Wellness We Learnt from Our Traditions By Dr. Rakesh Arya |

Dr. Rakesh Arya explains how traditional wellness practices apply to modern health: the energy in food preparation, why sunlight matters for vitamin D, and how single-tasking reduces stress. He warns that car glue fumes, bromides, and pesticides impair detoxification and trigger thyroid problems, recommending regular blood tests and 10-15 minutes of sun between 11 am and 4 pm.
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वेल्कम to this next session of food medicine an lise। तो डॉक्टर राकेश, फूड मेडिसिन एंड लाइज हमने इसलिए शुरू किया, because अभी google university and डॉ, google and whatsapp ूनिवर्सिटी जो है वो बहुत सारा डेटा दे रही है लोगों को, अब उसमें ऐसी क्या सही है, क्या गलत है, क्या फॉलो करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए? ये बहुत चैलेंज आ रहा था, तो मुझे बहुत सारे लोगो के फ़ोन आ रहे थे। डॉक्टर प्रीति प्लीज कनफर्म दिस, इस पर आपका क्या ओपिनियन है, द वन आई थॉट की मे भी। अगर हम ये चैनल पे एक्सपर्ट को बुला के उनका ओपिनियन शेयर कर पाए लोगों के साथ। to we will add value to the socity seen, thank you so, we have today with us doctor akash aria, who is a serial entuprinarand on conventional inspirational speaker and वो आप अभी नेक्ट 5 मिनट में देख लेंगे his first parity of life, आलवेज has been super fitness his well known for his energy, discipline and strait and simple talks and he has mented about hundreds of organizations and thousands of people in the last thirty four years, but still lives like a student, so welcome doctor akash we are very very happy to have you her,
थैंक यू सो, मच, थैंक यू सो,
मच, डॉक्टर प्रीति, थैंक यू सो, आज का टॉपिक है मुझे हमेशा ऐसा लगता है डॉक्टर राकेश की, मैं बहुत बेस्ट हूँ और हम सब बहुत बेस्ट चेंज जो इंडिया में पैदा हुए हैं। इंडिया हमारी कंट्री है और उसका सिम्पल सा रीजन, यह है डॉ राकेश की बीइंग, डॉक्टर बीइंग साइंस स्टूडेंट, जब मैं यंग थी तो मुझे लगता था बहुत नई चीजें ढूंढ रहे हैं। पर जैसे जैसे मैं यू नो क्सपीरियंस लेती गई, व आई फिगरआउट was की यार, ये सब तो हमारे एनसेस्टर्स को इससे ज्यादा पता था the वेrheडऑफ़सनटरमस साइंस। और इसलिए मैंने ये देखा कि आल पेशेंट only thing we need to do is we need to go back to a tradition, and we need। टू गो, बैक, टू, बेसिक्स एंड हमारी जो रोज मर्रा की, हेल्थ, इशूज, इमोशनल, हेल्थ, फिजिकल, हेल्थ स्प्रिचुअल, हेल्थ है, वो सब बढ़िया हो जाएगी। तो डॉक्टर राकेश, इसमें आपका क्या ओपिनियन है,
डॉक्टर प्लीज, थैंक यू सो, मच फॉर आस्टि दिस क्वेsटiनसबसे। पहले तो आपने कहा कि मैं जब यंग थी तो आप अभी भी यंग है थैंक यू। दूसरी बात, हमने बचपन से स्कूल में पढाया है। अर्ली टू, बेड, अर्ली टू, राइज, मेक्स, मैन, हेल्दी, वेल्दी एंड वाइज। और ये हमने स्कूल में पढ़ के वहीं पर छोड दिया। rit सो, the bigest issu, व आई हैव रियलइजeडइनमाई, क्सपीरियंस पिoपल हैव, ह्यूज नॉलेज बट डोंट, म्प्लीमेंटeक्ैक्टली सो जो जो हमने स्कूल में पढ़ा, मैं 1 बार को, ग्रांड पेरेंट्स को, या पुराने ट्रेडिशन को छोड़ देता हूँ। हमने जो स्कूल में पढ़ा, जिसकी फीस दी, जिसके लिए हमने समय लगाया, जिसके लिए एग्जाम की तैयारी की, हमने वो भी कभी पलट कर नहीं देखा कि हम उसको यूज कर ले वेरी राइट। और उसके बाद हम आज भी बहुत कुछ सीखना चाहते है। बहुत सारे लोगों ने देखा है, बहुत सारी वेबिनार्स कर रहे हैं, बहुत सारे टेलिंग्स कर रहे हैं। उसके बावजूद खड़े उसी चौड़ाई पर है जहाँ पर चारों तरफ रेड लाइट है। ग्रीन लाइट कहीं पर नहीं है
वेरी वेल सेट, तो इसमें डॉक्टर राकेश आपने बहुत खूबसूरत कहा और 2 महीने पहले मुझे याद है मुझे जर्नलिस्ट ने अप्रोच किया की आप क्या नॉलेज शेयर करना चाहेंगे लोगों के साथ? तो मैंने 1 आर्टिकल लिख के दिया उनको सेवन थिंग्स, विच वी कैन, यूज to get बेटर, helt, विच वी लर्न किंडरगार्डन स्कूल जैसे की खाना अगर शेयर करके खाते हैं, हम हैप्पी एनवायरमेंट में दोस्तों के साथ खाते हैं तो उससे जो हमें एनर्जी मिलती है जो हमारी बॉडी मेसेंजिंग लेती है। क्योंकि अब हम सबको पता है कि खाना सिर्फ खाना नहीं है, खाना हमारी बॉडी के लिए मैसेंजर है जो हमारी बॉडी के सारे फंक्शन को मेसेज देता है। की यार राइट डिरेक्शन में जाना है, कि रोग डिरेक्शन में जाना है। ट्रू तो सिम्पल सी चीज। वो याद है जब हम टिफन टेबल पर रख के शेयर करके खहते थे। करेक्ट राइट ह्यूज सुबह ब्रेकफस्ट किए बिना हमारे पैरेंट्स हमें घर से नहीं निकलने देते थे। आई स्टिल रिमेम्बर जिस दिन में ले रही होती थी। यूज टू कम रनिंग बिहाइंड मी एंड गिव मी बॉयल डेग ग्लास ऑफ़ मिल यूज टू से इसको खत्म करो तभी जा सकते हो। एग्जाम से पहले 1 बनाना खाके जाना ही होता था, क्यूँ सिम्पल का है झट से एनर्जी देगा पेपर तो उतने में खत्म ही हो। जाएगा करेक्ट तो बहुत सारी चीजें जो हम अपने बचपन से सीख सकते हैं, ब डॉक्टर राकेश हम अपने ट्रेडिशन से क्या सीख सकते हैं।
देखिये ट्रेडिशन में। मुझे आज भी याद है की हमारे को अगर आयुर्वेद पर जाए जो की हमारा सबसे पुराना 1 इंस्टीट्यूट है जहाँ से पूरी दुनिया ने सब कुछ सीखा है। चाहे वो महरिशी चरक थे, महरिशी बाग भाट थे और उसके पर काफी सारे वीडियोज भी है। बड़ी बड़ी से बेसिक चीजें थी। जैसे ट्रेडिशन में छोटी सी बात में ध्यान आती है की सब लोग चाहे ग्रामीण भूमि में या शहर में, हम जमीन पर बैठकर खाना खाते थे। मुझे अभी 1 महल में जाने का मौका मिला सिटी पैलेस में तो वहाँ पर मेरे को जो गाइड बता रहा था कि सर ये राजा के 2 तरह के डाइनिंग हॉल्स है। मैंने कहा भाई 2 तरह के क्यूँ है। बोला 1 उन लोगो के लिए था जब उनके पास ब्रिटिश या गैस्ट आते थे तो वो लोगो को टेबल पे, बैठ के खाना उनके साथ खाना होता था। लेकिन जब वो अकेले खाना खाते थे सिर्फ अपनी फैमिली के साथ तो वो जमीन में बैठकर खाना खाते थे। तो ये उनका अपना इंडिजुअलट्रेडिशनल डायनिंग हॉल था जहाँ पर सब लोग बैठते थे और बीच में उनके सर्वेंट्स उनको सर्व करते थे। टेबल से 1 छोटी सी बात है जो हम आज भी कर सकते हैं। इसमें ऐसा नहीं है की मेरे को बहुत सारी एनर्जी लगानी पड़ेगी, सा इन्वेस्टमेंट करना पड़ेगा, बल्कि इन्वेस्टमेंट कम करना पड़ेगा।
बिल्कुल ठीक बात है, आपकी बिल्कुल ठीक बात।
ये छोटी छोटी ऐसी ट्रेडिशन है जो हम यू ट्यूब से ये तो सीखते हैं की मैं चने की दाल का हलवा कैसे बनाऊं। मैं गिटार बजाना कैसे सीखूं। अगर मैं यू ट्यूब पर जाकर ये देखो की ऐसी कौन सी चीजें हैं जहाँ ऐसी मेरी हेल्थ ठीक रहेगी। इसमे काफी सारे लोगों को मैं अवेरनेस में बताता हूँ की आपको डेली वर्कआउट करना चाहिए। तो लोगों को आजकल मॉडरनलानबेसमें वर्क आउट का मतलब जिम समझ आता है। वो कहते हैं सर वो जिम बंद था, सिर उस दिन बारिश हो रही थी, मैंने कहा और कोई बहाना। इसके अलावा जिम बंद था, बारिश हो रही थी और कुछ मैंने कहा यू ट्यूब पे, कम से कम सौ वीडियोज हैं जहाँ पर आप जाकर देख सकते हैं। हाऊ टू मेक योर सिक्स पैक्स, विदाउट गोइंग तो जिम
बिल्कुल सही है। और पहले तो घर के काम करके सिक्स पैक बन जाती थी। करेक्ट आई थिंक करोना टाइम्स में सबने कुछ तो रिलाइज किया है की घर का काम कोई ईजी नहीं है। जैसे वन ऑफ़ में पेशेंट्स कॉल्ड, मी से, डॉक्टर प्रीति, पोचा, रोज मार लो न तो कुछ और करने की जरुरत ही नहीं है। झाड़ू में आगे चलना पड़ता है, पोचे में पीछे चलना पड़ता है। करेक्ट राइट तो आपका लेफ्ट ब्रेन एंड राइट ब्रेन दोनो एक्टिवेट हो जाता है।
करेक्ट यस एंड।
आपने बहुत खूब का डॉक्टर राकेश। तो आपने देखा होगा रतन टाटा बहुत पॉपुलर है इस चीज के लिए की वो कहते है की वो हाथ से खाना खाते हैं, जहाँ पे भी खा पाए ईवन जब अपने रेस्तरां वगैरह में भी जाते हैं और सर्कल अलाव करता है, हाथ से खाते हैं। क्यों? क्योंकि हम सबको पता है कि हमारी उंगलियों के आगे जो नर्वस होती है वो खाने को एनर्जाइज कर देती है। करेक्ट राइट तो बात उसको फॉलो करना नॉलेज से कुछ नहीं होता, फॉलो करना बहुत इम्पार्टेंट है और जो आपने बोला अभी मैं डॉक्टर राकेश क्या करने लग गयी हूँ। अब अगर मैं डायनिंग टेबल पर भी बैठी हूँ तो मैं चेयर पर आल्तीपाल्तीमारके बैठ जाती हूँ। वंडरफुल अब क्यूँ क्यूंकी जमीन पर बैठकर खान खाने का 1 बहुत बड़ा रीजन यह था की जब हम आल्ती पालती मार के बैठे हैं खाने के लिए तो जो ब्लड फ्लो है वो हमारे स्टमक पर ज्यादा रहता है, लेग्स पे नहीं जाना पड़ता। बहुत एंड यहाँ पर डायजेशन हो रही होती है तो हमारा जो खाना है वो बहुत बढ़िया से हजम हो जाता है। तो दैट इज वाट आई, स्टार्टेड डूइंग, मैं झट से आलती पालती मार लेती हूँ। मैंने काफी लोग देखे हैं जो ये कर लेते हैं, पर मुझे इतने साल लग गए ये करने में तो आम शोर ये जर्नी है और हमारे व्यूवर्स भी सोचेंगे ट्राई करेंगे और कुछ न कुछ जरूर लेंगे। डॉक्टर राकेश अभी मुझे ख्याल आ रहा है की हम सबके घर में न कोई न कोई ऐसी डिश होती है जो हमारी दादी ने मम्मी को सिखाई होती है। मम्मी हमें सिखाती है या हमें बहुत टेस्टी लगती है। कोई ऐसी ट्रेडिशनल डिश जो आपको लगता है बहुत हेल्दी है, आपका फेवरेट है और आप शेयर करना चाहते हैं।
वीवर्स के साथ बिल्कुल बिल्कुल शेयर करना चाहूँगा। और ये डिश हमारे घर में 12 महीने तैयार होती है इसे कहते हैं हरे धनिए की चटनी और हरे धनिए की चटनी। आज कल हम लोग मिक्सी में पीस लेते हैं, कई दिन फ्रिज में खाते हैं, पहले वो सिल के ऊपर ऐसे पीसी जाती थी, वो तो उससे आपकी बॉडी भी फिट रहती थी, आपके बाइसेप ट्राइस फिट रहते थे और आप चटनी भी ताजा खा पा पाते थे। और वो चटनी आपके लिए 1 सप्लीमेंट है। वो आप ताजा हरी सब्जी खा रहे हो उसके साथ जो मसाले जा रहे हैं वो सारे डायजेस्टिव है जो आप दाल सब्जी खा रहे हो उसको डाइजेस्ट करने में फायदा करती है और बिल्कुल भी महंगी नहीं है इसमें आपको कुछ बहुत खर्चा नहीं करना, न घी का तड़का लगाना है, न इसको आंच को मंदा या तेज करना है सिर्फ आपने छिल लोडे के ऊपर वो चटनी पीसनी है अपने साधाना मसाले डालो उसमें अदरक नीबू टमाटर लस्सन वो सब डाल के इसे गुड डायजेस्टीव पेश। आजकल मैं कहीं पढ़ रहा था, लोग टमाटर नहीं खायेंगे जो की 60 रुपए, 40 रुपए जो भी भाग है लेकिन 400 रूपए किलो की सौस खाएंगे जिसके अन्दर बहुत सारे प्रिजेटिसपड़े होते है। तो हमारे पिता जी कहा करते थे की महिलाएं और लेडी की वो बहुत सारे फेसपलायगीपपिते का खीरे का, तो वो कहते थे कि देवी जी इसको खा लो चेहरे पर लगाने की जरुरत नहीं पड़ेगी, आप अगर पपीता खा लोगी, यह खीर खा लोगी तो आपको चेहरे पर लगाने की भगवान ने वैसे ही खूबसूरत बनाया है। तो जैसे कहते है क्यूँकी मैं वैदिक परिवार से आता हूँ और शुरू से भजन तेश मैंने सुने हैं। तो वो कहते है की वो स्त्री खूबसूरत है, तो किसी उपदेशक में बड़ा का स्त्री तो खूबसूरत ही होती है, जन्म से चालक कहा है, कोई कम खूबसूरत होती है कोई ज्यादा खूबसूरत। अब वो उसके हाथ में है की वो कैसे खाती है, क्यूँकि जैसा खाएंगे वैसा बनेगा मन ये हमने बचपन से पढ़ा है। फिर बात वहीं पर आती है की हम इधर से सुनते है और इधर से बता देते है, चलिए ये तो
आपने बहुत खूब कार डॉक्टर राकेश, आपने मेरा न 1 टू डू लिस्ट कम करा दिया क्योंकि मैंने आज तक चेहरे पर कुछ लगाया नहीं है, तो मैं सोचती ही रह जाती हूँ यार सब करते हैं मैं भी करूँ कभी, पर अब मुझे जरुरत नहीं है, मैंने हटा दिया अब अपने टू डू लिस्ट से है क्यूँकी मैं डेफिनेटली बिलीव करती हूँ की अगर आपका अन्दर आप खाना अच्छा खा रहे हैं, बॉडी हेल्दी है तो आपका चेहरा चमकता दमकता रहता है, आपके बाल अच्छे रहते हैं, आपकी एनर्जी अच्छी होती है और मैंने देखा है की बहुत इम्पोर्टेंट है ये की हमारी एनर्जी क्या है क्यूंकि हम दोस्ती एनर्जी से बनाते हैं, हम अपना एनवायरमेंट अपनी एनर्जी से बनाते हैं और आप देखेंगे लाइफ में न आपकी जैसी एनर्जी आपको वैसे लोग मिलेंगे, आप पॉजिटिव है, आपको पॉजिटिव लोग, मिलेंगे नेगेटिव है, आपको नेगेटिव लोग मिलेंगे तो इट्स एन अमेजिंग वर्ल्ड, इस एन, अमेजिंग वर्ल्ड और मैं। 1 और बात यहाँ कहना चाहूंगी डॉक्टर राकेश जो आपने बोला न की अब हम मिक्सी में चटनी बनाते हैं, मैं ने पूरा घूम घाम कर वो सेल कुटी और बड़ा वाला वो खरीद कर लाई जो की मैं घर शिफ्ट किया तो वो गुम हो गया और मैं बहुत मिस कर रही हूँ उसको दोबारा लाना है क्यूँ मिस कर रही हूँ क्यूँकि साइंस कहती है की जब हम मिक्सी में पीटते हैं चटनी को तो उसका मॉलिकूलर स्ट्रक्चर अलग तरह से चेंज होता है, दान जब हम उसमे पीटते हैं एंड उसका भी फर्क पड़ता है बहुत ज्यादा नहीं चटनी न खाने से बेटर है, मिक्सी में पीस कर ही खा ले। आरोप है दिस इस इवेन बेटर दूसरी बात क्योंकि चटनी में या तो हम आमला या कच्ची अम्बी या नींबू और हरी मिर्च डालते हैं तो वो विटमिन सी का भी बहुत बेहतरीन सोर्स है और अब तो आप स्टडीज भी देख रहे हैं एवं हॉस्पिटल्स में लोगों ने हाई डोज विटामिन सी देना शुरू कर दिया है कोविद पेशेंट्स को आज ही 1 स्टडी आई है की मुंबई में बहुत सारे लोग वेंटिलेटर पर मर रहे थे अच्छा तो अब हॉस्पिटल में उन्होंने आई वी विटामिन सी और जिंक ये देना शुरू कर दिया है और डेथ रेट एट प्वाइंट सेवन परसेंट से लेकर टू प्वाइंट नाइन परसेंट आ गया है। अमेजिंग येस सो इमैजिन ये सब कुछ हम खाने से ले सकते हैं और हमारे ट्रेडिशन में सिम्पल सिम्पल चीजें हैं जो हम कर सकते हैं। डॉक्टर राकेश आप ने 1 और चीज बोल दी। अभी जो मुझे बहुत इंटरव्यू कर रही है की मैं आपसे और पूछूँ की आप ट्रेडिशनल घर से आते हैं, एंड प्रेयर का बहुत बड़ा रोल रहा है बचपन से आपकी लाइफ में जी क्या आपको इस श्लोक मीनिंग के साथ शेयर करना चाहेंगे व्यूअर से जो कि वो खाने से पहले बोल सके क्योंकि मैं जितना ट्रेडिशन में बिलीव करती हूँ। मैंने ये रिलाइज किया है कि जो पहले हम पानी का अर्क देते थे प्लेट के आस पास हाथ जोड़ते थे उसका पर्पस था और पर्पस ये था डॉक्टर राकेश की अगर हम स्ट्रेस में खाना खाते है तो खाना डाइजेस्ट नहीं कर पाते है क्योंकि बॉडी की लिमिटेड एनर्जी है अगर आपके पास 1 कप पानी है और 3 जनों ने पीना है तो आपको कितना मिलेगा वन थर्ड और अगर आपको प्यास पूरे कप की लगी है तो आप प्यास से ही रह जाएंगे। ट्रू सेम चीज होती है जब हम स्ट्रेस में खाना खाने बैठ तो जाते हैं पर मिलता न थर्डी चाहे पेट भर जाता है पर न्यूट्रीशन नहीं ले पाते हमारे सेल्फ तो अगर हम पहले कुछ प्रे कर लेते हैं अपने आप को पैरो सिम्पेथेटिक सिस्टम को एक्टिवेट कर लेते हैं तो डायजेशन बहुत ही बेहतरीन होती है जी, तो इसपर आप कुछ बताना चाहेंगे कैसे कर सकते हैं, आप क्या करते हैं?
देखिये इसमें रोकटरपीजीदो बातें हैं। 1 तो हमारे वेदों में मंत्र भी होता है, खाना खाने से पहले वो हम मंत्र पढ़ सकते हैं, लेकिन वो मंत्र गुड संस्कृत हो जाएगा। तो उसमें समय लगेगा एक्सप्लेन करने में सिम्प्लीफाई करने के लिए 1 बार मैं ये शिवानी सिस्टर ब्रह्म कुमारी की बिल्कुल और वो 1 बार बता रही थी, वो थोड़ा सरल रहेगा ताकि हर 1 को समझाने में और समझने में सानी रहे। तो मैं उसको यहाँ बताना चाहूँगा। आपको इस तरह बता रही थी की जब हम जैसे आपने बताया बहुत ही खूबसूरत तरीके से की खाना खाते हुए हमारा मन प्रसन्न होना चाहिए, लेकिन इससे पहले 1 स्टेप और है की खाना बनाने वाले का मन भी प्रसन्न होना चाहिए। बहुत जिसने खाना बनाया तो वो सिस्टर शिवानी बता रही थी की आपके किचन में कई बार मैंने देखा है की लेडीज गुस्से में किसी वजह से बहुत सारे कारण हो सकते हैं, उसमें कोई गलत बात नहीं है, या कान पर से मोबाइल लगा हुआ है, वो ऐसे खाना बना रहे होते हैं या कहीं किसी से गुस्सा हुआ है। 1 बार में 3 काम करने पड़ गए, किसी ने 2 बार आवाज दे दी तो वो कहती है सिस्टर शिवानी के आपके जो भजन चलने चाहिए उस समय जब खाना बन रहा हो, जहाँ पर खाना बन रहा हो, इसीलिए जो हम किचन में खाना बनाते हैं, वो जो होटल में खाना खाते हैं, वो और जो मंदिर का बना हुआ खाना खाते हैं, वो तीनों में अलग अलग प्रक्रिया है, अलग अलग फर्क है, खाना वही है उसके मूल भूत जो उसके इनग्रीडेंट से वही है। खाने को जब मंदिर में खाते हैं तो उसे लंगर कहते हैं, प्रसाद कहते है, उसका स्वाद भी अलग है क्योंकि वो उस आत्मा से, उस प्रेम से, उस वातावरण में बनाया गया तो आदमी को मजा आता है उसका ऐसे जब खाने पर आते है। तो अब मैने कहा की चलो मेरे हाथ में ये तो नहीं है की मेरी मदर ने, मेरी वाइफ ने किस मूड से खाना बनाया, उन्होंने शायद बनाया, 1 घंटे पहले, मुझे तो पता नहीं वो किस मूड में थी, तो अब खाना मेरे पास आ गया ना बैटन हैज कम टू मी तो मैं क्या कर सकता हूँ की उस खाने को 1 बार देखूं, उस खाने को देखने के बाद उस खाने को जी और हाथ जोड़ के मैं उसमें अपनी पॉजिटिव स्टेंट भेजूं की हे भगवान मैं ये जो खाना खाने खाने जा रहा हूँ ये खाना मेरे शरीर को पूरी तरह से सुरक्षित हो, मेरे शरीर को बल प्रदान करे, मेरे शरीर को बुद्धि प्रदान करे और ये खाना मेरे अन्दर पॉजिटिविटी दे। और ये कहने के बाद जब खाना खाते है तो उसमे पॉजिटिविटी चली जाती है। और इसका सिस्टर शिवानी ने 1 उदाहरण दिया था की आप पानी में 1 पत्थर फेंकिए और पत्थर फेंकते हुए कुछ गाली दीजिए और फिर उस पानी को पीजिए तो आपको टेस्ट दिखेगा कुछ भी, फिर आप 1 पत्थर फेंके, उस समय कुछ मंत्र बोलिए या कुछ मुस्कराइए अच्छी बात कीजिए, फिर वो पानी को पीजिए तो उसका टेस्ट डिफरेंट होगा। तो जब पानी में आप यह करते हुए अंतर पा सकते हैं तो खाना खाते हुए अगर आपने पॉजिटिविटी दे दी, उसको भावना दे दी तो उसका असर पॉजिटिव होगा अगर बेशक वो किसी ने बनाते हुए, किसी वजह से जिसको वो नहीं बच सकते थे, गुस्से से कर दिया हो। 1 बात मैं यहाँ बिना पूछे कहना चाहूँगा की और परमिशन की जब हम खाना खाते हैं तो हमारा कई बार टीवी देख रहे होते हैं, कई बार धान का ही होता है, कई बार उधर देख रहे होते हैं। तो मैं 1 सेंट को सुन रहा था, साधु को सुन रहा था और उसने बहुत अच्छा उदाहरण दिया कि कई बार हम चश्मा रख के भूल जाते है की यार चश्मा नहीं मिल रहा है, कहाँ रखा है मेरा चश्मा उसकी वजह क्या है की जब आपने चश्मा जहाँ रखा उस समय आप चश्मे की तरफ नहीं देख रहे थे, आप कहीं और देख रहे थे आपने भागते भागते चश्मा रखना तो मेरी आँख में जो पिक्चराइजेशन कैद हुई, जो कैमरे में जो पिक्चर कैद हुई वो चश्मे की कैद हुई नहीं हुई वो कहीं और ही भागने की हो गयी, तो आपके कैमरे में आपकी पिक्चर्स में आपकी ममोरीजमेंवो चश्मा है ही नहीं इसलिए आप ढूंढ रहे हैं इसलिए जब खाना खा रहे हैं तो मैंने अपना अभ्यास किया है की मैं खाने को देखता हूँ, खाने के बारे में सोचता हूँ और खाने को एन्जॉय करता हूँ। मेरी टेबल पर मैं पिछले 25 साल में नौकरी भी की है, अपना बिजनेस भी कर रहा हूँ। तो मेरे बॉसिज जानते थे की राकेश आर्य से खाना खाते हुए बात नहीं कर सकते,
सो वन्डरफुल डॉक्टर राकेश बिकज में इसमें थरली बिलीव करती हूँ और जो आपने पानी की बात बोली इस पर तो बहुत स्टडीज भी हो गई है। अब जो कि बताती है की अगर आप पानी के ग्लास को पॉजिटिव एनर्जी 2 तो उसका स्ट्रक्चर चेंज हो जाता
है
और वो आपको ऑवियसली फिर ज्यादा एनर्जी देता है और खाने की ऑफकोर्स आप देखो आपकी मदर सेम रेसिपी बनाएं, आपकी वाइफ सेम रेसिपी बनाए, टेस्ट अलग होता है ट्रू राइट क्यों क्योंकि दोनो की एनर्जी अलग है सेम रेसिपी में भी टेस्ट लग होगा क्योंकि मैं इसे कहती हूँ प्राणा अगर आप ट्रेडिशन में देखे तो ये बोला गया है कि खाने का प्राणा बहुत जरूरी है प्राणा इस एनर्जी इस लव, इस कम्पैशन तो आप इतनी महंगी सब्जी लायें और फिर आप उसको कम्पैशन से न बनाए या टीवी के सामने बैठ कर खाए तो वो महंगी सब्जी लाने का भी कोई प्वाइंट नहीं है सो वेरी वेल सेट आई रैली लाइट एंड डॉक्टर राकेश। इसके साथ ही मैं आपसे पूछना चाहूंगी कि आप व्यूअर्स को कोई मेसेज देना चाहते हैं आज के टाइम के लिए की वो कैसे हेल्दी हैप्पी और मस्टर तंदुरुस्त रह सकते हैं
इसमें डॉक्टर पीजी 2 बातें कहूँगा है 1 तो आपके सवाल का जवाब दूंगा और 1 बिना सवाल का जवाब दे रहा हूँ। लेकिन लोगो को काम आएगा और मुझे उमीद है की आप इस बात को मानेंगे बिल्कुल। आजकल चाहे मौसम सर्दी हो या गर्मी मैंने डॉक्टर को देखा है वो अक्सर विटामिन डी की गोली जरूर देते हैं ताकि आपको दिक्कत न हो, आपकी हड्डियों को दिक्कत न हो जबकि ये विटामिन डी नेचर में एम्पल एम्पल क्वांटिटी में मतलब प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। मैं गर्मी हो या सर्दी जिसे कहते है है की धूप का स्नान जरूर करता हूँ। मतलब अगर पूरे दिन एसी में रहने मुझे रहना है तो मैं सुबह उगते हुए सूरज से या दिन में खाना खाने के बाद धूप में 1 बार चक्कर लगाना तो विटामिन डी लेना बहुत जरूरी है और वो डेली ले। ईवन लोग सर्दियों में भी लोग कम्बल में, रजाई में या अपने हीटर चला कर बैठेंगे। मैं गाड़ी में कम से कम 2 घंटे बैठ के ऑफिस वही चलाता हूँ, धूप में गाड़ी खड़ी करता हूँ, कोई डिस्ट्रक्शन नहीं है, मोबाइल का सिग्नल पूरा है, वहाँ से ऑफिस चलाता हूँ और वहीं पर खाना खा के आराम करता हूँ। तो विटामिन डी हमारी बॉडी के लिए नेचुरल ली अवेलेबल है, वो लेना बहुत जरूरी है ये। मैंने उस सवाल के बारे में कहा तो आपने पूछा नहीं था, अभी तो आपने कहा की 20 को क्या कहना चाहेंगे। तो मैंने 1 बार पहले टीवी इंटरव्यू में किसी ने पूछा था, तब मैंने जवाब दिया था। आज मुझे याद आ रहा है की अगर आप जिंदगी में हमेशा खुश रहना चाहते हो तो जहाँ आपकी बॉडी है, जहाँ आपका शरीर है वही अपना दिमाग रखे। अक्सर लोग क्या करते है की बॉडी कहीं है और दिमाग कहीं और है तो आपको हमेशा ही परेशानी होगी। तो जहाँ मैं आपके साथ हूँ, डॉक्टर प्रीती, मैं केवल आपके साथ हूँ, मैं कोई घड़ी नहीं देख रहा हूँ, मैं कुछ यही सोच रहा हूँ की पता ही डॉक्टर प्रीती क्या पूछेंगी या कितनी देर लगाएगी। आम टोटल ली एंजाइन सेशन भी डॉक्टर
प्रीति परफेक्ट है जी और मैं इसको अपनी लाइफ में कहती हूँ, स्लो डाउन या मल्टी टास्किंग छोड़ दे। पता नहीं बचपन में ऐसा समझ में आने लगा की मल्टी टास्किंग करना, मतलब सुपर वुमन होने के कम्पेरिजन में है। तो शुरू हो गए करना, पर जब उसके रिजल्ट देखे तो रिलाइज हुआ की मल्टी टास्किंग नहीं प्लानिंग। इम्पॉर्टेंट है आप 1 काम को 3 काम 1 साथ करेंगे और 1 काम को 1 टाइम पर करेंगे। आपके काम तीनों खत्म होंगे और क्वालिटी बेटर वहाँ आएगी जहाँ पर आप 1 काम 1 टाइम पर कर रहे हैं तो आपने बहुत ही खूब का डॉक्टर राकेश में बस 1 चीज बताना चाहूंगी। डॉक्टर राकेश जो में अपनी प्रैक्टिस में देखती हूँ और आजकल बहुत इम्परटेंट है। वो ये की विटामिन डी आजकल सप्लीमेंट लेना पड़ रहा है, जैसे मैं भी ले रही हूँ उसका सिम्पल रीजन। ये है डॉक्टर राकेश की मोस्ट ऑफ र वेजिटेरियन वेजिटेरियन फूड में सनलाइट के साथ सिर्फ माशरूम सोर्स है। विटमिन डी का जी सनलाइट जनरली। अब जो स्टडीज आ रही है कहते हैं 11 से 4 के बीच में जो धूप लेते हैं उससे विटामिन डी बनता है एंड यू हैव टू टेक इट फॉर a लॉन्ग ड्यूरेशन 10 15 मिनट लेके बात नहीं बनती सेकेंड क्या है क्यूंकि हमारी हेल्थ खराब होती जा रही है। डॉक्टर राकेश। तो हमारी बॉडी विटमिन डी सिमुलेट नहीं कर पाती है। आजकल आप देखेंगे यंग यंग बच्चों का विटामिन डी 35 आ रहा है जबकि हम फंक्शनल मेडिसिन में जो प्रिवेंटिव मेडिसिन है 70 पे रखते हैं विटमिन डी सेवेंटी क्योंकि विटमिन डी ना 1 विटमिन नहीं है it s a प्रो hारmuनएडइटहैज बीन लिंक तो सो मेनी कैंसर आलसो इंसुलिन रेजिस्टेंस योर एनर्जी योर स्ट्रेस सो मेरा जो नजरिया है उसमें देखने का कोई प्रॉब्लम नहीं है आप साल में 1 बार अपने ब्लड टेस्ट करवाते हैं। आप देखिये आपका विटमिन डी कितना है कम है सप्लीमेंटेशन ले लीजिये 50 और 70 के बीच में है जो भी आप कर रहे हैं सही कर रहे हैं उसको करते रहिए सेकंड चीज यहाँ पर यह भी लोगो के लिए बहुत जरुरी है जानने के लिए स्पेशली वुमन एंड स्पेशली जो हापोटहायराइटपेशेंटस है यह कुछ। अगर आप गाडी में रह कर धूप लेते हैं तो गाड़ी में ग्लू होता है वो ग्लू ब्रोमाइड रिलीज करता है धूप में हमारे जो आयोडीन के रिसेप्टर्स होते हैं वो ब्रोमाइड से रिप्लेस हो जाते हैं और हमें हाइपोथायरेडिजम आजकल आप देखेंगे डॉक्टर राकेश हर 2 में से 1 लेडी को हापोथायरेडिजम जी लotऑfmanआlसोhavिट दिस इज वन बिग रीजन की हम गाड़ी धूप में पाक कर देते है और जाके उसमे बैठ जाते हैं वो जो फ्यूमसआतीहैवोब्रोमाइड रिच होती है।
ओके।
तो इसलिए अभी क्या है न बिकाज ऑफ़ एयर पलूशन बिकॉज ऑफ पेस्टीसाइड बिकाज बहुत स्ट्रेस स्कूल जिंदगी जीते हैं तो हमारी बॉडी के डिटॉक्सिफिकेशन पोटेंशियल उतना ज्यादा नहीं है। डॉक्टर राकेश जितना पहले हुआ करता था
राइट।
तो ये ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि जो रबर होता है न गाड़ियों में लगा हुआ ग्लू से जी, वो टॉक्सिक फ्यूम्स निकालता है तो 1 मेरा रिक्वेस्ट से लोगों से कि गाड़ी को कभी धूप में पार्क मत करें अगर धूप में पार्क करें तो उसके शीशे खोलकर 5 मिनट बाहर रह के उसके फ्यूम्स निकालने दे फिर बैठे गाड़ी में ओके राइट एंड थर्ड गाड़ी में जो भी आप आर्टिफिशियल चीजें यूज करते हैं राइट वो भी सोच के यूज करे। बिकाज जब आप धूप में पाक कर रहे हैं तो वो सब कुछ टॉक्सिक एनवायरनमेंट क्रिएट कर रहा है जिससे आपकी बॉडी में हायपोथायरेटिजम ईस्टजनडोमिनं्स कैंसर जैसी प्रॉबबिलिटी चीजें होने की है टेक्स यर्स। और हम कभी कनेक्ट नहीं करते हैं। और आपने ये बात बोली तो मुझे मौका मिल गया। अदरवाइज आई थिंक मैंने आज तक बहुत सेशन्स किए हैं, बहुत इंटरव्यूज दिए हैं पर ये बात मैं कभी शेयर नहीं कर पाई हूँ। लोगों से सो आई रल्ली वान टू थैंक यू डॉक्टर राकेश की यू सेड थॉट लेट मी शेयर दिस बिकाज ये बहुत सरे व्यूअर्स के लिए इम्पोर्टेंट होगा क्यूँकि जब आप धूप लेते होंगे न डॉक्टर राकेश, आप खिड़की खोल के लेते होंगे करेक्ट राइट, बट बहुत सारे व्यूअर्स खिड़की बंद करके लेने लग जायेंगे और अभी भी वो गर्मी में गाड़ी खड़ी करते होंगे, न जाते ही बैठ जाते होंगे, एसी चला लेते होंगे। वो सारी एयर जो धूप की है ब्रोमाइड भरी कार्सिनोजन बड़ी वो सर्कुलेट करके उनके अन्दर चली जाती है। सो आई थॉट आपने जो बताया है मैं उसको 1 स्टेप आगे लेकर शेयर करूँ। बिकज ये बहुत इम्पोर्टेंट हो गया हमारे लिए वंडरफुल वन्डरफुल थैंक यू डॉक्टर राकेश। and it was a प्लेजर टू हैव यू यू आर वेरी कनविंसिंग पर्सनैलिटी एंड आई एम शोर आपने जो भी बोला है लोग उसको ध्यान से सुने होंगे। एंड अपनी लाइफ में अगर 1 भी चीज को इम्प्लीमेंट कर पाए तो आपका और हमारा टाइम वेल इनवेस्टेड रहा येस,
येस थैंक डॉक्टर प्रीति थैंक्स फॉर इन वाइटिंग, मेहेर थैंक फ़ॉर इंट्रोड्यूसिंग टू पीपल और जो भी मेरी अवैरनेस है मेरा एक्सपीरियंस है मैंने आपके साथ शेयर किया वी विल स्टेटन यस थैंक यू
बाई।
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