Sanjukta sings a stream of consciousness in Hindi and Bengali, weaving abstract imagery with rhythmic improvisation. A speaker notes how Bengali band music shifted around 1975, mentioning Ghuroguli and the move toward poly-jazz styles.
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नश्चा भी आज आही शुम्भी गोता है। या नोले तुना देन्दु पुरे, तुमाशी देन्दु पुरे छुरे करे राज्ये। तो कथा नाई जाता है, तूना बाते शुरे। तुमाशी शुरे आज करे नाइ, हशे देडाता है। वाशिते कू, सवे जो देखनो, वाषिते कू। कातो जाता है मोरे सुधु पोरा माशी क्यानो मोरे ना मोरा दिस तुपुरे माशी दिस तुबुरे चुरी करे रस्तिरे कखा नाई दातार दिराचार शीरे मासी शुमे आर्कार नाइ उसे जी दातार दिराचा शे जे का पंदी ना फर शे । शे जे का पंदी ना ५र शे। ।।।॥॥॥ ॥॥।॥।॥ ।॥॥॥। ॥।॥।। ।।।१॥॥ ध॥। ध॥ १॥
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इखाने गान गाबार चलन होलो बैंडे। बहुत जान्तुरिक बाबहारे और पास्चात्र संगेतेर प्रभाबे, प्रोथम बांगला बैंडेर परभर्तन होलो 1975 शाल। मोहीलेर घुरागुली नामी। हाले ओई गानेरी धाराए गान गयेशेन अनेके। जाम परबर्तिकाले ये गान्टी एक टी पॉलीजूड एर पॉलीजुड ेच्छायाचोडिते गैंक्स्टार नामे एक ती छायाचोडिते बांगला दिशेर एक पुर जनप्रियाशेड्डी जेम्स पले गाण्टी हिंदी ते ओ दिये छे तो आमे एक ट
आहाँ, आहाँ, आहाँ, सप्णों का साया पलको में आया पल में हसाया, पल में रुलाया फिर ही ये कैसे कमी है? आहां, आहाँ, अहाँ ना जाले कोई कैसी है ये जिन्दशारी, जिनदशारी हमारी अधूरी कहारी खोरे कोशी शाना जुनियार शाने जुका जूगो आज अपनेरे मतुते भुची जाछे देश्वाल शिपालारे गौंती निवे देखे छोफी, तारा राउजो के वानक बहुष तुमे, सारु दुख्वे, ।ुमी आलामी काे क्रोमे शोगे शोगे जातो अलको परजु खुए, तारो खुए, तुम्ही आरामी जाई तम्ही शोले शोले लालालाल, लाललाल, लाललाल, दालची एशु खुला जानलाय, तो तु भुल करे पुन रासाय, होई तो बिलो पिते पाड़वान शम्धी। एसी है ये जिन्दलकानी, जिनदलकानी, अमारी रधूरी कहानी, ना जाने कोई हमारी अगुई कहानी ना जाने कोई कैसी है ये ज़िन्दकानी हमारी अगुई कहानी ये, ये, ये, ये, ये, ये ये,