A spoken lecture by Gurudev on the nature of reality from the 36 tattvas (elements) culminating in the Shiva tattva, explaining why Shiva is called Mahakaal (lord beyond and of time). The speaker connects this metaphysics to meditation practice: the Mahakaal jyoti (inner light) is experienced in the yogi's heart, and deep meditation reveals a timeless depth of the present that transcends past/future. Examples (dreaming, happiness/sadness, losing track of time) illustrate how ordinary time perception differs from the timeless awareness accessed in dhyana.
Chapters
पृथ्वी से लेके। शिव तत्व तक 36 तत्व है। पहला पृथ्वी तत्व, फिर जल, फिरंगनी फिर वायु आकाश। इस तरह से फिर मन बुद्धि चित्त हंकार। इस तरह से गिनते जाते है इस अस्तित्व को। आखिरी में, शिव तत्व पर आके टिकते हैं। और ये आखिरी शिवतत्व सब तत्व में व्याप्त है। जैसे आकाश में ही तो सब कुछ है। जल भी आकाश में होता है, पृथ्वी भी आकाश में है, अग्नि भी आकाश में आकाश के परे कुछ नहीं है। इसलिए शिव को चिदाकाश रूपम शिव शिव कैसे हैं। आकाश जैसे उससे बचने का कोई तरीका ही नहीं है। शिव से कोई कभी अलग हो ही नहीं सकता। क्यों वो सौ्रव्यापिहै और उनसे कोई छुपा नहीं सकता। वो सर्वज्ञ है। फिर काल के अधीन है। बाकी सब मगर शिव काल के परे हैं, काल के अधिपति। तो इस लिए शिव को महाकाल कहा गया। काल के परे भी हैं, मगर महा, काल भी है। कालातीत होकर के महाकाल यह बड़ा आभास सा लगता है। जो कालातीत हैं, वो कैसे काल हो सकते हैं? यही तो बात हा हो सकते हैं। कालातीत भी है, वो महाकाल भी है। और महाकाल कैसे हैं? ज्योति रूप में हैं। और वो ज्योति कहा योगियों के हृदय में है, वहीं महाकाल की ज्योति। तो ध्यानस्थ हो कर के अपने हृदय में, ज्योति के रूप में भगवान है। ऐसा करना है, ऐसे धारणा करना है। और उस ऊर्जा को अनुभव करना है। यही ध्यान है। महाकाल का ध्यान यही है। नहीं। तो हर चीज, वर्तमान, भूत और भविष्य में होता है। भविष्य ये 3 रूप से हम देखते हैं। न। जो बीत गया, वो उसको कहते हैं भूतकाल। तो होवा, अभी, हुवा नहीं होने वाला है। वो भविष्य। अब जो है, सो, वर्तमान हैं। ये तीनों काल हर चीज को बदलती है। मगर आत्मा को नहीं छू सकती है। तो इसके परे जो यह जागृत स्वप्न, सुषुप्ति से परे जो तुर्य स्थिति है, मने ध्यान की अवस्था है, वहाँ पर काल का अनुभव नहीं होता। इसलिए देखो आप जब ध्यान करते, आपको लगता ही नहीं है, समय का पता ही नहीं चलता। 1 जब आप सपनों में खो जाते हो, तब समय का पता नहीं चलता। दुखी होते हो। समय बहुत लम्बा लगता है। जब सुखी होते हो, तो समय बहुत कम लगता है। ऐसा लगता है। समय अरे इतना जल्दी बीत गया, प्रेम में होते हो, तो समय का परिव परिभावमहीं नहीं होता, परिज्ञा नहीं होती। उस वक्त कुछ समझ में नहीं आता। समय अरे समय चला। अरे इतना समय हो गया, गपशप लगाकर बैठते, तो समय का पता ही नहीं चलता। घड़ी देख। तो अरे भाई 2 घंटे बैठ के हम लोग गपशप कर रहे हैं निकला। तो से। ऐसे ही तमोगुण गोर नींद में चले जाते। तो काल का कोई पता नहीं चलता। मगर जब हम ध्यान में जाते हैं, महाकाल से जुड़ते हैं। अनंत काल की अनुभूति क्षण हमें प्राप्त होता है। उसी क्षण में वर्तमान की गहराई, उसकी विस्तार, हमको अनुभूति में आती हैं। वर्तमान सिर्फ 1 घड़ी नहीं है। वर्तमान बहुत गहरा है। और वर्तमान की गहराई में अनंत काल समाहित है, उसमें, इसलिए महाकाल कहते हैं चलिए अभी ध्यान करते हैं। शिवा इस कॉल द ग्रैंड time the greatest time you know time is related main to it, but something, which is be on the mind with no mind that is grand time or timeblestnes the timeglestness is also grand time and so lets meditate today when we feel a experience a dept of the present moment, the present moment is not pleating moment, it is very deep an based in the wastnesssofthat, there is internate past and internate future, so this space with in us is mahakal shive can be experienced when you go deep in meditation in the hearts of the yogi he manufistas lit as a flame, as jotywho as a flame।