In this Hindi lecture, HH Gopal Krishna Goswami outlines the rigorous daily routine of Srila Bhaktivinoda Thakur, illustrating how the great saint combined intense spiritual devotion with prolific literary output and professional responsibilities. The speaker details Thakur’s precise schedule—from waking at 5 am, periods of prayer and japa, dedicated writing sessions that produced over a hundred scriptures, and translation work, to his court duties as a lawyer where he resolved dozens of cases within minutes. The talk also covers Thakur’s simple diet (milk, fruit, minimal grains), brief rest intervals, and his disciplined lifestyle that enabled him to serve God continuously. Goswami emphasizes that this model of disciplined living, devotion, and reformist zeal serves as an inspirational blueprint for contemporary devotees.
Chapters
और जिन ठाकुर पूरा समय अपना भगवान की सेवा में लगा रहे थे। जैसे हमने कहा, उन्होंने लगभग सौ ग्रंथों की रचना की और सुबह से रात तक जुड़े रहते थे भगवान की सेवा में। उदाहरण के लिए अगर आप, उनका शेड्यूल, सुनोगे, आप में ये प्रेरणा आनी चाहिए। हम भी इसी प्रकार के शेर के कुछ दे दी थी, जिसके प्रॉपर कह रहे थे। भरत को सुबह के 5 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक क्या करना चाहिए। सेवा भगवत भूल गये। भक्तिन ठाकुर का उदाहरण देखो। उन्होंने भी यह उदाहरण दिया। उदाहरण के लिए 8 से 10 रात को 2 घंटे से विश्राम करते थे, जाते देख कोर्ट चेहरे से आते थे 2 घंटा is्rामबsआठसे, फिर रात के 10 बजे से सुबह के 4 बजे तक ग्रंथों को लिखते थे प्रवाद, यही करते थे प्राबाजेअक्सर 9 साढ़े 9 विश्राम करते थे वे 12 बजे 1 बजे जाकर सुबह 56 बजे तक अनुमान करते थे। वे जाते तो भगीना ठाकुर 10 बजे से रात के 4 बजे तक, सुबह के 4 बजे लिखते थे, 4 से साढ़े 4 विश्राम करते थे। आप लोग को लिखना चाहिए, आप लोगो को प्रयास करना चाहिए। इस शेजुल की नकल करने के लिए। नहीं, ये सबसे अच्छा प्रेजेंट होगा। भक्ति न ठाकुर जी के लिए तो 4 से साढ़े 4 विश्राम कर देते है साढ़े 4 से 7 जापा करते थे। जाना 4 साढ़े 4 से 7 ढाई घंटे। वे 7 से साढ़े 7 लोगों को पत्र लिखते थे। क्यूंकि आजकल तो आप के पास डेट, फोन, कम्प्यूटर सब है। फोन में तो कोई सुविधा नहीं थी, हाथ से लिखना पड़ता था, सो साथ से साढ़े साथ कॉन्सोनंसाढ़े 7 से साढे 9 kud sas पढ़ते थे rogsारे rod pड़ेेsasbaबा ने कई दवा में ha i need my crime book, myself every day per सारे 9 से 10 स्नान करना कुशा दम खाना उनकी खुराक आप खुराक सुनना चाहते हैं, उनकी है, मंदिर का खर्चा काफी बढ़ जाएगा, इस खुराक को आपने अपना लिया। उनकी क्या थी, खुराक आधा लीटर। milk फल और केवल 2 छपा दे या चलेगा d v liter, milk फ्रूट एंड टू चपा दे। बस वे 10 बजे जाते थे कचहरी कचहरी में, 10 से 1 बजे तक रहते थे। और जैसे मैंने कहा, वो इतने तेज थे, इतने पवित्र थे कि 5 मिनट में कॉम्प्लीकेटेड से कॉम्प्लिकेटेड कोर्स वो पहचाने थे। 10 मैनेज गलती, सुझाव नीचे 5 मिनट में। तो इसलिए 1 दिन में 25 से 30 केस को समाप्त करते थे, डिस्पोज कर देते। अगर आप बोलो किसी वकील को इंडिया में 1 केस को समाप्त करने के लिए 20 साल तक करते है भक्तिन ठाकुर 5 मिनट में केस खत्म करे और फिर 1 से 2 घर आते थे परशाद खाने के लिए। फिर 2 से 5 वापस कचहरी में, 1 शेप में और 5 से 7 ट्रांसलेट करते थे। संस्कृत किताबों को बंगला भाषा में बस 5 से 7 और 60 से 8 shadman और शाम की kुraksुनogeaधha letr mind थोड़ा सा चावल to lg kodak हम इंटरव्यू कर सकते हैं। भक्ति नो डाट तो ये था। तो भक्ति नो ठाकुर ने ग्रंथों का निवास किया। उन्होंने यह स्थापित किया। चेतना महा प्रभू का असली सिद्धांत क्या है ये जो सहज पर जिसका प्रचार हो रहा था, ये बनावटी प्रचार है। उन्होंने ये एक्सपोज किया और उन्होंने अपने गलत के अनुमान में शुद्ध यथा रूप संदेश को किया o।