In this Hindi monologue, seasoned financial advisor Yogendra Kumar Malik draws on more than two decades of experience selling child‑insurance and investment products to warn fellow advisors and parents about the severe financial pressure faced by India’s middle‑class families. He emphasizes that the returns on child‑segment products must be high (10‑12 %) to keep pace with soaring education costs, which he cites as a major driver of family stress. Malik critiques misleading pitches that promise education funding without solid returns, recounts the closure of thousands of schools and government colleges, and describes how the lack of proper financial planning leads to health issues (high blood pressure, diabetes) among fathers. He urges advisors to provide honest, high‑return solutions and to engage parents early—ideally before marriage or childbirth—to educate them on financial planning, skill development, and appropriate investment vehicles (ULIPs, LIC policies, mutual funds). The talk blends personal anecdotes, statistical observations, and an emotional appeal, calling for a collective effort to protect children’s futures and relieve parental pressure.
Chapters
नाव चाइल्ड सेगमेंट में रिटर्न्स जो है वो बहुत इम्पोर्टेंट क्यों है। दोस्तों अगर आप गूगल जाओगे और गूगल पर सर्वे करोगे की भारत में एजुकेशन की महंगाई क्या है तो बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा है। दोस्तों ऐक्चवली उसको बीट कर पाने के लिए आपको अच्छे प्रोडक्ट्स ही देने पड़ेंगे। 10 12 परसेंट है बहुत ज़्यादा है तो इसलिए वी नीड टू गिव गुड गुड रिटर्न्स देखो। कई कंपनियों ने भी इसमें काफी सारा रिसर्च किया हुआ है। झूठ वाले पे मत जाना, ये जो झूठ वाले डाल रहे है एजुकेशन आपके भी बच्चे हैं आप खुद ही देखते हैं। इसको अब मैं आपको 1 और सलाह बताता हूँ थोड़ा ध्यान से समझिए गाइज कोई पिच है आप बना पाए इसकी पिच तो यह आपकी आपके ऊपर है जो नहीं बना पाया वो उनकी प्रॉब्लम में क्या कर सकता हूँ। दोस्तों मैं आपको बहुत अदब से और अपने एक्सपीरियंस से 1 बात बताना चाहता हूँ। स्पेशली मेरा एक्सपीरियंस जो 2000 5 से मुझे हुआ चाइल्ड प्लान बेचने का 2000 5 में 2000 3 में में चाइल्ड प्लान बेचता था महा लाइफ टाटा के लिए उसके बाद 2000 5 में मैं चाइल्ड प्लान बेचता था यंग स्टार एसटी एफसी के लिए मैंने काफी अच्छा बेचा पर तब से मैंने चाइल्ड प्लान बेचना बंद नहीं किया। पटेंशकास्मार्टके जीवन मंग मैंने जीवन लक्ष्य हो बंद नहीं किया। मैं आपको 1 चीज बताना चाहता हूँ। ये जो बच्चों जब पैदा हो जाते है तो यह ईश्वर की संतान देन है। चलिए हम इसको वर्दान लेते है पर ये वरदान उसी के लिए है जिसके पास इस इस को देने के लिए कुछ है। वरना हर मिडल क्लास में 1 इंसान की बलि लग जाती है। उसके जीवन की जीवन बन जाता है। वो जीवन मतलब वो जीवन ही नहीं रहता। इतना प्रेशर में वो व्यक्ति आ जाता है। वो है बाप। मैं अपने पिछले 20 सालों के इस करियर में हज़ारों बाप से मिलाऊं बिलीव, मी मैंने, बुरा मत, मानिएगा मैंने और तो वो प्रेशर ही नहीं देखा। घरों में घुस के जो 1 बाप अपने बच्चे के डिस्कशन, एजुकेशन या शादी को लेकर कर रहा होता है वो 2 रूपए के लिए भी बहस कर रहा होता है। इसका रीजन 2 बहुत बड़े रीजन है। दोस्तों नंबर वन 1 तो उसको जब उसने शादी की उसे कोई सलाह देने नहीं आया कि बच्चे कब करने चाहिए। सच्ची बात ये है उसने सलाह लिए अपने बाप से जो खुद मिडल क्लास में स्ट्रगल कर रहा है उसको पता होता तो ये क्यूँ होता। या अपने यार दोस्तों से जो खुद मिडल क्लास के है दूसरा बच्चे के पैदा होते। पुराने से पुराना आदमी भी भारत में यू टी आई का 1 यूनिट ट्रस्ट का फंड ले सकता था। एलआईसी म्यूचुअल फण्ड का म्यूचुअल फंड ले सकता था। और आज से नहीं एल आई सी की कई पॉलिसी बहुत पुरानी। जब प्राइवेट भी न हो तब भी थी और जिस दिन से प्राइवेटाइजेशन हुआ है 2000 3 से यूलिप चल रहा है भारत में 2000 34 से पर उसको न स्टॉक, न यूलिप, न यू टी, आई, न एलआईसी या सलाह देने वाला ना सलाहकार मिला। और वो आज महंगाई से हार गया है। वो अच्छे दिन सोच कर, कुछ गवर्नमेंट को लाया। और वही आदमी है जिसके बाल उड़ते हैं, जिसकी खाल ढीली बढ़ जाती है, जिसको बीपी होता है, जिसको शुगर होता है। आपको जानकर, विडियो रिस्पेक्ट तो लेडिज है। बुरा। मत मानिएगा लेडिज के मुकाबले मर्दों में साढ़े 3 गुना ज्यादा बीपी और शुगर की बीमारियाँ है। क्यों? क्योंकि वो 1 बाप ही है जो 1 प्रेशर लेता है। तो मैं चाहता हूँ की आप बच्चों के अच्छे फ्यूचर का डिस्कशन करें उन माँ बाप से जो छोटे हैं, जिनके बच्चे छोटे हैं, जो अभी मेरिट हुए है, जिनके बच्चे भी नहीं हुए हैं, या जिनके बच्चे बहुत छोटे हैं। क्योंकि वो एक्चुवल में कुछ कर सकते हैं, सही जगह पर लगा सकते हैं, वरना कोई हरगरन्ुखरआएगा और फिर उनको 1 घटिया सलाह दे कर चला जाएगा। और ये बात कमाते कमाते, न जीवन जी पाएगा और न ही ये मर पाएगा। मरेगा तो डर है की बच्चों का क्या होगा, जी गया तो भी बच्चों का क्या होगा। और जाने अनजाने में वही मिडल क्लास से मिडल, क्लास से मिडल, क्लास से मिडल, क्लास चलता चला जाएगा। इतनी न्यूज। किसी सिक्योरिटी गार्ड के बच्चे ने आईएस क्लियर कर लिया, किसी इसने कर लिया, इसने कर लिया। अरे भाई क्या न्यूज है। आपको पता है कितने करोड़ लोगों ने दिया, उसमें से 1 ने क्लियर कर लिया, वो न्यूज है क्या? भारत में एजुकेशन फ्री होने के बावजूद 90 हजार स्कूल इस साल बंद हो गए, 13 हजार गवर्नमेंट के कॉलेज बंद हो। यह भारत की व्यथा है कि यहाँ एजुकेटेड नहीं हो तो समाज नहीं जीने देता। एजुकेशन में 20 साल लगा, 2 तो नौकरी नहीं मिलती। फिर समाज क्या जीवन ही जीने नहीं देता। तो 2 सलाह अपने बच्चों के और अपने कर क्लाइंटस को जरूर देना। 18 का वेट न करो, कमाने के लिए। 18 का वेट न करो। कोई स्किल सीखने के लिए ये बच्चों से पहले करा। नंबर टू बच्चा पैदा करने से पहले फाइनेंशियल एजुकेशन अपने दिमाग में पैदा करो। और अगर बच्चा पैदा हो गया है तो अभी भी देर नहीं हुई है। करो। क्योंकि ये जो एग्जाम्पल मैंने दिखाए, मेरी जो लीड साहिह, ये वो बाप हैं, जिनके बच्चे पंद्रह 16 क्रॉस कर चुके हैं, वो रो रहे हैं कि हमें कोई मदद कर दे, हमें कोई बता दे क्या हो सकता है, अब कुछ नहीं हो सकता। चिडिया चुग गयी। खेत मैं लकी हूँ की आज से 34 साल पहले मेरी फाइनेंशियल एडवाइजरी की दुकान चल पड़ी। मैंने अपनी बिटिया के लिए कुछ पैसा जोड़ के साइड कर दिया। मैं लकी हूँ सच में कितने लकी होंगे। ऐसे सो प्लीज, उस बाप के लिए ये सेवा भाव से करिए। बहुत अच्छी ट्रेनिंग हमने भारत में लेडीज को दी है, न उनको डिसीजन लेने देते हैं, न वो टेंशन ले पाती है। देर इस वट आई वांट यू टू टेल की। उस बाप के लिए बैठिए उसके साथ और जितना जल्दी आप बैठ सकते हैं। एक्सपीरियंस शेयर कीजिए। ऐसे विडियो बनाए। मैंने कई लोगों को देखा है, जो 40 प्लस है, 45 प्लस है। उनका टाइम गया न वो बिचारे रिटायरमेंट की प्लानिंग कर पाए, न बच्चे की। अब तो क्या हो सकता है। बहुत मुश्किल है, क्योंकि महंगाई ने सब खा लिया। मुझे गाना बना था झारखण्ड का लोकगीत सखी सैंया तो बहुत कमात है, महंगाई डायन खाय जात, झूठ नहीं है, सोचिए कितनी महंगाई है, कमर तोड़ दी है उसने। उस, मिडल क्लास उस मर्द की। अब तो कई बार उसको डर लगता है कि मैं मर्द न होता। तो बेहतर था। इतना स्ट्रेस ना लेता जीवन। तो जीता, आज वो अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर पाता। so this is my experience from badam on my heart, as a financial advisor i suggest you to work with people, who have many, but i also want you to educate people who do not many, but they are bringing new life in this word without any planing। ठीक है, किसी दूसरी लाइफ को इस दुनिया में लाना, बिना किसी प्लानिंग के, ये 1 अनपढ़ता है और कुछ नहीं, इस बात को समझिए और जाइए मार्केट में लोगों को गाइड कीजिए दिस इज माई एक्सपीरियंस last twenty years working in child, segment and i कराई नोट टू डू एनीथिंग फॉर सच पेरेंट्स इस फादर के लिए जो इसके लिए मैं कुछ नहीं कर पाता हूँ, मेरा दिल रोता है, मैं डरता हूँ, इसलिए मैंने लीड को फ़ोन भी नहीं किया। क्या बोलूंगा मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकता। अब गाडी उतर गयी, चिड़िया चुक प्लीज। अगर आप कोई भी लोग ये वीडियो देख रहे हैं जिनके बच्चे छोटे हैं या जिन्होंने अभी शादी की है या करने वाले हो, प्लीज शादी करने से पहले, बच्चे करने से पहले या बच्चे छोटे हैं, तो 1 अच्छे अडवाइजर के साथ बैठो समझो पैसा क्या है और प्लानिंग क्या है और फिर आगे बढ़ो क्यूंकि जिसने पढ़ना है वो सरकारी स्कूल में भी पढ़े।