श्री भगवान् का गुणगान | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī | SB 10.1.4 | ISKCON Ahmedabad | 21 Aug 2021

The video is a multi‑speaker devotional session recorded at ISKCON Ahmedabad on 21 August 2021, titled “Shri Bhagwan ka Gungaan”. Speakers alternate between chanting the Hare Rama/Hare Krishna mantra and delivering a loosely structured lecture on the purpose and benefits of glorifying the Supreme Lord. The discourse emphasizes that hearing and chanting the Lord’s glories is a spiritual medicine that frees beings from the birth‑death cycle, explains the importance of authentic guru‑shishya transmission, critiques materialistic preoccupations, and offers practical guidance for daily devotional practice (e.g., repeated mantra chanting, seva, study of the Bhagavata and Bhagavad‑Gītā). Mythological references to Krishna, Rama, Balarama and other avatars are interwoven to illustrate the Lord’s leelas. Additionally, the speakers make a specific appeal for Maharaj to devote more time to Gujarat, highlighting ongoing temple construction projects, the role of community service (seva) in those efforts, and the concept of internal service (manas‑seva) where devotion is cultivated in the mind. The segment reflects logistical coordination, respect for local leadership, and encouragement for devotees to engage both physically and mentally in service. The overall tone is reverent, enthusiastic, and instructional, aiming to inspire listeners to deepen their bhakti and adopt disciplined spiritual habits.
Chapters
om
sopuriusokे com को problem i gris
जायरा दमा जब हार जारा दमा ह वा हर गोपी जाना वाला भा दिवधाल गोप जाना वाला बा जायरा दावा सोदनानदबजननमगिरा रा बल 4
हे
जायेगा जासे चलेगा आया
हे
hare rama rama m
हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा रे आरे आरे ामा रामा रामा रामा रे आ
साल के
बेटा के 4 हरे हरे रामा रामा रामा रामा रे रे
हे
हरे पेश ना रे देख बेटा के नारे हरे हरे रामा रामा रामा रामा
हरे
से
आये रा
हरे रामा रामा रामा रामा आरे ह
ब
रमा रामा रामा मारा
रे
ले रे हाहहेा
हे
हे हे
हे
somsisensesofhie krsna on working property
i
a so madina जो बड़ो न गर को गोल कान
या तो
गोल काला पर बल न बनो पर बदन बलोरा या दबलबेराराबतयादबलबे दारा बलगाबयाबरास जजनपागाा
हे मिश्रा
भी बचाना
भी बचाना
हो या
सजेगा as mरमभगदeवaसuदेवa से gteaosia आज हम जिस कनक प्रथमाध्याय का चौथा स्लो करेंगे अमेश कितने भक्तों के पास स्मार्टफोन है, कितने के पास स्मार्टफोन है और किसे भक्तों के पास पर फोन में श्रीमाल भागवत नेता बोल रखा okay one would be
will
can to ten chapter one take for ten one for
या
रहा हु
सो brian
निरवेतसीमनिकदसे ना जो सदा मनो
विराम सदासमनोिरहा
हमारे रजेगाहनादेलेकदल से, मेरे कद से माना सदा चोरमनबिरामासदजो
बिना सुना
राधा
से
रा लोगो को मार रहे या भदजेजरेलीसेबवा
जा जो हो जो गाल
गले या म सुना हे बा
ा
शबदर्थऐसीमकतस यू हैव मईक्रफोनकामयाबौधिक कार्यों से कार्यो से गाया जाने वाला, श्रद्धा की र सही अवसादी ऐसी श्रोता कानों से सुनने की दीदी का सुनने मन मन के लिए विचार का विषय मे ऐसे महिमा वर्णन की, ऐसे ही सुहावनी बनी, ऐसी हावी कहा कौन कौन उत्तम लोक श्लोका श्री भगवान का, श्री भगवान का गुनवदगुणनवादा ऐसे कार्यों का वर्णन करने से कमान कमान देता, अपने आप को विलग रख सकता है, अपने आप को सता है, बिना बिना रहे, बिना कसाई कसाई अथवा अपने आप का वध करने वाले, से करने वाले धनवान पूर्ण पुरषु भगवान की महिमा का वर्णन परम्परा पद्धति से किया जाता है और यह अध्यात्म से शिष्य तक पहुंचाया जाता है। ऐसे वर्णन के आनंद का आस्वाद उन लोगों के द्वारा किया जाता है जो इस भौतिक जगत के मिथ्या रणिक में रुचि नहीं रखते। श्री भगवान का गुणगान जन्म मृत्यु के चक्कर में फंसे बद्धजीवों के लिए उपयुक्त औषधि है। साई पशु गाती या अपने आप को ही मारने वाला। आत्मघाती के अतिरिक्त श्री भगवान की महिमा को सुनना कौन नहीं कहेगा कृपया दोहरा भगवान की महिमा का वर्णन महिमा का वर्णन परम्परा प्रगति, ऐसी परम्परा बदली से किया जाता है, किया जाता है। अर्थात् यह आध्यात्मिक गुरु से गुरु से शिष्य तक पहुँचाया जाता या जाता है। ऐसे वर्णन के ऐसे के आनन का आस्वाद आनंद का स्वाद उन लोगो के द्वारा, उन लोगों के द्वारा किया जाता है, किया जाता है जो जो इस भौतिक जगत के मिथ्या मिथ्या शनि में शनि वन में रूची नहीं रखते, रूची नहीं रहते। श्री भगवान का द, श्री भगवान का गुण जन्म मृत्यु के चक्कर में, जन्म में फंसे हुए, से हुए बद्ध जीवों के लिए उपयुक्त औषधि है, सी है। अतएव शाई, पशु गांधी, पशु गाधीयन आपको ही यह आपको ही मारने वाले, आने वाले, आत्म, भारती के आत्मा भाली अतिरिक्त श्री भगवान की महिमा को, भगवान महिमा को सुनना सुनना नहीं चाहेगा, कौन नहीं जाएगा। भारत में सामान्य रो के बीच यह आम प्रकार है की बार बार होने वाले जन्म मरण के रोग से छुटकारा पाने के लिए वे वीमतभगवजीतायासीमत भागो दम से भगवान श्रीकृष्ण के विषय में सुनते हैं। यद्यपि अब भारत पतित हो चुका है, किन्तु यह समाचा मिलते ही व्यक्ति श्ीमतभगवतगीता, शिमकभागवतपर, बोलेगा, अभी भी हजारों लोग सुनने के लिए एकत्र हो जाते हैं। किन्तु यह करता है कि श्ीमतभगवतगीता तथा शिमत भागवत का ऐसा पाठ ऐसे व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए जो भौतिक इच्छाओं से पूरी तरह मुक्त हो चुके हो। निवृत तरश इस भौतिक जगत में ब्रह्मा से लेकर 1 सूत्र की कित, सारे जीव इंद्र भोग की भौतिक इच्छा से भरे हैं और हर प्राणी इंद्र में ल लगा हुआ है। किन्तु इस तरह लगे रहने पर कृष्ण कथा के महत्व को चाहे वो शिव भगीता के रूप में हो चाहे शिव भागवत के रूप में पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। यदि हम पुरुषों के मुख से 2 भगवान के महिला के विषय में सुने तो हम इससे ऐसी अवश्य छूट सकते हैं किन्तु श्रीमत भावो के प्रेस बांचे, पहुंचे सुनने पर वास्तविक में मुक्ति प्राप्त, मुक्ति प्राप्ति में कोई सहायता नहीं मिल सकती है। कृष्ट श्रीमत भगवत का कहा गया है कि भगवान श्री कृ पूर्ण परमेश्वर है, विश्व पतला है, बंता पर दस्ती है, एयर मुझसे श्रेष्ठ कोई नहीं है। सुमन भगत नेता केवल इतना ही जान देने से कि भगवान शिकृषनापूर्णमरुषो परमेश्वर है, मनुष्य मुक्त हो सकता है किन्तु इस कलयुग में लोग असली लाल से करते हैं, क्योंकि वे ऐसे दूर त्रयियों से सुमन भगवत पिता सुनना पसंद करते हैं। जो सुमन भगवत पिता को था रूप में प्रसतुत न करके उसे अपने इच्छा अनुसार तोड़ते बदलते हैं बड़े बड़े, युसानदाजतीेदाशवी तथा वैधानिक अपने ही दुषित तरीके से सुमन भगत पिता पर प्रवचन करते हैं और सामान्य लोग इन्हीं से सुनते हैं, क्योंकि वे किसी वक्त से पुन भगवान के गुना को सुनने में रुचि नहीं रखते। वक्त वह है जो से भगवान की सेवा करने में, अति करने में कोई अन्य नहीं लगता।
मज्ञान
जनाजा क्या
जन
चेतना।
मन साव ने
बंदे हम से गुरु
सच,
म
स रुतम, सना से जो सूरे हो, बेटा हो लिया। राजा अंदर से ही सारे, बिता विशवाले ही मेरा
के
रेरशारेविशनविशना किशारे अरे राम रे राम
आपको सुनाई दे ही है। पीछे में यही कहा जाता है निकेश गुणगान होना चाहिए। भक्तों के संग में या जो परंपरा में आ रहे हैं और जो दिहालि गुणगान है भगवान का, उनको उनको प्रभावित होगा के भौतिक कार्यों में रची नहीं है। दूसरे शब्दों में, भगवान के नामों का उच्चारण केवल वो व्यक्ति प्राप्त करते हैं, क्योंकि भौतिक वाद से मुक्त होना चाहते हैं और यह कहा गया है कि ये ज्ञान हमें प्राप्त करना चाहिए। परंपरा द्वारा प्रमाणिक पर धारा। बहुत से व्यक्ति आज के समाज में हम प्रचार करते हैं पर क्योंकि वो परंपरा नहीं होते वो प्रमाणिक संदेश नहीं दे सकते। और इस शो के अनुसार जिन व्यक्तियों की रुचि केवल भौतिक कार्यो में है वो इसका लाभ नहीं उठा सकते। इसका लाभ कोई उठा सकता है जिसने यह निर्णय लिया है। मुझे भगवान किश्वर होना है। तो भगवत में 7 में प्रभु जी यही कह रहे थे कि श्रीमद भागवतम और भगवत गीता का जो ज्ञान है इसके पालन से आप जन्म मृत के बंधन से क्या हो सकते हो, मुक्त हो सकते हो। और इसलिए कहा गया है भगवत गीता और श्रीमन भगोतमयूमें रूचि लेनी चाहिए। तो परम भगवान का गुणगान करना जैसे कि नवधा भक्ति का ज्ञान शुरू होता है। कैसे? तो ये संदेश दिया जा रहा है शास्त्र में कि हमें में रुचि लेनी और इसमें वो की रूचि लेंगे जो कि भौतिक संसार के से मुक्त होना जाए। अगर आप सोचो कि हमें बहुतिक जीवन भी चाहिए और ध्यार्मिकजीवन तो इसमें सता प्राप्ति होगी। आध्यात्मिक जीवन से जो भौतिक कार्य है उसे घटाना पड़ेगा तो और हम जब भगवान का संदेश सुनते हैं हमें किसके किसके द्वारा सुनना चाहिए। मूल पुरुष जो कि परंपरा में आ रहे हैं, परंपरा में जो आ रहे हैं वो आपको शुद्ध संदेश देंगे। परंपरा में जो व्यक्ति आ रहे हैं वो यथा रूप संदेश देते हैं। जैसे 1 व्यक्ति प्रचार करते हैं क्योंकि वो परंपरा में नहीं होते इसलिए उनके संदेश का कोई ध्यानिक लाभ नहीं होता। और अगर आप सु भक्तों के द्वारा प्राप्त कर लाभ। उदाहरण के लिए प्रपद्य गीता प्रकाशित होने से पहले 600 से अधिक वजन और मुश्किल से कोई कोई भाग बनाने होंगे। बाकी की के लाखों लोग जुड़े हैं भाग में, क्यों? क्योंकि संदेश आपको प्राप्त हो है पवित्र भक्तों के द्वारा। तो ये है लोग भगुदीनाकेभरीमभगधम के प्रथम। तो यहाँ पर में आप क्या पड़ोगे पढ़ोगे किस प्रकार भगवान कट होते हैं? बहुत यदा यदा हि भगवान गीता में कहते हैं कि मैं अलग अलग समय में बना, सभी प्रगट हो तो किसी धर्म की सुधारना करे। भगवान प्रकट होते हैं अनेक रूपों जैसे कि भगवान प्रकट हुए हैं वानर रूप में और उनका जनवरी बनाओगे कुछ दिनों में। और कल आप मनाओगे किस का बलराम दिया तो बलराम जी से क्या समझा जाता है? पापाजी ने कहा कि बलराम जो कि आपको आध्यात्मिक शक्ति दे, रापाजीजब, कृष्ण, बाल, वो, लौट, कृष्णा, आपको, क्या, मिलेगा, सो, अगर आप भगवान को समझना चाहो। भगवान प्रकट होते हैं अलग अलग समय में धर्म की साधना करे और उनके साथी जो है वो भी प्रगट होते हैं। जो भगवान कृष्ण जी प्रकट हुए थे उनके माता, पिता, भाई, बहन सब साथ में प्रगट हुए हैं। उदाहरण के लिए देव देवी, उन्होंने 12 हज़ार देवताओं के वर्षों के लिए बड़ी गहरी तपस्या उठाई थी। इसके कारण मल का क्या था उद्देश्य भगवान को प्राप्त करना पुत्र के रूप में और भगवान प्रसन्न हो की तपस्या से फेनी सुविधा दी गई। तो जो भगवान प्रकट होते हैं, उनकी साथी भी प्रकट होते हैं। और बाल राम जी कौन हैं बालम जी का 1 कौर नाम है जी बड़े भाई है न बड़े भाई। तो जो भगवान राम प्रकट हुए थे, ये बड़े भाई है प्रकट हुए थे किस रूप में लक्ष्मण के रूप में, वो लक्ष्मण के रूप में प्रकट हुए थे का क्या था भाव शुरू से अंत तक राम की सेवा, उसी प्रकार भला ऊबी प्रगट हुए हैं कि इसलिए भगवान के दिया, उनको ज्यादा मधुर बनाने के लि। तो लक्ष्मण सदा भगवान की सेवा में रहता था और 24 घंटे वो 1 ही भाव था कि भगवान मेरे भाई की सेवा। तो जब भगवान का विवाह हुआ तो सीता ने देखा कि सीता के लिए तो कोई काम है न घर में, क्योंकि जो काम करना होता था लाकर पहले पहचान लेता था, करता था जो दी दुखी हो गई। मैं आई हूँ यहाँ मेरे लिए कुछ काम ही नहीं है, सारा काम लक्ष्मण कर लेता है। और भगवान राम के पास गए बलराम हे थे, वो लक्ष्मर को नराज नहीं करना चाहते थे। और सी ने हा चलो विशिष्ट मारे
गुरु
उपाय दिया जो घर की सेवाएं हैं सीता को करने 2 ने बाहर का राजनेतिक है वो लक्ष्मण। तो लक्ष्मण जी प्रकट हुए थे भगवान के भाई के रूप में और उनका क्या होता भाव केवल लक्ष्मण राम के को ज्यादा बना। तो यहाँ यहाँ तो भगवान प्रकट हुए थे मन के रूप में, छोटे भाई के रूप में, फिर जब भगवान प्रकट
हुए
कृष्ण के रूप में, ये लैक्मनप्रगटहुए कैसे उनके बड़े भाई के रूप में, क्योंकि छोटे भाई के रूप में जब प्रकट हुए थे उनको डांट दिखानी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि हमें डांट नहीं खाना चाहता तो बड़े भाई के रूप में बाल राम और उन्होंने अनेक लीलाएं की, यही भाव था के भाई की लीला को यादा शिमर भागवत में आप पढ़ते हो कि भगवान के प्रकट होने से पहले जो शत्रु के देश छ शत्रु हैं, जिनके कारण हम भगवान के शरण नहीं हो सकते। ये क्या है काम रोज लोग mniciकोमनके प्रतिनि माना जाता है, वहीं 6
जो
6 अन्त है जब तक हम इनको दूर नहीं करेंगे और भगवान को अगर भगवान को समझना चाहते हो किस पर क्या करना चाहिए, काम को लोग इनसे में बचना चाहिए, इनसे बचेंगे तो आपका हृदय साफ हो जाएगा, हृदय साफ हो जाएगा, भगवान को समझते हो। जिस प्रकार अगर कोई व्यक्ति नशे में हो तो आप उसको कुछ भी पूछोगे वो ठीक उत्तर नहीं दे पाया। तो इसी प्रकार जब तक पढ़ते जो से इनका वध किया गया था, तो जब तक हम का वध नहीं करेंगे, माने हृदय में भगवान को समझ नहीं पाएंगे। इसलिए भागवत में कहा गया है कि पहले ये चेअनर्तरजोहै उनका वध हुआ था और उसके बाद हृदय साफ बना और फिर महाराज पर थे वहाँ कैसे उनका जन्म जन्म से नहीं था, वो प्रकट हुए थे भगवान के हृदय से हृदय में पहुंचे थे। तो अगर हम पर भगवान को समझना चाहे तो क्या आवश्यक है? अनाथ को दूर करना पड़ेगा। और अगर हम सोचें कि काम कर लो, पर रहेगा। हम अखबार को समझे कि यह असंभव है। आपको इन अनालत को दूर करना है। और फिर वान प्रकट हुए 1 और रूप में किस रूप में के रूप है? और निदिन े रूप में हुए थे बड़े भाई मैं तो काम को 2 मोमनमयधयािशक्ति के द्वारा भगवान कहते हैं। देवी गुनमाईमाय महा माया, इस सगुनी माया का विरोध करना, मेशनगतहोनाकठिनहै जो वो इसका उसका विरोध कर सकता है। तो हमें ये निर्णा निर्णय करना चाहिए कि अगर हम भगवान को समझना चाहे, ये जो भौतिक आकर्षण है, इसे हमें दूर करना पड़ेगा। और जब हम इसे दूर करेंगे, जब हम बनायेंगे आपके हृदय में बैठेंगे और आपको आपको, कोई गंदे साल में बैठने में न आता, कोई आपको वो कचरे डब्बे के पास बैठकर, तो उसी प्रकार परम भगवान ही दे में प्रकट होते हैं। जब वो स्थान बिल्कुल साफ हो जाए। 4 पास साफ होता कैसे? यही बलराम भगवान के रूप में क्या थे? वो बड़े भाई थे। तो बलराम अमीशा भगवान शिव के साथ रहते हैं और कहते हैं कि इसलिए उनके सेवा करने में लक्षण भी भगवान का सेवक था और भगवान भारत उनके मन में भी सदा यही भाव रहता था। भाई की सेवा पाय के सेवा को और उधर माना तो पढते हो। भगवान की अनेक लीला है। और ये सब अद्भुत है। चा में दिव्यम होना। दोनों दिव्य देवम का अर्थ है बोले गुणों के पार। दूसरे शब्दों में जो कि होते वाले व्यक्ति नहीं कर सकता। जब भगवान प्रकट हुए थे, वो प्रगट हुए थे, हुए थे, कैसे रूप में है कि नहीं? 4 हाथों के साथ जेल खारे हैं थे। फिर जब बाद पिता ने कहा श्रद्धा बच्चे का रूप ग्रहण कर लो, उन्होंने तुरंत ही फिर और 1 लीला तो बार जी की इतनी निलायन नहीं है, क्योंकि बाला जी हमेशा भाई ऐसे में थे। पर बहराम जी भी अद्भुत जिला पगने जैसे कि से भगवान है। भगवान दोनों भाई 1 घंटा और के साथ लीला करते थे, वो बालंजियारेथे पहुंचे 1 वन के बाद और वो बंद क्या था तालाबा 1 समय वृंदावन में केवल बंद थे, वन आप को देखते है नहीं सारे मन को उखाड़ दिया है और क्या बचा है? बड़ी बड़ी बिल्डिंग ही है। भगवान के मित्र ने कहा की यहाँ इस जंगल में 1 पेड़ है जिसके फल बिलकुल मीठे हैं, इतने मीठे हैं, ये फल खा के पेड़ बढ़ जाएगा। पर क्या ऐसा समझा समझते हैं कि ये सूर है? देना है तो सूर जो कि उस इलाके में किसी को आने नहीं देता। तो आप हमारा सहयोग दीजिये, सहयोग दीजिये कि हम उस पेड़ के फल का टेस्ट कर सकें और में बस इतनी छोटी सी सेवा को बड़ी सेवा मांग हो। तो मा ने क्या किया? भगवान ने जाकर पेड़ को हिलाया पे गिरने लगे
कौन है?
किस की हिम्मत हुई है, ये बल कौन है? पेड को पेड को कर रहा है तो होते है। वो समझते हैं कि उनकी शक्ति भगवान की शक्ति से भी ज्यादा है देने ने क्या सोचा भगवान को सब जानते थे क्योकि कम हमेशा उनके पीछे था? कम हमेशा दोनों भाइयों के पीछे था कि नहीं? तो भगवान ने जब जोर से पेड़ को किया तो फल भी नीचे गिरने लगे। तो सुन ने आकर पहले क्या किया को मार से भगवान ने उसे पकड़ा goa फेंक दिया। e bde kise चाहते कि बंद से उन्हें जो जो सुर हैं इनके कई मित्र भी होते हैं। तो उनके मित्र थे, वो आ गए, वो जाग गए और उन्होंने आकर अटैक किया। तो भगवान ने 11 कर सबको सब की मृत्य हो गए। तो परम भगवान जब लीला पकड़ करते हैं तो मोदी भगवान के रूप में शुरू से अंत तक उन लीलाओं को पकड़ कर। और भक्ति ठाकुर ने कहा है कि इन लीलाओं का स्मरण करने से माय में जो अलग अलग टूटियां हैं वो आप उखाड़ सकते हो। कई बार भाग से भूलते हैं यह भगवान की लीलाएं हैं। पॉसिबल अगर आप भौतिक दृष्टि से देखो तो भगवान की लीला को आप नहीं समझ पाओगे आप सोचोगे। this is wormitologी। जब अंग्रेजों का राज्य था भारत में, तुम अंग्रेजों ने अपने कई विद्वानों को भारत भेजा संस्कृत भाषा पढ़ने के लिए, और उसके पश्चात उन्हें ये आदेश दिया गया कि तुम वेदिक शास्त्रो का अनुवाद करो देखो कितनी एसपी थे उनकी, बराबरी है उनके प्रसिद्ध and उनका क्या। this is all mythology। ये केवल कल्पना है, वास्विक नहीं है उधारण के लिए, आप ये शो करो। भगवान ने मुंह खोला पूरे को माँ को दे दिया, लोग विश्वास करेंगे
जब
मुंह खोलते हो तो क्या देखते हो? भगवान मुंह खोलते तो उनकी माँ क्या देखते पूरे शिष्ट तो भौतिक दृष्टि से आगे कोई इसे समझना चाहे तो समझ पाएगा नहीं। इसलिए सेवों के ही जीवन सेवाभाव आवश्यक है। और भगवान से के लिए में हृदय को साफ़ करना है। काम भगवान की लीला को समझ और नीलम को समझने के लिए हमें परंपरा का सहयोग चाहिए। जैसे की श्लोक कहा जा रहा है, क्या? क्या हमें विज्ञान किसके द्वारा प्राप्त करना चाहिए? वैसे तो भगवान कृष्ण की अनेक ली राय है और की बहुत कम ली लाए है। तो आप पूछो गे क्या कारण है? बाधा हुए थे अपने भाई को सहयोग देने के, वो प्रकट हुए थे अपने भाई की लीलाओं को ज्यादा मधुर बनाने के लिए, वो कुछ कॉम्पिटिशन में नहीं थे, देखे किसी लाइन जाता है। और भाव क्या था भाई की लीलाओं को ज्यादा स बनाना। क्या भगवान बलराम ने जाकर शिकायत की जब के हमारे भाई ने मिट्टी खाई
है,
मिट्टी खाई है हमारे क्यूँ, हमारे घर में क्या चीज की कमी है। माता के बाद 2 लाख गायें थी कितना आपको आज के जमाने के पूरा शहर चहीहोेगाकबनाने तो नो ला। गाय थी, सारी गायें, सजी fuलीdeकेtdरचावह, गायेगा जाम था, आपका नाम है, गायों का भी नाम था और इनमें से कई कोई 20 से अधिक गाय थी जो कि फ्लेवर दू देते थे अब यहां जाकर आप दूध में कोई फ्लेवर चाहिए आपको स्टॉप रहा तो आपको ऊपर डालना पड़ता है और भगवान के समय ये जो सुगंध दूध है वो कुदरत याद है। और उस समय सुगंध खास खिलाया जाता था जिसके कारण दूध भी आता। तो बातों ने मेरा बेटा मिट्टी क्यों मेरे घर में किसी चीज की कमी है और मुह खोल के दिखाओ। भगवान तो झूठी शिकायत है खेलते समय मेरा भाई उनके मित्र हार गए तो आप से डांट दिलाने के लिए झूठी शिकायत की जो गोपियां थीं कैरा शिकायत करते रहे दीदी के बारे भगवान के आप का बेटा हमारे घर में आकर जबरदस्ती मकन चुराता है तो मन को और ऊँचाई पर रखो या पहुँच नहीं पाया गुफा क्या गिनता के ऊपर रखो वो पहुंच जाते है के शरीर में इतनी सुन्दर देने हैं इस में इतनी चमक है कि देखा जाए तो भगवान के अनेक भी लाये हैं। तो जो भगवान ने मेरा भाई आया था तुम बाल राम जी से कर दी थी इसी मिटटी है। तो बलराम जी का क्या है कि भगवान की सेवा में लगे है। जब कुरुक्षेत्र का युद्ध हो रहा था तो बादाम की इच्छा नहीं थी इस युद्ध में लड़ने के लिए और बाम ने अपनी तरफ से प्रयास किया कि युद्ध रुक जाए नहीं रुका तो बालम ने क्या किया? क्या क्या 33 किसानों की यात्रा, 3 किसानों की यात्रा करते है वायरल के और 3 किसानों की यात्रा करने के पश्चात वो पहुंचे नमेश्ुरानयाल नमश्वनाथाकितने को मे 1 कथा चल रही थी, कथा कौन दे रहे थे, कौन दे रहे थे, बो बड़ी कथा चल रही है चल रही थी, जिसका चलना था हजारों था पर बैठे थे ये सारे पस सब खड़े हो गए उनको 1 व्यक्ति खड़ा नहीं हुआ कौन दे न शोबानी देता भगवान ने सोचा इन्हें सबक सिखाने ले। केवल खूसा घास को लेकर उनके को लगाया लगाया का क्या परिणाम हो। तुरंत ही आप कुछ ग्रास आपको मृत के लिए forty सेवन चाहिए 12 मृत के लिए सा, ये है परम इनका हर कार है और ये भगवान पर केस रूप और बालमजी केसू पानी हमें बालम जी की शरण लेनी चाहिए। हमें बालम जी से यह प्राथना करनी चाहि या में शक्की आध्यातमिक का आगे बढ़ने। तो आज किस लोक में कहा जा रहा है? हमें ये आध्यात्मिक ज्ञान का किसके द्वारा प्राप्त करना चाहिए? उनके द्वारा जो परंपरा में, आ
में
आने है, उनके द्वारा आपको असी संदेश और असी संदेशो में होंगे, उनका प्रभाव भी पढ़े। हमें वानिक प्रतिनिधि द्वारा ज्ञान प्राप्त करना जाए, वे ज्ञान है हमारे लाभ की पापा करे। 10 में में श्रीमद भागवत और भगवद गीता का पूरा पैदा उठा तो आज के शो अवसर पर उखबार। हमें वाम की हमें आध्यात्मिक शक्ति मिले। इसके दौरान हम आय का तो चाहिए। हमारा हमने भगवान की दीना में रुचि देनी चाहिए। कई बार लोग बोल से भगवान का चंदन कैसे किया बंगबलकीतमेजा भारत की जिसके दौरान की चेतना में मिले से राम राम राजवाल था और बहुत ही ऊँची कुड़ी अपनी यात्रा शुरू करने जा रहे
थे
की बड़ी प्रसिद्ध पूछा कहा था तुम यहाँ क्या करोगे तुम्हे 1 मान संद मिलेगा वैसे है तो भौतिक भगोचेतेमूै ने प्रशन पूछे, इसका पता क्या पूछा? ने केश पूछे, हमें किस विषय का चिंतन करना चाहिए? कि वे का चिंतन करना चाहिए
में
भगवान के नामों की महिमा गुनो और लीला का दसवीं में भगवान की महिलाओं के या प्रॉपर या प्रॉपर जी अमेरिका आए थे, तो अपने साथ उनके पुशपासादसवेसकन का अनुवाद। कृष्ण बुक में तो प्रौपर्जी की इच्छा थी कि इस किताब को जल्द से जल्द कार्य किया जाए। सुनाई दे रहा है, नहीं दे रहा है। उनकी इच्छा थी जल्द से जल्द लोग पड़े हैं और प्रामाणिक रूप से समझेंगे तो प्रबजीजल्दककिताबजल्दी से छपे। तो उन दिनों में हमारे इस्कॉन के बाद इंग्लैंड गए थे 4 किले और इंग्लैंड में जाकर। उस समय 1 बीटर्स का ग्रुप ने फेमस गायक थे, उनमें से 2 थे योगी कृष्ण भक्ति में रूचि पर थे और उनमें कौन था श्याम सुन्दर प्रचार करके इंग्लैंड में न्यूयॉर्क में आए थे। प्रॉपर्जी को मिलने तो प्रौपर्जी को जब पता लगा कि जॉर्ज रूचि ले रहे है, रूची ले रहा है। कृष्ण भक्ति में देखा यू आज गेम to publish sham wari, ia my special master, wans you publish this book or put a check। सो बुक और इसमें है माने। भगवान के दिन में रुचि ली। नीचे के उपदेश में रूची भगवान के रूप में भगवान के नाम के इस प्रकार को 4 से गोल। 1 बात तो इन नीला में हमें रुचि लेनी चाहिए। मन आपका भटकते रहता है नीला का अध्ययन हो, मन सा में ही पढ़ के गा वो हमें बालराम जी के विषय में सोचना चाहिए, उनकी लीलाओं का गुणगान करना चाहिए। पर भगवान की लीलाओं का गुणगान करना चाहिए। थोड़ी देर देर बाद आगे क्या आएगा रानी की रूची देनी चाहिए। और ये साल स्पेशल है, ये साल में क्या? अब क्या बना रहे हो? प्रॉपर का वन ट्वेंटी दे तो भक्त प्रयास कर रहे हैं। प्रॉपर लीला। मीता का ध्यन बढ़ा कर करने के लिए कई बार भक्त कहते हैं। ओह, हमारा क्या, दुर्भाग या प्रॉप की संगर प्रॉप की संग आज भी प्राप्त कर सकते हैं। कैसे? कैसे उनके ग्रंथों के द्वारा, उनके पत्तों के द्वारा, विश्व साधु है, वो प्रकट होता है, 2 रूपों में वापू और वापू है, टेम्पररी पानी है। तो हमें प्रामाणिक रूप से नीला को स्वीकार करना चाहा। और मन द्वारा भगवान का जब बड़ा पाना प्रगट हुए। कि सनातन शादी, अर्जुन, अत्यंत दुखी थे। अर्जुन ने वो नीला का स्मरन किया। योगी बहुत दृष्टि से संभव थी, पर उनके मिर्जा के सहयोग के कारण वह सफलता से कर सके। अर्जुन ने मीरा का स्मरण किया। उन्हें क्या लगा कि परम भगवान उनके साथ हैं, उनके सवाल। तो प्रापी कहते हैं। अगर हम भी गीता के श्लोकों का सवर्धन करेंगे, उच्चारण करेंगे तो आपको भी क्या लगेगा। पर भगवान, ये देश आपको दे रहे हैं आपके साथ। और इस प्रकार का भाव रखे। आपका मन बचेगा। तो हमे बहुत कार्यों से बचना है। तो वो बचोगे केवल अगर आपके पास कोई ऊंचा टेस्ट हो में 1 किताब छपी थी टेलिन फुल की, जिसका नाम था हायर टेस्ट, हमें हाय डायर टेस्ट नहीं, आएगा लो टेस रहेगा है कि नहीं? हायर टेस जब है, तब आप इन नीला को पढ़ो। इसके द्वारा भगवान के प्रमाणिक और उनके द्वारा सीखोगे को असली संदेश मिलेगा। और उसका जो व्यक्ति भौतिक कार्यों में जुड़े हैं, इस शो के अनुसार उन्हें कभी भी भगवान को नहीं आयेंगे। भगवान को समझना है तो हमें सेवकों के जीवन सेवा के सेवा से जुड़ा है। तो हमें बलरामजी प्राता करनी। हमें धार्मिक शक्ति मिले, जिसके सहयोग से हम का विरोध कर सके। यह है, यह होना चाहिए पैसेकि। yes,
thank you much for the mother, las context is a copigsina। कुश है कि जब किसी वरिष्टों की गलती दिखती है तो उसे इस दृष्टिकोण से देखना चाहिए कि अपराध भी न हो और उनकी गलती अगर है, तो वो हमें न।
तो कोई गलती देख रहे हो, विन जा सकते हो सकते हो, पर मुझे गलत दिखती है। अगर आप खुद को गलत दिखे, सुधार लेना, आप विनम्रता से बोलोगे तो जो दशा वो स्वीकार करेगा, वो सुनेगा,
इन
इंशिया देश के कारण में आकर बोले, वो ही अपराध होता है। अगर आप विनता से बोल रहे हो और सच बोल रहे हो, फिर यह वैक्लअप्राध नहीं है। हर चीज वैश पराध हो, कोई मैनेजमेंट में आये, कोई बोलेगा ही नहीं। जो न करो, हमें वैनल अपराध नहीं चे। sia has okay yes sanam,
how to motivity in ost code, situation to come to deb for physical service and association
go। it was a blessing and co blessing in the gavitificelity to work from home, then be have enjoy the। हमको आदत पड़ गई है, घर से काम करने की
हो तो मoटiवatmमअगर आप
ज्ञान प्राप्त कर रहे हो। तो आप भी, हमे समझोगे की सेवा भी जरूरी है। आप पर कहते थे तो मेक प्रेशर एडवांस, मेन यूनिट, मेडिसिन न डॉ, उन्हें देख ने आपको 2 चीजों की आवश्यकता है दवाई और परेश। आपकी दवाई क्या है? chandi pr va a seva changing in practical seva, then you के वजन करना सारे दिन। so we mark milan should give the dont associate the don and they dont get full benefit is an questio was that you question।
मेरा प्रश्न यह था की पंक्ति में आगे बढ़ते रहने के लिए सबसे सुरक्षित
और निश्चित क्या होगा?
a rose thank e वो है महामंदिर का 4 सोना माना, महामंत्र को 4 नियमित रूप से हमें रोज करना, साथ में 4 नीमोंकापलअगोकरोगे, फिर हम भक्ति में आगे बढ़। गे आगे बढ़ने का क्या लक्षण है, आईना में रूचि बढ़ रही है, ग्रंथों के अध्ययन में रूचि बढ़ रही है, उनमें विनम्रता का भाव आ रहा है। ये हैं कुछ लक्शन आध्याय। वे सब आरंभ होता है। कैसे? श्रवण ये स बस mehtvapूrngun
की त इसे कैसे बचे
और कैसे बचे।
हर वक्त के पास पी एच डी डिग्री है और फाइन नहीं है। सब के बाद पी एच डी डिग्री है। वो फाइबर फोर फाइनिंग से कैसे बचा? तो परवाज ने कहा, राबा ने कहा वो फोर फाइनिंग भाई लुकिंग, गुड इन एवरीवन गुन बोलेगा। कई बार हम ऐसे बात करते हैं हमारे में सारे गुण हैं। दूसरे व्यक्ति में कोई गुण नहीं सर। मैं भगवान की देन हूँ, बाकी सब भगवान। कई बार हम ऐसे सूचना और आय। अगर आप बचे पढ़ो देखोगे आशीर्वाद दे रहे हैं, शर्त उनका नाम ही नहीं लिखना चाहे। हमें किसी प्रकार का नाम नहीं चाहिए। हवा में भाव होना चाहिए। हम केवल सेवा करना चाहते हैं के गुणों को देखो आप अपने 1 चीज न किया होगा सिखों में 1 रिवाज है कि जितना धन है सिख हो उतने में नम्रता की सेवा चाहता है गुरवारा में जूते साफ करेंगे, जूते साफ करेंगे और पानी पिलायेंगे। कुछ काम करेंगे। भाव होना चाहिए कुछ सेवा भी करने के लिए। यह नहीं हमें तो साफ की सेवा चाहिए। हम तो हुकुम चलाने के लिए आये है कम सोने
बच्चों के और से
प्रोप व्यस्त और आपके शिक्षा का,
तो
आप हमदाबाद
आप व्यस्त अमदाबाद में आप
क्या करते है
सुनाई दे
थोडा छोटे तो तो आप रूप में से का
बल दे दे सारे हम मजे बोली बनाएंगे, रुची बनायेंगे और गिविंग होंगे ने दया की भावना होनी हु आज तो बाल पुजा फुल फीलिंग हो रहा है वे पूजा सामने 1 दफा ते 1 ही जगह आज वो तो ट्रेलर है। ke anyvle question question yes
खड़े कि
महाराज मंचीय पर होते है उसको रोकने
के लिए कैसे रोकते है
अच्छी खबर दें कुछ कलयुग में मान के अपराध को डिस्काउंट मिल जाता है। 1 शर्त पर आप बार बार द्वारा
अपराध
ओके
महाराज भक्ति मार्ग के अंदर हम निष्ठा का जो स्टेप है वो कभी कभी डक माया जाता है तो काफी सिचुएशंस ऐसी होती है की हम भी नोट कंसेंट्रेट होती तो वो कैसे बढ़ाएंगे निष्ठा कैसे बनाया जाए की निशा
बनाने के लिए कहते हैं
और ये
रूल a mile a si on sending
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e bar gita bdli
geta
e a kay anyone
अपने साथ अच्छा करे होते है पर कितने लोग ऐसे होते है वो अपने इरिटेट करते हैं बोलना चाहते हैं कुछ नहीं फिर भी जबरदस्ती अपने से करवाना चाहते है तो कभी
कभी ऐसा हो जाता है तो उदाहरण दे सकते हैं कोई मतलब हमे कुछ
कोई चीज़ नहीं करनी है इतना इरिटेट कर देते उस चीज के लिए अपना जो अन्दर दबा वो गुस्सा है भी निकल आता है
गुस्सा ये है न ऐंगल है नरक में जाने के 3 राते हैं एंगल फरूकी बीमारी है नरक में जाना है भगवान के ये 3 रास्ते, पता हो इस बिल्डिंग में कोव
जाओगे
कोई खतरे चीज
okay
thank you re much
1
है
रे कुशा आप सभी का इस काम मंदिर के अंदर हाजी स्वागत है। विशेष रूप से हम गोपाल स्कोन और ऐसी स्वागत करते हैं।
3 बार बोल के अरिवारिवारिवा
वेलकम करते हैं महाराज जी भी आगे आपके लिए सान है भक्त महाराज के लिए भी 1 बार बोल के वेलकम करेंगे महाराज जी को
महाराज से निवेदन कर रहे
है
महाराज जी बता रहे हैं महाराज जी के वो गुजरात में ज्यादा समय दे ऐसा आपको निवेदन करते नाना महाराज। जी सब चाहते है यहाँ पर आपके लिए आसन है वो मारा प्लीज कम महाराज जी सोरी आगे आपके लिए से है और इस ग्रेस हम वेलकम गरीबी इस ग्रेस प्रवल है और हमारे गुजरात के विजय सेक्रेटरी असिस्टेंट भी है और महाराज की काफी ही महाराज को बहुत पसंद करते हैं और गुजरात में जितने भी मंदिर बदरे कंस्ट्रक्शन हो पूरी ट्रैवलिंग करके मंदिरों को डाइट करते है तो गांधी है वाकी है मेनी मेनी प्लेस तो बहुली के दिन बार थैंक्यू मच आज का दोगा स प्रकार ऐसी है देखिये जगह कम है यहाँ पे क की संख्या बहुत अच्छी है तो बैठे बैठे सब दुर्गा रेंगे सब विभाग कॉपरेट
करे मनही मन में चेतन कर सकते
तो सबसे पहले हम
1 बोझ गरीब ब्राहमण 1 दिन का नही सुन अगर आप ऐसी स्थिति में हो कुछ नहीं कर सकते तो मन में सेवा कर सकते फिर ग्रामीण ने मनी में मन में बहुत सुन्दर महल बना लिया भगवान के लिए बहुत सुंदर मन में 8 बार आरती करता था तो 1 दिन मनी जब उम्मीद डाली और देगा उगली कैसे होगा तो मन मन में करना था भगवान इतने प्रसंत उनकी सेवा से मनी मन में तो सेवा का लाभ मिला भगवान ने हमने जहारकारभेजामनके द्वारा नेक दिल
सो आज का बोगम इस प्रकार से है।
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