A Hindi coaching talk argues that chasing specific goals creates dependence on external validation and fear of judgment. Instead, identify your core values (Purpose, Identity, Passion) and build autonomy, self-acceptance, and continuous improvement. Accept your flaws first, then use what you have to grow.
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जैसे कि ये होगा तो ही मैं खुश होंगा, अटेचमेंट है आपके गोल के साथ और वो जो अटेचमेंट है वहीं आपका हैप्पीनेस नहीं ला रहा है वो है तो आप खुश हो, जब नहीं है तो आप खुश नहीं है 1 तरीके से अटेचमेंट हो गया वे होनी चाहिए तो हैप्पीनेस नहीं है फिर जो मैंने आपको बताया था कि हमारी कुछ कोर वैल्यूज भी होती है पी आई पी होती है ऐसे वो अगर आपने आइडेंटिफाई कर लिया और वो आप अगर फॉलो कर रहे हो तो भी 1 सस्टेंड हैप्पीनेस आपको मिल जाती है कुछ कुछ जगह पर हमें काम करना पड़ेगा जैसे की हमें समझना पड़ेगा 1 तो है ऑटोनॉमी जो मैंने अभी बताया था कि फ्री फ्रॉम द फियर ऑफ बी जज तो हमारे अन्दर ये फियर रहता है कि लोग क्या बोलेंगे तो वो फिर से हमें आजादी चाहिए सेकंड है सेल्फ एक्सेप्टेंस लोग क्या करते हैं कि अपनी अच्छा योग को एक्सेप्ट कर लेते हैं लेकिन अपनी बुराई योग एक्सेप्ट नहीं कर पाते है जैसे की म नोट गुड पब्लिक स्पीकर तो मैं 1 अच्छा ट्रेनर नहीं बन पाऊंगा या जो भी रोल में मैं काम कर रहा हो सो आम नोट गुड प्रोफेशनल तो लोग क्या करते है की ऐसे करके मतलब अपने आप से प्यार नहीं कर रहे। अगर आप अपने अच्छे योग को एक्सेप्ट कर रे हो तो अपनी बुराई को भी एक्सेप्ट करो न पहले तो एक्सेप्ट कर लो अच्छा ठीक है। 10 मई एरिया ऑफ इम्प्लूमेंटऔरफिर जो भी आपके पास रिसोर्सिस है उसको करके उसका इम्प्रूवमेंट आप स्टार्ट कर।