The transcript captures a poetic, performative monologue delivered by two speakers (A and B) as part of a dance recital titled “Kono ak Gaer Badhu”. The language blends Bengali with regional dialects, creating a vivid tapestry of war‑torn memories, rural village life, mythic and spiritual references, and personal longing. Speaker A reflects on past battles, loss, and the yearning for peace, invoking images of fields, rivers, and ancestral spirits while questioning fate and destiny. Speaker B continues with a folkloric storytelling style, recounting tales of a wandering bride, communal rituals, and the cyclical nature of life and death. Throughout, the text is rich in metaphor, rhythmic repetition, and evocative imagery that guides the choreography, setting emotional tones for the dance movements. The overall purpose is to provide lyrical content that frames the recital’s narrative arc—from conflict and sorrow to hope, renewal, and cultural identity.
Chapters
अरेक रक्तात्र पहला तो पिरक्रम करे, आजिकार मुझे थोल के दाड़ियेची सौधिशीर शिमालाई। धोषात त्यूनीश्या थेके स्मेक्थोई ताली, स्मेख्थोई ताली थेके छुटे गेछी बित्णवे फ्रांसे। नक्खोत्रुनियं तृतुनियति आज ते ही अमार शइडिबी करा पश्टा, फाते आखन जोच चय लाइफें, रख्ते रख्।े तरो मुझे तो जयर आ शौक्ती र्दूत् पखुदं फो, आज आखन शिमान् किछों ते बुछी ना की कोरे आरापो ताके? की कोरे आराबो ये सोईमिकेर करापोशाक? जुद्धो शेष मात्री माछे को शारीतो शानती छोखी शेनाच्छे तारी शिताउभाव प्रती बुकुपते स्नाव थोई आशे थापे ब्राइफे गाधे के ख तुमाके खेलीछी कतो दिन, कतो शत्रुर बड़ी फेक्षना तुतिर्फार अभवशारी, कतो गुलाफाटार महुद्दे, कतो मार अबार्थो भयेछी मुन जुध्धजये फाकी-फाकी, कतो मार भुरिदारी जमीछी उनुशोछणार अमुगारे, तुमार � तुमाकी फिल देशीछी दाड़ी फिल मतरे, छुरे दियेछी डुरभीखे रागोने, जहरी और बन्नाई मारी और मरोके दुर सपो आखाते, बार बार भुपन्नो पेछे तुमादे उस्तित्तो। आरा अमी छुटे गेछी, एर एक जुद्ध्यो� तो भुलीछी तोमाके आज। लिखछी अर्थमभर आशाय, घारे फिरार समय इशे गाछे। जानी, अमर छोने केवो प्रतिथा करी ने, मालायाल और पाताकाल, प्रदुपेइ और मुंगल घाटी, जानी, साम्बर्धना रोजपिना लोको मुखे, मिली तो खुशी जुध्धो चाइना आओ। जुध्धो तो थेनी गाछे। पदाप्पन करते चाईना मौरिंदो बेशी आओ. आओ फामने नाई। इबार किछों फेडार पाला। कौन छोण जुत्धो करेछी अनिग। इबार जु्ध्भो तुमार आर आमार छोँने। त्रस्ण क प्रांसे पेछी मुक्तिर मद्रों और निषकन्तक बार्माय के लांग घरे फेरा तादादा। आमी जनु शी बातिवाला जी सुन्धाय राज पते-पते बाती जालीर फेरी अथोछो निजीर घरे निझा बाति जालार सामुथे निजीर घरे जुने थाती दुष्छप्वान तका
खोनो एक गाइर बधुर कथा तमाई सनाई सनो प्रुपो कथा लाइशे लाई जीवनेर बद्धु माशेर कुशुन छीरे कथा माला छीशेर बेजा ताही नी सनाइ सनो खनो एक गाईर बढुर कथा तमाई सनाई सणो प्रुपो कथालाई� जीवनेर मधु माशेर कुशंग छिले साथा माला छिषेर बेजा ताहेने सनाई शलो एक्टो खानी शहमल हेरा कुटीरे तर सपन संदो शंदो लेकादे तो घालेर शेषे रिशारा । दिबारा शेषे भिशाल जपन आस्तो फिरे अब काठाले पिले तीते गस्तो खबन, छब खाली मुन्द्यार करे, दितो तारे भिशानिशे, । कहेनी सनाइशलो, पलओ आय कैरे भदर तोमाई सोलाई सोलो, जुकोरो तथा नहीं सेलाई, जिवनेर मदु माशेर कुषुछे, कथा माला शिषीर बेजा, ताहेने सोलाई सोलो। दुरुड़ाका चायाए धाका ग्राव खाली कोल मालायोर भरे संतो जले हाँच्छाली प्रित्वार्तो काशे अदुरकुरे सुहार भरे निलशालुके दलल दिये रमफानुशे बेशे भुम परिशे, भुम पाड़ातो भिशे कफुर जालुपोरे, हमदा देतो भुन्दो निये पोटा पोलेर पासे पाकाधानीर बासी बासी सबार निमन्तल शेकाले बारु मासी तेरो पापल बाशार साबल की बैशाके जायेर बदुर साथीर जाके लोक्की एशेर भोरीर दीतो गुलार सापार धारीर धारी धारेरे कतम गेलो समन मोन हरेर पेसे पेसे साथीर दी सनाइशलो अनु जायर बदुर कथा तमाइ सनाइशलो रुको कथा नहईश शिषेरे वेज्ञा कारेने शोभाई शलू दागीली जोगीली हेलो सत्र नागीली हेलो पिशाचे राहेलो रे सत्र पाके बाधिया नाचे तकताधिया नाचे तकताधिया नाछे रे पुतिलेरो मुंत्रे शसलेरो जनते गयलो गानो सत्र गानो गयलो � मिलो रसल पिले मरुमुत रासो नहयलो हे दाकिनी जोगिनी दाकिनी जोगिनी ेलो सप्तु दाकिनी इलो पिशाचे नहयॲो ॹे। आयে शइी माया धिने संदा दे तुमारे से इमदुर जीवन मुदु छान्दा। आइ से ेर सोन भरा प्रांतर, सोनाली शकन भरा यंतर। आइ से इर सोन भरा प्रांतर शोनाली शकन भरा यंतर। आइ से इर क्रिषानेर, क्रिषानेर जी आजो जदी तुम्ही कोनो गाई दाखो माला कुटीदेरो सारी जेनो से खाने से गाएरो बधो आशा सपनेरो समाले