How to Close Leads - हम कस्टमर के साथ डील क्यों नहीं कर पा रहे हैं?

Yogendra Kumar Malik, who sold over 7,000 policies, breaks down why advisors fail to close deals. The real problem isn't leads but how you handle the client decision: missing urgency, unaddressed trust gaps, and no comparison against fixed deposits or mutual funds. He walks through a framework: financial health check, ask what happens if they wait, show testimonials and your Google presence, then present a comparison chart.
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आज का टॉपिक है दूसरा क्लोजिंग, कई बहुत सारे फाइनेंशियल एडवाइजर हमारे पास आते हैं और वो ये बोलते है की हम क्लोजिंग नहीं कर पाते। वी आर नॉट एबल टू क्लोज हमारी क्लोजिंग में इशू आता है। कई लोग बोलते हैं मेरी क्लोजिंग तो ठीक चलती है, टेन में से में थ्री क्लोज कर देता हूँ। क्वेश्चन यह है कि क्या ये सही रेशो है। कई लोग बोलते हैं कि मेरी क्लोजिंग में लोग फ़ोन ही नहीं उठाते है, इग्नोर करते हैं। और कई बार मुझे डाउट होता है कि जो प्रोडक्ट या जिस कंपनी के साथ मैं हूँ वो सही भी है या नहीं है। 9 लेट मी डिकोड की क्लोजिंग हमारी क्यों नहीं होती और हो सकता है मेरे इस एक्सपीरियंस से आप फायदा उठा पाए। दोस्तों मैंने आज तक लगभग करीबन करीबन अपने हाथ से 7000 प्लस पॉलिसी बेची होंगे, म्यूचअल फण्ड भी किए हैं, बहुत सारे और करीबन करीबन हजार प्लस हेल्थ इंजोर बेचा है। और अगर मैं टीम से बात करूँ जो मैंने टीम हैंडल करता था तो मेरे ख्याल से 50 हजार, प्लस से 1 लाख भी हो सकता है क्यूंकि मैंने बड़ी डिम्ब हैंडल की मुझे सौभाग्य मिला तो मैं उस एक्सपीरियंस से उस अथॉरिटी से आपको समझाने की कोशिश कर रहा हूँ की क्लोजिंग क्यों नहीं होती, सबसे पहले क्लोजिंग क्यों नहीं होती क्लाइंट को क्या उस प्रोडक्ट की नींद नहीं है? नहीं क्लाइंट को ये तो पता चल गया है की नीड है मुझे इस प्रोडक्ट की यह उसने टिक मार्क कर दिया है, ये कर दिया है। हाँ तभी उसने आपको अपना टाइम दिया था इसको हमने कैसे उसने अपना टाइम दिया था। अभी मैंने चैट बॉक्स बंद किया हुआ है आप इसको नोट करिए। ठीक है। क्लाइंट को यह तो पता चल गया की इसकी जरूरत है क्योंकि उन्होंने अपना टाइम दिया। अगर आप बिल्कुल ही ऐसे प्रोडक्ट प्रोडक्ट प्रोडक्ट बेचते हो तो हो सकता है उसको जरूरत न लगे। पर मोस्ट ऑफ द एडवाइजर ऐसे होते है जो कुछ जरुरत की बात करते हैं और टाइम क्लाइंट का वहाँ पर लगाते हैं। पर क्लाइंट अब ये डिसीजन लेना चाहता है नंबर वन क्या इसको अभी लेना जरूरी है या बाद में ले लें? अभी लेना जरूरी है या बाद में ले और हमारी आदत है जो चीज अर्जेंट नहीं है उसको टाल 2 हमारी आदत है नोट अर्जेंट डोंट, डू इट मत करो। अगर आप इससे इत्तेफाक रखते हैं तो तब जब दीजिए हमारी आदत है। अर्जेंट नहीं है तो मत करो ये स देखिये आज शाम को मैं डायमंड शो केस खोलूंगा कुछ लोग इस बहाने नहीं लेंगे। दोस्तों अर्जेंसी अगर बन गई कहीं ऐसा न हो, बहुत लेट हो जाए नंबर टू क्लाइंट ये डिसीजन लेता है, क्यों लेता है यह डिसिजन इसको समझने की कोशिश कीजिये। डी कोड कीजिए देन यू विल अंडरस्टैंड स क्लाइंट ये डिसीजन इसलिए लेता है कि ऑलरेडी उसने अपने पैसे की 1 प्लानिंग ही होती है। मोटा मोटा और उस प्लानिंग के बीच में आप घुस जाते हो। अपना ये प्रीमियम लाकर या इन्वेस्टमेंट लाकर। उसकी 1 प्लानिंग चल रही है, उसी के बीच में आप घुस रहे हो। इसलिए हम क्या करते हैं? क्लाइंट का पहले फाइनेंशियल हेल चेक अप करते है। फाइनेंशियल फिटनेस क्या इनकम है, क्या लाइबिलिटीज क्या हैं? ताकि हमें थोड़ा आइडिया आ जाए कि उसकी प्लानिंग क्या है। तो अब क्लैंडकोअर्जेंट कैसे लगे? इसके ऊपर क्या काम करना है, इसके ऊपर कुछ क्वेश्चन पूछने है। अगर ये अभी नहीं करे तो क्या बिगड़ेगा? क्लाइंट से पहले पूछ लीजिये, अभी नहीं करें, क्लाइंट से पूछेंगे बाद में करें तो क्या होगा? कोशशनिखरेक्लाइंड से पूछना है, कौन पूछ रहा है सेल्स पर्सन इज आस्किंग क्लाइंट सर? अभी नहीं बाद में कर ले तो क्या होगा? क्लाइंट को आंसर करने दीजिये, लेट द, क्लाइंट टांसवर लेट द। क्लाइंट थिंक ओवरेट क्योंकी। जो पहले बोलेगा वही फंसेगा। क्लाइंट को पहले बोल ले दीजिये, क्लाइंट को सोचने दीजिये, उसको सोचने दीजिए। आपने पूछा न उससे की सर। अभी नहीं लेते, बाद में लेते हैं। तो क्लाइंट को सोचने दीजिये। वो सोच रहा है, वो सोच रहा है की भैया अभी या बाद में आर यू गेटिंग इट यस नो मे भी। अब अगला डिसीजन क्या है? क्लाइंट ये सोचना चाहता है? क्लाइंट ये पूछना चाहता है की यार ये सामने वाले पर ट्रस्ट करूँ या न, ट्रस्ट करूँ या न। फिर वो दिमाग लगता है। कौन इसके बारे में क्या बोल रहा है? कौन इसके बारे में क्या बोल रहा है। इसी दौरान 1 अच्छा क्लैवर इंटेलिजेंट फाइनेंशियल एडवाइजर क्या करता है। ब मीटिंग के दौरान ही क्लाइंट को अपने विडियो दिखा देता है। मीटिंग के दौरान ही क्लाइंट को अपने टेस्ट मोनियल दिखा देता है। मीटिंग के दौरान ही क्लाइंट को दिखा देता है कि वो टोटल कितने क्लाइंट हैंडल कर रहा है। ठीक है कितने लोगो की पॉलिसी कर चूका है कितने लोगो का जो भी इन्वेस्टमेंट या म्यूचअल फण्ड कर चूका है, वो उसी दौरान दिखा देता है, अपनी वेबसाइट भी दिखा देता है, अपना गूगल भी दिखा देता है। तो होता क्या है कि क्लाइंट का जो ट्रस्ट है वो यहाँ से बनने लग जाता है। ये सारा नोआरियोअंडरसेंडिंग दिस। क्लाइंट का जो ट्रस्ट हैं, यह बिल्ड होने लगता है। ये कितने टोटल क्लाइंट्स हैं, कितने वो हैं। और यह आपको सीखना है। हम सिखाएंगे आपको आगे कैसे करना है, ट्रस्ट करने लगता है। आप वो 1 चीज और करता है जहाँ पर इन्शोरेंस एडवाइजर फेल हो जाता है। आप बताइए क्या क्लाइंट 1 डिसीजन और लेता है। जहाँ पर इंश्योरेंस एडवाइजर स्पेशली फेल हो जाता है। आप बताइए क्या 1 और डिसीजन लेता है। जहाँ पर इंशोरेंस फेल हो जाता है। सब नहीं। कै इंशोरेंस तीसरा डिसीजन है। जो वो लेता है, वो लेता है कि ये जो प्रोडक्ट है, प्रोडक्ट की बात हो चुकी है। ये जो प्रोडक्ट है, ये एफडी से बेटर कैसे है। एफडी या आरडी से बेटर कैसे है। क्योंकि क्लाइंट का मोटा मोटा कैलकुलेशन, भारत का क्लाइंट जो है, वो मोटा मोटा कैल्कुलेशन एफडी के रिटर्न से करता है। ठीक है, एफडी के रिटर्न से करता है। अब मैं आपको 1 एक्जाम्पल देता हूँ। फाइव ईयर, एफडी, इंटरेस्ट रेट फाइव हर का एफडी इंटरस रेट जो है वो इस वक्त एठएठप्वॉइंट वन परसेंट है। टैक्स वैक्स काट के लेट से। ये आ जायेगा सेवन परसेंट क्लाइंट क्या करता है। यह बोलता है कि मैं 1 लाख दे रहा हूँ, क्या यह 1 लाख 7000 हो रहा है। 1 साल बाद, फिर मैं 1 लाख दे रहा हूँ। तो यह हो गया 1 लाख 2 लाख 7000। तो क्या ये 2 लाख पंद्रह हजार हो रहा है। अगले साल बाद। ठीक है। आर्य अंडरस् वो माइंड में कैलकुलेट कर रहा है, है यह क्लाइंट की साइकोलॉजी है। माइंड में कैलकुलेट कर रहा है कि भई ये मेरा डेटा। अब जब आप प्रोडक्ट देते हो तो आप क्या करते हो? कम्पैरिजन यानी तुलना देते ही नहीं। अगर आप कंपेयर नहीं करते हो। इसलिए आपका क्लाइंट वो टालता रहता है। वो क्लोजिंग पे नहीं जाता है, उसके माइंड में आ जाता है या इससे बेटर तो एफडी है। आप सोचते हो आप बोलोगे नहीं यार देखो, इंश्योरेंस कवर भी तो है, इंश्योरेंस कवर भी तो बहुत इम्पोर्टेंट है। वो उसके लिए सेकेंडरी डिसीजन है। फर्स्ट डिसीजन नहीं है क्योंकि आप रिटर्न बेस पॉलिसी बेचते हो। ये आपकी गलती है। आप खुद ही रिटर्न बेस पॉलिसी बेचते हो, इतना डालो, इतना ले जाओ, इतना डालो, इतना ले जाओ। रिटर्न बेस। जब भी बेचोगे वो एफडी से कंपेर करेगा और आपको कंपेरिजन रेडीमेट रखना पड़ेगा मैंने हर ट्रेडिशनल प्रोन का डी से कंपेरिजन बनाना शुरू कर दिया है। एवरी कंपनी, ए गिव, टू माई, एडवांस, मेम्बर बट, आई, वॉन्ट, यू टू अंडरस्टैंड की। अगर आप कंपेयर नहीं करोगे तो क्लाइंट करेगा? कौन सा बेहतर है कि आप कंपेयर करो या क्लाइंट करे? कौन सा बेहतर है, आप कंपेयर करो या क्लाइंट करे? bet myapolidisese r you with me। क्या आप मेरे साथ हो? यस थैंक यू थैंक यू सो। अगर आप अपने एजेंट्स को ये देते नहीं रिटर्न कंपेरिजन तो ऐक्चवली में आप अपने एजेंट का बुरा कर रहे हैं। आपको देना चाहिए क्योंकि क्लाइंड दिमाग में बहुत बड़ा क्वेश्चन है और ये आप फंड से कंपेयर करते हैं। नहीं, वो नहीं करता है। म्यूचुअल फण्ड से कम्पेयर मोस्ट ऑफ़ द, क्लाइंट कम्पेर विद, नाइंटी फाइव परसेंट क्लाइंट कंपेर रिटर्नस विथ डी, ये अपने बात में जैन में दिमाग डाल। 2 तो अगर आप रिटर्न बेस पॉलिसी बेच रहे, इसलिए मैं बोलता हूँ, रिटर्न बेस, मत बेचो, फाइनेंशियल, हेलचेकअपबेस बेचो, फाइनेंशियल, ताली बनाना सीखो। सबसे पहले वो डिसीजन लेता है, अभी लेना है या बाद में, तो कैसे अर्जेंसी क्रिएट करोगे। 1 क्वेश्चन पूछो, ट्रस्ट करूँ या न, ये सेकंड डिसीजन लेता है, थर्ड डिसीजन ये एफडी से बेहतर कैसे है। अब अगर आप टॉम प्लान बेच रहे हो तो वो नहीं करेगा, आप नोट कर, न, मैं आपको प प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस बता रहा हूँ। अगर टम प्लान बेच रहे हो तो वो एफ डी सी कंपैर नहीं करेगा, टम्प्लान बेच रहे हो तो वो बाकी कंपनियों से कंपेयर करेगा। बाकी कंपनियों का क्या है, अगर आप गाड़ी का इंश्योरेंस बेच रहे हो तो वो बाकी कंपनियों के कोटेशन मांगेगा। यहाँ पर आपके पास मल्टीपल कोटेशन हो तो बहुत बेहतर है, खुद ही लेकर चले जाओ क्लाइंट के पास अगर हेल्दी इंश्योरेंस बेच रहे हो तो वो प्रीमियम चीपर मांगेगा, मल्टीपल कंपनियों की कोटेशन मांगेगा ये मैं आपको एक्सपीरियंस से बोल रहा हूँ, भाई गाँव का क्लाइंट भी मांग रहा है, आजकल अगर आप म्यूचुअल फंड बेच रहे हो तो वो बोलेगा की ये वाले फंड क्यों चुने वाय दीज फंड आपको यहाँ पर रिटर्न की बात नही होगी, कम्पेरिजन कुछ और होगा, बाकी है नोट कर लिया आपके पास हैं क्या ये कम्पेरिजन बना रखे है, देते हो अपनी टीम को कंपेरिजन बना रखे हैं, क्या क्यों आप लीडर हो यार क्लाइंट को जरुरत है न यार इसमें तो आपको बनाना चाहिए, आप तो चड्डी बनियान भी कंपैर ते हो, वो इंश्योरेंस कंपेयर न करें लोंग टम की इनवेस्टमेंट कंपेर करे, आप तो दाल चावल भी कंपेयर करके लेते हो, टमाटर भी कंपेयर कर लेते हो, 2 दुकानों में वो ये चीज कंपेर न करे उसका हक नहीं है, ये यहाँ मात खा रहे हो, आप यहाँ पर आप मात खा रहे हो, इस वजह से आपके पास क्लोजिंग नहीं हो रहा है मैं उस पर तो जा नहीं रहा, बातचीत क्या कर रहे हो, मैं तो बेसिक बातें कर रहा हूँ के भाई क्लाइंट अभी लेना है, बाद में दूसरा ट्रस्ट क्यों करूँ ये बेसिक चीजें कर लो, डी कमपेरिजन बना लो, अगर टम्ब्लानबेच रहे तो 2 को टेशन मांगेगा, कार का बेच रहे हो तो 2 मांगेगा उसका हक है हेल्दी तो वो 2 मांगेगा म्यूचुअल फंड बेच रहे हो तो वो चुनेगा यह फण्ड को सो इसलिए हम कहते हैं की क्लाइंट के साथ ट्रस्ट, जब आपने जीत लिया तो 1 प्रोपर कम्पेरिजन वाली फाइनेंशियल थाली बनाना सीखो क्लाइंट की फाइनेंशियल थाली टाइम लगेगा बरसी को मेरे खयाल से अभी आपको मिल गया है, जो मिलना चाहता है, बलबान हो गया न आपका।
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