Closing Master FIVE Decision Client Takes before buying a Life Insurance Policy or Financial Plan

Yogendra Kumar Malik teaches advisors how to close five client decisions before selling insurance or financial plans: trust, genuine need, best-fit product, timing, and budget fit. Resolving these can increase close rates by up to 500%. He uses frameworks like Financial Kundli and Financial Thali to guide clients through each step.
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नमस्कार दोस्तों, हमारे बहुत सारे फाइनेंशियल एडवाइजर, इंश्योरेंस एजेंट, एलाईसी, एजेंट, एसबीआई लाईफ एजेंट, हेल्थ इंश्योरेंस एजेंट और बहुत सारे फाइनेंशियल एडवाइजर जो म्यूचुअल फण्ड में उनको भी यह दिक्कत आती है कि क्लोज नहीं होता, क्लाइंट सुन लेता है, मीटिंग हो जाती है, फॉलो बहुत सारे चलते हैं पर क्लोज नहीं होता। तो यहाँ पर इस वीडियो के थ्रू मैं आपको ये समझाना चाहता हूँ की क्लाइंट 1 प्रोसेस से गुजरता है डिसीजन लेने के अगर वो डिसीजन आप उनको लेने में हेल्प कर देते हैं तो क्लाइंट क्लोज होने की संभावना 5 सौ परसेंट बढ़ जाती है। नमस्कार मेरा नाम योगेंद्र है मैं डिजिटल गनी एकेडमी का को फाउंडर हूं अपने पार्टनर अमित शर्मा जी के साथ और मैं हमारे कोर्स क्लोजिंग साइकोलोजी से ये विडियो आपके लिए लाया हूँ। आप चाहें तो डिजिटल यानी एकेडमी ऐप डाउनलोड कर सकते हैं डिजिटल गनी एकेडमी और उसमें लॉगिन करके हमारे बहुत सारे कुछ फ्री कोर्सेज हैं कुछ पेड कोर्सेज है यू कैन स्टार्ट और जर्मनी तो लेट्स अंडरस्टेंड क्लाइंट कौनसे 5 डिसीजन लेता है और कहाँ पर गलती कर देता है। 1 फाइनेंशियल एडवाइजर सबसे पहले क्लाइंट डिसीजन लेता है चाहे आप वो जानकर हे चाहे वो क्लाइंट आपका फेसबुक लीड से आया है या रेफरेंस से की क्या ये सामने वाले पर मैं भरोसा कर सकता हूँ या नहीं क्योंकि कहीं अपना मतलब तो सिद्ध करने नहीं आया है तो क्लाइंट का यह डिसीजन आप सरल कर सकते हैं अपने रिजल्ट और टेस्टिमोनियल्स दिखा के। हमने यह देखा है। हमने यह देखा है कि नार्मली इंश्योरेंस एजेंट और फाइनेंशियल एडवाइजर्स को कोई ट्रेनिंग ही नहीं है, कोई कोचिंग ही नहीं है कि उनके पास टेस्टिमोनियल होने चाहिए 305 सौ हजार क्लाइंट के बावजूद 1 भी टेस्टिमोनियल नहीं होता की किस क्लाइंट को रिटर्न्स आये हैं, किसी का क्लेम पे हुआ है और ऐसा ही एजेंसी लीडर्स की हालत हमने देखे तो प्लीज टेस्टिमोनियल बनाइए हमने भी नहीं किया था। आप कीजिए टेस्टिमोनियल जब आप दिखाएंगे और अपने क्रेडेंशियल में सर्टिफिकेट्स दिखाएंगे तो समझ आएगा लोगो को की आपको नॉलेज है और आपने लोगो को रिजल्ट दिया है तो आप पर भरोसा किया जा सकता है। 1 बोलना और 1 दिखाना दोनों में फर्क है न। 1 आप बोले बोले कि भगवान हर जगह है और 1 आप देखने जाए महसूस होने लग जाए कि भगवान हर जगह तो फर्क आता है न दूसरा डिसीजन लेता है क्लाइंट की क्या ये मुझे सच में जरुरत है। इस प्रोडक्ट के यहाँ पर भी फिफ्टी परसेंट से ज्यादा एडवाइजर्स फेल हो जाते हैं, रीजन बिंग वो कोई स्ट्रक्चर नीड एनालिसिस नहीं करते। अब हम देते हैं 2 टूल 1 फाइनेंशियल हेल् चेकअप जो एडवाइजर स्टार्ट कर रहे होते हैं और 1 एडवांस एडवाइजर्स के लिए फाइनेंशियल कुंडली जब आप क्लाइंट का पूरा पोर्टफोलियो लेने के मूड में हैं या लेने की शक्ति रखते हैं। ये दोनो टूल स्ट्रक्चर तरीके से क्लाइंट से बुलवाएंगे की यह उनकी जरुरत है। यहाँ पर अगर आपने क्लाइंट से बुलवा दिया, उनका विश्वास ले लिया, उनके लिए सरल कर दिया कि हां उनकी जरुरत है तो क्लाइंट नही बोलेगा बाद में ले लो। नंबर 3 डिसीजन क्या। यह बेस्ट प्रोडक्ट है। यहाँ पर कुछ एडवाइजर अच्छा करते हैं, प्रोडक्ट के डिफ्रेंट कंपेरिजन दिखाते हैं। पर हमने यहाँ पर देखा कई एडवाइजर डरते हैं जैसे इंशोरेंस के एडवाइजर डरते हैं। म्यूचुअल फंड के बारे में बात करने के के वाइजर तो फिक्स डिपाजिट तक से कंपेरिजन नहीं दिखा पाते। इंडिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन कंपनी जो 30 हजार करोड़ से ज्यादा का लाइफ इंशोरेंस करती है। पॉलिसी बजार अगर आप उस पर जाएं तो हर प्रोडक्ट का उन्होंने एटलीस्ट एफडी से कंपैरिजन कर रखा है। सेविंग प्रोडक्ट क्लाइंट का यह हक बनता है कि वो प्रोडक्ट कंपेरिजन ले। आप खुद तो बाल्टियां भी कंपेयर करके लेते हैं। तो क्लाइंट जब लौंग टर्म इन्वेस्टमेंट कर रहा है तो कंपैर क्यों न करे। चाहे बेशक म्यूचुअल फंड हो, चाहे बेशक टॉम प्लान हो, हेल्थ इंश्योरेंस हो या सेविंग प्लान हो। तो इसलिए बहुत जरुरी है की आप क्लाइंट के साथ कंपेरिजन प्रॉपरली दिखाए। यहाँ पर हम सिखाते हैं फाइनेंशियल थाली का कॉन्सेप्ट। अगर उस कॉन्सेप्ट को आप सीख गए तो आप अच्छे से कंपेरिजन दिखा सकते हैं। नंबर 4 क्या यह प्रोडक्ट अभी लेना जरूरी है। आपने अक्सर देखा होगा स्पेशली इंशोरेंस वालों के काल में लोग बोल देते हैं की हम बाद में ले लेंगे, अप्रैल में ले लेंगे, में में ले लेंगे, जून में, जनवरी में लेलेंगे टाल देते हैं, दिवाली के बाद ले लेंगे, होली के बाद ले लेंगे, ईद के बाद ले लेंगे। रीजन उसका यह है की क्लाइंट को लगता नहीं है। मेरी अभी इमिजिएट जरुरत है तो यहाँ पर आपको सेल साइकोलॉजी समझनी होगी, स्ट्रक्चर इमोशनल लॉजिकल ट्रिगर समझने होंगे। अगर आप ये स्ट्रक्चर इमोशनल लॉजिकल ट्रिगर के क्वेश्चन नहीं कर पाते हैं, आपके पास नहीं है तो अक्सर आपके क्लाइंट फॉलोव में होंगे। फॉलोव में है तो आप फ्रस्टेशन में हैं और इस वजह से आप नए क्लाइंट खोलते ही नहीं है। क्या आपको डर लगता है कि यार किसी और को खोलूंगा मतलब मीटिंग करूंगा तो होगा क्या की ये भी मेरा फॉलो में चला जाएगा। तो इसके लिए क्लाइंट से आपको कुछ साइकोलॉजिकल ट्रिगर्स क्वेशन पूछने होंगे। है ना होगा नंबर 5 क्लाइंट डिसीजन लेता है क्या यह मेरे बजट में है या नहीं। ना ये डिसीजन बहुत इम्पोर्टेंट है पर यह सबसे एंड में नहीं आता है। अगर आप चाहे तो ये डिसीजन जो है पहले भी ले सकते हैं पर आप क्लाइंट के साथ अक्सर ये डिसीजन को एंड में टाल देते हैं। इस वजह से क्लाइंट बोलता है कि अभी पैसे नहीं हैं तो मैं 1 एग्जांपल देता हूँ। मान लीजिये आप किसी क्लाइंट की रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए गए हैं। आपने बात कर ली कि रिटायरमेंट प्लानिंग सर जरूरी क्यों है और आपके पास कितना सरप्लस है जिसको आपको रिटायरमेंट में पार्क कर सकते हो। तो जरूरी क्यों है और कितना सरप्लस है वो पहले ही हो गया। अब अगर आप सरप्लस नहीं समझते फाइनेंशियल प्लानिंग में तो आप फाइनेंशियल प्लानिंग का कोर्स कीजिए समझिए। उसके बाद जब आप बजट की शुरुआत करेंगे, बजट की करें तो आप बिल्कुल, इम्पोर्टेंट, पांचों, क्वेश्शन, पे, अच्छे, से, डिसीजन, ले, पाएंगे याद रखिये ये सभी फाइव डिसिजन अगर क्लियर होते है। क्लाइंट गाँव का है, शहर का है, एच एन आई है वो आपसे ले लेगा और अगर ये क्लियर नहीं हुए तो चांसेस हैं की वो आपसे फॉल में चला जायेगा और फॉलो तो आप जानते ही है की फाइनेंसियल प्लान के लिए कितने महीनों और साल तक चल सकते है करियर इनके ऊपर काम काफी मुश्किल काम नहीं है। एंड यू कैन सी योर रिजल्ट 5 सौ परसेंट चेंज हो सकता है। एल सी यू इन द लाइव कोर्स।
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