In this six‑minute Hindi motivational talk, Yogendra Kumar Malik argues that the reason most people fail to sell is that they never experience being a buyer themselves. He explains that buying is natural and enjoyable, while selling feels uncomfortable because sellers lack personal confidence and empathy. By first purchasing the very products or services they intend to sell, a seller gains genuine confidence, can handle objections more naturally, and truly understands the buyer’s hesitation. Malik outlines three practical, inter‑linked steps: (1) own the product you sell – have your own term insurance, health cover, and a SIP (even a small amount); (2) invest in yourself as your best investment; and (3) fully use and experience what you have bought, rather than merely possessing it. He reinforces his points with rhetorical questions, a reference to American speaker Maroon Golden, and a brief exercise asking listeners to write down their own coverage amounts and the percentage of income they spend on self‑development. The talk concludes with a call to action, urging viewers to adopt this buyer‑first mindset to transform their sales effectiveness.
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एक बात पूछूं आपके घर की घंटी बजे और सामने एक आदमी खड़ा हो एक फाइल लेकर आप क्या करते हो भाईसाब अभी जरूरत नहीं दरवाजा पत अब एक और बात सोचिए आप भी किसी के दरवाजे पर उसी आदमी की तरह खड़े रहते हो समझा है आज के इस छह मिनट में मैं आपको यही एक्सप्लेन करने वाला हूँ कि दुनिया में कोई भी इंसान खरीदने से नहीं डरता, ओके? पर हम बेच क्यों नहीं पाते? क्योंकि हम खरीदते नहीं हैं। तो दुनिया में कोई भी इंसान खरीदने से नफरत नहीं करता है, कोई भी नहीं। लोग मॉल जाते हैं, अमेज़न पे जाते है गाड़ी खरीदने में, समान खरीदने में, खरीदना सबको अच्छा लगता है पर जैसे ही कोई बेचने आता है वही इनसान रूड पत्थर का हो जाता है क्यों? क्योंकि लोगों को खरीदना पसंद है पर बेचा जाना पसंद नहीं है और जो ये फर्क समझ जाता है, उसको सारी उम्र दरवाजे खटखटाने की जरूरत नहीं है। अब मैं आपसे कुछ सवाल पूछता हूँ। ईमानदारी से जवाब दीजिएगा। मुझे नहीं, खुद को। आप एक क्लाइंट के सामने बैठे हुए हो और फाइव लाख रुपीस का प्रीमियम समझा रहे हो, पिच कर रहे हो। आपका खुद का कवर कितना है? आप क ये सब जरूरी है। आपके परिवार का टोटल हेल्थ कवर कितना है? आप किसी को समझा रहे हो, SIP जितनी जल्दी स्टार्ट करो, उतना बेहतर रहता है, उसको इंक्रीज करते रहो। अभी तक आपकी SIP स्टार्ट हो गई है क्या? और कितने की? जवाब नहीं देना है, बस सवाल को अपने अंदर जाने दीजिए। एक अमेरिकन स्पीकर है मैरोन गोल्डन मैरोन गोल्डन उनकी एक बात ने मुझे हिला दिया रुकने को मजबूर कर दिया उनका कहना है जो आदमी खुद खरीदता नहीं वो बेच नहीं पाता या अच्छा नहीं बेच पाता और उनकी बात बिल्कुल सीधी है अगर आप चाहते हो कि लोग आपसे खरीदें, तो पहले आपको खरीदने वाला बनना पड़ेगा। ये कोई जादू नहीं है, ये एक बिल्कुल प्रैक्टिकल कारण है। वही मैं बता देता हूँ आपको तीन रीज़न हैं। पहला आपकी आवाज़ बदल जाती है जो चीज़ आपने खुद खरीदी होती है। आपका कॉन्फिडेंस ही अलग हो जाता है। उस तो आप खुद ही उसको जी कर बोल रहे हो, उस प्रड़क कोई इस्तमाल करके आप बोल रहे हो और क्लाइंट आपके शब्द की वज़े से नहीं लेता है क्लाइंट आपके भरोसे की वज़े से खरीदता है यानि के और भरोसा अगर नकली हुआ तो क्लाइंट को पता चल जाता है और आपका भरोसा असली हुआ तो क्लाइंट को पता चल जाता है नंबर टू ऑब्जेक्शन का जवाब आप आसानी से दे सकते हो बिल्कुल आपका कॉन्फिडेंस बदल जाएगा ऑब्जेक्शन को हैंडल करने में जब आप खुद वो चीज खरीदी है और क्लाइंट कहता है महंगा है अभी नहीं बाद में तो आप किताब में से पढ़े हुए जवाब नहीं देते हो आप कहते हो सर मैंने भी यही सोचा था और तीन महीने और फिर मैंने क्या किया अब आपको बताता हूँ ये एक लाइन 20 घंटे और 20 पेज की ट्रेनिंग से बेहतर है क्योंकि आपका कॉन्फिडेंस अलग है तीसरा और ये सबसे बड़ा है जो इंसान खुद कभी हाँ नहीं बोलता वो दूसरों की ना को समझ ही नहीं पाता क्योंकि उसने वो डर कभी महसूस ही नहीं किया जो हाँ बोलने से पहले आता है आप क्लाइंट की जिजग को तोड़ ही नहीं पाते क्योंकि आपने खुद की जिजग को कभी तोड़ा ही नहीं होता एक आखरी बात इस इस्से में समझा रहा हूँ गरीबी पैसे की कमी नहीं होती गरीबी पैसे की कमी नहीं होती, गरीबी एक क्वेश्चन मार के एक सवाल है। एक आदमी पूछता है, इसका दाम क्या है? What is the cost of this? दूसरा व्यक्ति पूछता है, इससे मुझे क्या मिलेगा? What is my benefit in this? ज़िंदगी का पूरा फर्क इन्हीं दो सवालों के बीच में है। आप प्लीज एक गलत मतलब मत निकाल लीजेगा मैं ये बिल्कुल नहीं कह रहा हूँ कि जाकर इदर उधर कुछ भी अनापशनाप खरीद लो अपने वो नादा नहीं होगी समझदारी नहीं मैं एक ओर्डर आपको दे रहा हूँ अपने हाक से थ्री स्टेप्स इस ओर्डर में स्टेप नमबर वन पहला कदम जो आप बेचते हो वो पहले आपके पास होना चाहिए अपना टर्म कवर, अपना हेल्थ कवर, अपनी एसआईपी चाहे 500 रुपीस पर मंथ की हो राशि मायने नहीं रखती आपका हाँ बोलना मायने रखता है आपने उस प्रोडक्ट को हाँ बोला है जिस दिन आप खुद पॉलिसी होल्डर बन जाते हो उस दिन आपकी बात वजन वाली हो जाती है आप बेच नहीं रहे होते हो, आप अपने एक्सपीरियंस को आगे बढ़ा रहे होते हो। स्टेप नंबर टू कदम दो, अपने आप पर खर्चा करना शुरू कीजिए क्योंकि आप ही अपने सबसे बढ़िया इन्वेस्टमेंट हो। वो किसी को एक लाख लगाने के लिए कैसे बोलेगा जो खुद पर दस हजार भी नहीं लगाने को तैयार है। स्टेप नंबर थ्री और सबसे जरूरी जो खरीदते हो उसका पूरा इस्तेमाल करो। किताब खरीद ली पर खर्चा कर दिया पढ़ी नहीं। किताब खरीदी है तो उसको अमल करो। ज्यादातर लोग यही करते हैं कि किताब ले लेते हैं, ट्रेनिंग ले लेते हैं, प्रोडक्ट ले लेते हैं। खोल के भी नहीं देखते। एक बात और, ये तीन स्टेप एक के बाद एक नहीं करने हैं, ये एक साथ चलते हैं, क्योंकि जो आदमी कहता है पहले ये कर लूँ फिर वो करूँगा, वो अक्सर ना वो कर पाता है ना आगे बढ़ पाता है। ये तीन कदम नहीं है, ये एक सोच है तीन हिस्सों में, और ये सोच एक चड में बदल सकती है मैं आपको अपनी बात बताता हूँ कई साल पहले तक मैं लोगों को वो चीज़े बेचने की कोशिश करता था जो मैंने स्वैम नहीं ली थी बड़े कोर्स पर खुद नहीं इन्वेस्ट किया मीटिंग में सब ठीक चलता था पर जब एंड मोमेंट आता था तो कॉन्फिडेंस लैक हो जाता था समझ नहीं पाता था क्ल जो स्पार्कल होता है वो बदल गया और क्लाइंट आपकी आवाज की वजह से नहीं आपकी आँखों में वो झलकता कॉन्फिडेंस वो विश्वास को लेके देखता है तो आज का काम ये है सिर्फ 10 मिनट का एक कागज उठा लो प्लीज गो हेड अभी दो लाइनें लिखनी हैं टू लाइंस आपका खुद का कवर कितना है टर्म प्लान हेल्थ प्ल आपने जो भी इनकम टारगेट लिया है, क्या उसका 10-15 परसेंट अपने डेवलपमेंट पे खर्चा किया है? यानी इनकम टारगेट 10 लाख है, तो क्या एक डेढ़ लाख खर्चा किया आपने ऊपर? ये नंबर लिखिए और ये नंबर अपने पास रखिए मुझे भी मत बताइए बस ये नंबर दोनों आपके पास होने चाहिए। कल क्लास में मिलत तो सब कुछ बदल जाएगा अगर आप अच्छे घरीदार होंगे। All the best.