क्या है गुंडिचा मंदिर मार्जन की प्रथा? | Srila Gopal Krishna Goswami | CC M 12.135 | Delhi | 11July

In this devotional lecture Srila Gopal Krishna Goswami expounds on the Gundicha Temple ‘marjan’ (cleaning) tradition observed during the Ratha‑Yatra. He first outlines the historical origin of the ritual, the concrete steps (buckets, brooms, coordinated community effort) and recounts the exemplary service of Mahaprabhu, Nila Madhav and other devotees who physically cleaned the temple. The core teaching is that the external act of cleaning mirrors the inner purification of the heart: removing mental impurities such as anger, greed and ego. Goswami stresses the transformative power of chanting the divine names (Nama‑japa) and of maintaining a disciplined devotional routine. He highlights the necessity of satsang – keeping the company of sadhus and sincere devotees – as a catalyst for spiritual progress. Practical advice is given for modern practitioners: start with small‑scale efforts, involve the community, avoid shortcuts, and treat the cleaning as a sincere service rather than a perfunctory task. Throughout the talk, moral lessons of humility, self‑less service, and devotion are repeatedly drawn, urging listeners to apply the symbolism of temple cleaning to daily life. The transcript contains many transcription errors and occasional unrelated English fragments, but the essential message remains a call to combine physical service with inner spiritual cleansing.
Chapters
राधा a sa राधा दिवाकर रामने हमारा, हरे रामा रे रामा रामा रामा आले हर काले
हरे हरे राम राम
हा tata हर राम राम राम रा, हर के हई बाबा हई बा main all gloasionohgloation all go so she os
रे करिश्णा विशेष स्वागत है और उदास मन करे गे स को 2 प्रमुख सूचनाएं अपने अपने सभी मोबाइल ऑन करें या वाइब्रेट मोड पर रखें और बच्चों को भी साइन नोट पर रखे। ipo mask fema is most vision a
god i dont think people is going
being masहााजीकोै सपने मास् क ना
ही बेडे kitne be a te samy me to go the class in english
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class a ये विदेशों में भक्त सुन रहे हैं
कि अंेजमेदेगेतोपीछ
मो भगवते व देवा sui tea शो कर हम ग्लिश में बोले कितने भक्तों को प्रॉब्लम नहीं है। खड़ा करा
तो अभी के अंतर राष्ट्रीय स होंगे से उनके लाभ के लिए राजी ग्रेज अनुवाद की व्यवस्था है। कोई उधर को विचार या पीछे करे वो अनुवाद करेंगे। कृपया उस का दाम उठाए जो बहुत अंग्रेजी
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अरे किश्ना जो भी भाग भाग रहे है या वापस अनुवाद का बहाना नही तो भाग रहे है रुपया वापस खड़ा जाएके। जमात आगे बजताह के पता माता पुरता के बोली पता हे माता बुरदा आगे बताता सकशोजिलतागेबाने
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बताये पुलिस गोरा
बताया जा। ए
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है मतापुर आगे पतयताहेमतपुर ल। शो धीलतहाकेबढ़ी शब्द
स्तरीय द्वारा बाल की। इस प्रकार पूरा दारा मंदिर के द्वार के हां के सामने की और जगा सभी सड़कें सकना सभी सभी शो हिला इतनी साफ हो गई है, उसका केवल नीले कम बदला कर सकता है। पता कितना अनुवाद बताए मंदिर के द्वार के बाहर की सारी सड़कें भी साफ चीजे किन्तु कोई यह नहीं बता सकता था कि यह सब कैसे हुआ।
इस इसी स्लो के ऊपर भक्ती सिधान ठाकुर जी ने अपना तारप्रिय दिया था। इस श्लोक के ऊपर पड़ा पाजीवितसाथप्रेय दे रहे है।
शाम के गुंडीचा मंदिर की सफाई के विषय में टीका करते हुए भक्ति सिद्धांत सरसी ठाकुर कहते हैं कि सी चैतन्य महारत रूप में स्वयं यह शिक्षा दे रहे थे किस त मनुष्य को शुभ धन तथा श्याम हृदय में पूर्ण पुरुषों को भगवान कृष्ण का स्वागत करना चाहिए। यदि कोई चाहता है कि कृष्ण उसके हृदय में विराजमान हो तो सर्वप्रथम उसे अपने हृदय को निर्मल बनाना चाहिए। जैसा कि श्री चेतन महारोने शिक्षा तक मै संस्कृति की है। चेतो दर इस युग में प्रत्येक व्यक्ति का हृदय बलि, जैसा कि सीमा भागत में कहा गया है। 10 तो प्राणी हृदय के भीतर संचित सारी गंदगी को धो डालने के लिए हर 1 पसकीचदनमहाप्रमो ने यही उद्देश दिया है कि वह हर 1 प्रश्न मंत्र का जप करे। इसका पहला परिणाम यह होगा कि हृदय स्वच्छ हो जाएगा। तो इसी तरह श्रीमन भाग के प्रथम स्तन के दूसरे के सत्रहवे शोक में ही इस कथन की पुष्टि हुई है। शंमदनस्वकधाषणकु द्रहाणीविनौीस सदा परम भगवान श्रीकृष्ण 1 के ह्रदय में स्थित परमात्मा है। और सत्यनिष्ठ भक्तों के हृदयसीहैभगवान कृष्ण की शिक्षाएं, ध्यान, पूर्वक, सुने तथा कीर्तन किए जाने पर शुभ होते हैं। जो भक्त उनके संदेशों का आस्वादन करता है, उस भक्त के द ऐसी भगवान भौतिक भोग की इच्छा को दूर कर लेते हैं।
कि बस but a swim rupakdamyamzatisa बंद हम श्री गुण श्विरुपामसगजतम भाग ना रगुनतततmसजेवst क्रृष्ण करुना सिनो मीन बंदूdghptehope wntacapatatsa रेदिखायेखारहलशा है अरे रा रा रा रा है ा ये लोक आप क्षेत्र में प्राप्त करते हो और आज हम क्या बना रहे है। मार्जन शब्द का अर्थ है साफ करना और ना महा दुम्ना की पत्नी का नाम था माज दुमना को 1 ब्राहण कहा था भगवान प्रकट हुए है आपके राज्य में नील माधव के रूप में। और राजा की बड़ी इच्छा थी। नील माधव पर मुझे बड़ा प्रयास किया और अंत में वे नील माधब हुए थे। जगना तो जा था उनकी पत्नी ना तो gorica मंदिर जो है। कहा जाता है कि पुरी के मंदिर से कितनी दूर है। इस 1 ओर नीला प्रगट की थी जो अपर से हो। इस अध्याय में भक्ति सीदा इसी अध्याय के इस लोक पर उपदेश किया था। प्रभा जी ने भी इसी अध्याय के इस लोक पर वर्जन लिया था। इस दहाई में आप पढ़ते पहले मनाजपथपूजाके
विषय में
के राजा थे और मा प्रभु के प्रिय भक् मा परसपुर की बड़ी इच्छा थी। क्यों ने दर्शन प्राप्त महाप्रभु का बार महाप्रभु इनकार कर और फिर ये फिर उन्होंने उनके बेटे का दर्शन दिया और माँ प्रभू के वस्तु को लेकर उनकी उपासना की। तो माँ प्रभु से जानते हो कौन है भगवान to man prbi ने, ma प्रबु ने 1 दिन माँ प्रभु ने अपने भक्तों को बुलाया kashi mishra s r i manager ma ने कहा मेरी इच्छा है कि हम सब मिलकर इस मंदिर को सफाई करे और क्यूँ अगले दिन भगवान जगना ने वहाँ आना था और आप पर भगवान को घने साल में बिठा सकते हो, आप का कमरा गंदा हो तो आप किसी को बुला कर बिठा सकते हो। तो उसी प्रकार भक्तों का यह भाव रहता है। भगवान ने कल प्रवेश करना है? तो इससे पहले हमें इस बंदर को पूरे रूप से क्या करना चाहिए? la ma swiंprयासकिया सा ने माँ प्रभु ने काशी मिश्रा सब बचाया और उस मंदिर के मैनेजर को बुलाकर कहा हम चाहते हैं कि मंदिर की सफाई हो। तो काशी मिश्र ने कहा हमें राजा ने आदेश दे दिया है। आप मांगोगे jo alaska saf ke raja puri mar a था का देश का, वहाँ 1 और भक्त थे रामन रॉय वो थे दक्षिण भारत के राजा, उनकी रुची नहीं थी, उनकी रुचि थी कि ये नौकरी छोडकर वहाँ पर भुगा। उन्होंने राजा से कहा i me no cod ma at सेवा, krna raja ne e seva पूरी पेंशन मिलेगी। तो उन्होंने राम दरबार को पूरी पेंशन ली और कहा तुम छोड़कर माँ के साथ सेवा में, ये था उनका भाव। तो उन्होंने माँ पुल ने कह दिया था जो बंदर के मैनेजर थे, जो भी मांगे महाप्रभु यह सुविधा उन्हें देना। तो माह प्रभु ने कहा सौ से ज्यादा बाल्टी, वगैरह लाने के लिए और सौ से ज्यादा झाडू। तो भक्तों ने कहा आप की कोई आवश्यकता नहीं है, यह सेवा करेंगे, हम करेंगे और मा नहीं। मैं खुद अपने उद्धरण से दिखाना चाहता हूँ, कैसे भगवान के मंदिर को साफ करना चाहे। तो भक्तों ने कहा हम तो चाहते नहीं है कि आप सेवा में जुड़े। अगर आप अपनी दिव्य लीला को प्रकट करना चाहते हो तो हम जो आपकी इच्छा है वो इच्छा पूर्ण हुई ह। तो आप लोगों के खाने पर तुरंत ही थोड़े समय में सारी सुविधा पहुँच गई, बाल्टी लोटे झाडू और आप लोगों ने सबको आदेश दिया a tom s safai tum ne le go a jarubaltilota ने sाईorsaiेtenim कोई कुछ बोल नही का केवल वाणी द्वारा महामंत्र, तो इससे हमें भी सबक सीखना चाहिए। तो अब सेवा में जुड़े क्या? और सारे भक्त इतने उत्साह से सेवा कर रहे थे कि कोई कुछ नही कहता था, कुछ संदेश लेना, साइन व्यक्ति बात कर in। तो इशारा करके अब जल्द चाहिए। तो इस प्रकार सारे भक्त जुडे sfaimermhaprbu जुड़े सफाई कर े one pot पूरे man साफ a r वhाprुजातेेखुद हर भरे साई था देखने के लिए, कैसे सफाई कर रा है, ठीक सफाई नहीं, सफाई नहीं कर। और जो भक्त सेवा में ज्यादा तेज थे, क्योंकि अच्छी सफाई कर रहे थे, वहाँ पर क्या कहते थे सिखाओ इसे योगी कम में मरे दिखाओ। ज्यादा अच्छा कैसे कर रहे हमारे भाग जो ले जाते हैं, जिनका अच्छा अभ्यास है, उनको कहा जाता है इन्हें शिक्षा। 2 जो रहे हैं से। तो ये है पुराना नियम को नया नियम महाप्रभू ने खुद इस नियम का महा खुद। हर बात के पास जा रहे थे और देखते थे कितना कितनी गन्दी करता ही है कितना और कहते है। तो हमें इतना क्यों बोलते हो जैसे करते हैं सेवा करने। 2 और यहाँ वहाँ पर धारण में हो की महाप्रभु खुद जा रहे थे हर व्यक्ति के पास ये देखने के लिए कितना गंद और अगर वो देखते थे, किसी का परफॉर्मेंस नहीं है महा प्र ज्यादा ज्यादा मेहनत कर और इस प्रकार आप उन्हें पूरे मंदिर की सफाई फर्ज। फिर शिंकसनयहाकी भगवान राजा। उसको प्रभु ने खुद जैसे हमने कहा जब कार्य हो रहा था उस समय सारे भखकेवlवाणीद्वारा क्या कर रहे थे, हम रुक गए, 10 मिनट बात करने के लिए गई थोड़ा आराम करना। तो सुबह से शाम तक सारे भक्त मेहनत कर रहे थे, सुबह से शाम और महा प्रभु हर भाग के पर जा रहे थे, देखने की कितना गदूसेकटाकियाऔर क्या उन्होने अनुभव किया महा प्रभु अकेले उन्होंने सबसे ज्यादा गंद इकट्ठा किया था, सारे भक्तों का गंद उन्होंने इकट्ठा किया था, सब को जोड़ दिया। और सब के से ज्यादा किस का था अकेले गे कचड़ा का किया था कि सारे मिलकर और फर्श सीलिंग को साफ किया, दीवारों को साफ किया। फ्लोर फर्श को ही महा प्रभु ने क्या किया रगड़कर और महा प्रभु की इच्छा थी की पूरी अच्छी तरह सफाई हो। हाँ प्रभु ने अपने वस्त्र को पार कर उसको इस्तेमाल किया। केस में हर्ष को सीने में निकाल हुए। तो इस प्रकार माप ने क्या क्या पूरे मंदिर को साफ किया और मापने देखा कि सारे भक्तों जितना उनसे ज्यादा वहाँ पर उन्हें अकेला किया। तो जब उन्होंने सारा कचरा बाहर फेंका मंदिर के तो जाके क्या हुआ? big man sat mar पुरे मन की सफाई की पर वो से संतोष नहीं थे, वो चाहते थे कि किसी प्रकार से थोड़ा भी गंध का 1 निशाना भी ले रहे है। ये होना चाहिए हमारा सेना जवाब, भगवान की सेवा में हमारा स्टेट होना चाहिए। क्या नोट स्पेक स्पॉट भक्तों 1 बार फिर से करो तो सारे भक्तों को sfi फिर से करनी पड़ी और महाप्रभु को जाकर देख रहे थे कैसे सफाई हो इससे? आप क्या देख सकते हो? अब ये सकते हो महाप्रभु वॉल स्ट्रिक एडमिनिस्ट्रेट महाप्रभु i ma manage a spy pr sad थोड़ा गन रह गया
बारा
पूरे मंदिर को साउ दोबारा सारे भक्तों को सेवक और जब बाहर फेंक रहे थे ये ये पानी। महाफबूनेये देखा कि किधर भी ब्लॉक नहीं हो जाता। और महा फ क्या क्या स्टैन साल का 1 बंगाली ब्राह्मण साह आया था बंगाल से, उसने क्या किया उसने भगवान के सामने, वहाँ प्रभु के चरण धोए पानी पी लिया। चरधोचतहा तो अब क्या हो गया मुझे इसकी सजा भुगतनी पड़ेगी क्यूंकि भगवान के बिगड़ा के सामने आप किसी और की उपासना नहीं कर सकते? हाँ कोई के जब उन्होंने देखा, बंगाली ब्राह्मण मेरे पाँव को धो कर वो पानी पी लिया है उसने। बड़े दुखी हुए मेरा क्या भविष्य है? अब मुझे सुझाव भुगतनी पड़ेगी क्यूंकि मेरे चरण धोये हैं, भगवान के डाटा जाओ तो इसे आप क्या सीखते हो? जब ये सीखते हो कि महा प्रभु स्वयं भगवान है। पर जब भी सब नियमों का पालन कर भी नियमकानियमकेअनुसार चल, यह भगवान है, तो कोई भी नियम हो। तो हमारे चारों ने इस लीला के ऊपर बहुत ही बहुत ही गहरी व्याख्या की है। हमारे चायों का कहना है ये जो, ये जो सेवा की थी, इस को साफ करने, मंदिर को साफ करने के लिए, और हर रूप से सफाई मा उदाहरण देते थे। जब आप भगवान की सेवा करते हो, भगवान का जो मंदिर है, उसकी क्या स्थिति होनी चाहिए? prahupanजबकिसी था, मंदिर में जाते थे, सबसे पहले देखे थे what is the cleninastandt? सफाई का क्या सैन है? इंग्लिश में कहते हैं टू, ये नियम भक्तों को सच मुच पालन करना चाहिए, हमारे मंच में पूरी सफाई होनी चाहिए, हमारे रहने के स्थान में पूरी सफाई होनी चाहिए। लेने की महंगे महाबल का मंदिर बनाए तो गंद होगी कोई देखेगा। आप ने हमें उदाहरण दिया किस प्रकार हमें मंदिर को इतना स्वाच रखना चाहिए, इतना साफ रखना चाहिए। क्या चेहरे को प्रभु ने इतना लगड़ा सफाई करते समय और सारे सारे भक्तों ने बोल, रगड़ा खो जाकर देख रहे थे सब रगड़े और सब ठीक सेवा कर लेंगे। तो हमें इस लीला को हिंद में बिठाना चाहिए की जिस भाव से भा प्रभुन है, भक्तों से सेवा ली, उसी प्रकार का भाव हमारा होना चाहिए। किस लिए भगवान की सेवा? भगवान की सेवा का यह अर्थ नहीं है। या नापरभाईशकरोऔर भक्त की क्या जिला का गहरा अर्थ किया है। जिस प्रकार महाप्रभु ने भक्तों को के साथ मंदिर को साफ किया, उसी प्रकार हमें हमारे हृदय को साफ करना है, हृदय को साफ करने की आवश्यकता है या नहीं? maha e s, o e a, e a, e a, इस लीला को बड़ा महत्व दिया। और भगवान का जो मंदिर है, बिल्कुल साफ होना चाहिए। जैसे कि याता दिन पहले ये मार का उत्सव मना है। तो हमें हमारे मन में ये भाव होना चाहिए कि भगवान का जो मंदिर है, उसे क्या करना चाहिए। बिल्कुल साफ लग रही है,
भगवान का
मंदिर है, बिलकुल साफ़ रखना चाहिए। तो हमारे चाय ने कहा है, ये सन्देश हमें सीखना चाहिए। और वो भगवान के भक्त हैं, वो सदा, ये चाहते हैं, वो सदा सेवा खुद भी करना चाहते है। preach example, यह सबसे अच्छा जाएगा, हम अपने उदाहरण से शिक्षा दें, उसका ज्यादा प्रभाव पड़ता है। आप कुर्सी पर बैठे रहो हे तुम ये काम करो, तुम काम करो। तो इससे अच्छा असर पड़ता है। हो जाते हो, झालू दे रहे हो और रगड़ रहे हो, पानी ला रहे हो, तो फिर उसका ज्यादा प्रभाव महा। प्रभु के उदाहरण में देख। वहाँ प्रभु ने स्वयं प्रैश्यमखरके माँ, प्रभु चा क्या थी कि भगवान को हम उसी साल में लाएंगे, जिस साल में किसी प्रकार का यहाँ 1 बूंद गंद भी नहीं ह। 1 bol है। मंदर में 1 भूल के हार जो हृदय है, यह गन्दा है, उसमें अनेक प्रकार के बहुत विचार है। काम, क्रोध, लोभ, कहते है। और इन अनाथ के प्रभाव से हम भगवान कृष्ण नगर नहीं हो। तो भक्ति से दादाजी ने कहा है ये जो नीला है, जिसमें हम देखते हैं कि भक्त मंदिर को सा करे, उसका असली अर्थ है वो में हिले को साफ करे। व हृदय जो है, बहुत ही गंदा है। और हृदय को साफ करने के लिए क्या है। उपाय क्या है? उपाय, स्वागत, कृष्णा। तो हमारे शास्त्र में कहा गया है, भगवान के नामों में इतनी शक्ति है। या कोई व्यक्ति भी ध्यान से या ध्यान से भगवान के नामों का उच्चारण करेगा तो क्या परिणाम होगा? ये देखिये, जो मन है, वो दूर हो जाएंगे। इस कलयुग में, ये है उपाय कल। इस कलयुग में दोषी दोष है, अनेक प्रकार के भौतिक पर क्या है। 1 गुण, क्या है वो 1 गुण। ये जो है, नाम है। ये सबसे महत्वपूर्ण py this is the relvestination nmr 2 vesinेneinaशन पर्सीवेस्टिनेशन है। असी, वेक्सिनेशन हैं भगवान का नाम। और जब तक हम भगवान के नामों में रुचि नहीं बढ़ाएंगे। ये जो गंध है, महल है, पौली आकर्शन है। और हम प्रति। तो इसलिए कहा गया है भगवान के जो नाम है, चिंतामणी पर चिंता, नी, प्रेस का क्या गुण है? जालिचोगेवोसान क्या बन जाता है, सोना बन जाता है। क्या बिचोगयााभगवान चिंता कितना सा का भगवान के नाम है। हालुखपुरेहतोये कल युग में क्या है, उपाय है भगवान ने जैसे आप शिषासोमेंपढते हो, अपने नाम में पूरी शक्ति डाली। महा मंत्री के लावा और किसी मंत्र की आवश्यकता है। यह भूल है, महामंत्री आवश्यकता है। कहते हैं भगवान के नाम है। और ये जाना महसूस नहीं कर पाते। क्यूँ? क्योंकि अविद्या की बीमारी है, अविद्या की बीमारी। हम समझते नहीं हैं। महामनतरकीमहिमा हम समझते नहीं हैं कि क क्या है। असली उपाय और वेद प्रभाव में आकर हम बौद्धिक कार्य में जुड़े रहते हैं। तो इस लीला में बार बार ये साबित किया जा रहा है कि जिस प्रकार चेतने, महा, भूने, सफाई की गन्दे, स्थान के, उसी प्रकार की गंभीरता के साथ हमें क्या करना चाहिए? साफ करने और हम प्रयास करेंगे। तो फिर जैसे इंग्लिश में कहते हैं, गॉड हबजधोड। भगवान किरका से योग देते हैं? कि क्या से योग देते हैं, भगवान देखते हैं। ये तो हा, इतनी गंभीरता से प्रयास कर रहा है। ध्यानिक परिवर्तन करने के लिए। भगवान में से योग देते हैं। और अगर वो देखे नहीं करे। हम पोजिकआकशनकरदेगे। और ये मई म महिनाम की, ज्ञान नाम की, महिमा के भविष्य में ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? कैसे कैसे प्राप्त होता है? भक्तों की, भक्तों की संगत आवश्यक है। अगर हम इस हर नाम के विषय में ज्ञान बढ़ाना चाहते हैं। और इसलिए भक्तों की इच्छा क्या रहती है की हम सदा भक्तों के संग में रहे। कैसे? जानते हो? उन्होंने 5 महत्वपूर्ण विषयों पर बल दिया था। क्या था सबसे पहले तो आपको उत्तम भक्तों की संगत मिले, उसका राज। भगवान ने कहा, मेरे कारण द्वा, तुम्हे इतनी कठिनाई करना पड़ा। भागो में से क्या क्या कहा? अगर आप मुझे वर देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिये कि मैं हमेशा उत्तम भक्त की क्यूँकि। अगर मैं उनकी संगत में रहूँगा तो सदा क्या सुनूंगा नाम की, महिमा, नाम की महिमा और सास। तो इसलिए हम आपको चाहिए कि हम भक्तों की संगत में रहे। लोगों ने कहा sang का हु में आकर भक्तों की संघ में रहे, शासन संदेश का पालन करे होगा। तो हमारे शो में हर प्रश्न है, हर समस्या का हल है। और हमारा प्रयास ना चाहिए। तो सबसे पहले क्या है? साधु संग के आगे भाग के पास ना। तो साधु संग सबसे आवश्यक है। और क्यों साधु? तो आप सुनते जाओगे a to my name has shuru पर किस पर आज ही मेरा जन्म हुआ था ब्रामण खाना में, और हालांकि बचपन से माता पिता ने शिक्षा दी थी आध्यात्मिक शिक्षा आज ही में बुरी संगत में पड़ गया। इस कारण भूल गया अपने ज्ञान को और कल का जी ने अपने सबसे छोटे बेटे का क्या नाम दिया था। और जब मृतक समय आया, जब राज ने देखा या जूतों को, तो घबराकर कहने लगे नराह और भगवान का नाम लेते ही क्या हुआ? भगवान के प्रतिनिधि विशु पहुंचे तो भगवान के नामों की महिमा आप शास में अनेक साल में पढ़ते हो। और ये अनुभव भी होता है। जो हाइ नाम शरण लेते हैं, वो भाई के सहयोग से हैजे के मैल को दूर। ते। तो अगर हम हेजेकमेलाको दूर करना चाहे। हमारे पास। यहाँ महाप्रभो का अच्छा उधारण। महाप्रब कितने परिश्रम के साथ पूरे मंदिर को साफ किया। और मैल जो है, उसी प्रकार हमें भी स्वीकार करना चाहिए। हमारा हिरदय क्या है, मेल से भरा हुआ हमें भी बड़ी गंभीरता से साफ़ करता है, गंभीरता से जॉब करना है। गंभीरता से, अपराधों से भ बना और फिर आप नाम का लाभ उठा होगा। हमारे आचार्यों ने कहा है, ये जो कथा है, जो कथा है। माल की इस कथा का असली उद्देश्य यह है कि हमें उसी गंभीरता के साथ हम विजय को साफ करें। इस गंभीरता के साथ क्या किया, चेतन मा मंदिर को साफ किया, वह हमारा भाव होना चाहे। मंदिर भगवान का हमेशा साफ रहे और न ट। आप देखते हैं भारत में मंदों में जितनी सफाई होनी चाहिए होती। कई बार भक्त लोग मिलते हैं। कहते हैं इस कॉल मंद में सफाई अच्छी है, पर हमें प्रयास करना चाहिए। हम और भी आगे सुधार और हमारा ये भावना च कि आप 1 बना निशाना कहानी देखो। मंडल में 1 भी निशान गंध को देखते थे, बहुत गुस्सा होते थे। तो गणित और हमें भी जागना जी की स्वागत करने चाहे। अफसोस की बात है कि हम जगना बड़े स्केल में कर नहीं सकते। और भक्तों को कह रहा था। अमेरिका में ये साल, इस को रथयात्रा, लगभग हर बड़े शहर में हुए। 23 हफ्ते पहले निक में बहुत बड़ी रथयात्रा हुई थी, बहुत बड़ी और बिल्कुल। मेन रोड लगभग हर अखबार को देना कि होती है। मैं भारत में कह रहा था, इंडिया में हमें रचाता करने की नीती मुसीबत है और विदेशों में सरकार कहती है, करोड़ दिया था। तो
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small scale सो देखो प्रयास करो। अगले साल तक शायद सिचुएशन hi hai krishna so in a question question a hi krsna बहुत बहुत धन्यवाद, बहुत ही अच्छा धन्यवाद। आपने कहा की बिना मार्जिन है, हमें मन की भी सफाई करती है। मन की सफाई, हेदगीहिजयकीमनकी की सफाई। जैसे ज्यादा किसके पास ज्यादा है, कैसे पता लगेगा की क अपने हृदय की सफाई ज्यादा कर रहा है। हमें यह सोचना चाहिए। हम सबके हिले, हम सबको प्रयास करने की आवश्यकता है। हमें यह ही सोचना चाहिए। हम तो ठीक है, उसके हिज्जे में ज्यादा ह सोचना चाहिए। हम सबसे पतित हैं, हम सबके हृदय में मैल है। और ये गुडीचा मालयम की कथा हम सब के हैं, हमारे अचायोंनेस्पषलिखा है। ये जो गुंडीचा मांजरम की कथा है इसके द्वारा। ऐसी संदेश यह है कि जैसे महाप्रभु ने अपने भक्तों को लेकर वे बहुत मेहनत की, मैल निकालने के लिए, उसी प्रकार हमें भी मेहनत करनी पड़ेगी। हिंदी की मेल को निकालने के लिए, मेहनत किए बिना कुछ नहीं होगा। गॉड सो अगर आप सोचोगे ठीक है, हर नाम ले लेंगे, जब चाहे गंभीरता से नहीं करें तो ये मै नहीं निकलेगी। मेरा को निकालने के लिए बहुत रगना पड़ेगा। माल culrgretehaowas giving example how hard were sod press removed, yeah, yes yes, जैसे आपने फर्स्ट टाइम बात साफ़ किया था, तो हमे कैसे कैसे डेवलप होना चाहिए, हमें कैसे पीटा कि हमारा भी कैसे डेवलप हो, पाए सा mod ho sare gol dvelop हो सकते है maधmsecentingrein soci, शोर्ट कस no no follow a short cut
a
okay
हालांकि आजामी ने शरीर
छोड़कर नारायण का नाम दिया तो उनका
भाव तो भगवान के था बच्चे कैसे
भगवान के नाम में इतनी शक्ति है कि बेशक उनके मन में यह भाव था नरायन मेरा बेटा रक्षा करेगा भगवान अपने नामों से नामों के द्वार की सुरक्षा हो कई जामे खानदान मे बच्चों को वो भगवान के नाम दे मुसलमान में भी रिवाज है यही 2, ये सब कुरान के नाम है शिन जॉन पीटर बाइबल के नाम है वैसे इन के नाम है तो वैसे ये रिवाज है या अपने बच्चों को भगवान के नाम 2 to kisi kisi se
kare
to a a a a a a a a ans a a a a sunni ram को ते ह ेंगे
आज
हम सब करेंगे इस है के बीच
मजे
से कैसे बचा है क्या करेंगे?
may be different sis while the cleaning today the cleaning can awaiteisnoprad doing the service together? cleaning
सफाई कर रहे हो और दूसरे को सफाई करने से रोक रहे हो पर आप हो और दूसरे भी प्रयास कर रहे है मेरको अपराध है मापलगुनेदेखा ये व्यक्ति ज्यादा गंदी करता कर रहा है को शिक्षा देने को शिक्षा 2 कैसे शिक्षा दे वो अपराध हो है ये तो भौतिक समाज में भी हम पर कोई पढ़ाई कर रहे हो मदद कर स्कूल में कॉलेज य
हमारा ने बताया की में भक्तों के सब कर रहे हैं और बहुत पानी लोगो से
दूर रहे है हैं तो स्पेशली जैसे
अगर पीचिंग है से बनते है तो वो लोग बहुत स बहुत सारी से होती है संत के बारे में ऐसा हुआ कैसे हुआ तो
के पैक ऑफ़ पीपल आप बार पर 4 ले गये हो आपको खोलना पडता है आपको स से बेहतर होगा। अगर समाज में चारो तरफ सब भक्त हो तो भक्त भक्तों के साथ भक्तों को पर असलियत नहीं। असलियत यह है कि माया का प्रभाव जाएगा आप 4 में जाते हो। आप देखते हो इसे बचाना है नाम को शा को माया से बचा सके साली सालिसघमेंरहोगे के शख में रहोगे नम के का पालन करोगे तो ऐसे बात से बच इंशोरेंस अगेंस्ट माया on a by ok यह जल्दी जल्दी
आजाद रासि बेटे को नारायन लिया तो उसे बैंक को प्राप्त हुआ। तो जैसे मन प्रश्न होता है कि फिर हम हरी जो की चीजे करके कहता है कि लास्ट टाइम मन में सवाल तो उसको साफ करने के लिए क्या
असम में अगर हम सोचेंगे आज मिल की सुरक्षा होगी, क्यूंकि का नाम लिया हम भी घूमेंगी कल काम करेंगे मृत के सामने हमे नारायण का नाम विश्वनाथ चक्रवती ठाकुर कहते हैं। ये फिर वासना अपराध है कि हम जान बुझकर अपराध करे के बल पर अपराध कर रहे हैं। इस अपराध से सभा में 10 नाम अपराध का उचारण करते और साथ का नाम पर क्या है अरे इसका गुरुवार
की पा further vidivllecture cortinas one question se iariotyandonly one person is in family, doting other people are not, but they bebangitisithat moti so that also comes on not
to der dbody and rest of s main one one person in the family is a body there on nothing you is going on in sin, moral get on wari
the reaction
on, where doll behad this not like reaction is for war, tansen reaction not penson a is fortifiscoming so like to be curse of s m रिक्वेस्ट है आप से नहीं दीजिएगा और आपके पास तो दूसरों को दीजियेगा श्रीमत भावदनसेहमलोगअधिक से निकालने का प्रयास करे और और जिन ने अभी तक ले नहीं किया लीडर से कस करें कि इस राम सुबह साइट निकाल सकते है ्रापालीलमिताको याद बढ़ाना चाह को ये भी मालूम है ये कोइ रिलीज हो रहा है जिनके पास नहीं है पा सकते हैं अवेलबल है
बता दे
की और हम लोगों के साथ पब्लिक लि नहीं बना पाए लेकिन जहाँ तक हमसे हो रहा है हम सेलिब्रेट करने का प्रयास कर रहे हैं और सबसे आसान तरीका प्रॉालपलीसकररेगा सुलू और प्रोफाइल में प्रयास करिए इन बुक्स को शूट करने के वार्ड सरकार ने 1 कोइन निकाला है बार के में से हमने आपको पहले भी दी थी मा है मेरे खयाल से कोइं की कीमत है 4000 के करीब आप कोइ अपने घर में रख सकते हो मित्रों को दे सकते हो प्रेजेंट के रूप में दे सकते हो में से कितने भगत है वो चाहते हैं कोइं आपको भी दिया जाए तो इसका कोई टेक्निकल प्रॉब्लम है ये क्या कि अभी भी लॉक डाउन चल रहा है कोन सा सरकार की जो में है क्या वह है लॉक डाउन के कारण वहां कोन अभी तक बहार नहीं निकला पर प्रयास किया जा रा है जल्द okay
रे मिश्रा बहुत बहुत धन्यवाद। आप सब आज संग डे फिल्म में बता रहे है बताते हैं कि फिल्म संडे नि संग पे है तो संघ लीजिये पूरी से संघ लीजिए और परन्तु बाल विष्णु समाज का हार्दिक आभारी है में मैं इस गुंडिचा मंदिर मार्जन की कथा लीला से जो शिक्षा है उनके बारे में समझाया और आज हम जितने भी भक्त है करने पर कर रहे हैं उन सब के लिए मार्जन का 1 अवसर है और मंदिर का हमारे मंदिर के जो निवासी भक्त है उनके लिए सेवाएं निर्धारित की गई है इस रिसादुरेप्रभु की ओर से मैनेजमेंट के कार्ड में ये सेवाएं हैं को जल्द जल्द से जल्द अंकुर सेवन करे ऑल्टरनेट सेवाएं हैं राधा सेवक लगु के नेतृत्व में जितने भी पुजारी गणना तो रहेगी साथ साथ विकसित ब्रामण की कर्मचारी बात उनका नाम है कृष्ण गोपाल प्रभु, सुन्दर, माधव प्रभु, जानवा, अदूर प्रभु, धर्म नारायण प्रभु, सज्जन प्रभु, मोहन श्याम प्रभु, कला, द्वरा प्रभु, राजेंद्र, हरी प्रभु, विजय उपेंपरप्रभुउमापति प्रभु, विश्णमोतिसेवकप्रभु सारे, कृष्ण प्रभु और कलाधनाप्रभुतो जारी है दया सुन्दर नेता प्रभु और बंध बनाए प्रभु जितने लिए ब्रहमदिक्षभक्त या आज समय निकाले भगवान का समय भगाओ की सेवा में और बाकि अगला सेल अगली सेवा है टेबल वाम की टेपलर जितनी भी सेवाएं होंगी उसका नेतृत्व देंगे। मोहन पर प्रभु। मंदिर अध्यक्ष इसके अतरिक्त ये भक्तगण होंगे, उसमें उपस्थित होना है। अत्तारी प्रभु, दयालु, गौर, हरि प्रभु, अमृत, मूर्ति प्रभु, पांचिजननाथश्रभु, कनाय, बलदेव प्रभु, नारद, ने प्रभु, भत्ता प्रभु, साची, सुखा, का प्रभु, सतिव्रतरामप्रभु, स्वीरामसखाप्रभु, सी, मांधीकिप्रभु, ता प्र, पंकज, लोचन प्रभु, भक्ति, नाथ, लव प्रभु, अनलुतकिततनप्रभु, बल प्रभु और नामाटाकेइतनेभी भक्त हैं। उनके 7 सेवा रखे और टी वी डी भक्तगण है। उसमें से 10 भक्त और शामिल होंगे और डी डी कीचन सुसनेप्रभुधि के नेतृत्व में है। ना करे माताजी और ऑल माताजी की सफाई करेगी। ब्रह्मचारी आश्रम की जो सेवा क्षेत्र के इचाजओपीबाप्रभूऔर रामानी का प्रभु और उनके साथ सेवा करेंगे सारे की बीबी, बाकी जितने ब्रह्माचार्य कर सकते हैं, अवश्य करें और ब्लॉक और प्र न में जो सेवाएं हैं उसके चाजड्रेससर्वपरि प्रभु जिसमें सराय बेस से जीतने भी डिवोटिज है, कॉम्यूनिकेशन लिबटीज शामिल होंगे और प्लाजा एरिया में। इस ड्रेस में प्रभु के नेतृत्व में ईस्ट ऑफ कैलाश के कॉम्यूनिकेशन भारतगण शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त जितने भी हमारे डिपार्टमेंट हेड है वो सब अपने।
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