Dont Make Goals for 2026 , Instead Make Systems, गोल तो हर साल बनाते हो, पर पूरे होते कहाँ हैं

Yogendra Kumar Malik explains why sales and insurance agents fail at their yearly goals: they run hard without clear direction, lack products and leads, and exhaust themselves with unfocused activity. He argues systems beat goals.
Chapters
चलिए। मैं आपसे पूछना चाहूँगा, थोड़े डायलॉग के रूप में ये कहानी आप की तो नहीं है। ये सोरन मुझे आंसर करिएगा। अरे रेडी रेडी कहानी, ये कहीं आपकी तो नहीं है। पहली रेस में दौड़ तो पूरी ताकत से रहा हूँ, लेकिन फिनिश लाइन कहाँ है, यह पता ही नहीं है। दौड़ पुरी ताकत से रहा हूँ। कब फिनिश होगी? कप फिनिश लाइन, आएगी नहीं पता है। आपकी कहानी तो नहीं है। दुनिया जीतना चाहता हूँ, पर जब मिरर के सामने खड़ा होता हूँ, तो खुद पर ही शक हो जाता है।
कॉन्फिडेंस की कमी हो जाती है, गाइडेंस की कमी हो जाती है।
जंग के मैदान में आ तो गया हूँ, पर मेरे पास हथियार ही नहीं है। न प्रोडक्ट है, न लीड से न नॉलेज है। यह आपकी कहानी तो नहीं है। बंद तो गया हूँ।
एजेंट, म्यूचुअल, फंड, एजेंट, जेंसी लीडर, लाइफ, इंश्योरेंस एजेंट। पर नॉलेज की कमी है।
इंतहा हो गई है। इंतज़ार की। आरोप खबर नहीं आई है।
अभी तक ग्राहक की लीड्स ही नहीं है।
फॉलो कर कर के परेशान हो गया।
ये वो करके, वो कोर्स करके परेशान हो गया।
दिल में बहुत कुछ है।
बोलने को।
जैसे क्लाइंट सामने आता है, तो बोलती बंद हो जाती है। ढंग का ग्लैंड क्वेश्चन पूछ ले, कंपेरिजन मांग ले, रिटर्न्स मांग ले, तो दिक्कत हो जाता है। ओके हाथ तो आया, पर मुंह न लगा। मतलब मीटिंग बढ़िया होती है। चाय पानी भी होता है, पर चेक साइन नहीं होता। हाथ तो आया आता है, पर मुँह नहीं लगता है। ऐसा होता है।
थैंक यू। अंबुजजी।
दुनिया रॉकेट में उड़ रही है। और मैं आज भी बैल गाड़ी से चल रहा हूँ। डायरी में लिखा हुआ हूँ, नोट पैड पर लिख रहा हूँ। वो भी ढंग से यूज नहीं कर पा रहा हूँ। ऐसा तो नहीं है। दुनिया चाँद पर पहुँच रही है। मैं बैल, गाड़ी से चल रहा हूँ। कोई ब्रांच जाके।
टेली कालिंग करके कोल्ड कॉलिंग करके, अरे भाई।
मेरे को ले लो, ले लो, ले.
लो, ले लो, पॉलिसी ले लो, पॉलिसी ले लो, पॉलिसी ले लो। धोका 4, धोका 4, दोका 42 लगाओ 4 ले जाओ, डेढ़ सौ रूपए, रोज लगाओ 21 लाख ले जाओ डेढ़ सौ रूपए डेढ़ सौ रूपए डेढ़ सौ रूपए डेढ़ सौ रूपया।
ऐसी हालत तो नहीं है। ऐसी हालत है।
इसको बदलना होगा।
24 घंटे भागता रहता हूँ, पर न काम खत्म होता है, न जेब भरती है। आखिर वक्त जाता कहाँ है, पता ही नहीं। टाइम ही नहीं है। मेरे पास।
और सफलता भी नहीं है, पैसे भी नहीं है।
सपने देखता हूँ, अम्बानी बनने के। पर हालत ऐसी है कि महीने का.
खर्चा चलाना भी बड़ा मुश्किल सौरी। यह थोड़ा सेट है। but is it true that is the what is happening? दैन टाइम इज टू चेंज.
कब तक.
आप वनमैन आर्मी रहूंगा?
गपर के पास भी सामा और कालिया थे। यार, अब तो आप भी ले लो। अब तो आप भी आ जाओ। समझो। या तो टीम बनाओ या डायमंड के साथ। गब्बर के पास भी साम और कालिया थे। अंधेरे में तीर बहुत चला लिए आप कोई ऐसा चाहिए जो हाथ पकड़ कर बोले तू फिक्र मत कर, मैं हूँ.
न अगर आप इस वाक्य से इत्ता रखते हैं तो मैं अब आपको डायमंड का बताता चलता हूँ और रेडी बिकाज.
यहाँ पर मैं हाथ पकड़ के ले.
जाने वाला हूँ जो मेरे को कोई नहीं लेकर गया। मैंने स्वयं अपना रास्ता बनाया आप अपने रास्ते को बनाने के लिए किस हद तक जा सकते हो यह आपको देखना है कहानी मेरी भी यही थी और कहानी सबकी यही होती है और आप सही जगह पर हो।
अब गैप कहाँ आता है वो आपको बताता हूँ गैप आता है।
दोस्तों हम एग्जीक्यूट गोल बहुत अच्छे बना लेते है। 1 गोल बना लिया, 2 गोल बना लिए, 3 गोल बना लिए, बहुत अच्छे गोल बनाते हैं एम डी आर टी सी ओ टी टी, ओ टी शो एडवाइजर बनाऊंगा, म्यूचुअल फंड में अच्छा करूंगा, हेल्थ इंशोरेंस में अच्छा करूँगा। पर जब एग्जीक्यूशन करने जाते हैं तो सट्टी पट्टी गुम हो जाती है। डायमंड उसी का आंसर देने की कोशिश करता है।
माई फ्रेंड।
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