In this Hindi tutorial, Sandeep Sir walks viewers through the complete process of creating professional Facebook (Meta) ads using the Ads Manager. He begins by emphasizing the need to define the purpose of advertising and select the appropriate campaign objective—awareness, traffic, engagement, lead generation, conversion, or app install—based on the business’s goals. He illustrates how different types of businesses (e.g., FMCG brands, local boutiques, car dealers, e‑commerce platforms) align with specific objectives. The video then dives into the ad‑set level, detailing how Facebook requires information about the target audience (demographics, interests, behaviors, location), schedule (start/end dates and times), placements (Facebook feed, Instagram feed, Stories, Reels, Messenger, etc.), and budget (lifetime vs. daily). Sandeep explains the four key questions for an ad set: who to show the ad to, when to show it, where to show it, and how much to spend. Finally, he covers the creative layer—choosing images or videos, writing copy, selecting call‑to‑action buttons—and stresses that the creative must reflect the marketing message and timing (e.g., morning ads for incense, night ads for condoms). Throughout, he repeatedly ties each setting back to the overarching goal of increasing sales or brand visibility, providing practical examples and a clear, step‑by‑step workflow from campaign objective to ad creative.
Chapters
जिन लोगों के पास एक से ज़्यादा बिजनेसेज हैं, जैसे मेरे पास एक से ज़्यादा बिजनेस है, मेरे पास मेरे कपड़े का भी बिजनेस है, डिजिटल भी बिजनेस है, और भी बिजनेस हैं। इस समय हम सिर्फ एड मैनेजर पे फोकस करते हैं कि जहाँ पे हम प्रोफेशनल एड लगाना सीखें। मेन हमें जो सीखना है वो है प्रोफ कैंपेन में फेसबुक क्या पूछता है? कैंपेन में फेसबुक पूछता है कि भाई ऑब्जेक्टिव क्या है? एडवरटाइजमेंट क्यों कर रहे हो? क्या ट्रैफिक चाहते हो? इंगेजमेंट चाहते हो? लीड जेनरेशन चाहते हो? सिर्फ अवेयरनेस चाहते हो? सेल करना चाहते हो कुछ? या ऐप इंस्टॉल करना चाहते हो? ये ऑप्शन्स आपको मिलेंगे जब आप कैंपेन के अंदर जाओगे। इनमें से हम क्या करना चाहते हैं? हो सकता है आप में से ज्यादातर लोग लीड जनरेशन करना चाहते हो, जैसे डिजिटल आज़ादी में मैं लीड जनरेट करना चाहता हूँ। लेकिन जरूरी नहीं है कि इस दुनिया में हर कोई लीड ही जेनरेट करना चाहता है। मुझे चाहिए कि मेरी ऑडियंस का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी मुझे मिले। हर कोई थोड़ी चाहता है। सोचो पार्लेजी का बिस्किट अगर बिक रहा है और पार्लेजी अगर एडवरटाइजमेंट कर रहा है, तो क्या वो लीड जनरेट करना चाहेगा? नो पारले जी सिर्फ चाहेगा अवेरनेस पारले जी ताकतवर बिस्किट मल्टी विटामिन का बिस्किट या पारले जी में सपोस कोई नया फ्लेवर आ गया तो वो नई चीजों के बारे में लोगों को बताएगा अवेरनेस पारले जी अगर YouTube पर या Facebook पर आपको बिस्किट के एडवर्टीजमेंट दिखा रहा है, तो वो नहीं चाहता कि आप वहाँ पे क्लिक करो और बिस्किट खरीदो। नहीं, वो सिर्फ चाहता है आपको याद दिलाना कि सबसे अच्छा बिस्किट पारले जी का है। वो सिर्फ ब्रांडिंग कर रहा है, सिर्फ याद दिला रहा है, अवेयरनेस कर रहा जैसे Times of India newspaper अगर advertisement कर रहा है, तो वो चाहता है कि आपको न थोड़ी सी news बताई जाए, आप उसपे क्लिक करो और उनकी website पे जाओं। तो they want traffic, वो चाहते हैं कि जादा से जादा लोग हमारी website पे आएं और news पढ़ें, तो वो traffic चाहते हैं। ठीक है कुछ लोग छोटे-छोटे बिजनेसेज जिन्हें लीड जेनरेट नहीं करनी कुछ नहीं करना छोटा बिजनेस है नहीं की दुकान है बुटीक है जिम है वो लोग चाहते हैं कि लोग हमारी एड को देखें और हमें सिर्फ WhatsApp पर मैसेज करें या अच्छा कमेंट डालें या कमेंट में अपना नंबर डालें ताकि हम उन्हें संपर्क कर सक तो दे जस्ट वांट लाइक और कमेंट्स तो ये होती है एंगेजमेंट ऐड फिर मेरी तरह के लोग हैं जिन्हें भाई सामने वाले का नाम मोबाइल नंबर ईमेल आईडी चाहिए वो लीड जनरेशन करेगा जैसे कोई कार बेच रहा है मर्सिडीज़ बेच रहा है मारुति बेच रहा है हुंडई की गाड़ी बेच रहा है तो वो लोग चाहते क्या सेल कन्वर्जन वाला पब्लिक होता है? कभी देखा है? अमेज़न के प्रोडक्ट्स, फेयर एंड लवली, कोई नई चाय आ गई, कोई नई कॉफी आ गई, कोई नई टी-शर्ट आ गई, कोई नई शर्ट आ गई, कोई नई लिपस्टिक आ गई। फ्लिपकार्ट के एड्स होते हैं, मीशो के एड्स होते हैं, ई-कॉमर्स वाले सेल कन्वर्जन की एड करते क्लिक करो सीधा खरीदने के पेज पर चले जाओ प्रोडक्ट के पेज पर सीधा प्रोडक्ट के पेज पर प्रोडक्ट अच्छा लगे ऐड टू कार्ड करो पेमेंट करो वो आपका नाम मोबाइल नंबर ईमेल आईडी नहीं चाहते वो चाहते हैं आप डायरेक्ट प्रोडक्ट खरीदो तो ये जो सेल कन्वर्जन होता है ये होता है सौ रुपए दो सौ रुपए पांच सौ कोई लाख, दो लाख, दस लाख, करोड़ रुपए का प्रोडक्ट डायरेक्ट सेल कन्वर्जन से नहीं खरीदता। कोई डायरेक्ट सेल कन्वर्जन से गाड़ी नहीं खरीदता। कोई डायरेक्ट सेल कन्वर्जन से फ्लैट नहीं खरीदता। तो मिडिल लेवल के जो प्रोडक्ट्स हैं, वो इसमें बिक सकते हैं। हायर प्रोडक्ट्स नहीं बिकते। फिर आत कैंडी क्रश सबवे सर्फर या स्टॉक वाले एड्स स्टॉक वाले ऐप्स अपस्टॉक जीरो था तो ये कुछ लोग हैं जो अपना ऐप इंस्टॉल कराना चाहते हैं नाउ ये इतनी सारी चीजें मैंने आपको क्यों बताईं ये इतनी सारी चीजें मैंने आपको इसलिए बताईं क्योंकि जब आप प्रोफेशनली एडवरटीजमेंट करना शुरू करोगे, तब आपको सबसे पहले ये देखना होता है कि ये एडवरटीजमेंट मैं क्यों कर रहा हूँ, मकसद क्या है, ऑब्जेक्टिव क्या है, पर्पस क्या है? पर्पस पता चलेगा, तब तो आगे काम होगा। तो कैंपेन में आप सबसे पहले डिसाइड करते हो ऑब्जेक्ट अगर कैम्पेन लेवल पर ये चीजें क्लियर हैं, तो फिर एड सेट में क्या होगा? What will be ad set? एड सेट के अंदर फेसबुक जानना चाहता है किसे एडवरटाइजमेंट दिखानी है, टारगेटिंग किसे करें? आप सबसे पहले हमें इसका शेड्यूल बताओ, भाई एड स्टार्ट कब करनी है? डेट टाइम, एंड कब करनी है? डेट टाइम। प्लेसमेंट बताओ, एडवरटाइजमेंट रखनी कहाँ है? फेसबुक पे रखनी है, इंस्टाग्राम पे रखनी है, इंस्टाग्राम पे रील में, शॉर्ट में, मैसेज में कहाँ? फेसबुक में, रील में, स्टोरी में, फीड में, मैसेज में कहाँ? तो आप फिर आप बजट बताओ, भाई लाइफटाइम बजट है कि डेली बजट है, और फिर इंटरेस्ट बताओ, भाई डेमोग्राफिक्स बताओ, मेल को दिखाऊँ, फीमेल को दिखाऊँ, ऐज क्या होगी, एड्रेस क्या होगी, कौन से स्टेट में, इंडिया में, अब्रॉड में, कहाँ दिखाऊँ? और उनका बिहेवियर क्या होगा? बिहेवियर यानी पढ़े-लिखे फोरव्हीलर चलाने वालों को दिखाऊं, टूव्हीलर चलाने वालों को दिखाऊं, डॉक्टरों को दिखाऊं, वकीलों को दिखाऊं, शादीशुदा को दिखाऊं, सिंगल लोगों को दिखाऊं, जिनके बच्चे हैं उन्हें दिखाऊं कि जिनके बच्चे नहीं हैं उन्हें दिखाऊं कुछ तो बताओ किसे दिखाऊं? तो एड सेट लेवल पर फेसबुक प और कितना दिखाऊं? इंटरेस्ट का मतलब है किसे दिखाऊं? शेड्यूल का मतलब है कब दिखाऊं? प्लेसमेंट का मतलब है कहाँ दिखाऊं? और बजट का मतलब है कितना दिखाऊं? किसे, कब, कहाँ, कितना? K K K K First K was किसे दिखाऊं? Second K was कब दिखाऊं? Third K was कहाँ दिखाऊं? And fourth K was कितना दिखाऊं? अब देखो मज़ा किसे कब कहां और कितना यही अगर मैं objective के लिए लिखूं तो के है कि क्यूं क्यूं दिखाऊं यह है जवाब आपका क्यूं का तो आप campaign समझ गए आप ad set समझ गए अब last में आता है ad एड का मतलब है भाई क्रिएटिव क्रिएटिव का मतलब क्या है? क्रिएटिव का मतलब है कि भाई क्या दिखाऊं? What should I show? इमेज दिखाऊं, वीडियो दिखाऊं, बटन पे क्या लिखूं, टेक्स्ट पे क्या लिखूं? वो तो बताओ। क्या दिखाऊं? अपनी मार्केटिंग के बारे में सोचो। सबसे पहले सोचो कि भई मुझे उसको क्या दिखाना है? क्या मेरे पास कोई इमेज है? क्या मेरे पास कोई वीडियो है? फिर सोचना कि मुझे किसे दिखानी चाहिए? कब दिखानी चाहिए? कहाँ दिखानी चाहिए? कितनी दिखानी चाहिए? अगर अगरबत्ती की एड है तो सुबह दिखाओ। अगर कॉन्डम की एड है तो रात को दिखाओ। किस लोग और बजट कितना है, कितना पैसा खर्च कर सकते हो, दिन का कितना, हफ्ते का कितना, महीने का कितना सोचो और फिर ये सोचो कि मैं ये एडवरटाइजमेंट क्यों कर रहा हूँ? हाँ हम सब पैसे कमाना चाहते हैं। ये मत बोलना because I want to earn। देखो ultimately तो हर कोई अपनी सेल बढ़ाना चाहता है। Ultimately तो हर कोई अपनी सेल बढ़ाना चाहता है आप awareness करना चाहते हो, traffic करना चाहते हो, engage करना चाहते हो, lead generate करना चाहते हो, या directly आप अपने product का page बनाकर sell करना चाहते हो। तो आज मैंने आपको concept clear कर दिया।