Arnab Das
10 Oct 2011 · 6 min

5:36
A Hindi lyrical passage where a speaker repeats

A Hindi lyrical passage where a speaker repeats
तू ही ज़्यादा, तू ही ज़्यादा भोगनी सुनके कोई स्वार्थ आरामी वो चलने के मकाने मारी स्वार्थ। तू ही ज़्यादा, तू ही ज़्यादा भोगनी सुनके कोई स्वार्थ आरामी वो चलने के मकाने मारी स्वार्थ। चश्मा की भोगनी एकला क्यों नहीं है? मेरा तेरी