Yogendra Kumar Malik argues that money isn't created by institutions but by you, through mindset, skills, knowledge, and systemized work. He emphasizes self-investment and continuous development as the path to financial gains, contrasting how winners and losers approach earning.
मेरी पहली बुक ऐसी सीक्रेट नंबर टू पैसा मिनट में नहीं बनता। पैसा आपके द्वारा बनता है। जी हा, अगर आपके अन्दर वो माइंडसेट स्किल सेट, नॉलेज सेट और आपके अन्दर वो सिस्टेमाइज काम करने का तरीका है तो पैसा आपके अन्दर बन सकता है। 1 बहुत बड़े दार्शनिक हुए, फिलोसॉफर हुए, सेल्स हुए वो कहते हैं यू डोंट औन द मनी विच यू डिजर्व और डिजायर यू ऑन द मनी विच यू प्रोड्यूस मार्केट वैल्यू फॉर यानि के आप टेबल पे क्या वैल्यू लेकर आते हैं। दूसरों के जीवन में उतना पैसा आपके पास आएगा। मैंने जब ये बुक लिखी थी, मेरे को कोई उम्मीद नहीं थी की बुक कोई खरीदेगा भी, यह बुक मेरी मदर को डेडिकेटेड है और मेरी मदर हमेशा ये बोलती है, टीचर्स लाखों हैं, टीचर लाखों हैं, बहुत सारे लूजर है, विनर्स कम हैं, विनर और लूजर में 1 ही फर्क है, विनर अपने ऊपर काम करता है, सेल्फ इन्वेस्टमेंट करता है, अपने आप को डेवलप करता है, अपने आप को तराशता है, अपने आप के साथ, वो कंफर्टेबल नहीं है, अपने आप को डांट के रखता है, तो आपको भी ये याद रखना है कि मनी is not mad in mind, many is mad by you, you can print as much money as you want go head, n do it।