Vyasa Puja Ceremony 2024 | HH Gopal Krishna Goswami Maharaja | ISKCON Delhi | 30.08.2024

The video records the Vyasa Puja ceremony held on 30 August 2024 at ISKCON Delhi, dedicated to HH Gopal Krishna Goswami Maharaja. Multiple speakers—devotees, senior Vaishnava leaders, and organizers—offer greetings, recite Sanskrit verses and Hare Krishna chants, and recount the guru’s life and service. The narrative highlights Maharaja’s 41‑year association with the community, his role in establishing 20 temples in North India, and major projects such as the Kurukshetra program, New Vrindavan, and the Govardhan Eco‑Village. Senior figures like Radhanath Maharaj and Lalanath Maharaj are introduced, expressing support and urging continued work. The ceremony blends devotional singing, scriptural readings, and announcements of future initiatives, inviting participants to support ongoing temple construction and community service. The overall tone is reverent, celebratory, and motivational, aiming to inspire collective effort toward the guru’s unfinished projects.
Chapters
रिषि कुमार प्रभु नरसिंह कब का सुमधुर
शब्दों में पाठ करेंगे हर रेकृषणानरसिमकबजम बक्षे
परखला देनौधिदमपुरा सर्व रक्षा गरम पुण्यम सर्वो पद्रभनाशनम सर सम पत क रम चहिवस्वरगमष कम भ्यातवादसिमहंदवशं है मसिममासनस्तितम विता स्यंत्रणयनमशरदिन दुसमप्रभमलक्ष्मिया लिंगिदवामहंगम विभु दिविरुबाश्रितम चतुर भुजमकौमलांगम स्वर्ण कुंडल शो बि तम सरजशोबिरसकतनकेय सं काश पिता निर्मल सम indra disurmassorni में तो रक्षा सं भव सर्व गस्थमबवासफलमेरक्ष तु्ध्वनिम हमें दरशौपतोसोमसोर्यनि लोच नहा में हरि मनि सि चस्तुमलक्ष्मी मुख्य प्रिय सर्व विद्या दीप पातो सिम न म म वक्त न सदा प्रलाद में दम कंद भोब्रदनंदगर दिव्यास्त्र शौविदबुजरसिमपाधु में बुझ कर में देव बरदौनसेमपाधुसरबत साथ यच्च निवास पातु में हरि मध्यम पाधुराबक्षुक्षि वि म तु हरि स्वनाभिब्रह्मसंस्ुत ब्रह्मांड को क्या यस्या सपातु में गति मुख्य में गोख्यानामंत्राणा गुख्यरोबद्रओरो मानो पातु जानों ने नररोपदरजंगपातुधरा भार हरतायसौंदरगेसरी सुरराज प्रद पातु पदों मेंद्रहरेश्वरह सहस्रशिर पुरुष पातु में सर्वस् मनोगपुरदपातु महा विराग्रज महा विष्णु दक्ष ने तो महज वास्तु न कहा पश्चिम पतुसरवेशोदशमेसरबतोम कहा से मा पातुबायब्याम सौम्या भूषण विग्रह इशान्या पादुभद्रौमेसरव हा संसार भय पातु मृत्यु मृत्यु केसरी से मबजमप्रखदमखमंडितम भक्ति मान पडे नित्यम सर्व पाप प्रमुद पुत्रवान धनवान लोग दीरघायरपजायते यम यम का मयतकममतंतमप्रापनोत समय सर्वत्र जयमपनौतिसर्वत्र विजय भव भूमयंदरिदिव्यानम ग्रह बिन वारण वृश्चिक सम भोदविषापहरनंबरम ब्रह्म शान दोरो सारण गरण शुभ दिन देवा सुर भुक्ति मुक्ति श्री पटेल स्मद्रस्यमंदरसि अने मंत्र राजेन कृत्वा भस्म मंदर प्रयास्त तस्य जप न तु दम नरम मंत्र नरसिम् तस्य तु तना व मन चिंतित तो सतत चपनौतयसमझयंगरजनदम गरजयंदमनिजबुज भडनमस्पोदयंतम तन दम देप्यंतनपयदम दम दम दम दम संहरंतमभरनदम वे चंद वोनयंतमकरनगरशतेर मा में magadh गुरु राज
की प्रसन्ता के लिए
उग्र विराम महा विष्ण ज्वलंत सर रसिमहमभेषणमभद्रम मृत्य मृत्यनवाहम
a
s
सा ग्रजतमसहगणरगुनतान वित तम सजीव
कृष्ण चैतन्य देव कृष्ण पादम ललिता शिवशानितसिदुदीन 2 जगत पते गोपेश गोपिकांत राधा कांत नमस्तुते तब तक अंचनगौरंगेराधे वृंदा वनेश्वर विश्व भार सुदेवेप्रणवहरवंचा कल पत्र व्यस्त कृपा सिंधु व पतितनमबान्वष्ण वे ब्योन चैतन्य प्रभु नित्यानंद सभी जो भी बैठे हैं गदाधरशेवासदिगौर भक्त विन्दा हरे क्रिष्ण हरे क्रष्ण कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा हरे हरे
हरे कृष्णा 1 बार सब लोग हमारे साथ बोलिए गुरु महाराज का प्रणाम मंत्र नमाऊपालायकष्णप्र्ठा
श्री गोपाल कृष्ण गोस्वामी
दा वा डिवाइन ग्रेस गोपाल कृष्ण गोस्वामी शिलभगतपादासपूरा महा महोत्सव की ज तो आप सब लोगों का फिर से 1 बार हृदय की गहराइयों से स्वागत और अभिनन्दन है। आज ये बहुत ही पुनीत दिन है जैसा आप जानते हैं यह हमारे गुरु महाराज का जो जीवन है, 1 पुस्तक है प्रभुपाद जी की सेवा की, 1 पुस्तक है। कोई आदमी अगर यह सीखना चाहता है कि प्रहुपाजकी सेवा कैसे अहेरलितकी जा सकती है, तो उनके जीवन से सीख सकते हैं। हम लोगों का उनका सौभाग्य से संपर्क पिछले 41 साल से रहा। अब दुर्भाग्य कहिए 5 मई से फिजिकल सत्संग नहीं है। लेकिन आध्यात्मिक सत्संग हर पल हम उनके साथ जुड़े हुए हैं। और इस व्यास पूजा की तैयारी 80 साल मनाने के लिए हम आप सभी लोगो के साथ बड़े उत्सुक थे। लेकिन प्रभुपाद जी ने अर्जेंट कॉल किया उनको प्रहुपाजी की सेवा में वहां पहुंच गए हैं। फिर भी हमारा उत्साह अपनी बुलंदियों पर है। हम किसी भी प्रकार से उनके दिए गए कार्यों को जो उन्होंने उठाया था नार्थ इंडिया के लिए, जो उन्होंने 20 मंदिर बनाये थे, दिन दुना चौगनी रफ्तार से उसको आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने हम लोगों के लिए कुरुक्षेत्र का कार्यक्रम छोड़ दिया है। आप सभी लोगो से यहाँ जितने भक्त बैठे हुए है। प्रहुपाजीजब आये थे इंडिया में, हमारे अम्बरीश प्रभु को लेकर, तो बम्बई उतरे बम्बई दिखाया बम्बई के बाद दिल्ली लाया, दिल्ली दिखाया। फिर उनको कुरुक्षेत्र ले गये थे, उस पिक्ष के नीचे ले गए जो सर्वर के तट पर है, जहां पर भगवत गीता बोली गई थी। तो ये प्रहुपादकाटरीम प्रोजेक्ट था। और बहुत दिन से हमारे हेजोलनेसराधानाथ महाराज जब शुरू में आये थे इंडिया, तब से ही प्रयास रत थे, सुखदेव महाराज वहाँ पर आये थे बहुत लोगों ने, फिर बाद में हमारे गुरु क्षेत्र के प्रेसिडेंट बहुत दिन से लगे हुए हैं। उस सेवा कार्य, उनके दोनों बच्चे उनके साथ लगे हुए हैं। वह प्रोजेक्ट अधूरा है। आज इस व्यास पूजा के माध्यम से आप सब लोगों के चरणों में विनती करता हूं। ये उनका अकेला प्रोजेक्ट नहीं है। हम सब लोग मिल कर के अगले साल उसका उद्घाटन करेंगे। इस कानपुर क्षेत्र की। आज आप जानते हैं हमारे गुरु जी का जो जीवन है वो इंसपरेशन की 1 झांकी है। वो अगर जैसे प्रभुपाद जी सी से प्रभु महाराज जी मिलते थे। तो वो पूछते थे वे गोपाल। अगर उनके पास कोई पुस्तक नहीं होती तो छिपते थे, आते नहीं थे सामने। मतलब अगर वो आये है प्रहुपाजीके पास तो किसी रिजल्ट के साथ आये हैं। और हम लोगों ने भी ये देखा है की लोग गुरु राज, गुरु राज, कोई मतलब नहीं, लेकिन अगर कुछ काम करके आओ बुला पीस थपथपाएंगे के अन्दर यह उत्साह की। 1 बहुत बड़ी प्राण दायनी शक्ति थी। कोई आदमी एकदम मरा चूरा हो जिसके जीवन में कोई उत्साह नहीं है। अगर महाराज का स्पर्ष हो जाता था, बड़ा उत्साही बन जाता था। ऐसे महा मानव के आविर्भाव तिथि पर आज हम सब लोग एकत्रित हुए है। हमारा सौभाग्य है कि हमारे बीच में इस कान के वरिष्ठतम और बहुत ही लोकप्रिय महाराज लालनाथ महाराज जी उपस्थित हैं। उनके बारे में। अगर हम आपको बताएं जितना ही बताउंगा उतना कम रहेगा। क्योंकि जब इस कान में नहीं आये थे तो दाढी बाड़ी रख कर के पहले ही आ गए थे। भारत भ्रमण करने के लिए। ऋषि के द्वार पहाड़ियों में कहाँ कहाँ यात्रा की। अंत में घूमते घूमते ट्रेन में किसी ने बैठा दिया, वृंदावन चले आये और जब वृन्दावन आये तो प्रभु पाजी से उनकी मुलाकात होगी। फिर बंध गए प्रभु पाजी के पास। प्रभु पाजी देख कर समझ गए कि कोई भीषण व्यक्तित्व है, इसे छोड़ना नहीं है। बांध लिया प्रभु पा जी ने, और तब से लेकर अब तक न्यू वृंदावन प्रोजेक्ट बनाया था कितना महाराज ने। उसको भी, क्योंकि ऐसा लग रहा था न्यू वृंदावन इस कान से निकल गया है। लेकिन महाराज ने प्रयास करके उस प्रोजेक्ट को अन्दर ले आया। स्कान में दिया। न्यू वृंदावन नाम सुनकर आपको आश्चर्य होगा। इसी प्रकार की साथ पहाडियां जैसे वृंदावन में है वहाँ पर अमेरिका में बनाई गई है। बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। जब कभी स्वप्न देखना अमेरिका जाने का तो वृंदावन जरूर जाइएगा आप लोग और उसकी जीती जागती जो मूर्ति है, प्रतिमूर्ति है इन्होंने उसकी स्थापना गोवर्धन इको विलेज में किया है। जब बम्बई जाइए तो राधा गोपीनाथ का दर्शन तो करिए ही करिए। लेकिन आप लोग इनके द्वारा इनकी कृति का व्यक्तित्व देखने के लिए इको गोवर्धन विलेज में जाइए। महाराज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने जिन लोगों को भी दिखा दिया है वो भी 1 से बढ़कर 1 दिव्य आत्माएं हैं हम लोगों के बीच में गौरांग प्रभु आये हुए हैं। आप जानते हैं टाकआफटाउनहै यूट्यूबर्स लोग उनको सुनते रहते हैं हम और उनके और 1 शिष्य है गौर गोपाल प्रभु जिनसे तो बात करने का समय किसी को नहीं मिलेगा। बहुत बड़े व्यापारी हमसे सोर्स लगाते रहते है। गुन को बुलाइए हम लोगो के बीच
में,
हम लोगो के बीच में श्री धाम प्रभु भी है। हम लोग उनका स्वागत करते हैं। भक्ति ब्रजेंद्र स्वामी महाराज हैं, प्रचारक महाराज है अभी हमारे मित्र है
स्पीक माइक
माइक तो अभी महाराज जी बोलेंगे
हम
लोगो के बीच में महा मन प्रभु आये हैं उनका भी हम धिरदयऐसीस्वागत करते है। हरि हरि बोल्ड महान अब आपके बीच में हिजहोलिनेस राधानाथ महाराज अपनी दिव्य वाणी के द्वारा हम लोगों का मार्ग दर्शन करेंगे प्रेरणा। देंगे की गुरु की सेवा बापू में ही नहीं बल्कि वाणी के माध्यम से ज्यादा की जाएगी। तो इसलिए आप उनका श्रवण कीजिए। is wolilesraधnas mahragकejआवाज गुरुदेव कृष्ण रा गुरुdevagoplकरिsण maharagtrlgo
makan tmedandsagananjana chala kaयachकsुरुili na tसमis्रिपुरपै न म न मा ओम विष्णु बताया कृष्ण पृष्टायबुदले श्रीमते बपटिदिदनडस्वामी थे नामेन
नमस्ते
सरस्वति देगे कौरवान प्रचारि ने nirpishesasuybadi hstdesधaरine on wusnपdayakisna pristayabutlे श्रीमते गोपाल कृष्ण गोस्वामी इटिनामिने bnckptduascakripa sindubचापतथानm पे न मो नमाहाश्रीकृष्ण छ तनयप्पुणत्यान sidaddhasidigodinda हरि कृष्णा हरि कृष्ण रशन हरि हरि हरि राम हरि रामा रामा रामा हरि हर
be more ordibpeople o,
we have gathered today for the truly, historic occasion ave not only celebrating the adf aniversary of the appearance shivakopocrishnago swami maharagebutcelebrating the first viaspujainseperation from his
फिजिकल prices हम यहाँ एकत्र हुए हैं न सिर्फ, आज सिवा अविरभाव वार्षिक बनाने के लिए, परम पूज् से गोपाल कृष्ण गोसा महाराज व्यास पूजा के उपलक्ष में अपितु, सर्वप्रथम व्यास पूजा, जो कि महाराज के वियोग में हम मनाएंगे
in eight ninety six, she leboptivinoltakor began the preaching of secatangimahapra s teaching, the wester world by sending his book, the teachings in life of lord catania to the makil university in muntra canada, 1896 इस फिल्म
में शिलपक्तिनऔरठाकुर ने सी चेत्र महाप्रभु के प्रचार का उनके संदेश का प्रचार उसको प्रारंभ किया था। श्री चैतन्य महाप्रभु, उनकी शिक्षाएं एवर जीवन के ऊपर इस ग्रंथ को मैकुल यूनिवर्सिटी मोंटियल कैनाडा में उन्होंने भिजवाया था। इस से चैतन्य गौडिया सिद्धांत का प्रचार प्रारंभ हुआ।
be love at four charge is vines स्वामी प्रभु would very often with great joy remember that on this historic year, eighteen ninety six, she ll proper said that he took burton this world to for fal the mission द शीलभक्टीविनो ठाकुर
है स्टेब्लिश शील भक्त ठाकुर ने जिस अभियान की स्थापना करी थी तो शीला प्रभु पद हमारे प्रिय संस्था पगाचर बता दिया करते थे कि ठीक उसी साल उनका भी अविर्भाव हुआ जिस प्रकार से स्व चेतन महापर्व के अभियान की पूर्ति हो और शील भक्तिन ठाकुर ने उसी साल ये ग्रंथ इसका प्रकाशन किया था और उसी साल शीला प्रपात का आविर्भाव
हुआ था
और अक्सर आनंद के साथ ये बता दिया करते थे स is is
nineteen twenty? two sur, the ropa was given the orer to for fill this vision of sri baktivinaoshecatn mahapuntbyhisguru
dan?
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

