A Hindi monologue on productivity guilt: the conflict between wanting creative work and being stuck in a toxic job with good pay. Micromanagement and lack of creative freedom leave you unhappy and guilty, even when salary and promotions are solid.
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इसको बोलते हैं प्रोडक्टिविटी गिल्ट जो की प्रकाशन समझाते है की प्रोडक्टिविटी गिल्ट भी आता है कि मुझे यह काम करना है लेकिन मैं नहीं कर पा रहा हूँ और वो मेरी कोर वैल्यूज में है, बहुत सारे देखे है मेरा एग्जाम फीड और क्रिएटिविटी बहुत सारे प्रोफेशनल है जिनके कोर वैल्यूज में फीड है और क्रिएटिविटी है तो जॉब अच्छा चल रहा है सैलरी अच्छा है लेकिन इसका जो कल्चर है वो टॉक्सिक है मेरा तो फिलहाल बहुत अच्छा था, मैनेजमेंट भी अच्छा था और फीडम भी थी, सब कुछ था तो माइक्रो मैनेजमेंट चल रहा होता है उनको फीडम नहीं मिलती है और वो क्रिएटिविटी से जो काम करना चाहते है वो क्रिएटिविटी नहीं मिल रही है बल्कि सैलरी अच्छी है, प्रमोशन, पोजीशन सब कुछ है अभी वो काम नहीं कर रहे तो वो ऑफिस में सिर्फ़ खुश नहीं है ऐसा नहीं है, खुश नहीं है और गिल्टी भी है।