XGBoost builds decision trees sequentially, with each new tree fixing the errors of the last one. Neural networks learn patterns by adjusting connection weights across multiple layers. The speaker explains both in Hindi with simple analogies.
Chapters
चलिए आज समझते हैं। एक्जी बूस्ट और नील नेटवर्क पर क्या फर्क होता है। एग्जीबूस्ट और न्यूरल नेटवर्क दोनों ही मशीन लर्निंग मॉडल है। लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग होता है। एक्जीबूस्टकी अगर मैं बात करूं तो वो डिसीजन ट्री का 1 ग्रुप होता है जो स्टेप बाय स्टेप अपनी गलतियों को इम्प्रूव करता जाता है। हर नया ट्री प्रवेस एरर को फिक्स करता है। इसी लिए मॉडल जो होता है वो ग्रेजुअली बेटर होता जाता है। वहीं पर न्यूरल नेटवर्क ब्रेन की तरह काम करता है, जिसमें मल्टीपल लेयर्स होती हैं और जिन लेयर्स को यूज करके वो डेटा से पैटन को लोन करता है। इसमें 2 चीजें होती हैं वेटर कनेक्शन जो ट्रेनिंग के टाइम एडजस्ट होते रहते हैं। अगर मैं सिंपल भाषा में आपको बताऊं तो एग्जीबूस्टरूल बना कर डिसीजन लेता है। जबकि न्यूरल नेटवर्क एग्जाम्पल देख कर खुद से पैटन को सीखता है।