Sri Rama Navami Special Katha SB 9.10.51 | 7.4.24 | ISKCON Delhi | Gopal Krishna Goswami Maharaja

In this devotional lecture recorded at ISKCON Delhi for Sri Rama Navami, Gopal Krishna Goswami Maharaja expounds on Lord Rama’s divine pastimes as described in Bhagavata Purana SB 9.10.51, highlighting the ideal of Ramrajya and contrasting it with the challenges of the present Kali‑yuga. He explains the four yugas, emphasizing the moral decline in Kali‑yuga and presenting the Hare Krishna maha‑mantra and congregational kirtan as the most effective spiritual remedy. The talk repeatedly cites scriptural passages, underscores the importance of bhakti practice, and stresses that true Varnasrama cannot be established by a single cow‑shed or farm but requires a cohesive community of devotees. The latter part of the lecture provides detailed announcements of upcoming ISKCON events – afternoon discourses, evening processions of Sita‑Ram, Lakshman, and Anjaneya, a Harinam session, and a Ram‑katha at the auditorium – urging participation and reinforcing communal devotion. The overall tone is reverent, instructional, and enthusiastic, aiming to inspire both personal spiritual practice and collective engagement in the temple’s festivals.
Chapters
जाई जाई जाई प्रभुता प्रभु पा प्रभा
प्रभा
जाए जाए प्रभु पा प्रभु प्रभु
प्रभु पा
चाय हो ही बो हरी बो हरिबो हरिबो हरी हरी बो हरि बोल हरि बो
बो
गोर हरबा हरिबो हरि बोल हरि बो वखीमनं्दमेअरे कृष्णा तो हम स्वागत करते हैं महाराज का हिज
होलिनेस गोपाल कृष्ण गुस्वामीमहाराज की
शीलपरुपादकी
तो
आप सभी से रिक्वेस्ट है की प्लीज
आप अपने मोबाइल फोन साइलेंट पर कर
लीजिये और लेक्चर के दौरान किसी भी बाधा जो है वो इस क्लास में पहुँच।
hrasnaकृ bomwolamrbhहरी हरी hi hi जरा जरा
जरा जज
ये है भा
भा
जायगा ह
सोना
सोना ना जा बजजनाजगा 44 वाला हो भैया s जल को भोर का नाला मरे
हर
मा ह हर सरे अरे रब रब रब बरारा रे हरे राम
हरे
हरे हरे का
हमारा
मारे म ह
पराग
साहब
ma gold आप सबका हार्दिक स्वागत आज हम
और
उस हराम करता है।
reygrishna please increse allin the mike
i
o
a हरी हरी
हरी
हरी हरी
का अध्याय 10, लोक संख्या 51 अध्याय का शीर्षक या भगवान रामचन्द्र की लीलाएं क्रेता या वर्तमान या
म
राम राज धर्म सर्व भूत सुझाव हे रेदयमव्तमानायार
हर
10 वा राम राजन सर्व भूत सुखाव
हे
शब्दार बोलने के पहले बोलना चाहा तो दोहरा सकत a
दे
रहे रहे
ह
जस
देह सही है ये
या
सहा
गरीधरपठे माता जीस करे
गे
शब्द
के सत्य योग समह समान अभावत हुआ। रामे राम चन्द्र की उपस्थि के कारण राजनी राजा के रूप में धर्मज्ञ, धार्मिक, सर्वभूत सारे जीवों को सुख व है। पूर्ण सुख देते हुए अनुवाद रुपये मेरे बहुत दोहराएं। भगवान रामचंद्र त्रेतायुग में राजा बने थे, किन्तु उनकी सरकार अच्छी होने से व युग सत्ययुग जैसा था। प्रत्येक व्यक्ति धार्मिक एवं पूर्ण सुखी था। तात पर ध्यान पुर श्रवण करें। 4 युगों में से कलयुग सबसे निकृष्ट है किन्तु यदि वर्णाश्रम धर्म की विधि लागू कर दी जाए तो इस कलयुग में भी सतयुग जैसी परिस्थिति लाई जा सकती है। हरे कृष्ण आंदोलन या कृष्ण भावनामृत आंदोलन इसी प्रयोजन के निमित्त है। कल दोष राजन अस्थि खेको महान गुण कीर्तन आदृष्णसमुक्तसंग परम रजे हे राजन। यद्यपि कलियुग दोषों से पूर्ण है। फिर भी इस युग में 1 उत्तम गुण यह है कि केवल हरे कृष्णा मंदिर का कीर्तन करके मनुष्य भव बंधन से छूट सकता है और दिव्विदाम को जा सकता है। भागवत के बारहवे अध्याय के तीसरे अध्याय, बारहवे कंद के तीसरे अध्याय का इकावन लो। यदि लोग हरे कृष्ण, हरे राम और कीर्तन के इस आंदोलन को स्वीकार कर ले तो वह अवश्य ही कलयुग के कलमश से मुक्त हो जाएंगे और इस युग के लोग सतयुग जैसे ही सुखी हो सकेंगे। कोई भी व्यक्ति कहीं भी रहकर इस हरे कृष्ण आंदोलन को ग्रहण कर सकता है। उसे केवल हरे कृष्ण मंत्र का कीर्तन करना, विधि विधानों को मानना तथा पापी जीवन के कल्मष से मुक्त होना होगा। यदि कोई पापी जीवन को तुरंत नहीं छोड़ सकता, किन्तु यदि वह भक्ति तथा श्रद्धा पूर्वक हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन करता है तो वह अवश्य ही सारे पाप में कर्मों से छूट जाएगा और उसका जीवन सफल हो जाएगा। पर विजय श्री कृष्ण संकीर्तन यह भगवान रामचंद्र का आशीष है कि वे इस कलयुग में गौर सुन्दर रूप में प्रकट हुए हैं। शेलरकीव
हम शेस जीवन हर साल से
विश्व जे
जे जा हे हो
सीधी आड़
ऐसी रे
कृपया अनुवाद दुबारा 1 बार श्रवण करें। भगवान रामचन्द्र त्रेतायुग में राजा बने थे, किन्तु उनकी सरकार अच्छी होने से वह युग सतयुग जैसा था। प्रत्येक व्यक्ति धार्मिक एवं पूर्ण सुखी था। चलिए प्रपात की जाये
यहां राय हैं।
यहां भागतों में जब भगवान राम की लीलाओं का आप वर्णन देखते हैं। विशेषतया नवम स्कन के 2 अध्यायों में भगवान की लीलाओं का वर्णन होता है। भगवान राम स्वयं भगवान हैं। भगवत गीता में भगवान भागवत गीता में बताया गया ब्लांब्रहवति भारत है। जब तक जब जब धर्म की ग्लानी होती है, मैं प्रकट होता हूँ।
कोई
भगवान का राज्य इतना, भगवान राम का राज्य इतना सफल पूर्ण था, इतना था कि वहाँ पर किसी को भी किसी भी प्रकार की कमी का अनुभव नहीं होता था, कि कोई भी निराश नहीं होता था किसी प्रकार का कष्ट नहीं था।
पूरी
खुशी पूरी प्रजा, संतुष्ट और खुश थी। हमारे समाज में 1 इंडेक्स है हैप्पिनेस
इंडेक्स में कई प्रश्न पूछे जाते हैं
उसमें कई प्रश्न पूछे जाते हैं।
विश्व क्या देशों में विश्व गया अलग
अलग देशों में वो रिपोर्ट बनाते हैं हैप्पिनेस इन उसको बोलते हैं हैप्पीनेस इंडेक्स को स में पोर्ट कराते हैं और उसको हैप्पिनेस इंडेक्स बोलते हैं। कैनाडा हैप्पिनेस इंडेक्स मैक कैनाडा नंबर वन
आता है और या ऊपर लिखे जाते रहता है इंडिया ऊपर नीचे जाते रहता
है इंडिया बहुत नीचे नीचे ऊपर नीचे जाता रहता है इंडिया
आगे बढ़े, इंडिया आगे बढ़ रहा है धीरे धीरे आगे
बढ़ रहा है इंडिया इसमें happiness index,
may
its not here, so its not here that is i have to do is?
हैपिनेस इंडेक्स कैसे कैसे बनाते हैं happines
इंडेक्स कैसे बनाते हैं?
नौकरी है
नौकरी है किस प्रकार की सुविधाएं, इन सब चीजों को लेकर 1 हैपिनेस इंडेक्स बनाया जाता है।
कोई देश ऊपर जाता है, कोई नीचे
जाता हैपिनेस डेक्स में, कोई देश ऊपर जाता, कोई देश नीचे जाता है।
यह भगवान हैपिनेस हंड्रेड यहां पर भगवान
रामचंद्र के राज्य में जो हैप्पिनेस था वो हंड्रेड परसेंट था hap्पiनeस इंडेक्स हंड्रेड परसेंट था,
दुखी नहीं था कोई व्यक्ति दुखी नहीं था और समाज में कष्ट
नहीं था और समाज में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं था। आज के जमाने में कष्ट देखते हो भगवान गीता में कहते हैं दुखालय मशाश्ोाहै, ये है कलयुग का लेक्शन दुख और 1 आप दुख से नहीं बच सकोगे, यह दुखालय है और यह अस्थायी है। temarएveरीथिंग इस टेंपरेरी
प्रूफ सटी कई कंपनियां हेड्वटाइज कर ली है और 1 प्रूफ
स्टील आप देखते हो कई कंपनियां ऑरड्वटाइज करते हैं अर्थ कोएक प्रूफ स्टील
बिल्डिंग
नहीं गिरेगी मतलब अर्थ क्वेक में भी यह बिल्डिंग नहीं गिरेगी
साबित नहीं हुआ है, स्थापित नहीं हुआ है, अभी तक
स्थापित नहीं हुआ है। there is nothing nonaseartguik prove steel, hes not here you ve toli
tron
भगवान राम के राज्य के समय हर प्रकार का सुख था, किसी प्रकार की कमी नहीं थी, किसी प्रकार की कमी नहीं थी
कसागहैभेलेपानी से और जो पूरा न
था वो खेती, उस खेती जो थी, उसमें पुरा न था।
आज क्या देखते हो आप सागर सूखते
जा है, सागर जो है वो सूखते जा रहे हैं और विश्व में आवश्यकताओं की कमी है।
तपस्या उठाये 14 साल गए।
भगवान राम ने तपस्या उठाये अपने पिता के आदेश के अनुसार 14 साल के लिए बन गये।
देखा
है
क्या विचार दुखी कर रहा है।
जब भगवान राम ने देखा उनके पिता बहुत दुखी है। तो उन्होंने पूछा पिताश्री, आपको क्या विचार दुखी कर रहा है?
हम राह।
तब उनके पिता ने उनको कहा कारण? तो रामजी ने कहा कि आप घबराओ मत, मैं चला जाऊंगा वन। और इस तरह 14 साल का वनवास किया। भगवान ने लीलाएं भी की थी।
हम चर्चा नहीं कर है, चर्चा नहीं कर रहे हैं।
जिनकी। अब हम चर्चा नहीं कर रहे हैं।
जब भवाराम लौटे है। भाई भरत ने मैने कहा कि आप शासन कीजिए।
जब भगवान राम लौटे तो उनके भाई भरत ने कहा कि आप शासन कीजिये
का है भगवान पुत्र के साथ।
तो भगवान कहा जाता है कि भगवान रामचंद्र अपने प्रजा के साथ इस प्रकार का व्यवहार करते थे, जैसे किसी उनका सम्बंध इस प्रकार था है जैसे कि पिता का पुत्र के साथ।
भा क्या था?
भगवान क्या था? भगवान राज्य? भगवान राम के राज्य का समय था। त्रेता युग
7 के अनुसार 4 प्रमुख योग्य है।
छात्रों में कहा गया कि 4 प्रमुख योग्य हैं सभी सत्युग, रेत युग, द्वापर युग और कलियुग।
हर युग में, हर उपाय है भगवत का।
कलयुग में, हर युग में, प्रत्येक उपाय है भगवत भक्ति का, भगवत प्राप्ति का। 1 सतयुग में लोगों की अवधि थी 1 लाख साल या और भगवत प्राप्ति का साधन क्या था? भगवान का चिंतन, उस समय चिंतन करना बड़ा आसान था
हवाई।
आज के समय में आप चिंतन करने का प्रयास करोगे। तो आप देखोगे। पहाड़ों में भी हवाई जहाज आता है। और आपके कलयुग में हमारे वैज्ञानिकों ने और भी डेंजरस हथियार बनाये हैं।
यह सम्भव नहीं है।
तो ये सब समस्या हैं। कलयुग में यह सम्भव नहीं है, यह संभव नहीं है। कलियुग में 10 के बाद युग कौन सा योग्य था? त्रेतायुग, त्रेतायुग, चला 10 हजार वर्षों के लिए, या
साधन?
और त्रेतायुग में क्या था भगवत प्राप्ति का साधन बड़े बड़े यज्ञ बड़े बड़े
यज्ञ नहीं बड़े बड़े छोटे नहीं बड़े बड़े छोटे नहीं बड़े बड़े मैं।
उसके लिए बहुत शुद्ध सामग्री की आवश्यकता थी।
आज स्थिति में असंभव है, जो कि
आज की स्थिति में असंभव है।
या क्या करोगे पड़ोसी पुलिसवाले को बुलाएंगे
आप ये करोगे, पड़ोसी आप करोगे। तो पड़ोसी पुलिस वाले को बुलायेंगे
पड़ोसी शिकायत कर दे।
तो कई थानो में जब हम भगवान का कीर्तन करते हैं तो पुलिस को शिकायत करते हैं।
लोग
कहते हैं कि ये आवाज बहुत डिस्टर्बिंग है। कल फिर आया doपरyuo उपासना द्वापर में क्या? तो भगवान की अच्छी विग्रह की उपासना करना प्रजा।
भगवान के उपासना कर रहे थे तो
प्रजा जो है भगवान की अच्छी विग्रह की उपासना के लिए मंदिर आते थे तो बहुत ही महंगी भी भेंट ले
आते थे बोला जाए।
तो अगर आपको बता दे की आप दर्शन के लिए आये पर 1 तोला सोना लाल हो साथ में
आये तो
फिर हम हर शास्त्र जन्माष्टमी को आयेंगे,
वो भी सम्भव है, वो भी संभव है।
वर्नन किया कल भगत में, बारहवें स्कंध में, प्रथम स्कंध में सुगधगोस्वामी ने लक्षण वर्णन किया है। कलयुग के लक्षण क
कहते हैं कि
लोग झगड़ालु है छोडी छोटी बात में, छोटी छोटी बातों में अनमन हो जाता है। इसलिए वकील जो है बहुत बिजी हैं और फिर लोगों की आयु कम हो जाती है। किसी के ऊपर श्रद्धा नहीं, किसी को किसी योग के ओ पर विश्वास नहीं है। अध्यात्म कार्यों में बहुत कम रूचि लेते
हैं और रूची ले लिये नाम के
लिए और रुचि लेते नहीं तो नाम के लिये।
तो इस वन में या
तो इस इस वातावरण में श्री चेतन महाप्रोम ने क्या क्या किया, प्रचार किया हरे कृष्ण महामंत्र का, कृष्ण माँ का, तो यहां
का
क सेल था, बोला गया तो
ये त्रेता में जब भगवान राम का राज्य चल रहा था, लोगों को लग रहा था कि सतयुग चल रहा है
ही यह लेगी को गुलाब के पानी
से धोना तो भगवान के राम के राज्य में लोग इतने लोगों की स्थिति इतनी थी कि सड़कों को गुलाब के पानी से धोया जाता था, साफ किया जाता था गुलाब गुलाब के पानी से धन की स्थिति राजधानी सबसे धनी राजधानी थी। भगवान राम को उन्होंने शरण लिया था तो उनको हर प्रकार का सुख प्राप्त होता था
बोलते है और पूरा कॉपरेशन था
जब हम जय श्री राम बोलते हैं और भगवान राम की शिक्षाओं को अपनाने की कोशिश करते तो हमें याद रखना है कि भगवान के भगवान रामचन्द्र के समय पर पूरी प्रजा सब सहयोग करते थे।
1 दूसरे
किसी प्रकार का मानसिक तनाव उस समय नहीं था क्योंकि लोगों की हर प्रकार की आवश्यकता प्राप्त होती थी।
आज ही क्या देख हम सब का मन जो है भरा हुआ है चिंता
से, आज के जमाने में आप क्या देखते हो? आज हम सब का मन भरा हुआ है चिंता से,
चिंता से भरा हुआ है।
तो यहाँ पर देखते हो हर आदमी का मन चिंता से भरा हुआ है। 1 प्रसिद्ध भक्त ने कहा कि बहरे
है
चिंता तो यहाँ पर आप आपका मन जो है चिंता से भरा हुआ है। अनेक प्रकार की चिंताएं हैं, नौकरी है, नौकरी नहीं है, दमदार ठीक नहीं चल रहा है।
कल नौकरी रहेगी नहीं रहेगी, कल नौकरी
रहेगी, नहीं रहेगी,
आईडी ग्रेजुएट बन रहे हैं।
जैसे कि आज भारत में लाखों लोग आईटी ग्रेजुएट बन रहे हैं। हर साल
देखा रहा है नौकरी नहीं
है, पर यह देखा जाता है कि यहां पर जो इंजीनियर बनते हैं उनको नौकरी नहीं मिलती। कॉलेज नोट जॉब यहां पर बताया गया। 1 रिपोर्ट आई है कि थर्टी पर्सेंट ऑफ, पीपल ग्रेजुएट फ्रॉम, आईटी, कॉलेजेस विल नॉट, गेट। जॉब 30 प्रतिशत लोगों को जो आईटी सेक्टर में जिनका स्नातन होता है, उनको नौकरी नहीं मिलती है।
यानी खोजते रहते हैं न।
तो हम इंजीनियर्स खोजते रहते हैं नए उपाय का,
कुछ साल पहले इंटेल,
तो
कई साल पहले, कुछ साल पहले। लोगों को बड़ी उम्मीद थी कि आर्टिफिशल इंटरेंस से हमें बहुत बड़ी सहायता हो जाएगी। आपको पंखा चाहिए, बैठे, आपको पंखा चाहिए, पंखा पंका चलो, पंखा चलेगा अगर बंद करना है, पंखा बंद करो बंद हो जायेगा। तो हर सुविधा इस प्रकार की सुविधा है।
अब कम लोग मोटा कम, चलोगे, कम
चलोगे मोटापा हो जायेगा।
कहा जाता है कि अमेरिका में सबसे ज्यादा मोटे लोग है।
तो बताया जाता है कि अमेरिका में सबसे ज्यादा मोटे लोग हैं। आबादी के
प्रतिशत में उसका का है क्या?
कारण क्या है, कारण क्या है, उसका
अगर दूकान में जाना जाएंगे। मोटर में, अगर दुकान में जाना पैदल
तो जाएंगे मोटर में
मकान चाहे दुकान
पास हो, चाहे मकान के पास ही दुकान हो।
तो आपको इतनी सुविधा चाहिए। पूरी टीम भी भरनी पड़ती है।
जब आपको इतनी सुविधा चाहिए। ये था बात में नहीं है
है,
छोड़ नहीं, जो है वो छोड़ नहीं
रहा है, छोड़ नहीं ले जाए, छूट ना जाए।
सोरी
का यह सोचते कहाँ
दान है। तो लोग सोचते हैं। इसको कहा छुपाए शो
शो रहा है।
तो भौतिक संसार में शो की रहता
है, शो करते है। हां,
तो किसी का भौतिक संदर्भ में देते हैं, किसी का देहांत होता है तो शो करते हैं।
vryबodysकोईशोक तो भगवान राम के रामचन्द्र के
समय कोई शोक नहीं था, दुख कठिनाई तो ये सब था और 1 और सुविधा थी। आप मृत्यु के समय भी खुद चुन सकते है।
नहीं चाहिए।
तो अगर आपके पास अगर ये सुविधा दी है तो आप बोलेंगे जाओ। आप नहीं चाहिए कितना सुख था समाज
में
राम राज की स्थापना कर सकते है।
तो सेल प्रपात भागत में बता रहै कि आज कलयुग में भी आप भगवान राम का राज्य की स्थापना कर सकते हैं। सत्य क्या है, उपाय क्या है? उपाय भगवान के भगवान के नामों का
उच्चारण महामना है, बना सकते हो।
तो आप हरेकरष्मामंत्र के माध्यम से आप इस कॉलिज में सतयुग की स्थापना कर सकते हो।
जैसे में गर्मी रहती है मेडलिस्ट देशों
में, जैसे मिडलिस्ट देशों में बहुत गर्मी है, बहुत गर्मी है,
गर्मी आ रही
है, हमारी दिल्ली में भी अभी गर्मी आ रही है।
आप क्या गर्मी में, गर्मी में, तो
हर व्यक्ति गर्मी में रहता है। बाद धन है, वो 1 दिन के पास धन है। वो एयर कंडीशनल लेते हैं, लगा
गर्मी गर्मी नहीं रहती।
तो एयर कंडीशन का अर्थ है का मतलब है कि गर्मी में भी गर्मी नहीं रहती।
यह
टेक्नोलो तो ये है मेडिकल टेक्नोलॉजी
गर्मी में सर्दी बना देते है, सर्दी में गर्मी बनाते, हम गर्मी में भी
सर्दी बना देते हैं, सर्दी में भी गर्मी बना देते हैं
सर्दी के मौसम में,
सर्दी के समय में अमेरिका, वगैरह में बहुत ही गहरी ठंड होती है, ल आप 1 मिनट भी बाहर नहीं
चल सकोगे घर में जाओ, सब में जाओ, आपको ठंड महसूस ही नहीं होती।
तो आप किसी घर पर जाओ तो आपको ठंड महसूस ही नहीं होती।
लोग
तो फिर जाते है, लोग ऑफिस जाते हैं तो कोड डाल के जाते, मालिक उतार देते हैं।
कोल ओर कोल कैब भरना पड़ रहा
है, नहीं तो कोल कोट, ओवर कोट। साथ ही स्वेटर भी पहना पड़ता है।
तो सर्दी में कमी हो रही है
तो सर्दी में गर्मी हो जाती है।
इसी
में तो इसी प्रकार इस कलयुग में भयंकर वा वातारण है, यह भयंकर वातावरण है। हमे महामंत्र का उच्चरण करना चाहिए और
क्या लाभ होगा?
और जैसे महामंत्र के उच्चारण से क्या लाभ होगा? ऐसा लगेगा कि इस कलयुग में भी सतयुग का प्रभाव है।
ये
कैसे संभव है?
तो यह कैसे संभव है?
उसके द्वारा हृदय की मैल निकलती है।
तो जब आप महामंत्र का जप करते हो तो इसके माध्यम से चेतो, दर्पण, चेतो, दर्पणा मार्जन, हृदय की मैल निकालती है।
अनादिकाल
तो हमारा हृदय अनादिकाल से मैला है।
क्या करो लोग?
तो इसका अर्थ क्या है? हमारे अंदर का भौतिक आकर्षण है। काम, क्रोध, मोह लोग, मदमातसरेपभाईजब आप, हरे कृष्ण ममता जब करोगे तो ये महल निकलेगी। जैसे कि आप शरीर को साफ़ करते हो। साबुन से, पानी से, तो इसके सरनाम के माध्यम से, इसके द्वारा असली आनंद भी प्राप्त होगा।
भगवान।
तो भगवान राज्य के, भगवान राम का, राज्य का आज भी हम स्मरण करते हैं। उनकी लीला लोग रोज सुनो तो नहीं, थकते, थकते नहीं लो।
हमारे देश में 50 साल पहले तक।
तो शिला प्रभात बोलते थे कि हमारे देश में 50 साल पहले तक हर रोज शाम को रामकथा होती थी, कृष्ण गता होती थी, और इसके द्वारा लोगों का आचरण भी शुद्ध होता था।
बनाना चाहे आवश्यक है।
तो अगर हम आध्यत्मिक वातावरण बनाना चाहते हैं तो ये हरे कृष्ण मामुद्र का उच्चारण आवश्यक है। तो कापर में प्रा के महिमा का वर्णन कर रहे है। तो यहाँ पर शिलप्रपातातपनमे बता रहे हैं कि कल दोषनराजनस्सीके, कितना देव, संगस्यसंघपरकृतना देव, कृषस्यमुसंघपरमरजे?
कलयुग में दोषी दोष है, कलयुग में दोषी दोष है, गुण में,
हर 1 गुण है, सत्युग 1 गुण, लेकिन 1 है कलयुग में, वो क्या है? भगवान का नाम महा प्र प्रकट हुए थे। इस हरिनाम के महिमा का प्रचार करने के लिए। भगवान राम प्रकट हुए, त्रेता युग में
कृष्ण हुए, युग में, भगवान कृष्ण प्रकट हुए थे, द्वापर युग में प्रकट हुए,
और चैतराम प्रकट हुए थे।
किस युग में और न ऐसे सिखाया प्रकट हुए विद्यार्थी के रूप में।
और उन्होंने ऐसे सिखा प्रकट हुए थे विद्यार्थी के रूप में।
जब लोग कहते थे, आप भगवान हो गए है,
तो जब लोग कहते थे आप भगवान हो, वो कहते थे नहीं। उन्होंने दीव लीला भी प्रकट की थी,
पर उन्होंने यह साबित किया है।
पर उन्होंने ये साबित किया कि वो भक्त हैं, ो
में रूची ले, तो
इस कॉलेज में, हमें हरिनाम में रुचि लेनी चाहिए।
नविदा भक्ति का, ज्ञान
में, आप नवविधा भक्ति का ज्ञान प्राप्त करते हो। शास्त्रों में,
व, स्कूल में तुम्हारे अध्यापकों
ने क्या सिखाया हिरण के शुभों ने पूछा अपने बेटे प्रलाद से आज तुम्हे अध्यापक कौन हैं? स्कूल में अध्यापकों से तुमने क्या सीखा? तो उन्होंने सोचा कि बेटा कहेगा कि आपके आप बड़े प्रसिद्ध हो। तो बेटे ने कहा श्रवण कीर्तन विश्व, स्मरण पाद सेवनम श्रवणम और किर्तन यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य, यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। तो इस कार्य का हमें लाभ उठाएं, जो उसका लाभ उठाएंगे, उनका जीवन सफल होगा। भगवान राम की लीला में बड़ी प्रसिद्ध है। आप रोज सुनो खो
दिया आखिर में,
प्रशाद महाप्रभु के समय में 1 ब्राह्मण था। उन्होंने उनको नोत्तर दिया कि आप मेरे घर में प्रसाद पाइए।
महा प्रभु
ने में, तो महाप्रभु गए। उनके घर में प्रसाद का समय लगभग 1 बजे था पहुँच गए तो वहाँ पहुँच गए।
मुझे लगता है कि तुम भूल गए की तुमने मुझे बुलाया था ने कहा
कि मुझे लगता है कि तुम भूल गए हो कि तुमने मुझे बुलाया था
प्रसाद आया हूँ, कुछ निशाना ही नही है।
मैं आम प्रसाद पाने के लिए आये हो, यहाँ पर कुछ निशान ही नहीं है। प्रसाद का ह कोई
यह सोचता हूँ कि रावण दुष्ट है।
तो उन्होंने कहा कि जब जब तक जब भी मैं ये सोचता हूं कि रावण इतना दुष्ट है कि वो उसने पवित्र सीता का हरण किया है, तो मुझसे कुछ खाया ही नहीं जाता। महा प्रोब ने बताया घबराओ मत
सीता
नहीं मुझे सीता का हरण का था, वो असली सीता नहीं थी, वो नकली थी। तो फिर ब्राह्मण संतुष्ट हुआ। तो उसने महाप्रभु को प्रसाद खिलाया। तो जिस सीता का हरण किया था वो सीता असली सीता नहीं थी। तो भगवान राम की जो लीला है बहुत ही दिव्य है।
सन्यासी चर्चा कर रहे थे।
1 समय लोग 2 सन्यासी चर्चा कर
रहे थे
जो राम है क्या है? इसका क्या अर्थ है?
madam we mean lot ram by this
this mamata ram, we mean lord ram। समबडी दूसरे ने कहा no i think it a lot ram। इससे आगे दे गोइंग back फॉर रोबी पात के पास राम महामंत्र हो, डस रेफर तो भगवान राम का नाम इसमें जो महामंत्र है किस की सूचना करता है भगवान राम की है बलराम की रेफर लॉट बलराम और लौट रहा हूँ प्रोपर से बहुत तेज कर है। प्रोपर ने बताया भगवान राम भी हैं, भगवान बलराम भी है। तो आप जब महामंत्र का उच्चारण करते
हो
उस समय आप इस उसके माध्यम से प्रार्थना करते हो कि भगवान से प्रार्थना करते है। मुझे सेवा 2, सेवा 2
सेवा आरम्भ
होती है महामंत्र यह सेवा आरम्भ होती है। महामंत्र के उच्चारण से
मंदिर भगवान का
भगवान महामंत्र में भगवान के नाम और भगवान अभिन्न है।
बड़ा उत्साह लोगो में जय श्री राम
कहने के लिए तो आज आज के समय में लोगों में बड़ा उत्साह है जय श्री राम कहने के लिए
महामंत्र
का साथ में जय श्री राम के महामंत्र का उच्चारण करना चाहिए। आप महा मंत्र का उचारण कर रहे, महामंत्री द्वारा भगवान से प्रार्थना कर रहे हो।
भक्ति 2, भक्ति 2, भक्ति 2, भक्ति
2, भक्ति 2, भक्ति 2,
स 4 करेंगे पूरा लाभ होगा।
तो अगर हम स्वदेश से अगर उच्चारण करेंगे तो पूरा लाभ होगा। भगवान आनंद स्वी चेत्र। महाप्राण ने बताया आनंद भगवान के नाम को चरण का 1 और लाभ है कि असली आनंद की प्राप्ति होती है।
2 प्रकार के आनंद है सी और नकली।
2 प्रकार के आनंद है असली और नकली
है।
तो समाज में आप देखते हैं कि लोग दौड़ते हैं, बहुतिक आनंद के पीछे प्रलाजमारायबोलते है।
जाने कैसे?
आएगा तो प्रलाद महाराज बोलते हैं न। स्वार्थ गति ही विष्णु। वो नहीं जानते हैं कि असली सुख
क्या है महिमा और तो अब राम
नमी आ रही है। हमारा ये बाव होना चाहिए कि हमें भगवान राम की महिमा का वर्णन करना चाहिए।
वो है महामंत्र
और वो है। महामंत्र के उच्चारण के द्वारा तो
किसी प्रकार की कमी नहीं थी।
तो इस लोक में यह बताया जा रहा है कि भगवान राम के शासन के समय पर किसी भी प्रकार की कमी नहीं थी, किसी प्रकार का कष्ट नहीं था। मनसे अर्थ से, अर्थ से, न मानसिक, न आर्थिक।
और कोई पुलिस फोर्स नहीं थी।
तो उस समय कोई पुलिस फोर्स नहीं थी। नेता घूमते थे और जो नेता नेता थे, वो घूमते थे।
देता दे तो घूमते थे राम भी ली भैया विषय में, वो वेश बदल कर जाते थे। भगवान आप के योध्या की गलियों में।
भगवान रामचन्द्र के अंदर इतनी चिंता थी प्रजा के भलाई के लिए, की कल्याण के लिए, वो वेश बदल कर जाते थे। अयोध्या की गलियों में।
ये देखने के लिए कुछ कष्ट तो नहीं है।
यह देखने के लिए कुछ कष्ट तो नहीं है।
सरकार को, बोलो जेल भी है सरकार को, यह नुक्स कमी है जेल में।
तो आज आप सरकार के बताओ गया की यह नुक् से ये कमी है। तो आपको जेल भी जाना पड़ सकता है।
आप सच्चाई का उचारण करो।
तो अगर सच्चाई का उच्चारण करो।
बदले जाते थे कि लोग खुला बात करें भगवान।
जब वेश बदल जाते थे तो लोग खुला बात करते थे।
उनमें त्याग था,
उनमें बेरागी, उनमें त्याग था, वैरागी था े
सारी।
उन्होंने जो राधा बने थे, उन्होंने अपने सारे सम्बद्ध गहनों की ब्राह्मणों को बांट दिया। उनका क्या श्रद्धा और ब्राह्मण थे। उनका आचरण क्या था?
ब्राह्मण का कर्तव्य है उतना इलाके जितना
की आवश्यक हो, ब्राह्मण का कर्तव्य है, उतना ही रखें, जितना आवश्यक हो। तो यह नहीं की आप पेटी भर अपने पेटी भर लो। पैसे से
जितना आवश्यक हो।
तो ब्राह्मण जो है, उसको उतना ही रखना चाहिए जितना आवश्यक हो।
राम अपने को सारे गहने बात।
तो भगवान राम ने अपनी प्रजा को सारे गहने बाट दिया,
सीधा में सारे गहने दे दिए राम।
भगवान राम ने जो बात थी गहने। तो सीधा ने भी अपने सारे गहने बांट दी।
और
सीताजी ने सिर्फ 1 नथनी 1 नो स्विंग रखा था।
हम आपके शासन से इतना खुश है, कुछ नहीं चाहिए।
ब्रामण हा। तो ब्राहमण ने कहा कि हम आपके शासन से इन प्रसन्न है कि हमें कुछ नहीं चाहिए, हमे उतना ही भूमि चाहिए, जितना हमें जरूरत आवश्यक हो। तो उन्होंने सारे संपत्ति वापस कर दी। आज उम्मीद कर सकते हो। तो उस समय के जो ब्राह्मण जोते हैं उन्होंने सारे गहने लौटा दिए। सीताजी को। तो आप हमारे छात्रों में अनेक रादृश्यों के बारे में पढ़ते हो।
1 पक्षी थी की थी जिसका पीछा
बाज कर थी, 1 समय 1 पक्षी थी जिसका पीछे 1 बाज कर रही थी और वो पक्षी बाज से डरकर तेजी से भाग रही थी
के है
तो पक्षी पहुँची महाराज सीवी के पास
बचाओ बचाओ मुझे वो बांझ खा रही है।
पक्षी ने कहा बचाओ बचाओ मुझे पक्षी खा रही है और बाज खा रही है। तुम थोड़ी देर बाद बाद पहुँचे, वहाँ
तुम्हारे यहाँ कोई पक्षी आया है भात
में कहा तुम्हारे यहाँ कोई पक्षी आया है, कहाँ है, कहाँ है, कहाँ है? नहीं दे सकता, पर मैं दे नहीं सकता। तुम्हें मुझे उसका मांस चाहिए, पर मुझे उसका मांस चाहिए। मुझे भूख लगी है, मुझे भूख लगी है। तो फिर न्होंने कहा नहीं मैं नहीं दे सकता
तुम मेरे शरीर से,
तो उन्होंने कहा कि तुम मेरे शरीर से उतना मांस लो जितना बास के शरीर का है सोरी उस पक्षी के शरीर
का
और बाद में कहा ओके
मांस के गया।
तो फिर उनके शरीर से मास कटते गया? और वो जो बाद पक्षी जो है उसका वजन बढ़ता गया
देता है की परीक्षा।
तो वो जो देवता थे वो महाराज शिबी की परीक्षा
अभी वॉचर पालन कर रहे हैं। कोई भी दयालु है रुसी को बुझाने के लिए है।
तो उन्होंने कहा जैसे महाराज सीपी आप इतने दयालु हैं आप 1 पक्षी को बचाने के लिए अपने शरीर के मास तक काट के दे रहे हैं। और अब पक्षी जो थे और बाज थे वो दोनों असली में देवता थे,
राज
महाराज छिवी की परीक्षा ले रहे थे
पता है?
तो इस इस समय में हमें माया से कई प्रकार की परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
सामना करने से डरना नहीं चाहिए, हमें
कठिनाई का सामना करने से डरना नहीं चाहिए।
यह भावना ही सेवा करेंगे। अगर सब कुछ मा सुविधा के अनुसार
तो ये भावना नहीं कि हमें सब सेवा करेंगे। जब तक हमारी सुविधा के अनुसार हो,
हमें सेवा करनी चाहिए।
कैसे हमें सेवा करनी चाहिए? जैसा आवश्यक हो।
तो
भगवान राम के नाम का, महिमा का प्रचार करो और ये हर 1, ये हर 1 कृष्ण मात्र का उच्चारण करने से आप सुख प्राप्त कर सकते हो। कलयुग में
आज भाई मंदिर है, दिल्ली, बॉम्बे में नहीं है।
क्या बला वाकुंसिलप्रोपा ने कहा कि आपके जो मंदिर है दिल्ली और बॉम्बे में नहीं है। यदि आप भगवान के नामों का उच्चारण करो तो आपके मंदिर वैकुंट म हैं, आप अपने घर में भी बायकोन बना सकते हो। और महामंत्र का जाप करो।
तो
अरे कृष्णा
1 और ऑनलाइन प्रोग्राम
में जाना है, मुझे अभी 1 और ऑनलाइन प्रोग्राम में जाना है।
कोई क्वेश्चन है तो कोई प्रश्न है,
किसी का, कोई क्वेश्चन है
रे
महाराज हमारे कॉल में कई स्टेटमेंट है पूरिटिdteforस प्रिंसि प्रीचिंग दी। एसेन्स के बारे में हम क्या समझ सकते हैं?
महाराज उसके बारे में थोड़ा, इस सेंस सेवा है।
सब तरह की सेवा महत्वपूर्ण है। प्रचार की सेवा सबसे महत्वपूर्ण है।
गया लोगों को क्या देते हो?
क्योंकि प्रचार में यह ज्ञान लोगों को ज्ञान देते हो।
कैसे वो कष्टों से, कष्टों से, कैसे
वो कष्टों से बच सकते हैं?
हम सब जो है, वो आगे संतान।
तो हम सब जो है, भगवान की संतान हैं और
खुश होते है। जीवों को ज्ञान लेकर जोड़ते हैं।
जब भगवान प्रसन्न होते हैं, जब हम जीव हर जीवन को ज्ञान देकर जोड़ते
हैं उनसे सेवा कठिन है?
ये सेवा कठिन है?
इसके लिए सबसे ज्यादा,
इसमें सबसे ज्यादा कृपा प्राप्त होती है।
अब कोलमैन में नौकरी करोगे, को ज्यादा
ऊँची धंधा तो आप कोलमैन कोयले के खान में काम नौकरी करोगे, आपको ज्यादा तनखा मिलेगी फैक्ट्री में, खान में, कम मिले, फैक्ट्री में काम करोगे तो कम
मिलेगा, कोलमैन में ज्यादा खतरा है, कोल्मान
में ज्यादा खतरा है सो जो कठिन
सेवा,
जो कि जो कठिन सेवा है, उसमे ज्यादा कृपा मिलती है।
thank you maहaराजforlnice lexton marg। क्वेstनमाराज देखा गया है कि कई बार ऐसा होता है कि जो कि प्रचार में लगे रहते हैं और नैचुरली प्रीचिंग में ग्लोरी बहुत मिलता है। and we get lot of respect from different people, some time in to see in that some devotes washing parts, r cleaning the flor, doing some menial services सो, sometimes they re s। आपको कोई पनिश मिला है, क्या आपको कोई पनिशन मिला है कि आप बर्तन साफ कर रहे हैं या mandir saf कर रहे है? so i just point of mars, what
a more smebdysingmanile service? people also tento make fnethmstdng some punishment for you your waching parts, centra
july, dibotyseettosare pricing and those re giving lecture, those are doing kirtonandtheyre being aner, they are being glorified, and they are being more respected and if some devotes rengas men सर्विस वॉशिंग पार्टस और कलीरि फॉर दन दे गोटफनिशआलिपीटइन हिंदी गुमा प्रथ्वी का
प्रश्न है कि अक्सर ये देखा जाता है कि जो प्रवचन देते हैं, कीर्तन करते हैं, उनको अच्छा ऊंचा पद मिलता है, उनका गुणगान किया जाता है, उनका सम्मान दिया जाता है। लेकिन जो कुछ सेवा में संलग्न है, जैसे बर्तन, मांजना, इत्यादि उ, उनको इस प्रकार से सोचा जाता है कि उनको किसी प्रकार का दंड दिया गया है।
सेवक है, सेवा है।
तो भगवान के जो सेवक हैं, वो बड़ी कुछ सेवा में भी प्रसन्न होते हैं।
साफ़ करना,
मंदिर, साफ़ करना, झाड़ू देना, शू, स्टॉल, संभालना को भक्त, ये सोचता है।
खूब सेवा करूँगा, मुझे आदर मिलेगा,
तो अगर भक्त। यदि सोचेगा कि मै सेवा करूँगा, जिससे मुझे आदर मिलेगा, तो यह गलत है। सेवा करने से हमें आवश्यकता के अनुसार सेवा करनी चाहिए, होना चाह। हमें बाब होना चाहिए कि हम भगवान के सेवक हैं,
कम हैं। इसलिए
तो अगर आप ये सोचो की निकम भक्त है। इसलिए इसको झाड़ू सेवा दी गई है। यह अपराध है, यह अपराध है,
हम को सेवा होना चाहिए।
तो हम सबको सब प्रकार की सेवा के। लिए तैयार होना चाहिए। तो विदेशों में, मंदिरों में भी ये नौकर जाकर नहीं है। नौकरी कोई नौकरी नहीं, नौकर नहीं होती सब वक्त सारी सेवाएं करते हैं ही
टॉयलट भी साफ करना पड़ता है, तो
वहाँ पर उधर टॉयलेट भी साफ करना
पड़ता है, झाड़ू भी देना पड़ता है,
मंदिर में झाड़ू भी लगाना पड़ता है, करना पड़ता है, घास भी काटना पड़ता है, आनी भी करनी, पड़ती, आरती भी करनी पड़ती है हर प्रकार की सेवा
इंडिया में भग बिगड़ जाता है।
तो जब इंडिया में भग बिगड़ जाते हैं
रेसिडेंट। everything in the temple, you clean toilet
to i used to do everything clean the temple was solve the dts wattyvessels cook for the long veins bta haldia marg bole to rs les
provrsnahergis guru m ग्रुम मेरा क्वेश्शन ये है कि जब हम स्पेचल मास्टर का वपू संग करते हैं, सो वाणी संग, वाणी सेवा करने में भी बहुत उत्साह आता है। और या फिर जो भी निर्धारित सेवाएं होती हैं, टेम्पल्स की तरफ से, अथॉरिटिज की तरफ से, उसको भी हम और डेडिकेशन के साथ कर पाते हैं। जब हम देखत हैं कि लाइव हमारे स्पीच्ल मास्टर हैं, उनकी प्रसन्नता के लिए मैं कार्य कर रहा हूं। बट जब सिचुएशन कुछ ऐसा हो कि डिसाइपल अपने गुरु का वपु संघ ज्यादा ना कर पा रहा हो, या फिर उसके स्पीच, उसके स्पीच्ल मास्टर, गो लोग जा चुके हों, क्योंकि हम देखते हैं कि आपका तो शीला पर उपाध्य के प्रति डेडिकेशन दिन पर दिन बढता ही सो कैसे डिसाइपल में, चाहे वपु संग उसको मिल रहा हो या ना मिल रहा हो, वो सेम डेडिकेशन अपनी सेवाओं के प्रति, साधना के प्रति कैसे दिन पर दिन बढ़ता जा।
गुनाजवा,
बापू और वाणी 2 प्रकार के माध्यम है, जिनके द्वारा गुरु की संगत प्राप्त होती है।
वाणी का उपदेश आदेश, वाणी का अर्थ
है उनका उपदेश आदेश और बापू का अर्थ है शारीरिक सेवा का सम्बन्ध। वाणी मोर पॉट बापू प्रोपर ने अनेक समय कहा कि वाणी इस मोर इमपोर्टंट न बापू, बापू अस्थायी है। वाणी स्थायी है। वाणी लाभ उठा तो हमें वाणी का ज्यादा लाभ उठाना चाहिए।
बापू का मौका है बापू की भी
सेवा करो तो बापू का मौका है तो बापू की भी सेवा करो। लेकिन बापू थोड़े समय के लिए हमें याद रखना चाहिए कि बापू थोड़े समय
के लिए
वर्णी विल बी। पर्मनेंट यह भगवान का नियम के समय भी करना पड़ता है, वर्णी जो है मृत्यु के समय भी करना पड़ता है, उसके बाद भी रहता है। is is your question? पहले शिवा नाम पर को पूछने दीजिए।
ans
thank you marge for the vrndfullecture, my question is in today s words? it is mentioned that the colyuuyisfulof problems how ever varnasrma is inटerd्use? देन सिचुएशन of styugaकैnबी created in clog
also
some time an argument is taking that varnashrmis not at the level of pेodevosinal service। however, there is a court of भactivinottakur with says that if there is a ting any of the mode of material nature inclu in mood of goodness than varnasramshould be, followed and very few dibotiswouldbether, who can say that the are above all the three mods and prop, theres also said i have heard in lectures that ropa said that i have done half of the work and other half i love for may desiplesvisiwich is establishment of varnasrmmyquestion is marg that in his con, wecsmsporadic efort in this regard in terms of nocoulprodection and organic farming and even establishing shatri class, because first in last brahmanas and shudras are there probates established brahmanas s con is क्रिatinglot ऑफ ब्रहमनाजबट second and third class is missing and डिवोटिज आलसो फोर्स to work outside and the question do you think that s more consent and cordinated fortis reकardinavrorganiजation in this regard प्रहरी पूछ रहे हैं
कि वरना संदर्भ की स्थापना के बारे में और समुचित कुछ प्रयत्न होने चाहिए हमारे आंदोलन में?
hi crisnatheansr
nasr प्रोप ने वरना श्रम के बारे में बता दे, लेकिन वो दबा वरनाजश्रम है, मात्र वरनाजs्रm देवियो। वर्षों का मतलब है आप, हो सकता है सूत्र हो वे शो। लेकिन आप लक्ष्य है कृष्ण की सेवा करना। सेवा तो यही है कि आप ब्राह्मण हो तो ब्राह्मण के गुण का इस्तेमाल करो। कृष्ण की सेवा में
प्रोटेक्शन। भगवान
तो शत्रु है। तो क्षत्री का धर्म है प्रोटेक्शन एडमिनिस्ट्रेशन, तो इन सबको भगवान की सेवा में लगाओ। तो अगर वैश्य हो तो व्यापार करो भगवान के लिए। तो जिस प्रकार से भाव होता है व्यक्ति का, उसके इ bse का varn
hota ha ram not so easy to
establish, so vernasham is not so easy to establish
having a firm on gosala,
wornashamjust having a farm are having a small gosala is not varnasi
do।
कम्युनिटी ऑफ डिवोटिज हमें भक्तों का समाज चाहिए मात्र 1 गौशाला या खेत रखने से वर्णाश्रम की स्थापना नहीं होता, तो इस कांड में हम देवी वर्णाश्रम का पालन करते हैं तो महाराज जी चाहते हैं हम विराम देने के लिए महाराज प्रोग्रम, कोई सूचना करनी है और कोई सूचना देने है। आज दोपहर को प्रवचन होगा हिज ग्रेस कमल, लोचन प्रभु के द्वारा, यरदयरबलिप्रसाद प्रभु तो आज दोपहर का प्रवचन होगा हज ग्रेस कमल, लोचन प्रभु के द्वारा। तो यह यही पर होगा प्रवचन और इसके अतिरिक्त आप सबको ध्यान रहे की आज शाम को ठीक साढ़े 4 बजे इस मंदिर के प्रांगण में श्री श्री सीता राम, लक्ष्मण, अनवान गे, उनकी भव्य शोभा यात्रा का आयोजन होगा। आप सबके लिए बहुत ही इम्पोर्टेंट ब्यूटी है चैटिंग दान सिंह, फेस्टिंग, रामनवी महामहोत्सव के जैसे की आप सब को पता है कल हमने 2000 से प्रारंभ किया था हमारे महा उत्सव का। इसी सिलसिले में आज शाम को साढ़े 4 बजे हरिनाम होगा और शाम को 7 बजे आपका 7 बजे ऑडिटोरियम में राम कथा होगी हिस ग्रेस वरजेंदंदनबूके द्वारा, तो कृपया उस में भी भाग ले हरे कृष्ण श्री गोपाल कृष्ण गोस्वामी गुरु महाराज की, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे श्रील गुरुदेव की। this to end singer
name हरी हरी
हरी हरी हरी हरी।
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