
IIT Bombay's Mechanical Department repurposed a liquid-nitrogen facility to produce medical oxygen during India's COVID crisis. By swapping the molecular sieves in their Pressure Swing Adsorption unit, they reversed the process to collect oxygen instead of nitrogen, achieving 93-96% purity in 34 days with help from Tata Consulting Engineers and Spantech.
Chapters
सो हमारी रेफ्रिजरेशन और क्रायोजेनिक्स लेबोरेटरी मैकेनिकल डिपार्टमेंट की 1 लेबोरेटरी है वहां पर आपका सबका स्वागत है मेरा नाम मिलिन दत्र है मैं मैकेनिकल डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हूँ और मैं यहाँ पर डीन रिसर्च डेवलपमेंट भी हू आप मेरे पीछे जो देख रहे हो वो 1 नाइट्रोजन को लिक्विफाई करने का प्लांट है मशीन है जहा पे एटमॉस्फेयर से हवा ले के हम उसको ऑक्सीजन और नाइट्रोजन में सेपरेट करते हैं और नाइट्रोजन आगे जाके उसको हम लिक्विफाई करते हैं लिक्विड नाइट्रोजन तैयार करते हैं मगर अभी जो सिचुएशन है जहाँ पर हमको नाइट्रोजन की जरूरत नहीं है हमको ऑक्सीजन की जरुरत है तो हमने क्या सोचा यहाँ पर 1 डेमोस्ट्रेशन यूनिट बनाया है जिसके कारण हम नाइट्रोजन को बाहर फेंक देंगे और ऑक्सीजन को आगे ले जाएंगे और ऑक्सीजन से हम ऑक्सीजन सिलेंडर में भर सकते हैं जो कि अभी हमको हॉस्पिटल में जरूरत है तो इसके आगे की बात मैं आपको 1 छोटा सा स्कीमैटिक दिखाऊंगा जहाँ पे आपको ये चीज ज्यादा अच्छे से समझ में आएगी सो जैसा मैंने पहले कहा ये हमारे हाँ लिक्विड नाट्रोजन फैसिलिटी है मैकेनिकल डिपार्टमेंट की आईआईटी बॉम्बे में जो हमारी सेंट्रल फैसिलिटी है और यहाँ से लिक्विड नाट्रोजन हम सभी डिपार्टमेंट को रिसर्च करने के लिए देते हैं सो इस प्लांट में 1 कॉम्प्रेसर होता है एयर वेसल दिखाया है और यहाँ पे 1 पीएसए यूनिट होता है सो ये कॉम्प्रेसर है वो बाहर के वातावरण से एटमॉस्फेयर से हवा ले लेता है और यह अराउंड एट टू नाइन बार तक यहाँ पर कॉम्प्रेस करता है कॉम्प्रेस करने के बाद में यह एयर वेसल में वो हवा जो है वो स्टोर होती है इसे स्टोरेज वेसल बोलते हैं ना जो बाहर की जो हवा है उसमें बहुत कंटमिनेंट्स होते है जैसे वाटर वे पर है सीओ टू है हाइड्रो कार्बन से यह हमको पहले निकालनी पड़ेगी तो ये निकाल के ऑक्सीजन और नाइट्रोजन सिर्फ यहाँ पर आ जाएगा तो यह पी एस यूनिट अभी जैसा है क्योंकि यह नैट्रोजन फैसिलिटी है तो इसमें मॉलुकूलरस्यूस डाले है इस लेक के फिल्टर तो यह मॉलुकूलरस्यूस में सिर्फ नाइट्रोजन को हम बाहर अलाव करते हैं और ऑक्सीजन को बाहर रिजेक्ट करते हैं अभी हमको क्या करना है हम इसका उल्टा करना है हमको ये पीएसी यूनिट में ऑक्सीजन को आगे भेजना है और नाइट्रोजन को हवे में बाहर फेंक देना है तो ये कैसे हो सकता है यह हम इसमे जो फिल्टर है यह मोलिकुलर सिवस है वो हमने ऑक्सीजन जिससे जिससे ऑक्सीजन जा सकता है उस साइज की बनाई है जो कि जियोलर्टमलिकलरसिव बोलते हैं तो हमने इसके कार्बन सिव निकाल देंगे और इसको जियो लर्ड में डाल देंगे और ऐसा यूनिट फिर आगे ऑक्सीजन क्रिएट करेगा और फिर वह आगे बफर वेसल में जाके मिलेगा मेरे बाय साइड में आप देखते हो ये एयर कॉम्प्रेसर है जो मैंने बताया था जिसमें हम बाहर के अटमॉस्फियर से हवा लेते हैं और करीब 8 एटमॉस्फेयर और 8 बार तक उसको हम कॉम्प्रेस करते हैं कॉम्प्रेस करने के बाद में वो एयर स्टोरेज यूनिट में जाके बैठ जाता है सो जैसा की हमने देखा था ये जो एयर वेसल है बफर वेसल है यहाँ पर एट एटमॉस्फेयर और एट बार को हमने एयर स्टोर किया है तो यहाँ पर आप 3 यूनिट देखते हो एयर वेसल पी एस यूनिट और यहाँ पर नाइट्रोजन बफर वॉल्यूम है राइट ये पी एस यूनिट में हम नाइट्रोजन को सेपरेट करते हैं नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मिक्सर नाइट्रोजन सेप्रेट करते है जैसे की एयर वहां से आता है उसमें जो कंटेम्ट होते हैं वाटर वे पर है या कार्बन डैक्स या हाइड्रो कार्बन से ऑयल है वो सब सेपरेटर यहां से ड्रायर से इस यूनिट से हो जाता है और पिर नाइट्रोजन ऑक्सीजन यहां से इस पीएसी यूनिट में जाती है सो पी एस यूनिट में ऐसे मोलिकुलर सिवस है जिसमें हम सिर्फ नाइट्रोजन का अलाव कर रहे अभी इस प्लांट में हमे जो करना है ये पी एस यूनिट नाइट्रोजन से ऑक्सीजन में कनवर्ट करना है तो उसके लिए हम क्या करने वाले हैं जो मालिक हमने नाइट्रोजन के लिए बनाई थी वो हम अभी ऑक्सीजन के लिए चेंज करेंगे सिर्फ यही चेंज हमको करना है कि पीएसए नाइट्रोजन की जो मॉलिक्लरस्यूज थी हमको वो ऑक्सीजन के लिए कनवर्ट करना है जो कि हमने किया है अभी सो ये यूनिट में से पहले मालिक निकाल देंगे और हम मालिक ऑक्सिजन मे डाल सकते है सो जितने भी नैट्रोजन प्लांट है दुनिया में या इंडिया में उसमें हम पीएसए यूनिट के एरजॉरबंडमटेरियलजो है पीएसए यूनिट में जो की मॉलिक्लस्यूज है वो हम चेंज कर सकते हैं मॉलिकलसूजऐसे चेंज करेंगे जिससे सिर्फ ऑक्सीजन आगे जायेगा और इस बफफरवालों में बदल जाएगा सो जैसे मैंने बोला था पहले वहां से एयर कॉम्प्रेस 8 बार को होके आती है और इस पीएस जनरेटर को ऑक्सीजन चेंज करने के लिए हमने टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स और स्पैंटेक इनके साथ कोलेबरेशन फॉर्म किया हमने बिल्कुल 1 आधे दिन में हमने एमओयू भी साइन करवा लिया और हमको ऐसा समझा कि स्पैन टेक ये पी एस से बिजनेस में हैं और हमने उनको रिक्वेस्ट की कि आपके पास जो यूनिट आपने मॉडिफाई किया है चेंज किया है जो नैट्रोजन आपने ऑक्सीजन में चेंज किया अगर अब आप हमे वो यूनिट दे सकते तो हम यूनिट को यहां पर टेस्ट करेंगे उसको मॉनिटर करेंगे उसका परफॉर्मंस मॉनिटर करेंगे तो यहाँ पर आप देख सकते हैं 2 फिल्टर्स मैंने बोला था ये दोनो फिल्टर जो है यहाँ पर साइड साइड में लगा है एवरी 2 मिनिट्स वो फिल्टर काम करते हैं और यहाँ पर ऑक्सीजन तैयार होते हैं और ये मुझे बताने को वेरी प्राउड टू से कि हमने नाइंटी थ्री टू नाइंटी सिक्स प्यूरिटी यहाँ पर ऑक्सीजन की मिली है हमको जो आज के दिन में हर 1 हॉस्पिटल में जो पेशेंट जो आईसीयू में नहीं हैं उनके लिए बहुत इंपोर्टेंट साबित हो
सकता है थैंक यू भारत में ये सेकेंड वेव कोविडका जो आया है उसके कारण ऑक्सिजन का शॉर्टेज सब जगह है भारत में तो इस प्रॉब्लम को देखते हुए हमारी टीम ए टाटा, कंसल्टिंग इंजीनियर्स, आई टी बॉम्बे और स्पेन टेक इंजीनियर्स के साथ 1 टीम बनाया 34 दिन पहले और हम लोगों ने देखा कि क्या चीज हम कर सकते हैं जिससे तुरंत ऑक्सिजन की सप्लाई हो जाए तो 1 टेक्नोलॉजी है जिसको कहते हैं पी एस टेक्नोलॉजी है 50 साल प्रूव टेक्नोलॉजी है तो हमने देखा कि जो नाइट्रोजन प्लांट हैं एग्जिस्टिंग अगर उसको क्विकली ऑक्सीजन प्लांट में कनवर्ट कर दिया जाए 2 से 3 दिन के अंदर तो उसमें जो ऑक्सिजन आती है उससे किसी भी पेशेंट या हॉस्पिटल को ऑक्सीजन सप्लाई मिल सकती है डिपेंडिंग ऑन द वॉल्यूम ऑफ द प्लांट तो इसमें कंप्रेसर आपका है और इसके अन्दर मॉलिक्यूलर सीव है जो नाइट्रोजन में अलग होती है और ऑक्सीजन प्लांट में अलग होती है तो हमने अगर नाइट्रोजन की मॉलिक्युलर सीव चेंज करके ऑक्सीजन वाली डाल दी जो बोलते हैं जो लाइट तो उससे आउटपुट नाइंटी फाइव परसेंट ऑक्सीजन आ रहा है ईवन एट फ्लोरेट विच इज गुड फॉर हॉस्पिटल तो मैं यही कहना चाहूंगा कि अगर इंडस्ट्री और एकेडमी आपस में काम करें और काफी इनोवेटिव सलूशन निकालें तो भारत ये ऑक्सीजन की कमी कम कर सकता है तो मैं धन्यवाद देना चाहता हूं आई आई टी बॉम्बे प्रोफेसर आत्रे जी को, स्पैंट के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर जी को और मेरी टीम को और मैं चाहता हूं कि हम ऐसे और आइडियाज लायें जिससे भारत में आत्मनिर्भरता से अपने देश की सेवा कर सकें और ऑक्सिजन सप्लाई कर सकें।
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