Yogendra Kumar Malik explains why prospects say "I'll think about it": they don't trust you, the product, or the company. The fix is embedding trust signals into your offer: real testimonials, case studies, high ratings, and video proof. Once trust lands, the objection vanishes and customers act.
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ऑब्जेक्शन का पार्ट थ्री मैं सोच के बताऊँगा। अब तीसरा कारण क्या होता है कि कस्टमर बोलता है मैं सोच के बताऊँगा? वो होता है ट्रस्ट। कस्टमर के दिमाग में चल रहा है क्या मैं इस कंपनी पे ट्रस्ट कर सकता हूँ? क्या मैं इस प्रोडक्ट पे ट्रस्ट कर सकता हूँ? क्या मैं आप पर ट्रस्ट कर सकता हूँ? और अब इसका सॉल्यूशन ये आपके ऑफर में ही था। अगर आपने अपने ऑफर को इस तरह से बिल्ड किया है कि उसमें टेस्टिमोनियल्स हैं, केस स्टडीज़ हैं, जो रियल हैं, फेक नहीं हैं, तो कस्टमर को पता चल जाएगा कि ट्रस्ट किया जा सकता है। अब मान लीजिए अगर आप नए हैं किसी प्रोडक्ट में, तो किसी और ने वो ये मिस्टर रमेश पाहुजा है और इन्होंने ये प्रोडक्ट लिया था ये इनका कहना है और कस्टमर को ट्रस्ट हो जाएगा वो ले लेगा इसी तरह से तो आप रेटिंग चेक करते हो वीडियो चेक करते हो कस्टमर के तभी तो लेते हो तो ये ऑब्जेक्शन अब क्लियर हुआ इन तीन वीडियो में मैं सोच के बताऊँगा एक्शन लीजिए और