9 Step Content Strategy Game Plan For Local Businesses In Hindi | 90 Days Game Plan

Sandeep Sir walks through a nine-step, 90-day content strategy for small local businesses to grow through social media. Set a measurable goal, learn content creation tools, research competitors, optimize your profiles on Facebook, Instagram, YouTube, and WhatsApp Business, post varied content consistently, engage with comments, track analytics, and focus on customer retention through reviews and referrals.
Chapters
हमें अक्सर ऐसा लगता है कि 1 लोकल बिजनेस को ग्रो करना बहुत डिफिकल्ट है। ऐक्चवली ऐसा नहीं है। हमें ऐसा लगता है कि ये डिजिटल मार्केटिंग या ये फाइनल और ये एडवरटिजमेंट, ये सिर्फ बड़े, बड़े ब्रांड्स और बड़े बड़े लोग कर सकते हैं। ऐक्चवली ऐसा नहीं है। हमें ऐसा लगता है कि यू ट्यूब पर, इंस्टाग्राम पर, फेसबुक पर, इ, इन सारे प्लेटफार्म्स पर, जो लोग कॉन्टेंट डालते हैं, यह कोई बहुत बड़े बड़े इन्फ्लूएंसर होते हैं और इसलिए इनका कॉन्टेंट इतना दिखता है। अगेन यह बिल्कुल गलत है। अगर आप 1 छोटे बिजनेस मैन हैं, छोटा या बड़ा मीडियम साइज का बिजनेस करते हैं, सर्विसेज प्रोवाइड करते हैं तो आप भी डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया और कन्टेंट मार्केटिंग का लेवरेज यानि की फायदा उठा सकते हैं। अपने बिजनेस को ग्रो करने के लिए। आज मैं आप लोगों को बताने वाला हूँ 1 नाइन स्टेप्स की कॉन्टेंट स्ट्रैटेजी गेम प्लान अपने लोकल बिजनेस को बढ़ाने के लिए। तो अगर आप अपना रेवेन्यू इनक्रीज करना चाहते हैं, अपना प्रॉफिट इनक्रीज करना चाहते हैं तो मेरी इन बातों को पूरा सुनिए और इम्प्लीमेंट करने की कोशिश कीजिए। सबसे पहले तो रिजल्ट्स पर फोकस रखिए समझिए की। अगर आपको रिजल्ट चाहिए। तो सबसे पहले आपको कॉंटेंट इस शब्द को समझना जरूरी है कि यह कॉन्टेंट क्या होता है। आपको जरूरी है यह समझना कि आपकी ऑडियंस या आपका कस्टमर एग्जैक्ट ली कौन है। उसके बाद आपको इन सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की नॉलेज होनी। जरूरी है एंड चौथी चीज की। आपके पास 1 कॉन्टेंट गेम प्लान होना चाहिए जिस गेम प्लान के जरिए आप अपना प्रॉफिट या अपना रेवेन्यू इनक्रीज कर सके। आज की इस ट्रेनिंग में इन चारों चीजों पर मैं अब फोकस करने वाला हूँ 1 के बाद 1। अगर यह आपको लगता है कि आपके अन्दर 1 घंटी बजा रहा है और इसके बारे में आपको जानना है तो ये ट्रेनिंग एंड तक जरूर देखिये। सबसे पहले बात करते हैं कॉन्टेंट की। कॉन्टेंट होता क्या है? बहुत सिम्पल है गाइस। किसी भी तरह की जानकारी जो आप अपने ऑडियंस तक पहुँचाते हैं, उन्हें इंगेज करने के लिए, उन्हें एजुकेट करने के लिए या उन्हें एंटरटेन करने के लिए इसे कॉन्टेंट कहते हैं। कॉन्टेंट के टाइप्स हैं जैसे की वीडियोज, रील्स, शॉर्ट्स, यूट्यूब वाले, वीडियोज। ये सब कॉंटेंट है। ऑडियो पॉट, कास्ट वॉइस नोट, ये भी कॉन्टेंट है। कोई टेक्स्ट आप लिखते हैं, वेबसाइट, ईमेल, वaट्सapप, मैसेज, ब्लॉग ये भी कॉन्टेंट है। या फिर इमेज पोस्टर या कोई फ्लायर इंफोग्राफिक कराजल, यह सब भी कॉन्टेंट ही है। ये सब कांटेंट के प्रकार है। अलग अलग फॉर्मेट। जॉब भी मैंने, बताए, रील्स, स्टोरीज, पोस्ट, कराजल, लॉन्ग, विडियो, स्टेट्स, रखना, यू, ट्यूब, पर, शॉट, डालना, कैप्शंस, डालना, ब्लॉग, लिखना, लैंडिंग, पेज बनाना, वेबसाइट बनाना, ये सब कॉन्टेंट है एवरीथिंग इस कॉन्टेंट। अब कॉन्टेंट की इतनी सारी बातें क्यों की जा रही है। क्योंकि कॉन्टेंट ही होता है जो आपको हेल्प करता है। आपकी अवेयरनेस बढ़ाने के लिए कि लोगों को आपके बारे में पता हो, ज्यादा से ज्यादा लोगों को आपके बारे में पता चले, ये कॉन्टेंट से ही होता है। अगर कोई गूगल पर या पर आपको ढूंढे तो आप मिलने चाहिए। आपकी डिस्कवरेबिलिटी जो है वो कॉन्टेंट से बनती है, आपकी अथौरिटी कॉन्टेंट से क्रिएट होती है। अच्छा कॉन्टेंट होगा तो लोग आप पर भरोसा करेंगे और अगर आप पर भरोसा करेंगे तो ही आपसे खरीदेंगे। क्योंकि ध्यान रखना की इस ऑनलाइन दुनिया में इतने सारे फ्रॉड चलते हैं, इतने सारे गिमिक्स चलते हैं कि भरोसा करना। आज 1 आम कस्टमर के लिए थोड़ा डिफिकल्ट हो गया है। तो 1 आम कस्टमर आपको पहले ढूंढता है, चेक करता है, आपके रिव्यूज रेटिंग्स देखता है, आपका कॉन्टेंट देखता है, आपकी कंसिस्टेंसी देखता है। सारे प्लेटफार्म्स पर अगर आप नजर आते हो तब कहीं जाकर उसे थोड़ा सा भरोसा होने लगता है कि यह बंदा, यह बिजनेस, यह सर्विस सही है। और तब कहीं जाकर वो आपसे इंटरैक्शन करता है और आगे चल कर ट्रांजेक्शन करता है। सबकी शुरुआत होती है कॉंटेंट से। कॉन्टेंट के साथ साथ हमें अपने ऑडियंस को समझना भी जरूरी है कि एग्जैक्टली हमारा ऑडियंस है कौन? वैसे जब हम पोस्टर लगाते हैं, वॉल पेपर्स पर काम करते हैं या वॉल प्रिंटिंग करते हैं, होर्डिंग्स लगाते हैं, टीवी पर एड करते हैं, न्यूज पेपर में एड करते हैं। किसी भी तरह की अगर आप ट्रेडिशनल, एडविटीजमेंट या मार्केटिंग करते हैं तो हमारे पास कंट्रोल नहीं होता कि यह ऐड किसे दिख रही हैं। लेकिन जब हम डिजिटल मार्केटिंग करते हैं तो हम सटीकता से ये डिसाइड कर सकते हैं कि हमें अपनी एड्वटीजमेंट किसे कहाँ, कितनी और कब दिखानी है। ये सब हो सकता है अगर आप अपने ऑडियंस को जानने लगे, आपको ये पता होना जरुरी है कि आपकी ऑडियंस की डेमोग्राफिक क्या है, एज क्या है, कौन से शहर में रहते हैं और उनका जेंडर क्या है, मेल है, फीमेल है या दोनों है। आपको साइकोग्राफिक समझना जरुरी है की आपके कस्टमर के पेन पौइंट्स क्या है, क्या दुख है, उनकी लाइफ में कहा, उनकी गाड़ी अटकती है औ। और यह भी देखना जरूरी है कि उन्हें किस चीज में दिलचस्पी है, किस चीज में उनकी रुचि है, कौन सी चीजें उन्हें अच्छी लगती है। 1 बात समझाऊं तो हमें यह पता होना चाहिए कि हमारी ऑडियंस क्या सोचकर डिसीजन लेती है। हमारी ऑडियंस के कौन से ऐसे फैक्टर्स हैं जो उनके पर्चेज डिसीजन को अफेक्ट करते है। कुछ ऑडियंसेज होती हैं जो प्राइस सेंसिटिव होती हैं, जो हमेशा सस्ता माल दिखती है। कुछ ऑडियंसेज होती हैं जिन्हें क्वालिटी में ज्यादा इंट्रेस्ट होता है, कुछ होती हैं जिन्हें सर्विस अच्छी चाहिए होती है। भले ही चीजें महंगी हो। कुछ लोग सिर्फ फील और लुक पर काम करते हैं, कुछ लोग रेकमेंडेशन पर ब्लाइंडली विश्वास रखते हैं, तो कुछ लोग बस नजदीक क्या है, ईजी क्या है, एक्सेसेबल क्या है, यही चीज उनके लिए मैटर करती है। अब ऐसा नहीं है कि आपकी ऑडियंस किसी भी 1 चीज पर ही फोकस करेगी। फोकस तो हर चीज पर होती है। लेकिन आपकी ऑडियंस की सेंसिटिविटी किस तरफ है यह देखना बहुत जरूरी है क्योंकि उस हिसाब से आप इन चीजों को इस्तेमाल कर पाओगे। अपनी मार्केटिंग और अपनी एडवरटीजमेंट में। तो कॉन्टेंट क्या है। यह समझने के बाद आपकी ऑडियंस को सबसे पहले समझना जरूरी है कॉन्टेंट और ऑडियंस समझ में आ जाए। तो उसके बाद प्लेटफॉर्म्स को समझने की कोशिश कीजिए। मुख्यतः यह 34 प्लेटफार्म सोशल मीडिया पर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब यह 3 प्लेटफार्म्स आज के समय में सबसे जरुरी है। वैसे तो ट्विटर है, स्नैपचैट है, लिंकडिन है और भी बहुत सारे। लेकिन अगर आप इन 3 प्लेटफार्म्स पर भी फोकस करेंगे तो भी आपका एटी नाइन्टी परसेंट काम हो जाएगा। सिर्फ, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यू ट्यूब इन 3 पर ही फोकस कीजिए। इसके साथ साथ गूगल बिजनेस प्रोफाइल यानि की गूगल मैप्स पर आपकी रजिस्ट्रेशन होना जरुरी है। आजकल 1 आम हिंदुस्तानी गूगल खोलता है और उस पर सर्च मार देता है और फिर डिसाइड करता है कि उसे किसके साथ जुड़ना है, किसके साथ काम करना है, किसके रिव्यूज क्या है, किसके रेटिंग्स क्या है तो आपकी गूगल मैप्स पर यानि गूगल बिजनेस प्रोफाइल में प्रेजेंट होनी। मोस्ट इम्पोर्टेंट है। अगर आप लोकल बिजनेस को ग्रो करना चाहते हैं साथ ही साथ आप अपने व्हाट्सएप बिजनेस को भी तैयार रखिये आई होप। आप जानते हैं कि व्हाट्सएप बिजनेस नाम का 1 एप होता है जिसके अंदर आप व्हाट्सएप की तरह ही नॉर्मल वाट्सएप्प की तरह ही उसे यूज करते हैं। लेकिन अगर आप व्हाट्सएप बिजनेस एप के अन्दर अपने डीटेल्स डालते हैं तो सामने वाला आपको स्टडी कर सकता है। आपके बिजनेस का नाम, आपके प्रोडक्ट्स, आपके प्रोफाइल्स सब कुछ उसे दिखाई देता है व्हाट्सएप पर और यह 1 बहुत ज्यादा प्रोफेशनल आउट लुक देता है। अब सोचकर देखिए क्या इन पांचों प्लेटफार्म पर आपकी मौजूदगी है या फिर थोड़ा बहुत अभी और काम करना जरूरी है। अब मैं आपको नाइन स्टेप का गेम प्लान बता रहा हूँ जो आपको स्टेप बाय स्टेप करना है। अगर आप अपने बिजनेस को ग्रो करना चाहते हैं। नाव स्टेप नंबर वन सबसे पहले तो 1 गोल तय कीजिए कोई भी मार्केटिंग, कोई भी एड्वटीजमेंट बिना गोल के करना मुश्किल होता है। अपने दिमाग में पहले तय करो की आप जो भी कैंपेन रन करना चाहते हो, जो भी सोशल मीडिया पर काम करना चाहते हो उसका मकसद क्या है। हाँ अल्टीमेट मकसद तो हम सब का होता है कि हमें पैसा कमाना है लेकिन सिर्फ पैसा कमाना है। यह सोचकर हम एड्वटीजमेंट नहीं कर सकते। तो फॉर एग्जाम्पल 1 गोल बनाओ की भाई मुझे। आने वाले 90 दिनों में सौ नए कस्टमर्स जोड़ने हैं। अगर आपका गोल टैंजिबल होगा आप उसे मेजर कर पाओगे तो उसे अचीव करने में आपको मजा आएगा। क्योंकि जैसे जैसे लोग जुड़ना शुरू करेंगे, जैसे जैसे आपके नंबर्स मूव करेंगे तो आपको 1 अंदर से इंस्पिरेशन मिलता है अपने गोल की तरफ और भी ज्यादा काम करने के लिए। तो ऑलवेज हैव। अ स्मार्ट गोल ऑलवेज हैव टैंजिबल गोल 1 सिम्पल सा गोल ले लो की 90 दिनों में मुझे सौ नए कस्टमर जोड़ने है। ठीक है अब स्टेप नंबर टू सबसे पहले न कॉन्टेंट को बनाना सीखो। अगर कॉन्टेंट बनाने का स्किल आपको नहीं आता है तो ये सारी स्ट्रैटेजी सुनने का कोई मतलब ही नहीं है। तो अगर आपको लोकल बिजनेस ग्रो करना है, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना है तो सोशल मीडिया पर कॉन्टेंट डालना पड़ेगा कॉन्टेंट कैसे बनाया जाता है। ये डिजिटल आजादी में हम आपको हमारे कोर्सेज में सिखाते हैं। सिम्पल है आसान हिंदी भाषा में है। भले, आपको कंप्यूटर नहीं आता, अंग्रेजी नहीं आती, भले आप टेक्निकल नहीं हो, फिर भी आप यह सब कुछ कर पाओगे करना क्या है। इमेजिस बनाना सीखिए, टूल्स का इस्तेमाल कीजिए। जैसे कैनवा नैनो बनाना। आज ए आई की वजह से इमेज क्रिएट करना बहुत आसान हो चुका है। वीडियोज बनाना सीखिये, विडियो की। स्क्रिप्ट कैसे लिखते हैं तो सबसे पहले प्रॉब्लम, फिर सॉल्यूशन और फिर बेनिफिट। तो हमेशा आप देखोगे किसी भी एड्वटीजमेंट में सबसे पहले प्रोब्लम दिखाते हैं जैसे फेरन लवली की आड में दिखाते हैं कि लड़की या लड़का सावला है, फिर उसका सॉल्यूशन दिखाते हैं। सोलूशन क्या है? तो हमारी क्रीम उसे रोज लगाओ और फिर बेनिफिट दिखाते हैं कि इस क्रीम के इस्तेमाल से वो लड़का या लड़की। अब उनका रंग जो है, वो सावले से गोरा हो गया है और फिर उनकी शादी हो रही है, उन्हें भाव मिल रहा है। जो भी उनके प्रॉब्लम थे वो साल हो रहे हैं। बहुत ही सिंपल सा स्ट्रक्चर है। लेकिन हर वीडियो की स्क्रिप्ट में पहले प्रॉब्लम बताओ, फिर सॉलूशन बताओ और फिर उसका बेनिफिट बताइए। ये स्ट्रक्चर अगर आप दिमाग में रखोगे तो बहुत अच्छे वीडियोज आप अपने बिजनेस के लिए बना पाओगे। साथ ही साथ बहुत सारे टूल्स हैं एडिटिंग के जैसे वी एन नाम का टूल है, कैपकट नाम का टूल है। ये आप बहुत आसानी से अपने मोबाइल पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। तो इमेज बनाना सीखो, वीडियो बनाना सीखो। और तीसरी चीज है कॉपी कॉपी यानि टेक्स्ट फॉर्मूला क्या है हमेशा ये सोचना कि कैसे आप अपने ऑडियंस का अटेंशन अपनी तरफ खींचोगे, फिर कैसे आप ऑडियंस को अपने प्रोडक्ट्स में इंट्रेस्ट दिलाओगे। कैसे आप कुछ ऐसा करोगे कि आपके ऑडियंस के अंदर डिजायर पैदा हो कि वो आपसे आपके प्रोडक्ट्स खरीदें और कैसे आप अपने ऑडियंस को 1 ऐसे प्वॉइंट पर लाते हो की जहाँ पर वो एक्शन लेते हैं। ऐक्चवली आपके प्रोडक्ट सर्विसेज खरीदते हैं और आपको पैसे देते हैं। इसे हम ए आई डी ए आइडा फार्मूला कहते हैं। हर मार्केटिंग इस दुनिया में इसी फॉर्मूले पर चलती है। तो इस फार्मूले को ध्यान में रखते हुए जब आप टेक्स्ट क्रिएट करते हैं तो उसके लिए आप एआई के टूल्स यूज कर सकते हैं जैसे कि चैट, जीपीटी या जमिनाए। यह सुनने में जितना लग रहा है करने में उससे भी कहीं ज्यादा आसान है। डिजिटल। आजादी में मैं आज तक 30 हजार से ज्यादा लोगों को कंटेंट बनाना सिखा सिखा चुका हूँ और आप भी ये आसानी से कर सकते हैं। तो सेकंड स्टेप इस पहले कॉन्टेंट बनाना सीख लीजिए। 1 बार आपको कॉन्टेंट बनाना आ जाए फिर स्टेप थ्री पर थोडा सा रिसर्च कीजिए रिसर्च किसका। तो आपके कॉम्पिटिटर का रिसर्च कीजिए। आपके कॉम्पिटिटर्स अक्रॉस ऑल प्लेटफार्म कहाँ कहाँ मौजूद है। वो अपने सोशल मीडिया पर क्या कर रहे हैं, किस तरह से वो अपनी पोस्टिंग कर रहे हैं, दिन में कितनी बार कर रहे हैं, हफ्ते में कितनी बार कर रहे हैं, वो कॉन्टेंट के कौन कौन से फॉर्मेट यूज कर रहे है, उस कॉन्टेंट को इन्ट्रस्टिंग बनाने के लिए कौन से हुक्स पैदा हो कर रहे हैं, किस तरीके का कॉन्टेंट बना रहे हैं, जो कॉन्टेंट वो बना रहे हैं, उस पर कस्टमर के कॉमेंट्स के आ रहे हैं। आपके कॉम्पिटिटर किस किस ऑफर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। कभी वुमन्स डे, कभी वैलेंटाइन्स डे, कभी रिपब्लिक डे, कभी इंडिपेंडेंस डे, कभी रक्षाबंधन, कभी न्यू ईयर, कभी दिवाली, कभी ईद। कितने ही ऑफर्स क्रिएट करते हैं लोग। अगर आप अपने कॉम्पिटीटर्स को सिर्फ स्टडी भी करोगे तो आपके दिमाग में बत्ती जली शुरू हो जाएगी कि कितने सारे ऑफर्स आप भी क्रिएट कर सकते हैं। देखिये आपके जो कॉम्पिटिटर्स हैं वो किस तरीके से टेस्टिमोनियल्स ले रहे हैं, रिव्यूज ले रहे हैं, रेटिंग्स ले रहे हैं। ध्यान दीजिये की वो कैसे अपने ऑडियंस के साथ एंगेजमेंट रखते हैं, कौन से कॉन्टेंट पर उनके कितने व्यूज आते हैं, कितने लाइक्स आते हैं, कितने कमेंट्स आते हैं, कितने शेयर्स हो रहे हैं, कितने सेब हो रहे हैं। अपने कॉम्पिटिटर के इन्स्टाग्राम पर जाकर, अगर उनकी रील या उनकी पोस्ट आप देखोगे तो उसके नीचे यह सारा डेटा आपको मिल जाता है। हम बहुत सारे रील्स और शॉर्ट्स बनाएं पोस्ट करें और उसके बाद हमें रिजल्ट मिले। इससे तो अच्छा है। अपने कॉम्पिटिटर का अकाउंट खोल कर, शांति से 10, 20 मिनट बैठकर स्टडी करोगे तो सब कुछ समझ में आ जाता है। क्योंकि एंड ऑफ द डे, आपकी ऑडियंस और आपके कॉम्पिटिटर की ऑडियंस तो सेम ही है। तो अगर अपने कॉम्पिटिटर को भी स्टडी करना शुरू करोगे तो अपने ऑडियंस को समझना शुरू कर दोगे कि आपके ऑडियंस को क्या अच्छा लगता है। आपका कॉम्पिटिटर आपको इतना सिखा जाएगा जितना कोई स्कूल, कॉलेज, आपको, शायद, ना, सिखा, सके, नाव, रिसर्च के साथ साथ जरूरी है अपने प्रोफाइल्स को ऑप्टिमाइज करना। आप में से कुछ लोगों ने फेसबुक पर अकाउंट बनाया है, किसी ने इंस्टाग्राम पर हैंडल बनाया है लेकिन क्या वो अच्छे से ऑप्टिमाइज्ड है। स्टेप नंबर फोर में अपने प्रोफाइल्स को ऑप्टिमाइज कीजिए फेसबुक पर जाओ चेक करो। आपका पेज ऑप्टिमाइज है या नहीं, उस पर व्हाट्सएप पर वाट्सएप का आपका नंबर दिया है या नहीं, आपका फेसबुक का पेज आपके इंस्टाग्राम से लिंक कनेक्टेड है या नहीं और आप लोकल ग्रुप में शामिल हो या नहीं। क्योंकि फेसबुक ये लोकल ग्रुप्स के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। उसी तरह अपना इंस्टाग्राम चेक करो की आपके इंस्टाग्राम पर बिजनेस प्रोफाइल है या नहीं है। आपने अपने बायो को ऑप्टिमाइज किया है उसमें अपने बिजनेस का, प्रोडक्ट का, सिटी का नाम लिखा है या नहीं यह सब करोगे तो ये रील्स और रीच के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। तो इंस्टाग्राम यह रील्स और रीच के लिए बेस्ट प्लेटफार्म है वैसा ही है आपका यू ट्यूब, यू ट्यूब लॉन्ग टम ग्रोथ के लिए बहुत इम्पोर्टेंट है। तो यू ट्यूब पर अपना चैनल क्रिएट कीजिए, उसे ऑप्टिमाइज कीजिए और रेगुलरली उसपर पोस्ट करते रहिए। यू ट्यूब पर रिजल्ट जो है वो इंस्टेंट नहीं आता। लेकिन लॉन्ग टम में इंस्टाग्राम से ज्यादा जिंदगी ये यू ट्यूब की है। तो यू ट्यूब को अभी से डेवलप करना शुरू कर दीजिए। उसके बाद है आपका व्हाट्सएप बिजनेस का प्रोफाइल। आपके व्हाट्सएप बिजनेस में आपके दुकान के नाम, एड्रेस, लोकेशन क्या, सारे, डीटेल्स हैं, क्या आपने कैटलॉग बनाया है, वर्किंग आवर्स दिया है या नहीं, ये कनवर्जन के बहुत काम आता है। क्योंकि आपकी ऑडियंस आपके लीड्स, आपके व्हाट्सएप बिजनेस के प्रोफाइल में जाकर आपको स्टडी कर लेते हैं और डिसाइड करते हैं कि आपके साथ जुड़ना है या नहीं। तो वन टाइम सेट अप है। यह सब कुछ वन टाइम सेट अप है और सब मिलाकर कुछ घंटों में आप ये सब कम्पलीट कर सकते हैं। लास्ट बट नौट, द लीस्ट, इस गूगल बिजनेस प्रोफाइल, आपके गूगल मैप्स पर बिजनेस जो है वो रजिस्टर्ड हैं क्या, उसमें आपका नाम सही है, एड्रेस सही है, फोन नंबर है, वेबसाइट है, ये सब लोकल डिस्कवरी के लिए काम में आता है। जब कोई ढूंढता है क्लॉथ, शॉप नियर मी, डेंटिस्ट नियर मी, ब्यूटी पार्लर नियर मी, जिम नियर मी। आपके नाम पहले 3 में आ जाना चाहिए और ये तभी आएगा जब आपका प्रोफाइल पहले तो बना होगा और उसके बाद वो ऑप्टिमाइज्ड होगा। नाव गाइज। इन पांचों प्रोफाइल्स को 1 बार ऑप्टिमाइज करना है दैट्स एट कुल मिलाकर ज्यादा से ज्यादा आधे दिन का काम है उससे ज्यादा नहीं। यह कैसे किया जाता है यह भी आप हमारे कोर्सेज में सीख सकते हैं। नाव स्टेप नंबर फोर में अपनी ऑप्टिमाइज्ड प्रोफाइल बनाने के बाद स्टेप फाइव में हम कॉन्टेंट बनाना शुरू करते हैं। ध्यान रखना कॉन्टेंट के कुछ आइडियाज दे रहा हूँ कंटेंट मुख्यत मुख्य इन 4 प्रकार का होता है। पहला होता है एजुकेशनल कॉन्टेंट जहाँ पर आप अपने ऑडियंस को टिप्स देते हो, उनके प्रॉब्लम्स के सॉलूशंस देते हो, हाऊ टू डू, दिस, हाऊ टू डू दैट, ये कैसे करते हैं, वो कैसे करते हैं, इस तरह के वीडियोज बनाते हैं। तो जब आप उन्हें नॉलेज दे रहे हैं तो उसे हम एजुकेशनल कॉन्टेंट कहते हैं। फिर आता है प्रोमोशनल कॉन्टेंट, प्रोमोशनल कॉन्टेंट यानी की आपके पास कोई ऑफर है, कोई डील है, कोई नया प्रोडक्ट आया है तो उसके बारे में आप कंटेंट बना कर डालते हो अपने ऑडियंस तक जानकारी पहुँचाने के लिए। तो इसे हम प्रमोशनल कंटेंट कहते है। 1 कॉन्सेप्ट और है जिसे कहते हैं यु जी सी। इसका मतलब है यूजर जनरेटेड कॉन्टेंट की आपका यूजर आपका क्लाइंट आपके लिए कॉन्टेंट बनाएं कैसे? तो ये होता है टेस्टिमोनियल। जब आपके क्लाइंट आपको टेस्टिमोनियल देते हैं तो वो कंटेंट आपके क्लाइंट बनाते हैं। लेकिन काम वो आपके आता है। तो टेस्टिमोनियल्स स्टोरीज, बिफोर आफ्टर ये वाले जो होते हैं ये यूजर जनरेटेड कंटेंट होता है जितना यूजर जेनरेटेड कॉन्टेंट ज्यादा होगा आपके सोशल मीडिया पर उतना ज्यादा लोग आप पर भरोसा करते हैं। क्योंकि अपने मुंह से तो हर कोई अपनी तारीफ करता है लेकिन जब दूसरे आपकी तारीफ करते हैं तो उसकी वैल्यू बढ़ जाती है। लास्ट बट नॉट द लीस्ट, इस एंटरटेनमेंट वाला कॉन्टेंट बिहाइड द सीन कोई जोक, कोई स्टोरी, कुछ मजा आया, कुछ मजाक हुआ। ये सारे कॉन्टेंट भी ऑडियंस को बहुत पसंद आते है। तो यहाँ पर मैंने आपको बहुत सारे कॉन्टेंट के आइडियाज दे दिए। अब कॉन्टेंट तो आप बनाओगे लेकिन पोस्टिंग का 1 शेड्यूल बना लो, अपने मन से बना लो। यहाँ पर मैंने 1 सैंपल दिया है। जरुरी नहीं है की आप इसी तरीके से कीजिये आप अपने मन मुताबिक भी कर सकते हैं। लेकिन 1 सेड्यूल होना चाहिए। जैसे मन डे को हम एजुकेशनल डालेंगे, ट्यूजडे को हम कराजल डालेंगे, वेनेसडे को हम टेस्टिमोनियल डालेंगे, फिर थर्सडे को हम एंटरटेनमेंट वाला, कुछ डालेंगे, फ्राइडे को हम ऑफर देंगे, सैटरडे को एंटरटेनमेंट वाला डालेंगे, सन्डे को स्टोरी या कस्टमर हाईलाइट करेंगे। तो अपने मर्जी से आप 1 सीक्वेंस बनाओ और फिर उस सीक्वेंस को फॉलो कीजिए। तो जितना शेड्यूल इम्पोर्टेंट है उतना ही इम्पोर्टेंट है पोस्टिंग का टाइम। हमे कब पोस्ट करना चाहिए सुबह दोपहर या शाम को सी इट कम्प्लीटली डिपेंड्स की आपके ऑडियंस किस प्रकार की है। अब मेरी ऑडियंस जो है वो बिजनेस मैन है तो बिजनेस मैन सुबह 8 बजे के आसपास फ्री होता है उसके बाद दोपहर को 12 से 2 के बीच कम काम होता है या फिर रात को 9 बजे के बाद उसके पास टाइम होता है। तो अगर मेरी ऑडियंस बिजनेस वाली है तो मैं ये टाइम प्रेफर करता हूँ। अगर आपकी ऑडियंस जो है वो प्रोफेशनल हैं या स्टूडेंट हैं या होम मेकर्स हैं उस हिसाब से कॉमन सेंस का इस्तेमाल करते हुए आप डिसाइड कर सकते हो की मुझे पोस्टिंग कब करनी है। ध्यान रखना कि जब आप पोस्ट करते हो उसी समय अगर आपके ऑडियंस के पास समय हो तो तब आपका कॉन्टेंट ज्यादा देखा जाता है और जितने ज्यादा लोग देखेंगे, जितने ज्यादा लोग कॉन्टेंट के साथ रिएक्ट करेंगे, शेयर करेंगे, लाइक करेंगे उतना ही वो ज्यादा वायरल होने वाला है। तो पोस्टिंग के टाइम पर भी ध्यान रखिये। हमेशा ध्यान रखना गाइज की एस एस जी मोड में काम करो, स्टार्ट सिम्पल घटिया, इसका मतलब यह नहीं है कि आप घटिया काम करो। इसका मतलब यह है की शुरुआत करो, स्टार्ट करो। भले सिम्पल कॉन्टेंट घटिया, कंटेंट और नौट मैटर काम करते करते आप बेटर बन जाओगे। ऐसा कभी नहीं होगा की आप पहले बेटर बनोगे और फिर काम करोगे। ऐसा कभी नहीं होता तो मैं हमेशा कहता हूँ कि स्टार्ट करना जरुरी है। भले सिम्पल घटिया हो चलेगा। इसे हम एस एस जी मोड कहते हैं। कैमरा से डरिए मत ये भी मत सोचिए कि लोग क्या कहेंगे। क्योंकि लोगो के बारे में सोचोगे तो आगे नहीं बढ़ पाओगे। क्योंकि ज्यादातर लोग कॉन्टेंट बनाना शुरू नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें कैमरा से डर लगता है। या फिर विचार होता है कि लोग क्या कहेंगे। इन दोनों चीजों को छोड़ो। और ये बात समझ में कंटेंट को सारे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डालिए और कॉल टू एक्शन देना। मत भूलना। कॉल टू एक्शन का मतलब है की आपका कंटेंट देखने के बाद ऑडियंस करे। क्या जैसे आपको डिरेक्ट मेसेज करे या व्हाट्सएप पर आपसे संपर्क करे या क्या करे। यह बताना जरूरी है। ऑफर दीजिए। लोगों को डील क्लोज कीजिए। मोस्ट इम्पोर्टेंट चीज है। आज इसी की वजह से लोकल बिजनेसेज बहुत ही ज्यादा उछाल अपने रेवेन्यू में देख रहे हैं। सो डू नॉट मिस, द ट्रेन स्टार्ट क्रिएटिंग कॉन्टेंट कॉन्टेंट क्रिएट करना शुरू करो। उसके बाद सिक्स स्टेप पे शेड्यूल बना लो। हमेशा ध्यान रखना कि अगर कोई आपके कॉन्टेंट के साथ इंटरेक्ट कर रहा है तो उसको रिप्लाई देना चाहिए। अगर कोई आपको कमेंट दे रहा है तो उसे जवाब दीजिए। अगर किसी का कॉमेंट अच्छा है तो उसे पिन कीजिए हर कमेंट का जवाब देना चाहिए। आप ऑडियंस को सवाल पूछ सकते हो, कॉल टू एक्शन दे सकते हो, पोल्स रन कर सकते हो। और लोकल ग्रोथ के लिए लोकल हैश टैक्स का इस्तेमाल कीजिए। इस गिव यू वेरी गुड रिजल्ट्स सो यू हैव टू स्टे ऑन द सेड्यूल एंड क्रिएट एंगेजमेंट नाव एंगेजमेंट क्रिएट करने के बाद सातवां स्टेप है कि उसे एनालिटिकली स्टडी करना शुरू कीजिए। सिर्फ पोस्टिंग करने से काम नहीं होगा। एनालाइज करना पड़ेगा, ट्रैक करना पड़ेगा कि कितने लोग आपके साथ इंगेज हो रहे हैं, एंगेजमेंट इज इक्वल टू इन्ट्रेस्ट कितनी पोस्ट आपकी देखी जा रही है, रिज कितनी है, क्यूंकि रीच, इस इक्वल टू विजिबिलिटी कितने लोग आपको डायरेक्टली मेसेज कर रहे हैं, वो पोस्ट देखकर, डीएम इज इक्वल टू लीड और आपका कॉन्टेंट देखकर कितनी आपकी सेल हो रही है कितनी आपकी बुकिंग हो रही है। बिकज दैट इज इक्वल टु योर रेवेन्यू। तो सिर्फ कॉन्टेंट बना के डालने से काम नहीं होगा। हमे ध्यान भी रखना होगा कि कौन सा कॉन्टेंट, कितना इंगेज हो रहा है, कितना रीच हो रहा है, कितने हमें उसमें से मेसेज आ रहे है और किस तरह का कॉन्टेंट हमारी ऑडियंस को पसंद आ रहा है। तो एनालिटिक्स को स्टडी करना इम्पोर्टेंट है। आठवे स्टेप में आप कस्टमर रिटेंशन पर भी फोकस कीजिए। कस्टमर्स को रिटेन करने के लिए अच्छे अच्छे गूगल रिव्यूज इकट्ठा कीजिए। अपने ऑडियंस, अपने कस्टमर्स को अपने व्हाट्सएप के ब्रॉडकास्ट लिस्ट में डालिए अपने ग्रुप्स ज्वाइन कराए। क्योंकि अगर आपकी ऑडियंस जो है आपके पास आपके व्हाट्सएप ग्रुप में होगी, ब्रॉडकास्ट लिस्ट में होगी तो आप उसे फेस्टिवल के प्रमोशन्स भेज पाओगे, डिस्काउंट कूपन्स दे पाओगे। और अगली बार उनसे संपर्क करने के लिए आपको पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। वरना पेड़ एस एम एस पेड व्हाट्सएप भेजने में पैसे जाते हैं। तो अपने ऑडियंस को रिटेन कीजिये। अपने फेसबुक ग्रुप में या व्हाट्सएप ग्रुप में या टेलीग्राम ग्रुप में। कहीं न कहीं मैं जानता हूँ कि मैंने बहुत कम समय में आपको बहुत सारी जानकारी दे दी है। डू नॉट गेट, ओवर फिल्म पेशेंस इज द की। मैं आपको बताता हूँ कि ये 90 दिनों में आप कैसे कर सकते हो। पहले 30 दिन रिसर्च कीजिए। अपने प्रोफाइल्स क्रिएट कीजिए। आहिस्ते आहिस्ते पोस्टिंग करना शुरू कीजिए, रिव्यूज लेना शुरू कीजिए। पहले 30 दिनों में सिर्फ काम को शुरू करना जरूरी है। थर्टी डेज में 1 बार काम शुरू हो जाए। तो फिर तीसवे से साठवे दिन के बीच में आप अपनी पोस्टिंग की फ्रीक्वेंसी थोडी थोडी बढ़ाइए, अलग अलग प्रकार के कंटेंट बनाना शुरू कीजिए, पोल्स लेना शुरू कीजिए, स्टोरी पे रिप्लाइज लेना शुरू कीजिए, ऑफर लगाइए थोड़ी बहुत एड्वटीजमेंट का भी सहारा ले सकते हैं। यह सब महीने भर के बात करना। 1 बार 60 दिन तक आप यूज टू हो जाए। यह सब कुछ करने में। फिर से नाइनटी डे के बीच में एनालाइजेशन शुरू कीजिए, फिर देखना शुरू कीजिए की क्या अच्छा लग रहा है, ऑडियंस को क्या नहीं लग रहा है उसके हिसाब से अपने कॉन्टेंट को थोड़ा बदलते रहिये कन्वर्जेंस की तरफ। फिर ध्यान देना शुरू कीजिए थोड़ा जोर दीजिये की कनवर्जेंस हो जाए, रेफरल और इन्फ्लूएंसर मार्केटिंग का भी सहारा ले सकते हैं। नाव गाइज। कुछ ही मिनटों में मैंने आपके सामने सोशल मीडिया से लोकल बिजनेस बढ़ाने की पूरी की पूरी भगवत गीता रख दी। इसमें बहुत सारा नॉलेज है। यह सबकुछ हंड्रेड परसेंट प्रैक्टिकल है और पॉसिबल है। प्रोवाइडेड आप स्टेप बाय, स्टेप बाय स्टेप इसे इम्प्लीमेंट करें करना चाहते हैं, इसे और डीटेल में सीखना चाहते हैं। तो इस विडियो के नीचे 1 लिंक दी हुई है। मैं बहुत जल्द इस विषय पर 1 वेबिनार करने वाला हूँ जिसके अंदर मैं आपको बताने वाला हूँ की किसी भी बिजनेस को ग्रो करने के लिए सिर्फ 3 चीजें चाहिए प्रेजेंट्स, ट्रैफिक और कन्वर्शन ये तीनों चीजें आप कैसे बना सकते हैं, कैसे इसका फायदा उठा सकते हैं यह सब कुछ सिखाने वाला हूँ। इस लाइव ट्रेनिंग में ज्यादा सोचिए मत लिंक दी हुई है क्लिक कीजिए, रजिस्टर कीजिए और मिलिए मुझसे मेरे लाइव वेबिनार में आपके बिजनेस को हम 4 चांद लगाएंगे।
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