System Makes us Achieve Our Goals. System Banao - Varna Goal Achieve nahi honge #digitalgyani #sys

Yogendra Kumar Malik argues that goals fail without systems. He uses a five-star hotel versus dhaba analogy to show how branding and quality enable premium pricing, then advises entrepreneurs to target high-ticket clients instead of chasing low-value work. Building repeatable habits and mindsets, he says, lets you scale to ₹10 lakhs monthly.
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नो नो म, मेकिंग सिस्टम की भैया, मेरे घर में हेल्दी खाना ही नहीं है, मिठाई ही नहीं, शुगर है ही नहीं, पूरी पराठे बनेंगे ही नहीं। तो क्रिएटिंग सिस्टम आपको कुछ भी खाना है तो हेल्दी स्नैक है। 1 मैंने क्लब ज्वाइन कर लिया है, जहाँ पर लोग मुझे 4 बजे दोपहर को बुलाने आ जाते, मैं 6 बजे खराटे भर देता था, 6 बजे जाते बुलाने 6 ऐसी 6 वरजीसोरहाहैतोयान सिस्टम i, m, t्राinटोक्रिएt ंडरसेंडिंग पता नहीं है एग्जांपल आपको समझ आ रहे। नहीं सो अगर हमें स्कोप है, वेट लॉस का है। इस बिजनेस scoपहैजबरदस्त कोप है मिंड we नीड तो जस्त क्रिएट सिस्टम टो सिस्टम लेवल के लिए टाइप कीजिये नेक्स्ट लेवल, we have टू क्रिएट सिस्टम तो नेट लेवल दिस इस वाट, थैंक यू, थैंक यू सो मच फोर टाइपिंग माई फ्रेंड। आज मैं आपकी ब्रेन खोलना चाहता हूँ, सीख तो आप खुद ही जाओगे। यार आप बहुत एक्सपीरियंस हो। अब 1 फाइव स्टार होटल है और 1 ढाबा है। ये जरुरी नहीं की फास्ट खाना ज्यादा टेस्टी हो। आरोप 1 फाइव स्टार होटल में व्यक्ति 600 रूपए की दाल मखनी खाने को राडी है। पर वो ढाबे पे कोई मांगे 600 रूपए की दाल मखनी नहीं लेगा। इसके बहुत सारे रीजन है, ब्रैंडिंग है, हाई जीन है, सफाई है क्वालिटी टेस्ट भी हो सकता है। फाइवस्टार जिम्मेदारी लेता है। अगर आपको अच्छी नहीं लगी या कुछ हो गया आपको तो 1 रिस्पॉंसिबिलिटी डाबा नहीं लेगा। वहाँ पर एमबीए है बट, वन, आई, वांट, टू, टेल, यू। इस की दाल मखनी तो दाल मखनी ही है न। यार ढाबे पे हो या कहीं भी हो। ये चाय तो चाहिए फास्टर में पियो या डाबे में पियो। हो सकता है डाबे वाली ज्यादा टेस्ट भी हो। देन वाई, पीपल, गो, इन, फाइव, स्टार, एवरीबडी, शुड, गो, टू डाबा डाबा काम करता है। स्केल पे, जितने ज्यादा चाय बिकेंगी, उतना ज्यादा उसका होगा। फाइवस्टार काम करता है। एक्सपीरियंस पे उसको ज्यादा नहीं बेचना है। अभी किसी ने क्वेश्चन पूछा था 10 लाख रूपए महीना इनकम करना हो तो क्या करे। तो भैया छिछोरों का पीछा करना बंद करो और फाइव स्टार लोगों का पीछा करो तो आप 10 लाख की इनकम पर पहुँच जाओगे। क्यूंकि टाइम तो लिमिटेड ही है। उस टाइम को आप उनके साथ लगा रहे हो। जो 20 हजार 30 हजार की पॉलिसी लेने में कतरा रहे हैं। उसी टाइम को, आप अपने आप को इस साल इस लायक बनाओ की आप 5 लाख 10 लाख के टिकट साइज को उठाओ, 1 लाख को उठाओ। एटलीस्ट तो भाई टाइम तो लिमिटेड ही है न। यार टाइम आप बढ़ा नहीं सकते। न अपने जीवन का, न अपने दिन का। यही कमी है। आप भर रहे हो, दुनिया को भर रहे हो, चलो चलो, चलो, चलो पॉलिसी, पॉलिसी कन्यादान, कन्यादान, कन्या पॉलिसी नहीं भाई। 6000 वाला जितना नाटक करता है, पॉलिसी का रिव्यू कर, वो 6 लाख वाला नहीं करता। प्रॉब्लम ये है की आप इस लायक शायद नहीं हो। वो कॉन्फिडेंस नहीं है। अभी आपके अन्दर उनके सामने बैठने का वो बन सकते हो या 12 महीने बहुत होते है, 12 महीने दे 2 प्रॉपर तरीके से आ जाओ मेरे साथ ओगे मैं भी आप जैसा ही आपको सिस्टम समझ आ रा। this is what it s time is limited?
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