा नतीजा नहीं
प्राप्त किया हो, और प्रचार के लिए
गए, उस पर आपको पूरी कृपा मिलती है। जो आप छे 1 घंटे के लिए बाहर गए तो 6 घंटे में आपने 1 या 2 किताब बाटी और किसी और ने 50 गीता बाली तो जो भी आपको क्रेडिट, मिलेगा भगवान देखते हैं
मेरे लिए कौन कितना प्रयास कर रहा है।
nothing to worry। भक्ति के मार्ग में कुछ सेवा भी करोगे, उसका लाभ है। ओके मैं पर्स हो कल मैं किधर से आया हूँ जोधपुर अब जोधपुर में थे और 2 दिन पहले जोधपुर में रथियातरदेएकभगमें शराब की दुकान के सामने खड़े होगे चौदिनगीताबाटीोघरे शराब में उन लोगो को ओके प्रचार के अनेक साधन ok येस
समाज हमारा कुशन की में तो लगे हैं, पर धूमल संसारी का गुण है। जैसे क्रोध है, मोह है, ईशा पुरुष है, यह कम नहीं हो रहा है।
ट्राय ड्राय, गेन सीधे लास्ट प्रयास करते
जाओ प्रयास तो करना, पड़ेगा को
प्रयास,
आपको करना, पड़ेगा कम हो रहा है,
कम नहीं हो रहा होता तो आप यहाँ बैठे नहीं होते। आप सब जो यहाँ बैठे हो, इसलिए बैठे हो। ये आपकी अध्यातम रूची है। पर कभी कभी बहुत ऊचा बुखार हो।
नीचे आने में टाइम लगता है तो
थोड़ा टाइम लगता है। तब बुखार आपके नीचे आ रहा है ना। यहाँ होते नहीं।
ओके लास्ट क्वेशन ऐसी सीडी आबादी की जेंसी सिचुएशन है और हमारे है।
हम सोचते है। बड़ी लम्बी आयु रहेगी। सौ साल, कम से कम 60, 70 साल तक घूमने, 2 अभी बीते साल बदल करेंगे। हमें इमरजेंसी का सो
1 पलक बच गया है।
जैसे महाराज खटोनानेसुनासो ट्राई।
everything is possible by a deering madrmanariwhat speak a young boy from russia tavesingwith me speak speak, shy speed five five minutes okay
hoउsीबुै
पॉल सी गुड न्यूज फर्स, पोल सी को आप में नहीं, सब में है, हमारा शरीरिक, वजन है 40 किलो पोल सीवो का वजन, 80 किलो पोल को कू कटने का है, कूटने का उपाय है और सब सेवा भाव। okay question yes
मे
जाते है
लास्ट, किसी ने फिल्म में अच्छा सेहो किया 200 स्पोन्सर जी अगली बार जब के पास जाते हैं तो पिछली बार तो मेरे मेरे जल्दी। तो जो माइक वहाँ होते है, सोचते हैं पिछली बार स्कोल्स और अच्छे भरते है।
कितना सेहो करते है।
अगली बार जब वो ना जाता है, वह कर देता है तो हमारे लिए भाव भर जाता है। कितना देगा आपने जो अपना है 1 दम उत्पन हो जाता है।
देखिये, अगर हर व्यक्ति स्पोंसर करे तो उसी को कृपा मिलेगी। पर लोग इन्हे शोर्ट साइट दे रहे हैं। शादी में 10 करोड़ खर्च देंगे भगवान के लिए 1 पैसा मैं कई साल पहले डुबाई में था और अभी में मैंने देखा कि हर 10 कदम में वहाँ 1 मस्थित है। मैंने हमारे भक्तों से पूछा, ये मंजिका सरकार बनाती है, नहीं, मुसलमानों में रिवाज है। पहले अपना भगवान का मंदिर बनाएंगे, मशीन बनायेंगे, फिर अपना घर बनाएंगे। हमारे हिंदु में क्या फ, अपना घर बनायेंगे। 10 पीढ़ी आगे के दल लगेंगे, कुछ बजजाईचेंजसेबवाल को दे देंगे। नहीं, ये हमारा दर्भाग्य भारत में आपको कुछ अंदाजा नहीं कितने करोड़ हिंदू किशन बन रहे हैं और कितने लाख हिंदू मुसलमान बन रहे है। दवा में बैठे हो। आपको कुछ अंदाजा ने कोई प्रचार नहीं कर रहा। धन के लालच से सबके धर्म बद ले जा रहे। तो इस कौन 1 सा है शुद्ध
धर्म का प्रचार कर।
okay। yes were maik, she s a good book। डिसट्रीब्यutr is not in its your effort was our question
my cision, how to me lo
if the right track, krishna will lottomenicly know that and krishna nos release is in the heart of the grutho grow is not a madison is a simple postman, krishna is please guru, please ltimetlywerall in to please krishna
guru
प्रॉपर्ट ने कहा ग्रंथों को बांटो, हम कई बार कहते हैं प्रॉपरटी ग्रंथ में, यह प्रॉपर्टी ग्रंथ नहीं है। किशन की ग्रंथ है गरंथमेक्याहैश्ी भगवान वाचा पर अब भगवान कसम? तो पापाजी ने कहा प्लीज बी डिsटbयूdअगर, तुम मुझे प्रश्न करना चाहते हो तो ग्रंथ में है क्या भगवान की
तो
आखिर में ap s कॉनकोर संस्था के नाम पर जानते हो स्वामी संस्था के नाम पर so we diswitinkishnas and krishna
message in perfect
okay i think it sidwistop yes
yes whats
a question covishoses think when i do more? questions
marata maritanaprodi dont go out the merit
maracan pr? what i can get you dont going mariton maria yes?
अरे मैं फोन में आया तो पूरे हमेशा ऐसी ही अडवाइज भक्तों का संत कीजिए। तब भक्ती आगे बढ़ा और कोई डोबल्टीहैगुभक्तों नहीं कर पा रहा किसी कारण वो
है
उसकी, वजह गाँव चली जाती है। भक्तों पसंद नहीं कर पा।
भक्त संग प्राप् करने के 2 साधन हैं।
1 है
भक्त भगवान भक्त संगत, दूसरा है ग्रंथों की संगत, जब आप जनता
को बांटते हो
वो भी 1 संगत
है जब आप ग्रंथों का अध्ययन करते
हो, वो भी संगत है
ग्रंथ भगवान
ग्रंथ की संगत और भक्त संगत जैसे कई विश्व के कई स्थानों में हमारे
भक्त ऐसे ही शहरों में रहते हैं।
किसी कोने में है कोई और भक्त
भी है तो वो ग्रंथकी संघन प्रात करते हैं। वो आपो और वाली दोनों की आवश्यकता है।
येस
डेटिंग करना शुरू करना चाहिए और कुछ कुछ दिन तक जाता उस गीले जाता है।
रीडिंग जी
इसलिए हम आपको बार बार सुनाते हैं
पर इसलिए भागवत दयाल रोज पढना चाहिए
धीरे पढ़ा
आपका नुकसान है उम्मीद हासिल होगे तो आपका दाब है
यस यस
दम बदम से भी करते है। और जो हमारे बेस्ट सुख भाव होना का हम भी चाहिए के साथ साथ ध्यान रखना चाहिए क्यूँकि दोनो विचार आपके
नाम होते रहते है नहीं गीता के
माध्यम से लोड इस रिल मेसेज भगवान क्यों कहते?
भगवान कहते है निकलो ये जेल खाने
से जेल खाने में तो बहुत गहरे में सूखी हूँ साब उसे आप को जी जी खाने बोलोगे वो ठुकरा देगा गन्द खाएगा
तो जो बुद्धिमान व्यक्ति है
वो देख सकता है चारों तरफ क्लेश क्लेश। भगवान कहते है निकलो यहाँ से मेरे नाम में आओ तो यह नहीं कि कोई नही जा। रा लाखों भक्त हैं जो गंभीरता से
मेरा सवाल बड़ा है की आज के जमाने में टेररिजम जो प्राइस है
रिज
और गोल जो प्राइस ह इसी तरीके के काफी। तो क्या हम कोई ऐसा जो हमारा स्कॉम आंदोलन को इस तरह के डायबेट नहीं कर सकते है की जो और सम्प्रदाय है या और जो बिलीफ है उन कौन स्कॉड या कृष्णा की तरफ डाइगेटकरसकक्यूंकी वहाँ पर असिस्टेंट बहुत ज्यादा और असिस्टेंस कभी कभार तो वायलेट हो जाता इधर और जो संपदा है उनको अगर हम किस चीज के लिए मोटीवेट करते हैं कि उनके बिलीफ अलग है, हमारे भी अलग है। अगर मानते हैं की लोग कृष्ण है तो सभी वो लोग कहते हैं कि खुद को अलग है, वो कहते है बहुत प्रेम है। तो हम इनको कैसे 1 तारीक्ष सकते हैं कि जो उनका बिलीफ है और
हमारा जो विवेक प्रचार से आप हैरान होगे।
पश्चिम देशों में हमारे कई डिवोटी हैं जो पहले पादरी थे और भाग
ट
मॉरनिंग सा बस
stat home,
oltrathomeesso do morning program at home जो गृहस्थ भक्त
हैं, जिनके घर में और डर है वो घर में साधना रख सकते है। अगर मंगल बंद में साढे 4 बजे आर दिए, 5 बजे रख सकते हो, मोनिंग साधना अच्छी तरह रखोगे आप कई लाभ है, हमारे कार्य ने हमें पूरी शिक्षा दी है, माया का विरोध कैसे करना पर लाभ उठाना हमारे हाथ में okay न यस लास्ट केशन आम सौरी मैं तर के सबल प्रश्न पूछो भी 2 मिनट के लिए
ठीक है ठीक
हरे कृष्ण महाराज यूशन करते है। तो लोग हमसे प्रश्न करते हैं कि इसको पढ़ने का कोई नियम है या मतलब किस तरह पढे। तो हम इनसे जनरली बुक देने के कहते हैं कि आप इस अवस्था में पढ़ सकते है और इसको पढ़ना महत्वपूर्ण है। तो कहीं हम ऐसा कैसे कुछ अपराध तो नहीं कर रहे है। मतलब गीता का, भगवान का आपको बड़ा
अच्छा प्रेशन बोला गीता पढ़े, पहले अध्याय से 18 गीता कहानी खोलोगे हर्श लोक
मीठा है, पर सिस्टेमेटिकली पढ़ना है।
पहले अध्याय से चलो यार के किसी आवस्था में भी पढ़ सकते हैं सुख में। दोकसे, who we say something to yes yes mason related questions now merisontimeisyes
so like that the station is a very of service, so, there is no kind of formalize stadig, you know the device of the train, how to s
very good question in very good statement, we do have some training and i think, we should a better training mondrbucame, here to with all of you, but may be we should to give मोर ट्रेनिंग i think wall, we do is all the job training, he to try and enter meter, we should have better training, good point, we not it for next year। आपने कई क्वेश्चन पूल किए, को ओके
हर जैसे, हम तो उनको बोलते हैं की आप दीजिए तो बोलते हमारे पास
है, हम बोलते हाल को दीजिए तो
बोलते हैं, अरे नहीं नहीं मैं अपना दिल समाज से दूसरा देगा, बीजपी करेगा पाप लगेगा।
ऐसी से है बोलोगे गीता और बांटोगे
तो किसी हालत में पाप नहीं लगेगा, भगवान गीत के भाग भाना देना तो लोग हजारों भाना देंगे।
कृष्ण जब हम अकेले दिस्टुरूशन करते हैं
तो 12 घंटे तो स्माइल रहता है
चेहरे पे, क्योंकि 1, 2, 20 घर निकल गया।
23 घंटे हो जाते हैं तो स्माइल
खत्म हो जाती है जो की वो कोई लेके नहीं।
तो इसमें इस मेल को इस तरह से पता है जो की नहीं नहीं
बड़ा अच्छा क्वेश्चन है तो ये क्वेश्चन पहले वो पूछ बैठे हैं जिसके उत्तर भी मैंने कहा था छाया बुक डिस्ट्रिब्यूशन करो या नहीं, प्रयास करे है तो आपको पूरा क्रेडिट मिलेगा भगवान देखने मेरा
भाग, मेरे संदेश को बचाने के लिए
कितना कष्ट उठा रहा है धूप में खड़ा है आप सब विदेशों में भी मेरा धन चल रहा है और विदेशों में इस समय खास करके माइनस 20 टेम्परेचर कई देशों में, रशिया में, उधार में इतनी भर विवि भक्त खड़े होकर किताबों को पाटते हैं। आपके हिंदुस्तान में तो इस समय अच्छा मौसम है
दिल्ली
बाइक,
मारा, मारा जैसे हम मोबाइलों का डिस्ट्रिब्यूशन करते हैं
मोबाइल
के थ्रू
मोबाइल मोबाइल लिंग से,
बॉलिंग
सेवा से डिस्टिड्यूशनकरते है तो वो हर साल उसे बुक वाले उसके बाद से गणेश सवादा। वो क्या है प्रति कार 2 मैं अभी क्या देता हूँ जिसे पति का सही है
कल से आप तो हम
भी उनको पर्ची
के वह आपकी मर्जी
1 वो कहते हैं 1 बार से सब के लिए आते है दुर्गाजी के लिए,
तो आपका पर्सनल रीजन
महाजने
आपके राज
रेविश्ामहाराज बार हम जानते पेश तो सब बात करते उल्टा हमे भी उस समय बहुत गुस्सा आया ऐसे सिन क्या
उल्टा सुल्टा बोलते हैं किस रूप से
है
इसमें 2 बड़े भाई आप बोलो बोल रे आपके उधार के लिए आपको
सुखी बनाने के लिए, अच्छी सुख पचाने के लिए ले में
भाइयों को डाई करवा दिया उसे
बोलने वाले कुछ नही बोलेंगे
बोलो गीता
भगवान कुरशीयुद्धमें सब दिन का हाल हुआ, सब भगवान के धाम गए, भगवान का के लास्ट केशन स्टाल। yes last waiting from mataji yes ओके अभी हम समाप्त करने लगे, सुनाई नहीं देता क्या बोलो हम विदेश में 1 पैसा न देते इसे किसे जिससे कहना है अमीर हैं ये हमारा सिद्धांत असली है वो वो हमें और ज्यादा जीता है और आप लोगों से केवल छपाई की कीमत ले रहे है कोई नामा थोड़ी दे रहे है यह
हाई कृश्ना
महाराज जी
आई जस्ट वन आस्कार बूटी समय बहुत अच्छी समझ लेते है की अगर आप का आप लोगो को देते हैं तो अच्छा काम होता है और आप की सी मिलती है कि आप किसी को इलाइची करना चाहते हैं तो आई डी है और उसको बेचने की कोशिश नहीं करते है तो आप देख भी ले सकते है तो लोग को पहले देते समय इतने सस्पेंशन के साथ शाम के साथ देखते हैं कि पानी से हमारा क्या स्वाद छिपा है जो हमेशा देते है और जिनको मैंने दिया अभी ऐक्चवली हमारे पास पहले भी पढ़ा है या पेड़ों की सर को मिलना तो ये 23 जगह से ऐसा हुआ आप जिसको दिखते है वो कुछ भी ले
व फर्ज प्रयास करना अगर वो साथ नहीं देना चाहते उनका दुर्भाग्य है क्या?
तो ऐसे अगर आपको को दिया अच्छा ग्रंथ से वापस लिया वापस लेने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।
2 प्रॉब्लम वो बमाको किसी और को
दे देता थैंक यू सो मच
थैंक यू मेरा सा, ऐसे करोगे का
और साथ में ये जो मंजर का डेनेशन, इसमें भी सब सहयोग कर रहे हो। कई बार लोग कहते हैं इस काल में तो बहुत सेवा होती है। 1 सेवा खत्म करो दूसरी सेवा, 1 वरदान खत्म करो दूसरा मेरा था। ये बात सच है इस कॉल इस न एक्टिव प्रीचिंग मूमेंट तो यह अच्छा है कि आप भगवान की सेवा में रहो। माया की सेवा से बचोगे। इतनी सेवा नहीं हो तो बड़ी आसानी से माया में भी गिर सकते है। ओके हरे कृष्णा थैंक यू
हाय kृsnahiाकिश्णा हारे हारे हारे रहा हमारे हाल।
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