Business Expert: How to Build A Brand in 2026 & Hidden Opportunity | IndiaMART | FO443 Raj Shamani

Raj Shamani and Dinesh Agarwal analyze how Indian commerce shifted from exports to domestic focus, using IndiaMART's data to show rising home demand. They break down platform dynamics, private-label opportunities, and city-level demand patterns that reveal a 10-crore-plus consumer base in tier-2 and tier-3 cities driving growth in affordable goods.
Chapters
हिंदुस्तान में धंधा कैसे बनता है।
हिंदुस्तान मे कोई कॉमन सिंगल जनता नहीं है। हर 10 10 करोड़ की जनता बिल्कुल अलग है। आप कौन सी जनता को कर करना चाहते हो। आप डिसाइड करो को बहुत बड़ा बड़ा है।
कौन सी सी ग्रेविया कैटेगरीज है। हमारे यहाँ पर हर कोई बिजनेस चालू करता है लेकिन लगभग डुबाते कपड़े का.
जो बिजनेस है उसमे लोग इंट्री भी लेते हैं। और सबसे ज्यादा क्लियर रेडी.
जो लेंसकार्ट की स्टोरी है। ऐसी कौन सी कैटेगरी है जो अनऑर्गेनाइजड.
से ऑर्गेनाइज हो रही मतलब अगर आपको केवल ब्रांड ले वो बनाना है। किसी भी कैटेगरी में घुस जाओ में घुस जाओ, चेयर में घुस जाओ में मतलब हर वो जगह जहाँ 10 ब्रांड टॉप के 5 ब्रांड नहीं एक्जिस्ट करते। आई थिंक, दर प्लेस और यू टू गो।
इन क्रिएट ब्रांड कौन सी चीज है। जो लोग सर्च कर रहे है पर उनके सप्लायर्स बहुत कम है।
ई रिक्शा का। उससे रिलेटेड प्रोडक्ट्स में धूम मची हुई थी। चाहे उसका बैटरी है, पार्ट्स है मोबाइल एक्सेसरी की। आप ऐसा सोचते हो। इंडिया में सौ करोड़ लोगों के पास बहुत बड़ा मार्केट.
चाइना प्लस वन जो पूरा वर्ल्ड कोड के बाद नजर आ रहा है। आप देख रहे हो मैनुफैक्टरिंग में ग्रोथ.
हुई मेरे को बेटर प्राइस और बेटर क्वालिटी। जहाँ मिलेगी में 80 परसेंट वालुम तो वहाँ रखूंगा लेकिन इंशोरेंस के लिए 20 पर्सेंट वालुम। चाइना प्लस वन करने से आपको केवल 10 20 परसेंट का ही गेंद मिलना था। पहले एक्सपोर्ट का मुह भरने के बजाय पहले आप अपना इम्पोर्ट तो सुधारो।
आज आप ट्वेंटी फाइव थर्टी के रोड, ते आपको कोई बिजनेस स्टार्ट करना हो तो क्या करता।
मोबाइल टेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी। तो अगर मैं पचीस साल का होता तो शायद इस डायरेक्शन में कुछ करता।
हर बिजनेस छोटा हो या बड़ा, अपनी गोट जर्नी में 1 डिपेंडेबल पार्टनर की जरुरत फील करता है। इसी जरूरत को समझते हुए पोर्टर हर स्केल के बिजनेस के लिए 1 ट्रस्टेड ग्रोत पार्टनर बन गया है। ऐसे में इस से लेकर लार्ज एंटरप्राइजेस तक पोर्टर 1 रिलायबल ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशन प्रोवाइड करता है। पोर्टर अपनी वाइड रेंज, ऑफ़ वकर्स टू, वीलर्स, थ्री, वेलर्स और ट्रक के थ्रू ट्वेंटी किलो से लेकर फोर, थाउजंड, फाइव, हंड्रेड, किलो तक के गुट को स्मूद और एफिशियंट तरीके से हैंडल करता है। एंड। ये उन बिजनेसेज के लिए आइडियल है जो अपना काम स्ट्रेस, फ्री और एफिसिएंट तरीके से चलाना चाहता है। 10 एपिसोड इस सपोर्टेड बाय व टाइटल स्पांसर पोर्टर। अगर आप अपने बिजनेस के लिए डिपेंडेबल पार्टनर ढूंढ रहे हो, चेक आउट पोर्ट द लिंक इस इन द डिस्क्रिप्शन एंड टुडे गैस। इस दिनेश अग्रवाल सीओ ऑफ़ इंडिया मार्ट 1 ऐसे ओनट्रपनोरजिन्होंने इंडिया के बिजनेस वर्ल्ड को ग्राउंड लेवल से बढ़ते एंड बदलते देखा है।
हम।
उनसे जानेंगे आज के बिजनेस की रिएलिटी। ऑफलाइन और ऑनलाइन बिजनेस के बीच का फर्क और कैसे ग्राउंड लेवल पर पैसा और बिजनेस दोनों बनाए जा सकते हैं। आज के जमाने में अलोंग विद दिस। हम इंडिया मार्ट के डेटा से पता करेंगे। कौन से सेक्टर्स में सबसे ज्यादा डिमांड बढ़ रही है। एआई और मैनुफैक्चरिंग मिलकर इंडिया को सप्लायर नेशन बनने में कैसे हेल्प कर सकते हैं। और बी टू बी बिजनेस को स्केल करने का सही तरीका क्या है एंड कौन सी ऐसी हिडन ऑपर्चुनिटीज अवेलेबल है। आज इंडिया में बेस्ड न डेटा ये एपिसोड एंड तक जरूर देखिये और मुझे कमेंट्स में बताइए आपने इस एपिसोड से.
क्या.
मैं और मेरी सारी ऑडियंस जो है अधिकतर हम लोग ये ट्वेंटी फाइव तो फटी यर्स के बीच के लोग है जिनको बिजनेस बनाना इंडिया में और पैसे कमाने हैं। बहुत तो आपका प्लेटफार्म है से कमाने.
हैं लेकिन बाहर सड़क पर नहीं जाना.
है नहीं नहीं ही जाना जाना है। पैसे जाने ऐसा क्यों बोला बार सड़क.
पर ही जान आई थिंक स्क्रीन पर क्या हो सकता है मतलब ये मैं अपने ऑफिस में भी बोलता हूँ। हमारे यहाँ पर बहुत सारे प्रोडक्ट मैनेजर हैं कैटेगरी मैनेजर है उनको मैं विकिपीडिया मैनेजर बोलता हूँ मतलब रोड में नहीं जाना मतलब क्यों की इंफॉर्मेशन है सो ये जो इनफार्मेशन की अवैलेबिलिटी हो गई है आपको कि यार पहले तो कम से कम ऑनलाइन तो चेक कर लो और ऑनलाइन चेक करने पर अगर आपको बहुत सारी इनफार्मेशन मिल जाती है दैट मे बी दैट इज सकिंग यू इन एंड जो कि इनफॉर्मेशन हो सकता है कि जो मैं बोल रहा हूँ जो आप बोल रहे हैं कुछ 24 परसेंट लोगों ने दुनिया के वो इंफॉर्मेशन वहां डाल रखी है जो की रियलिटी से काफी अलग हो सकती है जो की पहले टीवी में था या रेडियो में था। क्योंकि वो और भी मतलब कुछ पॉलिटिशियंस ने या कुछ ब्यूरोक्रेट्स ने कंट्रोल की हुई थी वो इनफरमेशन विच व नॉट द रियलिटी तो वो रियलिटी। अब शायद 2 परसेंट लोग वहाँ पर दिखा रहे हैं लेकिन अभी भी शायद जब तक आप एक्चुअल में रोड पर नहीं जाओगे एक्चवलमेंफील्ड पे ही जाओगे, एक्चवलमेंकस्टमर से नहीं मिलोगे तब तक बिल्कुल अच्छा पल्स तो नहीं मिलेगा आपको। क्योंकि अभी भी कहने को इन्टरनेट है सब कुछ लेकिन फिर उसके ऊपर भी लोगों की अलग अलग मोटीवेशन हैं। कौनसी रील वायरल होती है या कौन सा व्हाट्सएप का पोस्ट वायरल होता है या कौन सा वीडियो वायरल होता है और कौन सा हटा दिया जाता है गवर्नमेंट के द्वारा, वो भी तो आपको नहीं पता तो आप अपने कान पर थोड़ा विश्वास और करे हाथ पैरों पर भी करें आप कान पर तो कर ही रहे वहाँ पर शायद दोनों आप और बेहतर जान।
पाएंगे कोई एग्जाम्पल 2 जहाँ आपने देखा की रिएलिटी में अलग चल रहा था लेकिन ऑनलाइन अलग चीज दिखी क्यूंकि ये बहुत सारे लोग बोलते हैं और जो बिजनेस करते हैं एटलीस्ट जिनका ऑपरेशनली 1 स्ट्रोंग बिज़नेस होता है वो लोग तो ये मानते हैं की भाई जब आप कस्टमर से बात करोगे आपके जाके जो ऑटोमोटिव डीलर है जिसको आपको 1 पार्ट बेचना है वो अलग बातें कर रहा है और ऑनलाइन आपको डेटा अलग दिखा रहा है की जी डी पी में ये होता है इसकी परसेंटेज वो है इतनी डिमांड इतनी बहुत अलग रियलिटी होती है।
11 इंडिया की अच्छी रियलिटी बताता हूँ। तो क्यूँकी हम बिजनेस में रूबी का ही काम करते हैं। इसलिए बता रहा हूँ। मैं शायद आपको या बहुत सारे लोगों को भी पता है की नहीं पता हम लोग जमीन कैसे नापते हैं। स्क्वायर फील्ड में हम कमरा कैसे नापते हैं। स्क्वायर फीट में अपने पेंटर से वो कैसे करते हैं के कितने रूप का तुम्हारा हिसाब हुआ। स्क्वायर फील्ड में आपको मालूम है। स्क्वायर फील्ड में लिखना, इंडिया में जुर्म है, इलीगल है, इल्लीगल है, स्क्वायर फीट या फीट ऐज यूनिट इंडिया में लिख के आप बेच नहीं सकते। इंडिया में एमके एस सिस्टम होता है तो कोई भी टाइल आप खरीदने जाओगे। आप बाजार में बोलोगे कि भाई 1 फुटबॉल, 1 फुट की टाइल दे देना, लेकिन आपको 300 एमएम, 300 एमएम की टाइल मिलेगी, 1 फुटबॉल, 1 फुट नहीं लिखा होगा। उसे.
तो अपने बिल पे लिख के कॉंट्रैक्ट में नहीं लिख सकते।
जुर्म है। तो फिर क्यों चलता है, ये क्यूँ चलता है, क्यूँकी चलते आया है। लेकिन वो बात भी सही है गवर्नमेंट की की वो बहुत ज्यादा डिफिकल्ट है। फील्ड में आधा पआाछटाकयाआउजफरलंग तो बहुत सारी चीजें फेस आउट हो गई है। ऐसा नहीं है कि सारी फेस आउट नहीं हुई है लेकिन अभी फीड जैसी चीजें फेड आउट नहीं हुई है। अब शेर सवा शेर में कोई बात नहीं करता। सब कुछ किलोग्राम में बात होती है। मीटर में बहुत चीजों में बात होती है। लेकिन बहुत चीजों में अभी भी फिट में बात हो रही है। अभी भी जो रोज मर्रा की घर की चीजें हैं, दरवाजा 3 बाई, 7 का लेना, 3 भाई 7 का दरवाजा नहीं होता। तो अब क्या है कि आपको जितना रिटर्न मटीरियल, मिलेगा, जितनी, पी, डी, एफ, मिलेगी, जितनी कंपनी की जो भी कुछ वो मिलेगी उसमे सब एम में लिखा होगा। और जितनी आप बातचीत करोगे वो सब.
फीट में करोगे, वो सब फीट में करोगे।
केवल इन्टरनेट अगर देखोगे तो शायद वहाँ सब कुछ एमएम में दिखाई देगा। क्योंकि वहाँ तो रोज की बात पहुँच नहीं रही है। तो बी, टी वी का जितना भी पब्लिकेशन देखोगे वो सब एमएम में दिखेगा.
नाईस और ऐसी कौनसी पार्टी दे दे।
फिर दूसरी बात बताता हूँ। हाँ तो जैसे लोहा है सरिया मकान बनाते हैं। सरिया तो सरिया जमाने से कोर्ट होती है। प्राइस पर केजी के लोहा। आजकल क्या चल रहा है। 57 रुपए पर केजी चल रहा है। लेकिन सरिया की क्वांटिटी जब भी पूछी जाएगी की आपको कितना चाहिए। तो कोई केजी में नहीं पूछता और टन में पूछता। 1 किलो, 1 किलो सरिया थोड़ी खरीद, 2 किलो सरिया थोड़ी खरीदते हो तो उसका जो प्राइस है वो तन नहीं है। लेकिन बोल बोल चाल की भाषा में तो पब्लिश टन में होता है। कि आज का प्राइस है। फाइव सेवन एठ जीरो तो उसका प्राइस हो गया 57 रुपए, 80 पैसा।
तो ऐसे तो बहुत सारी चीजें होंगी जो रियलिटी मार्लेट जमे जा।
बात मारे में जाओगे तो रियलिटी बहुत कुछ अलग है। तो अगर आप पे पेर ऑनलाइन बनाते हो चीज मतलब केवल आपने 45 गूगल के देख, 45 को 10, 20, 50 भी देख ली तब भी मतलब आप अगर पीडीएफ जैसे मैं बता रहा था एमएम वाली तो आप टाइल्स की 500 पीडीएफ देखोगे तो 480 में आपको एम एम में मिलेगा।
आप के पास बहुत डेटा होगा, ऑन ग्राउंड होगा इतना सालो से धीरे धीरे धीरे करके बनाया ऑनलाइन आपके प्लेटफार्म की वजह से भी आपके पास बहुत डेटा होगे की लाखों करोड़ो लोग ट्रेड करते हैं यार प्लेटफा सबसे काउंटर इन्ट्यूटिव वैसे डेटा कौन सा देखा जो आपको भी सरप्राइज करेगा की यह कैसी चीज दिख रही है प्लेटफार्म पर।
तो 1 दिन में ऐसे दिख रहा था की प्रोपराइटर शिप और पार्टनरशिप और प्राइवेट लिमिटेड जनरली हम लोग बिजनेस शिप करते हैं तो 3 तरह के वो होते हैं प्राइवेट लिमिटेड या एलएलपी बनाते है जो की प्रॉपर एमसीए में रजिस्टर करके प्रॉपर शेयर होल्ड या पार्टनरशिप फर्म बनाते हैं वो हम आप हम और आप आपस में दस्कत कर लेते हैं। बन गई पार्टनरशिप पराटरशिपतोइंडिविजवल है ये तो मैं इसे देख रहा था कि क्च्वलीवस्टाइंग.
तो.
फाइंड की हमारा जो कस्टमर का रिटेंशन है और कस्टमर का सेल है वो अगर मैं अलग अलग कट्स पर निकालता हूँ या अलग अलग स्टेट्स पर निकालता हूँ तो वो कैसे बिहेव करता है। ठीक है अक्रॉस दीज थिंग्स अक्रॉस टर्नोवर अक्रॉस डिफ्रेंट स्टेट्स तो यह मैं करने की कोशिश कर रहा था। तो मैंने देखा की बाकी पूरे इंडिया में ज्यादातर 10, 12 परसेंट लोग पार्टनरशिप है, गुजरात में 22, 24 परसेंट लोग पार्टनरशिप है। डबल गुजरात जा के जाऊँगा। तो एक्वल इसको ऑन ग्राउंड ही पूछूंगा। इसका कोई मुझे आंसर नहीं मिला कि वहाँ पर ऐसा क्यों है। ओके मतलब पुरे इंडिया में वो 8 से 12 पर्सेंट है और वहाँ वो 20 से 40 परसेंट है। ठीक है अलग अलग सिटीज में क्यों है पता नहीं लगता। तो अब जैसे लोग बोलते हैं कि इंग्लिश करोगे तो आपको बिजनेस आएगा धंधा आएगा और गुजरात लोयेस्ट इंग्लिश स्पीकिंग मतलब बिजनेस में तो जो इंग्लिश की उनकी वो है प्रोफिशियंसी वो लोएस्ट है और आप सोचो की गुजराती, अमेरिका से लेकर अफ्रीका से लेके कहाँ नहीं पहुँचे हुए हैं। दूसरी बात बताता हूँ गुजरात का मेरा बायर का पेनेटरेशन जो बायर इन्टरनेट पे आके समान ढूंढता है वो लोएस्ट क्लास इंडिया। मतलब स्टेट छोटे वाले छोड़ के छोड़ देता हूँ और उसका जो सेलर साइट का पेनिट्रेशन है इन्टरनेट का वो हाईएस्ट है। खरीदानी सब बेच रहे मतलब खरीदानी की मेरा सिम्पल इनसाइट यह है की लोग वहाँ के आस पास के लोग इन्टरनेट पर बहुत ज्यादा नहीं यूज करते लेकिन फिर भी उनको अपोर्चुनिटी पता है की अच्छा इंटरनेट से बेचते तो बाहर बिक जा। बाहर दुनिया में लोग देख रहे होते हैं या बाहर के दूसरे सिटीज में लोग देख रहे होते हैं। सो दे अंडरस्टैंड एडवटइनटरनेट एडवटाइजिंग मीडियम व दर आर नौट दे आर, उसिंग फॉर देयर ऑन परपज ऑन सोर्सिंग तो परचेज.
भले यहाँ से करे नहीं करे है.
तो दे आर लिस्ट इन्टरनेट यूजर इन टर्म्स ऑफ़ टाइम। लेकिन हाइयेस्ट पेनेटरेशन है इंडिया मार्ट पर.
ऐसी कौन सी चीज है जो ये सब स्टेट्स का डेटा होता है। सब लोग लोग बेच रहे हैं। कौन सी चीज है। जो लोग सर्च कर रहे हैं डेसपरेट उनके सप्लायर्स बहुत कम है।
तो अभी ऐसी वाली बहुत सारी चीजे तो बीच में जैसे जब यह इसका तेजी से काम चालू हुआ। ई रिक्शा का तो पिछले करीब। ई रिक्शा को बहुत पुरानी चीज नहीं है। मुश्किल से 78 साल तो हुए हैं कोविद के बाद से। ई रिक्शा बिल्कुल और ई रिक्शा सबसे अच्छी चीज। मुझे लगता है कि अगर इंडिया के हिसाब से ई रिक्शा या फूड डिलीवरी या ई कॉमर्स डिलीवरी या इंस्टा मार्ट जैसी कुछ चीजें हुई है। मुझे पता है कि इसके कुछ निगेटिव लोग बोलने वाले भी हैं की भाई। ऐसे में इस पर क्या फर्क पड़ रहा है कि शॉप्स पर क्या हो रहा है। लेकिन जितना जैसे आईटी इंडस्ट्री के लिए 1 अच्छा काम हुआ था, ढेर सारा वाई टू के में छोटा मोटा कनवर्जन बी पी, ओ में बहुत या कुछ डेटा, एंट्री का काम, ट्रांस्क्रिप्शन का काम, बहुत कॉल सेंटर का काम। जहाँ पर मास में एम्प्ल जनरेट हुआ। 1 पर्टिकुलर स्किल सेट के लोगों के लिए, वही पे उसके नीचे की स्किल सेट वाली थी। तो आपके पास सिवाय हैंड लेबर के और कुछ काम बचता नहीं था है.
कि इलेक्ट्रिशन प्लम्बर बन जाए।
इसके अलावा मतलब वो भी कितने बन जाओगे। ज्यादा मां नहीं थी, डिमांड नहीं थी, तो फिर आप कंस्ट्रक्शन वर्क ही बन सकते थे। सेल्फ में बहुत इम्पॉर्टेंट कैटेगरी थी, चलो खैर वो तो आप नहीं बना सकते या। लेकिन उससे रिलेटेड प्रोडक्ट्स में धूम मची हुई थी। और अभी भी शायद है, चाहे उसका बैटरी है, चाहे उसके रिप्लेसमेंट पार्ट्स हैं, चाहे उसकी टायर है, चाहे उसका रिम है, चाहे उसका। मतलब उससे रिलेटेड में हजारों हजारों सामानों में लगा हुआ है। मोबाइल एक्सेसरीज अपने आप में आज की तारीख में मतलब एंडलेस एंडलेस मोबाइल एक्सेसरी, दी कीवर्ड एंड एक्सेसरी, मतलब एनी काइंड ऑफ एक्सेसरी। क्योंकि आप ऐसा सोचते हो इंडिया में 800 मिलियन या 80 करोड़ सौ करोड़ लोगों के पास मोबाइल है, चाहे वो फीचर, फोन, मोबाइल, 80 करोड़ लोग तो इन्टरनेट ही एक्सेस कर रहे हो। तो 20, 1 करोड़ तो नॉन इंटरनेट वाले भी मोबाइल कनेक्शन होंगे। तो सौ करोड़ लोगों के पास मोबाइल है। बहुत बड़ा मार्केट है उन सौ करोड़ का चार्जर से केबल ले कर के सप्लाई कम तो मैं नहीं कह सकता। अब डिमांड ज्यादा है, ओके तो डिमांड है। अब सप्लाई कम तो आपको अपनी निश ढूंढनी पड़ेगी। क्यूंकि हमेशा सप्लाई कम तो नहीं रह सकती है। मतलब आप वही मैं कह रहा? शॉर्ट कट सप्लाई कम वाला प्लीज मत ढूंढे है डिमांड जहाँ है वो ढूंढ ले।
बट ऐसी भी तो कैटेगरीज होती है जो में भी डिफिकल्ट होती है अंडर करना। और उनमे किसी रीजन ऐसी डिमांड बढ़ती है की 20, 30 परसेंट डियर होने और बढ़ रही है। सप्लाई कम है, सप्लाई 5, 10 पर्सेंट बढ़ रहा है। 1 ऐसी नहीं बढ़ पाया। वो उतनी कैच अप नहीं कर पाया।
जैसे आप एनवीडिया की चिप सी देख लीजिये तो वो कोविद टाइम में ऐसा बहुत हुआ। अचानक ऐसी प्रिंटर और प्रिंटर की अचानक से हमारे यहाँ डिमांड बढ़ती चली गई और वो मल्टीप्लाई हो रही है तो पता लगा की डिमांड मल्टीप्लाई हो रही है, क्यों की शार्टेज हो रखी है, क्यूँकी प्रिंटर पीछे से आई नहीं पा रहा है, कंप्यूटर प्रिंटर यहाँ तक की टेबल्स की चेयर्स की डिमांड, पैजामा की डिमांड ऐसी हालत हो गई थी क्यूंकी घर में लोग दिन भर रहने है। तो पहले शायद आपका 2 पजामा में काम चल जाता था, आपको 4 पंजाब में की है, डबल हो गए। अचानक पूरी कंट्री की डिमांड डबल हो गयी तो पजामा की डिमांड डबल हो गयी। तो ऐसे वाली बहुत सारी चीजे होती है जिनकी डिमांड टाइम टू टाइम अपेंड डाउन होती है। आपेंडडाउनहोतीहै तो फोर एग्जामपल आप ऐसा समझ लो कि 2000 सन 2000 के आसपास से सोलर पर देखता हूँ। इंडिया 1 ऐसी कंट्री है जहाँ पर एटलीस्ट नॉर्थ इंडिया देखो साउथ। इंडिया का बहुत ज्यादा मुझे, वो नहीं पता है कि वहाँ पर कितने दिन धूप निकलती है या कितने दिन पानी बरसता है। बट नॉर्थ इंडिया में ज्यादातर साल के 300 साढ़े 320 दिन धूप निकलती है। मतलब नॉर्थ इंडिया सेंट्रल इंडिया 303 सौ 20 दिन धूप निकलती है। तो हार्डली कोई 50 दिन ऐसे होते हैं जो बादल बारिश के होते हैं, बाकी 300 दिन पूरी धूप निकलती है। और अच्छी मतलब 12 घंटे, 13 घंटे की धूप निकलती है, 11 से 13 घंटे की अच्छी धूप निकलती है। और इंडिया में पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन गाँव, गाँव तक उतना अच्छा है भी नहीं तो सोलर से रिलेटेड जितना भी कुछ है और फ्री की बिजली है। भाई मतलब आपको कोई आपको केवल आ रही है, कैच करनी है, उसके ऊपर कोई सरकार का कंट्रोल भी नहीं है। तो अगर आपके यहाँ तेल निकाल आया, आपके घर के नीचे तो वो सरकार का है, लेकिन आपके यहाँ पानी बरस गए और सरकार का नहीं है।
धूप आ गई, धूप आ गयी, वो.
सरकार की नहीं है। तो आप उस धूप से अपना पानी से अपने खेत में डाल सकते हैं, पी सकते हैं। ऐसे उस धूप को आप अपने लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। टैक्स फ्री वो है, सन का इस्तेमाल नहीं हुआ है और वो अभी मतलब 50 सालों तक क्यूंकी अब छोटे छोटे पॉवर सेल्स बन गए हैं, उनको आप लगा। 2 पर रख। 2 जैसे हम धूप में सामान रखते हैं, ना सुखाने के लिए, वैसे आप रख लिया, दिन में एनर्जी इकट्ठी हो गयी। अब आप इस्तेमाल करो यहाँ भी इस्तेमाल करना। एनर्जी स्टोरेज में बहुत कुछ काम होने बाकी है, एनर्जी स्टोरेज मतलब बैटरी है, उसमें बहुत कुछ काम है और बहुत हमेशा डिमांड बनी रहेगी। सिमिलरली इसको एनर्जी कलेक्शन मतलब। एनर्जी कलेक्शन में बोलूं तो बाल्टी इक्वेलेंटऑफ़ बाल्टी तो बाल्टी, हर घर में है बाल्टी। और तब हर घर में बिना उसके काम नहीं चलता, बाल्टी लोटे के बिना काम नहीं चलता। वैसे ही समझिए की ये जो सोलर सेल है वो बाल्टी लोटा बनने वाले.
हैं, इतनी डिमांड होगी है मतलब इतनी.
कॉमन चीज हो जाती है जैसे हर घर में बाल्टी लोटा होता है आपके घर में अगर सोलर जी कलेक्टर है सोल एनर्जी कलेक्टर तो होना ही नरजीसटोरस्टोरेजतो.
होना चाहिए क्यूकी बहुत सारे जितने सोलर में जो ग्रीन एनर्जी है सोलर केस में जो ऑंटरपनजोबिनेस बड़े बड़े जिन्होंने हज़ार 5 10 हजार पचीस हजार करोड़ के धंधे बना दिए मैं उनसे भी बात करता हूँ, वो भी यही बात बोल रहे है। तो आपने बोला की ये इतनी बड़ी वैल्यू चेन है इस से भी इन्वेस्टमेंट सब सुनते है की अच्छा दानी नहीं किया, मानी नहीं किया, ऐसा नहीं किया और वो सब भी इतने छोटे छोटे लोगों से खरीदना चाहते है चीजे जो है नहीं और बहुत सारी इस पूरी वैल्यू चेन में चीजें बाहर की कंट्री से आती है, इम्पोर्ट होती है तो अगर उसके भी आप 11 प्रोडक्ट्स को पकड़ लो आपकी इन्वेस्टमेंट के हिसाब से तो बहुत ऑपर्चुनिटी लोगों को की वो यहीं पर यहाँ तो बनाये हैं या इम्पोर्ट करें या बेचे या उन्हीं लोगों के साथ बिजनेस करना स्टार्ट कर दे जो इतना आसान नहीं है पर स्टिल ऑपर्चुनिटी बहुत वो खुद स्ट्रगल कर रहे की इनके सप्लाई लोकल कैसे ढूंढे है.
मतलब लोकल कैसे ढूंढे में, मैं तो ऐसे कह रह हूँ की उसकी मैनुफैक्चरिंग से लेकर के तो पहली बार तो आप ऊपर में देखो की उसकी कलेक्शन स्टोरेज डिस्ट्रीब्यूशन रिफाइनमेंट उसमें। फिर अब उसके हर 1 पीसेस के अन्दर आप उसकी ट्रेडिंग में जाना चाहते हो, मार्केटिंग में जाना चाहते हो, रॉ मटेरियल में जाना चाहते हो, मशीनरी में जाना चाहते हो। फिर उसके मतलब मैनुफेक्चरिंग करना चाहिए की डिस्ट्रिब् 1 पूरी 1 बिजनेस लाइन जलती है और अनलाइक की बहुत सारा वाटर हमारा यहाँ पोल्यूट हो जाता है, क्यूँकि भगवान ने उसका स्टोरेज और ट्रांसमिशन सिस्टम दिया था हमको नदियों के रूप में हमने उसको, लेकिन ये प्ल्यूटनहीं हो सकता मतलब जो सं से आता है वो इतना ज्यादा अगर हम रास्ता ही पलट कर दे। आजकल पोलूशन हो रखा है दिल्ली में, वो बात रहे हैं, वो 1 अलग बात है बट इन जनरल 1 वो है दूसरा अगर आप देखो तो मैंने जैसे मोबाइल एक्सेसरी बताया अब मोबाइल के राउंड सभी लोग कर रहे हैं इन फैक्ट मोबाइल क्या है मोबाइल में 1 हार्डवेयर है जो चलो मान लेते है की उसका ऑपरेटिंग सिस्टम अपनी ओन करते कोई गूगल ओन करता है बट अब उसके ऊपर एप्स है, कोई भी बना रहा है और बना रहे हैं लोग सभी लोग अगर आप नहीं होता, आज यूट्यूब नहीं होता, रील नहीं होनी, आज वाट्सएप नहीं होता, तो हम ये नहीं कर रहे होते। तो मोबाइल के राउंड और मोबाइल दुनिया में 80 परसेंट लोगों के पास ऑलरेडी पहुँच चुका है तो यह मान लिया जाता है कि 80 पर्सेंट पहुंच गया मतलब हंड्रेड परसेंट पेनिट्रेशन है, हर आदमी को है, अब हर आदमी को है तो और ये मोबाइल 1 ऐसी चीज है कि जो जिसकी की लाइफटाइम वैल्यू टिपिकल 3 साल, 5 साल, 4 साल, 2 साल से लेकर 4 साल डिपेंडिंग अपन कौन कितना हैंसी उस करना चाहता.
है या कौन कितने पैसे लगाना चाह.
है डिनेासिबलइकमकिी तो 2 से 5 साल के बीच में, 3 से 5 साल के बीच में। अब उसके अराउंड में अब उसको ऐसा फैशन स्टेटमेंट भी बनाया जा सकता है के भाई उसके ऊपर में अलग अलग एक्सेसरीज लगाऊं यूटेलिटेरियन एंगल हो सकता है कि उसकी मोबाइल स्टैंड बनाऊँ मोबाइल स्टैंड का डिस्ट्रीब्यूशन करूँ की उसके ऊपर स्टिकर लगाऊं की। तो 1 तो ये बिल्कुल उसको सजाने और उसके यूटेलिटेरियनउसका चार्जर, उसका रखने वाला चार्जर, ऐसे वाला चार्जर, वैसे वाला चार्जर, बेडटाइम चार्जर, ऑफिस चार्जर दिस एंड दूसरा उसके अन्दर जो उसकी कैपेबिलिटी है क्यूँ क्यूँकि अब 6 बिलियन लोगों को उसकी डिस्ट्रीब्यूशन है तो आप उसके ऊपर कितना कुछ कर सकते हो। मतलब वहाँ पर बहुत सारा अपोर्चुनिटी और ये लोग सोचते है की बस अब हो गया। इसके बाद थोड़ी न कुछ एवरी फाइव यर्स दिस विल ओपन अप नewवून्यूरवन्यूज फॉर डिस्ट्रीब्यूशन इतना डेटा कलेक्ट हो रहा है की वजह से जो कि पहले कंप्यूटर से तो कलेक्ट नहीं हो सकता था और अब इतनी प्रोसेसिंग कैपेसिटी हो गई है, इतनी स्टोरेज कैपेसिटी हो गई है और अब इतनी टेक्नोलॉजी, टेक्नोलॉजी क्या, ए आई ऐसे सब्जेक्ट नहीं पढ़ाया जाता था नाइनटीन सेवंटी फाइव में यह पढ़ाया जाता था, बट क्या हमारे पास कुछ टाइप की सीपीयू थी, क्या हमारे पास उस टाइप का मेरी था, क्या सी पी यू मेमरी बन नहीं सकता था, बन सकता था। हमारे पास इतना डेटा ही नहीं था, डेटा कलेक्शन का कोई तरीका ही नहीं था। अब हमारे पास वो डेटा कलेक्शन के तरीके हैं इसलिए फटाफट सी पी भी बन रहा है, फटाफट सब एडवांसमेंट भी हो रही है, मॉडल भी बन रहे हैं। तो हर 5 साल इसमें बहुत कुछ और होने की वो है। आप इसके दूसरी साइड भी जा सकते हैं की मैं फेक डिटेक्शन करूँगा वो भी 1 बिजनेस है, सिक्योरिटी करूँगा वो भी 1 बिजनेस है। तो मोबाइल के अराउंड आप मतलब बहुत मोबाइल मोबाइल का सॉफ्टवेयर मोबाइल के सॉफ्टवेयर.
के अन्दर एक्सेस सिरीज हार्डवेयर सॉफ्टवेयर तो.
एंड तो एंड सर्विसेज मतलब, आप ज ए सर्विस मतलब। कुछ भी इंडिया मार्ट भी आज की तारीख में तो मोबाइल सर्विस कर रहा है। 60 परसेंट, 65 पर्सेंट ट्रैफिक मोबाइल पे बाल तो मोबाइल अपने आप में 1 बहुत बड़ा पीस है।
टाक, गोर्ड, मैनुफेक्चरिंग, मैनुफेक्चरिंग, अभी जैसे चाइना, प्लस, वन वो सब बोलते हैं की इंडिया के लिए बहुत फायदे मंद है। इंडिया इंडिया को से फायदा भी होगा। लेकिन आप 1 चीज से बात करते हैं कि चाइना सप्लाई नेशन बना, इंडिया अभी सप्लाई नेशन नहीं बना, सप्लाई नेशन.
टू दी, वर्ड भी नहीं बनाया और मतलब तो इंडिया एट सेल्फ भी नहीं बना।
तो आई थिंक चाइना कैसे सप्लाई नेशन बना, उन्होंने क्या करा एंड देन फिर इंडिया कैसे सप्लाई नेशन बन सकता है। मैनुफैक्चरिंग में सो दैट वो जो अपना 1 सेक्टर है जहाँ पर हम कम्पेरिडिवली दुनिया के सामने स्ट्रोंग है, एटलीस्ट अगर उसमें हम मैनुफेक्चरिग की ऑपर्चुनिटीज में देखे और अपनी करंट स्टेंड देखे तो हम टॉप फाइव में तो आयेंगे भले आय में भी नहीं आते हैं।
तो देखिये 1 तो 1 तो बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की अवैलेबिलिटी की बहुत जरुरत है मतलब हमारा ट्रांसपोर्ट सिस्टम वीक था, चाहे वो मतलब वीक नहीं कहूँगा, लेकिन.
अटपारनीकस्टली.
था मतलब सेम ट्रक को यहाँ से कहीं तक पहुँचाने के लिए, दिल्ली से बॉम्बे तक पहुँचाने के लिए अगर मान लो 22 घंटे का ड्राइव है तो उसको 40 घंटे लगते थे, बिकाज रास्ता खराब था, रास्ते में रुकावटें थीं, नो एंट्री थी, बाई पास नहीं था, इस टाइप के इशूज हैं। तो अब अगर 1 ट्रक जिसको 22 घंटे में छुट्टी मिल जानी चाहिए थी, वो 40 घंटे चलेगा। तो ऑबवियसली कॉस बढ़ेगी सिमिलरली जो आई थिंक मैनुफेक्चरिंग हब्स या पार्क्स या वो बनाये तो जैसे नोएडा बना हमारे वहाँ पे या गुडगांव के आगे मानेसर वगैरह बने, फरीदाबाद बना वहाँ पे कभी कभी किसी किसी शहर में ज्यादा बन जाता है, किसी शहर में कम रह जाता है। तो वहाँ पे आई थिंक थोड़ा और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की तरफ। लेकिन कुल मिला कर अगर देखा जाए तो इतनी डिमांड भी नहीं थी। तब हमारे यहाँ से इंटरनल हम अपना रास्ता तय कर रहे थे, $2000 से $8000 पर कैपिटा चाइना रास्ता तय कर रहा था $5000 से पचीस हजार डॉलर का, तो आई थिंक इनिशियल् टेक ऑफ़ पॉइंट, आप कह सकते हो की नाइनटीन.
बराबरी थे, बोल रहा था नाइटी से.
पहले है, वह तो हम बराबर ही.
थे, तो इंटरनल डिमांड में भी उनकी भी उस टाइम पे तनी ज्यादा नहीं होगी जितनी एक्सपोर्ट दुनिया 2 बातें थी.
1 वह 1 तो अपने को थोड़ा इजी मनी आना शुरू हो गया, इंडस्ट्री देखो उतने से भी बहुत फर्क पड़ता है आपको इजी मनी आना शुरू हो गया। तो आपका पूरा ध्यान जहाँ पैसा लगाओ.
तो सब बांट वहीं चले गए और.
सब गवर्नमेंट भी, वहीं गवर्नमेंट भी, मतलब इंजन कॉलेज बनने लग गए, उसमे जो भी पैसा पैसा, जो भी लगा तो उधर ही चले गए वहीं से जो निकले वो और वही पर क्यों की। 1 इनफोसिस का जो सक्सेस टोरी थी, उसकी वजह से पूरा नोएडा, पूरा गुडगाँव, पूरा हैदराबाद, पूरा बैंगलोर, पूरा चेन्नई, वो सब मिनी इन फोर्सेस बनने का सपना देखने लगा एंड वाई नॉट मतलब जहाँ पर जिसके यहाँ जो सक्सेस हो उसको ज्यादा वो करना ही चाहिए। और दूसरा फिर दूसरा जो उसकी वजह से जो हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी जरूरत थी, क्यूंकी मैनुफेक्चरिंग को जो इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए वो चाहिए बहुत हाई स्पीड, इंफ्रास्ट्रक्चर पावर हो, रोड हो। और या तो हमने और हमारी जरूरतें बिकाज उधर की साइड पर आईटी वाले आ रहे थे हमारा टेलीकॉम बैंकिंग सारा टेलिविजन, ये वाला सेक्टर अच्छा चल रहा था तो उसकी वजह से जो ज्यादा डेवलपमेंट हुई भी वो हुई एयरपोर्ट्स में या मतलब ऐसी चीजों की ट्रांसपोर्ट में, न कि ट्रक ट्रांसपोर्ट में, तो जिसके ऊपर शायद स्टार्टिंग फ्रॉम यमुना एक्सप्रेस वे या आगरा एक्सप्रेस वे जिसको बोलते हैं नोएडा से आगरा का, उसके बाद यूपी में अच्छा खासा 456 एक्सप्रेस वे का काम हुआ है। तो जो वाजपेयी जी ने वो गोल्डन क्वाडिलेटरल प्रोजेक्ट्स बोले थे। उसके बाद अगर उसको हर साल मल्टीप्लाई करते चले जाते। वो आई थिंक। उन्होंने शायद वो चाइना जैसी किसी चीज को देख के ही बोला होगा। तो वहां पर जो चाइना में ईज ऑफ डूइंग, दैट प्रोडक्शन इन टाइम और ऑटोमेटिंग दैट प्रोडक्शन इन टाइम। क्योंकि इंडिया में कुछ और भी काम कर रहा था की यार इतनी लेबर का हम क्या करेंगे। हम इतना सारा ऑटोमेट तो नहीं कर सकते, थिंग्स लाइक दैट तो उसकी तरफ भी। हो सकता है की कुछ चूक गए होंगे, हम फिलहाल नेवर लेट, इसमें कुछ ऐसा नहीं है की छूट गई गाड़ी है, कोई छूट गई गाड़ी। अभी आपके यहाँ के सारे लोग 30 साल के ही हैं.
कोई बहुत लेट.
नही हुआ, कोई बहुत लेट नहीं होगा की 45 साल के हो गए हैं, 50 साल के हो गए हैं। तो जब जब भी आप कोई सामान इंटरनल बनाना शुरू करोगे, धीरे धीरे इम्पोर्ट बंद हो जाएगा।
जैसे चाइना प्लस वन जो पूरा वर्ल्ड कोविद फेक्चरिंग में ग्रोथ हुई है। कौन सी सी कैटेगरी थी जहाँ पर एक्ट लोग यहीं से खरीदना चाहते हैं। यहाँ पर डिमांड नहीं है, बाहर के लोग।
ये थोड़ा मतलब थोड़े दिन के लिए होता है, बट एट द एंड ऑफ द डे देखो, बिजनेस हो, चाहे कंजूमर हो, उसको क्वॉलिटी और प्राइस इम्पॉर्टेंट चाहिए होता है। और तीसरा उसको मतलब। कुछ यह चाहिए कि इंश्योरेंस चाहिए। मतलब चाइना प्लस वन या तो डायवर्सिफिकेशन इंशोरेंस, डाइवर्सिफिकेशन इंश्योरेंस की वजह से। कोई आदमी 245 परसेंट को प्राइस ज्यादा दे सकता है। बहुत ज्यादा नही देगा 245 परसेंट क्वॉलिटी में अप डाउन कर लेगा कॉम्प्रोमाइज कर सकता हैं। बट अगर वो करेगा तो फिर वो 10 20 पर्सेंट वॉल्यूम उधर रखेगा, अगर.
वो बुरा नहीं देगा।
हाँ मतलब अगर मेरे को बेटर प्राइस और बेटर क्वालिटी जहाँ मिलेगी में 80 परसेंट वॉल्यूम तो वहाँ रखूंगा, लेकिन इन्शोरेंस के लिए 20 परसेंट वॉल्यूम इधर रख.
लूंगा की कल कहीं वहाँ पर खतरा.
है, तो तो मैं कम से कम मेरा बंद न हो जाए। वो डायवर्सिफिकेशन तो चाइना प्लस वन करने से आपको केवल 10 20 परसेंट का ही गेंद मिलना था। क्योंकि अभी यू हैव। टू बीट योर स्पीड, प्राइस एंड क्वालिटी, आल, थ्री टू गेन, दैट रेस्ट टी पर्सेंट, रेस्ट एईटी परसेंट और रेस सिक्स्टी परसेंट। तो वो भी होना चालू हुआ नहीं है। कहीं कहीं पर ऐसे अगर आप देखोगे तो बहुत सारे सेक्टर लेट हो रहे होंगे।
मतलब अभी यहाँ पर काम नहीं हो रहा।
यहाँ पर। मतलब धान नहीं गया, बस धान नहीं गया, बस.
जैसे कौन सी सेक्टर स्ट्रगल कर रहे है।
मतलब। बहुत सारी छोटी छोटी सेक्टर हैं। अभी कौन कहीं पे। मैं पढ़ रहा था कि सी सी टी वी कैमरा भी अभी पूरा का पूरा इंडिया में नहीं बन पाता। जब कि हर गली, हर नुक्कड़, हर रेस्टरां उसमें है। अच्छी इंडस्ट्री है, काफी यूजफुल इंडस्ट्री है। स्टील में भी अभी बहुत कुछ है, मतलब है। अभी बहुत सारे आइटम हैं जो एक्सपोर्ट से आप एक्सपोर्ट के पॉइंट में से मत देखे। कह। रहा। पहले एक्सपोर्ट का मुह भरने के बजाय पहले आप अपना इम्पोर्ट तो सुधार लो तो सुधारो, पोर्ट तो कम करो।
जहाँ बहुत से इम्पोर्ट कर रहे, उसे बंद करो ताकि बंद कर ले।
यहाँ बनाओ ताकि बंद हो। मतलब थोड़े है दैट प्रोटेक्शन प्रोटेक्शन करने से नहीं बंद होगा।
यह हमारी किपबलिटीइम्प्रूव करो। ताकि यहाँ से चीजें उठाने लगे।
अपने आप नैचुरल ही होगा न। वह कोई जन बाहर से इम्पोर्ट क्यों करेगा? मतलब किसी को क्यूंकि या तो कोई चीज सामान। इसलिए इम्पोर्ट होती है की की मुझे ब्रांड चाहिए, पराडा चाहिए तो ठीक है, प्राडा चाहिए तो एप्पल चाहिए। बना पल इंडिया में गवर्नमेंट कैन फोर्स दम की ठीक है जी, आपको फिफ्टी परसेंट सामान या इंडिया में बनाना पड़ेगा या समथिंग लाइक दैट। आपके यहाँ पर बड़ी अच्छी डिमांड चल गई है। आपको यहाँ पर बनाना पड़ेगा नहीं तो मैं इम्पोर्ट करोगे तो ज्यादा ड्यूटी लगा दूंगा। 2 जार जिनका की ब्रैंड भी बाहर का है, जो ब्रांड की वजह से बिकता है, नोट की जेनरिक पार्ट है मतलब वो। तो फिर आपको क्वालिटी से जीतना पड़ेगा क्वॉलिटी प्राइस से जो ब्रांड की वजह से आप खरीदते हो, उसको आप इस तरह से फ़ोर्स कर सकते हो की भाई ये तो आपको इंडिया में बनाना पड़ेगा, नहीं तो हम 10 20 परसेंट एडिशनल ड्यूटी लगा देंगे।
कौन सी सी ग्रेविया कैटेगरीज है हमारे घर की जहाँ पर हर कोई बिजनेस चालू करता है, लेकिन लगभग दुहाते ही है।
गवर्नमेंट है रोटी कपड़ा और मकान में कपड़े का जो बिजनेस है वो कपड़े का बिजनेस इस दी मोस्ट कॉमन बिजनेस, चाहे वो डीटू सी हो, चाहे वो.
डिंग हो, बी टू बी है, ट्रेडिंग हो, बी टू, बी टेल टेल हो।
वो सबसे बड़ा बिजनेस है। पूरे इंडिया में बाजार जाओगे तो बाजार का मतलब क्या होता है। बाजार का मतलब कपड़ा और क्या होता है। बाजार मतलब कपड़ा या खाना। तो बाजार और वो सबसे ज्यादा उसमे लोग इंट्री भी लेते हैं, और सबसे ज्यादा फेलियर रेट भी होता है। मतलब उस की पूरी चेन में, चाहे वो लोग उधारी में मरते हैं, चाहे वो लोग होलसेल की उधारी में मरते हैं, चाहे वो लोग डिजाइन नहीं कर पाते, चाहे वो प्राइस नहीं कंपीट कर पाते। और ये इंडस्ट्री भी थोड़ी सी क्लिक हुई जाती कहीं न कहीं से मतलब कभी अचानक से कार्टन बहुत सस्ता हो जाता है, कॉटन बहुत महंगा हो जाता है, पॉलिस्टर सस्ता हो जाता है, पॉलिस्टर महंगा हो जाता है। कुछ तो इंटरनेशनल हवा चलती है, इसमें सब पेनडाउन है, इसमें चीजें अप डाउन होती है, थोड़ी तो और फिर भी.
अट्रैक करती रहती लोग।
नी बड़ा मार्केट है, फूड इतना बड़ा मार्केट है, मैं जैसा बताया रोटी कपड़ा, मकान इतना बड़ा मार्केट है उसमे मकान फिर भी 1 ऐसा मार्केट है मकान मकान में द मोस्ट लुकरेटिव एंड मोस्ट रिस्की बिजनेस इज किया, बिल्डर बन गए मतलब कि बिल्डर और बिकमिंग कोलोनाइजर और बिकमिंग की आप फ्लैट बना रहे हो। इस द मोस्ट रिस्की, मोस्ट रिवॉर्डिंग बिकज। वो अगर बीच में प्रोजेक्ट फंस गया तो आप पूरी तरह से गए, बट वो इंडस्ट्री अभी भी ऐसी है इवन उस इंडस्ट्री में मैं देखता हूँ की कितने लोग बहुत सिम्पल बिजनेस केवल मिट्टी का या केवल वो स्केफोल्डिंग लगती है या केवल फायर फाइटिंग का या केवल प्रिंटिंग का बहुत लोग करना चाहते है मतलब उसका सामान पीछे से या तो उधार पर मिल जाता है या इस इजी की भाई लेके डाल दिया और किराया पर चढ़ जाता है वहाँ पर भी बहुत आना जाना है से आना जाना है में बहुत सारे लोग आते.
हैं फिर चले बंद कर है आते.
हैं चले जाते है क्यूँकी वो इंडिया मार्ट में आते हैं फिर चले जाते हैं ऐसा नहीं है की उन कैटेगरीज में लोग सक्सीड नहीं करते तो ऐसे.
जो है कुछ लोग हैं जो इंडिया वार्ड भयंकर सरापे कुछ लोग नहीं करते अधिकतर लोग नहीं कर पाते बिल्कुल पर जो कर पाते है वो भयंकर धंधा अपना बढ़ा देते है तो वो क्या ऐसा सही करते है तो उसमें न.
परसीवरेंस का वो बहुत है बिलीफ एन परसीवरेंस का बहुत तो बहती गंगा में देखो जैसे मैं आज आई आई बोल रहा हूँ अब इसी सेम चीज को आप या सोलर सोलर बोल रहा हूँ इसको आप सोचते कैसे हो की बहती गंगा में हाथ धोना है या यह गंगा मुझे पार लगा देगी तो सेम गंगा आप किस इन्टेंशन से उसमे हाथ डालते हो या पैर डालते हो इट विल हैव द सिमिलर इफेक्ट ऑन योर बिजनेस तो अगर तो आपने इस इंटेंशन से हाथ डाला यार इसमें तो अभी न शॉर्ट टम अच्छी डिमांड है लोवर सप्लाई है बढिया पैसे बन रहे है कर 2 हाँ गुज्जा बस या इसमें इस फंडिंग की बारिश हो रही है तो फंडिंग मिल जाएगी और कर 2 तो अगर आप कुछ लेकिन अगर आप इस इंटेंशन से घुसे हो की नहीं यार आई हर तो स्टे सोलर इस हर तो स्टे में तो इसके अन्दर मुझे अपनी जिंदगी बनानी है मुझे 10 20 साल अपना पूरा बिजनेस बनाना है ये इनटेंशन का ही फ़र्क है। तो जो लोग इंडिया मार्ट ऐसे ज्वाइन करते है की नहीं यार इन्टरनेट पे न बिजनेस होता है सब लोग कर रहे हैं हम भी करेंगे कैसे नही होगा अगर आप ये सोच कर तो न बनेगा क्यूँकि होगा क्या सिमिलर तरीके से है जब आप दुकान खोलते हो कहीं बाजार में दुकान खोलते हो तो बाजार में दुकान ऐसे तो नहीं खोल देते कि 3000 रुपए डाले और दुकान.
खोल दी.
3000 रुपए डाले आप 3 लाख रुपए कहीं से लाते हो किराय पे लेते हो सजाते हो माल खरीद के लाते हो कहीं से उधार लेकर आते हो तो आप कहाँ पर दुकान खोलनी है उसको थोड़ा धान से खोलते हो एंड फिर उसपर आप सुबह से लगे रहते हो। भाई ये तो हमारे पास नहीं है सामान अच्छा यह नहीं है कल से 4 लोग ये वाला सामान पूछने आ चुके हैं ये वाला सामान भी कल से लाकर दुकान पर रख लेता हूँ या नहीं है भाई साब ये वाला दूसरा दिखा दू अब आप इन्टरनेट पर अगर इस भरोसे से आये हो तो आप ऐसे करोगे और आप सक्सेट कर जाओगे।
ऐसी कोई कैटगरीज देखते हो इसमें जो अनऑर्गेनाइज् से ऑर्गेनाइज हो रही है, जो ऑर्गेनाइज हो रही है में भी पहले लोग खुल्ला खरीद लेते थे, किसी भी चीज में खरीद लेते थे, अब ब्रैंडेड पर ही जा रहे है। आई लव कैटेगरी मतलब यह स्टोरी काफी अच्छी है जो लेंसकार्ट की स्टोरी है। अन ऑर्गनाइज अनब्रैंडेड कहानी थी जहाँ पर हर छोटी छोटी जगह पर ऑपटिक्स दुकानें होती थी। फिर 1 ने कंसोलिडेट करके ब्रांड बना दी कि कार्ड ही है भले अंदर मटेरियल काम सेम टाइप का होता है।
जैसे निशा में भी यही हुआ, तनिश्क.
में एक्जैक्ट्ली सेम रेट में यही हो.
रहा है, तनिश्क में यही हुआ।
आई लव दिस स टोरी जैसा कुछ है जो ऑर्गेनाइज हो रहा है। जो पहले अन ऑर्गेनाइज्ड था। अनब्रैंडेड थे, हाँ लोगों को फर्क पड़ता है। जैसे हेलमेट कैटेगरी थी स्टील वर्ड स्टीलबर्ड.
क्या नाम है स्टील स्टील बर्ड बर्ड राइट।
तो अब लोग मांगते हैं वो वह वाला हेलमेट चाहिए। पहले लो हेलमेट ले 2 वो बहुत बड़ी बात पैसे कौनसी और कैटेगरीज है.
मतलब अगर आपको केवल ब्रांड वो बनाना है मैंने क्वालिटी और ब्रांड लेट बनाना है। किसी भी कैटेगरी में घुस जाओ मतलब आप टेबल में घुस जाओ, चेयर में घुस जाओ, पेट में लो मतलब हर वो जगह जहाँ 10 ब्रांड टॉप के 5 ब्रांड नहीं एक्जिस्ट करते। आई थिंक दर इस प्लेस फॉर यू टू गो इन क्रिएट ब्रांड।
तो जैसे कौन सी ऐसी कोर्ट कैटेगरी होगी जहाँ पे आपको लगता है। वो टॉप टेन ब्रैंड्स नहीं है।
ब्रांड्स मतलब अभी.
अभी कोई इंडिया नेशनल.
ब्रांड नहीं भी मतलब क्या है मतलब गोदरेज है, कुछ है फेदर लाइट है, कुछ है मतलब नील कमल है, कुछ है बट इम सेइंग की ये सारी की सारी कैटेगरी में भी बहुत स्कोप है की अगर आप 10 20 ब्रांड लेड बनाना चाहते है मतलब क्वॉलिटी ब्रांड उस तरह से बनाना चाहते। वैल्युक्रिएशनकना तो 2 अलग अलग बाते है की आपको बिजनेस बनाना है बिजनेस बनाना मतलब जो आपको सस्टेनेबल यूनिट इकॉनमिक्स का बिजनेस बनाना है वो 1 पीस है और ब्रांड बना देना है वैल्यु क्रेट वो फिर वैल्यू क्रिएट कर देनी है। वो दूसरा पीस है या जिसको स्टार्ट अप जिस परपस के लिए जिसमें फंडिंग होती है वो होता है। तो इंडिया मार्ट में ज्यादातर हम जो चीजें कोशिश करते है वो वो कोशिश करते है की हमको हम आपको 1 यूनिट इकोनामिक्स लेड बिजनेस बनवाएंगे मतलब हो सकता है की किसी में यूनिट इकोनॉमिक कभी बहुत ज्यादा फेवरेबल रहती है, किसी में भी किसी कैटेगरी में नहीं रह.
कौन कैटगरी में बहुत फेवरेबल है और.
कौनसी नहीं कौन सी कैटेगरी में बहुत फेवरेबल है। जैसा की मैंने बताया अगर आप जाओगे की जितनी कम्प्लीटली अनब्रैंडेड या कम्प्लीटली अननोन कैटेगरी है। हेल्थ कांशस कैटेगरी है मैं आपको वो बता ता हूँ हमने जब राखी हमने आई जी पी काम करके बिजनेस मैंने चालू किया था नाइटी नाइन नाइन में दिवाली पे मिठाई मिठाई पहुँचाने का इंडियन गिफ्ट पोर्टल के नाम से और उसमें हमने देखा की तो हम पहले वो दीवाली का किया था फिर बर्ड डे गिफ्ट किया और 1 नैचुरली राखी पर लोग भेजते मिठाई उठाई। तो ऐसे करके हमने ई कॉमर्स चालू किया क्योंकि उस समय ई कॉमर्स ये था की खुद की खरीदने के लिए क्या है कॉमर्स? लेकिन अगर किसी को दूर डिलीवरी करानी है तो उसके लिए कॉमर्स मेट सम सेंस तो उसमें समझ में आया कि राखी में इट इज ऑलमोस्ट लाइक, मैंडेटरी फॉर पीoपलe तो दू थिंग्स डू दिस गिफ्टिंग वन लाइक, इन दिवाली में भेजूं न भेज, दे में में भेजूं न भेजूं, भेजूं मिठाई भेजूं न भेजूं, कार्ड भेजू न भेजो। लेकिन राखी मेरी एंड राखी में राखी की वैल्यू उतनी इम्पोर्टेंट नहीं है मैंने कितने का खरीद कर भेजी वो इमपोर्टंट है मुझे पता मुझे लगना चाहिए कि मैंने 1100 की राखी भेजी है तो राखी की सजावट इम्पोर्टेंट है धागे की, वैल्यू ही धागे की वैल्यू नहीं इमपॉर्टेंट है में वेरी हाई मार्ड मार्जिन सेंस सो वेयर एवर इट। जहाँ पे देने वाले का या खरीदने वाले को है मुझे इतने का गिफ्ट चाहिए, वो सेंस करता था वहाँ पे भी आप देखो। तो अब जैसे आप समझ लो की कपडे में ही है तो कपड़े में कपड़ा तो मतलब 40 रूपए मीटर ही आता है या सौ रूपए मीटर ही आता है। जो ये ऊपर का ड्रेस मटीरियल है वो टिपिकल 50 रूपए मीटर है मन से 50 रूपए मीटर, पचीस से पचहतर और या अगर आपका शूटिंग का आइटम है तो वो सौ रूपए मीटर है। अब वो 80 से 120 के बीच में होता है। अब उसको आप कैसे भी बेच लो कपड़ा तो ऐसे ही रहेगा, लोहा है फॉर एग्जांपल तो लोहा है 50 रूपए की लोहे आप लोहे की चेरी बना लो या लोहे का छोटा सा गमला ही बना 2 और फिर गमले को जैसे ही आपने पेंट किया या वो लोहे के स्टैंड को जैसे ही आपने पेंट किया सबीर हाई मार्जिन बिजनेस आपने फिर पर पीस में बेचना शुरू कर दिया। फिर आप ऐसे सोच की जिन चीजों का आप छोटे पैकेट बना सकते हो जैसे ड्राई फ्रूट्स का ये पैकेट बनाने का आजकल बहुत बिजनेस है मतलब ड्राई फ्रूट मान लो हजार रूपए के जी कोई आइटम आता है। अब आपने 50 50 ग्राम के पैकेट बनाये सौ सौ ग्राम के पैकेट तो सौ सौ ग्राम का पैकेट उसके पैकेट की बच्चे से ब्रैंडिंग उसका उसमें मतलब छटे हुए 1 पर्टिकुलर साइज के वो या अगर उसके अन्दर कुछ सॉर्टिंग या कुछ सीजनिंग डाली है। अब वो नन ऑफ़ 2 विल रैली कॉस्ट यू नो यू कैन सेल्फ दैट पैकेट फॉर मे बी टू हंड्रेड थ्री हंड्रेड रुपीज़ पर पैकेट में दाल में मतलब दाल, कोई ब्रांडेड दाल थोड़ी है, चावल, कोई ब्रांडेड चावल थोड़ी है तो दाल चावल। अब सोचिये जब टाटा ने डिसाइड किया कि नमक हमें टाटा नमक करके भेजना है, तब तक नमक का कोई सिंगल ब्रांड ही नहीं था। आज भी देखो न नमक 23 ब्रांड के अलावा नमक ही नहीं 1 तरफ.
मार्केट ले गया हूँ।
ऐसी वाली हर चीज में पड़ी हुई है। अजवाइन का कोई ब्रांड है क्या? आपको बताएगा बंधनी हींग आपको पता होगा शायद हींग बताया हाँ क्यूँ नहीं।
अजवाइन.
नईस ब्रांड वाले खेल पर ते तो ऐसी चाय मसाले हो, चाहे खाने का हो चाहे जो आजकल ये खाने को लेकर चल रहा है।
मतलब दूसेर सौ सौ सौ करोड़ की स्केल कर दी।
मखानाविकहै मतलब बहुत सारे है। एंड टू मेनी ऑफ देम वार बी इन क्रिएटेड एवरीडे। तो उस टाइप के जो भी सामान आप पैक कर सकते हो। क्योंकि लोगों को धीरे धीरे ऐसा नही है की खुला सामान बिकेगा नहीं। अभी भी मतलब नीचे बहुत सारी जनता हैं इंडिया में हर तरह के मार्क उसके लिए प्रोडक्ट के लिए कस्टमर सेगमेंट है। 140 करोड़ लोग हैं और हर सेगमेंट में 10, 10 करोड़ लोग तो है है तो 13, 14 सेगमेंट है। कुछ लोग आज भी वो नमक डेले वाला लेके ही रखते हैं, उसी में से थोड़ा सा तोड़ कर के खा लेते हैं। और कुछ लोग मतलब उनको वो स्प्रिंकलर वाला ऐसे वाला मतलब नमक जो हाथ के घुमा के निकालेंगे धंदे में मतलब।
इन्ग्रीडियंट्स क्या है। ऐसे कैसे हिंदुस्तान में धंदा क्या कैसे बनता है, क्या खरीदती हिंदुस्तान की जनता कौन सी चीजों पर भरोसा नहीं करती। वर है लर्निंग।
पहली बात तो जो हिंदुस्तान की जनता वाली जो बात है वो जनता हिंदुस्तान को कॉमन सिंगल जनता नहीं है। हर 20 20 करोड़ की 5 हिंदुस्तान 6 हिंदुस्तान है। तो हर 10 10 करोड़ की जनता.
बिल्कुल अलग है और वो हर 200 किलोमीटर पर चेंज भी हो और वो.
मतलब सौ 200 किलोमीटर पर उसकी वो चेंज भी हो जाती है। तो ये वाला तो पीस आप अपने दिमाग से निकाल। 2 की जनता क्या खरीदती है, जनता क्या नहीं खरीदे। आप कौन सी जनता को क्रेटर करना चाहते हो, आप डिसाइड कर लो, आप डिसाइड करो, आप अमेजॉन बनना चाहते हो, आप मीशो बनना चाहते हो।
मतलब हर जगह पे है।
मतलब स्कूल दोनों जगह पर इक्वल है। दोनो बराबर हैं, बड़ा मार्केट है कहाँ पर कितना प्रॉफिटेबल है, क्या यूनिट इकनॉमिक वो अलग बात है। बट, स्कूल सच जगह बहुत बड़ा बड़ा है।
क्या चेंज हुआ, पैसा आने के बाद.
बहुत ज्यादा, क्या चेंज हुआ, पैसा आने के बाद बहुत ज्यादा। पहले बताते है, क्या नहीं चेंज हुआ।
ठीक है, ठीक है.
ताकि वो आसान है जो मुझे बता क्या चेंज हुआ मुझे शायद याद ठीक से पता भी नहीं है। तो ये जो जूते का ब्रांड है यह हेसपोपिस का यह वन ऑफ द मोस्ट काफी एक्सपेंसिव जूता है। जो पचीस साल से सेम जूता सेम, ब्रांड सेम, डिजाइन सेम यही पहनते हो।
यही जब खराब जाता चेंज कर देते हो।
ये ही पहन ले और 1 लाख के घर में रखे रहते हैं। पहले.
ये चीन नहीं हुआ और क्या चीन ने हुआ है।
ऐसे ही जो मकान मैंने खरीदा था 2000 4 में और 2000 7 में। 1 में ब्रजेश रहता। 2000 4 में लिया था और 2000 7 में लिया था। जब 2 हज़ार 4 में मेरा 6 करोड़ था और 2000 7 में मेरा 16 20 करोड़ था उसी मकान में.
रहते है और आज इंडिया का कितना.
आज इंडिया का पिछले, क्वार्टर का 400 करोड़ था। तो 1600 करोड़ है। तो जो 16 करोड़ के टाइम पर.
जो मकान लिया था वो 1600 करोड़.
के टाइम पर, वह उसी मकान में है तो उसमें कोई चेंज और पैट.
कितना है करीब 5 सौ करोड़ के.
आसपास साल का.
500 करोड़ पैठ पर भी सेम चेंज क्यूँ चेंनीहोमकनतोयूजली सबसे पहले इंडियन जैसे ही पैसे कमाते है, 500 करोड़ प्रॉफिट अगर कमाते है सालाना। तो लोग सबसे पहले तो घर चेंज.
करते है, मतलब हमने हमने उस स्टिंग के हिसाब से अच्छा ाी स्ट्रेच करके अच्छा घर लिया था और एस पर रिक्वायरमेंट हमको वो शूट करता है, ठीक है, ठीक है तो गाडी, अभी भी सिमिलर तो वही हंडर सिटी है, सियाज.
हो गई है हंडरसिटीहोगईहै पर यह सब नहीं की चलो हम लंबा गिनी रोल स्रो सौरी नहीं, ये सब नहीं जमता.
अगर मेरे को कंफर्ट के लिए कोई चीज चाहिए, मैं उसे पूरा पैसा खर्च करूंगा लेकिन मेरे को दिखाने के लिए कुछ चाहिए तो वो मेरा जमता नहीं है, ठीक है तो मैं मार्केट में जाऊँगा, अगर जल्दी में शॉपिंग करूँगा, ऐसा नहीं है कि कोई कंजूसी से करूँगा बट वाटेवर, आई लाइक, यू वांट बाय वेवर उसपर क्या लिखा है, मुझे दिखता भी नहीं है कि वो पराया है या क्या, उसका ज्यादातर की स्पेलिंग भी नहीं आती, मुझे उसका मुझे उल्टा पैसा देना चाहिए। अगर उसे मेरे नाम यहाँ पर मुझे ब्रांड लिखना है तो वो आपको दिखाते है। पहले कपड़ा खरीद आपकी ब्रैंडिंग में आपकी ब्रांड करूँ, सो आई डोंट, ठीक है डू दैट जैसे तो सम ऑफ़ दोस्त.
थिंग्स दिन चेंज, व यू थिंक वन और टू थिंग जो चेंज करे पैसा.
आने के बाद, पैसा आने के बाद। 1 तो ये चेंज करा की बच्चों को और घर वालों को पैसे के बारे में बिल्कुल बात करनी करती क्योंकि हर क्वार्टर में ऐसे ही छप जाता है.
पब्लिक हो नहीं भाई है दूसरा.
आई थिंक की मैंने कभी सोचा नहीं था की मेरे लिए तो तब भी लाइफ सेम थी जो मैंने मतलब मकान मैंने ले लिया था और मैंने सोचा भी नहीं था कि इतने सारे लोगों को हम शॉप या शेयर्स दे रहे हैं, ये कभी लोगों की लाइफ बदल देंगे। तो। 1 तो आई थिंक हमारा, जब हम आई पी यू गए थे तो पंद्रह परसेंट के आसपास एम्प्लोयस के पास वर्ड था एंड हमने 2018 में जस्ट बिफोर, आई पी ओ 4, 5 सौ लोगों को और एड किया था, आई थिंक बाई दी, गॉड ग्रेस और लकली, we happen, तो बी इन द राइट प्लेस राइट टाइम और ऐसे में अगले 1 डेढ़ 2 साल में आई थिंक हमारा स्टॉक प्राइस रन, अप फ्रॉम ऑलमोस्ट टेन टाइम्स हो गया था, वहाँ से आधा हो गया। तो जो हमने आईपीओ किया था वह अभी भी लाइक है फाइव हंड्रेड परसेंट ओके तो एंड दैट क्रिएटेड सो मच, वेल्थ तो ए टी पी वी लाइक थर्टी थाउजंड करोड़ markेtcaपएंड टुडे वी लाइक फिफ्टीन थाउजनड करोड़ मार्केट कैप बट वन वेंट इटवास थ्री थाउजंड करोड़ मार्केट कैप तो हमने तो ऐसे सवहानकेचलोकीहमने 500 करोड़ के शेयर दिए थे, उनको क्यूकी थ्री थाजनकोमेपनद्रह लेकिन वो that send to depending apan had how much who sold who had हw muc i think i एंडेड प क्रिएटिंग 5, 700 करोड़ लोगों के लिए massive welt for some of them, it was weltweltanड for some of them, it was 50 लाख 1 करोड़ 2 करोड़ 5 करोड़ आई थिंक कितने ने मकान खरीदा, कितने लोगों ने मतलब गाडियाँ खरीदी, मुझे लगता है कि वो मेरा पीस, उसके बाद से मैं 2 बार शॉप और कर चुका हूँ। सौ सौ करोड़ के मतलब मुझे नही लगता की मैं उसको इसलिए कर रहा हूँ की अच्छा या उससे रिटेंशन को बढ़ जाएगा या कोई बढ़ जाएगा। i found that that s a very good way of giving a logdpmanytorawelt distribution system at least for this corporate, plas.
Tel me onetingजैसेआपने बोला कि आपको एमाजोन आप सामान उठा के दूसरी जगह नहीं डालना चाहते है, अली बाबा सेम टाइप का बिजनेस करता है न ये चाइना.
में नहीं दोनों अलग अलग बिजनेस करता है, ओके तो रिटेल के लिए वो ये करता है और होलसेल के लिए वो जैसा वैसा करता है।
तो वो जो होलसेल वाला बिजनेस है वो इतना बड़ा बन गया, होलसेल वाला.
बिजनेस उनका अच्छा कैश का बिजनेस है तो वो करीब 2 ढाई बिलियन डॉलर का रेवेन्यु है, ढाई बिलियन डॉलर का बोलते है, मेन अली बाबा डॉट कॉम बिजनेस है और वन सिक्के वो करीब ढाई बिलियन डॉलर का बिजनेस है वह लेटर लेस देन वन बिलियन का प्रॉफिट होता है और जो उनका जो टॉप वगैरह का बिजनेस है वो सारा वैसे ही है जैसा एमएजोनयाइबेकाबिनस के जैसे वो.
बिजनेस है तो इंडिया वह क्यों इतना.
बड़ा बन पाया वो नहीं बन पाया क्योंकि हमको बनना नहीं है हमको वो रिटेल की साइड का जो बिलियन डॉलर.
रेवेन्यू बिलियन डॉलर, रेवेन्यू, आई थिंक वो.
बिल्कुल जा जा रही है उस हिसाब से देखें तो हम लोगो का 200 मिलियन डॉलर के आस पास रेवेन्यू हो चूका है। अब चाइना और इंडिया के मतलब साइज में पूछी मैनुफेक्चरिंग, इकॉनमी बहु डिस्ट्रीब्यूशन इकॉनमी यहाँ की उतनी बड़ी नहीं हुई है.
अभी जितनी बड़ी ग्लोबली भी बेचता है न, एक्प्रेस एक्सप्रेस करके आप नहीं बेचते.
ग्लोबल क्यूँ ऐसा तो वो बेचता है मतलब 1 तो 2 अलग अलग फीस है, 1 तो वो क्या करते है की ग्लोबली उनके यहाँ पर 2 प्लेटफार्म है 1 है चाइना डाली बाबा कॉम 1 अलीबाबा डॉट कॉम अलीबाबा डॉट कॉम के थ्रू ग्लोबली बेचते हैं जो अलीबाबा कॉम के थ्रू वो ग्लोबली बेचते हैं और जो चाइना डॉट बाबा क्यूँकि दोनो प्लेटफार्म है 1 चाइनीज लैंग्वेज में और 1 इंग्लिश लैंग्वेज है इंडिया में दोनों इंग्लिश में लैंग्वेज में होने की वजह से 2 अलग अलग प्लेटफार्म रख पाना मुश्किल है मेरा भी है एक्सपोर्ट डॉट इंडिया डॉट कॉम बट वो एक्सपोर्ट डॉट इंडिया कॉम पे क्यूंकि मैंने तो 2010 में बंद कर दिया था। एक्सपोर्ट के पूरा फोकस क्यूँ एक्सपोर्ट का ग्रोथ ही 2000 7 के बाद से 2000 7 में क्या हुआ की।
तो फिर 2010 में बंद क्यों कर दिया। 2000 7 से हुआ तो 2000 7.
के बाद से ही ग्रोथ होनी बंद हो गयी थी। अच्छा तो 2010 में फाइनली जा के बंद कर दिया हमने बंद। मतलब उसकी तरफ पूरा परवर्ती कर दिया की अब हम डोमेस्टिक बनायेंगे 2000 7 के पहले डोमेस्टिक इन्कवायरी हम डिलीट कर देते थे। अगर कोई आ भी जाती थी बिटवीन 2000 4567 रखते डोमेस्टिक इनकारी क्यूंकी हमारे कस्टमर्स को पसंद नहीं थी। और हम स्पेशली जा के डोमेस्टिक सेलर्स को साइन अप नहीं करते थे। एक्सपोर्टर्स को ही साइन अप करते थे। पहचानने का कोई तरीका नहीं था। सामने वाले को बोलना चाहिए। मैं एक्सपोर्ट करता हूँ। अब पहचानने का तरीका है आई सी कोड है ना ही था। ठीक है तो फाइनली क्यूँ। पहली वाली रूपी 2000 चौवालीस 45 रूपए से घटकर 38 रुपए का हो गया था। स्ट्रोंग हो गया था। तो हमारी एक्सपोर्ट की कॉम्पिटिटिव ने बहुत बुरी तरह से खराब हो गयी थी, उसकी वजह से एक्सपोर्ट स्टैगनेट हुआ। उसके बाद 2000 8 में वो हो गया। क्या कहते हैं ग्लोबल क्राइसिस डिमांड कम हो गयी। फिर 2000 9 में इंडिया में अचानक से कुछ और क्राइसिस हुई। तो वो 23 साल तक एक्सपोर्ट बिल्कुल ठंडा है। मतलब जहाँ था वहीं था। उससे पहले वो 20 पचीस परसेंट हर साल ग्रो कर जाता था। 20 20 पचीस पचीस परसेंट। तो क्यूंकि ग्रोथ हो नहीं रही थी एक्सपोर्ट की और डोमेस्टिक में मार्केट बढ़ते चला जा रहा था। इंडिया मार्ट पर डोमेस्टिक एक्सपोर्ट एक्सपोर्ट में दोबारा ऐसी ऑपर्चुनिटी है। तो 2020 से हमने 10 साल तक वो मार्केट खाली करके रखा की कोई जना बनाओ एक्पोर्ट हम डोमेस्टिक में बिजी हो गए, कोई नहीं आया। किसी ने एक्सपोर्ट का कुछ भी नहीं बनाया। मतलब जिसने बनाया उसने अपना ट्रेडिंग का बिजनेस बनाया। तो कुछ लोग आये जिन्होंने एक्सपोर्ट मैं खरीदूंगा मैं बेचूंगा बट मैं खरीदूंगा मैं बेचूंगा। वो आप 1 कैटेगरी में कर सकते हो, 1 सिटी में कर सकते हो, 1 कंट्री में कर सकते इंडिया। अगर आपको यह करना है और उसमे से 20 30 परसेंट कमीशन कमाना है तो आप ज्यादा लोगो के हक का काम नहीं कर पाओगे। मतलब गूगल में क्या है, पता नहीं किस किस का फायदा होता है। वाट्सऐप में क्या है, पता नहीं किस किस का फायदा होता है। मतलब हर आदमी को अपने तरीके से इस्तेमाल करके फायदा निकालता है। यू ट्यूब में क्या है मतलब किस किस तरह से इस्तेमाल होता है। किसी ने ये थोड़ी सोचा था। तो ये वाले जो प्लेटफॉर्म्स हैं, जो कैटेगरी बहुत तरीके की कैटेगरी को हैंडल कर लेते हैं। बहुत तरीके के केस को हैंडल। दे प्रोवाइड बेसिक, इंफ्रास्ट्रक्चर मतलब सम काइंड डिस्ट्रीब्यूशन, इंफ्रास्ट्रक्चर सम काइंड टेक्नोलॉजी एंड डिस्ट्रीब्यूशन वाइल। मतलब। अगर आप अमेजॉन की खुद की भी कहानी पढ़ोगे तो उन्होंने पहले कई महीनों तक या 1 साल तक केवल और केवल बुक्स किया। पहले बुक्स को परफेक्ट किया, फिर बुक्स के बाद म्यूजिक प्लस बुक्स किया, फिर उसके बाद उन्होंने कहा अच्छा अब मैं कुछ और सामान, लेकिन खुद बेचूंगा मार्केट प्लेस मॉडल भी नहीं। 2014 में जब इंडिया में उनको फ़ोर्स किया गया मार्केट प्लेस मॉडल में, 13, 14 में, तब उन्होंने वर्ल्ड वाइड मार्केट प्लेस मॉडल खोला है। तो उससे पहले दे वर लाइक हम खरीदेंगे और हम बेचते हैं। सामान amazon वाज नौट रीसेलर ही वाज, द सेलर ही वाज कंपीटिंग वित बानसेन, नोबल्स ही व, कंपीटिंग ही व रिटेलर बाई हिमसेल्। 2014 में जब उनको लगा कि इंडिया में तो मार्केट प्लेस मॉडल ही करना पडेगा एंड दैट्स वैन आई थिंक दे लर्न फ्रॉम इट एंड द ओपन। वर्डवाइड। तो आज भी अब उनका जो टोटल जीएमबी या कुछ होता है उसका 1 लार्ज परसेंटेज पहले वो सेल्फ रीटेल में है, वो खरीदकर बेचते है या जो उनका प्राइवेट लेवल है ऑलमोस्ट फिफ्टी फिफ्टी परसेंट या ऐसा कोई नंबर है मुझे एग्जैक्ट ली याद नहीं? क्या 40 60 होगा या 50 50 जो मार्केट प्लेस हो गया है। अब जा कर के तो आई थिंक उनको वो, लेकिन मुझे लगता है की वो 1 वहाँ पर थोड़ा सा थोड़ा सा एथिक्स का प्रॉब्लम है क्या? अब जब तक वो आप सेल्फ रिटेल का बिजनेस कर रहे थे, कोई प्रॉब्लम नहीं था। माफ़ करो सेल्फ रीटेल आप, जो सामान लाओ ट्राई करो बेचो मार्केट में स्टडी करो। अब अपने मार्केट प्लेस चला दिया और मार्केट प्लेस के साथ आप सेल्फ रिटेल भी चला रहे हो, मार्केट प्लेस आपको न मार्केट प्लेस। अगर आपको चलाना है तो अन्धा कानून बनकर चलाना पड़ेगा मतलब मार्केट प्लेस में आपको सब दिखता है। मैं यहाँ बैठे सारी बाते बताई, कहा क्या हो रहा है? तो मुझे तो बहुत कुछ दिख रहा है। अगर जब वाट्सप कहता है की मुझे कुछ नहीं दिखता तब भी उसको बहुत कुछ दिखता है, न ही राइट, ही कांट रिड योर मेसेज ही काट ली के बट किसने किसको कब इतना तो दिखता है, न.
को डेहा ज्यादा तो.
डेटा तो है, कुछ तो डेटा पैटन दिखता है। और वहाँ तो सब कुछ दिखता है.
की कौन से शहर में, कौन से.
कौन, कौन, कौन सा सामान, कहाँ पे से बिकना शुरू हुआ, कौन सा चलना शुरू हुआ, कौन सा किस मार्जिन पर बिकता है, किस जगह से ओरिजिन है, कहा पे जाता है, कहाँ कंजमशन है और वही पर आप खुद भी 1 रिटेलर मतलब। तो ये तो थोड़ा मतलब, इसका जवाब आप कैसे दोगे मतलब बाद में जाके।
ऊपर की जहाँ जहाँ लोग बेच रहे हैं, जहाँ जहाँ पॉकेट्स अच्छी दिख रही है, वहाँ पर अपना सेल्फ ब्रांड बना.
के प्राइवेट लेबल में प्राइवेट लेबल करो या आप बडी नहीं करते।
ये अमाजोन नहीं, ये डिमांड भी करता है।
ये कहाँ करता है।
खुद की ब्रैंड चलाता है, खुद की.
ब्रांड की बात नहीं है, कुछ बेचता है, खुद ही बेचता है। वहाँ कोई मार्केट प्लेस तो नही है.
लेकिन देखो नहीं, वहाँ मार्केट ने नहीं न।
देखो।
जो भी है लोग पहले अगर आप मान लो। आप 1 दाल बेचने वाले हो, आप अपनी दाल डीमार्ट को देते हो, मतलब.
डिमांड ने मुझसे खरीदी पैसे लिए, दाल खरीदी डिमांड ने पैसे लगाए दाल खरीदी बिकेगी नहीं बिकेगी डिमांड का वो था.
है बट उसके जहाँ पर कम बिक रहा है, ज्यादा बिक रहा है कैसे बिखरा है वहाँ पर फिर वो अपनी प्राइवेट लेबल प्राइवेट लेवल से प्रॉब्लम नहीं.
है प्रवेनहींनहींआप मैं कह हूँ प्राइवेट लेबल की भी बात नहीं है मैंने मान लो ढूंढ के लेके आया की टाटा का नमक मुझे बेचना है पता नहीं अभी तक नहीं बिकता मैंने ले। अब जब बहुत जब थोड़ा ज्यादा बिकने लग गया तो उसने टाटा से डायरेक्ट कांटेक्ट करके टाटा का नमक मैंने ये नहीं कहा की खाली वही बेचना है.
ने 1 दुसरे नमक वाले से बात.
की, नहीं नहीं वह टाटा का 2 दोनो काम किए उसने पहले तो यह काम किया अच्छा नमक ज्यादा बिकता है इसलिए मेरा प्राइवेट लेवल होना चाहिए है और टाटा का नमक ज्यादा इसलिए मैं डायरेक्ट टाटा नमक से भी ले सकता हूँ। तो उसने जिस आदमी ने आपको टाटा नमक का रास्ता बताया था आपने उसको भी बाई पास किया और टाटा को भी बाईपास किया। वाई डूइंग सब नही करते है करते है तो इसका मतलब थोड़ी मैं यह.
बता रहा हूँ की ये मास्क नहीं मार्केट प्लेस के वालमार्ट भी करता है.
डाभी कर मार्केट प्लेस कोई नहीं चलाता। देखिये 2 अलग अलग बातें हैं आपको डिमांड सप्लाई का ओरिजिन पता करने के लिए मार्केट प्लेस वो न तो वार्ड मार्ड करता है डिमांड करता है वो आप बाहर से जाइए पता कीजिये तो अगर आप मार्केट प्लेस चला रहे हैं तो आपको यह नहीं करना चाहिए आप ब्रैंडेड सामान बेच रहे हैं बेचे करना चाहिए की नही कोई कमेंट भी नहीं कर रहा। 3 लेयर है अलग अलग आप अपना प्राइवेट लेबल है आप ब्रैंडेड सामान बेच रहे है और आप दूसरों का समान लगा रखा है की नहीं नहीं मेरा कोई लेना देना नहीं है, इंडिया में तो यह बीच वाला और पहला वाले.
में भी सर्विसेस दे रह है लॉजिस्टिक ज्यादा सर्विस दे रहे है दे रहे.
जो लेकिन वहाँ जो डेटा मिल रहा है उसी डेटा इसीलिए तो पूरे इन्टरनेट पर हालत स्टोरी पढ़ी हुई है मतलब.
मैं बोल रहा हूँ पॉइंट 9 में डिफेंड नहीं कर रहा हूँ किसी को मैं बोल रह सब करते हैं, मैं बोल रहा हूँ की कोई 1 ब्रांड नहीं कर रही इस जस्ट ऐमाजोन ऑलमोस्ट एव्री ब्रांड जिसने भी अपना वो बना बैंड इन इंडिया।
Why it is band in इंडिया, white is band? if you are running the market प्लेस, you can not be as a n platform?
लॉ ऐसा क्यों है पर बहुत सारे वेद है न लोग जो करके कर.
लेते हैं लेकिन तो spirit the लॉ में सिर्फ लॉ पर अगर मैं मतलब मुझे जितना डेटा दिखता है उसको देख कर के मैं अपना बिजनेस चालू कर 2 फ्लिपकार्ड करता है उनको भी अलाउड है व करता है अलाउड ही नहीं है इंडिया में तो नहीं करते दोनों लोग इंडिया में लोग नहीं। करते। इंडिया में अलाउड नहीं है अब पीछे से क्या करते है इंडिया में नहीं करते, इंडिया में तो अलाउड ही नहीं है यह करना india me, there are amazon seller, there s, no body, amazon inफलूएnsेlर और flipcard influence seller everybody is.
Par mat नायका भी नही करती है.
Nia nica is a retailer, nica does not do market please nica is not a।
माहले खरीदता है फिर नाइका is a.
रीसेलर रीसेलर वाला फर्स्ट पाट की सेलर.
सो शी दे कैन डू, इट दे.
शुड डू, इट ऐज मार्केट प्लेस शुल.
क्या डिफरेंस है दोनो में मतलब माई पॉइंट इस एथिक्स में कहाँ डिफ्रेंस आ रहा है।
जब आप मार्केट प्लेस लगाते हो तो आपने कोई इन्वेस्टमेंट नहीं करी है मैंने कोई इन्वेस्टमेंट नहीं कर, लाने की तो.
इन्वेस्टमेंट करी है न उन्होंने कौन से लोग लाने के अमेजॉन के प्लेटफार्म पर लोग जो आते है जैसे मैं कभी उस प्लेटफार्म पर गया तो मैं तो एमेजोन ने एड करी त भी गया.
ऐसा नहीं है आप वो सामान था अमेजॉन की इस लिए गया आप एमेजोन.
ने एड करी की मेरे पास सब मिलेगा के ढूंढो तो जाके मैंने ढूंढ.
ंडियामाटनेभीएड नहीं करी तब भी लोग आते हैं क्यूँ आते हैं एसएमईज अपना प्रोडक्ट वहाँ लिस्ट किया इसलिए लोग इंडिया पर आते हैं हमने सिर्फ 1 टेक्नोलॉजी बनाई थी जिसकी वजह से एसएमएस को हमने हेल्प करी लिस्टिंग लिस्टिंग करने में हमने कभी नहीं एड किया तब भी लोग आते हैं।
1 इंसान को मतलब मोस्टली सवार इंडिया मां बिजनेसेस को हेल्प करने के लिए मतलब कस्टमर डायरेक्ट ऐसा तो नहीं है न की मेरे को 1 पैन भेज 2 तो 1 पैन नहीं खरीदते है न लोग यूजुवलीमेजोरली 1 पैन जा के अमेजॉन पे लोग खरीदते है इंडिया मार्ट पे नहीं खरीदते में 5 है मैं 500 पैन खरीद के अपने मोहल्ले में दुकान चला हूँ सो डिफरेंट बिजनेस बिजनेस सर्विंग बिजनेस ठीक है इधर बिजनेसेज सर्विंग डायरेक्ट कंज्यूमर न कंजयूमर्स और कंजूमर एमेजोन लेके आया तो अमेजोन 1 सर्विस प्रोवाइड कर रहा हूँ बिजनेस को लाखों करोड़ बिजनेस लेके आओ तुम्हारे पास नहीं है, तुम्हारे पास ऑपर्चुनिटी है तुम लाखों करोड़ो कंजूमर को डायरेक्ट बेच सकते हो। इस इन दैट पॉसिबल एड कर कर के मैं तो एमेजॉन और तब आज.
जा के शा डजंट गिव यू आप एड करके लाये आपने बहुत मेहनत करिए सब करके लाए इसका मतलब आप मेरा मिसयूज करोगे। नहीं न डजंट गिव यू दे पॉवर तो मिस्यूज माई डेटा रीड माई डेटा एंड मिस्यूज माई डेटा दैट्स द ओनली पॉइंट ठीक आप लाए इस वजह से मैं आया आपके प्लेटफार्म पर सामान बेचने लेकिन आप मेरा डेटा पढ़ कर के मिस नहीं करना है that डeजntgivyoriiटो डू इट है आपने मुझे पढ़ाया लिखाया बड़ा किया इसका मतलब आप मुझे गाली तो नहीं दोगे मेरे जीवन भर की सैलरी में से तो नही कर लोगे। simple point.
And all over the world, a lot of people do this right। दिस इस नेतिक प्रॉब्लम जो आपको लगती है समथिंग यू विल नेवर टू है.
मतलब आई हैव टू डू दैट वो दूसरी बात है, मैं यहाँ से देख कर के ऐसा न ही काटना शुरू कर दूं।
ये मुझे थोड़ा थिक्स कॉल यू टुक सिंस.
सो मच शो की। तो पहले मतलब आज भी हमारे यहाँ पे बायर सेलर का कम्युनिकेशन। आपस में इजीली किसी को एक्सेसेबल नहीं होता, पूरे इजीली मेंस की बहुत ही उठाया सीक्रेट ली, कहीं पे किसी को बायर सेलर के बीच की कम्युनिकेशन या बायर वो हम लोग ऐसा मानते हैं।
आपस की बात है, आपके लोगों की.
बात है, हमको कभी भी देखने की जरुरत पड़ती है, फॉर दी परपज ऑफ इम्प्रूविंग दी प्रोडक्ट और फ्लो नॉट, फॉर दी परपज ऑफ।
बिल्डिंग ए बिजनेस है बिल्डिंग के ब्रैंड.
जो है ब्रांड नीचे तक जो पेनिट्रेट किया हुआ है वो बहुत कम है मतलब जो टाटा नमक जैसा ब्रैंड है, डेटाल जैसा ब्रैंड है, टेलियन ब्रैंड है, ओनली ब्रांड है बाकी लोगो को फर्क नहीं पड़ता मतलब वो मार्केट है बहुत बड़ा, वो मार्केट बहुत बड़ा है बाकी लोगों को मतलब जो ये वाला ब्रांड है जिसको आप बोलते हो मतलब की मुझे पोलो जोडिन की शर्ट पहनी है, या वो बहुत छोटा सा ब्रांड है, वो भी बहुत बड़ा। मतलब इंडिया जब मैं कहता हूँ बहुत छोटा फिर भी 10 करोड़ लोगो का ब्रांड इंडिया में जब आप बोलते की बहुत छोटा है यह मार्केट तो तो 10 करोड़ का है, 10 करोड़ लोगों का, लोगों का, 2 बड़ी कंट्रीज का, यूरोप का.
बहुत छोटा मार्केट हमारा 500 हजार करोड़ का है, इंद्र है मतलब.
10 करोड़ लोगो का मार्केट तो मतलब हर चीज के लिए इंडिया में 10 10 करोड़ के अगर आप लाओ तो 14 इंडिया है 10 10 करोड़ के और 10 करोड़ से ऊपर टोटल में आई थिंक केवल 10 कंट्रियां है जो 10 करोड़ से ऊपर है और भी कम एक्चुवल में इंडिया चाइना के बाद इंडोनेशिया पाकिस्तान, ये ही लोग 10 10 करोड़ के ऊपर है, बाकी सब 5 करोड़ या उसके चाहिए। तो इफेक्टिवली जब मैं सेयिंग 10 करोड जस्ट इमाजिन 10 करोड़ का मतलब यू आर टॉकिंग copan countries in the world, in of dollars in बिलियन, डॉलर रेवेन्यू, सो, देर, न, मार्केट, फॉर, चेंजिंग, आर, यू सeingaनीचेंज, यह ऑबवियसली तो इंडिया में आलवेज दिस होल माइग्रेशन फ्रॉम नीचे जब आप बोलते हो कि ये 30 साल के लोग हैं और ये 30 साल के लोग, एक्रॉस द वैल्यू चेन है और अक्रॉस द जियोग्राफिकल सेगमेंट और डेमोग्राफिक सेगमेंट है तो इसमें ये बहुत बड़ा माइग्रेशन जिसको एस्पेरेशनल बोलते है वो हर जगह पर है। तो अगर आप देखो तो गाँव में या जहाँ पर बिल्कुल ही गरीब तपके का होगा। तो उसकी पहली एस्पेरेशन है साइकल, पहली एस्परेशन एस्परेशन रेडियो, यह खाना खाने की रोटी कपड़ा और मकान की बात कर, हा हूँ। तो पहली एस्पेरेशन है बहुत सारे लोगों के लिए पहली एस्पेरेशन है यार 1 टू विलर, बहुत सारे लोगों के लिए पहली मारुति और पी पहली 1 मिनी स्मॉल कार नीड जो पीछे बहुत दिन से चल रहा था 2020 21 के पास पास की बस अब टू विलर का मार्केट खत्म हो गया। मतलब जिनको जिनको मारुती छोटी कार लेनी थी वो सब ले चुके। अब तो केवल एस बिकेगी दिस इज नौट रॉंग पिक्चर, रॉंग पिक्चर भी इंग पेंटेड बिकाज उनकी कमाई घट रही है, या उनकी कमाई स्टेगनेंट हो गई है और इनकी कमाई बढ़ रही है। इसलिए ये वाला पीस बेच रहा है। सो इस वेरी रॉंग टू फोकस इधर। और आज यहाँ पे ज्यादा ग्रोथ है, कल वहाँ ज्यादा ग्रोथ थी। लेकिन यहाँ की ग्रोथ अभी खत्म नहीं हुई है। है प्यू क्यूँकी अगर इतनी सारी मोटर साइकिलें घूम रही हैं इंडिया में या स्कूटर घूम रही हैं तो इतनी सारी कारों की भी मार्केट कल सुबह होगी कल मतलब परसो होगी कब जब होएगी सेम है हैप्पेंड इन चाइना मतलब आप जा के देखो पहले ही साइकिल साइकिल होती थी, मतलब अगर आप सन सेवेंटीज के टाइम की कोई स्टोरी पढ़ोगे चाइना की मतलब साईकिल पे। पूरा चाइना चलता था, चाइना को मतलब साईकिल के उससे जाना जाता था। आज अमेरिका से ज्यादा कार चाइना में चलती है तो वो आई थिंक इट आप फ्लाइट के बारे में देखो मतलब संघ ये जो चाइना की 10 बड़ी सिटीज हैं उनके बीच में इतनी हवाई जहाजें हैं, मतलब जितनी भी इमेजिन भी नहीं कर सकते है। क्योकी वहा पर 1 करोड़ लोग उस मिडल वाले ब्रैकेट में हैं या सौ करोड़ लोग तो वो आई थिंक। जैसे जैसे ये नीचे से ऊपर को मोमेन्ट होगी, आप वही सेम चीज। अगर आप पेरिस में जाके देखो ज्यादा से ऊपर वाले हैं तो आपका पिरामिड कहा है? वेदर योर पैरामिड इस इनवर्टेड और वेदर योर पैरामिड इज लाइक। और हाऊ इज योर डेमोग्राफिक लुकिंग लाइक, योर डेमोग्राफिक लाइक फैट ऊपर से भी छोटी, नीचे से भी छोटी, बीच में बहुत बीच में बहुत बड़ी। अभी हमारी डेमोग्राफिक बिल्कुल परफेक्ट पैरामिड है, वो कभी कभी थोड़ी बहुत कहीं कहीं बलजिंग या कहीं कहीं सिकुड़न आ जाती है कि बीजिंग न द टॉप ऑलवेज.
लास्ट टू थ्री.
लास्ट टू थ्री यर सडनली बल्जिंग ऑन द टॉप है कि.
लोग ऊपर पैसा बहुत बढ़ रहा है.
तो उनके लिए प्रोडक्ट भी 1 को वो आएगा क्या कहते हैं, कनेक्शन है मार्केट कनेक्शन या 1 वो फिर थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा। वाटर विल फाइंड.
यू थिंक 1 कनेक्शन है कुछ आया और ऊपर से नीचे.
आ जायेंगे होता रहता। आई थिंक इंडिया में बहुत रेजिलियंस भी है और वो भी है। आज कम्पेर टू मेनी कंट्रीज इन दे वर्ड हमारे यहाँ पे सी हम बहुत चीजों में खराब है, मानता हूँ मैं नहीं हुई, मैनुफेक्चरिंग अभी तक नही हुआ पर पोलुशन कंट्रोल पर फिर भी हमारी आर बी आई बी फैल नहीं हुई हमारा एन पी सी आई भी अच्छा है हमारा मतलब रियल स्टेट फ्रॉड भी कम से कम है। मिनिमल है जो था भी बॉम्बे बम्बे में, वो भी यहाँ माफिया था दिल्ली एनसी वगैरह में तो कभी था भी नहीं। तो आई गैस lot of good things are the fdm। तो टॉक लाइक दिस आई डोंट थिंक यू हैव दिस फ्रीडम टू टॉक इन मैनी कंट्री फ्रीडम टू डू योर ओन रिलिजन फ्रीडम टू डू योर ओन थिंग। तो आई थिंक हर चीज हर जगह नहीं होती। यस यू आर राइट सम ऑफ़ द थिंग्स आर इंफ्रास्ट्रक्चर वगैरह टैक्स का सही इस्तेमाल करना, सही तरीके से टैक्स करना होना चाहिए। हो रहा है एवरी पासिंग गवर्नमेंट जैट कम्स उसमे 4 काम करने होते है, उसमे से 2 अच्छे भी निकल पड़ते है तो खराब भी निकल पड़ते हैं। सो आई थिंक.
न राइट आलसो है।
अभी राइटइनएवेरी गवर्नमेंट, नॉट दैट गम, इन दिस गवर्नमेंट और इन दैट गवर्नमेंट। तो राजीव के गवर्नमेंट में कंप्यूटर वाली बात अच्छी हुई, सी डॉट वाली बात अच्छी हुई। मनमोहन मतलब नसिमा राव की गवर्नमेंट में यह अच्छा हुआ, नाइंटी वन का रिफॉर्म अच्छा हुआ। लेकिन नाइंटी थ्री की बाबरी मस्जिद भी उसी में तोड़ी गई। तो वाजपेयी जी के जमाने में न्यूक्लियर टेस्ट हमने दोबारा किया, हमने गोल्डन वार्ड। अब आज जो हम आधार और यूपीआई बोल रहे हैं वो एक्चुली में सबसे खराब टर्म ऑफ द गवर्नमेंट जो यूपीआई का यूपीए का सेकेंड टर्म बोलते है। मनमोहन सिंह जी का जो आखिरी 2000 9 से 14 का था, उसमें उसकी नींव रखी गई। सारा काम हुआ आधार, उस समय शुरुआत हुई, एन पी सी आई, उस समय शुरुआत हुई। आज वही सो आई गेस कब किस का किया हुआ कब सही बैठता है, कब गलत बैठता है। राइट टू इनफॉर्मेशन एक्ट व 2000 4 से। उसके लिए मैक्सेस प्रेस मिला था केजरीवाल जी को तो आई गेस मोदी जी ने इतनी सारी चीजें अच्छी चालू करें। मनरेगा आज भी मनरेगा के नाम से जानते हैं। मतलब इतना बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन का सिस्टम। तो एजुकेशन शायद जब इंजीनियरिंग कॉलेज खुल रहे थे तो लोगों ने शायद पैसे लेकर के मतलब। इन्फ्लूएंसर लोगो के लिए इंजीनिरिंग कॉलेज खुलने शुरू हुए थे। लेकिन आज वही इंजीनिरिंग कॉलेज जिसकी वजह से पिछले 20 साल में इतना नहीं। तो अगर वो पर गवर्नमेंट में फंसा रहता तो इतने सारे बन ही नहीं पाते, जॉब हो ही नहीं पाती इतने सारे न्यूज चैनल जो टीवी पे पैसे लोगों को लाइसेंस दिए गए, 5 सौ टेलिविजन चैनल हो गए। हमारे यहाँ अगर वो नहीं होता तो इतना इनफॉर्मेशन डेमोक्रेसी नहीं आती सो geste लोट ऑफ़ थिंग वी have डन, वेल ड वी विल कंटिन्यू लू वेल बिकाज जो हमारी डेमोक्रेसी है, जो हमारी बेरोक्रेसी है, जो हमारी जुडिशरी है, वो सभी जगह थोड़ी बहुत पल्स होते है बट बाई लार्ज god god and we continu.
आज आप ट्वेंटी फाइव थर्टी होते, आपको कोई बिजनेस स्टार्ट करना था तो क्या करते? with all the नॉलेज दैट यू हैव द टाइम जिस tm.
थोड़ा टेक्नोलॉजी बस रहा हूँ और मुझे तो पिछले 5 साल से 10 साल से दोबारा बहुत मजा आ रहा है। बिल्कुल जब से मोबाइल टेक्नोलॉजी और आई टेक्नोलॉजी एन ऑल बैट तो मेरा काफी मन है कि यार इस वाले रेवोलूशन को मैं जरा ढंग से देखना चाहता हूँ पचीस सालों। और तो अगर मैं 25 साल का होता तो शायद इस डायरेक्शन में कुछ करता।
ऐसे कई पॉइंटेड एक्जाम्पल या बिजनेस जॉब करते.
और पिन पोइंटेड ए्ामपलतोकोईऐसे एग्जैकयाबिनेस चालू था आई डोंट थिंक आई डोंट थिंक इंडिया मेड भी चालू किया था तो मुझे अंदाजा था कि मुझे एग्जैक्ट क्या करना है तो इफ आई गो बैक तो मतलब जब मैं वहाँ से आया की मुझे कुछ तो करना है तो मुझे बस इतना ही करना था की मुझे कंप्यूटर में कुछ करना है, इंटरनेट में कुछ करना है, इंडिया में कुछ.
करना है तो आज मोबाइल पर कुछ करना है है मोबाइल न करना है.
कुछ और इंडिया मे कुछ करना है इंडिया.
थैंक यू सो मच थैंक यू थैंक यू फॉर कमिंग हर हैविंग यू.
आई होप यू गॉड वोट वाट यू.
वांट वो तो बताएं हमारे वर्स कस्टमर्स बताई थैंक यू सो मच एपिसोड एंड तक देखने के लिए अब आपको पता है आपको 3 चीजें करनी है सबसे पहले इस चैनल को सब्स्क्राइब कर लो ताकि इसी तरह हम और भी वैल्युबल गेस लाते रहे नंबर टू मुझे कमेंट्स में बताओ की इस एपिसोड में आपको क्या अच्छा लगा और और कौन से ऐसे गेस्ट हैं जो आप देखना चाहते हो हम इस एपिसोड में इस पोडकास्ट में लेके आये एंड यह एपिसोड किसी 1 इंसान के साथ जरूर शेयर करना जिसको अपनी लाइफ में इससे कुछ बेटर चेंज करने का मौका मिलेगा क्योंकि 1 कॉन्वर्जेशन कैन चेंज समवन्स लाइफ आइ। सी यू नेक्ट टाइम अंटिल देन की फिकर।
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