राधारानी कौन है? Some Secrets about RadhaRani ji | SB 10.30.28 | 23 Sep 2023 | Kharghar, mumbai

Two speakers explore who RadhaRani is through stories and teachings from scripture. They describe her boundless compassion and 24-hour service to devotees, and emphasize that sincere devotion to God is the highest wealth, not material riches.
Chapters
माया मा हरे रामा रामा हमारमा मा
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hama बो बो राजा रा
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hi kis tora 4 a ओम नमो भगते वामन, भगते वासु, भगते वासवा। जैसे आप जानते हो हर कृष्ण भक्त हयनाहामकाउचालन करते है, वो हाई नाम की महिमा का 4 करते हैं। हमारे में 1 दिन हुआ था, वर्ल्ड होली डे कि सारे विश्व में सब प्रयास करेंगे आई नाम की महिमा बढ़ाने और फिर ये 1 स्टेंड हो गया था भक्तों में इतना गुस्सा था की 1 से हो गया था 1 हफ्ते के लिए 10 दिन के लिए। तो आज नाम की महिमा की चर्चा भी करेंगे और और थोड़ी सो हम आज है। आमिर वाह राधा रानी कौन हैं, हे कृष्ण। आपको सुनाई दे रहा है, शुरू करेंगे।
अन्यारदितोनुनम भगवान हरि रिश्वर यन्नोविहाय गोविंद प्रितो, अयम अन्य द रहा। अन्या रदि तो नुना। भगवान हरि रिश्वर यन्नोविहाय गोविंद। गोविंद तोयम अन्य याद रह। अन्य रादि तो नुना। भगवान हरि रिश्वर यननोविहाय गोविंद तो या मन्या रहा।
बंद र। 2 मा मा जाये। तोलना लगवारी स्वरा य आ गयी।
ल सबदार्थ अनया उसके द्वारा। आराधित भली भांति पूजित नुना। निश्चय ही भगवान, भगवान हरि ही कृष्ण ईश्वर परम नियंता। यह इतना कि नहा हमको विधायक त्याग कर। गोविंद भगवान गोविंद परतह प्रसन्न या जिसको अन्यत ले गए। रह एकांत स्थान में अनुवाद तातपर्य डिवाइसेस भक्ति वेदांत स्वामी श्र प्रपा महाराज द्वारा शलप्पा महाराज के अनुवाद इस विशिष्ट गोपी ने निश्चित उसे एकांत स्थान में ले आये। तात्पर्य श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर की व्याख्या है कि आराधित शब्द श्रीमति राधा रानी के लिए आया है। उनकी टीका है। सुखदेव गोस्वामी ने उसका नाम गुप्त रखने का भरसक प्रयास किया है, किन्तु उनके मुख रूपी चंद्रमा से वह स्वत्व प्रकाशित हो उठता है। उन्होंने राधा का नाम ले लिया। यह श्रीमति राधा रानी की कृपा है। अतः आराधित शब्द राधा के सौभाग्य को सूचित करने वाला दुंदु भी घोष है। यद्यपि गोपियाँ सीमति राधारानी के प्रति इरशारूलगती है, किन्तु वे यह देखकर पुलकित थी कि राधा ने श्रीकृष्ण को बंदी बना लिया था। विश्वना चक्रवर्ती ठाकुर ने श्लरुवगोस्वामिकृत श्री उज्ज्वल नीलमणि में श्रीमती राधारानी के पद चिन्हों का जो विस्तृत वर्णन है, उसे उद्धृत किया है। उनके दाए पांव के अंगूठे के नीचे जो का चिन्ह है, उनके नीचे चक्कर के नीचे छत्र तथा क्षेत्र के नीचे बाजूबंद या कंगन है। उनके पांव के बीच से 1 खड़ी रेखा अंगूठे तथा दूसरी उंगली के बीच तक जाती है। बीच की उंगली के नीचे कमल है और उसके नीचे धजा है और तजा के नीचे लता है, जिसमें 1 फूल लगा है। उनके पांव की छिगुनी के नीचे अंकुश है और उनकी एडी में अर्धचंद्र है। इस तरह उनके बाएं पांव में 11 चिन्न है। उनके दायने पाँव के अंगूठे के नीचे शंख है और उसके नीचे भाला है। उनके दाए पांव के छिगुनी के नीचे यज्ञवेदी है, जिसके नीचे कुंडल है और कुंडल के नीचे फिर भाला है। दूसरी, तीसरी, चौथी, उंगलियां तथा छिगुनी के नीचे पर्वत का चिन्न है, जिसके नीचे रथ और एडी में मछली का चिन्न है। इस तरह श्रीमती राधा रानी के चरण कमल के तलुओं में 19 विशिष्ट चिन्न है। श्लभरपाद महाराज की
हम सब मिलकर दादा रानी जी को प्रणाम करे तब तक गोरांगी गोरांगी राधे विंदावन, एश्वरी राधे वृन्दावनेश्वरी,
भानु देवी स्वभानु सुते देवी मो मो प्रिय पणम हरिप्रिय।
तब तक कंचन गोरांगी तब तक कंचन
गौरांगी राधे विदा बनेश्वर राधे, वृंदा बनेश्वर
बन सुतेदेवihrirnmami हरiprioffrmyspect। in gold krishna and who is queen of insaan our ban, you are very idea to lord krishna।
मैं प्रणाम करता हूँ श्रीमती राधा रानी को जिनकी kanti स्वर्ण मे ही है और वो रानी है वृंदावन की और वो पुत्री है विश्वभानु जी की और वो बहुत ही प्रिय है भगवान कृष्ण की, मैं उनको प्रणाम करता हूँ गो
हो आई बहुत ही है, राजधानी है कौन? अगर आप किसी भौतिक वाली व्यक्ति से पूछो वो कहेगा राजधानी तो मारी गर्लफ्रेंड है। वैसे कई लोग क्लास लीला की चर्चा करते हुए कहते हैं भगवान उपयोग के साथ घूम सकते हैं। तो ये और बुड्ढी है वाली है जानने की रानी कौन है? सबसे ऊँची जी पले थे, उस वन में ताकि राधा रानी जी का गुणगान किया जाता था। पर के पिता थे वो बकैदा संतों की सेवा करते थे। और वो कभी ये नहीं देखा। उन्होंने कौन सा असली संत है कौन करे? और जब ये संस हॉस्पिटल का लाभ उठाकर चलने चलने चलते थे तो वो कहते थे शुक्रिया हम कुछ आपके लिए कर सकते हैं। और कहते हैं हाँ मेरे बेटे को आशीर्वाद 2 राधानी बने। कहते थे मेरे बेटे तो बचपन से
ही
ऊपर, तो शुरू से ही बचपन से ही बाबा जी, राधा रानी जी का गुणगान कर ते थे। राधे रानी जी जो है वह की सबसे प्रिय भक्त है और राधे रानी जी हर जन्म में भगवान की सेवक रहती है। राजरानी जी के पिता का नाम महाराज पृष् बानू माता का नाम था कृषि बानू किसी बहुत सालों से उनका विवाह हुआ था, कोई संतान नहीं थी कोई संतान को सुनाई दे रहा है। समझ वादा। क्यूँकी संसार नहीं थी कि दीदार ने कहा अपने पति से तुम जा, कोई जाके तपस्या करो, तपस्या करोगे तो कुछ लाभ होगा। तो मैं हर मिश्वानहू बड़ी गहरी तपस्या कर रहे थे। अब तो के लिए कुछ खाते भी थे। तालाब में तो 1 लोटस जिसमें हजार पटल थे, उनके बाद तपस्या की थी, कई दिन के लिए कुछ खाया नहीं। और महराज की मन में मुनी के आश्रम में गए जहाँ मुनी ने कहा अगर तुम अपनी इच्छा पूरा करना चाहते हो तो हर सो किया। जिसके कारण उनको भगवान की कृपा वानू दुखी थे कि उनकी कोई संतान नहीं है, इस इच्छा के साथ न हो। उन्हें जाकर यमुना नदी में गए, तपस्या की और तपस्या किया और 1 दिन वो चिंतन उनके पास आकर हजार पैदल के फूल आया, वे हज़ार फूल में 1 छोटी लड़की थी। बहुत खुबसूरत कोई भी नहीं हो सकता। और वो शुभान ने पूछा भेजा इस लड़की को उनकी शादी जिंदा हो। वो इस बच्चे को उठा कर नेगयकाअपनेोनेकिसीधा से कहा देखो मुझे ये लड़की हुई है, बिल्कुल छोटी थी, पैदा हुई थी। और ये लड़की और सबने कहा है ये तो बड़ी खबसूरत लड़की है, इतनी खबसूरत लड़की हमने कभी जिंदगी में देखा नहीं पर मेरी खुबसूरत लड़की में 1 कमी है, वो अंधी है, भरी है और गूंगी है। तो 1 से बड़े खुश थे उसी तरफ से आ गए। और वो है मोनी जैसे आप जानते हो आशा करते हैं 1 ही संदेश के साथ। तो मुनी ने कहा चलो लूका का दर्शन वे उनको में और उनको पता था भगवान प्रकट होने वाले हैं नधमुनी भगवान का भर ऊँचे कोटे का है। तो वो घर घर जा रहे थे ढूंढने के लिए, भगवान प्रकट नहीं हो गये हैं। तो चलते चलते वो पहुँचे, मराज के राज पहुँचे और नवाज ने कहा मेरा 1 बेटा हुआ है, उन्हें देखकर पहचान लिया ये बेटा कौन है ये स्वयं कृष्ण बनी सोचने लगे अगर कृष्ण प्रकट हुए हैं तो राधा रानी भी कहीं न कहीं होएगी क्यूंकि उनको पता है कि जब भगवान प्रकट होते हैं अलग अलग युग में सदा राजा रानी रहती है, उनके माँ बाप रहते हैं। तो बुनी जा रहे थे, घर घर जा रहे थे कोई लड़की तो पैदा नहीं हुए जा रहे थे, वो आ गए घर में, उन में जो घर होते थे। मुह ने कहा कैसे हो सब ठीक है। तो उन्होंने अपने बड़े बेटे से मिलाया, उनका नाम था शीला ने उनसे चर्चा की और न किया श्रीराम ये भी भगवान का साथी है। और उन्होंने उनके माता पिता को कहा ये जो आपका बेटा है ये कृष्ण बलराम का मित्र होगा। और कृष्ण बलराम के साथ बड़े खुश हुए उनके माँ बाप बेटा भगवान के साथ या रहेगा जैसे नामली छोड़ कर जा रहे थे। तो देखो मेरी 1 बेटी भी है उनकी बेटी का चेहरा देखा तो क्या निर्णय किया ये तो सबसे खबसूरत लड़की है, इतनी कसरत लड़की कभी पृथ्वी पर प्रकट नहीं हुई। उसके पिता वालू ने कहा पर 1 समस्या है, वो अंधी है, भैनी है क्या करे ने का चिंता मत करो। तो में वहाँ थे और नमाज के बेटे थे भगवान और
न
घर में छोटा सा पंजाब में 4 हो गयी थी। तो वहाँ माता यशोदा और कसीदा कमरे में चर्चा कर रही थी जैसे औरतें मिलती हैं उन्हें 1 दूसरे को गले लगाया और सो गई की बेटी का दर्शन लेने के लि। तो उसने भी देखा और कहा ये तो सबसे खुबसूरत लड़की है, यह सबसे खबसूरत लड़की है, सबसे खुबसूरत लड़की है। और उन्होंने अपने गोद में उन्होंने किसी रखा था और भगवान को नीचे छोड़ दिया था। भगवान ने जब देखा की माँ ने छोड़ दिया तो रोने लगे तो फिर माता ने अपने बेटे को भी उठाया और जैसे 2 पाव हैं तो 1 से 1 में भगवान थे और दूसरी तरफ माता के गोद में उनकी बेटी थी और भगवान ने रानी के आँखों को हाथ लगाया जैसे ही हाथ लगाया तुरंत दिन की नजर वापस आ गई और मेरा पन, गूंगा पान सब समाप्त हो गया। तो ये सब समाप्त हो गया तो नधमुनी अकेले थे। बेबी राधारानी के साथ बेबी राधे रानी ने अपना किशोर रूप किशोरी रूप नधमुनी ने देखा। बिना शंख के समझ गए। ये है श्रीमती राधा रानी। राजा खेती में ये जो आंख खोली भगवान के हाथ को छूने के पश्चात। इसके पीछे 1 सिद्धांत है। जो भगवान ने राजरानी से कहा मैं पृथि पर फिर प्रकट होगा। भगवान कहते है की अलग अलग समय में मैं प्रकट होता हूँ। जब उन्होंने कहा मैं प्रकट होना चाहता हूँ। पृथ्वी प्रकट करने के लिए कहा, मैं प्रकट नहीं होंगे। मैं आपके इलावा किसी का चेहरा नहीं देखना चाहती। किसी का ले और डर हैं तो आपका चेहरा हमेशा नहीं आप का सबूत हो। भगवान ने कहा, मैं देता हूँ तुम्हें मैं तुम्हें कभी नहीं छोडूंगा और तुम हमेशा मेरा चैरा देखने प्रकट हूँ। पहला व्यक्ति देखना चाहती हूँ। आपको इसके लिए वो वाली थी। भगवान से 4 पंद्रह छोड़ भगवान वहाँ पहुँचे। भगवान राधारानी का वो पूरी हो गई। राधा रानी कौन हैं हरिया भगवान हरि के ही पिया बुला दे। भगवान की अत्यंत धनी है। भगवान भक्त में सबसे सुधा को हमें शास्त्री जैसे ही है। भगवान की हरदिन शक्ति भगवान आनंद उठाना चाहते हैं। आनंद उठाने के लिए कोई साथी? उनकी सबसे ऊंची, कई बार कथा शुरू करते हैं। रास लीला पर और नीलापुकीचीजर्जा करते हैं और उसकी नकल करने की कोशिश करते हैं। अगर उनकी नकल करता है तो भगवान के देवी नीला को देखो। कई लोग कहते है की कास्ट में राजरानी का वर्णन है। राजरानी का वर्णन भागवत में कहा है, भागवत में इस लोक के द्वारा जो को पढकर सुनाया था, राधारानी जी प्रकट हुई है और इस लोक में उनका वर्णन है। तो ये सोचना कि राजरानी साधारण पृथ्वी है। यह गलत विचार है। श्रीमत भगत में आप देखते हो कि रासलीला का वर्णन केवल दसवें स्कल में है। श्रीमद भागोतम सबसे उतम ग्रंथ है जिसमें शुद्ध भक्ति का ज्ञान प्राप्त होता है। तो श्री भागवत में भगवान की अदभुत लीलाओं का वर्णन है। जैसे कि जब भगवान प्रकट हुए, भगवान प्रगट हुई किस रूप में 4 हाथों के साथ उनका पूरा सजा हुआ था। और माता पिता ने कैदी बना दिया, कल से उन्होंने देखा होगा। अब हमें पता लगेगा कि वो प्रकट हुए। तो उन्होंने कहा कि बच्चे का रूप ग्रहण कर। तो तुरंत ही 1 मिनट में बच्चे का रूप ग्रहण कर दिया। तो भगवान जब छोटे थे, उन्होंने 1 राक्षसी पूतना का बंद किया, पूना का वद्ध कब किया? जब वो 3 महीने के थे। 3 महीने का बच्चा किसी का वध कर सकता है। उन्हें उन्हें अपनी गोद में लिया था। और अपने स्तन से भगवान द्वारा भगवान का बध हो गया। भगवान के द्वारा बड़ी 3 प्रयास किया। भगवान को बंद करने के लिए ऊपर ऊपर ऊपर जाते गए। भगवान भगवान की है। 1 समय इस माता ने कहा, मैंने सुना कि तुमने मिट्टी खाई है, यह सच है। क्या मेरे घर में किसी चीज की कमी है? न के पिता थे, उनके पास 9 लाख, गाय थी 9 लाख और ये में 20 थी जो सुंगनदेदूधदेती थी थी। तो माता है सूचना मिली 52 पक्षों के द्वारा की आपके बेटे ने मिट्टी खायी है। तो सुधा ने कहा क्या मेरे घर में इतना दूध सही है तो मिटटी को खाते। हो ने कहा नहीं नहीं झूठे शिकायत है खेल में वो हार के थे तो ये जुटी से कहती है। तो माता ने कहा। भगवान ने कहा अगर आप विश्वास नहीं करते तो मैं मुँह खोल कर बता देता हूँ। जब उन्होंने मुंह खोला तो क्या देखा पूरे के पूरे भगवान ने 2 पेड़ों को गिराया। जब 2 पेड़ गिरे तो माता ने सुना था बहुत बड़ी आवाज हुई रसोई में थी, भागे भागे आये और उन्होंने बड़े भाई पेड़ गिर गये हैं न्होंने, ये पेड़ कैसे गिरे? कौन बतायेगा? और कुलों ने कहा ये तो आपके बेटे ने गिराया है, यह कैसे हो सकता है? मेरा बेटा बहुत छोटा है। वो इतने बड़े पेड़ों को कैसे गोल? मेरा पढ़ते हो की भगवान ने छोटी उँगली के नागर के बल पर क्या क्या? 1 महान पर्व को उठाया तो स्वामी रास लीला की चर्चा करते हैं। पहले 10 कन्दों को पढता है और जो व्यक्ति 10 कंदों को पढ़ेगा वो क्या स्वीकार करेगा। कृष्ण भगवान कौन है? जी कहते हैं अनेक ईश्वर हैं। और सबसे प्रसिद्ध कौन है भगवान शिव। तो जो व्यक्ति भगवत का लाभ उठाते हैं, रासलीला की नकल करने के लिए वो अपराधी है, उन्हें भक्ति प्राप्त नहीं होगी। भगवान को समझने के लिए भगवत में स्पष्ट लिखा है, क्या है साधन भक्ति योग को सुनाई दे रहा है, पीछे नहीं पढ़ना चाहिए। इस से लेकर। और शुक्र स्वामी रास्ते लगा। वर्णन करते हैं 10 के अध्याय के। तो अगर आप ये गोदम पढ़ोगे 10 तक पहुँचने तक आपके मन में कोई शंका नहीं होगी। कृष्ण भगवान कौन है? भगवान आदि अनंत रूप भगवान जो है अपने आपको अनेक रूपों में प्रकट कर सकते हैं। भगवान जो हैं, चिंतित हैं। ये सब होना चाहिए। मनी भगवान के धाम लौटने से। अब में प्रचार की रिपोर्ट देने के लिए। रास्ते में उन्हें 1 ब्राह्मण मिला जिसने लगभग सारे लोगों का ज्ञान था, कमी थी, वो योग नहीं था। और भगवान के में भगवान के धाम जा रहे हो। मेरा 1 प्रश्न है। उनसे पूछिए मुझे कितना समय और बुरा पड़ेगा आगे 1 मोची मोची ने भगवान के धाम जा रहे हो जो 1 प्रश्न है। मुझसे पूछेगा मुझे कितना समय के बंद में रहना पड़ेगा मैं उनके धाम में प्रवेश मुझे। पूरा विश्वास है। भगवान की एनकसीबलशक्तियों में। बुनी ने भगवान को छोड़ दिया और निकलते समय जब मैं आपके पास आया था, रास्ते में मुझे 2 बक्स मिले आपके। उन्होंने ये प्रश्न पूछा ब्राहमण मोची को कितनी बार भौतिक जगत में जन्म लेना पड़ेगा? भगवान ने कहा। ब्राह्मण को तो बोलो उसको अनेक जन्म प्राप्त करने पडेंगे और मोची है उसे कहना इस जन्म की सनािभगवानकजाएगा सो? तो रावल ने कहा तुम सच मुच गाय, ऐसे मखौल कर सच। मे पूछा अच्छा ये बताओ भगवान क्या कर रहे थे? न ही को सूई के चेक से निकाल रहे थे। बोल रहे के चेक से बड़े हाथी को निकाल सकता है? बड़े हाथी को नहीं। तो कैसे हो सकता है? भगवान? कैसे? बड़े हाथी को नानी का पूरा विश्वास नहीं था। भगवान की अदभुत रूप में और भगवान के लिए कोई कार्य संभव नहीं। भगवान प्रकट होते हैं मछली के रूप में, वर के रूप में। अध्ययन पुराना पुरुष कहते हैं आप सबसे प्राचीन हो, पर आप प्रकट होते हो, हमेशा, आप दिखते हो हमेशा। 1 युवक। जैसे। तो जब मोची के पास पहुँचे, मोची ने पूछा, मेरा प्रश्न पूछा था? भगवान से ने कहा, भगवान ने क्या कहा? तुम जीवन की समापति भगवान के दाम चले जाओगे। तो मोची ने पूछा भगवान क्या कर रहे थे? जवाब ने पूछा हाथी को चेक से निकाल रहे थे, से निकाल रहे थे। नाचने लगा असम्भव का वो करते हैं न। परीक्षा अच्छा बताओ भगवान क्या कर रहे थे? क्या विश्वास करते हो? क्या ऐसे हाथी निकाल सकता है? देखो ये जो पेड़ के नीचे हम खड़े हैं। ये पेड़ 1 छोटे बीज में था और बीच से यह हो सकता है, भगवान के लिए कोई असंभव नहीं। इसलिए जब आप कृष्ण लीला पढते हो, भौतिक दृष्टि से आप नहीं समझ पाओगे, भौतिक दृष्टी से। आप। यही सोचोगे, ये तो माइथोलोजी है। अंग्रेजो के राज में कई अंग्रेज विद्वान, संस्कृत के पन्देपे और उन्होंने ग्रंथों का जब अनुवाद किया। यह साबित करने का प्रयास किया है। असली नी। कई साल पहले 1 पॉलिटिशन का पेपर में पढ़ा था। इसने कहा, what pro have the राम कृष्णा, तो ये हवा मारा ज्ञात है। शासन द्वारा राधानी समझने के भक्ति की आवश्यकता है। तो ही आप भगवान की लीला को बोल सकते हो। तो भगवान की लीला में बड़े बड़े राक्षस का आवाज किया। गोल लाल प्रवद को उठाया और ब्रह्मा युवा सब स्वीकार करते हैं। 1 भगवान तो राजरानी की जो लीलाएं हैं वो भी बेसिल की अनेक लीलाएं हैं। और राजधानी के मन में 1 ही भाव रहता है। क्या क्या भाव रहता है भगवान की सेवा और राजरानी जो है सब गोपियों में सबसे है। राजरानी के बाद 6 मिलियन, 630 मिलियन, 6 करोड़ साढ़े साढ़े, 6 करोड़ गोपियाँ हैं, कितनी साढ़े साढ़े 6 साढ़े, 6 करोड़ गोपियाँ हैं। गोपियो गोपी वो है जो कि लाल रानी जी का सहयोग देती है। पेशन भगवान की सेवा करने के लिए वो है। तो 6 करोड़ 30 लाख गोपियाँ हैं और गोपियों के नीचे है बंजारी लाखों लाखों लाखों मंजरी हैं। और मंजारी 1 ही भाव रहता है। हम कृष्ण भगवान को की मदद करे किसमें तो हमारी जो हैं उनका भाव रहता है राधानी सेवा करें। हमारे रूपक गुस्सा में मंजरी का अवतार माना जाता है। मजार प्रकट होते हैं अलग अलग रूप में रूप मंजरी का सा जाता है। तो गोपियों का 1 ही भाव है भगवान की सेवा। तो जो गोपियाँ हैं भगवान के सीरियल नहीं है। ये अनेक गोपियों में 16 हज़ार 160 पर सि मानी जाती है और उन 8 में 4 ज्यादा पसद कौन राजधानी चन्द वाली ललिता और 116 जार, 100 8 पसिद गोपिया है उनमें 100 8 ज्यादा पसद है और 100, 8 में 4 ज्यादा प्रसिद्ध है। याद है मायापुर के मंदिर में गए हो, माया पर में अपने 80 का दर्शन दिया। e भगवान के सबसे प्रिय भक्त जो कि सदा राधारानी के साथ भगवान की सेवा में रहते हैं, राधारानी और भगवान का यह भाव है कि सेवा करे और भगवान ने मां राधारानी का रंग क्या है मोर्टन गोल सुना जैसा रूप है और कहा जाता है जब भगवान राधा रानी के साथ होते हैं राधा रानी जी की खुबसूरती जा गुना ज्यादा हो जाती है और यह भगवान राजरानी की सर में होते हैं। तो उनकी उनके रंग को देखकर भी बढ़ती जा रही है। यह समझना पौधेकिरियोसेकठाई कठिन है। पर भक्त के माध्यम से आप समझ सकते है, मार्ग में स्वीकार करता है। भगवान किसी रूप में प्रकट हो सकते हैं। आज ये बिगड़ा के रूप में और उनमें और भगवान में कोई असर नहीं है। तो राधा रानी की के मन में और गोपियों के मन में यही भाव है भगवान की सेवा और जो बन जा रही है वो गोपियों का सहयोग देती है। तो राधे रानी। तो मैंने कहा ये कह रहा था 8 गोपिया 80 जो हैं भगवान के साथी हैं और 8 में 4 ज्यादा प्रसिद्ध है वो, इन 4 में 2 प्रसिद्ध है राजधानी और चरवली। in the queen of all krishna से कहे bag please krishna s तो इसलिए आप वृंदावन में क्या देखते हो? जाये राधे, जाये राधे, राधे राधे को पसंद करना, चाहते, राधाजी को करते है, जाए राधे, नाम देगा, जायरा की यादे रानी। क्योंकि भगवान की इतनी कोटी भग है इसलिए हम भगवान को समझने के लिए हमें भक्त के माध्यम से जाना है। भगवान कहते हैं जो कहे जो व्यक्ति कहे हैं की वो मेरा भक्त है, वो मेरा भक्त नहीं है, मेरे भक्त का भक्त है, वो भक्त है। इसलिए माँ भबुरनेकहाकमेगोपीभाव में सेवा करनी, खुद समझ सकते। का कितना गहरा स्नेह है वो खुद में इतना अंदाजा ये जानने के लिए कि राधा कितना स्नेह है, मेरी वो प्रकट हुए किस रूप में है। कृष्ण ने राधा प्रकट हुए, राधा रानी जो है, भगवान का विस्तार है और भगवान के समान है। पर भगवान आनंद उठाना चाहते थे। तो आनदरानीजीप्रकट हुए। भगवान की लीला है, बिल्कुल दिव्य है और हमें राधेरानी जी से प्रार्थना करनी चाहिए। पापाजी ने कहा पुनिया हे भाई, ओ भाई, ओ, पर हम भगवान जो हैं वो आपको कृपा देंगे बोलेंगे। केवल जब राधा रानी आपकी सिफारिश करेगी में राजरानी रिक्ूमेंटहीहू राधा को बायपास करके डारेलीजाओगेो। कृष्ण प्रेम प्राप्त होगा। तो राजा रानी की सेल भग्सहैउजीके मन में 24 घंटे में भाग रहता है। क्या कृष्ण सेवा। तो आज के श्लोक हमने पढ़ा था। तीसरे ै कई लोग कहते हैं राजधानी का वर्णन भागवत में नहीं है, शास्त्र में नहीं है। कैसे विश्वास करें रिक, वेदा, वो कई शास्त्र में है। भागवत में, इस लोक के द्वारा ये सूचना मिली है। भगवान, राजधानी, भगवान की भक्त है, पर भगवान प्रकट हुए हैं, वो प्रकट हुई है। अलभुतरूपऐसीराजरानी राजरानी जी है, वो इस लोक में उनका नाम है आदी को ढूंढना कि इस सलूक साबित हो रहा है ये जो शब्द है या ये शब्द का अर्थ किया है राधानी प्रकट हुई है इसके बल में 1 ही भाव है आप इसे ध्यान में पढ़ते हो वन रासिला कर रहे थे उपयोग के साथ और तुरंत ही नशीला करते हुए वांसे चल पड़े राजन आनी के साथ और वो ढूंढने का है कृष्ण कहाँ चले गए और कहा है वो अलग अलग रास्तों से चल रहे थे को खोजने के लि ने कहा उनके फुट प्रिंस समझ गए तो गोपियों में एशिया नहीं थी जन े भगवान के साथ कौन है और सबकी इच्छा के भगवान की संगत। राजरानी जी का वर्णन शिव लोक में है और हमारे चारों ने कहा है कि राजधानी जी का वर्णन है क्या कारण है कि स्वामी ने इसमें स्पास रूप से प्रकट का कारण यह है रानी जी के विषय में भागवत में इस लोक में उनका नाम लिया जा रहा है है कैसे राजा मरा मरा के राजा थे ने 1 शाप दिया था 7 दिन के पश्चात तुम्हारे मृत हो जाएगी तो स्वामी ने उनको दे दिया को स्वामी भगवान के शुद्ध भक्त हैं उनके मन में यह भय है किसी गोपी का नाम भी लूंगा तो इतना आनंद प्राप्त होगा कि में ये उपदेश नहीं सकूंगा। तो इसलिए शुक्रिया गोस्वामी ने किसी गोपी का नाम नहीं लिया है आप सीमा, भागता पढोगे और इस अध्याय में गोपियों का वर्णन है पर कहानी की गोपी का नाम कृषि भवन लीला का है रानी के विषय में चर्चा नहीं की राधारानी के भाव में राधा रानी की सेवा के भाव में हैं उन्हें इतना आनंद आ रहा है ऐसे होते है भगवान के चिंतन के अलावा कुछ नहीं कर सकते यह नहीं चाहते थे क्यूंकि जब उपदेश थे हजारों लोग वहाँ उपस्थित थे सबसे आगे बैठे थे तो स्वामी नहीं जाते थे के में कोई रुकावट आए इस लोक में रेक्टल का वर्णन कर रहे हैं। राधा जी भगवान की अनेक लाइन भी है सब है भगवान गीता में क्या कहते हैं जन्म कर्म च मे प्रकट होना क्या है। डीबीएम कार्ड से बहुत ही योग्यता के पास तो राधारानी भगवान के अनेक लेन आये हैं। राधा रानी 1 कुल भी है इसका नाम क्या है बात हो तो 1 से 1 बैल के रूप में सुरा या भगवान करे सो भगवान ने बड़ी सरलता से उस का बंद कर दिया है बकायदा अलग अलग रूपों से भगवान का बस करने ले क्यूकी उसकी चिंता के द्वारा उनका बस किया तो राजधानी गोपियों ने कहा अरे तुमने तो बड़ा अपराध कर दिया है। 1 बैल को मार दिया। भगवान ने कहा ये बैल नहीं थी बैल के रूप में है इसके बद करने में कोई राम नहीं तुम्हें जरूर पछतावा करना पड़ेगा अपराध किया तो क्या सजा तुम मुझे देना चाहते हो तुम सब हूँ ने कहा ये कैसे संभव होगा करके दिखाओ। तो भगवान ने 11 तिल के जल को ले कर बुलाया गंगाई जमाए साल चली आई भगवान को प्रणाम किया और और फिर इन सब को का जल है वो आया और उसके द्वारा क्या बन गया। श्याम ने कहा मैं संक्षेप में कह रहा हूँ कथा लंबी है ने कहा कि गया ने कहा स्नान कर लो कहा नहीं हम तुम्हारे कुल में नहीं आयेंगे किया मैं अपना कुल बनाती हूँ। तो उन्होंने अपनी चूड़ी को लेकर और साये को लेकर 1 कुबड़ा होल बना दिया खाना दिया और फिर मानसी गंगा जो है में बहुत बड़ी थी पानी गंगा से जल ले गया है। किशन ने कहा ये तो साफ तो नहीं है जो भगवान के कहने पर सब तो आकरा राने के फोन में पानी डाला वो बन गया क्या राधाकुरराधाकुनका जो जल है और शाम को मुझे जल है वो बड़ा माना जाता है। इसलिए राधा जन्म देन में कुल में बहुत बड़ा उसका भी होता है पर हमें राधा कुन इस बात से जाना चाहिए जो जल है ये। रादाकुरानजैसेपापाजी ने मुझे कहा था हमें रादाकुनमेंतैरना नहीं चाहिए तो पांव को ऊपर नीचे क में दर इक्वल टू किंग राधानी की दर रानी के जल में और राधानी में कोई अंतर नहीं है कि भवन में कोई अंतर नहीं है तो अगर कुर श्याम जल्द है वो राधा और कृष्णा का असली रूप मान सकते हो तो राजा रानी के अनेक मिला है आम में कुछ नीला का वर्णन कर सके 1 समय भगवान को बहुत ही गहरी सिर दर्द हुई थी तो टाइगर बाम लगाते है भगवान ने क्या कहा सबको जानते हो मुझे बहुत सी दर्द हो रही है बस जल चाहिए ग सबसे पहले सत्य भाव को उन्होंने कहा भगवान को सिर दर्द हो है उन्हें भक्तों की धूल चाहिए की धूल भगवान के माथे में लगेगी इसे अपराध
है
में जाना पड़ेगा। फिर वो गए रुक रुक मिनी ने भी अनेक के पास गए ने इनकार कर दिया अपने चरणों के भगवान के माथे में लगे लगा ने लौटे और और मैंने तो सोचा था आपके लाखों बख्स हैं वो बिना हेज किए हुए 2 की धूल देले सबने इनकार कर दिया सबको पैसा ये धूल के चेहरे में लगेगी तो अपराध हो जाएगा। भगवान ने पूछा तुम सब भक्तों के पास गए थे और गोपियों के पास गए ही भूल गया वो गए गोपियों के पास जब गोपियों के पास गए तो उन्होंने देखा गोपियाँ उदास थीं क्यू भगवान द्वारका में चले गए उनको ब्रज में छोड़कर और गोपिया जो है उसी एंगल में बैठी थी जिसके आगे द्वारका था तो भगवान का चिंतन कर मुनि उनके पास ने पूछा तो कोई सूचना लेकर आये हो तो हाँ सूचना यह है उनको अपने भक्तों के चरणों की धूल चाहिए माछेमेंलगाने के लिए बड़ी सिरदद हो रही है ने कहा द नारद मुनी से उनको कहना इतनी सी हो रही है कि अगर शाम तक धूल नहीं मिले तो शायद वो भी बाहर हो जाए। तो गोपियों से नारदमुनी ने कहा वान को भक्तों के चैनल की धूल चाहिए तो बक्सर ने गोपियों ने धूल चाहिए लो राधा जी ने सबसे पहले कहा मेरे चरणों की धूल ले जाओ भगवान मेरे चरणों की धूल ले जाओ। दूसरी गोपिया थी। सबने कहा हमारे जोगी धूल ले जाओ, अगर में भी जाना पड़ेगा। हमारी चिंता नही है, हमारी इच्छा क्या है? यह भगवान है। हम क्या सोचते हैं? हमारी खुशी में, भगवान की खुशी, खुशी में हमारी खुशी। सबको ने कहा ले जाओ, ले जाओ, ले जाओ। हमारे शो की धूल। तो फिर उन्होने पूछा धूल कैसे लेके जाओगे में दूध ले जा। ऊंगा वो गए। बगवान कहा गोपियों में इतना गुस्सा था, उनकी इच्छा थी कि आपके साथ रहे। उन्होंने बिना हिचके धूल दे दी। तो भगवान का देखो जो प्रेम रानी गोपियों का है, मेरे प्रति वो प्रेम किसी और कोई भी काला नहीं कर सकता। जो भगवान के प्रति जो भाव हो उसे प्रेम कहते हैं। और जो बौधिक आकर्षित हैं उसे काम कहते हैं। जो गोपियां हैं, कुछ भी करने को तैयार है मेरी खुशी के। ये होना चाहिए। हमारा भाव अक्सर हम भक्ती में आते हैं। पर हमारा भाव यह रहता है। कुछ धर्म प्राप्त हो, कुछ सुविधा प्राप्त हो, कुछ लाभ प्राप्त हो। बक्सों का क्या भाव है? आप जो सेवा देना चाहते है, जो कुछ माँ। बाबू ने क्या कहा मुझे कुछ लोगे मैं आपकी भक्ति नहीं छोडूंगा, ये होना चाहिए। सच है। ये भाव हैं आप भक्तों में, भगवान की खुशी में, मेरी खुशी। अगर भाव नहीं है। तो ये भाव हमें डिवेलप करना चाहिए। वे शू डिवेलप कैसे संभव है। तो 1 नर मुनि नारद मुनी जी जैसे आप जानते हो यात्रा करते रहते हैं और कई बार भक्तों को शराब भी देते हैं। शराब बिना बजाते जाते हैं और भगवान को बड़ा अच्छा लगता है रोटी हो गाते हैं। मुनि भागो मे से क्या वर चाहिए। सर यात्रा करते रहते है का उद्धार करने के लिए। आज राधारानी गोपिया उत्सव का प्रबंध थे, जिसमे भगवान राधा कृष्ण झूलेमें बैठे है। राजरानी और कृष्णा का थोड़ा अनबन हो जाए। राज रानी प्यार हो रही थी, उस समय जाने के लिए भगवान ने भगवान से कहा तुम्हे याद है तुम्हे 1 बार दिया था मुझे मांगना चाहता हूँ क्या? भगवान बोलो क्या है मैं देखना चाहता हूँ। आप झूले में, ललिता के साथ, तो न झूले में थे ललिता के साथ और उसे उतनी देर में बुने गये से पूछा आप क्या कर रहे हो? आज ने कहा मैं तैयार हो रही हूँ झूले में जाने अरे आपको बता नहीं भगवान तो ललिता के साथ झूले हुए हैं, नहीं तो बाबा ने कहा क्यूँ नहीं आये। उन्होंने कहा की तुम ललिता के साथ झूले में थे, मैं क्यों? भगवान ने तुम्हें कैसे पता लगा। मुझे नारदमुनी ने बोला था। भगवान ने कहा मुनीबा झूले में बैठे हा मन को खुश करने के लिए मैंने। मोबाइल ने कहा मैंने कहा था द मुनी को ज्यादा मत आने 2 मुझे पता करवाएगा। इस प्रकार भगवान के अनेक जिले है। रानी के पास 1 ब्राहमण आया है, 1 में वो ब्राहमण गरीब बेटी की शादी करनी थी। भगवान से प्रात की मैं बेटी की शादी करना चाहता हूं पर धन नहीं है। तो भगवान ने जो राधारानी जी का वजन। था उसने उसने की बद की सोना चांदी या दादाजी के वजन बाल की जो लिया लीला है क्या है स्वामी
स्वामी
स्वामी बन जा रही है। sat 1 बडे प्रसिद्ध राजा बुदेशाेराज्यका e सुनाई दे रहा है पीछे पुराना है उस समय के सबसे प्रसिद्ध राजा के राज्य का शासन कर रहे थे, और उनकी इच्छा नहीं थी। बड़े बड़े रूपक गुसा सरकारी नौकरी त्याग हो, सरकारी नौकरी त्यागी। उनके बाद इतने सोने के सिक्के थे के पूरी नाव भर गई थी उसके साथ और बा 2 को और उपयोग किया मी को निकालने के लिए। वो भी ये 2 भाई। उस समय के राजा नवाब भुशेशाभश सबसे सबसे बड़े राजा के राज्य का शासन करते थे, तो वो वृंदावन में ये क्या कर रहे थे? मधुकरी खाने के लिए, मधुकरी का क्या मतलब दिन जो है घर जाता है अपनी आवश्यक को पूरा करने के लिए, और जैसे जैसे भी जो है अलग अलग फूलों से जाकर बैठी है। सो मधुकरी में घर जाते हैं। 1 दिन उनके मन में भावना थी, मैं अपने भाई को कुल, खिलाऊँ रूपा से राजन वर्जन करते थे और अलग अलग में यात्रा कर देते थे खाने के लिए। 1 साथ बैठे थे सो रूपा को इच्छा को खिलाया जाए। और उनके पास कोई धन नहीं था, हालांकि करोड़पति थे उनने सब धन बाँट दिया था बड़ा अच्छा खीर बनाया जाए। उनके बाद कोई सुविधा नहीं थी। रानी जो है अपने भक्तों की इच्छा को समझ लेते हैं, ईश्वर से भूत में उपस्थित है। रानी का पता गया की रूपक को स्वामी की इच्छा है की अपने भाई के लिए ही बोला। रानी जी 1 छोटी लड़की के रूप में पहुँच गए, कुटिया छोटी कुटिल और अपने साथ 2 भई कर पानी ले। और उन्होंने कहा हे महात्मा मैं तुम्हारे लिए। रानी ने चल पड़ी से थोड़ी देर बाद आये प्रसाद खाने के लिए दिया
हे
इतना अच्छा टेस्ट इतना की सुगंध कैसे बना भाई पूछा। भाई ने कहा ये 1 लड़की आई थी बहुत खुबसूरत, जिसने कहा साधू जी लीजिये, ये दूध ही दूध चीनी, रबड़ी बनाने और बनाने के लिए और खुद बना कर चले गए। लड़की कैसी दिखती थी? भाई ने कहा सूरत मैं हूँ हूँ तुम्हारे लिए तुम जानती नहीं, वो लड़की कौन थी वो लड़की थी
न
हो। नादर ने कहा तुम्हें कभी भी भगवान की सेवा नहीं लेनी चाहिए। वह कई बार भगवान को सेवा के लिए, तो भाई को डांटा। तुमने राधा रानी जी से की मधुरपुरी की कथा जानते हो। मधुपुरी को सपने में आया गोवाला जिसने उन्हें खीर दी थी। भगवान मिला दूसरी तरफ से दुखी से भगवान की सेवा ले ली। सो भक्तों का भाव क्या होना चाहिए? हम केवल भगवान को करे। राधारानी जी का भाव 24 घंटे क्या है विष्णु की ये है ज्यादा। ऐसे तो भगवान दयालु है जो कहते हैं 4 स्थिति में आ सकते हो, दुखी है, पीड़ित है और जिसे धन चाहिए, भगवान कहते हैं 4 स्थिति में लोग शहर में आते हैं। सम भाव क्या है हे भगवान, धनी चाहिए, कोई सुविधा नहीं चाहिए, केवल हमें क्या चाहिए मौका भगवान की सेवा करने का जो भक्त भगवान की सेवा में जुड़ते हैं वो असली धनी है। जैसे की जो सोचते हैं धन असली धन है वो है माँ। पुरी ने कहा 1 समय में केवल अभी लखपतियों के घर में खाऊंगा यात्रा करते थे में रहते थे। अभी मैं केवल लखपतियों के घर में खाऊंगा, हमारे घर नहीं आओगे तो लखपति नहीं है। लखपति ऐसी के लाख बार जॉब करता है। असली लखपती कौन है तो भगवान के शरणागत होने का प्रयास करता है। तो भक्त का भाव होना चाहिए सेवा करे। इसी प्रकार अीरादासगुस्वामी कौन थे, कौन थे सबसे धनी व्यक्ति ये गुलाब 1 रगुलर का बड़ा गहरा क्रश था जिला के साथ रहने के लिए रगराघासी हमे धन पत्नी छोड़कर वृंदावन में आ गए थे और वृंदावन में राजपुर में बैठ कर क्या करते थे क्या करते थे भजन? तो 1 दिन राज रानी वहाँ से गुजर ही थी। उसने देखा की हो इतनी इतनी धूप में गुना बैठकर दिन रात जॉब करता है। गुना किया। 1 भजन कुटी बना के लिए और कहा तुम वहाँ बैठकर जॉब करो तो ना द्वारा फैशन बना रानी जो है बक्सों के बक्सों की सेवा करना चाहती है। अगर हमें कृष्ण प्रेम चाहिए। हमें किस मार्ग से जाना चाहिए रानी के द्वारा। rani goa कुरु राज रानी कुरुषेत्र सूर्य गैन के समय सूर्य गैन के समय लाखों साल गदर आते हैं। तो वहाँ वो भगवान से भगवान द्वारका से आए थे। कुरुषेत्र सूर्य में उपस्थित और राजरानी ने भगवान को देखा क्या देखा, क्या देखा भगवान सजे हैं राजा जैसे और राजरानी भगवान से गोला के बा राजधानी ने कहा मैं बड़ी प्रसन्न हूँ की द्वारका से आये भगवान और सी आई राधे राजी गोपिया राधाजी गोपियों को सूचना मिल गयी थी भगवान आ रहे है राजा हा की मैं खुश प्रदर्शन देकर और मुझे आपके लिए देखना चाहती हूँ वृंदावन में मनाते हैं या होना चाहिए। इस स्थान से रथयात्रा शुरू होती है उन को आप क्या मानते हैं पुरुष और जिस साल में आप से बात करते हो भावना का हम वृंदावन पहुंच गए शुरू हुई थी की इच्छा के अनुसार उनकी शादी की भगवान रात में ना बन जाए यात्रा यह 1 आध्यात्मिक उत्सव है के कई गुण हैं समय टाइम टू भी है। garbage so we get me an misra stop no
11 बजे
e a a a a a a a a तो राधे रानी जी से क्या फायदा करोगे मैं बनना चाहता हूँ और राधा रानी जी अत्यंत दयालु है भक्तों के प्रति बड़ी दयालु है और राधा रानी का गुणगान आप राम करते हैं कैसे हरे के मंत्र द्वारा हरे कृष मंत्र में जो हरे शब्द है उसे क्या वो राधा रानी रानी का नाम अलग लेने की आवश्यकता नहीं? आप हरे कृष्ण बंदर का उचाल करो। हरे कृष्ण बंदर का उ्चालनकरोगे जिसके द्वारा दोनों से भीख मांग रहे हो। क्या सेवा 2, सेवा 2 और क्या सेवा 2 बाल होते हैं। कैसे ई नाम के द्वारा इनाम को स्वीकार कीजिये, नाम का उच्चार कीजिये और जितना करो वो उतना ही कम है। आदेश दिया जाता है। सोना मना करने का सामना करो। पापा। कहते हैं बिना शक के भगवान के धाम जाओगे तो नाम है। नाम ही महिमा की चर्चा करने वाला था। मदिरा की सब का यह प्रयास होना चाहिए की आपका बंदर जल्दी खुले और सब चाहते हो की जल्दी खुले। सब को सोचना चाहिए। मंदिर के लिए क्या कर सकता हूँ जिसके द्वारा यह योजना बनी है। 6 महीने में समाप्त करने के आप सब सहयोग लीजियेगा। भगवान कैसे। पापा ने कहा कि जो व्यक्ति भगवान के मंदिर बनाने में सहयोग देता है, भगवान को ना में ले जाते हैं। तो आराम कीजिये और ज्यादा ये कि आप भक्ती में आगे बढ। सको भाई कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे तो हमलोग हृदय पूर्वक महाराज जी का अभार व्यक्त करते हैं की महाराज जी स्पेशल राधाष्मी के लिए केवल हमारे इस खार घर के भक्तों के लिए। महाराज जी स्पेशल दिल्ली से यहाँ आये हुए हैं। है तो जोर से हरिकृष्ण महामंत्री बोलते हुए महाराज जी को धन्यवाद देते हैं।
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