Yogendra Kumar Malik says luck lines don't build businesses. Systems do. He breaks down what actually works: quality leads, structured meetings, CRM, mentorship, and trust-building rituals. Over four years he fixed his own systems and now coaches financial advisors and insurance agents to do the same.
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ये देखिये मेरी लक लाइन कितनी स्ट्रोंग है यानि के मुझे तो हर जगह जहाँ भी हाथ डालो, सारे, काम बन जाने चाहिए, सब कुछ हो जाना चाहिए। पर ऐसा हुआ नहीं। दोस्तों लक लाइन स्ट्रोंग होती है जब आपकी गर्म और नियत और नियति की रेखा समानांतर हो जाए, यानि के आपके सिस्टम बन जाए और आप 1 परपज को फॉलो करे चाहे वो स्वार्थी परपज हो। मेरा नाम योगेन्द्र है, मैं लोगों को गाइड करता हूँ कैसे वो अपने सिस्टम को फिक्स करें प्रॉपर? क्वालिटी लीड्स, मीटिंग्स और प्रॉपर सेल्स, पर सेल्स, सिर्फ सेल्स नहीं, ट्रांसफॉर्मेटिव सेल्स, यानी के क्लाइंट को रिजल्ट देने वाला प्रोडक्ट, सॉलूशन में फाइनेंशियल एडवाइजर, इंश्योरेंस एजेंट, म्यूचुअल, फण्ड एजेंट्स का कोच हूँ। और मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, अपनी लक लाइन मत देखो, अपनी कर्म और सिस्टम की लाइन देखो क्या सिस्टम है? क्या सुबह उठ के आपके पास क्या प्रॉपर तरीका है? काम करने का कौन है, आपका मेंटर क्या है, आपके सीआरएम क्या है? आपके विश्वास जगाने वाले यंत्र मंत्र जिससे लोगों को आपके विश्वास हो। और आप ये 90 लाख लोगों से अलग क्यों हैं जो मार्केट में इंश्योरेंस और म्यूचल फंड 90 लाख घूम रहे हैं। अगर आप सिस्टेमेटिकली काम करोगे तो कोई भी बिजनेस हो, इट कैन वर्क अदरवाइज लक लाइन तो बचपन से ही ऐसी है पर ये लास्ट 4 साल में ही स्ट्रॉंग हुई है। जब मैंने सिस्टम से काम किया है, नीचे कमेंट करके मुझे बताना आपका क्या सिस्टम है और कोई सिस्टम है भी या नहीं तो बनाना है तो नीचे लिखना सिस्टम।