A guru teaches that the soul's eternal purpose is service. Service motivated by love ranks highest, while service from fear ranks lowest. The talk outlines four reasons people serve: love, duty, desire, and fear.
आपको 1 इंट्रस्टिंग किस्सा बताता हूँ कल हमारे स्पिरिचुअल गुरु की क्लास हुई तो वहाँ क्वेश्चन उठा की जीवात्मा का मुख्य उद्देश्य या धर्म क्या है तो हमारे गुरुजी ने बहुत स्पष्ट लब्जों में बताया की जीवात्मा का सनातन धर्म सेवा है। हमारा इस धरती पर उत्पन्न होने का मेन कारण सेवा है चाहे वो नागरिकों की हो, चाहे वो परिवार की हो, चाहे वो समाज की हो, पालतू कुत्ते बिल्ली जानवरों की हो, हमारा नैतिक धर्म जो है वो है सेवा। अब सेवा। ऐसी करने के बीच उन्होंने 4 रीजन बताया। सबसे पहला प्रेम प्रेम से आप करेंगे तो योर जीवन इस भवसागर से पार नंबर 2 कर्तव्य, नंबर थ्री, कामना इच्छा डिजायर और नंबर 4 जो सबसे नीचे है। डर तो करना है प्रेम से करिए। क्योंकि आप समाज से प्यार करते हैं, फैमिली से प्यार करते है। चाहे वो एजेंट की फैमिली हो, कस्टमर्स की फैमिली हो, आपस में डिजिटल यानी डायमंड मेंबर्स की फैमिली हो या फिर अगर करते हैं डर से की, ये मई कौन देगा, कैसे होगा, इनकम नियाय तो क्या होगा। तो ये सबसे निचला स्तर है, सबसे उचले स्तर से कीजिए। और देखिये कि आपका जीवन बहुत ही बढ़िया बन जाएगा। तो गुरुजी को धन्यवाद देते हुए ऑल द वेरी बेस्ट डू द सेवा।