
Hindi walkthrough of regression, classification, and clustering with examples like house-price prediction and Netflix audience segmentation. Shows how to find datasets, convert image data to CSV, and build models in Python.
Chapters
चलिए शुरू करते हैं। एम एल की जर्नी से। एम एल होता क्या है? क्या, क्या मॉडल्स होते हैं हर 1 चीज के बारे में हम डिस्कस करेंगे। तो इनडेब् चीजें होने वाली हैं। मैथमेटिक्स जो मशीन लर्निंग के पीछे यूज होती है उसके बारे में भी हम डिस्कस करेंगे। इस मशीन लर्निंग इनसाइड आउट की सीरीज में। तो चलिए शुरू करते हैं मशीन लर्निंग से। मशीन लर्निंग 1 ऐसा टॉम है जो बहुत ही कॉमन है और साथ ही आजकल बहुत ट्रेंडिंग है। क्योंकि मशीन लर्निंग मॉडल्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मॉडल के बारे में बहुत बातें होती हैं। तो मशीन र्डिंग मॉडल होता क्या है? कैसे इसे क्रिएट करते हैं सब कुछ समझेंगे। अब मशीन करने के लिए सबसे इम्पोर्टेंट है 2 चीजें। सबसे पहला है पाइथन, दूसरा है हमारा मैथेमेटिक्स। इन दोनों की बहुत जरूरत पड़ती है। एम एल को समझने में, एआई को समझने में या फिर आप कोई एजेंडे के आई मॉडल बनाना चाहते हो या फिर आप कोई एजेंट बनाना चाहते हो तो आपको ये सारी चीजें समझ में आनी चाहिए। हालांकि एजेंडे के आई और ए आई एजेंट्स क्रिएट करने के लिए इसकी जरूरत नहीं होती। मेनली ए पी आई की जरूरत होती है। बट अगर आप किसी मॉडल को एडम समझना चाहते हो तो आपको जरूर पाइथन और मैथ्स की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि इन दोनों ही चीजों के बिना आप न ही तो चीजों को अंदर से समझ सकते हो कि उसका आर्किटेक्चर कैसे वर्क करता है और ना ही आप उसपे वर्क आप उसको जो है। अच्छे से देख सकते हो कि आर्किटेक्चर एल एल एम का रात का किस तरीके से डिफाइन किया गया है। तो सबसे पहले समझते हैं मैथ्स की क्यों जरूरत पड़ती है देखो। जितने भी मशीन लर्निंग मॉडल्स होते हैं उसमें यूज होती है कैलकुलस और उसमें यूज होते हैं लीनियरेल्जब्रा के कॉन्सेप्ट्स। जिन लोगों को लगता है मैथेमेटिक्स कहीं काम नहीं आते है तो मैथेमेटिक सी है। जिसकी वजह से इतने सारे लोगों की जॉब भी चली गई है। इतने सारे लोग ए आई के पीछे भाग रहे हैं। मैच सी 1 ऐसा रीजन है जिसकी वजह से सारी चीजें पॉसिबल हो पा रही है। कैलकुलेश लीनियरजब्रा स्टेटिस्टिक्स, इसके बाद प्रोबाबिलिटी। इन सब की जरूरत पड़ती है किस चीज के लिए मॉडल्स को क्रिएट करने के लिए आपने टॉप ए आई मॉडल्स को सुना होगा। ओपन एआई का जो मॉडल है चार्ट जी पी टी मतलब। ये जी पी टी के जितने भी मॉडल्स हैं। थ्री फोर फाइव दूसरा। अगर आपने एं्थॉर्पिक का नाम सुना है तो वो भी 1 एलएलएम का ही पार्ट है। ये सारे के सारे नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग मॉडल्स हैं। इनके साथ ही ऑडियो पर भी वर्क कर सकते हो। आप प्लस नेचुरल लैंग्वेज में आप इसमें इमेज जनरेशन वगैरह का भी काम कर सकते हो। तो ये सारे जीपीटी मॉडल्स हैं। अब इनको समझने के लिए मैंने आपको बताया पाइथन और मैच की जरुरत है। पाइथन की जरूरत क्यों है? क्योंकि कोर्ड जिस लैंग्वेज में लिखा जाएगा वो पाइथन है। अब इसी कोर्ड के अंदर उसकी लेयर्स को क्रिएट करने के लिए लगती है। मैथेमेटिक्स अब आपने प्राइमर ली कोई भी अगर मॉडल देखा है तो आपने 1 डेटा सेट के बारे में बहुत एमएल वर्ल्ड में बात होती है चलिए उससे इंटरव्यूस होते हैं। मान लो 1 डेटा सेट है जिसमें कुछ हैंडरिटन नंबर्स, हैंडरिटन नंबर्स कैसे भी हो सकते हैं। मैं इस जीरो को किसी भी तरीके से लिख सकती हूं। मैं वन को ऐसे भी लिख सकती हूं। तो ये कुछ अलग अलग तरीके से लिखने का तरीका है बेसिकली नंबर्स को और इन्ही डेटा की जरूरत पड़ती है मॉडल को ट्रेन करने के लिए मॉडल क्या होता है। 1 ब्रेन की तरह काम करता है 1 ह्यूमन ब्रेन का रेप्लिका है। आप समझ सकते हो यूमन ब्रेन का 1 ऐसा रेप्लिका जिसको ट्रेन किया जा रहा है स्पेसिफिकली हमें जवाब देने के लिए यूमनस को आंसर करने के लिए ह्यूमन ब्रेन बनाया जा रहा है जो सेम यूमन की तरह दिखता है सेम हूमन के ब्रेन की तरह उसके पास भी न्यूरॉन्स होते हैं और उसपे उसका यूज करके वो बेसिकली हमारे आंसर्स को क्वेशन को प्रोसेस करता है और हमसे बातचीत करता है वो किसी भी टॉपिक पर हो सकता है बट। जैसा कि रिसर्च पेपर्स में अगर आप देखो तो रिसर्च पेपर में डे बाई डे। बताया जा रहा है कि अभी किस लेवल का एआई जो है डेवलप हो चुका है यह किस लेवल का होना है इसके बारे में बातचीत चल रही है। रिसर्च पेपर्स में तो वो भी 1 इम्पॉर्टेंट चीज है जो आपको पढ़नी चाहिए। अब जब हम बात करते हैं मशीन लर्निंग मॉडल की, मशीन लर्निंग मॉडल या ए आई के मॉडल्स इन सबको जरूरत किस चीज की होती है। इन सबको जरूरत होती है डेटा की। अभी डेटा कहां से आता है डेटा मल्टिपल सोर्सेस से जनरेट हो सकता है। सर्वे से भी डेटा आता है, डेटा कलेक्शन भी किया जाता है। मान ली बहुत सारी कंपनीज हैं जो डेटा कलेक्शन पर वर्क करती है। अगर डेटा कलेक्शन सर्वे और डेटा कलेक्शन से नहीं आता तो यूएन एक्टिविटी से भी डेटा कलेक्शन आता है। फॉर एग्जांपल अगर मुझे हेल्थ सेक्टर का डेटा चाहिए। जैसा कि आज हमारे पास स्मार्टवॉचेज हैं स्मार्टवॉचेज में डेटा जा रहा है। उस डाटा को स्टोर किया जाता है। फॉर फर्दर एनालिसिस किसी भी टाइप का एनालिसिस करना है। कंपनी जो है हेल्थ सेक्टर डेटा कलेक्ट करवाती है जो हमारी वॉचिंग होती है स्मार्टवॉचेज या हमारे मोबाइल फोन में भी आजकल जो डेटा है बेसिक डेटा कैप्चर होता है। तो बहुत सारे डेटा के सोर्सेज अभी करंट में हैं जिनसे हम रेगुलरली देखते हैं। कि चीजें होती हैं करेक्ट उसके बाद डेटा को और जगह से अगर आपको लेना है। ऐज स्टूडेंट आप कहां कहां से डेटा ले सकते हो। आज स्टूडेंट आपके पास मल्टिपल सोर्सेज हैं। डेटा लेने के सबसे पहला सोर्स है कैगल का कैगल 1 फ्री डेटा प्रोवाइड आपको करेगा आप उसको यूज करके मशीन लर्निंग मॉडल का फाउंडेशन सीख सकते हो। आप कैगल के डेटा को यूज करके अपने पोर्टफोलियो के लिए प्रोजेक्ट्स क्रिएट कर सकते हो। आप कैगल का प्रोजेक्ट यूज करके आप यह भी समझ सकते हो कि ये सारी चीजें वर्क कैसे करते हैं। तो कैगल 1 गो टू चीज है जिस पर आपको वर्क करना चाहिए। ऐसा स्टूडेंट आपको सबसे पहले तो स्टेटिक डेटा के साथ वर्क करना चाहिए। अब स्टेटिक डेटा साइट का मतलब क्या होता है स्टेटिक डेटा साइट मतलब आपने 1 फाइल को डाउनलोड कर लिया है और उसे डाउनलोडेड फाइल पर आप वर्क कर रहे हैं। सिम्पल जब आप डाउनलोडेड फाइल पर वर्क कर रहे है दैट इज स्टेटिक डेटा सेट। दूसरा जो डेटा सेट होता है वो लाइव डेटा सेट होता है या फिर मैं ये कह सकती हूं ए पी आई से लिया हुआ डेटा होता है। है ए पी आई के बारे में भी हम बात करेंगे क्योंकि यही 1 चीज है ए पी आई जो ट्वेंटी ट्वेंटी सिक्स में कोई भी चीज क्रिएट कर सकती है आपके लिए ज इसको एपीआई को यूज करना अच्छे से आता है वो ट्वेंटी ट्वेंटी सिक्स में अर्निंग भी बहुत अच्छा कर रहा है और लर्निंग भी बहुत अच्छा कर रहा है। तो स्टूडेंट्स के लिए कैगल 1 पहली वेबसाइट है स्टेटिक डेटा सेट के लिए एपीआई के बारे में भी मैं आपको बताउंगी बहुत सारी ऐसी जगहें हैं जहां पर आपको फ्री में एपीआई मिल सकता है बहुत सारी वेबसाइट्स का जिसका यूज करके आप प्रोजेक्ट्स बना सकते हैं और ए पी आई के प्रोजेक्ट्स को ज्यादा रेटिंग मिलती है। तो स्टेटिक डेटासेट का आप यूज किसलिए करेंगे स्टेटिक डेटा सेट का आप यूज करेंगे लर्निंग के लिए पर स्टेटिक डेटा सेट वाले प्रोजेक्ट्स आई नेवर रिकमेंट के आप उसको अपने रिज्यूमे में डालें आपको जो अपने रिज्यूमे में डालना है पोर्टफोलियो में डालना है वो ए पी आई बेस्ड होगा तो वो ज्यादा वैल्यू रखेगा। तो सबसे पहली बात जो हमारी डेटा सेट की थी वो ये थी। अब बात करते हैं उस बबल की जो बहुत बढ़ता चला जा रहा है। इस ट्वेंटी ट्वेंटी सिक्स में ए आई का बबल क्या ए आई एम ए होता है। क्या एम एल के बाद डी एल और ये जो टॉम्स आ रही हैं ये कहां से आ रही है? कल आई क्या होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। यह बहुत ही बड़ा और फैंसी नाम है फैंसी नाम के साथ साथ यह भी समझो कि ये 1 तरीके की खोखली चीज है इसके पास खुद का कुछ भी नहीं है। ए आई के अंदर वर्क करता है एम एल मतलब मशीन लर्निंग भी है जो बैकबोन है मशीन लर्निंग के इंडेट में जब हम जाते हैं तब हमें डीप लर्निंग मिलता है। डीप लर्निंग मशीन लर्निंग का भी 1 तरीके से जो है। सुपीरियर चीज है तो मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग एआई का तीनों में रिलेशन तो है। ए आई 1 फैंसी वर्ड है। एम एल 1 फाउंडेशन है जिसके ऊपर सारी चीजें मतलब बैकबोन जो है वो एम एल ही है। एम एल के जो मॉडल्स हैं वो कभी कभी सफिशियल नहीं होते हैं कुछ टास्क को पूरा करने के लिए जहाँ पर हमारा काम आता है डी एल ए आई मतलब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, एमएल मतलब, मशीन लर्निंग, डीएल मतलब, डीप लर्निंग। जब कोई मॉडल सही से एम एल की कैटेगरी में ट्रेन नहीं हो पा रहा है वहां हमें डीएल की जरूरत होती है। अगर आपको मैथ सीखनी है, फॉर ए, आई और फॉर एम एल कुछ भी कह सकते हो। आप इसमें डेटा साइंस भी जोड़ सकते हो। वो सब कुछ मॉडल क्रिएशन पे ही वर्क कर रहा है। बस उसमें थोड़ी थोड़ी चीजें और एड ऑन होती रहती है। तो 3 ही चीजों पर ध्यान देना। सबसे पहला रहेगा आपका लीनियर एलजेब्रा। क्योंकि लीनियर एलजेब्रा का यूज करके बहुत सारे मॉडल्स वर्क करते हैं। लीनियर रिग्रेशन और भी पॉलिनोमियल रिग्रेशन, ये सब कुछ लीनियर एलजेबरा पर वर्क कर रहा है। फिर आता है कैलकुलस बिना कैलकुलस के कोई भी न्यूरल नेटवर्क, बाग, प्रोगेशन या फिर ग्रेडिएंट डिसेन कैलकुलेट नहीं किया जा सकता है। तो सबसे पहला लीनियर एलजेबरा, दूसरा आपको कैलकुलस सीखने की जरूरत है त तीसरा आपको स्टेटिस्टिक्स और प्रोबाबिलिटी पता होनी चाहिए। फिफ्ट सिक्स ग्रेड वाली प्रोबाबिलिटी और स्टेटिस्टिक्स का। मैं नहीं बोल रही हूं कि ठीक है। 1 डाइस्कॉमने रोल किया उसमें क्या प्रोबाबिलिटी आएगी। नहीं, वो तो होना ही चाहिए। वो बहुत बेसिक चीज है प्रोबाबिलिटी की। काफी सारे लोग सोचते हैं कि हमने वो पढ लिया। हमें प्रोबाबिलिटी आदी नहीं प्रोबाबिलिटी। निकलते कैसे हैं, लॉ प्रोबाबिलिटी होता क्या है, कौन कौन से फैक्टर्स हैं जिसपे प्रोबाबिलिटी चेंज करती है। ये सब चीज आपको आनी चाहिए। उसके बाद न्यूरल नेटवर्क और डीप लर्निंग में आपको यूज होगा डिफ्रेंसिएशन। क्योंकि बिना डिफ्रेंसिएशन के आप किसी भी चेंज को नहीं क्वांटिफाई कर सकते हैं। अगर आप किसी चेंज को क्वान्टीफाय करना चाहते हो तो उसमें डिफ्रेंसिएशन काम आएगा ही आएगा लॉग डिफ्रेंसिएशन वाले टॉपिक्स भी आपको कवर करने। तो ये सिम्पल सा मैथेमेटिक्स का पार्ट है जो आना चाहिए इस सीरीज में। हम कोशिश करेंगे कि हम जितनी मैथेमेटिक साइड बाय साइड हो सकती है हम उसको भी कवर करेंगे। मैथेमेटिक्स के साथ साथ पाइथन की अगर हम बात करें तो पाइथन बहुत वास्ट लेवल पे। आपको सीखने की जरूरत नहीं है। आपको फोकस किस पे करना है आपको स्टार्ट करना है बेसिक से ऑव्वियस क्योंकि बेसिक्स के बिना आप समझ ही नहीं सकते कि लाइब्रेरी में क्या कोड चल रहे हैं। तो बेसिक की अगर बात करूं तो सिम्पल से 5 से 7 टॉपिक्स है जिसपे आपको वर्क करना है। सिम्पल एनपोटआउटकूट कैसे जनरेट करते हैं, कंडीशनल स्टेटमेंट कैसे लिखी जाती है, लूपिंग कैसे वर्क करती है, फंक्शंस कैसे लिखते हैं, लेम्डा फंक्शन कैसे लिखते हैं, ठीक है लिमडा फंक्शन कैसे लिखते हैं। साथ में स्ट्रिंग डेटा सेट पर कैसे वर्क करता है। क्योंकि होता क्या है मशीन लर्निंग मॉडल में अलग अलग तरीके के डेटा सेट्स आपको मिल सकते हैं। मान लो आपको नंबर्स वाला डेटा सेट मिला जब आपको नंबर्स वाला डेटा सेट मिला। इस सुपर ईजी टू वर्क विद नंबर्स क्योंकि नंबर को हम क्वान्टीफाई कर सकते है और मॉडल को भी ईजीली नंबर समझ में आता है। इसका रीजन यह भी है कि हमारा जो कम्प्यूटर है वो माइनरी लैंग्वेज समझता है। जीरो और वन समझता है वो ए, बी, सी, डी इतनी जल्दी नहीं समझेगा जितनी जल्दी वो नंबर समझेगा। तो पाइथन के अगर डेटा सेट की बात करें तो नंबर्स के साथ इजी होता है। बट स्ट्रिंग में बहुत सारी डिफिकल्टी आती है मान लो मैंने अपना नाम लिखा है कोडिंग दीदी या फिर मैंने आकांक्षा लिखा है तो उसमें अगर मैंने थोडा सा भी स्पेस लगा दिया तो ये स्पेसिंग इन्क्लूड होगी नहीं होगी इसके लिए अलग से कोड लिखना पड़ता ह। इसीलिए स्ट्रिंग डेटा टाइप पे मैं स्पेसिफिकली वर्क करने को कहती हूं ताकि आप एनएलपी वाले प्रोजेक्ट्स पर ईजीली वर्क कर सको। स्ट्रिंग के बाद आपको कवर करना है फंक्शंस कम्प्लीट करने के बाद आपको लॉजिक बिल्डिंग थोड़ी सी तो आनी ही चाहिए क्योंकि लॉजिक बिल्डिंग के बिना आप अगर कोई प्रोजेक्ट बनाने लगोगे तो नहीं आएगा सफिषियंटहैएकपीडीएफ मैंने टॉपमेटपरअपलोड करिए और उसका लिंक ऑलरेडी मैंने अपने शायद इंस्टाग्राम पर डाला हुआ है वहां से चेक कर लेना उस पीडीएफ को अगर आप कम्पलीट कर लेते लॉजिक बिल्डिंग की तो वो सफिषेंट है आपका मशीन लर्निंग प्रोसीड करने के लिए पाइथन के बेसिक्स में आपको बस इतना ही कवर करना है इसके एडवांस लेवल पर नहीं जाना है। उसके बाद जैसे ही आप बेसिक्स को कवर कर लोगे आपको पढ़नी है लाइब्रेरीज। अब पाइथन इतना जाना माना इसीलिए है क्योंकि इसके पास बहुत सारी लाइब्रेरीज है बहुत सारी लाइब्रेरी का क्या मतलब है मतलब कि जैसे आपको वर्क करना है मैच में तो मैच की लाइब्रेरी है अगर आपको सिस्टम की फाइल्स के साथ वर्क करना है तो सेल्स 1 लाइब्रेरी है ऐसे ही पाइजन के पास एंड नंबर ऑफ़ लाइब्रेरीज है अलग अलग टास्क के लिए मान लो आपको एपीआई के साथ वर्क करना है तो एपीआई के लिए 1 अलग लाइब्रेरी है। आपको उन स्पेसिफिक लाइब्रेरीज को टारगेट करना है जो आपको मशीन लर्निंग में हेल्प करेगी। ट्रेंडी जो लाइब्रेरीज आपने सुनी होंगी पांडाज है दूसरी हमारी लाइब्रेरी है नम पाय, स्काय केट लन और एस के लन भी कह सकते हो आप। इसको इसके बाद कुछ डेटा विज्वलाइजेशन की लाइब्रेरीज भी आपको पढ़नी चाहिए मैटप्लॉटलिपसीबोन क्योंकि जब तक हम डेटा को विजुलाइज नहीं करेंगे तब तक हम ई डी ए परफॉर्म नहीं कर सकते। काफी सारे लोग सोचेंगे इडिया क्या होता है एक्सप्लोरेटरी डेटा अनालिसिस एक्सप्लोरेटरी डेटा अनालिसिस के बाद आपको थोड़े ग्राफ्स क्रिएट करने होते हैं ताकि आप डेटा को अच्छे से समझ सको और उसके बाद ही आप कोई मॉडल को ट्रेन कर सकते हो। मॉडल कौन से हैं कौन से नहीं यह बाद में बात करेंगे पहले पाइथन का बेसिक्स प्लस ही लाइब्रेरीज आपको आनी चाहिए फान्डाजनमपासकाइकेट ल, मार प्लॉट, लिप, सी वॉन और इसके साथ बहुत सारी लाइब्रेरीज होती है जैसे टेंसर, फ्लो, पायटॉर्ज या फिर केरास। ये थोड़े एडवांस लेवल की हैं जो आपको हेल्प करती है। डीप लर्निंग में आपको डिसाइड करना है कि आपको किस तरफ जाना है क्योंकि बहुत सारे ऐसे टास्क हैं जो आप कम्पलेश कर सकते हो मान लो आपको एनएलपी पे वर्क करना है तो यह अलग चीज है मान लो आपको वीडियो चीजों पे वर्क करना है कि वीडियो में कोई ऐसा प्रोजेक्ट है जिसमें कि कैमरा ऑन हो, वेबकैम पर वर्क कर रहा हो या कैमरा के अंदर कोई फीचर देना चाहते हो तो वो वीडियो रिलेटेड टास्क बुक है जिसके लिए आपको पढना पड़ेगा कंप्यूटर विजन कंप्यूटर विजन से सीवी के ये जो टास्क होते हैं वीडियोज रिलेटेड ये सीवी से होते है वैसे ही अगर आप इमेज के साथ काम कर रहे हैं तो इमेजिस की अलग लाइब रिलीज होती है। यह बात की स्टेज है क्योंकि पहले आपको ये सारी चीजें समझ में आनी चाहिए कि डेटा सेट कैसे वर्क करता है, क्या क्या मॉडल्स होते हैं, क्या मशीन लर्निंग होती है तो वही चीज हम यहां पर डिस्कस कर रहे हैं। अब चलिए बात करते हैं मशीन लर्निंग की और मॉडल्स के मशीन लर्निंग में बहुत सारे मॉडल्स का नाम आपने सुना होगा जो ट्रेंडी हैं नहीं भी हैं तो आपको सिम्पल सी बात समझने मशीन लर्निंग क्या होता है मशीन को पढ़ने का तरीका, मशीन का ऑटोमेटिकली, पैटन को समझने का तरीका, किसी भी चीज के पैटन को समझना जो मशीन कर रहा है वो ऑटोमेटिकली कर रहा है वो किस अप्रोच के साथ कर रहा है वहीं मशीन लर्निंग है सिम्पली 1 मशीन है जो खुद से लर्न करने की कोशिश कर रही है। अब डिपेंड करता है यह लर्निंग किस टाइप की है क्या ये मेंटोर टाइप लर्निंग है, क्या क्या उसके पास मेंटोर हैं या वो बिना मेंटोर के खुद से ही सीख रहा है या वो फीडबैक से सीख रहे है। 3 ही कैसे हो सकते हैं इसमें मेंटॉर के साथ वेद विद आउट मेंटॉर और फीडबैक से ये 3 डिफ्रेंट टाइप की ट्रेनिंग हो सकती है जो मशीन ले रहा हो। हर 1 मॉडल अलग तरीके से वर्क करता है पर जो कोर फाउंडेशन होता है वो सबका सेम होता है मतलब चाहे आप चार्ट जी पी टी ले लो, चाहे आप पेक ले लो, चाहे आप कोई और मॉडल ले लो, पर प्लेक्सिटी ले लो, इन सब का कोर फाउंडेशन 1 ही चीज है। इन सब को ट्रेन करने में बहुत बड़े बड़े जीपीउसका यूज हुए है बट कोर जो है वो सेम ही है हर 1 मॉडल को चाहिए होता है डेटा करेक्ट। अब मान लो कि कोई डिजिट रिकॉग्नेशन मॉडल है ये मैं जैसे अभी अपने बोर्ड पर टाइप कर रही हूं। इस बोर्ड पर अगर मैं कोई डिजिट लिख रही हूं तो ये मैंने जैसे ही लिखा है वैसे यहां पर 1 प्रॉम्ट हो जाना चाहिए दिस इज वन और जिस is zero ऐसे करके मैं चाहती हूँ करेक्ट और रॉंग जो भी आउटपुट दे बट यह डिजिट का रिकगनेशन करें। 1 ऐसा मॉडल है जो डिजिट का रिकगनेशन करें वो क्रिएट करना है तो मशीन लर्निंग में क्या लगेगा डेटा लगता है यह प्राइमरी चीज थी जो करी थी ताकि मशीन लर्निंग को अच्छे से समझा जा सके। तो इसको ट्रेन करने के लिए अवेलेबल जो डेटा सेट है वो भी आप कैगल से ले सकते हो। सो फॉर एग्जांपल अगर अभी हम कैगल पे जाते हैं और आपको टाइप करना है मनस डेटासेट डाउनलोड कैगल से भी आप डाउनलोड कर सकते हो काफी टाइम ऐसा भी होता है कि गेटप पे किसी ने प्रोजेक्ट अपलोड करा हो तो वो गेट वाला प्रोजेक्ट भी आप ले सकते हो इडपेंडट्स की आपको कौनसा कंटिनेंट लग रहा है कैगल का आई वुड सजस्टक्योंकिइसमें काफी सरे कॉम्पिटिशंस भी होते रहते हैं तो विच ज गुड कि आप लोग उसको ट्राय भी करें आप लोग उससे अपडेटेड भी रहें साथ में सो बेसिकली ये डेटा सेट है हैण्डरिटन डिजिट्स का जो आप लोग डाउनलोड कर सकते हो यह 1 दम से गूगल सर्च को क्या हो गया है can the mean time लेट्स कoनटिनू तो ये 1 डेटा सेट है जिसका लिंक भी मैं डिस्क्रिप्शन में डाल दूंगी जिसको यूज कर सकते हो आप और आप इसको डाउनलोड करके अपनी लर्निंग स्टार्ट कर सकते देखो इसका प्रोसेस बहुत सिम्पल है कि आप मान लो 1 मॉडल है जिसमें आप थाउजेंड ऑफ इमेजेज दे रहे हो था पिक्चर्स दे रहे हो अभी पिक्चर्स किस चीज की है हैंडरिटन डिजिट्स की है कहै हैंडरिटन डिजिट्स में वन टू नाइन तक की डिजिट्स मान लो मैं 1 हैंडरिटन डिजिट है और अलग अलग हर बंदे की अलग अलग राइटिंग होती है वैसे ही यह डेटा सेट है ठीक है आप सिम्पली गूगल पर सर्च करोगे तो आपको मिल जाएगा इसी से इस मॉडल को ट्रेन किया जाएगा और उसी मॉडल को हम जो है जब आप कैगल से इसको डाउनलोड करोगे न इसमें आपको ऑनलाइन अराउंड सेवेंटी थाउजेंड इमेजेज मिलेगी ठीक है सेवेंटी थाउजेंड इमेजिस का डेटा जब हम इसमें प्रोसेसिंग के लिए डालेंगे तब हम उसको जो है 1 मशीन लर्निंग मॉडल को ट्रेन करने की कोशिश करेंगे और पहले समझते हैं मशीन लर्निंग मॉडल कितने टाइप के होते हैं। सबसे पहला मशीन लर्निंग मॉडल होता है सुपरवाइज्ड एमएल अन सुपरवाइज्ड लर्निंग दूसरा होता है तीसरा होता है रिइन्फोर्समेंट लर्निंग अब तीनों में डिफ्रेंस क्या होता है सुपरवाइज लर्निंग अन सुपरवाइज लर्निंग, सुपरवाइज मतलब किसी सुपरवाइजर के अंदर जो लर्निंग हो रही है मतलब मेंटॉर के साथ वाली लर्निंग, मतलब टीचर के साथ वाली लर्निंग। अन सुपरवाइज लर्निंग का मतलब क्या है जहां पर टीचर अवेलेबल नहीं है जहां पर टीचर अवेलेबल नहीं है। तीसरा रीइन्फोर्समेंट लर्निंग रीइन्फोर्समेंट लर्निंग वर्क करती है फीड बैक पे रीइनफोर्समेंट लर्निंग किस पर वर्क करती है फीड बैक पर मशीन लर्निंग मॉडल या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जो अभी हॉट एकदम टॉपिक बना हुआ है इसका ब्रेक थ्रू यह कि जब हम ओरिजनली अगर हम इसकी बात करें तो सबसे पहला जो मॉडल आया था वो आएगा लीनियर रेग्रेशन मॉडल लीनियर रेग्रेशन मॉडल ही जो है मशीन लर्निंग की फाउंडेशन है कोई भी इंजीनियर अगर मशीन लर्निंग पढना शुरू करता है तो वह फाउंडेशन से जब शुरू करता है तो वो सबसे पहले लीनियर रिग्रेशन मॉडल बनाता है जिसको आप ये समझ लो कि एटीन सेंचुरी की मत अगर बात करूं तो वहां पर इसको जो है क्रिएट किया गया था जहां पर सिम्पल सा जो टास्क था वो प्रेडिक्ट करना था बॉडी का मोशन सोलर सिस्टम यह प्रेडिक्ट करना था। ये सेम 1 गौशियन डिस्ट्रीब्यूशन पर वर्क करता है आपने कभी गौशियन डिस्ट्रीब्यूशन। अगर आपने डेटा एनालिसिस में मैच में कभी पढ़ा है तो इस कॉन्सेप्ट पर लीनियर एग्रेशन को क्रिएट किया गया था। बेसिकली 1 नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन होता है 1 बैल डिस्ट्रीब्यूशन होता है उसके बारे में हम भी इन डीटेल बात करेंगे जिसने अपने स्टैटिस्टिक्स अगर पढ़ी है। तो ये बहुत कॉमन चीज है गोश डिस्ट्रीब्यूशन जिसकी जरूरत पड़ती है। अब रिग्रेशन ही 1 ऐसा पहला मॉडल था जो क्रिएट किया गया था। उसके बाद धीरे धीरे यह और पॉवरफुल होता गया। न्यूरल नेटवर्क पिक्चर में आने लगा वहीं पर शुरुआत हुई थी सुपरवाइज लर्निंग की। बहुत सारे ऐसे मॉडल्स हैं जो सुपरवाइज लर्निंग से ट्रेनिंग दी जाती है। जिनको बहुत सारे मतलब कि मान लो आपको कोई चीज लेबल करनी है तो लेबलिंग वाले टास्क के लिए आप सुपरवाइज करोगे। सुपरवाइज का मतलब यह है कि लेबल के साथ टीचर का मतलब है लेबल के साथ मतलब कि अगर मैं उसको 1 इमेज दे रही हूं एपल की तो मैं उसे बताऊंगी कि ये 1 एप्पल है। मतलब मैंने अगर किसी मॉडल को बताया कि दिस इज एन एपल दिस इज सुपरवाइज लर्निंग मा। पर टीचर का मतलब यह नहीं है कि मैं 1111 चीज उसका मतलब है कि मैं जितनी भी डेटा उसको दूंगी उसको लेबल के साथ दूंगी जो लेबल के साथ ट्रेनिंग दी जाती है। दैट इज कॉल्ड सुपरवाइज लर्निंग दूसरा जो मॉडल होता है हमारा जिसको हम कहते हैं अन सुपरवाइज लर्निंग मतलब वो लेबल्ड नहीं होता है। अन्लेबल्ड डेटा पे वो वर्क करता है मतलब मैं उसको इमेज तो दूंगी पर मैं उसको ये नहीं हर बार बताउंगी कि ये ऐपल है मतलब मैं उसको सिर्फ और सिर्फ डेटा प्रोवाइड करूंगी वो खुद से समझेगा कि यह किस चीज से रिजेम्बल करता है और वो उस पाटन को समझेगा धीरे धीरे दैट। इज कॉल्ड अन सुपरवाइज्ड लर्निंग मेन ली जो सुपरवाइज लर्निंग के मॉडल होते हैं वो होते हैं लीनियर रिग्रेशन हो गया जैसे यह क्लासिफिकेशन मतलब 22 आप समझ लो रिग्रेशन और क्लासिफिकेशन जो हैं ये दोनों सुपरवाइज लर्निंग के पाट है दूसरा। अगर मैं बात करूं उन सुपरवाइज लर्निंग की तो आपने सुना होगा क्लस्टरिंग के जो मॉडल्स हैं या फिर डाइमेंशनैलिटी डिडक्शन जो 1 मॉडल है वो दोनों ही मॉडल जो है हमारे अन सुपरवाइज लर्निंग के मॉडल है। उसके बाद आता है हमारा रीइन्फोर्समेंट लर्निंग। रीइन्फोर्समेंट लर्निंग में हमारे पास अलग अलग तरीके के होते हैं जैसे अल्फागो ये रेनफोर्समेंट लर्निंग की ट्रेनिंग पर चलते हैं। ठीक है सुपोवाइजलर्निंग का सिम्पल मतलब लेबल्ड डेटा है जिसमें हम आउटपुट मतलब। हमें एक्स वाई जो भी हम दे रहे हैं उसको नाम देते हुए दे रहे हैं। और सुपरवाइज का मतलब यह है कि करेक्ट लेबल के साथ दे रहे हैं तो उसको याद रखना भी डिफिकल्ट नहीं है। अब 2 तरीके के मॉडल्स मैंने आपको बताए 1 रिग्रेशन मॉडल होता है और 1 होता है क्लासिफिकेशन मॉडल पहले समझते हैं क्लासिफिकेशन? क्योंकि वर्ल्ड भी बहुत कॉमन है जो काफी लोगों को इजीली समझ में आ जाता है क्लासिफिकेशन का मतलब है 2 कैटेगरीज को क्लासिफाई करना, कि चीजों को कैटेगराइज करना या क्लासिफाई करना। फॉर एग्जाम्पल अभी मैंने 1 एग्जाम्पल लिया था डिजिट रिकग्नेशन मॉडल का। डिजिट रिकग्नेशन मॉडल में मैंने क्या बताया था कि हमने कुछ नंबर्स लिए हैं। जीरो, टू, नाइन तक के अलग अलग हैंड। राइटिंग में लिखे हैं। बहुत सारे डिफ्रेंट लोगों की हैंड। राइटिंग को हमने उसमें यूज किया। अब इसमें हम एग्जांपल के लिए क्लासिफिकेशन कह सकते हैं कि फाइनाइट नंबर, ऑफ पॉसिबल। वैल्यूज कह सकते हैं कि मान लो कितने नंबर, ऑफ कैटेगरीज। आपको क्रिएट करनी है। जब आपको पता है कि फाइन नाइट नंबर होने वाला है। 5 कैटेगरी, 10 कैटेगरी, 20 कैटेगरी फाइन नाइट नंबर जहां पर है वो क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम हो सकती है। कोई भी ऐसा प्रॉब्लम जैसे ईमेल का बहुत कॉमन यूज होता है। जैसे स्टार्टिंग में गूगल, पे, मर्वसफैननॉट्सपैम का कैटेगराइजेशन आता है। स्पैम नॉट स्पैम कैटेगराइज करने के लिए भी कुछ कीवर्ड्स का यूज किया जाता है। मतलब क्लासिफिकेशन की जा रही है। जैसे ई मेल हमारे इनबॉक्स में आता है। जैसे ईमेल में ईमेल हमारे इनबॉक्स में आता है। इसको कैटेगराइज किया जाता है। क्या ये स्पाम है या यह नहीं स्पैम है। तो अगर ये स्पैम है तो हम इसको स्पैम फोल्डर में डाल देते हैं। अगर नहीं होता है तो यह आपके मेल इनबॉक्स में शो होता है। वही क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम है। तो क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम को आइडेंटीफाई करना बहुत इजी है। जहां पर कैटेगरीज की बात हो रही हो, जहां पर फाइनाइट नंबर, ऑफ पॉसिबल, वैल्यू की बात होरी। जैसे मैंने जीरो टू नाइन का। 1 कैटेगरी बताई तो पता है 10 आउटपुट आइमे फाइनाइट नंबर है। ईमेल स्पेसिफिकेशन मान लो मैंने कुछ इमेजेज दी है एनिमल की। अब एनिमल की इमेज को आइडेंटिफाई करना है। क्या ये कैट है? क्या ये फॉक्स है? क्या ये लाइन है? सो बेसिकली अगर मैं उसको बहुत सारा डेटा दूं तो वो इजीली आइडेंटिफाई कर सकता है कि यह किस एनिमल की इमेज है। तो इमेज क्लासिफिकेशन मतलब? 1 क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम है। बहुत बहुत सारे बच्चे यह प्रोजेक्ट क्रिएट भी करते हैं। विच इज डायबिटीज, नो डायबिटीज डायबिटीज और नो डायबिटीज में मैं फिर से क्लासिफिकेशन कर रही हूँ। अब मान लो किसी ने स्टॉक्स में इन्वेस्ट किया है। रिस्क असिस्मेंट मॉडल में क्रिएट करें लॉरस मीडियम रिस्क हाइरिस्क कैटेगरी है। जहां पर भी कैटेगरी फॉर्म हो जाए, वो क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम है। 2 ही तरीके की प्रॉब्लम आप सुपरवाइज लर्निंग में ज्यादातर देखोगे। पहला है क्लासिफिकेशन मॉडल। अगर आपको सुपरवाइज लर्निंग का एक्सपर्ट बनना है तो आप क्लासिफिकेशन और रिग्रेशन को अच्छे से समझ लो। क्लासिफिकेशन मॉडल्स कैसे वर्क करते हैं? रिग्रेशन मॉडल कैसे वर्क करते हैं? इनके पीछे की मैथमेटिक क्या है। अब जब हमने इनको क्लासिफाई किया उसके लिए हमें यह भी समझना है कि कितने तरीके की क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम हो सकती है। मान लो मेरे पास सिर्फ 2 ही क्लासिफिकेशन हैं। जैसे मैंने अभी आपको एग्जाम्पल दिया डायबिटीज और नो डायबिटीज, डायबिटीज और नो डायबिटीज का क्या मतलब है? सिम्पली मैं 2 ही कैटेगराइज कर। र 2 का मतलब बाइनरी मतलब बाइनरी क्लासिफिकेशन बहुत सारी ऐसी प्रॉब्लम स्टेटमेंट होती हैं जो बाइनरी क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम होती है या बाइनरी फॉर्म में होती है यह बाइनरी फॉर्मेट में होती है। न्यूरल नेटवर्क में भी बाइनरी का इस्तेमाल होता है तो बाइनरी डेटा सेट को 1 अलग कैटेगरी में रखा जाता है मान लो आपने 1 बेसिक लेवल का सुपरवाइज लर्निंग मॉडल बनाया है उसको आप फर्दर न्यूरल नेटवर्क में कनवर्ट कर रहे हो तो आपको प्रॉब्लम स्टेटमेंट कैटेगराइज करना आना चाहिए। तो दिस इस वाइनरी क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम जहाँ पर हम बहुत सरे इमेजेज बहुत सारे डेटा के साथ काम कर रहे हैं उसको हम बाइनरी नहीं करेंगे बट हम उसको क्लासिफिकेशन मॉडल कहेंगे। अब इन सारे मॉडल्स को समझने के लिए कुछ ग्राफ्स की जरूरत भी पड़ती है। कुछ ग्राफ्स का मतलब क्या है? बहुत डेटा विजुलाइजेशन में आपको थोड़ा घुसने की जरूरत है। डेटा विजुलाइजेशन के बिना आप डेटा को नहीं समझ सकते वैसे जैसे कि मान लो आप 1 डेटा पे वर्क कर रहे हो जिसमें आप 2 वैल्यूज पे वर्क कर रहे हो। बिल का अमाउंट और मान लो बॉडी का वेट। अब मैंने क्या कहा कि क्या बॉडी वेट बिल अमाउंट से कोई भी कनेक्शन रख सकता है। मुझे नहीं पता तो मैं क्या करूंगी मैं 1 ग्राफ क्रिएट करूंगी और मैं ये देखूंगी कि क्या इन दोनों के बीच में कोई भी रिलेशन है या नहीं। अगर इनके बीच में कोई रिलेशन नहीं होगा तो मेरे पास डेटा प्वॉइंट्स कुछ यहां यहां आ जायेंगे जो ये शो करता है कि भई इन दोनों का तो इसमें 36 का आकड़ा बट अगर कुछ प्वॉइंट्स बीच में लाए कर रहे हैं कुछ इस तरीके से तो मतलब मैं कह सकती हूं। हां थोड़ा बहुत तो कुछ न कुछ लिंकेज है शायद किसी और कॉलम के थ्रू हो। बट इन दोनों के बीच में कोई न कोई तो रिलेशनशिप है तो वैसे ही जब हम डेटा को समझने की कोशिश करते हैं तब हमें ग्राफ्स की जरूरत पड़ती है और डेटा विजुलाइजेशन वहां पर बहुत हेल्प करता है। आपको कोई भी इमेज क्लासिफाई करनी है कोई भी वैल्यू उसको समझना है तो वहां पर क्लासिफिकेशन मॉडल की जरूरत होती है। क्लासिफिकेशन मॉडल के बाद आता है रिग्रेशन मॉडल। अब रिग्रेशन मॉडल क्या होता है? रिग्रेशन मॉडल थोड़ा सा डिफ्रेंट होता है। रिग्रेशन का मतलब क्या है जैसे वो कैटेगरीज पर वर्क करता है। यह क्या है क्वान्टिनियसरिग्रेशन मतलब क्वां्टिनियस रिग्रेशन प्रॉब्लम मतलब जहां पर क्वां्टिनयस वैरिएबल की बात हो रही है, जहां पर क्वान्टिन वैरिएबल की बात हो रही हो। क्वान्टिन्यसवैरिएबल का मतलब क्या है कि आप ने न्यूमेरिकल वैल्यू ली हैं जो रियल नंबर की तरह हो सकती है। मान लो मुझे हाउस प्राइस प्रोडक्शन करना है। मुझे पता लगाना है कि अगर कोई घर यहां पर अगर कोई घर इस पर्टिकुलर एरिया में है इस पर्टिकुलर साइज का है, इतने इसमें बेड रूम्स हैं, इतने उसमें लिविंग रूम है। तो अगर मैं इतना डेटा आपको प्रोवाइड कर रही हूं तो क्या आप मुझे बता सकते हो कि प्राइज क्या है। अगर इस तरीके का कोई क्वेश्चन है तो इसको। हम कहते हैं रिग्रेशन प्रॉब्लम स्टेट में मान लो मुझे प्रेडिट करना है कल कितना टेम्प्रेचर रहेगा। मेरे पास सालों के टेम्प्रेचर का डेटा है। मैं कल का प्रेडिक्शन कर रही हूं। तो दिस इज कॉल रिग्रेशन मॉडल आपको टाइम का प्रोडक्शन करना है। वो भी रिग्रेशन प्रॉब्लम है। किसी भी मॉडल को समझने के लिए स्टार्टिंग करो। मैथेमेटिक स मैथेमेटिक्स के बाद पहले कोर्ट जब आप लिख ले तो तब आपको समझ में आने लग जाएगा कि यह किस तरीके से वर्क कर रहा है। ठीक है तो क्लासिफिकेशन मॉडल एग्रेशन मॉडल यह दोनों इस तरीके से है है नेक्ट हमारा क्या है नेक्स्ट है हमारा क्लस्टरिंग। अब क्लस्टरिंग क्या होता है। क्लस्टरिंग मतलब सिम्पल सा, क्लस्टर्स क्रिएट करना। अब क्लस्टर्स किस तरीके के हो सकते हैं। क्लस्टर अलग अलग तरीके के हो सकते हैं। मान लो कि मुझे 1 नेटफ्लिक्स की कंपनी का प्रोजेक्ट मिला है। नेटफ्लिक्स की कंपनी में मुझे यह बोला गया है कि यह बताओ कि आपको जो है टीवी शो के बारे में बताना है उस टीवी शो में आपको लोगो के इंट्रेस्ट के बारे में बताना है कि नाइन पीएम पे जो 5 शो आते हैं उन पांचों शो में कितने लोग हैं जो इंटरस्टेड हैं, किसका रेटिंग हाई है, किसका रेटिंग लो है। मुझे डिफ्रेंट 5 प्लस कर्स क्रिएट करने को दिए हैं तो 5 क्लस्टर्स क्रिएट करना, मतलब 1 ग्रुप ऑफ पीपल के डेटा को प्लॉट करना और उसके बारे में डिटेल प्रोवाइड करना। तो ये क्लस्टरिंग टाइप का मॉडल होता है। क्लस्टरिंग 1 अन सुपरवाइज्ड मॉडल होता है इसमें हम कोई भी लेबलिंग नहीं देते हैं। हम क्लस्टर्स को क्रिएट करते हैं। जो प्वाइंट्स आसपास लाए कर रहे हैं वो हमारे क्लस्टर्स के अंदर इनक्लूड हो जाते हैं। डिजिट रिकोग्नेशन मॉडल हो गया या कोई भी 1 मॉडल हो गया उसमें भी हम क्लस्टरिंग को यूज कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि जो क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम्स हैं वो अलग होती है उसमें क्लास ट्रिंग नहीं जल सकता है। इसके बारे में हम डेप बात करेंगे जब हम कोडिंग कर पर अपने कोर्ड को लिखेंगे ये डेटा लोड हो चुका है। इसी डेटा की मैं बात कर रही हूं। इस डेटा को आपको सिम्पली डाउनलोड कर लेना है। डाउनलोड करना भी सिम्पल है, साइनिंग कर लेना है। इस वेबसाइट पे। अब आप देखो। ये है पिक्सल्स का डिजिट रिकगनेशन डायरेक्ट डेटा से ये जीरो जीरो यह पिक्सल्स में बेसिकली आपको। यह डेटा मिल रहा है। अब ये नोटबुक है लेट मी जस्ट टेक यू डेटा है। साइन ने भी इसलिए चलेगा नहीं। अब डिपेंड करता है कि आपने डेटा को सी एस पी में लिया है, इमेजेज में लिया है, डिपेंड करता है बहुत सारे पी डी एफ फाइल बहुत सारे डेटा साइट्स आपको इसमें मिल जाएंगे। जैसे ये स्मॉल इमेजेज का डेटा है जो ओरिजनल वाला है ओरिजनली ये जो डेटा सेट है यह इमेजेज वाला ही है। बट फर्दर इसको सी एस पी में कनवर्ट किया है। अब सी एस पी में कनवर्ट क्यों किया है। सी एस पी में कनवर्ट करने के 2 रीजन देखो। सी एस पी में वर्क करना बहुत इजी है। और पाइथन सी एस पी को बहुत अच्छे से सपोर्ट भी करता है पाइथन सी एस पी को बहुत अच्छे से सपोर्ट करता है आपको बस 1 सिम्पल सी कमांड लिखनी होती है वो इनस्टॉल कर लेते है बट ओरिजनली अगर आप देखोगे तो ये डेटा सेट इमेज की फॉर्मेट में ही था और इमेज की फॉर्मेट से ही आपको इसको समझना भी चाहिए तो चलिए कल कंटिन्यू करेंगे इस चीज को ब बट मेक शोर के आप इस में कोई भी डाउट है तो आप नीचे कमेंट कर दें तब तक के लिए स्टेट यू हैप्पी लर्निंग एंड कीप ग्रोइंग।










