45 Years 45 Life Lessons | Success, Money, Health, Happiness, Legacy| Sandeep Bhansali Digital Azadi

In this reflective talk, Sandeep Bhansali walks through the 45 lessons he has distilled from his 45‑year life, organized into six chronological phases. The first phase focuses on self‑construction—building health, discipline, and mindset—emphasizing that health is the true wealth and that preserving personal energy through a blend of motivation and discipline makes one unstoppable. He stresses the power of consistency, the compounding effect of tiny daily habits, and the importance of gaining clarity through action rather than endless thinking, treating failure as education. The second phase shifts to the outer environment, urging careful selection of family, friends, mentors, and inner‑circle members; he highlights presence over presents, the value of forgiveness, and the need to let go of transient relationships. The third phase covers career building: creating systems that run independent of mood, delegating early, protecting reputation, and recognizing that money provides comfort while purpose drives meaning. The fourth phase teaches letting go of ego, avoiding unnecessary battles, saying no, and prioritizing peace and gratitude. The final phases transition from personal success to broader significance—focusing on impact, legacy, investing in experiences over material goods, and designing moments that leave lasting emotional impressions. Throughout, Sandeep blends Hindi and English, using a conversational yet motivational tone, and repeatedly circles back to the core message: build a strong self, choose the right people, construct sustainable systems, and ultimately contribute lasting value.
Chapters
आज अपनी लाइफ को जब रिफ्लेक्ट करता हूँ, तो देखता हूँ कि इन 45 सालों में क्या-क्या हुआ, क्या-क्या सीखा, और इसमें से अब आगे बढ़ने का जो रास्ता है, वो कैसे तय होगा? तो इस इट ओके अगर मैं आप लोगों के साथ अपनी जिंदगी के पिछले 45 साल में सीखे हुए 45 लेसन्स शेयर करूं। तो दिस आर द 45 लाइफ लेसन्स जो मैंने अपनी ज़िंदगी से सीखे हैं एट द ऐज ऑफ़ 45। मेरी ज़िंदगी के जो छह फेजेस रहे, उसमें से पहला फेज जो है वो है जहाँ मैंने अपने आप को बनाया, where I built myself और यहाँ पे थर्ड पर्सन प्रेस्पेक्टिव मैं भी बात कर रहा हूँ कि where You can also build yourself. Now, जब मैं कहता हूँ कि मैंने अपने आपको इस फेज में बनाया, तो मैंने अपनी health बनाई, मैंने अपना discipline बनाया, और सबसे important कहूँ तो मैंने अपना mindset create किया. इस phase of life में जो सबसे important चीज मैंने सीखी, या जो important चीजे मैंने सीखी, उनमें से ये कुछ हैं। The first lesson I learnt is health जो है वो असली wealth है और अगर health नहीं है तो किसी और चीज़ की कोई value नहीं है। आपकी जिंदगी में बहुत सारे problems हो सकते हैं जब तक आपकी life में health का problem नहीं है, लेकिन जिस समय आपका health का problem खड़ा हो जाए उस समय life में एक ही problem बचता है। तो मेरी ये सोच है कि उस लिमिट तक हम चीजों को ले ही क्यों जाएं सबसे ज़्यादा, सबसे इंपोर्टंट हम सबकी जिन्दगी में हेल्थ होनी चाहिए The second lesson I learnt is कि अपनी ताकत को बचा कर रखिए क्योंकि समय आप मैनेज कर पाओगे चीजें बदलेंगी, समय बदलेगा। लेकिन अपनी एनर्जी को आप प्रोटेक्ट करके रखिए क्योंकि जो भी रिजल्ट मेरी ज़िंदगी में आया है, ये केवल और केवल मेरी एनर्जी के वजह से आया है। तो दिस इज़ द लेसन जो मैंने सीखा है और मैं आप लोगों को ट्रांसफर करना चाहता हूँ कि प्लीज़ अपनी ताकत को संभाल मोटिवेशन से चीजें शुरू होती हैं, लेकिन डिसिप्लिन से चीजें कंटिन्यू होती हैं। और सिर्फ डिसिप्लिन वो है फैक्टर कि आपको उन एरियाज़ में लेके जाएगा ज़िंदगी की कि जहाँ पर मोटिवेशन कभी नहीं लेकर जा सकता। ये मेरी ज़िंदगी का लाइफ लेसन है कि मोटिवेशन से हमेशा चीजें शुरू करो और कंसिस्टेंसी जो है वो डिसिप्लिन से बनाइए। जब इन दोनों का कॉम्बिनेशन एक साथ आता है, तो आप अनस्टॉपेबल बन जाते हैं। आपको ज़िंदगी में कभी कोई रोक नहीं पाएगा। इन 45 सालों में जो चौथा सबक मैंने सीखा है, वो ये है कि कंसिस्टेंसी से मिरिकल्स होते हैं। सिर्फ ताकत लगाकर, जोश हम कभी मिरिकल्स नहीं कर सकते, हम चीजों को कर सकते हैं, लेकिन अगर अद्भुत कुछ अपनी जिन्दगी में करना है, तो वो केवल और केवल कंसिस्टेंसी से ही आएगा. आज मेरी परस्णल लाइफ में मैंने जो कुछ भी अचीव किया है, ये मात्र अ तो उसे लगातार लंबे समय तक कर सकता हूँ और ये मुझे अपनी लाइफ में रिजल्ट्स दे रहा है। पांचवा लेसन है कि हर रोज छोटी-छोटी आदतें बिल्ड कीजिए, छोटी-छोटी आदतें। जैसे मेरी एक आदत है कि मैं हर रोज सुबह 10 पन्ने किसी न किसी किताब के पढ़ता ही हूँ। इस एक आदत ने आज तक मुझे 300-400 क मेरी आदत है कि मैं हर रोज कुछ न कुछ नया सीखता ही हूँ। तो मैं कहता हूँ कि अपनी जिंदगी में अगर बड़ा बदलाव लाना है, तो बहुत बड़ी चीजें अपनी लाइफ में चेंज मत कीजिए, छोटी सी आदत डेवलप कीजिए। और ऐसी छोटी-छोटी आदतें आप अच्छी वाली अपनी लाइफ में लेकर आओगे, पता भी नहीं चलेगा छोटी आदतें। अगला लेसन जो मैंने अपनी लाइफ में सीखा है वो ये है कि हम सोचते हैं कि मुझे क्लेरिटी मिल जाए तो मैं आगे काम कर पाऊँ और हम क्लेरिटी के लिए सोचते रहते हैं, सोचते रहते हैं, सोचते रहते हैं। लेकिन मैंने अपनी ज़िंदगी में जब झांक कर देखा तो ये समझ में आया कि मुझे क्लेरिट मैंने सोचा बहुत कई बार A करूं, B करूं, C करूं, लेकिन लाइफ में क्लेरिटी सिर्फ तभी मिली जब मैंने A को करके देखा, फिर B को करके देखा, फिर C को करके देखा। तो ये मैं आप लोगों से भी कहना चाहता हूं कि सोचना अच्छी चीज़ है। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि बिना सोचे समझे चीज़ें करनी चाहिए, लेक आपको आपकी जिंदगी में क्या करना चाहिए, किस तरीके से आगे बढ़ना चाहिए, क्या आपके लिए सही है, क्या उचित है, क्या अनुचित है? ये सिर्फ तभी पता चलेगा जब आप चीजों को आजमाओगे, करके देखोगे। तो करो, तो जानो। अगला लेसन जो मेरी जिंदगी का है, वो है कि फेलियर हर किसी की जिंदगी में आता ह और फेलियर ये एक्चुअली एजुकेशन है। अगर कोई भी फेलियर आपकी लाइफ में आ जाए और उसमें से आप कुछ सीख लो, तो वो फेलियर फेलियर नहीं बचता, वो एजुकेशन में कन्वर्ट हो जाता है। और ये वो महंगी वाली पढ़ाई है, जो आपको कभी अपनी लाइफ में वेस्ट नहीं करनी चाहिए। कई बार जिंदगी में हो सकता है कि आपकी वजह से फेलियर आए, कई बार जिंदगी में हो सकता है कि आपकी कोई गलती ना हो फिर भी फेलियर आ जाए। किसी भी सूरत में जो हो रहा है उसमें से सीखकर आगे बढ़ना जरूरी है। इस फेज ऑफ लाइफ में जहाँ पर चीजें बनाई जाती हैं, जहाँ पर हम चीजों को कंस्ट्रक्ट कर कि आपका माहौल जो है, वो आपकी सोच, वो आपकी तहजीब और वही आपका फ्यूचर जो है, वो डिसाइड करता है। इस बात को गहराई से समझिएगा। आपका माहौल क्या है? आपके घर में क्या वातावरण है? बिजनेस में क्या माहौल है? किन दोस्तों के साथ उठते हो, बैठते हो? किन लोगों के साथ जीते हो? यही डिसाइड करेंगे कि आप सोचते कैसा हैं, करते कैसा हैं और उसी पर आपका फ्यूचर डिपेंडेंट है। तो अगर अपनी जिंदगी में माहौल सही नहीं है, तो उसे बदल लेना सही होगा। फिर उसके लिए थोड़ा सा कष्ट लेना पड़े, तो ले लेना चाहिए। इस फेज ऑफ लाइफ में जो कोर मैसेज मैंने डिकोड किया है कि आप एक बेहतरीन जिंदगी तब तक नहीं बना सकते, जब तक आप अपने आप को मजबूत ना बनाएं। Before you build a great life, build a strong you। जब तक मैं मजबूत नहीं हूँ, तब तक मैं अपनी जिंदगी को बेहतरीन नहीं बना सकता। तो सबसे पहले अपने आप पर काम करना जरूरी है, अपने आप को ताकतवर, शक्तिशाली बनाना जरूरी है। Build phase से निकल कर जो दूसरा phase है, जो मैंने अपनी जिन्दगी में observe किया, वो है phase number two, जहाँपर critically important हो गया है कि अपने लोगों को पहचानो। बहुत ज़्यादा रेजोनेट करें, हो सकता है कि कुछ लोग ना भी करें, which is okay। अगर आपको लगता है कि जो मैं बातें बोल रहा हूँ ये आपके लिए है, तो ले लो, वरना छोड़ दो। ये मेरी ज़िंदगी है। Choose your people, आपकी फैमिली, आपके रिलेशनशिप्स, आपके मेंटोर्स, आपके गुरु, टीचर्स और आपका इन्नर सर्कल यहाँ पर जो लेसन्स मैंने सीखे हैं वो हैं कि अपने परिवार को अपना समय देना सीखो उन्हें आपके प्रेजेंज की जरूरत है आपके वहाँ मौजूद होने की जरूरत है आपके गिफ्स, आपके पैसे, आप उनके लिए क्या खरीदते हो, क्या-क्या प्रोवाइड करते हो ये उतना इम्पोर्टेंट नहीं है, जितना आपके वहाँ पर उस समय मौजूद होना जरूरी है। और जब मैं कहता हूँ मौजूद होना, तो इसका मतलब सिर्फ आपका देह, आपका शरीर, आप फिजिकली प्रेजेंट हो नहीं हैं। आपका वहाँ पर उस समय 100% मेंटली, फिजिकली प्रेजेंट होना मायने रखता है। और ये वो अमूल्य चीज है जो आप अपने परिवार को दे सकते हो। आपकी प्रेजेंस ना कि आपके प्रेजेंट्स। अगला लेसन है कि अपने इन्नर सर्कल को बहुत सोच समझकर चूज कीजिए, क्योंकि एनर्जी जो है ये कंटेजियस होती है, यानी एक तरफ से दूसरी तरफ, दूसरे से तीसरे, तीसरे से चौथी में चली जाती है। एनर्जी जो है वो फैलती है। तो आप किन लोगों के साथ उठ रहे हो, बैठ रहे हो, किन लोगों के साथ अपनी अंदर वाली बातें शेयर कर रहे हो, ये चुनना बहुत जरूरी है। तो अपने इन्नर सर्कल को बहुत सोच समझकर चुनिए। फिर भले ही उसमें कम लोग हो, एक हाथ हो, या कोई समय तक कोई ना हो, इट इज़ ओके। ध्यान रखना, चिड़िया जो होती है वो झुंड में उड़ती है, बाज जो होता है वो अकेला उड़ता है। तो कई बार अकेला उड़ना भी ठीक होता है, लेकिन अगर किसी को अपने साथ रखना है तो उसे ध्यानपूर्वक चुनकर अपने साथ रखना। अगला लेसन जो मैंने सीखा वो ये है कि अगर सही टीचर आपकी जिंदग तो कई साल आपके बचते हैं, कई गलतियों से आप बच सकते हो। तो हमेशा जिस भी चीज में आप प्रोग्रेस करना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं, क्रिटिकली इम्पोर्टेंट हो जाता है कि उस क्षेत्र का जो सबसे अच्छा टीचर आप जानते हो या आप ढूंढ सकते हो या आप रोज कर सकते हो, उस टीचर को अपना मेंटोर बनाओ, ताकत बचाइए। A right mentor can save you years of mistake। मैं अपनी जिंदगी में कभी ये प्रोग्रेस नहीं कर पाता अगर मेरे टीचर्स, मेरे मेंटोर्स सही समय पर मेरी जिंदगी में नहीं आते। और एक चीज़ मेरे टीचर्स, मेरे मेंटोर्स एक पॉइंट पर मुझसे इतने रूबरू हो गए मैंने उनसे इतनी बार मुलाकात की सिद्धार्थ सर तो मुझसे उम्र में कम हैं। एक चीज जो मैंने बहुत कॉन्शियसली की है कि मैंने कभी खास को आम नहीं बनाया। मेरी बात समझ लेना। जो मेरे लिए खास है, मैंने उसे हमेशा अपनी ज़िंदगी में खास ही बनाकर रखा है। भले वो मेरा दोस्त बन जाए, लेकिन मैंने कभी उसे आम नहीं बनने दिया। क्योंकि अगर आप सामने वाले का पोटेंशियल अपने साथ ले आओ या अपना पोटेंशियल उस तक जाकर मैच कर लो, तो एनर्जी फ्लो नहीं होती। एनर्जी हमेशा ऊपर से नीचे की तरफ फ्लो होती है। तो सही मेंटोर चुनिए और उसे एक ऐसे लेवल पर रखिए कि जहाँ से आप अपनी एनर्जी और अपनी ताकत और अपने नॉलेज को अगर गलत कंपनी में आप चले गए, तो इसका हर्जाना बहुत बड़ा होगा। कई सालों की आपकी ग्रोथ जो है वो पानी में मिल जाती है। सिर्फ अगर आप गलत कंपनी में चले जाएं तो, तो अपने इन्नर सर्कल को, अपने मेंटोर्स को, अपनी फैमिली को, अपने रिलेशनशिप्स को बहुत ध्यानपूर्वक चुनिएगा। अगला लेसन है कुछ रिष्टे आपकी जिन्दगी में आपको सिखाने के लिए आते हैं जिन्दगी भर रहने के लिए नहीं हम ऐसे मान कर चलते हैं कि ये मेरा सबसे अच्छा दोस्त है ये मेरा ये मेरी वाइफ है ये मेरा हस्बंड है ये मेरा ये है ये मेरा वो है फैक्ट ओफ लाइफ ये है कि कुछ रिष्टे कुछ समय के लिए होते हैं और वो आपको कुछ न कुछ सिखाने आये होते हैं उनसे सीख लो और उन्हें जाने दो छोड़ना भी इंपोर्टंट है पकड़के रखोगे तो रखड जाओगे अगला लेसन है माफ करना सीख भूलिए मत, माफ कीजिए। You should forgive quickly। अगर कुछ गलती हुई आपसे, किसी और से, आपकी जिंदगी में उसे माफ कर दो। मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि भूल जाओ, हमेशा याद रखो, क्योंकि वो गलती दुबारा repeat नहीं होनी चाहिए। अगला लेसन है कि अपने माता पिता, अपने गुरू, अपने पुराने दोस्त इनसे अगर बात करने की कभी इच्छा हो तो फोन कर लो, मिल लो, थोड़ा एफर्ट ले लो, चले जाओ कम से कम फोन तो करी लो जब तक वो हैं समय चले जाने के बाद का जो रिग्रेट होता है वो बहुत भारी होता है तो जब तक ये लोग आपकी जिन्दगी में हैं, बाते कर लो, समय बिता लो, जितना हो सके प्यार, इजद, रिस्पेक्ट, आदान, प्रदान कर लो, क्योंकि इनके जाने के बाद रिग्रेट नहीं होना चाहिए, कभी ऐसी जिन्दगी में लगना नहीं चाहिए कि काश मैं अपने माबाब को और थोड़ा समय दे पाता. काश मैं इस टीचर मेंटोर के साथ थोड़ा और सीख पाता या काश मेरे इन दोस्तों को मैं सिर्फ हाय हेलो ही कर लेता तो समय भाग रहा है इसे नजर अंदाज मत करिएगा अगला लेसन जो मैंने सीखा है वो ये है कि अगर किसी से प्यार करते हो तो उसे बोल देना चाहिए जब तक वो सुन रहे हैं, क्योंकि उनके कान बंद हो जाने के बाद या वो अपनी जिंदगी में बिजी हो जाने के बाद या वो चले जाने के बाद ये बहुत दर्द देता है। तो आज का ये शायद इन 45 लेसन्स में से सबसे इम्पोर्टेंट लेसन आपके लिए हो सकता है कि अगर लगता है कि यार ये बोलना है, तो बोल दो, स कोर मैसेज ये है कि आपकी जिंदगी में सबसे ज़्यादा असर उन लोगों से होने वाला है जो आपके साथ रहते हैं, जो आपके साथ चलते हैं, जो आपके साथ समय बिताते हैं। तो अपने इन्नर सर्कल को बहुत कैरफुली चूज़ कीजिए। कौन आपके साथ रहेगा? आप चुनिए और फिर उनके साथ पूर्णता से अपना समय और अप वेट मत कीजिए कि वो पहल करेंगे, वेट मत कीजिए कि वो बात करेंगे, वेट मत करिएगा कि मैं क्यों करूँ। मैं कहता हूँ कर लो, समय कम है। ये सेकंड फेज़ ऑफ़ माय लाइफ़ है कि जहाँ पर मैंने बहुत कॉन्शियसली ये चुना कि मुझे किन लोगों के साथ समय बिताना है। मेरी ज़िंदगी का जो तीसरा फेज़ मैं आप जहाँ पर मैंने अपनी सक्सेस को बिल्ड किया और आज आप में से कई लोग इस फेज में मेरे साथ हैं। ये वो फेज है जहाँ पर मैंने अपने करियर, अपना पैसा, अपना काम, अपने सिस्टम्स और अपनी आज़ादी पर काम किया है। और ये काम करते समय जो चीजें मैंने सीखी हैं, वो चीजें आप लोगों के साथ शेयर कर रहा हू कि ज्ञान बिना इम्प्लीमेंटेशन के सिर्फ एंटरटेनमेंट है। जो चीजें हम सीख रहे हैं, अगर उसे इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो इट इज़ जस्ट फन। हम सिर्फ Netflix या YouTube पर जैसे वीडियोस देखते हैं, वैसे वीडियोस देखकर टाइम पास कर रहे हैं। मैंने इस दौरान सीखा कि आप बिजी हो इसका मतलब ये नहीं है कि आप प्रोग्रेस कर रहे हो पूरा टाइम कंप्यूटर पे बैठे हो या काम कर रहे हो आपको ऐसे लग रहा है कि आप बहुत कुछ कर रहे हो इसका मतलब ये नहीं है कि आपकी गाड़ी आगे बढ़ेगी ही इस दौरान मैंने सीखा कि सक्सेस बहुत ज़्यादा चीजें करने से नहीं हाती जो जरूरी है वो करने से आती है। So success is not about doing more। मैंने ये भी किया, मैंने वो भी किया, मैंने वो भी किया, वो भी किया नहीं। वो करना जरूरी है जो actually जरूरी है। इस दौरान मैंने सीखा कि systems बनाना चाहिए। आपको result सिर्फ तभी आता है जब आपका काम system से चलता है, आपके mood से नहीं. आज mood है तो कर लिया काम, कल mood नहीं है, बिमार है या कुछ और जगा ध्यान है तो नहीं किया. अगर ऐसे काम होता होगा तो आप एक sustainable business कभी जिन्दगी में नहीं बना पाएंगे. You have to build systems for success. क्योंकि सिस्टम काम करेगा, इंसान फेल हो जाएगा। सिस्टम्स विल वर्क, पीपल विल फेल। इस फेज़ ऑफ़ लाइफ में मैंने ये सीखा कि जितना जल्दी हो सके काम को डेलीगेट कर दो। काम करवाना जरूरी है करने से। मैंने अपनी जिंदगी का सबसे ज़्यादा समय वेस्ट किया इन चीजों में कि ये भी मैं करूँगा, ये भी मैं करूँगा, मैं देखूँगा, मुझसे होगा और सारी चीजें मैं अपने ऊपर लेता रहा। लेकिन जिस दिन मुझे डेलीगेशन की ताकत समझ में आ गई, डेलीगेशन यानी किसी और को वो काम सौंप दो, टीम मेंबर ह पता चला कि ये काम करना है और इससे करवाना है, immediately call करके, message करके, email करके, WhatsApp डालकर delegate कर दो। घंटों में नहीं, minutes में नहीं, seconds में delegate करना सीखो। ये आपको success देगा। You have to delegate earlier। इस phase of life में मैंने ये भी सीखा है कि पैसा आपको आराम देता है, money will give you comfort, लेकिन आपकी जिन्दगी को मतलब जो है वो परपस देता है. पैसा जरूरी है, मैं ना नहीं कह रहा हूँ, लेकिन पैसे से ज़ादा जरूरी आपकी जिन्दगी का मकसद है. इस दोरान मैंने सीखा है कि आपकी रेप्यूटेशन जो है वो बहुत आहिस्ते आहिस्ते बनती है लेकिन मिटाने के लिए एक सेकंड भी काफी है तो अपनी रेप्यूटेशन को अपनी जान के जैसे संभाल के रखिए क्योंकि इसे प्राप्त करने में बनाने में बहुत समय बहुत एफर्ट्स लगते हैं एक पॉइंट ऐसा आता है जिंदगी में जहाँ पर रेप्युटेशन इस एवरीथिंग, तो अपनी रेप्युटेशन को संभालकर रखिए। इसे जब मर्जी तब दांव पे नहीं लगाना चाहिए। छोटे पैसे के लिए, थोड़ी सी इज्जत के लिए या थोड़ी सी महत्वपूर्ण अपने आप को महत्वपूर्ण बनाने के लिए अपनी रेप्युटेशन को कभी खतरे इस दोरान जो लेसन मैंने सीखा वो ये भी है कि असली आजादी मुझे जैसे चाहिए वैसा समय बिताने की मेरे पास अथॉरिटी हो उसमें है। काम नहीं करना आजादी नहीं है। मुझे जब चाहिए तब मैं काम करूँ। जैसा चाहिए वैसा करूं, ये आजादी है। So real freedom is having the power to choose how you spend your time कि आपका समय कहाँ बिताना है, कब बिताना है, कैसे बिताना है, ये तय करने की आपके पास आजादी होनी चाहिए। ये असली आजादी है। Core message क्या है? इन सारी बातों में इस फेज में कोर मेसेज बस इतना ही है कि सिर्फ हाड़ वर्क मत करिये कुछ ऐसा बनाना शुरू कीजिये जो आपके बिना काम करे और आपको रिजल्ट दे ये आजाधी की मास्टर की है वो बिजनस हमें डेवलप करना है जो आपके बिना भी चले, result भी देता रहे, पैसा भी देता रहे और चलता रहे परपिचोली, आप जब तक हैं तब भी और आपके बाद भी. ये मेरी जिन्दगी का third phase है, जहाँपर मैंने step by step अपने career को, अपने पैसे को, अपने काम को, अपने systems को और अपनी आजादी को create किया है. इस फेज़ ऑफ़ लाइफ के बाद जो चौथा फेज़ मैंने अपनी जिंदगी में देखा है, वो है जहाँ पर चीजों को जाने देना जरूरी है। It is important कि हम सीखें कि चीजों को कैसे let go किया जाता है। ये वो फेज़ है जहाँ पर ego जो हम सब में होता है, by default। अगर हम इंसान हैं, तो हमारे अंदर ego होता ही है। इस ego को संभालना मैंने सीखा। अपने आप को दुनिया के साथ compare करना मैंने छोड़ दिया। और मैंने जिंदगी में ये निर्णय लिए कि अब मुझे किसी के approval की जरूरत नहीं है कि कोई मुझसे कहेगा कि हाँ ये सही है तो सही है। कोई मेरे लिए नहीं डिसाइड करेगा और मैं बेवजह के लड़ाइयों में अपने आप को इन्वॉल्व नहीं करूँगा। जो लेसन्स इस दौरान मैंने सीखे और जो मेरी जिंदगी में बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, उनमें से कुछ ये हैं कि शांति बहुत जरूरी है, सुकून बहुत जरूरी है। किसी और का या अपना इगो सेटिसफाई करने के लिए थोड़े पैसे के लिए या सिर्फ अप्रूवल्स के लिए अगर हम अपना सुख अपनी शांति अपना पीस ऑफ माइंड कॉम्प्रोमाइज कर रहे हैं तो इट इज नॉट वर्थ इट इट इज नॉट वर्थ इट पीस जरूरी है सुख शांति जरूरी है इट इज इम्पोर्टेंट दिमाग थंडा रहना, प्रसन्न रहना हमने, हमने खुश रहना बहुत important है। इस दोरान मैंने सीखा की हर एक situation जो आपकी जिन्दगी में है, उससे लड़ना जरूरी नहीं है। हर एक front पर हमें जगड़ना जरूरी नहीं है। आपके पास limited समय है, limited ताकत है, तो आपको चुनना चाहिए। कि किस युद्ध में आप पार्टिसिपेट करना चाहोगे, उतरना चाहोगे? कौन से कौन से युद्ध आपके लिए जरूरी हैं? हर युद्ध में मत उतरो। इस दौरान मैंने ये सीखा है कि कभी-कभी ना कहना बहुत जरूरी होता है। Sometimes saying no is the highest form of सेल्फ रिस्पेक्ट जहाँ पर जिंदगी में ऐसा लगे कि आपका सेल्फ रिस्पेक्ट कॉम्प्रोमाइज हो रहा है, फिर वो किसी भी सिचुएशन में हो, चाहे वो बिजनेस की सिचुएशन में हो, पैसे की सिचुएशन में हो, माँबाप की सिचुएशन में हो, भाई बहन की सिचुएशन में हो, पति या पत्नी की सिचुएशन में हो, ना कहना जरूरी है। Sometimes you have to say no, क्योंकि अगर आप अपनी नजरों में खड़े रहें, तो आप सब कुछ दुबारा बना लोगे। और अपनी नजरों में गिर गए, तो सब कुछ होने के बावजूद कुछ नहीं है। तो ना कहना सीखिए। इस दौरान मैंने अपनी जिंदगी में सीखा कि उन लोगों को इंप्रेस करना छोड़ दो जो शायद आपके भविश्य का हिस्सा हैं ही नहीं मैंने देखा है और मैंने खुद भी किया है कि बहुत सारा समय, बहुत सारा पैसा, बहुत सारी ताकत उन चीजों में खर्च कर दी, उन लोगों पर खर्च कर दी जो मैं पहले से जानता था कि ये मेरे भविश्य का हिस्सा नहीं है तो अगर आप ऐसा कुछ कर रहे हैं, तो आज ये समझ लीजिए कि you need to stop। जो लोग आपकी जिंदगी में जरूरी नहीं हैं, उन पर पैसा, समय या ताकत खर्च करना बंद कर दो। As simple as that। इस दौरान मैंने सीखा है कि अगर आप अपने आप को compare कर रहे हो किसी से, कि इसके पास है, मेरे पास नहीं है, इन सबके पास तो ये अच्छा है, मेर अगर आप किसी से भी कंपेयर कर रहे हो, तो आप अपनी खुशी को कॉम्प्रोमाइज़ कर रहे हो, आप अपने कॉन्फिडेंस को गवा रहे हो, और आप अपने ग्रेटिट्यूड को खो रहे हो। जो आपके साथ हो रहा है, ये आपकी ज़िंदगी है, ये आपके लिए है। जो नहीं है, वो नहीं है। किसी और के पास है, तो वो उसकी ज़िंद अपने से कम के साथ, अपने साथ वाले के साथ या अपने ऊपर वाले के साथ कंपेयर करना बंद कर दो। अपनी ज़िंदगी जिएंगे, किसी और की नहीं। इस दौरान मैंने सीखा है कि अगर कभी ऐसे लगता है कि मैंने कुछ चीजें सीखी, समझी और उसके बाद शायद मुझे अपना निर्णय बदलना चाहिए तो निर्णय बदल दीजिए। सिर्फ ये निर्णय मैंने लिया है, मैंने बोला है, इसलिए आप अपना नुकसान भी सह रहे हो, कम भी हो रहे हो, टाइम भी वेस्ट कर रहे हो, तो ये उचित नहीं है। और अपने निर्णय बदलना कमजोरी नहीं होती। बेवजह निर्णय बदलने की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं कह रहा हूँ कि अ कुछ नया पाकर अगर आप अपना निर्णय चेंज कर रहे हो, तो इट इज़ ओके। ये कोई कमजोरी नहीं है। इससे आपकी लाइफ में ग्रोथ होती है। इस दौरान मैंने ये सीखा है कि किन चीजों को पकड़कर रखना चाहिए और किन चीजों को छोड़कर आगे बढ़ जाना चाहिए सीख लो। You should learn. What to hold on to and what to walk away from? कोई भी ऐसी चीज़ या रिश्ता आपकी जिंदगी में जो आपकी ताकत को कम कर रहा है, जो आपकी खुशी को, आनंद को, सुख को, शांति को कम कर रहा है, उसे छोड़कर आगे निकल जाओ। Just walk away and walking away ये कोई कायरता का निशान नहीं है, ये समझदारी, सूजबूज का निशान है। कि हमें हर जगडे में पार्टिसिपेट नहीं करना है, हमें हर युद्ध जीतना नहीं है, हमें वो युद्ध जीतना है जो हमारी लिए जरूरी है। कोर मेसेज असली मच्यूरिटी ये जानने में है कि आपको अपनी ताकत, अपना समय और अपना पैसा कहां लगाना चाहिए असली मच्यूरिटी ये जानने में है कि आपको कहां अपनी पूरी ताकत पूरा पैसा और पूरा समय लगाना चाहिए। This is what is maturity all about। ये मेरी जिंदगी का चौथा फेस था, जहाँ पर चीजों को छोड़ना, अपने आप को संभालना मैंने सीखा है। पांचवा फेस जो मैं आपके सामने लाना चाहता हूँ, वो है अपनी जिंदगी को enjoy करना सीखिए। जो जिंदगी आप अपने लिए बना रहे हो, उसे enjoy करना भी उतना ही हैप्पीनेस, ग्रेटिट्यूड, एक्सपीरियंसेज और आज़ादी। इस दौरान जो लेसन्स मैंने सीखे, वो कुछ ये हैं। सिर्फ पैसा, धन, दौलत बिना सेहत के बहुत महंगा है। Saying it again, सेहत है तो सब कुछ है, और सब कुछ है लेकिन सेहत नहीं। तो फिर ये नुकसान का सौदा है। इस दौरान मैंने सीखा है कि बहुत सारी धन दौलत आपके पास है, लेकिन किसी के साथ आप उसे शेयर नहीं कर पा रहे। कोई रिलेशनशिप आपकी लाइफ में उतनी क्वालिटी का अगर नहीं है, तो फिर बहुत बड़ा अकेलापन आपके साथ रहेगा। तो अपने रिलेशनशिप्स पर काम कीजिए रिलेशनशिप्स ऑटोमैटिकली नहीं बनते, बनाने पड़ते हैं। उसके लिए मेहनत लगती है, एफर्ट लगता है, ध्यान लगता है, कॉन्शियसली काम करना पड़ता है। इस दौरान जो मैंने सीखा है, वो ये है कि धन-दौलत बिना आजादी के गुलामी है। आपके पास बहुत पैसा है, बहुत धन-दौलत है, आजादी नहीं है, तो फिर ये गुलामी है। इस दौरान मैंने सीखा है कि बहुत महंगी चीजें खरीदकर अपने पास रखने से बेटर है। अनुभव खरीदिए, एक्सपीरियंसेज, अच्छे वाले एक्सपीरियंसेज, अच्छी वाली मेमोरीज क्रिएट कीजिए। क्योंकि मेरे पास उस समय कौन सी गाड़ी थी? कितने लाख रुपए की थी ये याद नहीं रहता लेकिन एक दिन मैं किसी के साथ घूमने गया था वो एक्सपीरियंस याद रहता है तो अपने एक्सपीरियंसेज में इन्वेस्ट करना शुरू कीजिए ना कि चीजों में इस दौरान जो मैंने सीखा है वो ये है कि फोटो निकालिए मैं ना नहीं कह रहा कहीं अच्छी जगह जाते ह Do click pictures, लेकिन फिर अपना कैमेरा नीचे रखकर अपनी आखों से उसे महसूस भी करना जरूरी है। उस खशण को जीना भी जरूरी है। Capture the moment. I am not saying no. But do not forget to live the moment. कि कई बार हम उन चीजों को पकड़ कर बना कर रखने में इतने मश्रूफ हो जाते हैं। कि एक्चुअली उसका मजा लेना हम भूल जाते हैं, तो मजा लीजिए चीजों का। इस दौरान मैंने ये भी सीखा है कि ग्रेटिट्यूड टर्न्स व्हाट यू हैव इनटू इनफ। आपके पास दुनिया की कितनी دولत है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। संतुष्टि आपके अंदर है। और ये gratitude से आती है। अगर आप आपके पास जो भी है उसके लिए thankful हो, भगवान को, अल्लाह को, अपने माँबाप को, अपने profession को, if you have gratitude inside you, आपको संतुष्टि मिलेगी। and if you do not have gratitude, चाहे कितने भी पैसे आपके पास हो, कितनी भी धन दौलत शौरत आपके पास हो, आप हमेशा दुखी, घुसे में, सैड रहोगे क्योंकि you do not have satisfaction, संतुष्टी नहीं है एक life lesson यहाँ पर मैं अपनी तरफ से शेयर करना चाहता हूँ जो यहाँ पर नहीं है कि मेरा यह observation है कि जिन्दगी में सबसे ज़ादा दुख जो आता है वो एक शब्द से आता है, वो है ज़्यादा मोर मुझे और चाहिए और समय और प्यार और इज्जत और पैसा और गाड़ी और सोना मोर सेक्स व्हाटेवर जहाँ पर मोर आता है ना जहाँ ज़्यादा आता है वहाँ पर दुख आता है तो मेरा प्रिंसिपल है 9 एम टू 9 पीएम और ये मेरा फंडा है कि सुबह 9 बजे से लेकर रात को 9 बजे तक जब आप काम कर रहे हो तब एक शेर की तरह काम करो, चीते की तरह काम करो तब मुझे जादा चाहिए, और पैसा चाहिए, और काम चाहिए, और सब कुछ और चाहिए More is 9 AM to 9 PM एक बार रात के 9 बज गए, सुबह के 9 बजे तक हंड्रेड परसेंट सेटिस्फेक्शन, जो है उसमें खुश, आनंदित, सुकून के साथ। रात को नौ बजे से सुबह नौ बजे तक जो सोचता है कि मुझे और चाहिए वो हमेशा दुखी होता है। तो अपने दिमाग में मैंने ये कंपार्टमेंट बना लिया है कि मैं जब काम करता हूँ तब हाँ मुझे और चाहिए मुझे और पैसा कमाना है मु 9 AM to 9 PM After 9 PM More के लिए कोई जगा नहीं तो अगर अच्छा लगे तो इसे अपना लीजेगा Free का घ्यान है काम आये तो रख लो वर्ना छोड़ दो इस phase of life में जो एक और चीज मैंने सीखी वो ये है कि अपनी happiness को post phone मत कीजिए कि मैं अपने बर्थडे पे ये करूँगा, मैं इस ये कर लूँ फिर इसके बाद मैं ये एंजॉय करूँगा, मुझे इतना मिल जाए तो मैं खुश होऊँगा, मेरे बैंक में इतना बैलेंस बन जाए तो मैं सेलिब्रेट करूँगा। अपनी हैप्पीनेस को पोस्टफोन ना करें, जो है उसे एंजॉय कर लीजिए। कोर मैसेज ये है कि अ सक्सेसफुल लाइफ दैट यू नेवर एन्जॉय इस स्टिल एन अनसक्सेसफुल लाइफ सब कुछ होने के बावजूद भी अगर आप अपनी ज़िंदगी को अच्छे से नहीं जी पा रहे उसका मज़ा नहीं ले पा रहे उसका उपभोग अगर नहीं ले पा रहे हो तो सब कुछ व्यर्थ है व्यर्थ इट इस यूज़लेस तो ये वो फेज़ ऑफ़ लाइफ है जहाँ पर मैंने सीखा कि लाइफ को जितना बनाना जरूरी है उतना ही एंजॉय करना भी जरूरी है। और जो आखरी फेज़ मेरी ज़िंदगी का मैं आप लोगों को बताना चाहता हूँ वो है कि सक्सेस से सिग्निफिकेंस की ओर कैसे मूव होते हैं। यहाँ पर बात करना चाहूँगा कंट्रीब्यूशन की, इम्पैक्ट की और लेगेसी की। जो इस समय मेरी ज़िंदगी में चल रहा है और जिसमें से मैंने ये सारी चीजें सीखी हैं, ये लेसन्स ये हैं कि जो आता है ना, वो देना शुरू करो। ज्ञान है तो ज्ञान को शेयर करना शुरू कीजिए, जो आता है वो सिखाओ। Knowledge multiply होता है जब आप किसी और के साथ उसे share करते हैं। इस दोरान मैंने सीखा है कि आपकी सबसे बड़ी achievement ये नहीं है कि आपने कितना किया। आपकी सबसे बड़ी achievement ये होती है कि आपकी वजह से कितनों ने क्या-क्या किया। इस दोरान मैंने सीखा है कि इंकम आपकी लाइफस्टाइल को चेंज कर सकती है, लेकिन इंपैक्ट जिन्दगीयों को चेंज कर सकती है. इसलिए इंकम से ज़ादा इंपैक्ट के बारे में इस समय मैं सोच रहा हूँ. मैंने ये लेसन सीखा है कि आपने क्या बोला वो तो लोग भूल जाते हैं. लेकिन आपने उन्हें क्या महसूस कराया? How did they feel with you? ये वो हमेशा जिन्दगी भर याद रखते हैं. तो शब्दों के साथ साथ experience को design करना बहुत जरूरी है. मैंने ये सीखा की legacy ये नहीं है कि आपके बारे में आपके जाने के बाद लोग क्या कह रहे हैं, कैसे आपको याद कर रहे हैं Legacy उसे कहते हैं जो आपके जाने के बाद भी चल रही हो It is what continues because of you वो Legacy create करनी जरूरी है मैंने इस दोरान ये सिखा कि अगले दस साल मेरे पिछले 45 सालों से ज़्यादा ज़रूरी है अगर मेरे पास मकसद है। तो कितना समय बीच चुका है कोई लेना देना नहीं है। आने वाला समय जो है वो बहुत इंपोर्टेंट है अगर मेरे पास मकसद है तो, अगर मेरे पास इंटेंशन है तो। और जो आखरी लेसन मैं आप लोगों के साथ शेयर करना चाहता हूँ वो ये है कि अब इस पार्ट ऑफ़ लाइफ में जहाँ मैं खड़ा हूँ मेरे लिए ये सवाल जरूरी नहीं है कि मैं और क्या-क्या अचीव कर सकता हूँ मेरे लिए सिर्फ एक सवाल जरूरी है कि मैं और क्या-क्या कंट्रीब्यूट कर सकता हूँ क्योंकि अब सक्सेस जो है वो उसके माइने जो हैं वो चेंज हो चुके हैं अब सक्सेस इसमें नहीं है कि मैं क्या हासिल कर रहा हूँ अब सक्सेस इसमें है कि मैं कितना महत्वपूर्ण काम कर रहा हूँ इस फेस का जो कोर सेगमेंट है वो बस यही है कि ज़िंदगी आधी चली गई कुछ बनने में अब बची हुई जिंदगी जो बितानी है वो बनाने में बितानी है दूसरों को बनाने में बितानी है that's it this is my path ये मेरे छह phases हैं life के और इन छह phases को अगर मैं एक journey का रूप दूँ जो आप में से कई लोग इसमें हैं अलग-अलग फेज़ेज में, लेकिन अगर मैं इसे अपने जर्नी को फेज़ वाइज़ बनाऊं तो सबसे पहले अपने आप को बनाइए, दूसरा अपने आसपास के लोगों को चुज़ कीजिए, अपना इन्नर सर्कल, अपना एनवायरनमेंट, अपना माहौल बनाइए, उसके बाद अपनी सक्सेस को स्टेप बाय स्टेप बिल्ड कीजिए, उसके लिए काम कीज सक्सेस आनी शुरू हो जाए तो जिन चीजों की ज़्यादा ज़रूरत नहीं है ज़िंदगी में जो ताकत एनर्जी को ड्रेन कर रहे हैं उन्हें जाने दो उन्हें निकालो अपनी ज़िंदगी से जितने भी फुल स्टॉप और कॉमा हैं आपकी ज़िंदगी के वाक्य में उन्हें बाहर निकालिए फिर ज़रूरी है कि जो है जो भी है इनफ है और फाइनली लेगेसी के बारे में सोचिए आज आप ऐसा क्या कर रहे हैं जो आपके जाने के बाद भी चलता रहेगा और आपका नाम हमेशा कोई न कोई इस दुनिया में कभी न कभी निकालेगा क्योंकि मेरे गुरु ब्लेयर सिंगर कहते हैं कि एक इंसान दो बार मरता है पहली बार तब जब आपका शरीर इस दुनिया को छोड़कर चला जाता है और दूसरी बार तब जब आखरी बार आपका नाम इस धरती पर कोई लेता है तो शरीर नश्वर है उसकी लिमिटेड कैपेसिटी है उस पर आपका कंट्रोल नहीं है वो आज नहीं तो कल ढह जाएगा लेकिन लेगेसी कैसे क्रिएट करनी है क्या आप ऐसा करोगे कि और आपका नाम कभी ना मरे, ये आपके हात में हैं। और अब मैं कमिटेड हूँ अपनी जिन्दगी की सेकंड इनिंग्स अपनी लेगेसी के लिए काम करने के लिए।
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