In this monologue, Dinesh Agarwal, CEO of IndiaMart, recounts his entrepreneurial journey, beginning with a modest 10 ft × 10 ft room where he started a small web‑development business in 1996. He explains how the advent of the internet democratized information, market access, technology and finance for Indian MSMEs, enabling a massive shift from a largely informal economy to a digital marketplace. Agarwal provides extensive statistics on IndiaMart’s current scale – over 63 million traders/manufacturers, 1.5 crore registered buyers, 55 lakh suppliers, 6 million products, and daily match‑making of 1.2‑1.5 million buyer‑supplier pairs – illustrating deep penetration in a country of 1.2 billion people. He narrates the company’s rapid growth: first‑year turnover of ₹6 lakh, second‑year ₹24 lakh, venture‑capital funding in 1999, conversion to a limited company, and the 2007 IPO that raised ₹500 crore. He also details setbacks such as the 2008 export‑revenue crash, the 2011 investor walk‑out, and the need to re‑engineer the product and business model. Despite these challenges, IndiaMart expanded to 52 offices in 52 weeks (2010) and achieved a market cap of over ₹30,000 crore post‑IPO. Throughout, Agarwal emphasizes the long‑term, life‑time commitment required for building a public company, the importance of treating employees as partners, and the view that an IPO is an entry point, not an exit, for founders. The talk ends with a call for continued support from the manufacturing community to sustain IndiaMart’s growth.
Chapters
बहुत ही इंस्पायरिंग जर्नी अमित कुमार जी मतलब कहाँ मल्टीनेशनल लोगो के अखाड़े में आप नमकीन लेकर कूद पड़े 10 बाई 10 के कमरे से और इतनी बड़ी कंपनी बनाई, ये हम सभी के लिए बहुत बड़ा इंस्प्रेशन का सोर्स है और आप जैसे तमाम मैनुफेक्चरर मिलकर हमारे मेकिंग इंडिया और डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करेंगे शायद हमारा इंडिया मार्ट का जो बिजनेस है वो भी ज्यादातर आपके जैसे मैनुफेक्चरर और मोस्टली स्मॉल मैनुफेक्चरर से मिलकर बना हुआ है थोड़ा सा मैं पहले जानकारी दे दूं इंडिया मार्ट के बारे में आज का साइज स्केल और उसके बाद मैं अपनी भी 10 बजे 10 के कमरे वाली कहानी सुनाऊंगा igevरybodokaइन हिंदी और इंग्लिश hindi is fine okay, because i come from a place called nanpara district, behrigewhicis about seventeen from nepal border in you and i only studied in hindi, media school to twelth in a sarkari school to english to tng गया मैं भी अमेरिका लेकिन आज की तारीख में करीब 63 मिलियन ट्रेडर्स मैनुफेक्चरर एमएसएमईज इंडिया में है और जो करीब 30 परसेंट के आस पास इंडिया के जीडीपी का कॉन्ट्रीब्यूशन करते है जिसमें करीब 18 परसेंट मैनुफेक्चरिंग से आता है बाकी सर्विसेज से आता है लेकिन केवल 17 18 परसेंट एस एम ही अभी इंटरनेट या ऑनलाइन किसी सुविधा का इस्तेमाल करते है दैट मींस हार्डली 10 मिलियन एसएमई जैसे हैं, 1 करोड़ एसएम जैसे हैं और वो नंबर वैसे भी पता लगता है। क्योंकि अगर आप जीएसटी रजिस्टर्ड एसएमईज की बात करें तो करीब सवा करोड़ लोग ही जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं तो जहां इंडिया में सारे पकोड़े वाले सारे चायवाले मिला लें तो 63 मिलियन एस एमीज हैं लेकिन अगर आप फॉर्मल इकॉनमी में देखें तो केवल सवा करोड़ एसएम ही जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं। इंटरनेट ने क्या किया? इंटरनेट के आने की वजह से 1 तो इंफॉर्मेशन और कम्यूनिकेशन का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है जहां लोगों के लिए इंटरटेनमेंट आया, ई कॉमर्स आया, एजुकेशन आया, वैसे ही बिजनेसेस के लिए 1 एक्सेस टू मार्केट, एक्सेस टू टेक्नोलॉजी और एक्सेस टू फिनांस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हुई। एंड दिस हैज बीन ओनली mad posible, बिकाज ऑफ़ इंटरनेट एंड बिकाज दिस मोबाइल कomp्यuter that we have an over hand फ़ोन तो यह थोड़ा सा छोटा सा काम फ़ोन का करता है लेकिन ज्यादातर यह पूरा कंप्यूटर अपने आप में 1 बहुत ही कमाल की चीज है एंड इस डिजिटल इकॉनमी की वजह से इतना डेवलपमेंट हुआ है कि पहले जो रूरल का रूरल में डेवलपमेंट हो पाता था, अर्बन बायर अर्बन सामान ही खरीद पाता था। अब आप चाहे टियर फोर्स सिटीज में है, चाहे गाँव में है, वहाँ बैठे बैठाए सामान आप मंगा सकते हैं, कहीं से भी कहीं, आप कहीं से भी कहीं सामान बेच सकते हैं यह केवल पॉसिबल हो पाया है इंटरनेट की वजह से। तब तक 1 में और स्टैटिस्टिक्स, बताता, हूँ, इंडिया, मार्ट, पे, अकेले, आज, ए, टी, थ्री, मिलियन, रजिस्टर्ड, बायर्स, है जैसे साढे 8 करोड़ के आस पास रजिस्टर्ड बायर्स हो चुके हैं और करीब 55 लाख सप्लायर्स इंडिया मार्ट पर है जो करीब 6 करोड़ प्रोडक्ट और सर्विसेज अपनी डिस्प्ले कर रहे हैं और एवरी डे एवरी डे हम करीब सवा। सवा करोड़ के आस पास मैच मेकिंग करतेहैं सवा करोड़ कह रहा हूँ, 12, 12 से पंद्रह लाख के आस पास बायर सप्लायर की मैच मेकिंग करते है और ये अगर आप थोड़ा नंबर को ध्यान से देखे तो इंडिया की पॉपुलेशन केवल केवल 1200 मिलियन की है। is base million to iska matlab one in every fifteenth indian is already using india mart in some of the other manner for buying or selling something and thats thats the kind of penetration, we have lastiarelonwe got about two hundred million visiters on or platform which is almost like fifty percent of indian internet users coming to india mart one severity year and other important thing is people thing that in be to be or in advetising business, there is no repeat bars, we have fifty five percent bars, who are coming repetedlybackon back to india mart, every ninety days, almost thirty, nine percent of our supliers, are also being throu india mart and today we have a officers across, seventy to officers across the cities all over india, my story of ten by ten room, i also started from my house only aservadanclevमें ptpडgnजमेंकघर है और वहीं के कमरे से स्टाrtकरदawhen i came in nine ninety five from us, i didnt come to create a large ipo led business or something like that i only came here to do a small business of website making and how that small business in ninety ight, ninety nine sedani started taking wings to bada business banana hai। तो आप सोचिए की नाइन्टी सिक्स में जब शुरुआत की तो पहले साल का टर्नओवर कुछ 6 लाख रुपए और अगले साल का टर्नोवर कुछ 24 लाख रुपए। लेकिन उसके तीसरे साल ही नाइनटी नाइनटी नाइन में यहां पर वेंचर कैपिटल और रीडिफ का, आई पी ओ और सी सी ने 500 करोड़ रुपए में इंडिया वर्ड को खरीदा औ और उतने ही दिन में 1 साल में हम इतने इंटेलिजेंट हो गए कि हमने प्रोपराइटरशिप फर्म से सीधे लिमिटेड कंपनी बना दी हमने का प्राइवेट लिमिटेड छोडो अभी 45 साल में तो आई पी ई करना है तो सीधे ही लिमिटेड कंपनी बना दी नाइन नाइन में और इतनी जल्दी ये भी सीख गया की शॉप भी देना होता है और ये शॉप प्लान भी बना दिया और बहुत सारे एम्प्लॉयर को साफ भी दे दिया लेकिन फॉर्चुनेटली वो बहुत काम आया आज मेरे पास करीब सौ से ज्यादा एम्प्लॉयज हैं जो मोर दैन टेन ईयर्स विद है, सो दैट हैज वर्क्ड वेरी वेल नाइन्टी नाइन में कंपनी बनाने के बाद बहुत तेजी से ग्रो किए कॉम का ब्रस्ट भी हो गया डॉट कॉम के बस्ट होने के बाद भी इंडिया मार्ट 1 सर्वाइवर के रूप में निकल आया और पहली बार किसी मैगजीन के कवर पे हूज दि मैन हू मेकिंग प्रॉफिट करके कवर स्टोरी आई बिजनेस वर्ड की टू थाउजंड वन में वी वर फ्लाइंग सेवन हमने लोन न लेकर ऑफिस की जमीन वगैरह सब कर लिया lukwodhaviट जिस दिन ऑफिस का भूमि पूजन किया और उसके अगले दिन अमेरिका में टेररिस्ट अटैक हो गया सेप्टेम्बर इलेवन का टू थाउजेंड ऑन में और हमारा अगले दिन रेवेन्यू आधा हो गया क्यूंकि हमारा ज्यादातर रेवेन्यू एक्सपोर्ट की वजह से आता था और एक्सपोर्टर्स का काफी नुकसान हुआ उसकी वजह से और उसके बाद अगले 12 साल तक काफी सन्नाटा रहा मुझे अच्छी तरह याद है की मैंने भी एम बी ए भी ज्वाइन किया था उसी समय मैं पार्ट टाइम एमबीए शाम को की मैं एम बी ए भी कर लूंगा तो वो एम बी ए भी नहीं हो सका लेकिन उसके अगले 9 महीने में शायद मेरे को एम बी ए से बहुत ज्यादा सीखने को मिला अपने बिजनेस में ही कैसे कास्ट कट करी जाए, कैसे एम्प्लॉयर को रोका जाए, कैसे फाइनेंशियल मैनेजमेंट किया जाए, कैसे नए कस्टमर बढ़ाए जाए, कैसे नया रेवेन्यू बढाया जाए तो ये पूरा नाइन नाइनटी सिक ऐसी टू थाउजन्ड वन टू थाउजन्ड टू तक का टाइम था जो कैसे 1 स्मॉल बिजनेस ड्रीम को अचानक से 1 लिमिटेड कंपनी वि आई पी ओ एन शॉप के ड्रीम में कनवर्ट कर दिया उसने खैर 2 हज़ार 2 से चीजें सुधरने लग गए और 2000 8 तक हम काफी अच्छे से आ गए हम करीब 50 करोड़ के रेवेन्यू पर भी पहुँच गए अच्छा खासा 10 1 करोड़ का प्रॉफिट भी बनाने लग गए और कुछ समय जब सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा था तब अचानक वर्ड की क्राइसिस हो गई टू थाउजेंड एट में टायर वर्ल्ड बैंड थ्रू कम्पलीट चेंज एक्सपोर्ट्स हमारे हाँ सब खत्म होने लग गए है रूपी डॉलर एक्सचेंज रेट 38 रुपए से लेकर चौवन रूपए तक फ्लेक्चुएट कर रहा था और अचानक से पूरा ड्रीम जो आईपीओ के थे जबकि उस पूरे टाइम में सिर्फ 1 कंपनी आईपीओ कर पाई थी इंटरनेट का वो था 2000 6 में नौकरी कॉम का और नौकरी कॉम हैज बीन ग्रेड कंपनी जिसको हम लोग फॉलो करते आए हैं इंटरनेट के नाम पे एंड उस समय वो कंपनी कुछ 800 करोड़ के मार्केट कैप से आईपीओ किया था आज कुछ 30 हजार करोड़ का मार्केट कैप है नौकरी डॉट कॉम का तो पंद्रह साल लगे उनको वहाँ से यहाँ तक पहुँचने में तो 2000 8 में हमारे सारे ड्रीम दोबारा से बंद हो गया की अब क्या करना है क्योंकि बिजनेस तो चल सकता है लेकिन ये बिजनेस अब आई पी ओ तो कभी नहीं जाएगा और 1 बार आपके दिमाग में आईपीओ का कीड़ा बैठ गया नाइनाइनटीनाइन में फिर वो उतरता नहीं है फिर आपको वो आई पी ओ करके ही मानना है चाहे जैसे भी हो सके न तो वो 1 जो कीड़ा है तो फिर से पूरा बिजनेस री हैश किया री डू किया और 2000 8 में पहली बार ही हमने वेंचर कैपिटल पैसा लिया इंटल कैपिटल से 50 मिलियन डॉलर के आस पास और अगेन वी स्टार्टेड टू फ्लाई अगेन स्टार्टेड एंड मुझे याद है 2010 का टाइम था हमने कहा बस अब 400 कस्टमर से 4000 कस्टमर इसी साल कर देंगे और उस साल में हमने 52 हफ्ते में 52 ऑफिस खोले व वन ऑफिस अच्छी तरह याद है। 52 हफ्ते में 52 ऑफिस ऐंड द लकवुडहैवेट वो 400 कस्टमर महीने से जो हम शुरू किए थे, मार्च 2011 में हमने 4000 कस्टमर कर डाले। लेकिन जैसे कहते हैं न कि दुख सदा रहता, नहीं तो सुख का भी अंत है। थोड़ा उल्टा हो गया in by the end of to thousand eleven it was ऐसा कोई बच्चा नहीं जिसको हमने ठगा नहीं matlab loses all around employes living us customers living us i was a fit to come to gadling like this, because i don⁇t know con hamara customer nical prega and we have to re du rehash everything i think। उस समय में हम 1 नई टर्म शीट साइन करने वाले थे, कुछ हंड्रेड मिलियन डॉलर के उसके ऊपर, और वो इन्वेस्टर भी वॉक आउट कर गया एंड दैट इज द बेस्ट थिंग that has happened to us in the टाइम बीकाज उसकी वजह से हमने जो अपना पूरा प्रोडक्ट रिहैश किया, पूरा मार्केट किया पूरी कंपनी को वापस से cla sikhaya and over the next to three years again, we found var mojo and today as the as people will say rests histry today we are listed, we listed on the four july for th july about ten days ago or stock is doing well probl one of the only few stoks which are doing well after the ips we continue to do well and we need a lot of help and support from all of you to continue doing well। i dont know what kind of gan i can give you i just have some four five lines people say there are no short cut it takes time and not it takes time, it just take life time so doing an ipo are thinking about it is not just take time is just take a entire life time and things wont happen the way you initially thought, they would evolve and you will adjust they would evolve and you would adjust employes are your partners। because ger wo ne honge to apko kuch ke ho skta and last, but not the list this is not an exit पीपल कॉल आई पी ओ एन एग्जिट एग्जिट होगा यह इन्वेस्टर्स के लिए होगा बट फाउंडर्स के लिए ये एग्जिट नहीं है ये एंट्री है और काफी ग्रूसमएंट्री है बिकाज उसके बाद क्वार्टर और क्वार्टर का डिसिप्लिन चालू होगा आई थिंक हम बात करेंगे पिछले 2 साल में कैसा रहा अमित भाई के साथ it it s not an exit सो इस लाइफटाइम गेम and it s not a short cut so it s not for ontraponorse looking for three to five year exit its not for its a rigtingyour entire life to a particular business or a particular nation or a particular cost thank you।