The video features a solo vocal performance by Sanjukta, presenting a medley of Pahari folk songs that celebrate the Himalayas. The lyrics, rendered in Hindi and Urdu, weave vivid imagery of towering mountains, cascading waterfalls, and seasonal changes, while also expressing themes of longing, separation, and devotion to a distant beloved (pardesi). References to Indian classical ragas and folk traditions underscore the musical style, and the piece repeatedly affirms dedication to the great Himalayas. The performance is characterized by repetitive melodic motifs, emotive vocal delivery, and a reverent tone throughout.
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है ये छोड़ना छोड़ो छोड़ो तेरी तेरी छोरो छोरो छोरना बोए जाए, शुंदुरी छोरना, रुकोशी छोरना बोए जाए है, छोरना छोरो छोरो बोए जाए। किसी का तो मुझे पड़े? हिमाचल प्रदेश पहाड़? एकदम करेक्ट। उत्तर भारतीय रागधम होते और दिगंते, चेकने दिगंती का कैमरा देखा अच्छी से करने भारतीय शक्ति घुसते दिगंते, और पूर्व को हिमालय आज के ताकि चश्मखड़ रिप्रेजेंट होते, रागिनाम पहाड़ी, राग पहाड़ी, विश्व पहाड़ी रिकॉर्ड, अपना देर रिकॉर्डिंग चीज को किसु गाने छोटे-छोटे मुखरा दिए एट हुस्न पहाड़ों का क्या कहना जी हुस्न पहाड़ों का क्या कहना के परो महीने यहाँ मौसम चारों का के बारों महीने या मौसम जाड़ों का तुम परदे से किधर से आए आके ही मेरे मन में समाए करूँ क्या हाथों से मन निकला जाए हरे करूँ क्या हाथों से मन निकला जाए झरने तो बहते हैं पहाड़ों में जी झरने तो बहते हैं कसम ले पहाड़ों की जो कायम रहे कसां पहाड़ों की जो गायं रहे थे परदेसी मेरी यारा परदेसी मेरी यारा वादा निभाना मुझे याद रख ना कहीं बोले ना जाना बर्दसी पर्दसी जाना नहीं मुझे छोड़के मुझे छोड़के मुझे छोड़के मुझे छोड़के कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है कि जैसे बजती हो शहनाया सी राहों में सुहाग रात है घूंघट उठा रहा हूँ मैं सुहाग रात है और घूंघट उठा रहा हूँ मैं सिमट रही है तू शर्मा के अपनी बाहों में सिमट रही है तू शर्मा के अपनी बाहों में कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है के परदेशियों से नाखियां मिलाना परदेशियों से नाखियां मिलाना हर परदेशियों को है एक दिन जाना परदेशियों से नाखियां मिलाना हम तो है परदेश में देश में निकला होगा चांद हम तो है परदेश में देश में निकला होगा चांद अपने रात की छत पे कितना तनहा हो होगा चाद है हम तो हैं परदेश में आजा हो आजा आजा हो आजा कि मेरे दिल में तडब के जब ना कि मेरे दिल ने तडब के जब ना तिरा पुकारा कहां से न जाने चलाया ये मौसम प्यारा प्यारा मेरे दिल ने तडब के जब ना तिरा पुकारा है आजा है आजा आजा आजा हुसैन पहाड़ों का क्या कहना जी हुसैन पहाड़ों का क्या कहना कि बरो महीने यहाँ मौसम जाड़ों का कि बरो महीने यहाँ मौसम जारों का ये हुसैन पहाड़ों का Dedicated to the great Himalayas. Thank you.