Sunday Special Bhagavatam Class || Srila Gopal Krishna Goswami || ISKCON Kharghar

In this segment of the Sunday Special Bhagavatam class, Srila Gopal Krishna Goswami shifts from scriptural exposition to a practical announcement about the upcoming Bhādrapurnima celebration on the 29th. He, together with the event organizers, promotes the sale and distribution of Bhagavata Purana sets in multiple languages (Hindi, English, and other regional versions). The talk emphasizes a limited‑time discount, the presence of the guru and the spiritual significance of acquiring a Bhagavata set, and outlines the current distribution achievements (45,000 sets sold worldwide last year) with an ambitious target of 100,000 sets for the coming year. Goswami highlights the transformative power of even a single verse, urging devotees to purchase for themselves, sponsor copies for relatives, libraries, and friends, and to contribute donations that will enable free distribution to those unable to afford them. The segment includes brief chants and a call for enthusiastic participation, reinforcing the link between devotional practice and material support for spreading Krishna consciousness.
Chapters
गणन पुत्र प्चारित अजामिलोअपियगधामा कि उत श्रद्दय गण मनोहर नाम गणन पुत्र प्चारित अजा मि लों अपि अग धामा कि मत
सदयाणा
आज मिलो
या गा राम पुत्र
जमील
स्रताग्णनबहा मेरा ये मेरा गोधला।
यह
होगा
ला
द ममाण। मृत्यु के समय हरे नाम हरी का पवित्र नाम गण उच्चारण करते हुए पुत्र उपचारित अपने पुत्र की ओर इशारा करते। अजामिल अजामिल अभी तक अगात गया। धाम आध्यात्मिक, जगत किमत क्या कहा जा सकता है, श्रद्धया, श्रद्धा तथा प्रेम पूर्वक गृह उच्चारण करते हुए अनुवाद तात परेश डिवांडग्रेसेसी भक्ति वेदांत स्वामी श्लप्रपादमहाराज द्वारा शिलपा महाराज के अनुवाद अजामिल ने मृत्यु के समय कष्ट भोगते हुए भगवान के पवित्र नाम का उच्चारण किया और यद्यपि उसका ये उच्चारण उसके पुत्र की ओर लक्षित था, फिर भी वह भगवत धाम वापस गया। इसलिए यदि कोई श्रद्धापूर्वक तथा निर अपराध भाव से भगवान नाम का उच्चारण करता है तो वह भगवान के पास लौटेगा। इसमें संदेह कहाँ है? तात्पर्य मृत्यु के समय मनुष्य निश्चित रूप से मोहग्रस्त हो जाता है, क्योंकि उसके शारीरिक कार्य अव्यवस्थित हो जाते हैं। उस समय भले ही किसी ने अपने जीवन पर भर भगवान नाम का कीर्तन करने का अभ्यास किया हो, किन्तु वह स्पष्ट रूप से हरे कृष्ण महामंत्र का उच्चारण न कर पाए, फिर भी ऐसे व्यक्ति को पवित्र नाम के कीर्तन का सारा लाभ मिलता है। इसलिए जब तक शरीर स्वस्थ है, क्यों न हम जोर जोर से तथा स्पष्ट रूप से भगवान नाम का कीर्तन करे। यदि कोई ऐसा करता है तो यह संभव है कि मृत्यु के समय भी वह प्रेम तथा श्रद्धापूर्वक भगवान नाम का ठीक से किरतन कर सके। निष्कर्ष के रूप में जो व्यक्ति निरंतर भगवान नाम का किर्तन करता है, उसकी भगवत धाम वापसी बिना किसी संध्या के सुनिश्चित हैं। श्लप्रोपाद महाराज की
sri हाय कृष्णा हाई कृष्णा आज मिली कथा पढते हो संक्षेप में आज मिजो थे, मैक्सिमम मिजो थे, उनका जन्म हुआ था रामीण खानदान में, और 1 दिन वह जंगल में जा रहे थे पूजा के फूल लाने के लिए, भवन गले हार बनाने के लिए। और लौटते समय देखा कि 1 वेश्या प्रेमी के साथ 1 दूसरे को गले लगा रहे हैं, और वो इस घटना के प्रति आकर्षित हो गया। भगवान कहते हैं मन को सदा मेरी सेवा के है जी भगवान का चिंतन नहीं करेंगे, चिंतन करना पड़ेगा। तो आज मैं ने घर लौट कर पहले तो उस शिया को नौकरानी के रूप में सीकर और फिर उसके साथ विवाह कर लिया और अपनी जो धार्मिक पत्नी थी बच्चे सब दिया। और इस को संतुष्ट करने के लिए आजम को अनेक प्रकार के पाप के कार्य करना पड़े। चोरी करना डाकू तो यमराज का पाप कब, बोया बहुत बढ़ गया था। और और सबसे छोटे बेटे का नाम क्या था? ै तो यामा दूध या दूध कौन
है
याम राज के यमराज की पुलिस और यामा बने। तो मेरा कौन था? उसमें क्या था वो का नाम नारायण रखा था। अनेक में है बच्चों को भगवान का नाम ले जोन्स न पोल्स बाइबल से चुने गए हैं। मुसलमान और में ये नाम शासन के आधार पर दिया जा रहा था। पर आज मारे हिंदू बाइ के नाम नहीं चाहिए कोई मोरल नाम सनी ली। प्राचीन व बच्चों को भगवान के नाम ले जाए और भगवान के नाम अमेजन है। किसी से पुकारो को मिला तो आज मे का बड़ा गहरा आक्शन था। 50 सौद खाओ सो जाओ चलो उठो तो या मधु में या मधु की तस्वीर देखिये है यमराज ने अपने प्रतिनिधि भेजा 333 प्रतिनिधि क्यों भेजे, 6 ने भेजा, 2 ने भेजा वईसे because i new to it, you can save the lord of for get the lord body mind and you can save the lord to the body e। भगवान को देव सेवा कर सकते हो और मन के ये 3 साधन है भक्ति के लिए और माया के लिए, जैसे की यही हो हम स्तेमाल करे है के लिए बने व्यक्ति को इस का लाभ उठायेगा नही आयेगी। आज से नहीं चलता हाई कृष्णा, आपको सुनाई दे रहा है। हाई कृष्णा 2 माय के सवाल
अभी अभी ठीक है।
तो 3 यहाँ मधु जो की इतने भयंकर थे की आज मैं उनके चेहरे को देखकर घबरा गया और उसने कहा
न
उनके बेटे को पुकारा था। क निकट में थे, जैसे ही उन्होंने नारायण से का उच्चारन किया, तुरंत वहाँ प्रगट हो गए। कौन भगवान के सेना के और उनका चेहरा बहुत दिवयम है। जहाँ आज की आत्मा को ले रहे थे, क्या हो इसको उस व्यक्ति को विस्तार कर? हो ने भगवान का नाम लिया को रोक लिया। आज वो विचलित हो गई। कंफ्यूज यह पहली बार है की हमारे स्वामी ने हमें भेजा है किसी पौधे कार्य के लिए, किसी व्यक्ति को के लिए, लाने के लिए। और किसी ने रोक लिया तो राज पूछा आपके ऊपर कोई शक्ति है? yes ने पूरी कथा सुनाई, हम गई, हम गए थे, रोक दिया आज मेर को नरक मे लाने से भगवान यमराज ने आगे से ऐसे व्यक्ति को मत छूना जो जिसने मेरा नाम ले है, जो मेरे सामने झुकता नहीं है। ऐसे व्यक्ति को तो आज के द्वारा यह सूचना मिलती है। भगवान के नामों में कोई अंतर नहीं। भगवान के नाम क्या है? भगवान से हो लो, लो, लो, इनका ने इन कलियुग। भगवान आपसे होते हैं। उनके नाम के द्वारा भगवान के नाम, विषय में समय और महिमा पढ़ते हो, पढ़ते हो। अनेक लोग है, इसके द्वारा है हरिनाम है। असली किया। भगवान के दाम लौट सकते हो। शंका के। आज जो लोग पढ़ा उसमें कहते हैं बिना शंका के तुम भगवान के दाम लौटोगे। अगर तुमने हाई नाम लिया है। और बाबा जी। इस श्लोक के साथ वे कहते हैं
कि
किसी ने हाई नाम किया हो, पर उनका है मृत से में मान लो। आपका। मन भगवान की तरफ नहीं है। कहते हैं मृत के समय भगत भी हो, उसे होश नहीं होती, क्या करना
है
और टी के समय उनका मन शायद भगवान की तरफ नहीं हो। पर जब भी क्यूंकि उसने आई नाम किया है वो भगवान के धाम लौटेगा एक्सीडेंट में आ जाता है, कोमा में चला जाता है। तो कोई चिंता की बात नहीं, कई बार बक्सों का एक्सीडेंट हो जाता है और तुरंत ही मर जाते है। रशिया में कुछ साल पहले 34 समकरदिनभगजारे थे और एक्सीडेंट में 3 भर गए। कोई नहीं सोच सके और कोई चिंता नहीं क्योंकि उन्होंने नाम का उचारन किया था। तो भगवान के जो नाम हैं, उनके उजान से, आपके पाकेट से है। और हमें यह नहीं सोचना चाहिए। अब में हर नाम ले रहा हूँ, मैंने दीक्षा ले ली है तो थोड़ा अपराध भी करूंगा तो कुछ परिणाम नहीं होगा। ये है कौन? सा अपराध था नाम के बल पर पाप करना। हमें नाम के बल पर ये नहीं सोचना चाहिए। हमने नाम लिया है, काम भी कर सकते हैं, हम भी नियम तोड़ सकते हैं। भगवान के जो नाम है वो दिव्य है, रामा चिंतामनी, कृष्णा चेतना, पूर्व शुधुनीतिमुखो, क्या नाम चिंतामनी है। जो भी लेगा, जो भी सुनेगा उसका लाभ उठाएगा। इसलिए हमें हर नाम में जाना चाहिए, हर मंदिर को 12 बार नाम करना चाहिए, रोज जाते हैं हर नाम में, तो हर नाम में जाते। तो क्या आपको लाभ है? और जो सुनते हैं वो भी लाभ है। हरनाम में इतनी शक्ति है अगर आप का हो, देखो पागल केशवा हैं उनको लाभ में कई प्रापा भारत में आये थे। आपने विदेशी स्थितियों के साथ लेख रूप से आध्यात्मिक क्रांति हो गई थी। भारत में लोगों ने पहले कभी नहीं देखा था इन विदेशियो को धोती कुरते में, साड़ी में, तिल के साथ। तो 1 बाबा जी ने बड़े बड़े पंडाल किए थे। और डेली में, का का में और बॉम्बे में 30 से 40 हजार आदमी हो जा रहे थे। तो 1 फिल्म का ने देखा कृष्ण बहुत फैल रहा है, उसने फिल्म बनाएं हे राम हाय और कोई उस फिल्म में 1 गाना था, मरोद दिखा रहे थे कि जो व्यक्ति हाय राम लेते हैं, ये सब भंग लेते हैं। और भंग में नशे में आकर। तो गुन क्या था कि आराम का भू लोग सुने थे।
तो बागों को
मास ने कहा, case against them, we you go to the cold, none people, really here the holy name and velvet goa। हर स्थिति में भक्तों को कहा जाता है कि चाहिए शूल भक्तों के द्वारा। तो कुछ साल पहले अमेरिका में 1 भग को देखा सुना ही दे रहा है आवाज।
तो
मैंने उस भक्त से पूछा तो भक्त कैसे बने? उसने कहा जब मै छोटा था, न
था
मानो दम तो लोग भूल गए। हे वो आज तक
राम
नाम जो दमा दम था वो लोग, वो भी भूल गया। तो है नाम जो है आज स्थिति में नाम, यही है 1 साल भगवान क्या कहते हैं? 3 बार नाम, नाम, नाम, 3 बार एम्बरसाइजकरने के लिए दिस इज, वैरी इम्पोर्टेंट, ये जो है नाम है, कहाँ से आया है अमेरिका से किंग फ्रॉम स्पेरशल यार भगवान के द्वारा हम क्या प्रार्थना करते हैं, हम प्रार्थना करते हैं। ये है भगवान, हमें भगत दीजिये, मी तो राधा रानी जी को प्रसन्न करोगे, भगवान भी प्रसन्न होंगे। राधारानी कहती हैं ये भक्त बहुत अच्छा है। भगवान आंख बन कर के स्वीकार कर लेते हैं तो यह है आम है नेशनल प्रेयर में कहा जैसा 1 बच्चा मारके पुकारता है। प्रे, टू और फादर।
भगवान
सो माया बड़ी बलवान है गुना माई, मामा माया। भगवान कहते हैं माया है बो स्ट्रोंग है। आप कहोगे कैसे, क्या उपाय क्या है है माँ विवाह में, परपनदेमायामेरी शेयर में जो आएगा वो मेरे शहर में जो आयेगा वो माया का विरोध कर सकता है। सो होली नाम इन डिफेंस अगेंस्ट माया माया बनी स्ट्रोम बट भक्ति स्ट्रॉग माया में बहुत महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। गया लोक है। हर श्लोक का बड़ा महत्वपूर्ण संदेश है। भगवान के जो पवित्र नाम है वो बिल्कुल प्योर है। भगवान के जो नाम है वो मीठे हैं। मीठी जी तो सबको अच्छी लगती है, पर अविद्या के कारण आप उसका मीठा पन मसूरी नहीं कर सकते। holi name swit infect with diedo तो क्या है? उपाय रुपागुसवामी ने कहा भगवान के नाम चीनी जैसे मीठे हैं, पर हम आपका उसका मीट पर मजबूर नहीं कर पाते। उदाहरण जप के समय हमें नींद आ जाती है और पाद कोई सोता नहीं है। को में थोड़ा नाम कर लेते हैं और थक जाते हैं। क्या किया जाए? कोई उपाय है, कोई उपाय है। हालाकि हमारे की बीमारी है। जब भी ध्यान पर करेंगे, ये मीठा पन महसूस हो। शुरू में आप जब भक्तों को मिलते हो। वो कैसे हैं आप थोड़ा कड़वा लगता है। चीजों का गाने नहीं बोले नाम लोग शामिल हो गए। नाम जाब के लिए। चीजों के लिए समय नहीं होगा। भाई नाम करो क्या लाभ होगा? क्या कहा यह नाम के उच्चारण से हृदय में जो मैल है, वो दूर हो जाएगी। इसमें मेल है या नहीं? आप क्या सोचते हो कोई भक्त है इस सभा में, उसके हित में मैल नहीं है। बाबाजी कहते थे आपका हृदय कोने से भी ज्यादा काला है। तो नाम लेने से आपका हृदय साफ होने लगता है। आप सब का भाई होगा। नाम के उच्चारण से पहले आप जुड़े कई काबों में 4 आरम्भ किया। यह देखते हो कि हमारा हृदय है। वो चीजें जो आपको 1 समय सूरत सूरत है, तो ही नाम की महिमा अधिक है। हर साल में लाखों मांसों का वर्णन है। वे 1 हर 1 के समंदर को महा मंत्र माना जाता है। सो हरि राम की महिमा का प्रचार होना चाहिए। वासुदेव विप्रा भगवान के भक्त थे, जिन्हें कोण की बीमारी थी और उनके शरीर से बदबू आती थी। हमेशा और इतनी बदबू आती थी कि अगर कोई व्यक्ति उनके साथ था, दूर चले जाता था, चले जाता था। तो आये थे द दक्षिण भारत में। और और कुर्मा ब्राह्मण के घर में निवास किया था। पर आप बहुत चल पड़े और वेरा गया कुर्मा ब्राहमण के घर में। जब उसे पता लगा कि भगवान चल पड़े हैं, वो शोक में आ गया तो माँ बाबू अंदनी आमी हैं। पर हम भगवान उन्हें पता था वो माँ बाबू वापस लौटे। जब वो लौटे तो उन्होंने वास विपाक करने लगाया और जैसे ही गले लगाया, सारी कोर की बीमारी समाप्त हो गई वो 1 युवक बन गया और उसके मन में भाई सा पहले तो कोई मेरे नजदीक नहीं आ ा माँ बाबा की कृपा से मैं सूरत हो गया हो मैं विनम्र कैसे भाग की इच्छा क्या होती है व मेन हम्बल हुमिनिटी टेंशन हॉट एंड प्राइज भाग जो है विनबनररहना चाहता है चिंता थी लोग प्रशंसा करेंगे तो कैसे बन गया तेरे से पूछा आप की कृपा से मैं मैं तो विलम्ब कैसे रहूँ? भगवान ने कहा canhelykrisnadpis the glory if you do this i will? भगवान ने कहा तुम्हार नाम का उच्चारन करोगे गीता तुम सदा मे हर साल रहोगे मैं तुम्हारे। साथ ही राम ने ही राज ठाकुर का नाम सुना आयी राज ठाकुर वैसे ब्रहमाजी के राज ठाकुर जन्म हुआ था किस में मुसलमान खान में मुसलमान खान पर वो क्या करते थे उस समय भारत खास कर के बैंगोर मुसलमान राजा के शार में था और मुसलमान हिंदुओं को खैर कोई शहर के काजी था आजकल चीफ मिनिस्टर होता है मेहर व अधिकार से पता लगा कि मुसलमान खान में जन्म लिया और ही नाम का उच्चारण कर रहा है
रोको
यह मुसलमान खाना जन्म ने समझाया कि भगवान के नाम को हमला ने नहीं माना उसने बड़ा प्याज किया आईदाकोिजलेटकरने के लिए। 1 दिन उसने वो शेयर की सभी पेशियों को बुलाया और कहा देखो तुमने कौन है जो हाई दास को सिड्यूस कर देगा कौन है जो गे है दास को सिड्यूस करेगा हजारों लोग ते थे हदाज को मिलने और खा जी को हुए जी को कोई देखता भी नहीं था मन में 10 को इतना नाम मिल रहा है लोग करते हैं को बुलाया तुम सब में कौन है जो की री 10 को सकता है सकता है उन्हे याद जिया तुम जाओ को के साथ प्रेम करो मैं चौकीदार भेजूंगा उसे गिरफ्तार करने के लिए इन को जब कहा तुम्हे कौन आगे आयेगा सब ने कहा सब ने कहा हम नहीं कर सकते हदाज करेंगे पर 1 वश्य थी जिसने कहा मैं हादा चिंता मत करो सो अगर तुम पाओगे तुम्हें अच्छी रकम देंगे हम तो हाई दास तो कुटिया में जा कर लेते उस कुटिया में 1 कोने में शाम थाने से कुछ नहीं किया पर हाई दास हमेशा हाय दाद। हमेशा 1 साल में नहीं रहते थे तो भाई राज छोड़कर जाने वाले थे भगवान ने उन्हें दिया वो रुक गई भाई राज ने कहा मैंने आज का जॉब खत्म नहीं किया है तुम उधर बैठो और खत्म करने पर उसे करने का प्रयास करें तो आईना आईना का उपचार कौन सुन रहा था तो सुबह आ गया और आइना हाल ने कहा आज मैं नहीं कर सकता तुम्हारे कल कल भी आई और वो न हुआ है पर कल सुबह आया है नामों का उचार दिन आए दिन आई वो जॉब करने लग गए और उसने बताया किस ने उन्हें भेजा था जानकारी है जानकारी और रशिया ने भाई शरणागत हो गए ने कहा अभी है ना मैं भी करना चाहती हूँ
न
वो आई थी आईना को फसाने के लिए क्या यह है साल इसलिए ा में कहा गया है साधु संघ साधु संग को 1 पल के लिए भी साधु के संग बन जाए। आपका जीवन तो और भी निराश हो गया। बड़ा प्रयास किया समाज को ये दिखाने के लिए कहा राज धूम पन्ने पर वो फेल हो गए। तो आई नाम का उच्चारण इतनी शक्ति है कि उसके द्वारा जो है वो हो सकती है। तो जान का दिन का। राजा के पास ने कहा की ये हरा मुस्लिम धर्म का बेचती कर रहे, हम तो किसी हिंदू के घर में 1 चावल का दाना भी निकालते और ये हैदा हिंदू भगवान का नाम ले रहा है। राजा ने ने कहा आयाजको राजा के पास ले गया की राजा ने कहा आहदातुमेमुसलमान खान दान में जन्म लिया है इतना उजल था और तुम ये हिंदुओं का नाम ले रहे हो। हम तो 1 चावल का दाना दाना भी निकाले जो भगवान के नाम भगवान में अंतर न रहे हैं। भगवान है सबके लिए। खैर। राजा ने स्वीकार नहीं किया और काजी ने कहा ले जाओ इस हदाज को 22 बाजारों में उन बाजारों में पीटना तो 22 बाजारों में दाज को ले गए और जब नाम कर देगे की मार स्वीकार किया जो 20 बजाय जो लोग पीते थे उनमें घबराहट हो गए। राजा ने बोला था इसको ऐसे पीटना के तुरंत मर जाए। अक्सर जब वो बेटे से दूसरे अपराधियों को तो तीसरे बाजार तक पहुँचने तक व्यक्ति मर जाता था कभी 20 बाजार में आ गए हैं और अभी तक वो जीवित है। कोई निशानी नहीं, मानने की कोई दर्द नहीं, कोई तू जो पीट रहे थे अब राजा हमें जिंदा नहीं छोड़ेगा, राजा हमें जिंदा नहीं छोड़ेगा, वो हमें फांसी दे देगा तो हैराज नहीं है सुन लेगा आया सुन लेगाय और हा मर जाऊँ। ऐसा व्यवहार किया ने बिडिंग प्रोसेस रोक लिया, बिल्कुल स्थिर हो गया, खुशी में नाचने लगा भी मर गया राजा को। राजा ने कहा काजी से उसको अंतिम संस्कार करो हिंदू रिवाज नहीं ये जो है पापी मुस्लिम का इसको कोई संस्कार के आधार पर अंतिम समय अंतिम समय पर नहीं देना चाहिए। फेंक 2 इसे गंगा में उन्होंने गन दाने फेंक दिया। इतने समय तक ऐसा व्यवहार किया। मृत्य हो गई तो हरा नदी के दूसरी तरफ तैर कर। फिर उसने बजट शुरू कर दिया। राजा को हो सूचना मिली ये राज जो उन्होंने समझा गया है है और गुडिया के नीचे जॉब कर रहा है हो गया कहा ये महान संत है। गंगा में।
राजा
दास को पीले थे, शुरू में सोवियत यूनियन इसे आप रशिया के नाम से जानते हो। कई थे हमारे कई भक्तों को जेल में डाल दिया था और उनको कहते थे मास खाना शुरू करो, हम को छोड़ दे, बंद करो छोड़ दे और भगाने नहीं किया नहीं छोड़ा ही मर गये। नहीं छोडा तो भाई राम है प्रोटेक्टर और हमें हाई राम को जॉब कर रहे है राम को जॉब। 3 स्टेज स्टेज में हसर है। पहला है स्टेज आप जॉब कर रहे
हो
और गलत में कर रहे हो हमारे रोल हरी राम सोला मना करते थे पर शाम को शराब भी पीते
थे
करे शराब छोड़ तो पल में आप जॉब करो और अपराध भी हो जाए। जब आप भक्तों के संग में आते हो, छात्रों को पढ़ते हो तो आपको ये गाल क्या krishna suprem bukti medium shravan है खुला वादा करते हैं और जो बिक तो जॉब करते जाओ कौन सी सेज में आओगे अपराधों से बचो और सेवा का ज्यादा लाभ है तो घर में और न चेतन। बापू ने कहा क्या लेगा नाम आई नाम का प्रचार करते पापा ने सा कैसे आराम के ये हाई नाम के द्वारा इस इच्छा का ये हाई राम का प्रचार करे तो भगवान का जो नाम है भगवान से समय कहा गया है शाह युग है कितने युग है तोहार युग में अलग माध्यम है
में
लोगों के आयु दी 1 लाख साल और 80 हजार साल तक वो भगवान का चिंतन कर सकते थे। आज अगर आप ऊपर तक पहुँच जाओ से ऊपर जा सकते चिंतन करना सम्भव नहीं है वे कौन सा योग
योग
साहब क्या था माध्यम माध्यम था बड़े करने और ये जो ब्राह्मण थे ये अग्नि को उन के मानसून के 4 मन तो यह भी संभव नहीं है लोग कहेंगे मुश्किल से घर का खर्चा चलाते हैं और हम दूध दही का साधन किया था। भगवान के सेवा आपको कहें राधा
राधा
राज रादा बदल मोहन राधा, मदन मोहन का दर्शन तो आपको सोना लाना पड़ेगा, सोना लाना पड़ेगा लोग आयेंगे आग वो लाभ प्राप्त हो सकता है कि में किसके द्वारा जिस अलग बीमा का अलग इलाज है अलग आप सब का सोभाग्य है हो नाम की महिमा का यान है हमें क्या करना चाहिए भगवान मे रूचि बढ़ानी चाहिए और कोई रुचि नहीं
है
जब शुरू करोगे फिर आपके नाम कर दे जाओगे फिर आपकी रूची बढ़ेगी और यह होना चाहिए हमारा ला सब को देखना चाहिए। आगे बढ़ रहा हूँ रूचि बढ़ रही है रही है सोचते है सोना मना कर लिया बस बड़ा पूजा गाओगे तो यह अच्छा भाव है सोना माला रोज करना है तो क्या है आपको असली आनंद मिलेगा और ये जो आनंद है बरते जाते है बहुत 1 आनंद की सीमा है आप भूख लग रही है। 1 जवादिखातेलोगजवादिखाते वे कहते है बस पर ये हर नाम है इसलिए इसके द्वारा आनंद प्राप्त होता है वो बढ़ते ही जा। ता है तो आराम का उच्चारन करने के लिए क्या भाव होना चाहिए। क्या भाव, कौन बताएगा। 1 समय प्रापा जी के गुरु भाई आये। उन्होंने पूछा अबे बाबू तुम कम
की
दुकान थी, तुम दवाइयां बनाते हो, तुम ये बता सकते हो। हरियाणा में रूची कैसे बढ़े मैंने मा से कहा मुझे फॉर्मुला पता है पर दवाई तैयार नहीं है। जानता हूँ कि ये दवाई कैसे बढ़ने चाहिए, पर दवाई तैयार नहीं प्लीज। बताइए क्या है इतना महत्व है कहते है ये श्लोक को अपने गले में लगा के रखो। हमेशा याद रखो कि आदि अगर आप चाहते हो की आपकी वाणी से भगवान के नामों का उचारण हो, हर नाम का ा अपने आप को घास से भी ज्यादा पतित समझो। घास के सिर पर सब चलते हैं, घास कहता है, क्यों मेरे सिर पर पाँव रखे हो, सबकी सेवा करता है, सर्दियों में है लोग लकड़ी ले जाते, आग पैदा कर ले। धूप हो या बारिश जो
है,
जो
सेल
पेड़ जो है। सर्दी में लोग काटते हैं और गर्मी में लोग पेज की छवी लेते हैं धूप से बचने के लिए। तो सैंजी आदर। 2 आदर की उम्मीद रखे इस विनम्र भाव से करोगे तो हम सदा आपकी निकलेगा सो। namrta very important sport live on crisis tension। मत सोचो की यह मुझे आदर नहीं देता, सो मैं भी उसको आदर नहीं दूंगा, बहुत सा सोचते हैं नेलेपेदेलासमझेनेले पिडेला तुम ये करोगे तो मैं ये करूँगा, इंग्लिश कहते हैं टेड फॉर टैट, तुम ऐसे करोगे तो मैं ऐसे करूंगा सबको आदर। 2 उम्मीद रखे बिना मैंने देखा था। 1 प्रोग्राम में की 1 व्यक्ति ने प्रबल का अपमान किया था, प्रपलनेकिशस्कूल दिया, हिंदू भाई था कैनाडा की कथा जिसने कहा आप क्यों आते हो और
पापा
ने उसे आशीर्वाद दिया। 2 महीने बाद पर छोड दे तो सांस द्वारा अनेक उदाहरण हैं। तो सब की पूरी स्रदाहइनाममें आप जानते हो कि हरी का है नाम सबसे सरल माध्यम है प्राप्ति के लिए। और हर नाम गुचालनमेंकुई कठिनाई भी नहीं है, हमने कभी नहीं सुना। चीन में भी हरी नाम गुचालनठहैतोहमे नाम की महिमा का विचार करना चाहे। we should advanta is so easy। आप किसी बगत कर सकते हैं, पूजा के कमरे में हर जगह हो सकता है और शक्ति है कोई भी उस नाम का उचार करे मिलेगा किसलिए
की
राधा रानी का कितना भगवान भी पाते थे, कितना कितनी सेवा राधा कृष्ण बन गए ृजी राधा कृष्णा ने ही राधा कृष्ण पर हुए है। सर में थे तो दूर दूर से लोग आते थे, उनने मिलने वापस जाते थे की उनको लेकर भी आम दे, ऐसी बौधिक बीमारी है, कोबिड कोबिड था, सर कोबिड 1 व्यक्ति से शुरू हुआ, दूसरे गो गया, तीसरे हो गया। तो ये जो है नाम है रियल, वैसिनएशनहमसबरूगी हैं, तुझे है नाम का प्रचार और भारत में पूरी प्रजा है राम के 4 देखोगे दक्षिण भारत नजर आएगा साथ ने तो हमारा सोभाग्य है हमें ये सुभासभा, हमें क्या करना। 4 और प्रचार चरित्र होना चाहिए और हमें प्रचार करना चाहिए। h so i am glory krishna and page the glory, the krishna, i can a question, this is a very nesting log pece sुnाytamaaaकoि। हर महाराजजी प्रा सुन सुन सकते थे, कल भी आपने अच्छा प्रवचन दिया, आज का भी अच्छा था, बहुत बहुत धन्यवाद महाराज जी और मेरा ये प्रश्न है। महाराजजी आपने बताया कि ध्यान पूर्वक जप करना चाहिए। ध्यान पूर्वक करने की कोई विधि है की बैठके के कैसे मतलब उसका करते हैं। जप जप करो केवल जप करो। यही नहीं की 1 घात में माला है, दूसरे हार से आप मोटर से लगा रहे हो यानी की 1 द में माला है और दूसरे हाज है कुछ और कार्य कर, आप मन भगत पर रखता है, उसको परख ले लो। ये जो सरल है या जब करो तो बंद करो, घर में करो पर 1 ही काम जब आप पर जा।
हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, महाराज जी, मेरा प्रश्न, ये है महाराज। जैसे आपने कथा में हरिदास ठाकुर जी के बारे में बताया कि उनको 22 बाजार में इतना मारा गया, प्रताड़ना दिया गया, फिर भी उन्होंने उनके ऊपर दया किया। और ये हमारे आचार्यों में हम देखते हैं कि वो पूरे संसार के ऊपर दया कर रहे हैं। ये हमारे हृदय में यह भाव कैसे आ सकता है। क्योंकि हमें अगर कोई छोटा सा भी कुछ बोल देता है तो हमको बड़ा बुरा लग जाता है। हमारा नाम में जो मन लगना, लगता नहीं, सेवा में मन नहीं लगता। तो ये हम अपने हृदय में, अपने जीवन में कैसे उसे हम धारण कर सकते हैं।
हम चाहिए, हमें प्रयास करते रहना चाहिए। महान संतों की महिमा पढते हैं तो हमें भी प्रयास करना चाहिए। उस के भाव को अनुकूल करने के लिए। nडsटanमहाराजजी
महाराज जी, आपने जैसे बताया कि जैसे जैसे हम नाम लेते रहेंगे वैसे रुचि बढ़ती जाती है। परन्तु हम देख रहे हैं की 17, 18 साल से हमारी रूचि बढ़ नही रही है, घट रही है। 16 माला बड़ी मुश्किल से कर पाते हैं, 16 माला करते हैं, यह माला रख देते है। अन्दर तो उससे कैसे रूचि बढ़ेगी। जबकि माया के प्रति रूचि बढ़ती जा रही है। दिन पर दिन कैसे उम्र बढ़ रही
है, रूचि बढ़ है। इसे आज भी सोला माला कर रहे हो। अगर रूची नहीं बढ़ी होती। आपको हमारा जाब छोड़ दे, ते आदमी नहीं छोड़ा है। यहाँ पे थोड़ी रूची आ गयी है। पर हमें रूची को बढ़ाना है, नही होती है। आप को
12 बार प्रणाम गुरुदेव बारम बार धन्यवाद है। इस धरा पर आप उत्तरित हुए, ये हमारा सौभाग्य है। आपके चरणों में कोटी कोटी बंधन। मेरा कोश्चन है कि हम लोग जब चैंटिंग कर रहे हैं और कोई भक्त का फोन आ जाए तो हम चैंटिंग भूल के फोन पहले ले लेते हैं। बाद में लगता है कि अरे ये तो अपराध कर दिया, बट ये बार बार अपराध करते हैं तो यह ठीक है या गलत है कि हम किसी भक्त का चैंटिंग के टाइम में फोन लेते हैं। अरे कृष्ण
को इमपोर्टंट पॉइंट पोर्टेंट पॉइंट 8 से 10 में फोन मत करना इतना आसान नहीं है। पर प्रयास करो, प्रयास करोगे।
हरे कृष्ण, गुरु महाराज जी, प्लीज, एक्सेप्ट मई। हमबलोबिसनेसेस गुरु महाराज महाराज जी। जैसे भागवत गीता में आता है कि जब व्यक्ति शरीर का त्याग करता है तो उसक का हृदय में जो भी भाव रहता है उसके अनुसार उसको अगले शरीर की प्राप्ति होती है। यम यम वापी स्मरण भाव। तो महाराज जी। यहाँ पर कई भक्तों का हमसे प्रश्न होता है तो हम उसका अंसर ठीक से नहीं कर पाते। इसलिए आपसे जानना चाह रहे हैं। तो भक्तों का प्रश्न होता है कि भाव तो ठीक है, जो भाव है वो भाव हमें मिलेगा। लेकिन किसी की यदि अकाल मृत्यु हो गई है तो अकाल मृत्यु के समय तो मन में किसी के क्या भाव हैं। किसी का कोई कंट्रोल नहीं है। तो ऐसे में उनका डेस्टिनेशन क्या होगा?
मुझे क्या
है?
और पापा आज श्लोक में यह कहा गया है। मरते समय हमारा बैलेंस नहीं रहता, समय कोमा में हो सकते हैं। क्योंकि अगर उस व्यक्ति ने नाम किया है। पहले पूरी सुरक्षा देगा। कई बार एक्सीडेंट में मारे जाते हैं तो एक्सीडेंट हो आए हैं सड़क पर उसे आपका एकदम हो जाता है। आपको 1 मिनट जिंदा हो। अगले मिनट में थी नथिंग। दू नाम किया है। आपने पा जी क्या कहते हैं के सुना 11 मिनट हमने कसम आज का आपका पर अच्छा है। भाग जो है, किसी स्थिति में भी उसकी मति हो। god पढ़ो यह अनुवाद पड़ोस
अनुवाद अजामिल ने मृत्यु के समय कष्ट भोगते हुए भगवान के पवित्र नाम का उच्चारण किया। और यद्यपि उसका ये उच्चारण उसके पुत्र की ओर लक्षित था, फिर भी वो भगवत नाम वापस गया। इसलिए यदि कोई श्रद्धापूर्वक तथा निर अपराध भाव से भगवान नाम का उच्चारण करता है, तो भगवान के पास लौटेगा। इसमें संदेह कहाँ है?
question
हरी कृष्णा महराज धनराज प्रणाम महराज 2 प्रश्न थे। पहला प्रश्न है कि प्रचार का सही में अर्थ क्या है? क्या पुस्तक वितरण करना प्रचार है? कि भक्तों को मंदिर में जोड़ना प्रचार है? कि सेवा करना प्रचार है? क्या आचरण करके दूसरे को सिखाना? यह प्रचार है। और दूसरा क्वेश्शन ये है कि आपको सबसे ज्यादा भक्तों से खुशी कब होती है?
सहाब का प्रशन है, प्रचार का उद्देश्य क्या है? प्रचार का उद्देश्य ये है, दुसरे व्यक्ति भी सुखी बन रहे है। ऐसे में हम सब दुखी में 1 औरत सेवा करती थी। उनकी सेवा से बड़े खुश थे। पर तुम्हारा नाम क्या है? उसने कहा, दुखी। दासी ने कहा, आज से तुम्हारा नाम होगा। सूखी। दासी उद्देश्य है। सब को सुखी बना। इसके लिए हम प्रचार करते हैं। ग्रंथों का वेतन। इसलिए दिया जाता है भगवान की वानी, भगवान की वाणी को जो पढ़ेगा, उसमें आध्यामिक जागती। उत्पन होती है। प्रश्न
आप भक्तों से,
भक्तों से होता हूँ। हूँ की नाम कर रहे हैं, गांधी को पढ़ रहे हैं, विलम्ब बन रहे हैं। पर शहर का भाव है। जब हम खुश हो, से है। यह नहीं कि हमें इतना दिन दोगे खुश नही है, लेकिन हम बा की सेवा में जाती है। second
marg marg my question is doing the cors of preacिंग, we come across, many new devoties maharaj, yes marg come across any new new devoties so, there getting attracted to the process of chanting, how do we attract people to the प्रोसेस ऑफ़ चैंटिंग महाराज,
well being egempryandexplain the filospiexplainar fulospeaioja। बिशन हमने भगतों थोड़ा पेशन सेंशल होना पड़ता है। यानी कि आप सोचोगे हर व्यक्ति साइज होगा। कई आएंगे शहर में आएंगे और दुर्भागे दुर्भागे हमारा कर्तव्य है। को सुराग
हरे कृष्णा गुरु महाराज, हम लोग जो पुस्तक वितरण करते हैं, भगवत गीता का वितरण करते हैं, तो कई लोगों को पुस्तक देते हैं, लेकिन बाद में वो पढ़ रहे हैं या नहीं पढ़ रहे हैं, इसका हमारे पास कुछ रिकॉर्ड नहीं होता है। कुछ लोग पूछते। हैं कि आप लोग बांध देते हो, लेकिन वो पढ़ते हैं कि नहीं, इसका आपका आप क्या करते हो।
इसको जब आप विनती करना लो और में इतनी शक्ति है। अगर आप इन दोगे आपको लाभ मिलेगा
र
पढ लो जीवन कई लोग पढ़ते भी हैं। ये बात सच है। कई लोग गंधों को लेकर घर को है भगवन से, भगवान से कई लोग लेते हैं। हमें ड्वोइंगरूमेंरखदेते हैं तो ठीक है और कुछ पता नहीं कब का ऑस्ट्रेलिया में 1 भाग से जो गीता की 10 साल के ले खोला भी नहीं। गीता को 1 डोर में थी विचलित हो गए जुग दुखी से दुखी में उन्होंने गीता आपके घर में देखा वह भगवान गीता है। गीता पढ़ना शुरू किया और वे के माध्यम से भाग बन गए।
हरिकिशन महाराज माई क्वेश्चन वाज की अभी हमारे टेम्पल्स पर बाहर के देश में बहुत सारे अटैक्स हो रहे है और वो टीस टैक्स हो रहे है। हमें कभी दया दिखानी चाहिए और कभी फाइट पैक करना चाहिए।
कोई आपको मारे जैसे को को पुलि शूट भी कर सकती है। वैश्नवविवार में हमें ज्यादा नहीं करना वैशन के सम्बन्ध में hanging you should be state for a humble
रे कृष्णा प्रबु महाराज मैं अभी बिजनेस कर रहा हूँ और मेरा इंट्रेस्ट है ज्ञान प्राप्त करके ज्ञान देना भी मुझे अच्छा लगता है तो मैं अपने जीवन में सबसे अच्छी सेवा कृष्ण लाल कृष्ण की किस प्रकार कर सकता हूँ। मेरी इच्छा है उनको सबसे ज्यादा परेशान करने की। तो ऐसे क्या कार्य हो? लूं मैं जीवन में। हा हा महाराज। मैं बिजनेस कर रहा हूं अभी और मुझे ज्ञान प्राप्त करके ज्ञान देना भी अच्छा लगता है लोगो को तो मैं अपने जीवन में पानी पी ले जाओ। मैं अपने जीवन में ऐसा कौन सा कार्य करूं जिसमें भगवान कृष्ण की सबसे अच्छी सेवा कर पाऊँ। मैं उनको प्रसन्न करने के लिए
बड़ी अच्छी भावना है। भगवान की खुशी में हमारी खुशी ने, हमारी खुशी में भगवान की खुशी, हम कृष्णा को कैसे राधारानी का भाव है। हाऊ कैन मेक कृष्णा मोर हैप्पी। तो आप जॉब करना शुरू करो। जॉब करते हो करते हो भगवान आप बड़े प्रसन्न होते हैं, भगवान देखते हैं। ये व्यक्ति मेरे आदेश का पालन कर रहा है। भगवान का क्या आदेश
माँ
सर। अब धर्मों को छोड़ मैं तुमे रक्षा करूँगा बिना शंका के भगवान को प्रेस करना है। चेन करो, चैंडी करते भगवान से बड़े प्रसन्न है। गीता पढ़ते हो हे भगवान प्रसन्न है, गीता पढ़ते है। ये व्यक्ति मेरे आदेश को पढ़ रहा है। यह व्यक्ति मुझे जानने का प्रयास कर रहे है। भगवान खुश होते है में भगवान खुश होते है। इस व्यक्ति ने पर धन कमाया है और चाहता है भगवान की 4 हो मंदिर का मतलब क्या भगवान का धनी बनते हो। सबसे पहले क्या सोचते हो मकान बनाओ भगवान की सेवा करे। भगवान खुश होते यहाँ के लोग हजारों की संख्या में आयेंगे दर्शन जैसे दाद का मंदिर निर्माण हो जायेंगे। कम से कम 30 40 हजार लोग रो जायेंगे। लोग मंदर में आयेंगे। भगवान लोग देखेंगे भगवान का सुन्दर इतना सुन्दर मंदर मार्बल में बना भगवान खुश हे और जब आप जॉब करना बंद करो तो भगवान भी दुखी हो जाते हैं, माया में गिरो भगवान दुखी हो जाते हैं, आपने बच्चों से संतोष रहता है। वो देखते है की बच्चे उनके आदेश पर चल रहे है।
हरे कृष्ण गुरु महाराज महाराज जी जब महा मंत्र का जाप करते हैं तो जॉब के टाइम पर कुछ लोगों को देखा जाता है चाहे खुद भी चैंटिंग करते टाइम पे जिससे हर 1 कृष्ण है तो वहाँ पर हर 1 कृष्णा बोल देते हैं, राम है तो रामा बोल देते है हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, हरे हरे हरे राम, हरे राम और राम कृष्णा और रामा हो जाता है तो उसको कैसा अपराध है की कैसा है महामंत्र का जब चैटिंग करते हैं तो कृष्ण के जगह पर कृष्णा बोल देते हैं और राम के जगह पर रामा,
हरे कृष्ण, हरे अरे, रामा, आरे, रामा, रामा, रामा हरे में जाकर यह देखना चाहे कि हम ठीक से अनाउंस कर रहे हैं
हरिकष्णा महाराज जी प्रश्न यह है कि जैसे हम श्रवण करते हैं, भागवत पढ़ते हैं, भगवत गीता पढ़ते हैं, कीर्तन में भी भाग लेते हैं। बट कभी हर भक्त का रुचि किसी 1 विशेष चीज में ज्यादा होता है, किसी को सुनने में ज्यादा अच्छा लगता है तो किसी को पढने में ज्यादा अच्छा लगता है, किसी को कीर्तन में भाग लेना ज्यादा अच्छा लगता है। तो इसमें हम किस तरीके से तय करे कि हम सही कर रहे हैं। अगर हम ज्यादा सुन रहे हैं, ग्रंथ कम पढ़ रहे हैं या कीर्तन में ज्यादा भाग ले रहे हैं, श्रवण और ग्रंथ कम पढ रहे हैं। तो इसमें हम कैसे निर्णय ले की हम कैसे सही तरीके से यह
भर
की इच्छा होती है। ये वो हर क्षेत्र में ठीक हो। न करना है, सेलेक्शन भी देना है, पढना भी है अगर आपका कार्य है भगवान को पसन्द करना की सेवा में आप जुड़ सकते हो और मान लो आप पढ़ने में रूचि है, सेवा
है
एडवांस करोगे जो भी सेवा भगवान दे हम करने को तैयार है, भेजा जाए किसी को कश्मीर में जाना पड़ता है। हमें भगवान की सेना के सोल्जर होते हुए चाहिए अरे कृष्णा, राज, प्रणाम, महाराज भगवान और भगवान का नाम म कोई
अंतर नहीं है
तो हम लोग जब मंदिर जाते है तो चप्पल खोल के जाता है लेकिन हम लोग भगवान का नाम लेते हैं तो चप्पल का 1 नाम अपराध नहीं है क्या
महाराज क्वेस्टन की हम जब मंदिर जाते हैं भगवान और भगवान के नाम में जैसे अंतर नहीं है तो मंदिर जब जाते हैं, चप्पल खोल के जाते हैं और जब नाम जब्त कर रहे है कभी कभी चप्पल पहन के कर रहे हैं तो क्या यह अपराध है?
नहीं है
कोई नियम नहीं है।
हरेक रशना, हरे रशना गुरु महाराज मेरा प्रश्न है, हरे रशना गुरु महाराज मेरा प्रश्न है की प्रकृति के तूर्णतीन गुण का उपलब्ध जैसे की हमारे जीवन में सुबह का समय सात्विक होता है और दोपहर का समय राजसिक होता है और रात्रि का समय तामसिक होता है तो हम सुबह हरिणाम करते हैं और दोपहर में थोड़ा हमें हरिणाम करने में कम रुचि आती है और रात्रि के समय जब हम हरिणाम करते हैं तो हमें नींद आती है और तरह तरह के गन्दे विचार आते है तो रात्रि का शेड कैसा हुआ हमारा कि रात्रि को कैसे अपने आप को, उसके अंतर्गत अच्छे से रखें, अपने मन को काबू करे और फिर सोने चले जाए। रात्री के समय
है कृष्णा सुबह सुबह का समय के लिए सुबह के समय ज्यादा अच्छा रहता है रात को भी कर सकते हो पर सुबह के समय ज्यादा सरल है इसलिए कई पक् के नियम बनाते हैं खाएंगे जॉब कर सकते हो। हरी कृष्ण गुरु महराज धन्यवाद प्रणाम महाराज,
मेरा प्रश्न है कि रे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हम सब बहुत भाग्यशाली है और बहुत भगवान की कृपा है हमारे बीच गुरु महाराज ऐसे आकर खारघर प्रोजेक्ट को ब्लिस करते रहते हैं आशीर्वाद देते रहते है तो 1 बार महाराज का धन्यवाद देते हुए और 12 बार धन्यवाद देते हुए हरे कृष्ण महामंत्र का उद्घोष करेंगे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे परम बुज गोपाल कृष्ण राज के
सारी
हरे कृष्ण।
तो जैसा कि आप जानते हैं आने वाली 29 तारीख को हम भाद्र पुर्णिमा मना रहे हैं तो अभी 6 दिन ही बचा हुआ है तो ये 6 दिन में विशेष डिस्काउंट है श्रीमद भागवतम के सभी लैंग्वेजेज में आज का दिन बहुत अच्छा है पर ये गुरु महाराज यहाँ पर उपस्थित है आप किसी को भी अगर भागोतम लेना है तो ये एकदम सही टाइम है क्योंकि गुरु भी उपस्थित है, भागवत उपस्थित है तो बैक टू गॉडहेड निश्चित है तो इसीलिए अगर आप वो लाभ लेना चाहते हैं तो प्लीज आज ही अपना सेट ले लीजिये या आपको किसी को दान भी देना है तो उनका नाम लिख दिये 29 तारीख को हम उनको बुला कर के यहाँ पर आपके हाथ के द्वारा या प्रभुजी के हाथ के द्वारा हम दिलवा देंगे उनको तो प्लीज सामने जिनको भागवतम लेना है तो आप सामने आई काउंटर प्या करके आप अपना पेमेंट करके ले सकते हैं, फॉर्म भी भर सकते हैं।
कृष्ण इस विषय में मैं कहना चाहता हूं कि प्राोपालकीइच्छा थी, उन्होंने पद से किया। हर घर में भारत के का सेट होना चाहिए और शिवम भागवद का हर। पिछले कई सालों से इसका ने निर्णय किया है। हमें भागवत का प्रचार बढ़ाना चाहिए। तो आपको जानकर खुशी होगी कि पिछले साल सारे विश्व में फोर्टी फाइव थाउजंड। भगवान से ब जब मै जान शुरू हुआ तो 5000 आम कर रहे थे। पिछले साल फोर्टी फाइव थाउसन, पर पहुँच गये। वह अगले साल का टारगेट है 1 लाख। तो ये भगवदम में क्या है में है सबसे उत्तम ज्ञान और भगवा में इतनी शक्ति है कि अगर 1 श्लोक भी पढ़ लोगे जीवन सुधर सकता है आप में से कितने भक्तों के पास भाग है लगभग सब के पास, पर आप क्या कर सकते हो। आपने अगर किसी को प्रेजेंट भेज देना है जो भगवदम का सेल दे सकते है बेशक वो नहीं पड़े पर भगवदम उसके घर में होगा उसके द्वारा ही शुभ वातावरण हो जाएगा। और भारत में अनेक लाइब्रेरीज हैं पर लाइबरेरी वालों के पास पैसा नहीं रहता लाइब्रेरीज में आप दोने कर सकते हो। और रिश्तेदार को हमारे कई भक्तों ने कहा है हम रिश्तेदारों को लिया और उसमें उनकी कोई रूचि नहीं थी। मरने के बाद भावना प्रकट हुई भक् तो जो व्यक्ति भगवान भगवधमसेठकोपढता है और वित्र करता है से भगवान की अधिक कृपा प्राप्त होती है उसी शुरू से 1 ही संदेश है प्योर डिवोशन से कर्म करने या करना भक्ति योग जैसे आपने हाथ उठाया सर के बाद सर के बाद भगोदमसेटहै उसे पढ़ना भी शुरू करो पर आप स्पोंसर सकते हो दूसरों को बांटने के लिए गोराया
तो हमारे जे वैस्नकसेप्रूव 2 भाग कतम सेट डिस्ट्रिब्यूट करने जा रहे हैं हिंदी और इंग्लिश लैंग्वेज में। तो प्रभु जी का निर्णय है कि शुभारंभ वही कर रहे हैं तो 2 सेट प्रभु जी ले रहे हैं। गुरु महाराज के हाथ से लेना चाहते हैं प्रभु जी। तो प्लीज आप उनको उत्साह बढाते हुए थोड़ा कीर्तन कर सकते है। हम लोग हरे कृष्णा, हरे कृष्णा,
रामा
सुरेश, हरी प्रभु 1 ओडिया भाव तम से डोनेट करना चाहते हैं किसी को भात्रपरकदिन।
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