महाप्रभु की दिव्य लीला बुद्धिस्ट बने वैष्णव | Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja
14 Mar 2022 · 3 min

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यह वीडियो एक संक्षिप्त कथा प्रस्तुत करता है जिसमें एक वैष्णव संन्यासी और एक बौद्ध गुरु के बीच वैचारिक बहस होती है। बौद्ध गुरु को हराने के बाद संन्यासी एक छलपूर्ण योजना बनाता है: वह पीतल की थाली में सड़े फल (प्रसाद) रखता है और उसे गुरु को परोसेगा। फल खाने के बाद थाली गिरती है, जिससे गुरु के सिर पर भारी वस्तु पड़ती है और वह बेहोश हो जाता है। इस दुर्घटना को बौद्ध गुरु अपने पापों का परिणाम मानता है। बाद में सभी लोग गुरु से क्षमा माँगते हैं, पुनः भक्ति में लीन होते हैं और "हरे कृष्ण" का जप करते हैं। कथा का मुख्य संदेश है कि महाप्रभु की लीला में दुष्टता का अंत होता है और भक्ति तथा क्षमा के माध्यम से मोचन संभव है।










