Three speakers explore why Tagore's poems and songs still matter. They recite his verses, trace his influence on language and music, and argue his ideas about humanity, nature, and freedom speak to modern life.
Chapters
आपना पुछी से बोईशाग पाली करची, इंग्लांजेर एक छोड़ी सहभरे, इता इकी प्रोमान करें जो रभुदुनार आज और महुत प्रास्तुन नहीं है। उन्हीं निज़े दिखे काछें, आज इंगले सतो बर् उन्हार गान, उन्हार कविता, उनार बोहिते आख्रे दुरे था। आज यो ख़री ख़ारे चुटु-छुटु छेले मेरा सभज पाठ करें मांगलाशे थी। आर शुरुफाई उन्हार कविता रखशे जाए। क्यों भूके हाड दिये भीर फुरूष, क्यों मांक तुमे की केबोली छोबी कोभी, सुझू आक उपनोक खोभी? आमी आंसो भोबील लेखा गारी रेश मिले बलबो, सी सुछ आमान माते लामेर लिखाए दाखो।
तुमे की केभोली स्वेथी? सुजू आक उपनोक खोभी? हरे कुछ सबे होई होई, म शाल बैशा गिरते ब्राव चेक्त प्रतिबा, बादलेर प्रमोल लावं, इस सभी किसूर पत्सरांख एक दिनी निर्वतने शेष, अपधीखो निरमणान, जेइश, आर्तुम अबेदान, सामित्रीन सिर्फ रखोर विफा, अमादेर दुद्धुस्थो छिलो गध्वेत अन्धोकार ही नापन शत्ता थेके पलातक। निस्तव्स्तुखाकार होई अकार संचाहे जनतार अखुमाने, नित्र जिक्खाइ खये सुन्दर। कुधाई से पति दिने रुपेर रचना? से निरंतर सुनदरेर धानेर मेश। अनात्तिक अरणे सदा मुधी निर्भवाई सुत्वालोकी आलोकी।
तोमारी नाम बुलबो, आमी बुलबो नाना छारे। आमी बूलबो बाता ओशे, अपन मने छाया तारे॥
तोमारी नाम बुलबो, आत्तु स्थीर स्थम्भुताइ शुद्धु अंधकारे उद्भाशित सरील खजिबन।।। जखने परबो तोरे आशिने इन अंभकारे निरुद्धेश्मेख।। संभारागी छिलिकी छिलमेर माका पलवार। नोठीरे नुपुरे भाजे नो तुमार आकाश दाहो कवि, दाओ दिर्फ आशी बाछरे, आमादेर खियो मान मानुशे छड़ा। सुर्जदाय सुरजास्तेर आशी बाचरे गाल। भहुदा कीर्तिते सतोर्व, सिल्पकर्वियो धाओ तुमार कीर्तिते आर तुमाते। जा दिके दिक� दिनो गातो अन्नाय उत्षिते। सुनी जाने सुन्णरेर गान। देखी जाने ये कुलिष्ठ दिल खायूर। रगतीर एक छवी। सून्णरेर गान जाने सुनि गाई।
बोलबो बिना आशा। बोलबो बिना आशा। बोलबो मुखे हाँशी दिये, बोलबो चोखे जाने, तुमारी ना बोलो, आमी बोल्बो ना, ना
छाले शुन्दरेर गाल जन शुणीं गाई दोस्ता और पास्ता हुदभान्त ट्राफिके, भस्तीते बाखाई और बांगलार नयाकलोरीते, जीविकार जीबनेर भाँग़ीते, और बंबाई सिनेमा, और मार्किम भाइकेर अशुस्थ भई भावे, मराखेती आरकार खना फुझी जानूँ सकाले ये विश्वुर्ज्यो थेके संधार सुर्चे। प्रत्त हैं सुनी जाणूँ आमादेर कान्दार अतल जले अमुर भैरोबी। सचे श्टूत सभी। सहो जब भाष फेले सकाले संधाये मारो माश। बछरे बछरे पड़े जाय सा आमादेर दिनेर पापेते जीमनेरी फुली-फुले ब्रमारे कुछाने, नवपल्लाव मरमारे गुने तोली, आज, काल, माशे-माशे, सतो भर्षो परे आमादेरी परती दिन कोभी, तुमी की के बोली स्रेथी, सुधु एक उपोलोग्गा कोभी, हरे आर मैशिस्रावन।
द्रीनाप्रलो जाने दाखे दाखो तुमार नाम। शेइ दाफे मौर सुध्व सुध्वे पूर्बे मनुष्टा। की शुक्षाबू माके, नामेर जे शायावे, बोलते पारे एइ शुखेते, मायेर नाम हे, माले तुमारे नाम बोल, बोल, अमी बोल भो, ना, ना छाले अमी बोलगो आका पोशे आपकोन मने छाला छाले तुमारी नाम बोल्गो तमी बोलगो ना, ना, छाले