Golf & Health: Build a Winning Mindset with Dr. Priti Nanda Sibal | Win at Golf & Life! | Dr. Priti

In this Hindi‑language interview, Dr. Priti Nanda Sibal talks with Arun, the founder of the "India Golf" initiative, about creating a year‑round competitive platform for Indian golfers. Arun explains that his wife’s encouragement sparked the idea to give players continuous tournament opportunities so they don’t stay idle for months. He describes the perceived lack of challenges because of strong local interest, the need for loyalty and commitment (e.g., eight‑hour practice routines), and the importance of mental and physical health – meditation, detoxification, and inner‑game focus – for sustained performance and decision‑making. Dr. Priti expands on how golf can improve leadership, relationships, and overall life quality, emphasizing that the sport is not only for the elite and can be made affordable through mindset shifts. Together they discuss infrastructural gaps in India, the perception of golf as a “rich” game, and how a community‑driven platform could nurture more talent and bring Indian golfers onto the world stage.
Chapters
हेलो मिस्टर अरुण नाइस टू मीट यू थैंक यू सो मिस्टर अरुण ये जो कर रहे हो अभी अमेजिंग मैंने देखा पी सच इवेंट क्या ड्राइव की आपको ये क्रिएट करने में और ये प्लान
करने में, ऐक्चवली इसका जो है न क्ली वांट टू क्रिएट द गुड प्लेटफार्म की बच्चों को 1 अच्छा प्लेटफार्म मिलना चाहिए ताकि वो प्रोफेशनली अपने मेंटली ट्रेड
कर सके तो बना से प्लेटफार्म मिलना चाहिए। ats ग्रेट थिंग बट आपको ऐसा क्यों लगा कि प्लेटफार्म की रिक्वायरमेंट है या वाटेवर स्पोकन टू यू यू एफ बी टेलिंग मी की आपके गेम के रूल्स थोड़े अलग हैं। आपके गेम में लोगों की इनवॉल्वमेंट ज्यादा है, इंटरेस्ट ज्यादा है तो ऐक्चवली इसको
बनाने के लिए मेरी वाइफ ने मुझे मोटीवेट किया की वो बहुत ज्यादा चाहती है की मै गोल्फ खेला तो जब मैं गोल्फ खेला तो मैंने खुद एहसास किया की लोगों को मिस कार्ड न तो आप पूरे साल घर बैठते हो ओके अगर आपने प्रोफेशनली कार्ड मिस कर दिया तो पूरे साल आप घर बैठोगे आपके पास खेलने को कुछ नहीं मिलेगा, आप मेजर नहीं खेल सकते हो, आप जूनियर नहीं खेल सकते हो तो उस दिमाग में वो चीज आई की मैं ऐसा 1 प्लेटफार्म तैयार करूँ ताकि लोगो को खेलने का मौका मिले वो पूरे साल घर न बैठे एटलीस्ट उनको हर महीने 1 टूर्नामेंट खेलने को मिले जिससे की उनकी गेम इम्प्रूव हो। तो ये प्लेटफार्म बनाने का ऑब्जेक्टिव में नही है।
तो जब आप ये प्लेटफार्म बना रहे हो कोई भी नई चीज करने के लिए चैलेंज आते बट कुछ पैशन ड्राइव कर रहा होता है तो पैशन तो आपने बता दिया पर चैलेंजेस क्या है जो आप फेस कर रहे हो और हर बार उसको 11 करके क्रॉस करते जा रहे हो।
चैलेंजेस ये है की मोस्ट ऐक्चवली देखो चैलेंजेस कुछ नहीं लग रहे इस ऑपरचुनिटी नजर आ रही है मुझे कोई चैलेंज नहीं लग रहा क्योंकि सब लोग मेरे फेवर में है की जितने मोस्टली मेरे स्टूडेंट से खेल रहे हैं, मेरे फ्रेंड स यह है जहाँ मैं रहता हूँ वहाँ के ब्लड में लोगो के गाल पे तो जो बेसोया है तो बैसोया अगर है तो वो गोल्फर ही बनेगा ऑलमोस्ट इतने गोल्फर हैं हमारे पास, ठीक है हमारे इतने रिकॉर्ड है हमारे हमारे जितने बैसोहीजहैमोस्टली नेशनल इन्टरनेशनल प्लेयर बहुत सारे प्लेयर है हमारे ब्लड में गोल्फ है
परफेक्ट तो कुछ लोग हैं मेरे जैसे भी जिनके ब्लड में गोल्फ नहीं है नहीं ऐसा नहीं हमें आप क्या बोल सकते हो ताकि हम भी इनिशिएटिव ले और गोल्फ भी खेलें देखो गोल्फ आप
इसलिए खेलो अगर आपको जिंदगी से दाद
नहीं होते क्या बात है अगर आप
चाहते हो की आपकी लाइफ सुधर जाए तो आपको गोल्फ खेलने पड़ेगी ये दोनो
चीज सेम नहीं कल दिल ऐसी गोल् फर ने बोला है सही है तो बच्चे उनको आपको टिप देना चाहते हो की अगर उनको गोल्फ खेलने है और गोल्फ में अच्छा बनना है बच्चों को
तो 1 ही दूंगा लोयल्टी कमिटमेंट वो सबसे अगर आप गोल्फ खेल रहे हो और आपकी ये चीज स्ट्रोंग नहीं है तो आप अपने गेम कभी सुधर नहीं सकते तो लोयल्टी बहुत बहुत बहुत टॉप लेवल पर होनी चाहिए आप। अगर आप टूर्नामेंट खेल रहे हो अगर आप गोल्फर बनना चाहते हो तो आपके लोयल्टी बहुत अच्छी होनी चाहिए आपकी कमिटमेंट
बहुत जरूर होना चाहिए बहुत जरूर।
अगर आपने बोल दिया की 8 घंटे प्रैक्टिस करूंगा तो करूँगा 1 सेकेंड कम नहीं होना चाहिए उसे तो बच्चों के लिए तो यह मैसेज मेरे लिए तो
अभी इंडिया से कितने अच्छे गोल्फर्स आपके हिसाब से निकालते हैं या इंडिया ग्रूम करता है एंड हम क्या इसी 1 चीज या 3 चीजे कर सकते है ताकि और ज्यादा गोल्फर्स 1 लेवल पर जाकर खेले देखो।
मेरा कहना है की गोल्फर इंडिया में गोल्फ भी ओलंपिक में आ चूका है तो पहले नहीं था ओलंपिक में तो अभी हम सब को सोच बदलनी पड़ेगी हमको सोच बदलनी पड़ेगी जितने भी गोल्फ में लोग जुड़े हुए हैं चाहे वो कोच हो, प्लेयर हो या मैनेजमेंट हो या कोई भी हो। हमको बहुत ओपन नजरिए से सोचना पड़ेगा क्योंकी अगर हमारे पास एक्च्वालीगोल्फ कोर्सेज बहुत ज्यादा कम है राइट ठीक है यूएस के पास बहुत सारे गोल्फ का एरिया
बहुत ज्यादा है हर थोड़े एरिया में
1 है तो हमको थोड़ा अलग सोचना पड़ेगा। तो मेरा भारत गोल्फ को बनाने का यही था कि मैं हमेशा ये सोच रहा, गोल्फ ने मुझे बहुत कुछ दिया हमेशा आर में गोल्फ को क्या दे रहा हूँ बस मेरी सोच यही थी इसको बनाने के लिए मैं चाहता हूँ की मैं गोल्फ को कुछ दू तो इसी लिए मैंने भारत गोल्फ बनाया है और 1 छोटी सी कोशिश है कि मैं यहाँ पर 1 प्लेटफार्म बना सकूँ ताकि लोग परफॉर्म कर सके। बस मेरी रिक्वेस्ट यही है कि गोल्फ कोर्स को हमको बस कुछ अलग हट के सोचना पड़ेगा अगर हमें बहुत अच्छे
प्लेयर निकालने है तो परफेक्ट बट आपका पैशन मजेदार है जनून दिखता है एंड आम, शोर, अच्छे, अच्छे, गोल्फ, प्लेयर्स और निकालेंगे यहाँ से थैंक यू कल न मैं स्वामी रामा के सेंटर में थी वहाँ 1 लाइन मुझे बहुत बढ़िया सुनाई पड़ी स्वामी रामा की वीडियो सुनाई उन्होंने मेडिटेशन में जिसमे उन्होंने बोला लोग सोचते है इनहेल करना इम्पोटेंट है पर एक्च्वलीतोलाइफ एग्जलेशनमे सिमिलरली गोल्फर सोचते है की फोकस करना और जीतने के लिए हमारी फिजिकल हेल्थ इम्पोटेंट है बट इम्पॉर्टेंट है डी टॉक्सिन जितना भी आप हेवी मेटल वगैरह ले रहे हो अगर आपकी बॉडी उसको डी टॉक्स नहीं कर रही है तो आपके गेम में वो धार जो आप चाहते हो पूरा टाइम सस्टेन करना वो धार सस्टेंड करने के लिए आपको टेनेक्सएफेट करना पड़ रहा है। तो अगर हम जस्ट इनसाइड देख कर 1 बार अपना पता कर लेते है। how r and स्माल small tips here in theरइtकैnhelpuस बी गुड एट र गेम अगेन अगेन अगेन यर आफ्टर योर आफ्टर यर जनरल गोल्फनायऐसेगेम है जो की थोड़ी और डेज तक चलती है जो की आप क्रिकेटर के गेज में रिटायरमेंट ले लोगे एग्जैक्टली इसलिए गोल्फर्स के लिए और भी ज्यादा इम्परटेंट है वो आउटर गेम के साथ साथ अपने इनर गेम को जरुर देखे। एंड बहुत ही सिम्पल सा तरीका है तो कोई ब्लड टेस्ट नहीं है कुछ नहीं है। आपको बस 5 मिनट लगे इन्वेस्टमेंट भी कुछ नहीं है बात थिंकिंग को अगर चेंज कर लिया तो बहुत ज्यादा इम्पैक्ट पड़ सकता है। कुल डेफिनिटली तो ऐसे आपको गल्फ का बोलना हो क्लारिटी ऐसी क्यूँ लोगो को 3 चीजें पता होनी चाहिए कितना टाइम लगेगा, कितना पैसा लगेगा, कितना एफर्ट लगेगा टू बी द बेस्ट अरुण मैंने देखा बहुत सारे लोग न मन में सोचते रहते है की गोल्फ खेलेंगे पर गोल्फ कभी भी न उनकी बकेट लिस्ट में नहीं होती। न्यू के
इसमें न बहुत ंडरस्टैंडिंगहैलोगो की लोग सोचते हैं की गोल्फ बड़ा रिच गेम है क्चवलीयेरिजगेमनी है रॉयल थॉट है किसी की अगर बहुत अच्छी थार्ड होगी न वह गोल्फर खेल सकता है क्यूंकि इसको खेलने के लिए ज्यादा नहीं है आप टेन थाउन में बहुत अच्छी गोल्फ खेल सकते हो सीख सकते हो और मतलब 30 चालीजारमेंकिटआ जाती है आपकी मतलब मतलब इस वेरी अफॉर्डेबल ऐक्चवली सोच का फर्क है अगर आप बहुत अच्छा रॉयल नहीं सोच सकते और आपकी थ लेवल बहुत लीडरशिप आपकी अच्छी नहीं है तो आप गोल्फ में भी पहुँच नहीं पाओगे। इफ यू वांट टू इम्प्रूव लीडरशिप न तब आप गल्फ खेल सकते हो। ये थॉट का है मनी मनी का
लेना देना नहीं है जनरली मैंने देखा है बहुत बिजनेस जो नर्स है वो गोल्फ खेलते हैं है इस क्लास में जैसे आप आई वगैरह के लोग देखो आई टी, आई पढ़ाई कहीं ऐसी कसर नहीं छोड़ रखी है है तो बट हमारे सर्कल में गोल्फर्स कम मिलेंगे वे जो मेरे पेशेंट है जो सिर्फ बिजनेस ओनर्स है नाइटी परसेंट बिल्कुल वहाँ पर मुझे सारे गोल्फर्स मिलेंगे ये क्या फर्क
है यही फर्क है न वो इंसान अलग है, वो लीडरशिप है उसके अंदर उसकी जो डिसीजन वैल्यू है बाकी लोगो
से अलग है नहीं पर लीडरशिप तो यार बड़ी बड़ी कॉरपोरेट कैसी वगैरह की
गोल्फ खेलते हैं न सीस गोल्फ खेलते हैं वो इसीलिए खेलते हैं क्योंकि अगर आपने गोल्फ खेलने से आपका डिशीनमेकिंगबहुत अच्छी होती है गोल्फ खेलना। 1 अपने आप को इम्प्रूव करने के बाज इट 9 टीम गेम यह आप ही का गेम है जो भी गलती की, जो भी किया वो आपने किया इसमें कोई दूसरा जिम्मेदार नहीं है मुझे
लगता है गोल्फ से 2 चीजें तो डेफिनेटली आती है। 1 काम रहना किसी भी सिचुएशन में दूसरा लंबी देर तक खेलना आप बहुत सारे हैं पेशेंट बहुत जरूरी है आई थिंक वो अगर आपको स्पोर्ट्स से आ जाए तो आपकी हर स्वर ऑफ़ लाइफ में दिखता है इसलिए आपका रिलेशनशिप बेटर हो सकते हैं आपका बिजनेस बेटर हो सकता है इसके लिए आप पैदा लीडर
बेटर हो कहे काम होना चाहिए मेंटली बहुत काम होना चाहिए और उसकी फिजिक मतलब मतलब मेंटली बहुत अच्छी होनी चाहिए अगर उसको अंदर ऐसी परेशानी है मतलब कोई भी फोरएग्जामलस्टमक खराब है या कुछ भी खराब है तो बहुत ज्यादा देर तक पेशेंस नहीं रख पाए है वो अपना कहीं न कहीं इन पेशेंस हो ही जाता है वो डिसीजन में गलती कर देता है शॉर्ट्स में गलती कर देता है तो मैं तो यह कहता हूँ मेंटली उसको बहुत ज्यादा रिलैक्स होना जरूरी है तभी वो बेटर गोल्फर बन
सकता है नो डाउट परफेक्ट है जी थैंक यू।
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