श्रील भक्ति सिद्धान्त सरस्वती ठाकुर तिरोभाव दिवस विशेष | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami explains Bhakti Siddhanta Saraswati Thakur's mission to awaken pure devotees and spread Krishna bhakti. The saint established three print presses and published texts in Hindi, English, Odia, and Bengali. His disciples built Krishna consciousness centers across India and the West.
Chapters
तो आज हम वनों के लिए 1 बहुत ही शुद्ध हिम है। आज 1 महान संत भक्त, सिधंदरशा्री ठाकुर का तिरोभाव देव, अवर भाव और तिरोभाव। अविरभाव का अर्थ है जब की 1 महान संत अपने आप को प्रकट करता है। इस पृथ्वी पर थिरभाव का अर्थ हैं जबकि वह प्रकट हो जाता है। तो भगवान के शुद्ध भक्त हैं, खास कर के भक्ति ठाकुर। ये सब तो पृथ्वी पर आये हैं। किस लिए? महाप्रभु की भविष्य वाणी की स्थापना करने के लिए। चेता महाप्रभु जी ने भविष्य वाणी दी थी। क्या प्रचार के पीछे के हर कोने में क्या होगा, मेरे नाम का प्रचार होगा। तो भर्ती सासरी ठाकुर। उनका लक्ष्य था प्रचार करना। वो कहते थे देश में है, उसे प्रचार करना चाहिए। ए वन नोट पी द डेड मैन। उन्होंने कहा की जो प्रचार नहीं करता वो हमारे व्यक्ति के समान है। प्राण हैं तो क्या करना चाहिए? हाँ, प्रचार करना चाहिए। क्यूंकि? वैष्णो के विषय में कहा गया दुख दुखी, दूसरे को, दुःख को देखकर, वो भी दुखी हो जाते हैं। भक्ति से पहले कोई 4 या मोटर भी नहीं बैठे थे। मोटर में बैठना पाप है। पहले जी ने युक्त वेदाज्ञा के सिद्धांत का उपयोग किया। सिद्धांत हमें दिया है, जिसका अर्थ है हर चीज का उपयोग हो सकता है। इसलिए अगर बाकी सिराजी मोटर में नहीं बैठते, वो पापा जी हवाई जाज और में नहीं बैठते। तो कहा ये आंदोलन फैलता सारे में सनादी मोटर में बैठे। पहले चाहिए थे, पापा जी, पहले चाहिए थे, जो की पानी के हवाई में। तो भी जी ने मंडल की स्थापना की। उन्होंने 1 पर बल दिया कि ग्रंथ प्रकाशन होना चाहिए। जैसे मैंने कहा। उन्होंने 3 प्रिंट प्रेस खोले थे। उन्होंने 1 पत्रिका शुरू की जिसके वो एडिटर थे। उन्होंने भागवत और भागवत के अंग्रेजी उड़िया बंगला भाषा में। और वो अपने शिश्न को भेजते थे ग्रंथों के वितरण के लिए। उनके लौटते थे थोड़े ग्रंथ, 2 पैसा। उन दिनों में जो अच्छा डिस्ट्रब्यूटर था, 2 पैसा इकट्ठा करता था दिल में महाराज, हम तो 2 तो अच्छा है, नहीं नहीं कोई 23 अखबार भी बाट कर लौटता था सिरांदजीउनकीबड़ी प्रशंसा करते थे जो 1932 में जब श्राद कर रहे थे में थे, तो पापा जी उन्हें मिले। पापाजी ने उनसे पूछा क्या आपका क्या आदेश है मेरे लिए? तो भक्ति सिरांदजीने 1 पेंसिल और कागज से 1 दंगा की तस्वीर खींची और कहा क्या क्या भगवान में धन दे तो क्या करना? ग्रंथों को प्रकाश है और ग्रंथों का वितरण। और फिर भक्ति ने समझाया ये जो का प्रकाशन और वितरण का कार्य है, वो क्या है दंगा इस दंगा की आवाज़ दूर दूर तक जाएगी। तो इसी आदेश को गंभीरता के साथ स्वीकार किया। तो भक्ति से राम जी के विषय में कहने के लिए तो बहुत कुछ है। उन्होंने लगभग 100 8 ग्रंथों को लिखा है। और उन्होंने महाप्रभु जी के सन्देश की स्थापना की भारत के कोने कोने में। और उनके आदेश के अनुसार। प्रापा जी गए पश्चिम देशों में और प्रापाजीनेविश् के हर कोने में। क्या किया। कृष्ण भक्ति की स्थापना की। इसके अलावा भारती सुनंदाजी ने कई स्थानों में है महाप्रभु जी के फुटप्रिंट की स्थापना की। नर्सिंग सिंदा को सिमा गुरु, बोला सिंह गुरु और जो मायावादी थे उनसे इतना डरते थे की अगर वो सड़क के बाएं तरफ चल रहे हैं तो मायावती बायें तरफ हो जाते थे। तो आज महान संत का तिरोभाव है और हम भक्तों को इस शुभ अवसर पर भक्ति शिंदर ठाकुर के चरण कमलो में प्रणाम करते हुए उनसे प्रार्थना करनी चाहिए क्या प्रार्थना की हमें उनकी कृपा प्राप्त हो जिसके द्वारा हम भक्ति के मार्ग में आगे बढ़ सके। बाकी ठाकुर की ह, हाल गहहलरारहलहले।
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