बूढ़े हाथी और महात्मा बुद्ध की यह कहानी आपकी सोच बदल देगी!

Yogendra Kumar Malik tells a parable about an old war elephant stuck in mud that only rises when a veteran driver beats a war drum. He connects the elephant's struggle to modern problems like cheating and selfishness, arguing that selfless action for others is the drum that lifts you out.
Chapters
ये कहानी है महात्मा बुद्ध के समय की। उस समय एक कौशल नरेश हुआ करते थे और उनके पास एक बड़ा ही बलवान हाथी होता था। और वो इतना बलवान था कि हर युद्ध में वो उसकी वजह से युद्ध जीत जाते थे। कौशल नरेश उसका ख्याल रखते थे और उसके महावत का भी ख्याल रखते थे। और वो हाथी इतना जबरदस्त था साब उससे प्यार करते थे क्योंकि वो अपने देश के लिए अनगिनत घाव लेकर अनगिनत युद्ध जीत के लाया था। अब होता ये है कि एक बार वो हाथी बूढ़ा हो जाता है क्योंकि सब आपको पता है बूढ़े होते हैं आप और हम भी बूढ़े होंगे, right? हाथी बूढ़ा हो जाता है और बूढ़ा होकर वो अपने जो normal तलाब इतना दुर्बल हो चुका है कि अब वो अपने आप को निकाल नहीं पा रहा है। अब थोड़ी देर बाद ये बात सैनिकों को पता चलती है, वो बड़ी कोशिश करते हैं, कुछ महावत आते, बड़ी कोशिश करते हैं, उसको पीटते हैं, कुछ खाने का परलोबन देते हैं, पर वो बाहर नहीं निकल पाता। थोड़ी देर बाद पंडितों को तो सब लोग दुखी हैं, सैनिक दुखी हैं, महावत दुखी हैं, राजा भी दुखी हैं कि उनका प्रिय हाथी छोटी सी कीचड़ को बाहर नहीं निकल पा रहा है। इसी वक्त राजा को ख्याल आता है कि क्यों न मैं उस महावत को बुलाऊं जो इनका बड़ा जिगरी महावत था कई साल उसने इनके साथ काम किया इस हाथी के साथ और वो सब लोग देखके बोलते हैं अरे ये क्या हो गया हंस क्यों रहा है यहाँ सब लोग दुखी हैं बोले ये तो अभी अभी बाहर आ जाएगा बोले कैसे तालाब के किनारों पे वो संग्राम भेरी बजाने लगते हैं डुड्डू डुड्डू डुड्डू डुड्डू डुड्डू डुड्डू और संग्राम के वो भेरी सुनते ही हाथी आराम से जैसे महात्मा बुद्ध के काल का समय है, तो महात्मा बुद्ध के कुछ विक्षु कुछ से शेवी देख रहे होते हैं। वो पहुँचते हैं भगवान के पास, बोलते हैं भगवान, हमने ये सब देखा। महात्मा बुद्ध बोलते हैं, यही तो मैं तुमको समझाने की कोरिशिश कर रहा हूँ विक्षुओं कि कीचड़ से बाहर निकलो। मैं कब से संग्र पूजा अर्चना से बाहर नहीं निकल पाओगे पूजा अर्चना से भी नहीं निकला तो वो हाथी बाहर कैसे निकला जब उसको खुद लगा मेरा युद्ध मुझको नहीं लड़ना पड़ेगा तो वो बाहर निकल गया दोस्तों मैं भी ऐसे कोच और मेरे जैसे बहुत सारे कोच ये संग्राम भैरी बजा रहे हैं आपके पास कि आप ये कर सकते और कीचड़ आपको अंदर ही निकल ले। ऐसा हो भी रहा होगा। इतने सारे सालों के साथ आप कौन सी कीचड़ में हो? कीचड़ चीटिंग, कीचड़ कोई सिस्टम का ना होना, कीचड़ शॉर्टकट का ढूंढना, कीचड़ लोगों को मूर्ख बनाने का सोचना, कीचड़ स्वार्थी-स्वार्थी मेरा पहले, मेरा पहले। इसके विपरीत जब वो हाथी संग्र देश के लिए लड़ा जाता है, राजा के लिए लड़ा जाता है। जब आप दूसरों के लिए कुछ करने लगोगे, तो वो संग्राम भेरी जो हम बजाने की कोशिश कर रहे हैं, वो आपको सुनेगी। और आप अपने जीवन की कीचड से ऐसे बाहर निकल जाओगे और आनन्द में ही हो जाओगे। वर्ना दोस्तों, ये याद रखेगा, हाथी और ये जो समानता ह और कौन सी संग्राम भेरी बज रही है जो आप अवॉइड कर रहे हो? Please do comment what did you learn, what else you learned from this story? I will watch each and every comment और सबका reply करूँगा. Thank you so much.
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