The short devotional talk praises Srila Gopal Krishna Goswami (referred to as Guru Maharaj) for his extraordinary humility, compassion, and boundless forgiveness. Unlike many gurus who display grandeur or give spectacular lectures, this guru focuses on Vaishnava service and the chanting of Hari‑nama, which he identifies as the dharma of the Kali‑yuga. An anecdote is narrated where, while opening a bottle of special oil, the guru accidentally spills it; instead of reprimanding anyone, he uses the incident to illustrate his patient teaching style. He then declares that he forgives all past offenses of his devotees and also any future transgressions, encouraging them to remember him whenever they err. The speaker urges listeners to chant, serve the mission, and revere the guru’s feet, emphasizing that the guru’s forgiveness is a living embodiment of divine compassion.
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सो जो कोर्स केंजे श्री गुरुदेव जो डिब्लटीकेरकाजो महाराज का भाव है ऐली गुरू महाराज जी बहुत लोग अपने गुरु से बड़े आकर्षित होते हैं अगर बहुत ही शानदार बड़ा ही अद्भुत लेक्चर देते हैं ग्रेट ेटरीगरेटवकैबलरी लोजी तो लोग बड़े इंप्रेस्ट होते हैं या फिर अगर इतना हो कि हमारे गुरु महाराज जी कभी आते हैं कीर्तन मेला में तो बस मेला ही मेला होता है लेकिन हमारे गुरु महाराज जी ने दोनों ऐश्वर्य प्रकट नहीं किए हमारे गुरु महाराज जी ने ऐश्वर्य प्रकट किया व बेरी यूनिक तो हम वाज वैश्णव सेवा, वैष्णव सेवा का ऐश्वर्य प्रकट किया महाराज कहते हैं कि कलयुग का धर्म हरि नाम संकीरतन बाहर वालों के लिए, पर अंदर की बात यह है कि कलयुग का धर्म है वैष्णव सेवा और वैष्णव सेवा में जो शिरोमणि हैं उनका नाम है हजोलिसभूपाकृषणगोसव महाराज और 1 समय ऐसा हुआ कि न डीटी तेल की शीशी केरला से स्पेशली तेल आता था महाराज घुटनों के लिए खोल रहा था खोलते तेल की उछली और बाहर गिरी था हुई सारा तेल बिखर गया तो लोग रात 2 फैलाते हैं तेल भी फैलाते है फैला दिया अब उसको लगा की अब वह सी डाट पड़ेगी जो की तेल की ही नही मिलता ऐसे आता है स्पेशल को लगा तो डांट पड़ेगी गुरु ने कहा ये तेल बनाने वाली शिक्षा है न इनको तेल बनाने की शि कैसे बनाते नहीं खोल रहे होते हैं फसल के बाहर गिर जाती है इन लोगो को कैसे बनाते है ही आता स अद्भुत उनकी क्षमाशीलता इतनी है महाराज जैसे महाराज रुकते है फेस की आपके प्रति मुझे क्षमा कर दीजिये गुरू महाराज गुरु महाराज जी ने बोला मैं आपको उन सारे अपराधों के लिए क्षमा करता हूँ जो की आपने आज तक किए है और मैं आपको उन अपराधों के लिए क्षमा करता हूँ जो भविष्य में रोगी सो इस हाइट ऑफ फोर गिनेस लोग 1 ही मिस्टेक को मन में लेकर चलते हैं लेकिन हमारे गुरु महाराज करते है 1 स्ट्रोक के अन्दर पास्ट के फ्यूचर के सारे ऑफेंसेज माफ़ करे तो इसलिए अगर हमारे में कभी रन जाए किसी को लेकर के तो गुरु महाराज को याद करेंगे आपके का रंज चला जायेगा क्षमा करने की मूर्ति जो है हमारे गुरु महाराज जी है पाल कृष्ण गोस्वामी महाराज भगवत्पाद महाराज उनके चरण को लो कूट कूट कर प्रणाम है और उनके चरण aचnaहैthathe has been for giving us specal myself my offences, let me become very very sinsirdisaplofis, always chanting my rounds attentively allways calling pencil always having evidence esnavasallvas contributing for the mission of a always teaching wigs। दिस मिशन so as it s a ptitnambabnmr gro marg।