सुदामा ब्राह्मण कथा ||Why is today's society dissatisfied Lecture | SB 10.08.03 || 12.08.2017

In this extended lecture, the speaker recounts the ancient tale of Sudama, a poor Brahmin and childhood friend of Lord Krishna, emphasizing Sudama’s humility, devotion, and the generous reception he receives from Krishna despite his poverty. The narrative is used as a lens to critique contemporary society’s pervasive dissatisfaction, materialism, and loss of spiritual values. The speaker contrasts Sudama’s contentment derived from sincere bhakti with today’s relentless pursuit of wealth, status, and external validation, arguing that true fulfillment lies in selfless service, devotion, and adherence to dharma. Throughout the talk, the speaker weaves scriptural references, personal reflections, and moral exhortations, urging listeners to adopt a bhakti‑oriented mindset, practice humility, and reject the endless chase for material comforts that fuels modern discontent.
Chapters
अईसा ही कतन लिता है। इसलिए विश्वासिय ठाकुर उदे करते हैं कि किस भानावित में सारी ज्योग को मिलत जूलकर पात करना चाहिए। जो सदों में आँखे या पात चाहें जो भी अन्हो करें। मर्व तो अगर याजी 21 का एक मात असवर करना चाहिए। विश्वासिय स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्ज्विन पर्पुरे स्टार्� अच्छा पातों की तुम्ही मुझी के किष्ण कता है सच है योड़। आपने के लिए भक्तनी इच्छा है कि किष्णी का नाम भी जीवर है। ये आप जिन्दस्यों के लिए क्या भी कर रहे हैं। हमारा भाव होने के लिए हैं। हम कुछ नहीं करते हैं जिन्दस्यों के लिए बनाएं। किसी नाम भावत अपने लश्वें से कर शिर्वन दावधा के दैने नौस पर्दम में वहाँ पिकाता होगा। वहाँ पिकाता होगा। वहाँ पिकाता होगा। वहाँ पिकाता होगा। वहाँ पिकाता होगा। वहाँ पिकाता होगा। काचे ने प्रविश्ण होना नहीं है। असकी रोहने वहाँ मही है जो बग्मान भी पलों का धार्शक्र करती हैं। तो मानना करती हैं। वो है असकी रोहने। और असकी रोहने वो है जो बग्मान के सेवां में उठ्यों करता हैं। तो तुम्हें स्विर्भी के हर हाथ पावां ایسے دہائی میں پریشان مرحل نے کہا ہے مجھے پسند ہوں یہاں ہمیں بھگوان کی اور لیڈاوں کا وعلانت سنائیں کیونکہ بھگوان کی لیڈاوں کا وعلانت سننے سے آنے نہیں تھا تھا ہے نہیں تھا تھا آدھے کی ہائی نام کو کھڑتے ہو روج کھڑتے ہو آج سکونوں میں پڑھتے ہو تو چھوٹی کے راہ دیکھتے ہو چھوٹی کے راہ دیکھتے ہو چھوٹی بن جائے تو بڑے بڑھو چھوٹی بڑھو چھوٹی بن جائے تو بڑے بڑھو چھوٹی بن جائے تو بڑے بڑھو چھوٹی بن جائے تو بڑے بڑھو چھوٹی بن جائے تو بڑے بڑھو چھوٹی بن جائے تو بڑے بڑھو چھوٹی بن جائے تو بڑے بڑھو چھوٹی आप उनके चारी मिलते हैं, بن جائے تو بڑے بڑھو چھوٹی वखालत करते हो, بن جائے تو بڑے आप بڑھو چھوٹی एक एक मुख मौन بن جائے تو ب� बान करते हैं, पर आप कभी एक दिन भूल देखते हो, कोई भक्षन आया है, मुझे हारी विश्व मांद से शुकीरो एक भूल देखते हैं। क्योंकि अम्मा की नामों का उसकार जिन्दा करो, ताइंका मैं तो द्यावाद्विकी अच्छी ख्यारी वो है पर लोगों देव की विवन को पर्मान ते विष्मन अगर करना चाहते थो पर्माने की ख्यारी विष्मन पर सामते हैं तो विष्मन पर सामते हैं तो ये सद्भाई में जुगेव स्वाभी सिदामा प्रामन की कता सनाते ब्राह्मण जो है अच्छर प्रीवी होता हैं क्योंकि ब्राह्मण है उम्हार स्थिति में संप्रुष्य है ये नहीं कि उम्हें लोग वैसे करते हैं मुझे नहीं आप ब्राह्मण मते हैं तो सुधावा ब्राह्मन तो प्रवाह्मन प्रवाह्मन प्रवाह्मन प्रवाह्मन पर घ्यादने घ्यान बहुत घहरा था उनके बाद मेरी साथना घ्यान बहुत घहरा था ये साही रूटी रहती थी विश्व करती थी नाम नामी के पती बड़ी अधिर्देव जिसके मंद में एक भाव है जाता था अधिर्देव लेने के उनके पास एक चोड़ा कमणा था पार खान दे सकता नहीं। आप उसके लिए खाने कर सकते हैं। उनके पास एक चोड़ा कमणा था। चोड़े कमणा में पत्यों पत्यों लाए गए थे। उनके खाने के लिए बहुत काम जोड़ी गर था। कई ब पत्ति को पढ़ा था कि तुम्ही पत्ति का बड़ा धन्यस्य वित्र हैं बच्पत का वित्र जोई समे वहां का मुझे वास्त करना है पड़े भाषन में यह नाम क्या था तो यह पढ़ा था कि ये लैश्वी देवी की भी पत्णी हैं लैश्वी देवी की पत्णी की पत्णी हैं तो पत्णी ने कही बार कहा उन्होंते धहनी प्रेसर पर दिली पर दिली आगे पत्नी का भाव यह है साथ धन्य मुझे तो मिलेगा तो शेर कुछ ला हो जाता है। अपने आपके देखते होगे अगर आपके खाटनां में बड़ी धन्य मिलती है तो आप उसे दन्दियों लोग पुछ दियों पैंट लोग सोचते होगे में भी कुछ बात हो जाएग एक वध्धनी कृष्णम मिल जाये तुम्हार श्रीदेविजी के पती हैं तो हमारी तो आर्टिक स्थित्री है सुधर जायेगा पती के बंद में एक और भावता है पती के बंद में एक भावता है अगर नहीं कृष्ण भगवान से दिलों कि स्वयव भगवान है तो मेरा ये था पती का भाव, पती का ये भाव नहीं था। तो मेरे ध्यानी मिस्र को गिलूंगा तो तो ध्यानी प्राथ नहीं होगी, तो पच्चे कार गिलूंगा। पती का भाव था। कृष्णा, धवान गधार से ये लगी वो भागे बाद वेवते स्वभाई गिलूंगा। तो � तो आगे पे तरफ पती मान दे जाता था जैसे में तो मुझे मुझे तुम्हें तुम्हें तुम्हें खाली आथ मुझे खाली आथ करता था कुछ साथ मिले जाने के लिए तो पती ने मुझे खाले बुलडा कुछ भी नहीं मिला तो पे तुम्हें तुम्हें दे सके तो मुझ पती देना तुम्हें परोज के पकानों में गए गए तुम्हें परोज के पकानों में गए गए तुम्हें परोज के पकानों में गए गए तुम्हें परोज के पकानों में गए तुम्हें परोज के पकानों में गए तुम्हें परोज और के पकानों वद्धी में चारा में गए तुम्हें परोज के मुझे बुला परोगा कप्रे में पात लिया कप्रे पात लिया और वद्धी में पात लिया मती चला किसमा कोंचे कोंचे के लाथ वद्धी में पात पात लिया चला के लाथ के लाथ चला के लाथ चला के लाथ चला के लाथ चला के लाथ ला हम लोग इसके आशर में करते हैं। आशर में करते हैं। आशर में करते हैं। आशर में करते हैं। आशर में करते हैं। आशर में करते जो हैं। बेग मदार पर आशर सर्वृता में करते हैं है। जस व्यक्ति में बाद एंद्यों परभश हो वो उस व्यक्ति नहीं योगी रहता वो सिखती हैं। दुरूं लेनी की सुधानी की माने दुरूं बाद एंद्यों परभश तो सभी गुरी गुरी के आश्छन में भगवाद भी दे और सिनाम ब्रागन दे और दोनों मेरे बड़े विल्मरचरत के साथ उलोगी से एक बान से जुरुदी दे उन्हें भेशे दे जखना से ये लेकर आओ उससे शुदा रखे एक जुरुदी दे سیدھاں ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ ڈھونڈ बढ़ पर भी बाते करने लगे आपने येज़ क्या येज़ क्या तो मैं इसको ख़लोगी चर्चा हूँगी सुधानमा मां मुझे ये सुधानमा मुझे चर्चा हूँगी मैं जिस लाख्ष की जीज़ आया हूँगी पती न पुझे देखा है तो चर्चा कैसे करूँ स्थाने मजर को मैंने के उसमाल्मी के पर दामां के जो पे थे, कहां जाता है इश्वा सवा पूधा का खेंदे इश्वा जो भी नहीं थी। इश्वा जो हर के हेंदे में, आप एसे जिन्दियों की जैसे बुल्लो कुछ बोलने की आवश्यक्त नहीं है। कुछ समझाते हैं क्या है उनके लिए और आयात्मन्ती चाहिए। महावेश्ट्रियों प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्रत्माना प्र तो वो मीं दर्जान की जीवना नहीं पेड़ना करते हैं। मैं अब आपको ये पेड़ना देता हैं क्योंकि आपी इच्छा हैं। तो कई हैं इनकी कोई इच्छा नहीं हैं। कई हैं हमारे मंदर के परोशीओं के जिलावा तक भी आये भी हैं। आप अनुबर हैं। कई ब इसलिए हमने साथ को नत्रन देते हैं। आवावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावा तुम इंदी जोग से आए मने मिल ले, फिर भेट लाया मिल ले। कितना मज़ारी से गए था। अखेर शूरा चार मिठी ले ले पड़ी देखे थे। पर सुदाम को पता था सुदामा को परला जाता हैं शान्मुभी चूला कोई भेड में पड़े वाले जीवर भूल देते हैं तो बहुमान पर चाहते हैं सुदामा तो के लिए कोई स्राही नहीं इन्हीं जोड़ से आये है तो बड़े ये हिच्चकते जो भोरे सुदामा देता हैं हाँ आखेर प्राज्यू भमान से खानते हैं भमान से अच्छा खानते हैं अह इतना स्वाद इतना अच्छा घीता भमान कहते हैं घीता में भतनां पुस्मां फलं सोयं जोन भक्तियां पेम और भक्ति के साथ अगर कोई जल भी बुद्धान पर करेगा सर्शी करते लिए हमारे लिए कहते हैं जिन्दरी जीता आपके इन भुड़े का तुम्हें में जब भी चाहते हैं सर्शी करते लिए हमारे लिए हमारे लिए हमारे लिए हमारे हमारे लिए हमारे लिए हमारे लिए हमारे पहले ल चार मुझे चुना एक मुठी देने पर हमारे खुशीने से काड़ गया जो दूसरी मुठी देने गए, मुझी बद्दी रुभी देने गया उत्तू. जब स्टामा परामें में महें अगर प्रवेश दिया, तो पहले भी तुम्हारों से तो बड़े पिसार और चौती द्वार के बीचे एक बड़ा प्रुला कमरा था जिसमें रुद्मिंद जी नैकी जी अपने प्रति प्रिष्णा नहीं था और वो भगवान ने किदामा ग्राण में लेखा आथे होगे उस उन्हें प्रिछांग गए थाने ये तो मेरा बच्चमा का दोस्त है तो � और गए नाम नाम भी जड़ा, उन्हें गले लगाया. जब उन्हें गले लगाया, अनकी जो सेवत थे, वो आश्च्रीव हो गए. उन्हें लगा गले, उन्हें गपे, ये तो परभीरे से कपड़ों में हैं। ये पड़ाने कपड़ें। बहुत भगवान जो आज सोला सार्मा आया थे। उन्हें गरे मिलते हैं। जाएँ भगवान मिलती हैं। तो बहुत भगवाननें से गरे लगाया। गरे नहीं लगाया पर इसमें उठाकर चर्ण के दोय समा ब्रावित्ता उचा स्थान है। मात्मविद्भाध्यमुनतु ये चार पढ़ना और चार आश्ण चत्रवर्णमया सुच्छन कुना ब्रह्मा पारण सुच्छन। कुनों के धार पर ब्राह्मनों की सुद्र की लागी हैं सिर के साथ शत्यों की भावों के साथ भैशों की चेट के साथ सुद्रों की साथ आवें कभी देखा है किसी साथ श्रीर शर्गे बिला प्रापा जी कहते थे किसी प्रापा जी कहते थे किसी प्रापा जी कहते थे किसी प्रापा जी कहते थे किसी प्रापा जी कहते थे किसी प्रापा जी कहते थे किसी प्रापा जी कहते थे किसी प्रापा जी कहते थे किसी प चुड़े का चाहिए वाले थे वो पिरियर हो गया एक मुणी भावुद है उसके मुणी की दिवाज़ी है तो एक पर आपने देखे आश्मानी बीलाव का वानन किया देखे पशार सिनाव ब्राह्म ने सोचा हम बचें वापस वालें तो आपने दार्भार कोम सोच वेथे मैं किस मूदि साथ पर जाओता हूँगा। मैंने तो किस मां कही नहीं। मैंने पे की दूर से आया। फती प्रेनापर, धरी वित्वस तो भेले। धरी वित्वस तो किना आजन की। शरंद होए। शरंद होगे थल पापे से। मैंने चिंदा देता। मैं क्या बोल� तो ये सोची सोची और इन्हारे तरह सोची हैं। उनके घड़ पांचे ते पहले भवाने नर्णे कर लिया था। भवान इतने खसन थे सिदावा ब्राणमे सेवा के साथ भवाने नर्णे कर लिया था। मुझे समय देते नामां केस पहुँच आया है मुझे अधिया जीती करते हैं चातुरी राव मुझे नाम चार पड़ी स्थितियों में ये बच्चों में चार पड़ी स्थितियों में लोगों में चल जाते हैं कौन है एक अधियों धन्चे बीच रहे हैं और चोथी रोगी बिले थी तीसा धिध्यान से कुछ अपना नियान पर देना है चानी जान कुछ नियान पर देना है पर सच्चे श्रीव से धिध्यान से ना पर देन पढ़ा था तो वह निर्णे कर दिया था लावा ब्रादे मेरा इतना प्रियाव भाक्त है मेरा से एका धन दो� कि जो इंद्र देवता है वो प्रिश्चितुना ने करता है। तो ब्रह्मान के लाव ब्राह्मिण के खैल आपने से पहले ब्रह्मान में इस लाव में पुच्चिया तो क्या कर रिया था तो हैल अलग आ जा गया था। उसी पत्ती कि एक तपी इस आड़ी में थी उन्हें ध सज्यों की घेनों के साथ, सज्यों की सावी के साथ। और गल में अनेही द्वार्भाव थे। मैं पत्नी में देखा, पत्नी ने सोचा, ये कैसे सभव हो गया है। ये सभव होआ है, मेरे पती एक गिर्णे प्रियर प्रियरी पास। میرا پتی گیا تھا دوارکہ میں بھمار کو مل لیں. उनने मलगा होगा. पती ने बड़ा सभागे जिया पती का. पती की पती मिला. देखो ये नयम बहल. पती अंदर है प्रमया देना पती से मुझे पाये कि ये संभव हुआ है कि तुम्हें पास करते हैं तुम्हें पास करते हैं तुम्हें पास करते हैं तुम्हें पास करते हैं तुम्हें पास करते हैं तुम्हें पास करते हैं तुम्हें पास करते हैं तुम् تو भवानकी स्वता नहीं कीगा है तो हमने इस नावर्भाव की तरहा से क्या समझना भूलती है नहीं समझना रजिये भूलती है तो यहाँ पे सत्तुष कहना चाहते हैं बहुत इन समाध में कोई भी सत्तुष नहीं है सच है जो اگر کوئی سمجھنے کے لئے کوئی سمجھنے کے पर अगर आम भवाज्य भक्त हो गए तो आज सिदी में सबस्तुर्श हो गए तो आपको चाहे कितनी सिदी में सबस्तुर्श प्राप्त होगे तो आप सिदी में सबस्तुर्श प्राप्त होगे तो आप सिदी में सबस्तुर्श प्राप्त होगे तो आप सिदी में सबस्त इसने नाम लग खुलो विदे श्रीरा खुलो विदे श्रीरा खोल के द्याले मना देते थे और बैच देते थे और दिन लाथ धवान के नामों उच्छाना के लिए देते थे हमें जो पड़बसी के लिए उच्छिना देते थे कहते थे देखो ना देव्यार नी खोल सोता है न प्रिसाहिराद हरे प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद प्रिसाहिराद मांगो मेरे लिए क्या हुआर चाहिए। वो तोला मैं जिसी जाने को कहा। मांगो क्या हुआर चाहिए, तुम्हें मैं उस लोग में देख सकता। तोला जिसी जाने कहा, अगर आपने लिए हुआर देना चाहते हो, तो ये हुआर दीजे, उन्हार जीवन में आपका तो यो बन है, वो जब बन पांत्रा में है, दख्ति का बन पांत्रा में है, तो सुधाम रंधन संतुलिष्ये। क्योंकि मन में कोई आज बानस नहीं है। तो सुधाम रंधन, मन में एक ही भाव था, भगवान की सेवा का सोच सकते हो, पूछ सकते हो, हम घहल जाएगे इस वोक्य में हम उगीन रख सकते हैं हमारा भहर बड़ा भहर नहीं है हम उगीन कर सकते हैं हाँ हाँ पिछे तो सब की होगी हैं हम देड़ों पर चलाते हैं हम सुर्थे नहीं आज पर देड़ों पर चलाते हैं अगर आप पुरा चान्दा रहते हैं तो जिन्दा के नारे चुनन तो आना चीज़ी हैं। तो हम सोच सकते हों। हाइं कि सुदावान प्रावान जीज़ी हैं। प्रावान जाते हैं अगर प्रावान जीज़ी नहीं के माया में चुनन प्रिवान रहते हैं। प्रा तो यहाँ प्रिश्वोत में क्या कहा जाता है प्रिश्वोत मा जुच्छालने के लिए हसी वाली है जिसमें आप हमार के कुनों का बनन करते हैं तो वाली द्वानामें क्या करना चाहिए हैं क्या करना चाहिए हैं द्वानामें क्या करना चाहिए हैं जिसमें कहल क्लास में मां ज्या करेंगे मां माना करेंगे तो मैं चुट्ड़ जागें। तो यह बात सच है जाओ, जासन जाओ, तुछ जाओ, तुछ जाओ, तुछ जाओ, तुछ जाओ, तुछ जाओ, तुछ जाओ, तुछ जाओ, तुछ जाओ, तुछ जाओ, तु� शनमास्मिरा आनी है कुछ दिलों में और दो, एक तो कथा पढ़ो और दो चाहिए करो इसे क्या नहीं होता है और अगर आप किष्ण कथा नहीं करोगे तो तीस थान जाएगी, क्या करेगी, क्या करेगी किसे का पुजरभार पुजरभार पुजरभार पुजरभार पुजरभ नस्व जागी है किष्ण द्वादा किष्ण कता प्रस्ट्वानिक किष्ण कता प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट्वानिक प्रस्ट् तो ते हाथों से लिमी पर लगा रहे थें जिवारों पर उसे लिए दिया। यह जब हम अंदर बिलाते हैं मैं आपका आपी बिलाते हैं। अब दुल्शेवा भी करेंगे। अरेला साथ की सेवा देखे। वहाँ पकब चलेगा तो वहाँ देखे। आप बर्तन मां जो घडड दो मां की तोड़ी नहीं हैं। जो मां की सेवा में जाओ। तो इन सेवा केने का भाव होना चाहिए। अमनी बनान करें कोई खाल नहीं है। यहां क्या जाता है। मैं भवान की स्विभावति चाहते हैं। अस्ति मन क्या है अस्ति मन वो है जो भवान की स्विभावति चाहते हैं। भवान की आदेश का जैसे भवान की आदेश भवान की आदेश अपनों काम प्राप्ट हो रहा है। क्योंसे ग्रंथ में भवान क्या चाहते हैं। सर्वा दर्वाँ पर दे जया हम तो हम सर्वा पांगे बे हो पर दर्वाँ चोड़ते हैं किसका ये मतलब नहीं आप इस नाम छोड़ दो इसाई जनम छोड़ दो स्वाध जनम छोड़ दो महिं दुया वर्ष्णा पर देते हैं किसका ये है सर्वा दर्वाँ पर � सब को उप्यो कर रहे हैं जिसके कमान की जबन हैं वो है जिवन की बूलता तो यहाँ अर्जुन मात्ये ने अदवाला भमारा चीज़ने करो तुम्हें आदेश रहा हैं जब कमान ख़बर पर हो रहे थे तो विश्णातन साथी अर्जुन अत्यांत हो रहे थ पर हमारे घीता के स्वणों का स्वणना नहीं दिया। जैसे हैं घीता के स्वणों का स्वणना नहीं दिया। उन्हें ऐसे ना करती जैसे हमारे स्वणों का स्वणना नहीं दियें। हमारे घीता के स्वणों का स्वणना नहीं दियें। पर एक गड़ी में हमारे घीता के स्व अन्काले लोग जो भवाने से जोने हैं। आगे कावियार जो सेर है उसे भवाने साने जो जानते हैं। अगर मंदर आते हैं, शात्र मंदर में है, मंदरा भवाने के साने जो जानते हैं। और रमायत में अन्काले लोग जो जानते हैं। जन्मस्मी भोडि शुब अपसर है जन्मस्मी के दिन कुमान करते हैं विदाइ विदाइ धर्मे से विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदाइ विदा� असूरों का बात करने के लिए असूरों का बात हो रह्मान और पिश्या पत्र जीवार करते हैं। भावाण आका ता गलावोड है रह्मान ताने के लिए पिश्या पत्र जीवार करते हैं। पिश्या पत्र जीवार करने के लिए भक्तों के उठार के लिए प्रत्याने ही रमे भख्ता जी. तो ये होना चाहिए वर्मान कहते हैं जैना च्रमण चामे दिविद्ध। जैना च्रमण चामे दिविद्ध। जैना च्रमण प्रिश्विन भगवान को हैं चामे दिविद्ध। जैना च्रमण चामे दिविद्ध। जैना च्रमण चामे अस्ति दिवि� भगवान हैं अस्ति भगवान हैं इश्वरा, पाल्मा, प्रिश्ना, सथिना, मुद्धा, राभ्या, मुद्धा, राभ्या, मुद्धा, राभ्या, मुद्धा, राभ्या, मुद्धा, राभ्या, मुद्धा, राभ्या, मुद्धा, राभ तो देता नहीं, देता नहीं हैं। देता देता नहीं हैं। तो सब परम भगवान के अधीम हैं। यह देता नामता क्या है। प्रस नामता क्या है। प्रस नामता क्या है। प्रस नामता क्या है। यह देता भगवान के अधीम हैं। अदि किनाये देन के कवाला देव निर्ने होता है तो देवता देवता है तरहम अन्मान क्या है तरहम अन्मान क्या है तो किस्तु अन्मान परम अन्मान से जो मादा प्योडर के देवता नहीं है तो पसकते केसु दुखा दुखा है तो जो बच्चे के समान नहीं चार हाथ सर्य वदि घेहनों के साथ उस पासने प्रकर हो रहे हैं। तो वासित यहीं देखता हैं। हां, मेरा पेड़ा प्रकर हो चुछता है। एक मौन दैयें से बच्चा है। वासित यहीं देखता हैं। प्रकर नहीं। मन मन में प्रकर से लाता हैं। प्रकर नहीं चलान देख मच्चे लड़ो किया हैं तो तुरांती उन्होंने अलाज मच्चे लड़ो किया हैं। बहुत बड़े बड़े अस्पूल आ आए हैं। चाप का बात हो गया। और मात्मानी माथा पिता सुर्फ कर देखें। मात्मानी मात्मानी मात्मानी मात्मानी मात्मानी मात्मानी मा खास कृपा जा पाते हैं। जो भजन के लिए जीना है। एक प्रसीदी जाया है। क्योंकि उन्हें भजन परबर्द उठा है। आज जब भजन उठा रहे हो, कैसे उठा रहे हो। दो आतों से। दूसरों का सीव लेका भजन परबर्द उठा रहे थे। माना पे छोड़े रुंगी के नाथों के लिए था तो सुरे परवाद वो जाया था। और हम जब बहुत करते हैं तो एक हाथ से दुसरे हाथ प्रास्व करते रहे हैं। अगर नहीं तो जो नहीं चाहते हैं। बहुत पहाड नहीं हिल रहा था। मैं साथ बहुत � ख़राऊगा तो बाहर गेलेगा नहीं। किसा लिए तुम्हारे से भी बड़े गेहराई की साथ हमार नीचे रहे तो देखते थे। कितने दिना दियें। साथ से बाहरा। और साथ बाहरा। और उन्हें नहीं बाहर। दीदी के वर्षा पर सुई थी इतनी दीदी से कि एक मान ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہیں ہمیں جنہیں مانتے ہی खल के दिन तम्हें मान सारे जान रहे करते हैं अप्योष्यत पता हूँ। नो गंद्रियों के सुर्धा से प्रापाच्छ रहे करते हैं। जल दुदर जाल में तम्हें मगडा से प्रापाच्छ रहे करते हैं। तो आज के लिए में उन्हें सुप्रेशन में सुभा नौ मले प्राभरी खलंडार में चरेते हैं। क्या करने लगते हैं। हावत प्रिजार्ण के लिए हैं। हमारा पाक्या है कि प्राभरी में हमें शुद्स देख दिया हैं। हमें ये सुप्रेशन को संधने का प्र तुम्हें द्यादे करते हों प्रत्में तुम्हें द्यादे करते हों सुर्वें तुम्हें देदी के साथ तुम्हें देदी के साथ तुम्हें देदी के साथ तुम्हें देदी के साथ तुम्हें तुम्हें देदी के साथ तुम्हें سائے سائے ڈھرائے ڈھرائے ڈھرائے ڈھرائے ڈھرائے ڈھرائے ڈھرائے द ڈھرائے ڈھرائے ڈھرائے ڈھرائے ڈھرائے हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्ण सेवा खेलोगे भवानी की पात में लेगी सेवा से बचोगे नाम की पात में लेगी हरी कुष्णा में अपने बदले के लोग जो होते हैं भवानी की पात में आते हैं आपको दिखा सुरता तर्ग्यान है कि सुरामाजी कौन से केड़े की पुरत बेशे हैं? नहीं नहीं पुरत बेशे केड़े की पुरत बेशे हैं पुरत बेशे केड़े की पुरत बेशे हैं पुरत बेशे केड़े की पुरत बेशे हैं पुरत बेशे केड़े की पुरत बेशे तुम्हारे कारण में नहीं करना तुम्हारे कारण में नहीं करना तुम्हारे कारण में नहीं करना तुम्हारे कारण में नहीं करना तुम्हारे कारण में नहीं करना तुम्हारे कारण में नहीं नहीं करना � मारा जी जब सुनाना जी भवान के साथ सिख्षा करना रहते हैं और उसके लिए भवान के साथ हुदा क्या भाव होगा और इस परासे बात्ति करते हैं और सिख्षा प्राप्ते के बाद सिख्षा प्राप्ते के बाद सिख्षा प्राप्ते प्राप्ते के बाद सिख्षा प्राप्ते के बाद सिख्षा प्राप्ते के बाद सिख्षा प्राप्ते के बाद सिख्षा प्राप्ते के बाद सिख्षा प्राप्ते के � आप सब भवनाम पढ़ते हों आप अपने एक जुड़ना नहीं चाहिए जब गंदों को चाहिए चाहिए जो गंदों को पढ़ोगे तो आपका भाव शुर्ष भावने लगेगा और गंदों को नहीं पढ़ोगे नहीं राखिगोगे तो आपका भावने कहा नहीं लगेगा � बहुत एक आकेशन बढ़ते जाएगा। बहुत एक आकेशन बढ़ते जाएगा। बहुत एक आकेशन बढ़ते जाएगा। बहुत एक आकेशन बढ़ते जाएगा। बहुत एक आकेशन बढ़ते जाएगा। बहुत एक आकेशन बढ़ते जाएगा। बहुत एक आकेशन बढ तो सब सेवा जो स्विखार करोगे सेवा के साथ चन्दा भी के लिए आता होता है। कहीं बात बात करते हैं। अब ये तुम्हें मानना पर चन्दा भी बात होता है। पर जिनने के घर कारण से पीड़े हैं। ہلے ہلے ہلے
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

