Types of Statistics Explained in Hindi | How is it used in Data analyst role

Statistics has two main types: descriptive, which summarizes data you have, and inferential, which makes predictions about data you don't. A data analyst uses descriptive stats to organize and visualize findings, and inferential stats to forecast future events or estimate what's happening in a larger population.
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सो, हेलो, एवरीवन, वेल्कम, बैक, टू, मई यूट्यूब, चैनल आज के विडियो में हम फिर से बात करेंगे स्टेटिस्टिक्स के ऊपर इसमें हम मेजर ली बात करने वाले है। टाइप्स ऑफ़ स्टेटिस्टिक्स के बारे में 2 टाइप की स्टेटिस्टिक्स होती है पहली डिस्क्रिपटिव, दूसरी इन्फेंट इन्ही के बारे में। आज हम डिस्कस करेंगे तो लास्ट वीडियो में हमने जाना की स्टेटिस्टिक्स होती क्या है। तो हमें पता चला की स्टेटिस्टिक्स का मतलब यह है कि डेटा के अन्दर अभी क्या चल रहा है इस चीज को जानना स्टेटिस्टिक्स हमारी मदद करती है ताकि हम डेटा को अच्छे से अंडरस्टैंड कर सके। सबसे पहले मेन रीजन तो हमारा स्टेटिस्टिक्स से रिलेटेड है अंडरस्टैंडिंग का क्यूंकि वो हमें मदद करती है सेकेंड चीज है हम उससे क्या कर सकते हैं हम डिसिजंस बना सकते हैं। तो जब हमें डिसिजंस बनाने होते है तब भी हमें स्टेटिस्िक्स की जरुरत होती है। उसके बाद थर्ड जो चीज होती है वो है कम्युनिकेट करना जो भी मैंने इनसाइट्स लिए है उनको कम्युनिकेट करना, उनको अपनी टीम तक क्लियरली विद प्रूफ लेकर जाना इसमें भी हमारी स्टैटिस्टिक्स की हेल्प तो कम्यूनिकेट करने में भी हमारा स्टेटिसटिक्स का ही रोल होता है। उसके बाद अगर बात करूँ तो कम्युनिकेट करने के लिए मैं क्या क्या चीजे उस करती हूँ कम्युनिकेट करने के लिए मैं करती हूँ ग्राफ। अब इस ग्राफ को बनाने के लिए भी मुझे क्या चाहिए स्टेटिस्टिक ऐसी तो इतनी अंडरस्टैंडिंग आई होप आप लोग को क्लियर अब हम बात करेंगे स्टेटस के टाइप के बारे में। स्टेटस 2 टाइप की होती है सबसे पहले मैंने आपको बताया डिस्क्रिप्टिव उसके बाद होता है इन्फोरेंशलयेदो टाइप की स्टेटिस्टिक्स ऐसी ही हमारा डेटा साइंस मशीन लर्निंग वर्क कर रहा है। तो अगर आपको डेटा साइंस मशीन लर्निंग जैसी फील्ड में जाना है रहना है तो आपको इन्फरेंशलडिस्किप्टिव की क्लियर अंडरस्टैंडिंग सबसे पहले इसकी बेसिकली डेफिनेशन के बारे में बात कर लेते। एक्जैटली ता क्या है अगर मैं डिस्क्रिप्टिव की बात करूँ या फिर इन्फेशन मतलब हमें बताया जाता है की किस तरीके से हम डेटा को बेसिकली डील करता है उन चीजों से जहाँ पर हम डेटा को ऑर्गेनाइज कर सके 1 बेटर वे में ताकि हम एनालिसिस अच्छा कर सके। उसके बाद हम डेटा को समराइज भी डिस्क्रिप्टिव ऐसी ही करते है। तो जब भी समराइजेशनकीबात हो कनक्लूजन की बात हो डेटा ऐसे तो हमारी डिस्क उसके बाद अगर मैं बात करूँ तो विजुअल रिप्रेजेंटेशन भी हमारी डिस्क्रिप्टिव ऐसी ही आती है। अगर मैं इन बात करू इसी जगह पर तो इन्फोरेंशलहमारा क्या हेल्प करता है की हमारे पास जो कम्प्लीट डेटा है उस कम्पलीट डेटा में ऐसी सैंपल ऑफ़ डेटा लेकर इन्फोरेंशलकहा करता है सैंपल ऑफ़ डेटा लेकर उससे हमें प्रेडिक्शन बनाने में हेल्प करता है। मेन चीज की प्रेडिक्शन करना या फिर कोई चीज़ एस्टीमेट करना जैसे मैंने क्या करा मैंने डेटा लिया वेदर का तो अब मैं वेदर के रिपोर्ट से क्या जान सकती हूँ की नेक्स्ट डे क्या बारिश होगी या नहीं होगी, क्या विंड होगी या नहीं होगी, क्या वेदर क्लाउडी होगा या नहीं होगा या फिर वो हॉट रहने वाला है तो बेसिक मैंने क्या करा, प्रेडिक्शन करा मैंने कोई चीज एस्टिमेट करी तो जब हमें एस्टीमेशन प्रेडिक्शन की बात होती है तो हम इन्फोरेंशियल सेटेसिक का यूज करते है जो पूरे के पूरे डेटा पर वर्क नहीं करती है सैम्पल ऑफ़ डेटा पर वर्क करती है और इसी से हमें बियोंड डेटा चीजें पता चलती है कि बियोन्ड द डेटा ऑन द बेसिस ऑफ, उसके पैटन पे क्या आउटपुट रहने वाला है, उसके पैटन पर क्या प्रेडिक्शन हो सकती है, उसके पैटन पे क्या एस्टिमेशन हो सकता है तो जब हम इन चीजों के बारे में बात करते है प्रेडिक्शन एस्टीमेशन जैसी चीजों पर, वहाँ पर इन्फोरेंशियलसटिसिक्स उस होता है जब हमें बिन द डेटा बात करनी होती है तो इन्फोरेंशियल, जब हमें इन द डेटा बात करनी होती है तो हम यूज करते हैं डिस्क्रिप्टिव स्टैटिस्टिक्स।










