Traffic Kaise Laye? | Organic vs Paid Traffic Explained | Kashmir Gave Me My Best Ad

In this Hindi‑language video Sandeep Sir explains that traffic – the flow of people to a business – is the most important asset. He divides traffic into two broad categories: organic (free) and paid (advertising). For organic traffic he outlines three repeatable engines: (1) Social‑media optimisation – continuous posting, engagement tactics (comments, saves, reels) to stay on the feed and trigger virality; (2) Search‑engine optimisation (SEO) – on‑page, off‑page, quality links, blog content, and a 30‑day challenge to improve rankings; (3) Referral/Affiliate engine – a one‑time set‑up that rewards people for bringing new customers, creating a self‑sustaining growth loop. He adds a fourth collaborative traffic model where complementary businesses share leads (lead‑for‑lead or value‑for‑value) to expand each other’s audience. He then moves to paid traffic, distinguishing push marketing (social‑media ads) from pull marketing (search‑engine ads). Push ads interrupt users’ leisure time and must capture attention within 3‑7 seconds with compelling content. Pull ads appear when users actively search for a term, requiring precise keyword research. He illustrates both approaches with a personal story: while traveling in Kashmir he used Google to find a restaurant, recorded the experience, and turned it into a simple video ad that performed exceptionally well because the restaurant was already visible on Google. The video stresses that interesting, relatable content is essential for both push and pull campaigns. Throughout, Sandeep stresses consistency, patience, and strategic thinking as the keys to generating sustainable traffic.
Chapters
मोस्ट इम्पोर्टेंट चीज है वो है ट्रैफिक और ये सायंस लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने की और उन्हें लाने की इसे कहते हैं ट्रैफिक। अब ट्रैफिक में भी 2 पार्ट है, 1 होता है ऑर्गेनिक ट्रैफिक की जहाँ पर आप पैसे खर्च नहीं करते बिना पैसे खर्च किए जब लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करना है तो उसे कहेंगे ऑर्गेनिक ट्रैफिक और जहाँ पर आप पैसे खर्च कर के लोगों को अपनी तरफ लाते हो वो है इन ऑर्गेनिक ट्रैफिक तो ऑर्गेनिक अगर आप डेवलप करना चाहते हैं तो इसमें अगेन 2 चीजें हैं, 1 है सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन जो आपके सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स हैं आप इन्हें ऑप्टिमाइज कीजिए। अब सोशल मीडिया में 1 प्रोब्लम है सोशल मीडिया जो है यह फील्ड बेस्ट प्लेटफार्म है। आपने कभी फेसबुक या इंस्टाग्राम को देखा है तो आपने यह ऑब्जर्व किया होगा कि जब आप फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कुछ भी पोस्ट करते हो तो ये पोस्ट आ जाती है, लोगो को दिखाई देती है लेकिन जब दूसरा कोई पोस्ट करता है तो आपकी पोस्ट जो है वो नीचे खसक जाती है उसके ऊपर आ जाती है और कोई पोस्ट करेगा आप दोनो की नीचे चली जाएगी, तीसरी आ जाएगी फिर चौथी आ जाएगी फिर पांचवी आ जाएगी, फिर छठी आ जाएगी और इस तरीके से ये नीचे नीचे नीचे नीचे जाता रहता है। तो अगर आपको बार बार लोगों को याद दिलाना है तो आपको ऊपर आना पड़ता है, बार बार पोस्ट करना पड़ता है। इट इस फीड बार बार देना पड़ता है। फेसबुक को, इंस्टाग्राम को भाई, ये फोटो ले, ये वीडियो ले, ये ले, ये ले दिखा दिखा, दिखा, इट इस कॉल्ड फीड बेस्ट इसके लिए आपको कंटिन्यूस ली पोस्टिंग करनी पड़ती है आपको इंगेजमेंट की स्ट्रैटेजी बनानी पड़ती है, इंगेजमेंट की स्ट्रैटेजी क्यों बनाया जाता है। आपने देखा होगा की आजकल जो रील्स आती है जो शौर्ट्स आते हैं उसमें लोग कहते हैं अगर ये चाहिए तो निचे कमेंट कर के बताओ अगर ये चाहिए तो लाइक करो, सेव करो तो ये क्यों करते हैं। पहली बात तो जब आप किसी से कॉमेंट मांगते हो और वो कमेंट करता है तो आपकी पोस्ट दुबारा ऊपर आ जाती है कि अभी इस पर किसी ने कमेंट किया फिर नीचे नीचे, नीचे नीचे जाएगी, फिर कॉमेंट आया फिर ऊपर आ जाएगी, फिर नीचे नीचे, नीचे जाएगी, फिर कॉमेंट आया फिर ऊपर आ जाएगी तो ये कमेंट जो है इससे आप अपनी पोस्ट को दोबारा ऊपर लाने की कोशिश कर रहे हैं और जब आप कहते हो लोगो को की सेव करो, आप जब किसी को सेव करवाते हो और आपकी जो पोस्टिंग है वो सेव हो रही है तो इंस्टाग्राम को ऐसा लगता है की अरे ये पोस्ट जो है कुछ अच्छी लग रही है लोग इसे सेव कर रहे हैं मतलब लोगो को वैल्यू मिल रही है, लोग इसे बार बार देखना चाहते हैं त इंस्टाग्राम का अल्गोरिदम जो है वो आपके पोस्ट को उठाता है और बहुत सारे लोगो को दिखाना शुरू करता है पोस्ट वायरल हो जाती है और आप देखोगे अचानक ऐसी फाइव के टेन के व्यूज, फिफ्टी के व्यूज, वन मिलियन व्यूज ऐसे फटाक से पहुँच जाता है। इसे कहते हैं वायरल होना, सो सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन यानी सोशल मीडिया का उपयोग करना। अपनी ऑर्गेनिक ट्रैफिक के लिए ये फीड बेस्ट काम है। इसमें कंटिन्यूस पोस्टिंग करनी पड़ेगी एंगेजमेंट की स्ट्रैटेजी पर ध्यान देना पड़ता है। और बिना पैसे खर्च किए लोगो को अपनी तरफ लाने का 1 और तरीका है एस ई ओ जिसे हम कहते हैं सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन गूगल पर कोई जाए सर्च करे तो आपका नाम आ जाए एस इ ओ और ये सर्च बेस्ट है और क्यूंकि ये सर्च बेस्ट है तो आपकी वेबसाइट अच्छी होनी चाहिए वेबसाइट की रैंकिंग अच्छी होनी चाहिए इसका एस सी ओ होना चाहिए जो थर्टी डेज चैलेंज में आप सीखोगे क्वालिटी लिंक होनी चाहिए मेंशन्स होनी चाहिए। आपका ऑन पेज, एस सी ओ, ऑफ पेज, एसईओ बेटर होना चाहिए, सब कुछ ऑप्टिमाइज्ड होना चाहिए। आपकी वेबसाइट पर ब्लॉग होना चाहिए, नॉलेज होना चाहिए। तभी कहीं जाकर गूगल उसे दिखाएगा। ऐसा नहीं है कि ऑर्गेनिक ट्रैफिक पॉसिबल नहीं है इट इस हंड्रेड परसेंट पॉसिबल इट टेक्स टाइम टू डेवलप पेशेंट्स चाहिए। मेहनत करनी पड़ती है, कंसिस्टेंसी लगानी पड़ती है और तब कहीं जा कर ये काम होता है मैंने ये 2 रास्ते आपको बताए बिना पैसे खर्च किए लोगो को अपनी तरफ लाने के सोशल मीडिया और सर और कोई तरीका है बिना पैसे खर्च किए लोगों को लाने का ट्रैफिक लाने के लिए जो तीसरा तरीका है बिना पैसे के वो है रेफरल जिसे हम कहते हैं वर्ल्ड ऑफ माउंट या 1 एफिलिएट इंजन। लोगों को अपने पास लाने के लिए वर्ल्ड ऑफ माउंट के साथ साथ एफिलिएट इंजन होना चाहिए। अगेन वन टाइम एक्टिविटी है 1 बार क्रिएट कर 2 और उसे चलाना शुरू करो। अगर 1 व्यक्ति, 1 व्यक्ति को बताएगा या 2 व्यक्तियों को बताएगा आपके बारे में तो आपके कस्टमर हमेशा बढ़ते रहेंगे, क्लायंट हमेशा बढ़ते रहेंगे और बिजनेस विल नेवर स्लो डाउन पर उसके लिए ये इंजन यह प्रणाली आपके पास होनी तो चाहिए कितने लोगो की बत्तियाँ जल रही है जरा बीजे बत्ती जली लिख कर बताओ आर यू अंडरस्टैंडिंग गई आर यू अंडरस्टैंडिंग बत्ती जली जरूरी है और एफिलिएट इंजन हर बिजनेस में लग सकता है। लगभग ऑलमोस्ट एव्री बिजनेस में आप यह कर सकते हैं नाव रेफरल के बाद कोलैबोरेटिव ट्रैफिक आपके पास आना चाहिए कोलैबोरेटिव ट्रैफिक इसका मतलब क्या है? लीड शेयरिंग वित कॉम्प्लिमेंटरी बिजनेस, लीड शेयरिंग वित कॉम्प्लिमेंटरी बिजनेसेस मतलब आपके बिजनेस से रिलेटेड बिजनेसिस जो हैं उनसे आप लीड शेयर कर सकते हैं उनकी परमिशन लेकर और दोनों राजी हो तो चोरी नहीं करनी हमें लीड की हमें 1 दुसरे के साथ कोलैबोरेट करना है कैसे अलगिवीअनएग्जाम्पल मेरा साड़ियों का बिजनेस है ठीक है मेरा साड़ियों का बिजनेस है तो मेरी दुकान में मैंने देखा बहुत सारे लोग आते हैं साड़ियां बल्क में परचेज करते हैं जब उनके घर में शादी होती है और मैंने देखा की यार ये हमेशा शादी जो तारीख निकाली है उसके 10 पंद्रह 20 दिन 25 दिन पहले परचेस हो रही है तो उनकी शादी तय हो गयी, उन्होंने वो हॉल वगैरह बुक कर दिया। फिर उसके बाद वो आते हैं, साडिया खरीदने कपड़ा लत्ता लेने। अब यहाँ पर मेरी बत्ती जली। मैंने कहा यार तो मेरे पास ये कपड़ा खरीदने आये। इससे पहले क किसे पता चला की इनके घर में शादी है, सोचना और देखो मैं कैसे सोच रहा हूँ। ये कपड़ा खरीदने मेरी दुकान में आये क्योंकि इनके इनके घर में सपोज शादी तय हुई है। तो ये शादी तय हो गई। यह मुझसे पहले किसको पता चला होल वाले को, होटल वाले को, जहाँ पर ये शादी होने वाली है, जिस घर में शादी तय होती है, वो सबसे पहले होल बुक करते है, बैंक्वेट बुक करते हैं, क्यूँ की कमी है, उसकी शार्टेज होती है। अब मैंने क्या किया? मैंने शादी के हॉल वालों को जाकर अप्रोच किया। आपके पास जैसे ही बुकिंग आती है या इन्क्वायरी आती है, आप वो इनक्वायरी या बुकिंग मुझे दीजिये। मैं प्रति लीड, आपको सौ रूपए दूंगा, अंडरस्टैंड वट सिंह अंडरस्टैंड करो। अब वो व्यक्ति सोच रहा है, मैं अपनी किताब में लिखूंगा भाई, इसकी इन्क्वायरी आई या इसकी बुकिंग हो गई। मुझे क्या करना है, सिर्फ फोटो निकाल कर इसे भेज देना है। और यह प्रति नाम, प्रति एड्रेस मुझे सौ रुपए दे रहा है। तो पूरे महीने में अगर 20 शादियां हो रही हैं, 20 एड्रेस में इसे दे रहा हूँ तो मुझे 2000 रूपए मिल रहे हैं। मुझे तो फोटो भेजना है। ये लीड, फॉर लीड की बात हो गई। अब मैंने उन्हें पैसे दिए क्योंकि मेरे पास जब साड़ियां खरीदने आते है तब मैं नहीं कह सकता कि यहाँ पर शादी करो क्योंकि शादी जहाँ होती है, जो हाल में वो जोग्राफिक सही होना चाहिए। तो मैंने उन्हें कम्पेनसेट कर दिया। लीड परचेस कर ली। हम भी अपने बिजनेस में ऐसा कुछ कर सकते हैं कि जहाँ पर हम क्लाइंट को जल्दी ग्रैब कर सकें। और ये कोलैबोरेटिव है। आप कॉम्प्लिमेंटरी बिजनेस के साथ लीड शेयर करते हो, वैल्यू देते हो, वैल्यू फॉर वैल्यू या लीड फॉर लीड या कस्टमर फॉर, कस्टमर कोई न कोई सिस्टम बिठाते हो, जिसकी वजह से आपके इको सिस्टम में ट्रैफिक आना शुरू हो जाए। अगला तरीका ट्रैफिक लाने का। अपनी वेबसाइट पर है इन ऑर्गेनिक जो मैंने आपको बताया की। एड्स के जरिए एड्स भी 2 प्रकार की होती हैं। 1 होता है सोशल मीडिया मार्केटिंग, जहाँ पर आप सोशल मीडिया पर यानी फेसबुक इंस्टाग्राम ऐसी जगहों पर मार्केटिंग करते हो। दूसरा तरीका होता है सर्च इंजन मार्केटिंग यानि गूगल और यू ट्यूब पे करना। अब इन दोनो मार्केटिंग में फर्क है। सोशल मीडिया मार्केटिंग को कहते हैं पुश मार्केटिंग और सर्च इंजन मार्केटिंग को कहते हैं पुल मार्केटिंग, पुश मार्केटिंग एंड पुल मार्केटिंग। इनमें फर्क है। अंडरस्टैंड कीजिए क्या मुझे बताइए जब कोई फेसबुक या इंस्टाग्राम पर गया है, उस प्लेटफार्म पर क्या वो शौपिंग करने गया है? जिस दिन आपने मेरी एडवरटीजमेंट देखी थी फेसबुक पर या इंस्टाग्राम पर? क्या आप वहाँ पर? डिजिटल मार्केटिंग को ढूंढने गए थे, डिजिटल आजादी को ढूंढने गए थे, क्या आप संदीप बंसाली को ढूंढने गए थे? द आंसर इस नो नो आप अपना काम कर रहे थे, आप अपना टाइम पास कर रहे थे, आप रिलैक्सिंग यू आर हैविंग योर ओन टाइम आप अपने मजे कर रहे थे और वहाँ पर बीच में आके मैंने धक्का देकर आपको मेरी ऐड दिखाई क्या आप 1 बिजनेस मैन हैं? क्या आप अपना बिजनेस ऑनलाइन ले जाना चाहते हैं? क्या आप 1 हाउस वाइफ हैं? क्या आप 1 प्रोफेशनल है? हुआ ऐसा सो दिस इस कॉल्ड पुश मार्केटिंग जहाँ मैंने धक्का देकर, जबरदस्ती आपको एडविटीजमेंट दिखाई आप चाहो न चाहो ये जो पुष मार्केटिंग है इसके लिए इंट्रस्टिंग कॉन्टेंट बनाना जरूरी है। 9 अंडरस्टैंड दैट जो आप बात कह रहे हो उस एड में उसने 3 सेकेंड से 7 सेकंड के अंदर सामने वाले का ध्यान पकड़ लेना चाहिए। मैं 1 दिन कश्मीर गया था घूमने तो कश्मीर में गुलमर्ग के पास 1 खाइबर नाम की जगह है मतलब 1 होटल है खाइबर वो मुझे बहुत पसंद है मैं हमेशा वहाँ जाता हूँ और खाइबर में जा रहा था तो रास्ते में हम खाना खाने कहीं रुके। तो श्वेता ने मेरी वाइफ ने मुझे कहा की कहाँ खाना खायेंगे मैंने कहा मैं गूगल देखता हूँ मैंने गूगल देखा रास्ते में कौन कौन से रेस्तरा सबकी रेटिंग वगैरह देखिये 1 मुझे पसंद है हम गए वहाँ हमने खाना खाया, खाना खाकर, बाहर में आया ड्राइवर जब तक गाड़ी निकाले मैंने सोचा यार वाह क्या कमाल की चीज है। मैंने खुद गूगल यूज किया इस रेस्तरां तक पहुँचने के लिए इस होटल और मेरा कोई रिलेशन नहीं है। मैं जानता भी नहीं था तो मैंने सोचा दीदी ये अच्छा हुक एंगल है मैंने अपना मोबाइल निकाला और अपने मोबाइल में मैंने 1 वीडियो रिकॉर्ड किया कश्मीर जा रहा हूँ रास्ते में भूख लगी सोचा कहीं खाना खाए, गूगल खोला होटल सर्च किए 1 होटल मिला इसकी रेटिंग अच्छी थी तो में चला गया मुझे अच्छा खाना मिला और इस होटल को अच्छा बिजनेस मिला सिर्फ इसलिए क्यूंकि ये होटल गूगल पर प्रेजेंट है इसकी रिव्यू रेटिंग अच्छी है। तो अगर आप 1 होटल या रेस्तरां के ओनर है तो सोचिए क्या आप गूगल पर सर्च करने पर मिलते हैं? अगर नहीं तो यह कैसे होता है यह मैं आपको सिखा सकता हूँ। ऐसे करके मैंने 1 एड बना दी और इस एड को मैंने चलाया एंड ये मेरी सबसे हास् परफॉर्मिंग एड है, हास परफॉर्मिंग एड है इट्स अ वेरी सिम्पल एड। मैंने ऐसे मोबाइल पर ऐसे ही शूट करके डाल दिया लेकिन द कॉन्टेंट वाज इंटर सो द आइडिया इस की आपका कोंटेंट जो है वो इंट्रस्टिंग होना चाहिए एंड इंट्रस्टिंग कैन, बी एनी, थिंग इंट्रस्टिंग कैन, बी एनी, थिंग यू, कैन जस्ट यूज और इमेजिनेशन। तो पुश मार्केटिंग के लिए आपको कॉन्टेंट इंट्रेस्टिंग बनाना जरुरी है। एट द सेम टाइम सर्च इंजन पर जब मार्केटिंग करते हैं, जब गूगल पर एड्वटीजमेंट चलती है तो ये पुल मार्केटिंग होती है। पुल पुल मार्केटिंग का मतलब क्या है गूगल पर जाकर अगर कोई सर्च करे डिजिटल मार्केटिंग कोर्स उसे इमिजेटली मेरी एड नजर आए तो वो कनवर्ट हो जाता है। तो यहाँ पर कस्टमर जो है वो इन्फॉर्मेशन पुल कर रहा था ही वाज पुलिंग इनफार्मेशन पुलिंग नॉलेज और वहाँ पर मैंने जाकर उसे एड दिखाई तो इसके लिए करेक्ट कीवर्ड पता होना चाहिए, यह पता होना चाहिए की लोग क्या ढूंढेंगे तो मैं अपनी एड दिखाऊं तो उसके चांसेज है मेरा प्रोडक्ट खरीदने के तो जब मैं आपको डिजिटल मार्केटिंग की देब में ले जाऊंगा बहुत सारी चीजे सिखाऊंगा तो आपके दिमाग में ये सारे ग्राफ बनने शुरू हो जायेंगे आप सारे पैटर्स 1 दुसरे के साथ जोड़ पाओगे आपको समझ में आने लगेगा कि कहाँ पर क्या यूज करना है आपके बिजनेस आपके प्रोफेशन के हिसाब से तो ये रास्ता था इन ऑर्गेनिक ट्रैफिक क्रिएट करने का।
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