A Hindi monologue describing the history and recent unveiling of the Somnath Jyotirlinga. The speaker recounts that the Somnath shivalinga was broken about 1000 years ago, its fragments were preserved by a family (Busgup Agrihotri family / southern custodians), kept under Kanchi acharya's instructions for 100 years, and in 2024 brought to Bengaluru for worship. The speaker frames the event as a spiritual revelation, explains the jyotirlinga as an energy source, and leads collective prayers and rituals using waters from the twelve jyotirlingas during Shivaratri.
Chapters
भारत में 12 जोति लिंग हैं और इनमें सर्वप्रथम सोमनाथ जी है सौराष्ट्र के सोमनाथ जी और ये सोमनाथ शिवलिंग को 1000 वर्ष पूर्व तोड़ा गया था। फिर उसकी जो शिला के अंश थे, बुसगुपअग्रिहोत्री परिवार के लोग, दक्षिण भारत वाले उसको लेकर गए और वहां सदियों तक वहां उनकी संरक्षण करते, आए, उनकी पूजा करते आये। सौ साल पहले उन्होंने कांची परमाचार्य से जब वर्तालापकरीइसके बारे में बताया तो उन्होंने कहा और सौ साल तक इसको बाहर नहीं ले जाने के लिए उन्होंने आदेश दिया था। और उसके बाद अभी 2024 में जब सौ साल पूरा होने के बाद उस शिवलिंग को वह परिवार के लोग, वहां के सीताराम शास्त्री वहां से बेंगलुरु लेके आए। यहां कांची के आचार्य जी ने बताया था इन लोगों को ही बेंगलुरु में ऐसे संत थे उनके पास ले जाके देना तो वो यहाँ लेके आए हैं। इसके साथ साथ हमने यहां 12 जोतिललिंगकी, 1 छोटी सी प्रतिमा भी यहाँ हैं। इस शिवरात्रि बड़े विशिष्ट शिवरात्री होगी कि शिवरात्रि में बाद भगवान फिर प्रकट हुए हैं। ईश्वर के 5 कृति है 5 काम, ये सृष्टि सृजन करना, स्थिति, उसको संभालना, पालन करना, फिर संहार करना, अनुग्रह करना, सबको अनुग्रह करना, फिर तिरोभाव मनी, चिप जाना। अब चिप गए थे, थे साल तक, अब फिर प्रकट हुए। जो छिपते हैं वो प्रकट भी होते हैं। ऐसे भगवान प्रकट हुए। ऐसे आपके हृदय में भी छिपे हुए हैं। वो भी प्रकट होते हैं। जब हम ध्यान करते हैं, जो ज्योतिर लिंक यही है, वो कोई शिला नहीं है, वो ऊर्जा का स्रोत है। जब भी हम ज्योतिर लिंक का ध्यान करना है, हमें तो हम बैठ के ये अनुभव करें। यह पूरा वातावरण ऊर्जा से भरा हुआ है। हम ऊर्जा से भरे हुए हैं। इस तरह से ऊर्जा का आह्वाहन करें। तब हम शिवो भूत्वा, शिवं, अजेत जो बात है शिव में समा कर, शिव की अर्चना करें तो यह सफल होगी। अब इसके लिए तीरत भी आए है। बारा ज्योतिर लिंग से अब जल भी आया है। तो इन्ही जलों से अभी हम पूजा अर्चना करते हैं। चले हम सब मिल के की आराधना करते हैं। सर्वे भवंतु, सुखी नहा, सब सुखी रहे, सर्वे संतु निरामया, सर्वे बद्राणी पसंती, सब अच्छा देखें, सबके जीवन में कल्याण हो, सबका मंगल हो, न हो, सबका मंगल हो। इस शुभ कामना के साथ पूरे भारत वर्ष में सब और दुनिया के कोने कोने में हर 1 व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और प्रेम का उदय हो, इस शुभकामना के साथ हम शुक्र करते है।