The last pastime of Srila Prabhupada | 16 Apr 2023 | New Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

The video records a devotional gathering in New Delhi on 16 April 2023, led by Srila Gopal Krishna Goswami. The speaker recounts Srila Prabhupada’s life, missionary work, and final days, emphasizing his dedication to Krishna‑bhakti and his role as a spiritual exemplar. The discourse then moves to a live congregation where participants chant the Hare Krishna mantra, express gratitude to the guru, and receive announcements about upcoming programs. Attendees are encouraged to join various activities—daily worship, prasadam distribution, Ekadashi fasting, and a special afternoon lecture by His Grace Govinda Krishna Prabhu. Specific instructions are given for first‑time visitors to raise their hands, for crowd safety (maintaining distance, allowing the guru’s procession to pass), and for participation in the inauguration of a Narasimha‑Devi idol and a Prāṇa‑Pratiṣṭhā ceremony. The speaker repeatedly urges devotees to deepen their bhakti through japa, attentive listening, and adherence to the guru‑paramparā, promising spiritual benefits and communal harmony.
Chapters
ओ में भागते, वासवा, भगत, हाई कृष्णा, आप सबका हार्दिक स्वागत के दिन पढते हैं। पढ़ते हैं
कृपया पंखा बंद करे जी, प्लीस आवाज आ रही है। बहुत ज्यादा माताओं की साइड में
हम क्या करेंगे पढेंगे फिर उस विषय पर बोलेंगे है में थोड़ी चर्चा करें
भाग
2, प्रकरण 55 अध्याय का शीष का अंतिम पाठ। कहा जाता है कि 5000 वर्ष पूर्व कृष्ण की शरण में जाना जितना सुगम था। भगवान चैतन्य ने 5 सौ वर्ष पूर्व उसे और भी अधिक सुगम बना दिया। और अब बीसवीं शताब्दी में श्रील प्रभुपाद ने कृष्ण भक्ति को समग्र विश्व के लिए संभव बना दिया है।
मैं यह बता यहाँ से।
यहाँ।
ऐसी
बाद में सबके पास प्रोपाजीरताकी कॉपी है कितना ने पढ़ा है
शील प्रवुपातके कार्यकलापों की। 1 सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे मानवीय परिस्थितियों से सम्बन्ध बनाए रखकर भी उससे सर्वथा पृथक और परे रहते थे। शुद्ध भक्त होने के कारण कर्म का नियम उन पर लागू नहीं होता था, जिसके अनुसार पाप तथा पुण्य का फल मिलता है। वे कर्म के बल से पैदा नहीं हुए थे, न कर्म के बल बल से उनकी मृत्यु होनी थी। जैसा कि श्लरूपगोस्वामी ने कहा है, जिसके तन मन और वचन भगवान की सेवा में लगे होते हैं। इस संसार में रहते हुए भी वे मुक्तात्मा हैं। लोग प्रायः इस भौतिक लोक में शुद्ध भक्त की गतिविधियों का गलत अर्थ लगाते हैं। जिस प्रकार चंद्रमा के ऊपर से बादलों को गुजरते देख कर लोग समझते हैं कि चंद्रमा चल रहा है, इसलिए शास्त्र हमें आगाह करते हैं कि गुरु को कर्माधीन। सामान्य व्यक्ति न समझें। किन्तु शीला प्रभुपाद ने इस जगत से परे रहकर भक्त जीवों को दिखाया कि किस प्रकार कृष्ण का निरंतर चिंतन और सेवा करते हुए वे भी मुक्ति के स्तर पर पहुंच सकते हैं और मृत्यु के समय कृष्ण के परम दिव्य धाम को लौट सकते हैं। प्रभु पात की शिक्षाएं सदैव, व्यावहारिक और सर्वजन सार्वजनीन होती थी। उदाहरण, उनकी पुस्तकें कोरे सिद्धांत न थी। वरण, व्यवहारिक और अनुभूत ज्ञान से पूर्ण थी और प्रभुपातजो उद्देश देते थे। सौरी उसे जीवन में उतारते थे। उनका सारा जीवन आदर्श था। वे ग्रस्त जीवन में थे। तब भी वे बैक टू गौर पत्रिका निकाल कर जोरदार प्रचार करते थे। उन्होंने अकिंचन और धूमिल अवस्था में रह कर 1 आध्यात्मिक आंदोलन का सूत्रपात करने के लिए संघर्ष किया था और कृष्ण और गुरु महाराज की कृपा से वे सफल रहे। वे अपने मानव तुल्य प्रवास प्रयासों द्वारा सदैव जीवन की कठोरताओं को सहन करने और आपदाओं का सामना करने की तत्परता दिखाते रहे। उन्होंने आध्यात्मिक जीवन का सबके लिए अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किया। वृद्धावस्था में वे अकेले विदेश गए और वहां न्यू यॉर्क नगर के 1 पार्क में हरे कृष्ण कीर्तन करके अमेरिकी युवकों तथा युवतियों को आकृष्ट किया। अतः प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि उनके उदाहरण को स्वीकार करके कृष्ण की सेवा करे। भले ही उसके मार्ग में तात्कालिक बाधाएं आए श्रील प्रभु पात को अवरोधों का सामना करना पड़ा। फिर भी अपनी मुक्त, इच्छा और कृष्ण की सहायता से वे उन सबको पार करते रहे। यह उनका विस्मयकारी उदाहरण था। श्रील प्रभुपाद की मेगा
हम श्री गुरु
पद, श्री
सरवत सुहधशीराधाकणपदा जगह जगह हो पैसा
है
जवान wncarcataeba हे सारे है
तो
इसमें पापा जी के जीवन के विषय में जीवन समाप्त हो रहा है पर रहे हो ना कि का सामना करना पड़ा पर के मन में 1 ही भाव था जो आदेश उनके गुरु माहा ने दिया है उसको पूरा किया जाए। 1922 में पापाजी ने ऑफर से कहा था यहां 1 बड़ा प्रसि संत है चलो उसे मिलने के लिए ने कहा कि मैं तो सेंस को मिल चूका हूँ, मैं किसी से भी नहीं बकायदा संतो की सेवा करते थे। सो man sपेशaलदूसेसंधो जैसा वो पहले मुनाफा में है, समझ गए की महा प्रभु की भविष्य वाणी को पूरा करेगा। माँ प्रभु की विश्वनी क्या थी खोने खोने में क्या क्या होगा प्रचार होगा शुपराबाजीने मैं गंभीरता से इस देश का लगभग 40 साल लगे इस प्रयास को सफल बनाने में। भाजी को 1922 में और आदेश दिया था पर हो पापा जी का जीवन है लगभग से मांक्स हो रहा है और प्रभावी क्यों भगवान के शुल्क से, तो उनको सुविधा थी, वो चुन सकते थे अपने विषय का समय in me to ho जो प्रभाजी ने प्रभा जी न्यू यॉर्क है और कितने रुपए थे उनके पास तो वो न्यूयॉर्क है 40 और 40 रुपए के साथ 4, या तो प्रभाजी ने 1 केंद्र खोला का न्यू यॉर्क में से से बढ़ रही है और पहले प्रापरजीनेवदेशो में स्थापना की हिंदुस्तान में आय यह पढरेहो की प्रॉपर जी का जीवन है वो समाप्त हो रहा है आप लास अध्याय है जिसमें आप को प्रॉपर जी पर किया था और बाबा जी का हुआ कमजोर हो गया था। पापा जी शिषय थे उनकी इच्छा क्या थी। और पापा जी ने कहा क्रृष्ण कंट्रोलर अगर तुम चाहो तो भगवान तो प्राजी के जीवन में हम क्या देखते हैं। पूरा संघर्ष था मुझे घबराएंगे तो कठिन या यहां कहा जा रहा है स्वामी क्या कहा मन बुजीइनदियोंसे भगवान की सेवा में लगाना सफलता चाहते हो के मार्ग में तो क्या आवश्यक है। हा
मन
बुल्दी के उपयोग से गीत भगवान बाबा ो मन के द्वारा क्या करना, क्या करना चाहिए? भगवान बुध योग करना चाहिए। भगवान से फिर में तो पापा जी ने उदहारण से एग्जेमपलीजिवोरी आंचल से ये दिखाया कि भर का किस प्रकार का। इसलिए लोग जुड़े सो रहे है। बाल के जो शिष्य है वो प्रार्थना कर रहे थे कि भगवान पबूजी की आयु बढ़ा दे। प्रभा जी अपना पूरा कार्य जोसा समाप्त नहीं किया। प्रभाजी के डेजइजियहाप स्वास बिलकुल कमजोर था वो इंग्लैंड इंग्लैंड में हमेशा हर समय का उपयोग करना चाहिए में in so you ve हर रो यूषा
कहा जाता है कि 5000 वर्ष पूर्व कृष्ण के चरण में जाना जितना सुगम था। भगवान चैतन्य ने 500 वर्ष पूर्व उसे और भी अधिक सुगम बना दिया। और अब बीसवी शताब्दी में शील प्रभुपाद ने कृष्ण भक्ति को समग्र विश्व के लिए संभव बना दिया है। श्रील प्रभुपाद जानते थे कि अपने उपदेश तथा उदाहरण के अंग स्वरूप उन्होंने लोगों को दिखाना होगा कि कैसे मरना चाहिए। उन्हें लोगों को दिखाना होगा कि कैसे मरना चाहिए। वे कई बार मृत्यु से बच चुके थे, कृष्ण की कृपा से, भक्तों की प्रार्थना से, अथवा अपने आंदोलन को फैलाने की अपनी शुद्ध और प्रबल इच्छा से। किन्तु 1977 ईसवी में उन्हें कृष्ण से जो संकेत मिले, उसे शिला प्रभुपाद। इस भौतिक जगत में अंतिम और निश्चित रूप में अपने मिशन का समापन करने में लग गए। और उनके अंतिम कर्तव्यों में 1 यह था कि वे पूरा निर्देश दे कि मरना कैसे चाहिए। वे पूर्ण रूप में दिखा रहे थे कि उसे कैसे करे, जिसे हर व्यक्ति को करना है, किन्तु जिसे सफलता पूर्वक करना सबसे कठिन है। अर्थात मरना किन्तु 1 प्रेमपूर्ण संघर्ष चल रहा था। प्रभुपाद को अपने शिष्य प्रिय थे। वे यह भी जानते थे कि शिष्य अभी पूर्णता पर नहीं हो पाए थे। उनके आंदोलन में महान आंतरिक शक्ति थी और संसार में उसका अपना ऊंचा स्थान था। तब भी उनके अनेक शत्रु थे। वे अपने शिष्यों, अपने आंदोलन, सभी जीवों, यहां तक कि पशुओं की भी रक्षा करने की सदैव उद्यत थे करने को सदैव उद्यत थे। अतः जब उनके परम, घनिष्ठ तथा श्रद्धालु शिष्यों ने कहा कि वे उनके बिना नहीं रह सकते, तो वे मरना कैसे चाहिए। इसे दिखाने के बजाय, वे उन सबों के साथ रहकर उपदेश देने को सहमत हो गए किन्तु वे उनके किस समय जाने के इच्छुक होंगे। वे कब कहेंगे कि माया के संसार और कृष्ण के क्षत्रुओं का सफाया हो गया है किस समय उनके शिष्य पूर्णतया प्रौढ़ हो जाएंगे। जीवित रहने के अपने निर्णय का अनुगमन करते हुए, शीला प्रभुपाद ने अपने आप को अपने शिष्यों पर छोड़ दिया।
to be i⁇mgencomतयागने की तैयारी भागने की तैयारी कर रहे हैं kisacosabenercening the art of living in the drain यू नो हो जो रिपेर फॉर देर गीता बहन कहते हैं, अति नारायण समिति या आपका मन होगा में उस प्रकार से आपको प्राप्त होगा। अगर आपका मन है। सदा भगवान के उदेश्य लीलाओं पर को जन्म प्राप्त होगा। भर के खानदान में, जहाँ आपका मन है, स प्रकार का प्राप्त होगा। और इसलिए हमें क्या प्रयास करना चाहिए। मन को हम में रखे व के द्वारा क्या करे अनेक प्रश्न पूछे थे। मायवादी उनको पक्तियो जोड़ा था और उन्हें वो उनके बक ने कहा था। जब तुम वहाँ जाओगे तुम्हे बड़ा पक्ष। मिलेगा कैसे ने प्रश्न पूछे। 1 प्रश्न यही था थैंक। अबाउट किस विषय का समर्थन करना चाहिए म? और उन्होंने क्या कहा? हमें भगवान के जिला का, देश का, रूप का, देश का प्राप्त होता है में का रूप और यहां बाजी के हैं। हमें अध्ययन करना जाता सो मन को हमें सदा भगवान के सो बाबाजी। इस समय वृंदावन पहुंच गए हैं। 14 बार जो प्राजी इंग्लैंड में थे, वो इंग्लैंड के भक्तों की बड़ी इच्छा थी कि प्राजी इंग्लैंड में पापाजी ने देखा की उनका कमजोर होते जा रहा है। वहा प्रबाजीकी इच्छा थी कि आगा है जी पहुँच गए हैं, पहुँच गए हैं। प्रभा जी की सेवा में हर भक्त जुड़े हैं। कई शोज में कहीं प्रभाजी ने प्रोपज मेडिकल एडवाइस ज्यादा विश्वास नहीं, वो सलाह नहीं देते। सो प्रोपज किताबें हैं? वो उनका देश, वह महत्वपूर्ण है। propay you you please by a, if you dont please example, a number will for you we have to, what we is a a bel? जी को लोगों ने क्यों स्वीकार किया? कि आदेश में विश्वास रखा? क्योंकि उन्होंने देखा की उदाहरण से यह साबित कर थे किस प्रकार का व्यवहार प्रकार का आचरण होना जाए। तो प्रॉपर्टी इस समय वृंदावन धाम में है और उनके शिष्य हैं वो प्रयास कर रहे है। प्रभाजी के अच्छे कोई डॉक्टर, लाये, अनेक डॉक्टर, डॉक्टर, वगैरह लाए और प्रभ खुश नहीं थे। पर कठिन स्थिति में भी प्रॉपर जी ने 1 गाड़ी नहीं छोड़ा। वो क्या था, क्या है शासन का वार करना? इतनी कठिन स्थिति में थे? प्रभाजी ने ट्रांसलेशन कर कहा, प्रभु जी ट्रांसलेशन के थे, कैसे बड़ी के स्थिति में वो 1 भक्त माइक को पकड़ा था, 1 भगदमकस्टोपरशनरा था वो 1 भाग
है।
उसको प्रदर्शन आते थे, वाद करते थे, ने समक्ष रखते थे, विश्रा चाय के वो भी, पर वो क्या वो इतनी कठिन स्थिति थी? जब भी अनार देखते हैं कि यह भाव होना जाए। इस ध्याय में कहा गया है कि बबल जी हमें दिखा रहे हैं किस प्रकार हमें शरीर को त्यागना चाहिए, हमें शरीर को त्यागना चाहिए। वान की सेवा में जुड जेब सो बढ़िया प्रॉपर्ली ने बैक्टरूघोडेपदशका शुरू की, घोडे शुरू किया था नाइनटीन फोर्टी फोर में और आर्टिकल प्रॉपर लिखे थे। topical कॉल सॉरी नो टाइम में कृषि व्यक्ति को मिलने गया था कि कोई व्यू इसने कहा सोमिटी वेरी बिजली नल टाइम। अगले दिन उनका ध्यान हो गया। सुपर ने कहा वेरी टॉपिकल हार्दिक, जिससे लोग समझ सकें कि जीवन को कैसे बिताना चाहिए। मुश्किल हो रहा हमें, हम सफलता से जीवन की परीक्षा म मनी हो है। can you many project, you to be have care, we have to man in school in college? we give you translation oled sing university in america, san is great university, the any department desywolapanafto that is presid। ऐसा अंक है कि pco that what haven after tet sila? सो प्रॉपर्टी से mexzीयहा्क्िशण, भगवान ने हमें धान में ज्ञान दिया था, बाबू ने ये मन बना लिया था
का नाम
है यही 1 उपाय है। कहा गया है कि भगवान ने संदेश दिया था। मा प्रभु ने वही संदेश लेकर उसे ज्यादा सरल बना दिया हुआ था। पाजी वही संदेश लेकर उसे और भी सरल बनाए। जैसे की फुल पड़ा आपको कभी समय नहीं आएगा। took 2 यह का जा रहा है पापा ने ज्ञान प्रेस के साथ पर है। पज very simple language agr आपको bola ja really perero final book by anyone, you have sudents reading the book। आल सो सो पर तैयार करते हैं।
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जीवित रहने के अपने निर्णय का अनुगमन करते हुए, शीला प्रभुपाद ने अपने आप को अपने शिष्यों पर छोड़ दिया और उन्हें पूर्ण रूप से अपनी देखभाल करने की अनुमति दे दी। वे उनकी देखभाल में सहभागी बने। उन्हें याद आया कि शीला प्रभुपाद ने अपने और अपने शिष्यों के बीच इतने घनिष्ठ व्यवहार की अनुमति इससे पहले कभी नहीं दी थी। इससे मिलती जुलती 1 अन्य घटना 1900 छयासठ ईसवी में न्यूयॉर्क किए हैं। जब वे अपने पास पहले पहल आने वाले व्यक्तियों से बहुत घनिष्टता का व्यवहार करते थे। वे ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें ज्ञान नहीं था कि आध्यात्मिक गुरु से व्यवहार कैसे किया जाता है। किन्तु जो लोग अब मौजूद थे और जो उस समय भी मौजूद रहे थे, कहते थे कि ये दिन पहले से भी अधिक घनिष्टता के थे। 1 बार कीर्तनं दृढ़ता से आग्रह करने लगा कि शिला प्रभुपाद 1 पूरा प्याला भर कर रस पिएं, जबकि प्रभुपाद कह चुके थे कि वे बहुत पी चुके हैं। कीर्तना को आग्रह करना अनुपयुक्त लग रहा था। उसने कहा, मैं माता यशोदा की तरह नहीं हूं, कि यह करूँ। मुझे सदैव स्मरण रहता है कि आप मेरे आध्यात्मिक गुरु हैं। किन्तु शीला प्रभुपाद कीर्त नानंद का आदेश मानते रहे। इसी तरह भवानंद, तमाल, कृष्ण, भक्ति, चारो, उपेंद्र तथा अन्य सेवक शीला प्रभुपाद को फुसलाते रहते थे कि वे विशेष प्रकार का भोजन लें और हमेशा अपने शरीर की देखभाल करें। अन्य शिशों को ईश्वर पूरी की कहानी की याद आई, जिसने अपने आध्यात्मिक गुरु माधवेंद्र पुरी की घनिष्ट शारीरिक सेवा की थी, जब वे जीवन के अंतिम दौर में थे और अशक्त हो गए थे। चैतन्य चरितामृत के अनुसार ईश्वर पुरी ने अपनी इस दासोचित शारीरिक सेवा से अपने गुरु महाराज के प्रति अपना प्रेम सिद्ध किया और अंत में भगवान चैतन्य के आध्यात्मिक गुरु बन। सके
भक्त, सुने, भक् और वो थे। मादापुर के गुर सो इश्वरपुरी के बखत हे श्वापुरी। आंसर। ये था रामचंद्र पूरी की आदत थी भक्तों की गलती कर दिखाने में। उनमें पहले वो भक्तों की सेवा करते थे, को शामिल करते थे, उसे निंदा करते थे। जब सन्यासी जगा पुरी में उन्हें बड़े उषा के साथ वहाँ प्रसाद खा खा
ले
ही सन्यास लिया है, वह खाते हैं। पड़ गई थी निकालने की माँ को। माँ के घर गये थे। चीटिया रही। सो लगता है कि हमारे सन्यासी ने क मीठा खाया है? क्यूंकि उनमे देखा, चीटियां चल रही है तो या चीनी मीठा खाया खाया नहीं। सा मौसम में चीटियों को भी गमी लगती। वो ऊपर आ जाता था। गुरु बाई का नाम क्या था, उनका भाव क्या था, उनका भाव था गुरु की सेवा और वो गुरु के मैल को भी साफ कर। जो पुरी कितने प्रश्न थे उनकी सेवा से। उन्होंने कहा कि तुम सारे विश्व में भक्ति का संदेश हो जाओगे। जो की उन्होंने बचाया किसके सहयोग से किसके शिप्रा के सहयोग से बाबा के सहयोग से पहुंच गया। जो यह कहते हैं कि बाइक के जो शिष्य थे वो ईशा पूरी के समान उनकी सेवा कर रहे थे। जैसे कुछ सेवा भी कर रहा था। राज के अंतिम दिन में प्रभा जी अनुवाद भी कर रहे थे। सो का उन्होंने बंद नही किया और वो कुछ सेवा भी कर रहे थे। प्रभाजी तैयारी कर रहे हैं किससे और प्रभाजी की इच्छा के भी क्या कि वो 24 घंटे जुड़े रहे हैं, जिसमें वह की सेवा में और उन्हें ये वर प्राप्त हुआ था। क्या वो चुन सकते हैं pope ने हा, also her the same test give my body time a golding to so? यहा ये लिखा है। tga क क्या कर रहे थे वो जो हम सबको पढ़ने चाहिए, क्या है प्रोपरली के जीवन की कहानी? प्रभा जी कौन थे? 1 भगत से जो की प्रकट हुए थे जिसमे को पहुंचाने के लिए बाबा जी से पहले ने कई सन्यासी शियों को भेजा था प्रदेश में, इसलिए भगवान के देश वे जो सन्यासी थे उनको उन्होंने देखा। इस वेरी डिफिकल्ट को प्रीच देखा कि इंगलैंड जैसे देश में कोई तैयार नहीं है, ये सन्देश है। और सन्यासी ग्रेजी लोड को वापस किया था। और lord ne pucha, we have to follow any rus, so grub। तो वो होल्चरेथेबविश्वनी तो है, लगता है वो सफल नहीं होगा नालाजी। पूरा विश्वास था क्या वाणी सफल इ। इसके लिए उन्होंने दर्ज होकर जी ने होकर का नाद करते गए। चंद के पार्ट टू उसके आनेवाले हुआ था
े
के जी अपने शरीर को त्याग त्यागने की तैयारी कर ले और हमें कैसे त्याग में शरीर त्यागना चाहिए। उस वतन में हा भाई नाम को सुन रहे हो और और क्या भगवान के वेनिला को सुन रहे हो। अगर हम प्रैक्टिस करेंगे ना सुन सकेंगे, हम प्रैक्टिस नहीं करेंगे। तो फिर आप स इस बाबा को मिर्जा में कई बार हम बक्सों को मिलते हैं। जो कहते हैं वो हमारे ख्याल दुर्भाग्य है, प्रबल को नहीं मिल पाए जो प्रबल को आप मिल सकते हो कैसे के वाणी के द्वारा। बापू वाणी जो है बापू है, श्री वाणी है। क्या शिक्षा वाणी जो है बापू से ज्यादा महत्वपूर्ण है प्रॉपर्टी की शिक्षा से कर सकते हो। वैसे माल है थिंग यू नीड टू नो। इस दिन माई और ठाकुर जी ने हैराज ठाकुर के प्रगट होने के। rana resons die ये कहे कि उस संत का तिहाहोगाएहै जीवित रहता है, कैसे मिला मिस में पढ़ते हो। इस प्रकार ने पुछा है कि इस प्रकार इस कोड की स्थापना अभी आप पढ़ रहे हो, वो तैयारी कर रहे हैं, हमने जीवन पर तैयारी में प्रॉपरली संगत पाप कर सकते हो। 2 के अध्यम से श तो प्रेशर है आपके थोड़ा सा मैंने क्वेश्चन के लिए छोड़ा है
हर किस के प्रश्न
हैं खुशी की बात यह है के अंदर आने के जो बच्चे है की संख्या बहुत बढ़ गयी है। रोल मेरे साथ थे, आप पढ़ सकते हो वो कितने लोग आ रहे हैं जोर से जल्दी मइकनीबरीवलसल कितने आदमी आये
सरे।
sosand two hundred
test, six thousand, two
hundred
monday ai thousnlastsnday twenty to nine hundred nine to on ram nomi thous सनडे ट्वेंटी थ्री था
रोज गिरता है तो कोई प्रेशर है किसी का okay requesting to control is every thing, you all three sudin control the god question here तेरी आगे जो दाना जल्दी लास थे हम मगर इशिका लॉन्ग क्यू करना चाहिए और प्रयास रहना चाहिए कि है सी डी के संयोग लेकर वो कम आए हैं, उन्हें रोक सकते है। अगर आपको लगता है कि ये कमी है सो हाल सान के योग से उनको रेटिफाई कर सकते है। en god god we can see that sylapopadवaज वेरीhamबल हाउ वी कैन, प्रैक्टिस, मिलिटी, इन, वाइल, डूइंग, सर्विसेज, बलुमाजइसगुनों को अनुकूल कर सकते हो, टूटियों को कम कर सकते हो,
आफ्टर यू स्पीक विल कनकलूड
अरे कृष्ण तो हमारे बहुत सारे दर्शन रति आ रहे हैं, लगता है अलग अलग कुछ स्ट्रेट से भी आया है। उन सब का हम हार्दिक स्वागत करते हैं। अरे बोल भारत ने बताया, गुरुवार ने बड़ा अच्छा बताया कि यहाँ पर क्राउड का फ्लो बढ़ रहा है, साधु हृदय पर उसे वह पूरा फिगर्स लिया है। तो मैं तो यही कहूँगा की जब गेट ग्लास में टेम्पल था तो रविवार के दिन वहाँ पर 300 एक्स कम वहाँ पे, तो जब यहाँ पर आये और कंस्ट्रक्शन शुरू होने लगा, मतलब लैंड वगैरह मिल गया था। तो सब यही सोचने लगे। कई लोगों ने कमेंट्स किया। क्यूंकि भक्त आपस में बातें करते हैं तो बड़ा रिमोट एरिया साउथ डेली जरूर है नाम के लिए 7 है लेकिन बेसिकली पीछे तो सारा स्लम एरिया है और बड़ा मतलब सो क्लीन बड़ा गन्दा एरिया था ये और ये हिल रोग था तो कई लोग बोलते थे, इन भी आपस में चर्चा करते थे, यहाँ कौन आयेगा? यह लोग ही नहीं जो बॉम्बे में प्राजी बोलते थे, यहाँ कौन आयेगा? आप देखिये गुरुबार की तपस्या का फल है ये। वार का एफर्ट्स ै तो पहले जंगल था, मंगल हो गया महाराज के प्रयास से तपस्या का फल है ये और दूसरा जो है ये सूचना भी देना चाहते हैं। 1 तो ये सिल्वर जुबली ईयर है और साथ में जो है 4 तारीख को भगवान नरसिंह देव की स्थापना भी कर रहे हैं की जो भी व्याज शासन है उसी के पीछे तो सब उसके लिए तैयार रखिये। मारने का क्यूंकि लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है, बहुत लोग आ रहे हैं, दर्शन भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। अंदर सिंह बवाल के आने के बाद देखेंगे कैसे
असल में जब हम पहला तो खुला था, दिल्ली में सना, घर में, दूसरा खुला था, पंजाबी बाग में जो पंजाबी भाग, अंदर खुला तो हमें जिंदा ना कम हो जायेंगे, तीसरा मंदिर खोला वो लोगो का कम हो जायेगा। अनुभव यह है की मंदिर खुलते गए और की संख्या भी बढ़ते गए,
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मजरे खोलोगे, कम लोग आयेंगे।
शील गोपाल कृष्ण को स्वामी गुरु, आज की करो शीला प्रभात की हरे क्रष्ण हरे, कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे अति आभारी है गुरुदेव के की उन्होंने अपने मुखार लीलामृत का इतना सुन्दर उद्बोधन दिया। आप सब से अनुरोध है की आज के दिन का 1 और बार स्मरण कर हे है कौन सा दिन है थैंक यू संग डे है संडे मतलब भक्तों का संग, भगवान के दर्शन का संघ, भगवान के प्रसाद का संघ, एकादशी व्रत का संघ और आज विशेष दया आप सब के लिए सूचना है की दोपहर का जो प्रतिबोध प्रवचन होगा हिस ग्रेस गोविंद कृष्ण प्रभु के द्वारा
और
दिन बार यहाँ पर जितने भी कार्यक्रम हैं उन सब में भाग लेते रहिये हमारे मंदिर में जो पहली बार आए है कृपया हाथ ऊपर करे अभी कितने लोग पहली बार आये हैं आप सब का पुनः स्वागत है अरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्णा हरे हरे अरे राम हरे राम राम राम अरे रे तो खड़े हो जाए। दिपेश नेता प्रभु है और उनकी टीम में बाकी जितने भी भक्त है समय प्रात प्रबूषदेरतोहमारे कांग्रीगेशन डिवोटीज टीम है आप उनसे मार्ग दर्शन लीजिये की मंदिर से और कैसे जुड़े हैं हमारे कार्यक्रम का लाभ कैसे उठाये भक्तों के संग का कैसे लाभान्वित हो तो वो प्रपा समीप मिलेंगे इसका जरूर लाभ उठाये 1 बार फिर आप सब से अनुरोध है कि नरसिंहदेव के परला लक्ष्मी नरसिह देव का जो उद्घाटन समारोह यहाँ पर होगा यहाँ पर विशेषतया प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा उसमे भी भाग लें और अधिक से अधिक लोगों को बुलाएं और मंदिर के कार्यक्रम में भाग लेते रहे गुरु महाराज ने ये निष्कर्ष निकाला अंत में जितने भी गुण हमें चाहे भक्ति में वो ध्यानपूर्वक जब से आएगा तो जैसे हिसग्रेसमोनरूपर वो हमेशा सबसे संकल्प कराते हैं जरूर ये संकल्प ले की गुरु परम्परा की प्रसन्ता के लिए ध्यान पूर्वक जप करे। 1 बार फिर गुरुदेव का हार्दिक आभारी
है सौरी
ठीक है आप सब से अनुरोध है की भीड़ बहुत ज्यादा है इसलिए हमें और सतर्क रहना चाहिए कुछ उचित दूरी बनाये रखे कि गुरुदेव अभी प्रस्थान करेंगे तो मार्ग में बाधा न हो थोड़ा जगह भी बना दे और 1 दुसरे से भी आगे लगता है कि उचित दूरी बनाये रखे लेकिन उचित दूरी बनाते हुए संख्या बढ़ाए शीला प्रभार
की agaaocce हरे कृष्णा हरे
शना क्रिष्णा हारे हारे
हारे।
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