प्रवृत्ति मार्ग vs निवृत्ति मार्ग | Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī | Delhi | 1 Jan 2022

In this Hindi‑language lecture recorded in Delhi on 1 January 2022, Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī explains the distinction between the pravṛtti (world‑engagement) and nivṛtti (renunciation) approaches to spiritual life. He emphasizes that true progress comes through bhakti (devotional service) and the cultivation of shraddha (faith), rather than through material pursuits such as buying property, accumulating wealth, or seeking status. The guru addresses several audience concerns: how to develop sincere devotion, how to handle anger and other negative emotions, how to balance family responsibilities with spiritual practice, and why regular temple attendance and daily bhakti are essential. He warns against the “crime” of neglecting worship in favor of worldly activities, stresses the importance of associating with sincere devotees, and offers practical steps—turning off mobile phones, reading scriptural texts, maintaining disciplined daily routines—to strengthen one’s spiritual attraction. Throughout, he references scriptural authority (e.g., Bhagavad‑Gītā, teachings of Muni Śukadeva) and repeatedly encourages listeners to adopt a mindset of service, humility, and constant remembrance of the Lord.
Chapters
बेगदारेदनयातभाल प्याला गा रे दा राधाबेन भले
प्याला
ले राधा
युवा लेगा हर के
नारे रे हरे रामा रामा रामा रामा
रे आरा
रामा रामा
माल राहे
के नाले रे राम राम राम राम ले हल है हमारे राम हमारा मारे आलेआेकेनारे
हम
हरे रामा रे राम
हम रामार बेचारे के सारे र
नेहा
हर केनारे
के रे हारे हरे राम रे राम हमरा मारे हर
ह
र
कब भक्तों का हार्दिक स्वागत को आज क्या है अब हर साल 1 दूसरे को क्या कहते हैं न स म बालक हो happy आप छोटी उम्र से बोलते आये हो, आप सुनते आये हो, पर लोगो कहना हैप्पी न कुछ फर्क पड़ता है happy new year अगर आप फिर से जागे बैलेंशीटबनाओ balenshepsplos happy ew her
र
to, happy new as the happy new caitoa to a antosevtnsognmr to में नीचे
जा
2 नंबर शो lनजयवगनयाविशायउने साबलिनाउनागा पूना पूना प्रवति बनिया, मुन्हे पुन पुन पुन प्रवति च i रहेगे
हे मे लचड़ाजाहैमले
जो
बुलबुला, जब लजनाजेवाहनेमने ना ना होना,
बुरा लक्षण हवा
गुन्या, विशय मोने सा
बलिना प्रवति को, न को,
श्रद्दा प्रवृत्ति, झुकाव से,
लक्ष्य से
भी एवं विश ट्रेगन प्रकृति के तीनों कोने विषयहाविषों के रूप में उन्हें है मनी। यहाँ जो असम व अली ने,
जो
माया के पास से मुक्त नहीं हो पाता, उसका गुण सराहा, जिसमें भौतिक शरीरों की सृष्टि होती है, बुनाहबुनहाबारहबार अनुवाद मेरे पीछे बोले, हे मुनि सुखदेव गो स्वामी। जब तक जीव प्रकृति के भौतिक गुणों के संक्रमण से मुक्त नहीं होने का वह विभिन्न प्रकार के शरीर प्राप्त करता है, जिनमें वह आनंद या कष्ट पाता है और शरीर के अनुसार उसमें विभिन्न विरजिया होती है। इन अभिरुचियों का अनुसरण करने से वह कार से होकर गुजरता है, जिससे वह स्वर्ग लोग तक ऊपर जा सकता है, जैसा कि आम पहले यानि त्रतीसगढ़ में बनद कर चुके हैं। भगवतगीता 25 में भगवान कृष्ण बतलाते हैं यांदीदेवरतादएवाण पित्र नियां बता भूतानयामकीभूतायांग कीमिया। जो लोग देवताओं की पूजा करते हैं, वे देवताओं के बीच जन्म लेंगे। जो लोग भूत प्रेतों की पूजा करते हैं, वे उन्हीं के बीच जन्म लेंगे। जो लोग पितरों की पूजा करते हैं, वे पितरों के पास जाते हैं और जो लोग मेरी पूजा करते हैं, वे मेरे साथ निवास करते हैं। प्रकृति के विभिन्न गुणों के प्रभाव के कारण जीवों में नाना प्रकार की प्रवृत्तियां या लालसाएं पाई जाती हैं। इसी लिए वे विविध गंतव्यों को प्राप्त होने के योग्य होते हैं। जब तक मनुष्य भौतिक रूप से आसन रहता है, तब तक वह भौतिक जगत के आकर्षण के फल लोग स्वर्ग लोक तक ऊपर उठना चाहता है। किन्तु पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान घोषणा करते हैं। जो लोग मेरी पूजा करते हैं, वे मेरे पास आते हैं। यदि किसी को परम भगवान तथा उनके धाम के विषय में जानकारी नहीं होती, तो वह केवल उच्च भौतिक स्थिति तक ऊपर उठना चाहता है। किन्तु जब वो इस में पहुंचता है, इस जगत में भारत बार जन्म मृत्यु के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, तो वह भगवत धाम वापस जाने की कोशिश करता है। यदि वो उस गंदाजेवोपा लेता है तो फिर उसे इस भौतिक जगत में वापस आने की आवश्यकता नहीं रह। दाती, यदि गततुआनानेबरतनदेकर धाम में परम चेतन सरिता वितमरीलाउन्नीस में कहते हैं ब्रह्भाणडभ्रविते पूर्ण भाग्यवान जीव। गुरु कृष्ण प्रसाद ने पाए भक्ति लता ली। सारे जीव अपने अपने कर्मों के अनुसार सारे ब्रह्भा में भ्रमण करते रहते हैं, प्राप्त होते है। ऐसे करोड़ों भ्रमण कर रहे जीवों में से जो अभी भाग्यशाली होता है, उसे कृष्ण कृपा से प्रामाणिक गुरु की संगति करने का शुभ अवसर प्राप्त हो पाता है। ऐसा व्यक्ति कृष्ण तथा गुरु दोनों ही कृपा से भक्ति रुतविनेता का बीज प्राप्त करता है। सारे जीव ब्रह्माण घर में भ्रमण कर रहे हैं। कभी उच्चता लोगों को जाते हैं तो विनर्म लोगों को प्राप्त होते हैं। ये वो लोग हैं जो प्रवृत्ति मार में कहलाता है। जब मनुष्य बुद्धिमान बन जाता है तो वह निवृत्ति निवृत्ति मार्ग को ग्रहण करता है और तब इस भरते जगत में भ्रमण करने के बजाए भगवत धाम को वापस जाता है। यह अनिवार्य है।
रिवाल अनुवाद फिर से।
हे मुनि शुकदेव गोस्वामी। जब तक जीव प्रकृति के बहुत गुणों के संक्रमण से युद्ध नहीं होता, वो विभिन्न प्रकार के शरीर प्राप्त करता है, जिसमे वह आनंद या कष्ट पाता है और शरीर के अनुसार उसमें विविध अभिरुचियां होती हैं। इन अभिरुचियों का अनुसरण करने से वह प्रवृत्ति मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे वह सुर लोटकर ऊपर जा सकता है। जैसा कि आप के प्रतिसरण में वर्णन कर चुके है। दोहरा शब्द दोहराए, हमने उद्योग स्वामी। जब तक जीव पति के भौतिक गुणों के संक्रमण से मुक्त नहीं होने का वह विभिन्न प्रकार के शरीर काम करता है, जिसमे वह आनंद या कष्ट पाता है और शरीर के अनुसार उसमें विविध अभियुचियां होती है। इन अभिरुचियों का अनुसरण करने से वह प्रवृत्ति मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे वह स्वर्ग लोक तक ऊपर जा सकता है। जैसा कि आप पहले प्रति स्कंद में वर्णन कर।
oh my ganmndasahanjasca tana manesmabenabutle sam rupakdama बंदे ham सगजतसाजनागुनतन सद तम समधूतमजनस
राधा
हे कृष्णा गा, वहाँ क्या कर पा जा श्री कृष्ण खेतन हरे कृष्ण हे हर कृष्ण। तो आज पहले करी गई
सबसे अनुरोध,
अपनेअपने मोबाइल प्लीज बंद कर दें
मैं बता पहुंचती है प्लीज which mobail वाइब्रेट
मोड शो का उछाल पिछले 5 वेस्कन में माँ ने सुना कि इस प्रकार पापों के कारण व्यक्ति को नरक में पहुंचना पड़ता है। सुना कि पापी व्यक्ति को पो का परिणाम भूलना पड़ता है। नरक में जहा नरक में बहुत भारी सुजाब बोलनी पड़ती है। यह वन सोचिए न मैसूस है। बडा भयंकर कष्ट प्राप्त करना पड़ता है। परमराज घबरा गए। जैसे कि अगर कोई मान लो चापलूसी करके बड़ा नेता बन जाता है, लोगों के ध्यान को चुराता है, हमें स्वार्थ ले और लोगों को अध्यान ज्ञान नहीं देता तो मृत के बाद उसको पीसा जाता है। पढने को देखते हो करने को पीसे फिर रस निकलता है। वह प परिणाम भोगना पड़ता है और आप बच्चों को खा सके क्या परिणाम। तो प्रेशर ने सुना किस प्रकार व्यक्ति को कैस पुगना पड़ता है। रेशमा कौन थे ा बड़ा दुख दुखी दूसरों को दुख देकर वो भी दुखी हो जाते है। देखता है कि लोगों को किस प्रकार से सजा भुगतनी पड़ती है। तो क्या सोचता है बड़ा दुखा दुखी होता किस प्रकार से उनका उदार हो? तो इस छठे स्कंद में परीक्षा मान जानना चाहते हैं। कैसे लोग बच सकते हैं भले बौधिक स्थिति में। अगर हम देखते हैं क्या प्रजा किस प्रकार से है, कैसे उधार हो इस उद्देश है। तो जब तक वक्त तोड़ेगा उसे अनेक प्रकार के प्राप्त पड़ेगा। और सब देवों में क्या है। बहुत जीवन के 2 l क्या दुखी दुख, a, a, steal, bards, rt, quakes या लोग तो परेशान जब तक जीवात्मा बहुत गुणों के आकर्षण से मुक्त नहीं
होता,
से बंधन में गुजरना पड़ेगा। और जो भाग्यशाली व्यक्ति हैं, जब हम बहुत ही कार्य में जुड़ते हैं तो वो है पड़ोसी मार। जो बुद्धिमान व्यक्ति है, वो कहता है? चारो तरफ बेस्ट है, यहां से, वो है निर्वात। परेश कहते हैं कि हम हमें मार से आगे बढ़ना चाहिए। जब तक आपका भौतिक आकश नहीं टूटे, आ विल बौधिक जगत से नहीं हो। तो इसलिए इस दातपरेमेंाश्लो का वर्णन करने हैम। मंदर कोनो भगवान जी गुरु भक्ति हुई है। अनेक योगों में गुजरने के पश्चात उभाग्यशाली व्यक्ति है जिससे भक्ति का ज्ञान मिलता है। इस ये ज्ञान मिलता है। जीवन का लक्ष्य कैसे प्राप्त हो सकता है? तेमारू प्रयाग में शिक्षा लेते थे स्वामी इन 2 का समाज में बड़ा ऊँचा स्थान था। दोनों ने सरकारी नौकरी तोड़कर वहां पर के साथ वहां पर ने प्रयाग में बड़ा गहरा ज्ञान दिया। हिन्दू भाई को तो आपका बोले क्या का प्रबंध ने योनि में पश्चात भाग्यशाली व्यक्ति है जिसे भक्ति का बीज प्राप्त, भकतीकभीरप्राप्तोने का क्या, भक्ति कबीर प्राप्त होने है। ये ज्ञान भक्ति योग सबसे महत्वपूर्ण कार्य और यह कैसे प्राप्त होता है किसी भक्ति संघर्ष से, ग्रंथ माध्यम से। इन ग्रंथों का इतना प्रभाव है। अब अंदाजा नहीं लगाते में कुछ कुछ दिन पहले मैं जल गया था और वहां 1 बग मिला उनसे पूछा, बढ़ कैसे बने? उनका काम था पुराने जो रंग होते है उनको किसी व्यक्ति ने को ट्रंक लिया था, पेड़ के लिए, ट्रंक को पूरा खाली कर दिया था, पर 3 किताबों को उठाने से भूल गए थे। तो ये जो उस को देखा 3 किताबें पॉ, इसका के पास कोई ज्ञान नहीं था। पढना पढ़ना शुरू किया, बड़े प्रभावित हुए, कौन पढ़ते हैं, पूरा ड्रंक खाली या छोटी किताबों को निकालना बोल। वो भाग्यशाली है, व्यक्ति है जिसे भक्ति का बीज प्राप्त होता है। अर्थ है ये ज्ञान की भागती होगा। सबसे मत्वपूर्ण कार्य है भागवत का निर्णय क्या है? क्या है भक्ति? योगा तो भक्ति का बीज प्राप्त होता है। मैं क्या करना चाहा, उसे पानी पिलाना चाहा, आप को बीज को पानी पिलाओगे तो बीज उगेगा। तो जब आप साधु संग के द्वारा भक्ति के महत्व को समझते हैं तो हमें इस बीज को उगाना अपने चाहिए। तुम्हें क्या करना चाहिए? और कैसे शव भक्ति का बीज है।
उगेगा
भक्ति की भरमार सुन ली है। पर आप शर्म किसे नहीं करो? तो आपका भक्ति का बीज ही तो चेतन आप का है। ये भक्ति का बीज प्राप्त हो गया है। पर हमारा उद्देश्य है इस बीज को उठाए वो कैसे प्रव होगा? शनम इसलिए आप पढ़ते हो। बार बार वक्त के बीज सब पर हमारा प्रयास ही रहना चाहिए। ये जो भक्ति के बीज प्राप्त हुआ है, यह नस नहीं है। तो उसे बचने के लिए क्या करना चाहिए? मैं अपने आप को साधु में रखना चाहिए की आप ने कहा कि जिस प्रकार आप जब कोठी बनाते हो तो उसके चारों चल दीवार भी बनाते हो। वाह। ये दीवार है। इससे क्या अर्थ है कि हमें भक्तों के संघ में संघ की दीवार बनानी है। हमारे चारों तरफ भक्त होने चाहिए। भक्तों के संग में रहोगे विचलित होने की कम संभावना होगी। सो भक्ति दादा बीज के गा स म करोगे और अपने आप को बचाने से क्या करना चाहिए। साधु में रह रहे है और साधु संग में रहते हैं हम पर कभी क्या हो जाता है, हो जाता है। पागल हाथी सुन्दर बगीचे के अन्दर आ जाता है। पागल हाथी बगीचे के अंदर आ जाता। क्या पाना होगा? क्या होगा? सुन्दर बगीचा? आप लोगो ने कहा भक्ति का बीज तो आपको प्राप्त हो गया है। यह ज्ञान प्राप्त हो गया है कि ये बीज कैसे होएगा। ये भी अपने ज्ञान प्राप्त कर के असली माध्यम है। पर जो भक्ति का बीज है, जिसके द्वारा ये सुन्दर बगीचा बना, कैसे वेशन अपराध। इसलिए भक्ति के मान में वेशणअपराध से बचना और फैशन अपराध से बचेंगे, अपराध रहे, बाद में आगे बढ़ोगे। to an
कमी को
आप शास्त्र में पढ़ते हो कि नेक प्रशासन में पढते हो की अनेक श्लोकों में 7 में बाबा जी हमें सूचना देते हैं या अपराधों से मंद अपराधों का मनन करते हैं। रोड और हमें नाम अपराध से बचना और वैश अपराध से बचना और आगे बोला। ये जो सुंदर बगीचा है उसमें पागल हार्दिक आने से रोको और अपने आप को का। भाव के रखो और भक्ति अभी तो परेशान है ही। किस प्रकार से यह आवश्यक है कि हम दिु्धिमार्ग से, मार्ग से आगे बढ़े। क्रोधी मार्ग में व्यक्ति बहुते कार्यो में जुड़ता है, पर जब तक आप पौधे कार्यों में जुड़े रहोगे, आपको जनरल मेजर के बंधन से मुकी मिलेगी नहीं मिलेगा। जब तक आपका पक्षी नहीं प्राप्त, प्रक्ति प्राप्त करने के लिए हमें होली से बना और क्यों ये मा माया। ये जो माया है इसका विरोध करना बहुत कठिन है। पर तुम भगवान की शरण लो तो फिर इसे तो परिशकुमरकहरहेहैं की हमें सदा होता है। जो भक्ति का बीज प्राप्त हो गया है। पर इसकी आप सावधानी से उपयोग नहीं करोगे। फिर क्या भक्त बगीचा। तो प्रोबी भागवत गीता के 9 मे धाय का हम सोचते है। किसी मार्ग को भी अपनाओ पर होगा। पर शासन में ये विचार नहीं प्राप्त होगा। शासन में भगवान कहते है जो देवताओं की पूजा करेगा वो देखता के लोगो को प्राप्त करेगा और जो मेरी पूजा करेगा वो मेरे धाम में आएगा और जो पूजा करेगा। तो यहाँ ये कहा जा रहा है कि जो मेरी पूजा करेगा, वही मेरा दाना अगर हम सोचेंगे, हम देवता की पूजा कर रहे हैं। pr s द्वारा prinam mila an the wah demigod got me सो कभी यह नहीं सोचना चाहिए। किसी मारक तो भगवान कहते हैं जो वर देवता दे रहे हैं वर्ड कहाँ से प्राप्? मेरे द्वारा प्राप्त? तो यहाँ पर शर्मा कह रहे हैं। जब तक हम बहुत आकर्षण से,
हम
बोधि आकर्षण से मुक्त नहीं होंगे, जब तक के बंधन से प्राप्त नहीं हो तो साधु संघ में, साधु संघ में, आकर में शिक्षा मिलती है। क्या कि शुद्ध भक्तों की संघ में रहोगे। तो असली ज्ञान प्राप्त। तो यहाँ कहा जा रहा है कि जब तक बुद्धि नहीं टूटेगा, वह अपने आप को जन्मा मिलने के बंधन से जन्मा मिले के बंधन में हमें अनेक प्रकार के देय प्राप्त करना, जिला जल में नाम प्राप्त हो, पेड़ के रूप में प्राप्त हो ता है, पक्षी के रूप में प्राप्त हो ता है, परशु रूप में प्राप्त हो सकता है। और इन सब योगों में गुजर के पास मानव प्राब्ध अर्थात ब्रह्मा सोचना है। हे मुर्ख व्यक्ति भी मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है। हम इतने नशे में है कि चाहे कितने भी साल के, हम स्वीकार नहीं तो अगर आपका भाग्य है। तो भक्ति के बीज के बाद तो परेशन वाल उस ज्ञान को चाहते हैं जिसके पालन से जन्मा, मन से मुक्त हो। सको परिवार ने सुन लिया है किस प्रकार सजा ज्ञानता में हम क्या सोचते हैं कि जो मनुष्य दे है हमेशा प्राप्त होगा। और कई लोग ये स्वीकार नहीं करते कि आत्मा है आत्मा क्या है? सुना तो जानना चाहते थे, कैसे लोग बच सकते हैं? उदाहरण दिया 1 हाथी तलाब में जाता है, शरीर को साफ करता है कि तुरंत तलाब के भार आकर। जब वो मिटटी में बैठ रहा है तो क्या हो जाता है, हो जाता है। तो हमें रोज मार से का पहुंचना है निरुदिमारपर। तो परीक्ष कहते हैं अगर हम शासन शिक्षा का पार करेंगे तो कैसे भर है हम बरसी मार्केट प्रभाव है। तो इस इस अध्याय मे परिषर गे पू कि ये बताइए की कैसे हम मुक्त हो सकते हैं? कैसे हम बौद्धिक आकर्ष से बच सकते हैं? और क्या पाए ओवर के माध्यम से? तो जब तक बौद्धिक आकर रहेगा आपको बौधिक समाज में रहेगा। कभी आप सो लोग जा सकते हैं और कभी जा ये निर्भर रहेगा किसके द्वारा आपके द्वारा, तो जब परेकश्रभालने सुना किस प्रकार का कष्ट वे को भोगना पड़ेगा तो उन्होंने ऐसा ज्ञान दीजिये जिसके द्वारा हम मुक्त सके बदल दे। तो बुद्धिमान जो बुद्धिमान व्यक्ति कौन है, जो की प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि चीन केवल भक्तियां देव है कि भक्त योग्य 1 साधन है कि जिसके पालन से आप को से मुक्त हो सके। तो पूछा समझेगा भक्ति योग साधन है। तो भारतीय योग का अर्थ है मन बुद्धि न ऑफयूघणनाभगवान सेवा तो भगवान की सेवा में जुड़ेंगे तो बन सकेंगे। तो हम करे आज है और हम 1 दुसरे को केक कहते हैं साल मुबारक, हम कहते है साल मुबारक हो। इसके द्वारा संदेश यह है। नए साल में कोई बीमारी नहीं हो, जिसे हार लगा सोना, मजा और सुख प्राप्त हो। और अंत में क्या देखते हो सुखी वजह क्या प्राप्त हुआ? खुशी की वजह दुख प्राप्त हो रहा है। और चाहे कितने व्यक्ति आपको, यह कहे है? असली सुख चाहिए तो क्या है?
उपाय
जैसे कि कल रात को हमारे कई मंचों में program a baa a program to g क्या ansrbgoै जानता है ये जो न्यूर है। क्योंकि क्रिसमस के द्वारा क्या है किस किस का जन्म है, जो भगवान के बेटे थे। तो ये जो न्यू ईयर है, स ये है। वैसे तो हर समाज में हुए है, उनका न आता है। पर ये क्रिस्टन का बड़ा प्रभाव है, यह बन गया है। इंटरनेशनल यूलिया पोर चाहे आप हैप्पी, नहीं है। 1 दुसरे को बोलो राम क्या होगा? और आज की स्थिति में जो कश् का कोटा है, बढ़ते जा रहा है, बढ़ते जा रहे है, कम हो रहा है। कसम किसने सोचा था, ये जल्दी आयेगा। 1 बाद 1 का शादी रहता, इससे क्या शिक्षा मिल के सबब कैसे हैप्पी? अनुभव क्या है? दुखी तो भागते हैं। वो नया साल शुरू करते है संगम और जो पदकवलीबतिवो क्या करते हैं, होटलों में जाते हैं। नूर के विषय में। होटलों में बड़ेरी पार्टी होती है, जिसमें लाखों में लाखों रुपए खरीदने पड़ते हैं। और उनमें क्या विचार है। अगर हम नया साल शुरू करेंगे, भौतिक वर्सन में नाचते हुए, गाते हुए, पूरा साल खुश रहेगा। भर क्या सोचते हम नया साल शुरू करेंगे। तो चाहे आपको कितनी भी सुविधा प्राप्त हो। पौधे। जगत का। तो जो भक्त हैं, वो चाहते हैं कि लोगों की अज्ञानता को लोग हैं। अज्ञान में, अक्सर हम जन्म लेते हैं, ज्ञान में, पलते हैं ज्ञान में, और मृत्यु भी अज्ञान में हो। और जो भाग्यशाली भी है, उसे क्या मिलता है भक्ति? तो ये भक्ति का, ज्ञान का, हमें पालन करना है और रहेंगे। ज्यादा सरल हो जाता है। तो आज का प्रश्न क्या है? की कैसे हम इन कैसों से मुक्त हो सकते हैं?
और
हमारे प्राचीन पुराणों में है। वो प्राचीन पुराना 5000 साल पहले
है,
प्राचीन पुरानों में है से परिचित हो। ये कितनी पुरानी है? बालीवुड मे साथ हजार साल। तो आज मिल की कहानी क्या है? आज वीर का जन्म हुआ था, मन खाना, नियमो का पालन, लोगों का उचारण और उपासना पर कैद कर। और आज न गये थे जंगल में, क्या ना भूले को देखे, कैसे फूल और s को अपने प्रेम दिखा। इस घटना को उन्होंने hेदरमेंbitाlिa और वैश्य को अपने घर में रखना। पहले तो आज क्या किसी का चिंतन करे। तो मन जो है जिस प्रकार का भाव आप रखोगे, उस के कार्य में जुड़ेगा। इसलिए बंद द्वारा मेरा चिंतन करो, मन द्वारा, मन द्वारा। और अगर तुम ये सब करोगे तो सो भागवत। गीता में अनेक श्लोक हैं जिनमें ये उपदेश मिल रहा है या मन को और मन को विजय मन। मन मन पर विजय प्राप्त करोगे तो इतने भी वश्मि मन को बंदी बनाना बहुत आवश्यक है। भगवान क्या, n, go is concise मन को वश्मि नहीं कर सके, ये क्या है शत्रु सबसे भयंकर। इसलिए ये आवश्यक है। मन को बंधू बनाये। तो मन को कैसे बंद बनाओगे, मन को बंदी बना। सकोगे सेवा मन द्वारा और द्वारा वन का दक्षिण भारत में थे वो 1 प्रसिद्ध भक्त रामचंद्र रॉय। तो महा पाप ने अपने भक्तों की महिमा को बढ़ाने के लिए उनसे प्रश्न पूछे। वहां भू ने पूछा ये बताओ की हमे किस विषय का चिंतन करना चाहिए और भगवान के लीलाओं का, भान के गुण का ह होगा। दूसरे शब्दों में मन को हम वश में लाना चाहते हैं। हमें बुद्धि के सहयोग से मन को ठीक रास जोड़ना। पड़े मन ने क्या कहा?
चंचल
हे कृष्ण। मन को, वश्मिलानावाहिल को, वश्मी ाने से, तो मैं क्या, मन को बंद कैसे बनाओगे द्वारा भगवान की लिहा, मन द्वारा भगवान के गुणों का समान, मन द्वारा ये सोचो की आप कैसे पतितों का उद्धार कर सकते हो। जैसे प्लान बनाना आप जो मैं सोचता हूँ किस प्रकार भतगवादीव्यक्ति पौिकारिमेजुडरहे हैं? सो मुझे दुख है द्वारा सोचो किस प्रकार रोग ने योनी गुजर रहे हैं, क्या प्राप्त कर रहे हैं? जो बुद्धिमान व्यक्ति है तो श्रम भक्त हैं। वो क्या स्वीकार करता है? मन है कैसी हो जाएगा मन का वैश्मिनीलातो? मन को वैषमेलानेका अर्थ क्या है? मन द्वारा भगवान का चिंतन करना, व लीलाओं का करना। जब भगवान प्रकट हुए तो सनातन साथी आज अत्यंत दुखी है दिन दुखी थे, सना साथी। अश्विन ने उन घटनाओं का स्मरण किया जो कि भौतिक दृश्य से के सहयोग के कारण वो निभा। फिर अश्विन ने शोकेस भगवान के गीता के सन्देश का स्मरण आरम्भ किया। जैसे उन्होंने गीता के संदेश का स्मरण आरंभ किया, उन्हें ऐसा लगा की पर भगवान उनके साथ है। और जो दुख शोक था। तो पापा जी सा हम ता के लोगों का उच्चारण कर सकते हैं और इस लोगों का मान कर सकते है। फिर आपको क्या महसूस होगा? तो प्रवृति मार्ग मार्ग है। उसके द्वारा आप बंधन से मुक्त नहीं हो सके। आगे हम कहाँ पहुँचे है? यह मुक्ति प्राप्त करे तो शास्त्र का ज्ञान प्राप्त कर रहे। जबकि susami
गए
मेरे सारे की रचना की कोई कमी है। और फिर मुझे क्या जान तो बौधिक तोड़ना है। साधु साधु के द्वारा शासन का प्राप्त कर। वहाँ के नाम है से मीट है, पर अविद्या के कारण मैं नहीं होता। यह अविद्या की बीमारी दूर हो सकती है। कैसे हो, विद्या की बीमारी है, दूर हो जाए तो महराज सो साधु संग में रहना आवश्यक है। और जैसा हम करेंगे वैसा ही जैसा रिया करोगे, उसके अनुसार आपको परिणाम हो। बोलना पड़ेगा जो आगे वन व्यक्ति मनुष्य बड़ा दुर्लभ है और हमें समय का देना चाहिए, वे क्या करना चाहिए? भक्तियों की विधियों श्रीमाल भागवत में शुरू से अंत तक इस ज्ञान बोल रहा है। पर मुझे प्रश्न पूछ रहा था किस प्रकार हम पौध बन सकते है? और ये आज सो, ये आजविलकीलीला पीती थी। कम से कम 7, 8000 है। और भक्तों शिक्षा का पालन करने से क्या लाभ होगा? टूटेगा और बोलेगा तो हमें लेना ज। और ये नहीं सोचना चाहिए कि हम किसी मार को भी अपनाये भक्ति। योग का अर्थ है मन, बुद्धि, इंद्रियों का उपयोग करना। भगवान की सेवा में और क्या करो, भगवान के पैरों द्वारा। क्या करो, हद वारा, क्या करो, वन के मंदिर साथ, तो भक्ति
प्रेम के
साथ, भगवान की सेवा में ना। तो सबसे सदर मार्ग है। हरी नाम का उचारण है। तो हरी नाम का जो उचारण है, ये हम सब के लिए सबसे महत्वपूर्ण कहा है। और हरी नाम सारे हरिनाम के उचारण से क्या ला। चीरपनवोटप बहुत आकर रहेगा आपको बहुत। इसलिए सासुर गया है हमें संघ में रहकर की महिमा तो आप सब आये हो। आज के दिन भगवान के दर तो हमारा क्या निर्णय होना चाहिए। वह यह निर्णय होना चाहिए। हमने ये निर्णय करना है कि जो भक्ति के लिए प्रतिकूल है को क्या करोगे। और जो अनुकूल है, उसे जो अनुकूल है, उसे स्वीकार करोगे। जैसे की भौतिक समाज में जो आपके अच्छे सुहास के लिए अनुकूल है, से स्वीकार कर दे। जो प्रतिकूल है, उसे आप। तो ये होना चाहिए। हमारा रूप कहते हैं हम जब भक्ति के मार्ग में जुड़ते हैं में दर्द होकर जोड़ना चाह होकर जुड़ेंगे, तो कठिन स्थिति में भी जुड़े रहोगे। भक्ति मारे तो भक्ति योग है। असली उपाय। तो इस अध्याय में आप पढोगे किस प्रकार भगवान के नामों का उच्चारन में ही पी सकते हैं। आज तो बुरी सागर में गिर गए थे, हर प्रकार के बुरे कार्य में जुड़े जुड़े थे। तो यमराज मरा ने देखा कि इतना पाप हो रहा है, खाना ले जाना चाहिए यमराज। और जब देखा इन यमदूतों को, अब यहाँ मदूदी, तस्वीर देखिये यहाँ मदों को देखा तो घबरा गए। और उन्होंने अपने बेटे का नाम का। भगवान के नामों में इतनी शक्ति है ज्ञान या ज्ञान से जो भी लोग बड़ा घेरा था, अपने छोटे बेटे पुकारा, इतनी श्रद्धा से पुकारा कि वहाँ तुरंत ही या यमराज ने को भेजा था आज गुना बुलाने के लिए। और जब उन्होंने नारायण राम को पुकारा कौन कौन पहुंच गए। और दोनों का वरसलाबहुआ जिसका निर्णय किया था कि जिस व्यक्ति ने हर नाम का उच्चारन किया है, भगवान के सामने सिर झुकाया है, उस व्यक्ति की सुरक्षा कौन करता है? तो सास नाम की, महिमा के कली नाम रुपा। तो हमें अगर आप कुछ निर्णय करना चाहते हो तो हमें यह निर्णय करना चाहिए। क्या हम भगवान की सेवा में रहे। व रुची बडे किसमेग रुचि बड़े
में
विधमरताका भाव अनुकूल हो में सेवा का भाव अनुकूल हो। और प्रयास के गोद तो बात वाली व्यक्तियों का भाव रहता है। जो भक्त हैं, उनकी क्या इच्छा रहती है, भर्ती में आगे है। संक्षेप में आज के लोक में पर राज पूछ रहे हैं, पूछ रहे हैं कि हम कैसे इनक्लेन बच सकते हैं? ऐसे हम भगवान की सरनागत हो सकते है। ऐसे हम ऐसी स्थिति में आए किसी प्रकार से हम भक्ति के मार्ग से विचलित नहीं हो। और उन्होंने कहा क्या है उपाय के किसी के भक्त वासुदेव पहना कि शुर भक्ति के मार्ग से ही आप को तोड़ सकते हो और भक्ति योग आरम होते किसके साथ और हमें इसका लाभ उठाना है। तो आप छोटे थे तो न्यू यर रेजोलूशन लोग बनाते ये सलमी मेरे अच्छे नंबर आए आपका नया सा रिजोल्यूशन क्या होना चाहिए की आपकी रुची बड़े है नाम आप भक्तियों के प्रति आकर्षित हो और माया से क्या पर वो सम्भव नहीं है जब आप भक्ति योग भी नही तो इस महिमा के वो बात करोगे और भक्ति योग है 1 साधन जिसके द्वारा पर हे मे पीएम जोखिम भरने पड़े और पर को सो क्या है साधन तो भगवान राम को हम ध्यान पूर्वक से क्या परिणाम होगा ये है शो का और साधु संग में कितना ज्यादा है इसलिए हमारा प्रयास है जा आज 2 महान संतों का अभिभावक है महान सन प्रकट होता है और तो ये दोनो मान ने आज के दिन है महेश भगवान के बहुत प्रिय भक्त है महेशपुर और वो महा प्रभु के साथ भगवान साथ यात्रा कर ते थे और के कई सहयोगी थे महेश तो आज है महेश पंदलका और आज
है
जान जान दादा से भगवान बहुत प्रिय भक्त है और जो भगवान प्रगट होते हैं तो उनकी 7 शादी भी प्रगट होते है और उदार भगवान प्रगट हुए के सनातन शादी भी प्रगट हुए उनके सनातन शादी में 1 थे उदार तो उदाहरण है सब हम गाँव में प्रगट हुए थे और उनके जो
family
member gold उधार है ऐसे कान में जहाँ सोना सोना सोना उनकी रुची नहीं थी इसमें क बक्सी में और उनको कहा जा रहा था परमपरंपरितापवन आप जो आसन दयालु हो ये तो आज उनका भी हम हिंदू के फिर प्रार्थना कर सके जिस प्रकार उनकी रुची भी हरयाणा में, जिस प्रकार उनका हम भी ऐसा भौतिक समाज में हीरो होते हैं हमारे हमारे हमारे हीरो है सं जिन्होने उदहारण से यह बताया है कि हमें किस प्रकार वन सेवा में जुड़ना चाहिए और किस प्रकार के बौद्धिक आकर्षण को तोड़कर ध्यान आकर्षण साबित करना चाहिए गohelpदोदोहep भगवान की की मदद करते तो इस प्रयास करे तो हम भाव आते है तो उनसे बात न टूटे और
बड़े so
egisisoequestion ris
morni very forte तो किया कि गरीबी में आसान होता a बस सो तो किस तरीके से हफर्डकरेकिपेसदी में
कठिन नहीं आती है प्रयास करते जाओ, ट्राइन ट्राय प्रयास करते जाओगे, वान फल ताते हमें भी पार्टी के मार्ग में कई चैलेंजेज का सामना करना पड ा pas करे
n
yes मुझे हरी कृष्ण
महाराज महाराज ने बहुत मुश्किल से मिलती है पास कर्म की पिछले जनम में तो मिलती है और फिर ब्रहमचारी बनने को तो मतलब और भी पास कर्म होंगे तो मैं कई बार ये सोचता हूँ की जो आपके बहुत ही मत है उन्होंने क्या कर्म की होंगे ऐसे जैसे कि अजय मतलब उन्होंने क्या किया होगा उनको इतनी सेवा का मौका, विला
शिवा का मौका सबको मिल रहा है, सिवा का मौका सबको मिलता है े आप सब ये जरुरी नहीं है कि जो मेरे साथ सेवा कर रहा है उसको कृपा हर व्यक्ति जो इस संस्था में जुड़ा है, चाहा की काया में जुड़ा है। वो अत्यन भाग्शाली है। बहुत भागशाली। भगवान कहते हैं में 4 करता है वो क्या सारी सेवा में जुड़ने सी। जैसे कोई रस बनाता है, कोई स्वीकार करता है कोई भाग्य। शाली भारती योग में जुड़ना में forचुनेटपोप्राभा ने कहा है, प्रभा ने कहा है जब तक आपके बहुत अच्छे संस्कार न हो, अब भक्ति में नहीं जोड़े सो। सब भक्त जुड़े हैं। पक्षी योग में उनके बड़े अच्छे संस्कार है। जैसे विदेशों में भक्त जुड़े हैं। जिन्होंने कभी कृष्ण का नाम भी नहीं सुना था। उनके पास कोई ज्ञान नहीं था। आज का बन गए हैं बा। और ये कने वाले प्रयास है। पर संस्कार अच्छे से भगवान ने उन्हें भी जो
रे किशना महाराज बहुत बहुत धन्यवाद। आपका आपका इतना सुन्दर लेक्चर के लिए महाराज जैसे आपने बताया कथामेकीब हमारे वैष्णव अपराध होते हैं। यह प्रवृत्ति निवृत्ति माल होता है। महाराज कुछ हमारे बीच ऐसे भक्त होते हैं कि उनकी उन्होंने देवी लिया, का भी संसार छोड़ कर चले जाएंगे। लेकिन उनको अभी भी ऐसा नहीं लगता कि में सब ऐसे ही चल रहा है। वो भक्ति में आने के लिए तो दृढ़ नहीं होते है, मंगलाजी के लिए दृढ़ नहीं होते हैं। बाहर की चर्चा करना तो बहुत ज्यादा उत्साह हो जाता है। प्रॉपर्टी खरीदना धन खरीदना तो हमारे मन में उनके प्रति कभी कभी मन में मतलब। अपराध सा होता है तो उनसे कैसे
बच महाराज ही अपराध है।
अपराध होता है कि लोग मंदिर नहीं जा रहे हैं, भक्ति नहीं कर रहे हैं और बाहर की चीजों में बहुत उत्साह दिखा रहे हैं कि प्रॉपर्टी करे 2 धन खरीद लो, मकान खरीद लो। लेकिन हरी राम के लिए कभी चर्चा नहीं करते है।
आपका मतलब है भक्ति और जुड़े भक् जो हैं वो भी बहुत ही ज्यादा रूची पकड़ता है। तो भगवान का लाभ नहीं उठाएंगे तो आध्यात्म मार्ग में आगे नहीं बढ़ पाओगे। आप वहाँ के वहाँ रह जाओगे। बुखार हो तो भाव देखते हो, बुखार कम हो, ना नहीं हो रहा तो इसी प्रकार हमें ऐसा प्रयास करना है। हमारा हादिक बढे और आपको लग रहा है। नहीं बढ़ रहा तो आपको उत्तम भक्तों की सागर लेकर पूछना चाहिए। मेरा भौतिक आकर्शन घर नहीं है और क्यों नहीं घट रहा क्योंकि हमारा बहुत अध्यात्मिक आकर्शन, वो हमें साधु और 40 में लोगे और फिर आप आपका बहुत ही कागजन, घटेगा और आयोजन। बढ़ेगा
महाराज जी, मेरे को चले की। आपने बताया कि परिणाम में इतनी शक्ती है कि हम बहुत कम समय, बहुत सु शुध हो सकते है। लेकिन उसकी जरूरत है श्रद्धा की। तो ये महाराज श्रद्धा कैसे बना?
सकी जरुरत है श्रद्धा श्रद्धा बढ़ेगी लोग, श्रद्धा तथा साधु की। आपके ह्रदय में यह श्रद्धा होनी चाहिए। हमने आध्यात्मिक जीवन को अगर आपके मन में शुद्ध भाव होगा तो आप किसी भरत में पहुँचोगे। शिक्षा में, भक्ति के मार्ग में कैसे बढ़ सकता है? और उसका पालन करने क्या कहते हैं भजन? ओ भैया क्या करोगे? तो फिर se shuru hota he is के साथ mosses strong foundation
yes अरे किशन गुरुमारुमारादे। बता रहे थे कि भक्तियोग में जुड़ते हैं तो हमारे अनर्थ काम होते हैं। लेकिन महाराज मैं देख रहा हूं काफी टाइम से चेन नहीं करते हैं और सेवा भी करते है। लेकिन हमारे अंदर जो काम है क्रोध है वो कमी नहीं होता है। तो महाराज इसके लिए क्या करते
हैं? भयसीयोकापालल करते जाओ और कई बार हम लांच कर रहे है पर पचा नहीं पाते। आप जो है नाम कर रहे हो isp्roफवेहीनामे रूची बढ़ क्यों क्यों करोगे? o b a e a a e mechanical? मकैनिक रोहित का क्या परिणाम होगा? बढ़ जाएगा
महाराज ना। तो महाराज मेरे कुशल है की बहुत सारे लोग भक्ति में जुड़े रहते है, लेकिन भक्ति में जुड़े रहते है। लेकिन लोग कहते हैं कि नहीं अभी भक्ति मत करो पहले पढ़ लो पहले ये कर लो पहले, अभी अभी मर नहीं भक्ति इसका जवाब क्या रहा उमर भक्ति क्या कोई उम्र होती
वो कहेंगे छोटी की अमेरिका में
भी
अमेरिका में 1 अमेरिकन भक्त को का दे रहे थे तो इंडियन और आया था पापा सन्यास केवल बुरे लोगो को देना और जवान। तो पापा ने कहा मुड़ा किसे कहते है व्यक्ति ने तो पापा जी का। पापा ने पूछा क्या तुम गारंटी दे सकते हो की वह मिस में से पहले नहीं होगी? तुम भी बुरे हो, वो हम सब बुरे हैं, हम सोचते हैं, हम जवान हैं और 40 साल हमारा नंबर नहीं आएगा। नंबर की े और कोविल के प्रभाव में
हरे कृष्णा गुरुराज, थैंक यू वॉडिंग गुरुमत आपने बताया कि भक्तों का संग और वसा और बराज से बचना गुरुम्। कई बार भक्तों के संग में ज्यादा समय से हम रहते हैं तो फैमिली लेटी आता है और उसके कारण फिर
हम अपराध करते हैं।
तो इससे कैसे बचे।
डॉ के साथ में रहते हुए
प्रयास करो। अब गुरु को देखो कैसे छोड? we should be like to be in one i save an e
guru
har guru deo guru har
ो
thank you for foatiseaasocation manage, my question is told that the lord makes for her word and record the page to do and he redis maharaj something we tines with separation fo, guru and time, if we also hoga is instruction, how to, how to be the content support of saeforshould
be not forget the instruction proper dedicate the first canada group, by a in this forever, by the win instruction and the fo, so the grute wapuanwanybota important and i makneffrs yes
helकisnamsधन्वाd के लिए मेरे परसने आपने ज बताया कि हमें दिनोंकी भक्ति करनी चाहिए। तो ये दिन भक्ति करना
कैसे है?
कैसे संजी ने कर रहे हो,
कर भक्ति कर रे हो तो दे क मे
और
आप पूछना चाहते हो कि आप आगे बढ़े वो तो भक्तों दे सकते है को 3 प्रकार संगरप्रातहोतीहै भक्तों की समानता ब आप देखकर कम ज्ञान भी संघ में आते हो तो आपके या आप खुश आपको ज्ञान मिलेगा जिसके पालन से मानदारी भक्ति में आते हो तो अगर आपको लगे मोर भगवान रा मांगों में से क्या आवाज चाहिए? मेरे का तुम्हे इतना अगर आप मुझे वर्ल्ड देना चाहते हो तो ऐसा वर्ड दीजिये की मुझे उत्तर भक्तों की संगत मिले। उनके द्वारा आपको ज्ञान मिलेगा। इसके पालन से आप भक्ति में आगे बढ। to a dout to dusre ै
hrykusnohरीकsमेरा
कोश्चन ये था महाराज की अभी, पिछले
दिनों में बुक डिस्ट्रीब्यूशन कर रहा था, जो दिल्ली में निर्भया कांड हुआ था,
उसकी पत्नी मिली है किसी की निर्भया
कांड जो हुआ दलीमें मतलब उनसे ऐसी बात हुई, वो मतलब सोख ली, बात कर रही थी, लेकिन भागवत ही लेने के लिए राजी नहीं हुई या कोई भी ग्रंथ वो कह रही थी कि क्या एविडेंस है तुम्हारे पास की किस ने लिखा ये बताओ तो मैंने बताया वेद व्यास लिखा है, भगवान ने बोला है फेडस्ीनेलिखाहै वन लाइन में लॉजिकल।
आंसर क्या होगा कि मतलब सा कई हर समाज में श्रद्धालु भक्त है और नाशिक भाव है जो नाशक भाव के है। जो भी बोलोगे जो भक्त भाव हो है वो तेजी से आगे बढ़ सकते हैं क्यूंकि वो स्वीकार करते है ना ही तो आसमान में 2 प्रकार के होते है a, a, a, a, a jasus
भी हमारे पास भगभुतकितनाभीखत्म हो गई है, बाहर गौर बनाकर रोक भी लगा रहे हैं। तो अभी अब हम कैसे प्रचार करेंगे आपको
पास? बी बी डी में भगत ने सोचा ये वायरस के जाए तो आपके पास दूसरी किताबें आप कर सकते हो in a stock print
or please
a यलगोमहाराजजाप
ने बताया कि से बच्चों के संग में रहना चाहिए और दूसरों के अंदर ओर देखना चाहिए। तो अगर हम बच्चों के संग में रहने और प्रयास करें दूसरों के अंदर क्वालिटीज देखने का और लेकिन उससे क्सपेक्ट कर लेते हैं कि दूसरे रिओटीभीहमारेदरऔर देखें। तो अगर ऐसा नहीं हो रहा।
ी आप दूसरों के गुणों को देख रहे हैं, वो ही नहीं देखा, माँ ने कहा। हम मान देना, आप दूसरों को आज 2 और ये उम्मीद मत रखो कि वो भी आपका आदर देगा। you do the rising। मान लो कोई व्यक्ति हमेशा आपकी करने, उसकी भक्ती कमजोर हो जाएगी, जब हम एशिया द्वेश के द्वारा चलते हैं। माई भक्ति। com a so much thank you for
the vititiclas question is that everybody in
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उसे लॉक डाउन होता है, तो आज भारती काफी डाउन हो जाती है। पता है तो ऐसे समय कम अपने
आई ना आपके साथ है, प्रॉपर के गर्द है, आपके साथ है और ऑनलाइन आप सुन सकते हैं। और देख तो हालांकि यह मानते हैं कि दुख है पक्के साथ फिजिकल संग नहीं का पूरा लाभ उठा and लॉकडाwngasomany bortisto act nline o a e o gating bombard pleasing a expended कितने भक्त हो क्योंकि ऑनलाइन corse ye होल क्वें
हेलो विशंकर दिमोराइटमेरा सवाल यह है कि जब भौतिक विषय में आप्शन बढ़ता है, तो जो जाब विदाउट फार्मालिटी के लिए हो पा
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हरे कुशन
कई सारी चीजें, आज लोग ने सुनी थी नवी प्रवृत्ति भक्ति मान और 1 भक्त ने कहा नास्तिक के बारे में आपने बताए महाराज 1 भक्त को बहुत समय से बोल रहे थे हम कि आपको मंदिर आना है, आपको मंदिर आना है, आपको मंदिर आना है, आपको क्लास में आना है, आपको प्रसाद पाना है, वो साफ मना कर जाना कोई जरुरत नहीं फिर हमने उन्हें यह कहना शुरू कर दिया हमें अपना वो मत दिखाइए आप बिलकुल मंदिर मत आप ग्लास के मत आइए जरुत आपकाी वो दूसरे दिन मंदिर में बैठे थे महाराज इस
बार
यार जब पहले कहते थे वो नहीं आते, कहते थे बिल्कुल भी नहीं आते थे कहने पर ही सुनने को सुनते ही नहीं थे कान भी खराब आंख भी खराब सब खराब है और जो उनको कह दिया तुम्हारी खराब है, तुम्हारे कान खराब है, तुम बिल्कुल बेकार हो तुम्हें मंदिर नहीं आना चाहिए तो दूसरे मंदिर के हमें फोन करवाए आप
मंदिर क्यों नहीं आए।
ये था आपके प्रचार का कैसे गएआआको मन का केशन बढ़ते जा था
कनेक्टेड एंड बुधभक्ती करनेका प्रयास कर सीख है बट उनके पेरेंट्स में फैमिली में शुरू होते हैं कि वो ट्रेन करते हैं या कुछ गलत काम कर से उनके फैमिली मास्ेयरमेंबहुत नेगेटिविटि क्रिएट होती है तो उससे उनको पॉलिटिक तो हम उनको क्या सजेशन दे के वो जो है इस सिचुएशन को हैंडल कर सके और परसे
आज की बात छोडो 5 साल पूर लाल महाराज को भी राज महाराज के पिता गा छोडो भगती उनको तो बाहर की चोटियों से फेका आती चले उनके शरीर आपके किसी के छाती चला आप से भी ज्यादा कठिन ज अपराध राखेकशमकृष्ण भगवान उन भक्तों की रक्षा करते जो कि या
ऊपर से बनता है ऊपर ऊपर से तो कई बार भक्तों में कुछ प्वाइंट दिखता है, कई बार करे करना पड़ता है या कई बार को परेशन करना पड़ता है। 2 जिस में बहुत बुरा माना है तो हमें क्या करना चाहिए
देखना है को कनेक्ट करते हैं तो बुरा मान ले मनिटिविनुमरतका 1 उदार अर्थ है कि हम दूसरे की सारी शिक्षा स्वीकार करने को तैयार है। हम अक्सर सोचते हैं i no b कुछ मत बोलो बोलो मे सुधार की आवश्यकता है, यह विचार रखो
और अगर
कोई आपका उपाय दे रहा है लीज चुनके पदे ने कहा आप सोने को बल से स्टूल से भी निकाल सकते, अगर कोई अच्छी राय दे रहा है तो मैं स्वीकार क नहीं मे का इतना uc की सदा फिर सर को क to per se aa a se sata thank you।
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