The Paper Fold Experiment: How Assumptions Can Hold Back Your Growth

Yogendra Kumar Malik leads a paper-folding exercise where identical instructions produce different results, showing how assumptions shape outcomes. He argues that asking ten questions daily and using tools like ChatGPT to find answers breaks the internal chatter that blocks growth.
Chapters
तीसरा काम हम सबको सीखना है, जो हमारा जन्म से तदिकार है वो है सेलिंग। क्या सीखना है? सेलिंग। कैसे सीखोगे? चलो एक पेपर लो फटाफट सब लोग एक पेपर पढ़ो। एक पेपर लो अपने हाथ में। ले लिया? एक पेपर ले लीजिए। कोई भी पेपर ले लीजिए रजिस्टर से पूरा नाम रणा कुछ लिखना नहीं है उसपे ऐसे ही पेपर चलो ठीक है बैठ जाओ अपनी आँखें बंद करो close your eyes पेपर ले लिया सबके हाथ में पेपर है दिखाओ ले लिया अब आँखें कर लो बंद कर ली अब इसको आधा फोल्ड करो कर लिया टॉप से थोड़ा सा राइट साइड फाड़ दो टॉप से थोड़ा सा राइट साइड फाड़ दो फाड़ दिया अब इसको आधा फिर फोल्ड करो अब लेफ्ट से बॉटम में फाड़ दो बॉटम लेफ्ट से थोड़ा सा फाड़ दो मैंने एक अब राइट से टॉप में थोड़ा सा फाड़ दो, थोड़ा सा फाड़ दो, फाड़ दिया। अब एक और फोल्ड करो और बीचों बीच इसमें एक छेद कर दो, बीचों बीच पेपर के बीच में एक छेद कर, कर सकते हो, फाड़ के साथ, कर दिया। आग बंद रखो, पेपर को खोलो। ऊपर रखो अपने सर के ऊपर। अब आके खोलो, एक दूसरे का पेपर देखो। देखो एक दूसरे का। देखो देखो, पीछे भी देखो। पीछे देखो, खड़े हो जाओ, पीछे देखो। आपको बोल रहा हूँ मैं। ये सबका शेप अलग क्यों हुआ? मैंने तो सबको सेम कमांड दी थी ना? नहीं, उनको मैंने सेम बोली जो इसको बोली शेप अलग क्यों हुआ है सबकी सोचने की सबकी सोच बदला मतलब सोचने की संता अलग-अलग है तो किसी ने लेफ्ट साइड से अपना दूसरा लगेगा तो किसी दूसरे का दूसरा लगेगा लेफ्ट तो इसलिए शेप अलग हो चुकी है तो very good बहुत सही और कोई सबकी शेप अलग थी तुम तो मेरे सामने बैठी थी, तुमने भी बोल ही किया जो मैंने बोला। क्यों? तो हमारी एक वैल्यू है डिजिटल गैरी की, जब भी डाउट में हो, क्वेश्चन पूछो। अभी आप लोगों ने डाउट में थे, आपके दिमाग में डाउट आए कि मुझे लेफ्ट से फाड़ना है, राइट से फाड़ना है, छेद कैसे कर रहा है, कितन लेफ्ट से राइट फोल्ड करूं या रैप से राइट से लेफ्ट फोल्ड करूं ये सब दिमाग में आया होगा पर आपने उससे क्वेश्चन नहीं पूछा रुका नहीं आप लोग समझे तो अगर आप क्वेश्चन नहीं पूछोगे तो आप सीखोगे नहीं और यहाँ कई लोग पुराने होते जाते हैं क्वेश्चन पूछना बंद कर देते हैं खुद मन मन में चैट अहम मिल जाते हैं। आप छोटे नहीं हो जाओगे क्वेश्चन पूछने, ठीक है? क्वेश्चन पूछना ही सही तरीका है सीखने का। समझाया? पक्का लिखो डायरी पर। मैं रोज कम से कम 10 क्वेश्चन पूछूँगा। रोज 10 क्वेश्चन पूछिए। ये क्यों है? वो क्यों है? खलाना क्यों है? निम्नखाना क्यों है? और चैट जीपीटी अमेज़ जी से हम से पूछिए हमने इस कंपनी को बड़ा किया है हम आपको बता सकते हैं कि इस क्वेश्चन का आंसर क्या है?
More from Yogendra

क्या ₹1 Crore Life Insurance आपके परिवार के लिए काफी है? | सही Cover कैसे तय करें?

पहले 60 Seconds में Client से “YES” कैसे लें? | Tele-Calling का Secret Formula

Main Direct Mutual Fund Lunga!” 😲 Phir Mtuual Fund Advisor Ki Zarurat Kya Hai?

5 SIP Prospects DAILY — Bina Ads, Bina Cold Calling | Mutual Fund Distributor Lead Generation System

Insurance Agents की Commission कम होगी? 😱 IRDAI का BIG RESET | खतरा या Opportunity?





